पीएम के गैर-राजनीतिक इंटरव्यू पर रवीश कुमार का अ-पॉलिटिकल प्राइम टाइम

मौसम चुनावी है, ऊपर से सूरज आग बरसा रहा है और नीचे नेताओं के बोल

Last Modified:
Friday, 26 April, 2019
Ravish-Modi

मौसम चुनावी है, ऊपर से सूरज आग बरसा रहा है और नीचे नेताओं के बोल। और बीच में हम-आप जैसे आम लोग हैं, जो समझ नहीं पा रहे हैं कि यह सबकुछ क्यों, कैसे और किसलिए हो रहा है? इस ‘क्यों’ के बीच हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पहला गैर-राजनीतिक इंटरव्यू सामने आया है। इस इंटरव्यू को निःसंदेह अ-पॉलिटिकल कहा जा सकता है, क्योंकि इसकी शुरुआत ही आम से हुई है। अक्षय कुमार इस इंटरव्यू के साथ पत्रकार की भूमिका में आ गए हैं, यानी संभव है कि आने वाले दिनों में पत्रकारों के हाथों से ऐसे टफ सवाल पूछने के मौके जाते रहेंगे कि ‘क्या आप आम खाते हैं।’ हर तरफ इस इंटरव्यू की चर्चा है, लेकिन एक चर्चा यह भी है कि क्या वाकई इस चर्चा की ज़रूरत थी? यही सवाल वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार ने भी पूछा है। हालांकि उनके पूछने का तरीका थोड़ा जुदा है। वैसे तो रवीश जुदा ही बातें करते हैं, मगर इस बार उनका जुदा होना सार्थक लगता है। क्योंकि इस गैर-राजनीतिक या अ-पॉलिटिकल इंटरव्यू पर सवाल सीधे शब्दों में नहीं उठाये जा सकते थे, यदि उठाये भी जाते तो उतना आनंद नहीं मिलता, जितना आनंद इंटरव्यू देखने पर मिलता है। लिहाजा रवीश ने ‘लोहा ही लोहे को काटता’ है वाली कहावत चरितार्थ की है।

रवीश कुमार ने पीएम के गैर-राजनीतिक इंटरव्यू के मुकाबले के लिए गैर-राजनीतिक प्राइम टाइम किया। यानी एक ऐसा प्राइम टाइम, जिससे राजनीति उतनी ही दूर है, जितनी गुड से मक्खी और यह उन्होंने शो की शुरुआत में ही साफ़ कर दिया। उन्होंने कहा, ‘आज मैं ग़ैर राजनीतिक बात करना चाहता हूं। राजनीतिक बात नहीं करना चाहता। राजनीतिक बात से बोर हो गया हूं। सोचा अ-पॉलिटिकल कुछ किया जाए, ऐसा किया जाए जिसमें पॉलिटिक्स न आए। चुनाव बहुत लंबा हो गया है। रिपोर्टर थक गए हैं, कुछ रिपोर्टर बाहर से मोदी-मोदी नहीं पकड़ पाए, लौट आए। एडिटर ने बजट का हिसाब मांगा तो सर झुका लिया, फिर दूसरे रिपोर्टर भेजे गए। उन्होंने ज़मीन पर कान लगाया। अंडर करंट सुन लिया, ये चेंज है 2019 का। करंट अंडरग्राउंड है। लहर की जगह अंडर करंट आ गया है। लू ऊपर चलती है, अंडर करंट नीचे चलता है, तो सोचा कि जब राजनीति, राजनीति के मौसम में नहीं हो रही है तो इस मौसम में हम राजनीति से हट जाते हैं। कुछ अलग करते हैं। आम खाते हैं पर आम कैसे खाते हैं। दशहरी और चौसा तो चूस कर, चबा कर खा लेते हैं मगर मालदा को चम्मच से ही खाइये। कुछ न समझ आए तो सफेदा ही सही। मैंगों शेक चलेगा, सफेदा मुझे पसंद नहीं है पर क्या करें। आम है, बुरा लग सकता है। राजा के सामने कभी नहीं कहना चाहिए कि वो मुझे पसंद नहीं है। वो का मतलब सफेदा आम’।

