PIB-RNI का नाम बदलेगा, प्रत्येक मंत्रालय में बनेगी नई डिवीजन!

दस सदस्यीय कमेटी की अध्यक्षता ब्यूरो ऑफ आउटरीच कम्युनिकेशन के डायरेक्टर जनरल सत्येंद्र प्रकाश कर रहे हैं। जल्द ही सरकार को सौंपी जाएगी ये रिपोर्ट

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 22 November, 2019
Last Modified:
Friday, 22 November, 2019
MIB

’भारतीय सूचना सेवा‘ (Indian Information Service) में पुनर्गठन की कवायद चल रही है। इसके लिए एक कमेटी का गठन भी किया गया है। न्यूज पोर्टल ‘द प्रिंट’ (The Print) में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, इस बारे में कमेटी ने अपनी कुछ सिफारिशें तैयार की हैं। इसमें ‘भारतीय सूचना सेवा’ का दायरा और बढ़ाकर दोगुने से ज्यादा करने, टॉप लेवल पर नई पोस्ट तैयार करने, विभिन्न मंत्रालयों में भारतीय सूचना सेवा के अधिकारियों की पोस्टिंग करने और न्यू मीडिया विंग्स स्थापित करने जैसी सिफारिशें शामिल हैं।

‘ब्यूरो ऑफ आउटरीच कम्युनिकेशन’ (BOC) के डायरेक्टर जनरल सत्येंद्र प्रकाश की अध्यक्षता में गठित ‘Cadre Review and Restructuring Committee’ (CRRC) में 10 सदस्य शामिल हैं। बताया जाता है कि कमेटी की ओर से जल्दी ही इन सिफारिशों को लेकर सरकार के समक्ष विस्तृत रिपोर्ट पेश की जाएगी। बता दें कि ब्‍यूरो ऑफ आउटरीच एंड कम्‍युनिकेशन, सूचना-प्रसारण मंत्रालय (MIB)  के तहत काम करने वाली मीडिया यूनिट है, जबकि भारतीय सूचना सेवा के अधिकारियों का चयन केंद्रीय लोक सेवा आयोग (UPSC) की ओर से आयोजित सिविल सर्विसेज परीक्षा के तहत किया जाता है। भारतीय सूचना सेवा सरकारी कम्युनिकेशन का प्रमुख आधार है और यह सरकार व मीडिया के बीच महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

नई मीडिया विंग्स (New Media Wings): कमेटी ने भारतीय सूचना सेवा में वर्तमान में 971 पदों के विपरीत इनकी संख्या बढ़ाकर 2244 करने का सुझाव रखा है, ताकि कम्युनिकेशन नेटवर्क को और बढ़ाया जा सके। इसके साथ ही आईआईएस अधिकारियों के शीर्ष पदों में बढ़ोतरी की भी सिफारिश की गई है। इनमें प्रिंसिपल डायरेक्टर जनरल लेवल की दो अतिरिक्त पोस्ट के अलावा डायरेक्टर जनरल लेवल की 4 पोस्ट और एडिशनल डायरेक्टर जनरल लेवल की 56 पोस्ट क्रिएट करने की सिफारिश भी शामिल है।      

इन सिफारिशों में कहा गया है कि 150 पोस्ट रिजर्व रखी जानी चाहिए, जो वर्तमान में नहीं है जबकि, ‘कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग’ की गाइडलाइंस के अनुसार ऐसा करना आवश्यक है। इन सिफारिशों में ग्रुप ए कैडर की लगभग आठ प्रतिशत पोस्ट को ट्रेनिंग, प्रोबेशन, डेपुटेशन और छुट्टी आदि के लिए रिजर्व रखा गया है, जबकि बी कैडर में यह संख्या पांच प्रतिशत रखी गई है।

कमेटी ने ‘Directorate General of Media Research and Training’ (DGMRT) के नाम से एक विंग गठित करने की सिफारिश भी की है। यह भी कहा गया है कि इस समय काम कर रही मीडिया यूनिट ‘Electronic Media Monitoring Centre’ (EMMC) और ‘New Media Wing’ (NMW) को आपस में मिला देना चाहिए और इसे ‘DGMRT’ के तहत ले आना चाहिए। नई विंग मीडिया, सोशल मीडिया, फीडबैक और रिसर्च की मॉनीटरिंग के साथ ही उसका विश्लेषण भी करेगी। इस समय ’ EMMC’ टीवी चैनल्स की मॉनीटरिंग करती है कि वे प्रोग्राम और एडवर्टाइजिंग के लिए तय नियमों का पालन कर रहे हैं अथवा नहीं, वहीं ‘NMW’ सोशल मीडिया के विश्लेषण का काम देखती है।    

