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हार्ट अटैक से पीड़ित वरिष्ठ पत्रकार का कुछ यूं छलका दर्द
ग्रामीण क्षेत्र के पत्रकारों के लिए सरकारी स्तर पर कल्याणकारी योजनाएं शुरू करने की उठाई मांग
समाचार4मीडिया ब्यूरो 6 years ago
पत्रकारों को अपने काम के दौरान तमाम तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। एक जुझारु पत्रकार इन सब परेशानियों से जूझते हुए अपनी कलम को कभी रुकने नहीं देता और लगातार अपने ‘मिशन’ में जुटा रहता है। लेकिन जब कभी पत्रकार पर संकट आता है, तो प्राय: देखने में आता है कि वह अकेला पड़ जाता है और उसके हकों की लड़ाई लड़ने के लिए कोई आगे नहीं आता है।
कुछ ऐसा ही हो रहा है आगरा के वरिष्ठ पत्रकार शंकर देव तिवारी के साथ जिन्होंने अपनी जिंदगी के करीब 35 साल पत्रकारिता के नाम कर दिए, लेकिन अब जब हार्ट अटैक के कारण वे बिस्तर पर हैं, तब उन्हें किसी भी तरह की मदद नहीं मिल रही है।
शंकर देव तिवारी का इस बारे में कहना है कि सरकार को ग्रामीण पत्रकारों की मदद के लिए सरकारी योजनाएं बनानी चाहिए, ताकि किसी भी तरह का संकट आने पर वे उसका सामना कर सकें। उनका कहना है कि ग्रामीण क्षेत्र के पत्रकारों को भविष्य निधि जैसी किसी तरह की सुविधा नहीं मिलती है, ऐसे में गंभीर बीमारी अथवा अन्य विपदा के समय काफी मुश्किल होती है। शंकर देव तिवारी के अनुसार, आजकल पत्रकारिता एक मिशन नहीं रह गई है, शब्द बेकार हो गए हैं और पत्रकारिता की आड़ में कुछ लोग अपने हित साधने में लगे हैं।
गौरतलब है कि शंकर देव तिवारी ने वर्ष 1984 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत ‘विकासशील भारत’ के साथ की थी। वर्ष 1986 में यहां से अलविदा कहकर उन्होंने ‘अमर उजाला’ से अपनी नई पारी शुरू की और 1993 तक यहां अपनी सेवाएं दीं। इसके बाद वे ‘आज’ से जुड़ गए। इस अखबार के साथ वह करीब 12 साल तक जुड़े रहे और अपनी जिम्मेदारियों को बखूबी निभाया।
वर्ष 2005 में ‘आज’ के बाद उन्होंने ‘दैनिक भास्कर’ का दामन थाम लिया और करीब तीन साल की पारी के दौरान ग्वालियर व धौलपुर में ब्यूरो चीफ के पद पर अपनी भूमिका का निर्वाह किया। 2008 में उन्होंने ‘अमर उजाला’ में वापसी की और करीब दो साल तक अपनी जिम्मेदारी निभाई।
शंकर देव तिवारी का सफर यहीं नहीं रुका। वर्ष 2010 में वे ‘बीपीएन टाइम्स’ से बतौर संपादक जुड़ गए करीब 2016 तक यहां अपनी सेवाएं दीं। इसके बाद उन्होंने ‘सी एक्सप्रेस’ में बतौर न्यूज एडिटर अपनी जिम्मेदारी संभाली। 14 फरवरी 2018 को उन्हें आगरा में बतौर रेजिडेंट एडिटर ‘जनसंदेश टाइम्स’ अखबार की लॉन्चिंग का जिम्मा सौंपा गया था। इन दिनों वे समाचार संपादक के रूप में इस अखबार की लॉन्चिंग की तैयारियों में जुटे हुए थे। इसी बीच 28 अगस्त 2019 को उन्हें हार्ट अटैक आ गया और उन्हें अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। फिलहाल ग्लोबल अस्पताल के डॉ. सुवीर गुप्ता की देखरेख में उनका इलाज चल रहा है और वे बेड रेस्ट पर हैं।
ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन की उत्तर प्रदेश इकाई के उपाध्यक्ष शंकर देव तिवारी का कहना है कि उन्हें बीमारी की हालत में न किसी संस्थान से और न ही सरकार से किसी तरह की आर्थिक मदद मिली। इलाज-दवाओं का खर्च सब निजी तौर पर करना पड़ा। उन्होंने मांग उठाई है कि सरकार को इस बारे में आगे आकर ग्रामीण पत्रकारों के भले के लिए कुछ कल्याणकारी योजनाएं शुरू करनी चाहिए, ताकि उनकी तरह किसी और पत्रकार को इस तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
टैग्स शंकर देव तिवारी सरकार से मांग