प्राइम टाइम में रवीश गैर-राजनीतिक रूप से अपनी उस टीस को भी बयां कर गए, जो अक्सर उन्हें दर्द देती होगी। फिर भले ही वो साफ़ तौर पर इसकी बात न करें। वैसे, ये टीस तो हर उस पत्रकार के मन में होगी, जो पीएम या उनके जैसी बड़ी शख्सियतों से सवाल पूछने से महरूम हैं। लेकिन रवीश की टीस ज्यादा है, क्योंकि वो उस मुकाम पर हैं जहां से उनके और शख्सियतों के बीच का फासला ज्यादा नहीं है। और जब फासला कम हो तो न मिल पाने का दुःख ज्यादा सालता है। इसलिए उन्होंने अपने शो को आगे बढ़ाते हुए कहा ‘आप सोच रहे होंगे कि मैं ग़ैर राजनीतिक बातें क्यों कर रहा हूं? क्या करूं। चुनाव के समय जब प्रधानमंत्री ग़ैर राजनीतिक बातें कर सकते हैं, जब वे क्रिएटिव होकर गैर राजनीतिक हो सकते हैं तो हम क्यों नहीं हो सकते। प्रधानमंत्री चैलेंजर हैं। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा है। लोगों ने कहा कि आप कुमार को इंटरव्यू दें, वे अक्षय कुमार को ले आए। गैर राजनीतिक इंटरव्यू। ये न होता तो मौसमे चुनाव में आम का ज़िक्र न आता’।

अपने जुदा अंदाज़ की वजह से रवीश कुमार को भले ही भाजपा विरोधी चश्मे से देखा जाता हो, लेकिन चश्मा उतारने पर उनके सवाल वाजिब भी लगते हैं। जैसे ‘राजनीति के इस घमासान में गैर राजनीतिक क्या होता है। वे उम्मीदवार हैं। उनकी पार्टी चुनाव मैदान में है। इसके बाद में प्रधानमंत्री ही गैर राजनीतिक हो सकते हैं। इससे चर्चा तो हो गई। इंटरव्यू को स्पेस मिला, वैसे भी मिलना था। उनका भाषण हो या इंटरव्यू हो, खूब दिखाया जाता है। विपक्ष के नेता भी आम खाते हैं। वे भी बता सकते थे। कोई चैनल वाला नहीं दिखाएगा तो यूट्यूब पर डाल सकते थे। मतलब अक्षय कुमार के इंटरव्यू से प्रॉब्लम क्यों हैं। कहीं प्रधानमंत्री ने विपक्ष के नेताओं का हल्का फुल्का पुराना इंटरव्यू निकाल कर ट्वीट कर दिया तो’। रवीश शब्दों के जादूगर हैं और बड़ी ही सरलता से शब्दों को पिरोकर एक ऐसा वाक्य बना जाते हैं, जो चाशनी में लिपटे करेले जैसा स्वाद देता है।

इस चुनाव में मुद्दों से ज्यादा राजनीति हावी है। वैसे राजनीति में ‘राजनीति’ के हावी न होने की उम्मीद लगाना भी व्यर्थ है, लेकिन इस बार माहौल सबसे अलग है। इसलिए रवीश ने भी इस गैर-राजनीतिक इंटरव्यू को ध्यान में रखते हुए अलग ही अंदाज़ में ‘हावी’ को परिभाषित किया है। मसलन, ‘सच यही है कि इस चुनाव में मुद्दों ने नमस्कार कर लिया है। मुद्दे शिमला चले गए हैं। इसलिए हमने ट्राई किया कि राजनीति से हट कर कुछ किया जाए। वो तो उन चुनावों की बात थी जब जनता मुद्दों की बात करती थी। ग़रीबी, भुखमरी, बेरोज़गारी, दीवारों पर नारे लिखे होते थे। सबको काम, सबको नाम। अब अचानक हर कोई मुद्दा मुक्त फील करने लगा है। आंधी आती है, शेर आता है मगर मुद्दा ही नहीं आता है। इतनी राजनीति हो गई है कि राजनीति से हट कर कुछ करने का मन कर रहा है। किसी को राजनीति नहीं चाहिए। बीमा का पैसा नहीं मिल रहा है, नहीं चाहिए। अनाज का दाम नहीं मिल रहा है नहीं चाहिए। फीस महंगी है, दे देंगे। स्कूल वाले और मांगेंगे तो और दे देंगे। नौकरी नहीं चाहिए। हम बेरोज़गार रह लेंगे लेकिन आप हमें मुद्दा न दें। इसलिए थोड़ा राजनीति से हटकर हो जाए। ये क्राइसिस कार्यकर्ता का भी है। पांच साल काम करो, फिर अचानक विजेंद्र या गौतम गंभीर का स्वागत करो। पिछली बार जिनसे हारे थे, इस बार उनका स्वागत करो। तो कार्यकर्ता भी राजनीति से ऊब गया है। इनका कब स्वागत करना है, कब विरोध करना है, बेहद डिफिकल्ट क्वेश्चन है। इसलिए राजनीति से हट कर कुछ किया जाए’।