इस रिपोर्ट में ‘डायरेक्टरेट जनरल ऑफ न्यूज’ (Directorate General of News) के नाम से एक और विंग प्रस्तावित की गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इसे पब्लिक ब्रॉडकास्टर ‘प्रसार भारती’ के तहत लाना चाहिए जो ‘ऑल इंडिया रेडियो’ (AIR) और ‘दूरदर्शन’ (DD) की न्यूज डिवीजन की देखरेख करेगी। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों विंग- ‘DGMRT’ और ‘Directorate General of News’ की कमान प्रिंसिपल डायरेक्टर जनरल लेवल के ऑफिसर के हाथ में दी जानी चाहिए। कमेटी की सिफारिशों में फिल्म संबंधी कार्यों के साथ समन्वय स्थापित करने के लिए डीजी रैंक के अफसर के नेतृत्व में ‘डायरेक्टरेट जनरल ऑफ फिल्म्स’ (Directorate General of Films) के नाम से एक और विंग बनाने की बात कही गई है।

युवा वर्ग में डिजिटल को बढ़ावा देना (Digital push to reach out to population under 35): देश की दो तिहाई जनसंख्या 35 साल से कम उम्र वालों की है। ऐसे में इस आयुवर्ग के लोगों के बीच ज्यादा से ज्यादा पहुंच बढ़ाने के लिए कमेटी ने डिजिटल को ज्यादा बढ़ावा देने की बात अपनी सिफारिशों में शामिल की है। कमेटी का कहना है कि सरकार को कम्युनिकेशन के लिए पुराने तरीकों से अलग हटकर काम करना चाहिए। ‘भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण’ (TRAI) के डाटा का उल्लेख करते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में इंटरनेट सबस्क्राइबर्स की संख्या वर्ष 2007 में 40 मिलियन से बढ़कर वर्ष 2019 में 665 मिलियन हो गई है और यह दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा इंटरनेट यूजर बेस बन चुका है।

मीडिया कंटेंट की शिकायत की जांच आईआईएस को करनी चाहिए (Media content complaint redressal to be handled by IIS):  रिपोर्ट में सिफारिश की गई है कि मीडिया कंटेंट संबंधी शिकायतों की जांच करने वाली ‘स्क्रूटनी कमेटी’ (Scrutiny Committee) और ‘इंटर मिनिस्ट्रियल कमेटी’ (Inter-Ministerial Committee) को नई विंग ‘DG Content Complaint Redressal’ में शामिल करना चाहिए। इसे ‘DGMRT’ के तहत लाया जाना चाहिए। यह भी कहा गया है कि ‘DGMRT’ के तहत इस नई विंग को ‘Secretariat of the Committee’ की भूमिका निभानी चाहिए। इसका काम एडवर्टाइजिंग कंटेंट पर नजर रखने के लिए ‘बीओसी’ में गठित ‘Committee for Content Regulation in Government Advertising’ (CCRGA) के लिए होना चाहिए।     

‘पीआईबी और आरएनआई के नाम में बदलाव’ (Renaming PIB, RNI): रिपोर्ट में यह भी सिफारिश की गई है कि ‘प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो’ (PIB) का नाम बदलकर ‘डायरेक्टर जनरल ऑफ मीडिया एंड कम्युनिकेशन’ (Directorate General of Media and Communication) और ‘बीओसी’ का नाम बदलकर ‘डायरेक्टरेट जनरल ऑफ आउटरीच एंड कम्युनिकेशन’(Directorate General of Outreach and Communication) कर देना चाहिए। इसके साथ ही ‘रजिस्ट्रार ऑफ न्यूजपेपर्स फॉर इंडिया’ (RNI) का नाम बदलकर ‘डायरेक्टरेट जनरल ऑफ रजिस्ट्रेशन एंड लाइसेंसिग’ (DGRL) करने की सिफारिश की गई है। ‘RNI’ की भूमिका को बढ़ाकर मल्टीपल सिस्टम ऑपरेटर्स की लाइसेंसिंग तक करने के लिए कहा गया है।       

