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तरुण तेजपाल की याचिका पर सुनवाई से अलग हुए जस्टिस एल नागेश्वर, बताई ये वजह

तरुण तेजपाल की याचिका पर सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस एल नागेश्वर राव (L Nageswara Rao) ने खुद को अलग कर लिया है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो 4 years ago

महिला साथी के साथ कथित यौन शोषण के मामले में घिरे तहलका पत्रिका के पूर्व एडिटर-इन-चीफ तरुण तेजपाल की याचिका पर सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस एल नागेश्वर राव (L Nageswara Rao) ने खुद को अलग कर लिया है। मामले की सुनवाई अब अगले हफ्ते दूसरी बेंच करेगी।

दरअसल,  शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने पत्रकार तरुण तेजपाल की उस याचिका पर सुनवाई करने की मंजूरी दे दी थी, जिसमें उन्होंने बंबई उच्च न्यायालय के एक आदेश को चुनौती दी है। तेजपाल ने 2013 के एक बलात्कार मामले में उन्हे बरी किए जाने को चुनौती देने वाली याचिका की सुनवाई बंद कमरे में करने का अनुरोध किया था, जिसे बंबई उच्च न्यायालय ने ठुकरा दिया था। 

मामला शुक्रवार को जस्टिस एल नागेश्वर राव और जस्टिस बीआर गवई की खंडपीठ के समक्ष रखा गया था। इसके बाद जस्टिस राव ने मामले से हटने का फैसला किया था। दरअसल, राव 2015 में इस मामले में गोवा सरकार की तरफ से पेश हुए थे। तब वह वरिष्ठ वकील थे। उन्होंने कहा कि मैं राज्य की तरफ से इस मामले में 2015 में पेश हुआ था। इसलिए इसे किसी अन्य बेंच के पास ले जाना चाहिए।

तरुण तेजपाल ने कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न अधिनियम के मामलों में बॉम्बे हाई कोर्ट के जस्टिस गौतम पटेल के हालिया आदेश का हवाला देते हुए मामले की बंद कमरे में सुनवाई की मांग की है। तेजपाल की दलील थी कि हर पार्टी को अपना पक्ष उचित तरीके से रखने का अधिकार है। याचिका में कहा गया है कि यह सही नहीं होगा कि वकीलों को इस इस वजह से अपनी दलीलों को कम करना पड़े कि कुछ प्रकाशन बिना मर्जी कुछ भी छाप देंगे। तेजपाल ने कहा कि सीआरपीसी की धारा 327 अब केवल एक वैधानिक दायित्व नहीं है, बल्कि एक मौलिक अधिकार बन गया है।

दरअसल पिछले साल नवंबर में तरुण तेजपाल ने बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसमें ये मांग की गई थी कि 2013 के दुष्कर्म मामले में उन्हें बरी करने को चुनौती देने वाली गोवा सरकार की याचिका की कार्यवाही बंद कमरे में की जाए, जिसे तब हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया था।

बता दें कि पिछले साल 21 मई को एक निचली अदालत ने ‘तहलका’ पत्रिका के पूर्व प्रधान संपादक तेजपाल को दुष्कर्म के मामले में बरी कर दिया था, जिसके बाद गोवा सरकार ने इसके खिलाफ हाई कोर्ट की गोवा पीठ में अपील दाखिल की थी।  अपील में कहा गया था कि इस फैसले के बाद पीड़िता को लगने वाले आघात, उसके चरित्र पर पर उठाए गए सवालों पर कोर्ट ने ध्यान नहीं दिया। कोर्ट में पीड़िता के सबूतों को नजरअंदाज किया गया। सरकार ने यह भी कहा कि अदालत ने बचाव पक्ष के सभी सबूतों को सच माना, जबकि पीड़िता के सबसे अहम सबूत, माफी वाले ई-मेल को नजरअंदाज कर दिया। इसके बाद तेजपाल ने इन-कैमरा हियरिंग के लिए हाई कोर्ट में याचिका लगाई। हालांकि, हाई कोर्ट ने यह याचिका खारिज कर दी थी।

58 साल के पूर्व पत्रकार पर 2013 में एक फाइव स्टार होटल की लिफ्ट में तहलिका मैगजीन के ही एक इवेंट के दौरान सहकर्मी के साथ रेप करने का आरोप लगाया गया था। शिकायतकर्ता के अनुसार, तेजपाल ने 7 नवंबर 2013 को होटल की लिफ्ट में महिला के साथ दुष्कर्म किया और अगले दिन फिर से उसका शोषण करने की कोशिश की। तेजपाल ने अदालत में इन आरोपों का खंडन किया और बाद में उन्हें बरी कर दिया गया। 


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