प्रधानमंत्री मोदी के गैर-राजनीतिक इंटरव्यू का इससे बेहतर अ-पॉलिटिकल पोस्टमार्टम नहीं हो सकता। रवीश कुमार ने वो सबकुछ कहा, जो वह हमेशा कहते हैं लेकिन इस बार वो अ-पॉलिटिकल हो गया। यही रवीश की खासियत है, उन्हें पता है कि किसका कैसे जवाब देना है और किस अंदाज़ में देना है। फ़िलहाल जितनी चर्चा इस बात की हो रही है कि क्या पीएम और अक्षय की चर्चा ज़रूरी थी, उतनी ही चर्चा अब इस पर भी शुरू होगी कि क्या रवीश का प्राइम टाइम गैर-राजनीतिक था? और यही वो चाहते भी हैं।

रवीश कुमार का प्राइम टाइम आप यहां देख सकते हैं-

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TRAI के साथ बैठक में उठे ब्रॉडकास्टिंग सेक्टर से जुड़े ये अहम मुद्दे

ट्राई के चेयरमैन पीडी वाघेला और सचिव एसके गुप्ता की मौजूदगी में हुई इस बैठक में तमाम ब्रॉडकास्टिंग कंपनियों के सीईओ और प्रबंधन से जुड़े शीर्ष अधिकारियों ने आगामी वित्तीय वर्ष की योजनाओं पर चर्चा की।  

Last Modified:
Tuesday, 02 March, 2021
TRAI

‘भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण’ (TRAI) ने सोमवार को तमाम ब्रॉडकास्टिंग कंपनियों के सीईओ और प्रबंधन से जुड़े शीर्ष अधिकारियों के साथ एक बैठक में आगामी वित्तीय वर्ष की योजनाओं पर चर्चा की।   

ट्राई के चेयरमैन पीडी वाघेला और सचिव एसके गुप्ता की मौजूदगी में हुई इस बैठक में डिश टीवी के चीफ मैनेजिंग डायरेक्टर जवाहर गोयल, टाटा स्काई के एमडी और सीईओ हरित नागपाल, डेन नेटवर्क्स के सीईओ एसएन शर्मा, सिटी नेटवर्क्स के सीईओ अनिल मल्होत्रा और एबीपी नेटवर्क के सीईओ अविनाश पांडेय भी शामिल हुए।  

बताया जाता है कि बैठक में डिस्ट्रीब्यूशन प्लेटफॉर्म्स ऑपरेटर्स (DPOs) सिस्टम के ऑडिट जैसे-कंडीशनल एक्सेस सिस्टम (CAS) और सबस्क्राइबर मैनेजमेंट सिस्टम (SMS) पर भी चर्चा हुई। ब्रॉडकास्टर्स इस बात से नाखुश थे कि डिस्ट्रीब्यूशन प्लेटफॉर्म्स ऑपरेटर्स ऑडिट संबंधी गाइडलाइंस का पालन नहीं कर रहे हैं। इसके अलावा नेटवर्क कैपेसिटी फीस (NCF) को दो साल तक अपरिवर्तित रहने के मुद्दे पर भी चर्चा हुई।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस बारे में ट्राई के सचिव एसके गुप्ता का कहना था कि यह हर साल की तरह होने वाली एक नियमित बैठक थी, जिसमें ट्राई द्वारा स्टेकहोल्डर्स से तमाम मुद्दों पर चर्चा की जाती है। वहीं, टाटा स्काई के एमडी और सीईओ हरित नागपाल का भी कहना है कि यह बैठक इंडस्ट्री से जुड़े मामलों पर चर्चा के लिए आयोजित की गई थी।

नाम न छापने की शर्त पर एक केबल डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी के हेड ने बताया, ‘यह हर साल होने वाली एक नियमित बैठक थी, जिसमें आगामी वित्तीय वर्ष में उठाए जाने वाले कदमों को लेकर चर्चा की जाती है। ढाई से तीन घंटे चली इस बैठक में ब्रॉडकास्टर्स ने ऑडिट संबंधी मुद्दे उठाए जबकि डिस्ट्रीब्यूशन प्लेटफॉर्म्स ऑपरेटर्स ने अनुपालन (compliance) संबंधी मुद्दों पर अपनी बात रखी।’ एक अन्य प्रमुख टीवी नेटवर्क के सीनियर एग्जिक्यूटिव के अनुसार, यह बैठक काफी अच्छी रही और इसमें सभी स्टेकहोल्डर्स के बीच स्वस्थ चर्चा हुई।

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Tam Media Research में इस बड़े पद से विनीता शाह ने दिया इस्तीफा