प्रत्येक मंत्रालय में कम्युनिकेशन डिवीजन (Communication division in every ministry): इस कमेटी की रिपोर्ट में यह सिफारिश भी की गई है कि भारतीय सूचना सेवा के अधिकारियों को निश्चित समय सीमा के लिए ‘प्रसार भारती’ में तैनात करना चाहिए, जहां उन्हें संस्थान का हिस्सा माना जाना चाहिए। अभी तक भारतीय सूचना सेवा के अधिकारी सिर्फ ‘AIR’ और ‘DD’ में तैनात किए जाते हैं। कमेटी की सिफारिशों के अनुसार, भारतीय सूचना सेवा के अधिकारियों को चरणबद्ध तरीके से मंत्रालयों में तैनात किया जाना चाहिए और प्रत्येक मंत्रालय में एक कम्युनिकेशन डिवीजन बनाई जानी चाहिए। रिपोर्ट में भारतीय सूचना सेवा के अधिकारियों की ‘सूचना प्रसारण मंत्रालय’ (MIB) की कैडर कंट्रोल विंग में तैनाती की सिफारिश भी की गई है।   

कमेटी ने रेवेन्यू, कस्टम, रेलवे और पोस्टल की तर्ज पर इंडियन इंफॉर्मेशन सर्विस बोर्ड अथवा इंफॉर्मेशन एंड कम्युनिकेशन बोर्ड गठित करने की सिफारिश भी की है। रिपोर्ट के अनुसार, इस बोर्ड को ही ग्रुप ए और बी के आईआईएस अधिकारियों की पोस्टिंग और ट्रांसफर की जिम्मेदारी भी दी जानी चाहिए। इसके अलावा सूचन-प्रसारण मंत्रालय में पॉलिसी तय करने वाले पदों पर भी आईआईएस अधिकारियों को शामिल करने की सिफारिश इस रिपोर्ट में की गई है।

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जामिया में पिटे पत्रकार, कई के टूटे कैमरे

नए नागरिकता कानून का विरोध कर रहे हैं जामिया विश्वविद्यालय के छात्र, महिला पत्रकारों को दौड़ाया

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 14 December, 2019
Last Modified:
Saturday, 14 December, 2019
Attack

नए नागरिकता कानून के विरोध में शनिवार को दिल्ली के जामिया विश्वविद्यालय में जमकर हंगामा हुआ। इस कानून के विरोध में गुस्साए छात्रों ने मीडिया पर हमला कर दिया। छात्रों के हमले में दो मीडियाकर्मी घायल हुए हैं। प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने मीडियाकर्मियों के कैमरों को भी तोड़ दिया।

बता दें कि यहां के छात्रों ने शुक्रवार को भी विरोध प्रदर्शन किया था। इस पर पुलिस ने लाठीचार्ज कर उन्हें खदेड़ा था। शनिवार को विरोध प्रदर्शन के दौरान छात्र हिंसक हो गए और उन्होंने मीडिया को निशाना बनाना शुरू कर दिया। इस दौरान महिला पत्रकारों को भी दौड़ाया गया। मीडियाकर्मियों ने किसी तरह भागकर अपनी जान बचाई।

बताया जाता है कि शनिवार सुबह से ही बड़ी संख्या में मीडियाकर्मी जामिया के बाहर खड़े हुए थे। वे विरोध कर रहे छात्रों से बातचीत कर उनके आक्रोश का कारण जानना चाह रहे थे। इस दौरान कुछ लोग मीडिया का विरोध कर रहे थे और मीडिया गो बैक-गो बैक कर रहे थे। इन लोगों ने जामिया के गेट पर भी मीडिया वापस जाओ के पोस्टर लगाए हुए थे। इसी दौरान जब वहां पर आरजेडी के नेता पप्पू यादव पहुंचे तो उनसे बात करने के लिए जैसे ही मीडियाकर्मी उनके पास पहुंचे, तभी भीड़ ने मीडिया पर हमला कर दिया।

इस हमले में ‘इंडिया न्यूज’ के पत्रकार अजीत श्रीवास्तव, कैमरामैन राजन सिंह और ‘एबीपी न्यूज’ के कैमरामैन भूपेंद्र रावत घायल हो गए। राजन सिंह और भूपेंद्र रावत का कैमरा भी टूट गया। बाद में पुलिस ने किसी तरह स्थिति को संभाला।

