जितेन्द्र सोनी ने कहा कि जिस मिट्टी में मैं पला-बढ़ा, जिसकी भाषा की मिठास ने मेरे कानों में मिश्री घोल दी, जिस भाषा का इतना समृद्ध इतिहास, व्याकरण, शब्दकोश और साहित्य का भंडार है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।