16 साल से ज्यादा समय से इस कंपनी में अपनी जिम्मेदारी संभाल रही थीं विनीता शाह

Last Modified:
Tuesday, 02 March, 2021
Tam Media

‘टैम मीडिया रिसर्च’ (TAM Media Research) की सीनियर वाइस प्रेजिडेंट (TAM Axis & TAM Sports) विनीता शाह ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। वह 16 साल से ज्यादा समय से इस कंपनी से जुड़ी हुई थीं।

‘टैम मीडिया रिसर्च’ के साथ अपने इतने लंबे सफर में उन्होंने एनालिटिक्स, टैम स्पोर्ट्स और कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस पोर्टफोलियो की जिम्मेदारी संभाली।

विनीत शाह को मार्केटिंग, बिजनेस डेवलपमेंट, कंसल्टेटिव सेल्स और एनालिटिक्स के क्षेत्र में काम करने का काफी अनुभव है। वर्ष 2004 में टैम के साथ पारी शुरू करने से पहले विनीता Group M, Grey और McCann के साथ भी काम कर चुकी हैं।

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TRP Case: BARC इंडिया के पूर्व CEO पार्थो दासगुप्ता को बॉम्बे हाई कोर्ट ने दी बड़ी राहत

टीआरपी (TRP) से छेड़छाड़ के मामले में गिरफ्तार ‘ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल’ इंडिया के पूर्व सीईओ पार्थो दासगुप्ता को बॉम्बे हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है।

Last Modified:
Tuesday, 02 March, 2021
Partho Dasgupta

टीआरपी (TRP) से छेड़छाड़ के मामले में गिरफ्तार ‘ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल’ (BARC) इंडिया के पूर्व चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर (CEO) पार्थो दासगुप्ता को बॉम्बे हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। दरअसल, बॉम्बे हाई कोर्ट ने पार्थो दासगुप्ता की अर्जी को मंजूर करते हुए उन्हें जमानत दे दी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दासगुप्ता को दो लाख रुपये के पीआर बॉन्ड के भुगतान के बाद जमानत दी गई है। बता दें कि जस्टिस पीडी नाइक की बेंच ने करीब दो सप्ताह पहले दासगुप्ता की जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया था। सेशन कोर्ट से जमानत अर्जी खारिज होने के बाद दासगुप्ता ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

गौरतलब है कि टीआरपी से छेड़छाड़ के मामले में मुंबई पुलिस ने 24 दिसंबर 2020 को पार्थो दासगुप्ता को गिरफ्तार किया था। टीआरपी घोटाले में उनकी 15वीं गिरफ्तारी थी। टीआरपी से छेड़छाड़ का मामला अक्टूबर में तब सामने आया था, जब ‘ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल’ (BARC) द्वारा देश में टीवी दर्शकों की संख्या मापने के लिए घरेलू पैनल के प्रबंधन का जिम्मा संभालने वाली एजेंसी ‘हंसा रिसर्च’ (Hansa Research) के अधिकारी नितिन देवकर ने एक शिकायत दर्ज की, जिसमें कहा गया था जिन घरों में बार-ओ-मीटर लगे हैं, उन घरों को भुगतान करके कुछ टीवी चैनल्स दर्शकों की संख्या में हेरफेर कर रहे हैं।

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अब इन वरिष्ठ अफसर ने संभाली PIB की कमान

प्रेस इनफॉर्मेशन ब्यूरो (पीआईबी) के प्रधान महानिदेशक पद पर भारतीय सूचना सेवा के वरिष्ठ अफसर जयदीप भटनागर को नियुक्त किया गया है।

Last Modified:
Tuesday, 02 March, 2021
Jaideep-Bhatnagar575

प्रेस इनफॉर्मेशन ब्यूरो (पीआईबी) के प्रधान महानिदेशक पद पर भारतीय सूचना सेवा के वरिष्ठ अफसर जयदीप भटनागर को नियुक्त किया गया है। उन्होंने सोमवार (28 फरवरी 2021) को निवर्तमान प्रधान महानिदेशक कुलदीप सिंह धतवालिया से पदभार ग्रहण किया।

भटनागर भारतीय सूचना सेवा के 1986 बैच के अधिकारी हैं। इससे पहले वह दूरदर्शन न्यूज में कमर्शियल्स, सेल्स व मार्केटिंग डिविजन के प्रमुख रहे हैं।

भटनागर प्रसार भारती के विशेष संवाददाता के तौर पर पश्चिम एशिया में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। इस दौरान उन्होंने 20 देशों को कवर किया। इसके बाद वे आकाशवाणी के समाचार सेवा प्रभाग के प्रमुख रहे।