मीडिया पर प्रदर्शनकारियों ने किस तरह हमला किया, उसका विडियो आप यहां देख सकते हैं।    

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माखनलाल विश्वविद्यालय: रजिस्ट्रार ने दिलीप मंडल व मुकेश कुमार पर लिया ये फैसला

प्रदर्शन कर रहे छात्रों की मांग पर गठित की गई है कमेटी, 15 दिन में तैयार करेगी अपनी रिपोर्ट

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 14 December, 2019
Last Modified:
Saturday, 14 December, 2019
MUC

देश के प्रतिष्ठित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCNUJC), भोपाल में शुक्रवार को जमकर हंगामा हुआ। यहां दो फैकल्टी प्रोफेसर्स के खिलाफ विद्यार्थियों ने काफी देर तक प्रदर्शन किया। छात्रों का आरोप है कि दोनों प्रोफेसर्स विश्वविद्यालय का माहौल खराब कर रहे हैं और छात्रों को जातिगत तौर पर बांट रहे हैं। सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस ने छात्रों को शांत कराया। 

दरअसल, प्रदर्शन कर रहे विद्य़ार्थियों का आरोप था कि यूनिवर्सिटी के दो फैकल्टी प्रोफेसर दिलीप मंडल और मुकेश कुमार सोशल मीडिया पर जाति विशेष के नाम पर लगातार पोस्ट कर रहे हैं और हैशटैग चला रखा है। छात्र दोनों प्रोफेसर्स को निलंबित किए जाने की मांग कर रहे थे। इसको लेकर विद्यार्थियों ने गुरुवार को भी धरना दिया था। शुक्रवार को भी कुलपति के कार्यालय के बाहर छात्र धरने पर बैठे थे। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा समझाने के बावजूद जब विद्यार्थी नहीं माने तब पुलिस को सूचना दी गई। इसके बाद पुलिस ने विद्यार्थियों को वहां से हटाया। हंगामे के दौरान तीन छात्र बेहोश भी हो गए, जिन्हें एंबुलेंस से अस्पताल ले जाना पड़ा था। विद्यार्थियों ने पुलिस पर मारपीट के आरोप लगाए हैं। आरोप है कि पुलिस ने शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे छात्रों को घसीटकर पांचवीं मंजिल से तीसरी मंजिल पर उतारा।

इस मामले में एडिशनल एसपी संजय साहू का कहना है कि छात्रों की मांग पर जांच कमेटी का गठन किया गया है। इस कमेटी में छात्रों को भी शामिल किया गया है। यह कमेटी 15 दिन के अंदर अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी। वहीं, रजिस्ट्रार दीपेंद्र बघेल का कहना है कि यह कमेटी तथ्यों के आधार पर जांच करेगी। छात्रों ने जिन दो प्रोफेसर्स पर आरोप लगाए हैं, फिलहाल विश्वविद्यालय परिसर में उनके प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। जांच के बाद ही उन्हें विश्वविद्यालय में प्रवेश करने दिया जाएगा। इस बारे में दिलीप मंडल का कहना है कि विश्वविद्यालय में क्या विरोध हुआ, यह बात उनके संज्ञान में नहीं है। वहीं, मुकेश कुमार ने छात्रों द्वारा लगाए गए आरोपों को निराधार बताया है।

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सूचना प्रसारण मंत्रालय में हुई नए सचिव की एंट्री

कई अन्य सचिवों के कार्यक्षेत्र में किया गया है फेरबदल, केंद्रीय मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति ने इन नियुक्तियों को मंजूरी दे दी है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 13 December, 2019
Last Modified:
Friday, 13 December, 2019
MIB

बिहार कैडर के 1986 बैच के आईएएस अधिकारी रवि मित्तल को ‘सूचना प्रसारण मंत्रालय’ (MIB) में नया सचिव नियुक्त किया गया है। वह अमित खरे का स्थान लेंगे, जिन्हें ‘उच्च शिक्षा विभाग’ (Department of Higher Education) का नया सचिव बनाया गया है। बता दें कि इन दिनों मित्तल वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग (Department of Financial Services) में विशेष सचिव के तौर पर काम कर रहे थे। वहीं, सुशील कुमार को खनन सचिव और प्रवीण कुमार को कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय में सचिव बनाया गया है।