प्रेस इनफॉर्मेशन ब्यूरो के प्रधान महानिदेशक के दायित्व से पहले भटनागर पीआईबी में विभिन्न पदों पर छह वर्षों तक रहे हैं। भटनागर ने कुलदीप सिंह धतवालिया के 28 फरवरी 2021 को सेवानिवृत्त होने के बाद कार्यभार संभाला है।

 

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9X Media से जुड़े आलोक नायर, निभाएंगे यह बड़ी जिम्मेदारी

आलोक नायर पूर्व में ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’, ‘नेटवर्क18’ और ‘ब्लूमबर्ग’ जैसे प्रतिष्ठित मीडिया ब्रैंड्स में विभिन्न पदों पर अपनी जिम्मेदारी निभा चुके हैं।

Last Modified:
Monday, 01 March, 2021
Alok Nair

म्यूजिक टेलिविजन नेटवर्क ‘9एक्स मीडिया’ (9X Media) ने आलोक नायर को चीफ रेवेन्यू ऑफिसर के पद पर नियुक्त किया है। वह पवन जेलखानी के स्थान पर यह जिम्मेदारी संभालेंगे, जिन्होंने पिछले दिनों अपनी एंटरप्रिन्योरशिप पारी शुरू करने के लिए यहां से इस्तीफा दे दिया है। आलोक नायर ‘9एक्स मीडिया’ के मैनेजिंग डायरेक्टर प्रदीप गुहा को रिपोर्ट करेंगे। नेटवर्क को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए आलोक नायर ‘9एक्स मीडिया’ की एग्जिक्यूटिव टीम और बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के साथ मिलकर काम करेंगे।  

आलोक को मीडिया और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में काम करने का काफी अनुभव है। पूर्व में वह ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’, ‘नेटवर्क18’ और ‘ब्लूमबर्ग’ जैसे प्रतिष्ठित मीडिया ब्रैंड्स में विभिन्न पदों पर अपनी जिम्मेदारी निभा चुके हैं।  

आलोक नायर की नियुक्ति के बारे में प्रदीप गुहा का कहना है, ‘महामारी के कारण तमाम उद्धोग धंधे प्रभावित हुए हैं। 9X मीडिया में हमने नई वास्तविकता को अपनाने और प्रतिकूलताओं के ढेर में छिपे अवसरों को तलाश करने के लिए कमर कस ली है। आलोक की नियुक्ति इसी स्ट्रैटेजी का हिस्सा है और कंपनी को उनके अनुभवों का काफी लाभ मिलेगा।’

वहीं, आलोक नायर का कहना है, ‘9X मीडिया की युवा और प्रतिभाशाली टीम में शामिल होने पर मैं बहुत खुश हूं। मैं प्रदीप गुहा के साथ काम करने को लेकर काफी उत्सुक हूं और पवन जेलखानी को उनके भविष्य के लिए शुभकामनाएं देता हूं।’

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चर्चित पत्रकार जमाल खगोशी की हत्या के मामले में सामने आई ये चौंकाने वाली रिपोर्ट

अंग्रेजी अखबार ‘वॉशिंगटन पोस्ट’ के पत्रकार जमाल खशोगी की हत्या के मामले में अमेरिकी प्रशासन ने बड़ा खुलासा किया है। वहीं, सऊदी की सरकार ने इस रिपोर्ट को खारिज किया है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 27 February, 2021
Last Modified:
Saturday, 27 February, 2021
Jamal Khashoggi

अंग्रेजी अखबार ‘वॉशिंगटन पोस्ट’ के पत्रकार जमाल खशोगी की हत्या के मामले में अमेरिकी प्रशासन ने बड़ा खुलासा किया है। दरअसल, अमेरिकी खुफिया विभाग की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सऊदी अरब के युवराज मोहम्मद बिन सलमान ने ही निर्वासन में रह रहे सऊदी पत्रकार जमाल खशोगी की हत्या की मंज़ूरी दी थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बाइडन प्रशासन ने शुक्रवार को जारी एक खुफिया रिपोर्ट में कहा है कि सऊदी युवराज ने उस योजना को अपनी सहमति दी थी, जिसके तहत अमेरिका में रह रहे खशोगी को या तो जिंदा पकड़ने या मारने का फैसला किया गया था। यह पहला मौका है जब अमेरिका ने खशोगी की हत्या के लिए सीधे पर तौर सऊदी क्राउन प्रिंस का नाम लिया है, हालांकि सऊदी युवराज इनकार करते रहे हैं कि उन्होंने खशोगी की हत्या के आदेश दिए थे।

वहीं, सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय ने इस रिपोर्ट को लेकर बयान जारी किया है। इस बयान में कहा गया है, 'सऊदी की सरकार जमाल खशोगी के मामले में अपमानजनक और गलत निष्कर्ष तक पहुंचने वाली अमेरिकी रिपोर्ट को सिरे से खारिज करती है। हम इस रिपोर्ट को अस्वीकार करते हैं। इस रिपोर्ट में गलत निष्कर्ष निकाला गया है।'

गौरतलब है कि सऊदी अरब के शहजादे के आलोचक रहे खशोगी की दो अक्टूबर 2018 में उस समय हत्या कर दी गई थी, जब वह अपनी मंगेतर से शादी रचाने के लिए आवश्यक कागजात लेने इस्तांबुल में अपने देश के वाणिज्य दूतावास में गए थे। इसके बाद से वह लापता हो गए थे। शुरू में उनके लापता होने पर रहस्य बन गया था। तुर्की के अधिकारियों ने सऊदी अरब पर उनकी हत्या करने और उनके शव को ठिकाने लगा देने का आरोप लगाया था। हालांकि सऊदी अरब ने बाद में यह माना कि खशोगी की हत्या की गई, लेकिन उनकी हत्या में खुद की किसी संलिप्तता से इनकार किया था।

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सोनी म्यूजिक इंडिया से जुड़ीं संगीता अय्यर, निभाएंगी यह भूमिका

करीब दो दशक के अपने करियर में संगीता रेडियो, रिटेल और एडवर्टाइजिंग के क्षेत्र में अपनी प्रतिभा दिखा चुकी हैं।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 26 February, 2021
Last Modified:
Friday, 26 February, 2021
Sangeetha Aiyer

‘सोनी म्यूजिक इंडिया’  (SMI) ने संगीता अय्यर को डायरेक्टर (प्रमोशंस) के पद पर नियुक्त करने की घोषणा की है। अपनी इस भूमिका में संगीता अय्यर मीडिया चैनल्स में ‘सोनी म्यूजिक इंडिया’  की प्रमोशन स्ट्रैटेजी और एक्टिविटीज का नेतृत्व करेंगी। वह ‘सोनी म्यूजिक इंडिया’  के मैनेजिंग डायरेक्टर रजत कक्कड़  को रिपोर्ट करेंगी।

इस बारे में रजत कक्कड़ का कहना है, ‘कंपनी में संगीता के शामिल होने पर हम बहुत उत्साहित हैं। संगीता को देश के उभरते हुए मीडिया परिदृश्य की गहरी समझ है और कंपनी को उनके अनुभवों का काफी लाभ मिलेगा।’

वहीं, संगीता अय्यर का कहना है, ‘सोनी म्यूजिक इंडिया और इसकी बेहतरीन टीम में शामिल होने पर मैं बहुत खुश हूं। सोनी म्यूजिक के नेतृत्व में भारतीय म्यूजिक इंडस्ट्री एक नए युग का निर्माण करने में जुटी है। यह देश भर में तमाम शैलियों और भाषाओं में गहरी भागीदारी प्रदान करने के साथ ही कलाकारों और प्रशंसकों के लिए आकर्षक कंटेंट प्रदान करती है।’

करीब दो दशक के अपने करियर में संगीता रेडियो, रिटेल और एडवर्टाइजिंग के क्षेत्र में अपनी प्रतिभा दिखा चुकी हैं। पूर्व में वह ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’, ‘रिलायंस मीडिया नेटवर्क’ और ‘स्टार नेटवर्क’ जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ काम कर चुकी हैं।

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सोशल मीडिया और OTT प्लेटफॉर्म्स पर सरकार ने कसी लगाम, जारी कीं ये गाइडलाइंस

केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर और रविशंकर प्रसाद ने गुरुवार की दोपहर आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसकी घोषणा की।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 25 February, 2021
Last Modified:
Thursday, 25 February, 2021
OTT

केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया और ओवर-द-टॉप (OTT) प्‍लेटफॉर्म्‍स के लिए गुरुवार को गाइडलाइंस जारी कर दी हैं। केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर और रविशंकर प्रसाद ने गुरुवार की दोपहर आयोजित एक प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में इसकी घोषणा की। नई गाइडलाइंस के दायरे में फेसबुक, ट्विटर जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्‍स और नेटफ्लिकस, अमेजॉन प्राइम और हॉटस्‍टार जैसे ओटीटी प्‍लेटफॉर्म्‍स आएंगे।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस मौके पर केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर का कहना था, 'सरकार का मानना है कि मीडिया प्‍लेटफॉर्म्‍स के लिए एक लेवल-प्‍लेइंग फील्‍ड होना चाहिए इसलिए कुछ नियमों का पालन करना पड़ेगा। लोगों की मांग भी बहुत थी।' प्रकाश जावड़ेकर ने कहा जिस तरह फिल्मों के लिए सेंसर बोर्ड हैं, टीवी के लिए अलग काउंसिल बना है उसी तरह ओटीटी के लिए भी नियम लाए जा रहे हैं। लगातार मिल रही शिकायतों के बाद सरकार ने नए नियम लागू करने पर विचार किया है। उनका कहना था कि ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के पास किसी तरह का कोई बंधन नहीं है। इसलिए तमाम आपत्तिजनक सामाग्रियां बिना किसी रोकटोक के दिखाई जाती हैं। इसी के मद्दे नजर सरकार को ये लगता है कि सभी लोगों को कुछ नियमों का पालन करना होगा।

वहीं, रविशंकर प्रसाद का कहना था, ‘सोशल मीडिया कंपनियों का भारत में कारोबार करने के लिए स्‍वागत है। इसकी हम तारीफ करते हैं। व्‍यापार करें और पैसे कमांए। सरकार असहमति के अधिकार का सम्मान करती है लेकिन यह बेहद जरूरी है कि यूजर्स को सोशल मीडिया के दुरुपयोग को लेकर सवाल उठाने के लिए फोरम दिया जाए।’ प्रसाद ने कहा, ’हमारे पास कई शिकायतें आईं कि सोशल मीडिया पर मार्फ्ड तस्‍वीरें शेयर की जा रही हैं। आतंकी गतिविधियों के लिए इनका इस्‍तेमाल हो रहा है। सोशल मीडिया प्‍लेटफॉर्म्‍स के दुरुपयोग का मसला सिविल सोसायटी से लेकर संसद और सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है।’

सोशल मीडिया के लिए गाइडलाइंस

- इसमें दो तरह की कैटिगरी हैं: सोशल मीडिया इंटरमीडियरी और सिग्निफिकेंट सोशल मीडिया इंटरमीडियरी।

- सबको शिकायत निवारण व्यवस्था (ग्रीवांस रीड्रेसल मैकेनिज्‍म) बनानी पड़ेगी। 24 घंटे में शिकायत दर्ज करनी होगी और 14 दिन में निपटाना होगा।

- अगर यूजर्स खासकर महिलाओं के सम्‍मान से खिलवाड़ की शिकायत हुई तो 24 घंटें में कंटेंट हटाना होगा।

- सिग्निफिकेंड सोशल मीडिया को चीफ कम्‍प्‍लायंस ऑफिसर रखना होगा जो भारत का निवासी होगा।

- एक नोडल कॉन्‍टैक्‍ट पर्सन रखना होगा जो कानूनी एजेंसियों के चौबीसों घंटे संपर्क में रहेगा।

- मंथली कम्‍प्‍लायंस रिपोर्ट जारी करनी होगी।

- सोशल मीडिया पर कोई खुराफात सबसे पहले किसने की, इसके बारे में सोशल मीडिया कंपनी को बताना पड़ेगा।

- हर सोशल मीडिया कंपनी का भारत में एक पता होना चाहिए।

- हर सोशल मीडिया प्‍लेटफॉर्म के पास यूजर्स वेरिफिकेशन की व्‍यवस्‍था होनी चाहिए।

- सोशल मीडिया के लिए नियम आज से ही लागू हो जाएंगे। सिग्निफिकेंड सोशल मीडिया इंटरमीडियरी को तीन महीने का वक्‍त मिलेगा।

ओटीटी प्‍लेटफॉर्म्‍स के लिए गाइडलाइंस

- ओटीटी और डिजिटल न्‍यूज मीडिया को अपने बारे में विस्‍तृत जानकारी देनी होगी। रजिस्‍ट्रेशन अनिवार्य नहीं है।

- दोनों को ग्रीवांस रीड्रेसल सिस्‍टम लागू करना होगा। अगर गलती पाई गई तो खुद से रेगुलेट करना होगा।

- ओटीटी प्‍लेटफॉर्म्‍स को सेल्‍फ रेगुलेशन बॉडी बनानी होगी, जिसे सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज या कोई नामी हस्‍ती हेड करेगी।

- सेंसर बोर्ड की तरह ओटीटी पर भी उम्र के हिसाब से सर्टिफिकेशन की व्‍यवस्‍था हो। एथिक्‍स कोड टीवी, सिनेमा जैसा ही रहेगा।

- डिजिटल मीडिया पोर्टल्‍स को अफवाह और झूठ फैलाने का कोई अधिकार नहीं है।

गौरतलब है कि लंबे समय से नेटफ्लिक्स और अमेजॉन प्राइम जैसे ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को नियंत्रित करने पर बहस चल रही थी। पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को नियंत्रित करने की मांग करने वाली याचिका पर सुनवाई कर केंद्र सरकार से अब तक की गई कार्रवाइयों पर जवाब दाखिल करने को कहा था।

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने कहा था कि वह ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर कार्रवाई करने पर विचार कर रही है। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल संजय जैन ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि केंद्र सरकार ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को नियंत्रित करने के मुद्दे पर कुछ कदम उठाने पर विचार कर रही है।

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फर्जी पत्रकार का इस तरह फूटा भांडा, पुलिस ने दिखाया हवालात का रास्ता

पुलिस ने मध्य प्रदेश के दतिया जिले में एक फर्जी पत्रकार को गिरफ्तार किया है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 24 February, 2021
Last Modified:
Wednesday, 24 February, 2021
Arrest

पुलिस ने मध्य प्रदेश के दतिया जिले में एक फर्जी पत्रकार को गिरफ्तार किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पकड़ा गया फर्जी पत्रकार कई बड़े न्यूज चैनल्स और अखबारों के फर्जी आईडी बनवाकर क्षेत्र में अवैध रूप से वसूली कर रहा था।

आरोपी ने अपना एक होर्डिंग भी छपवाकर दतिया व्यापार मेले के बाहर लगा दिया था, जिसमें उसने खुद को मीडिया पार्टनर बताया था। अन्य पत्रकारों ने जब अपने चैनलों का नाम और फर्जी पत्रकार का नाम देखा तो कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज करा दी। मामला दर्ज होने के बाद पुलिस ने करीब 21 वर्षीय इस फर्जी पत्रकार को उसके घर से कई दस्तावेजों के साथ गिरफ्तार कर लिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रविवार देर रात स्थानीय पत्रकार ने राजघाट कॉलोनी महावीर वाटिका निवासी अनुज पुत्र अनिल गुप्ता पर फर्जी पत्रकार बनकर लोगों से अवैध वसूली करने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। एसपी अमन सिंह राठौड़ के निर्देश पर सोमवार को पुलिस ने आरोपी के घर दबिश देकर उसे गिरफ्तार कर लिया।

पूछताछ करने पर अनुज के पास कई चैनलों और अखबारों के साथ पीआरओ का लेटर फ्रेम में जड़ा हुआ मिला। कई युवक-युवतियों को पत्रकार बनाने संबंधी दस्तावेज व नियुक्ति पत्र भी आरोपी के घर से जब्त किए गए। पुलिस अनुज से पूछताछ कर रही है।

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Quint में रितु कपूर की इस पद पर नियुक्ति को शेयरहोल्डर्स ने दिखाई हरी झंडी

29 दिसंबर 2020 को राघव बहल ने कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर के पद से दे दिया था इस्तीफा

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 23 February, 2021
Last Modified:
Tuesday, 23 February, 2021
Ritu Kapur

डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म thequint.com के स्वामित्व वाली और संचालक कंपनी ‘क्विंट डिजिटल मीडिया’ (Quint Digital Media) को कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर और चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर के पद पर रितु कपूर को पुन: नामित (re-designate) किए जाने के प्रस्ताव को शेयरहोल्डर्स (Shareholders) की मंजूरी मिल गई है। इसके साथ ही कंपनी को वंदना मलिक को नॉन एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर के पद पर नियुक्त किए जाने के प्रस्ताव को भी शेयरहोल्डर्स से मंजूरी मिल गई है। यह नियुक्ति पांच साल के लिए होगी।

‘क्विंट डिजिटल मीडिया’ ने बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज को इस बारे में जानकारी दी है। बताया जाता है कि 20 जनवरी को एक मीटिंग में बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने रितु कपूर को कंपनी के एमडी और चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर पद पर नियुक्त किए जाने को अपनी मंजूरी प्रदान कर दी थी। इस निर्णय पर शेयरधारकों की मुहर लगनी बाकी थी।    

बता दें कि कंपनी ने 30 दिसंबर 2020 को जानकारी दी थी कि राघव बहल ने कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर के पद से इस्तीफा दे दिया है। कंपनी का कहना था कि 29 दिसंबर 2020 के बाद मैनेजिंग डायरेक्टर के पद से राघव बहल का इस्तीफा प्रभावी हो गया है। हालांकि, बहल कंपनी के बोर्ड में नॉन-एग्जिक्यूटिव प्रमोटर डायरेक्टर के रूप में कार्य करना जारी रखेंगे। 29 दिसंबर को कंपनी के एमडी राघव बहल के इस्तीफे के बाद क्विंट डिजिटल मीडिया की सीईओ रितु कपूर को एमडी का अतिरिक्त पद सौंपा गया था।

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