इसके अलावा राजेश भूषण को जहां ग्रामीण विकास विभाग में सचिव की जिम्मेदारी दी गई है, वहीं सुनील कुमार पंचायती राज मंत्रालय में सचिव बनाए गए हैं। बता दें कि केंद्रीय मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति ने इन नियुक्तियों को मंजूरी दे दी है।

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स्टार और डिज्नी इंडिया को मिला नया कंट्री हेड

पिछले महीने संजय गुप्ता ने इस पद से दे दिया था इस्तीफा

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 13 December, 2019
Last Modified:
Friday, 13 December, 2019
Star disney

‘स्टार’ (Star) और ‘डिज्नी इंडिया’ (Disney India) का नया कंट्री मैनेजर के. माधवन को नियुक्त किया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सभी विभागों के हेड अब माधववन को रिपोर्ट करेंगे। माधवन की रिपोर्टिंग सीधे ‘स्टार’ (Star) और ‘डिज्नी इंडिया’ (Disney India) के चेयरमैन और ‘द वॉल्ट डिज्नी कंपनी, एशिया पैसिफिक’ (The Walt Disney Company, Asia Pacific) के प्रेजिडेंट उदय शंकर को होगी।

माधवन इससे पहले ‘स्टार इंडिया’ (Star India) के मैनेजिंग डायरेक्टर (साउथ बिजनेस) थे। वह वर्ष 2016 से यह जिम्मेदारी निभा रहे थे। वह वर्तमान में दक्षिण भारत के चार राज्यों में ‘स्टार’ के बिजनेस को देखने के साथ ही मलयालम, कन्नड़, तमिल और तेलुगू में प्रादेशिक चैनल्स का कामकाज संभाल रहे थे।

बता दें कि संजय गुप्ता ने पिछले महीने ‘स्टार’ (Star) और ‘डिज्नी इंडिया’ (Disney India) के कंट्री मैनेजर के पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने ‘गूगल इंडिया’ (Google India) के साथ बतौर अपनी नई पारी शुरू की है, जहां उन्हें कंट्री मैनेजर और वाइस प्रेजिडेंट (सेल्स और ऑपरेशंस) के पद पर नियुक्त किया गया है। संजय गुप्ता अगले साल की शुरुआत में इस पद को संभालेंगे।

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Zee Media के जवाहर गोयल को Dish TV में फिर मिली बड़ी जिम्मेदारी

जवाहर गोयल को इस साल मार्च में ‘जी मीडिया नेटवर्क’ का एडिटर-इन-चीफ नियुक्त किया गया था

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 13 December, 2019
Last Modified:
Friday, 13 December, 2019
Jawahar Goel

डायरेक्ट टू होम टेलिविजन सर्विस ‘डिश टीवी’ (Dish TV) से एक बड़ी खबर निकलकर सामने आई है। खबर है कि जवाहर गोयल को एक बार फिर ‘डिश टीवी’ का मैनेजिंग डायरेक्टर नियुक्त किया गया है। गुरुवार को हुई कंपनी बोर्ड की मीटिंग में यह निर्णय लिया गया। उनका कार्यकाल 17 दिसंबर 2019 से 31 मार्च 2020 तक होगा। बताया जाता है कि मैनेजिंग डायरेक्टर का कार्यकाल पूरा होने के बाद भी जवाहर गोयल बोर्ड के चेयरमैन बने रहेंगे।

बता दें कि ‘एस्सेल ग्रुप’ (Essel Group) के चेयरमैन डॉ. सुभाष चंद्रा के छोटे भाई जवाहर गोयल को इसी साल मार्च में ‘जी मीडिया नेटवर्क’ (Zee Media network) का एडिटर-इन-चीफ नियुक्त किया गया था।

‘जी मीडिया नेटवर्क’ के एडिटर-इन-चीफ पद की जिम्मेदारी के साथ ही उन्हें मीडिया नेटवर्क की ‘एडिटोरियल गवर्निंग काउंसिल’(Editorial Governing Council) का चेयरमैन भी बनाया गया था। यह काउंसिल नेटवर्क की सभी प्रमुख एडिटोरियल पॉलिसी को दिशा-निर्देशित करती है।
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हैदराबाद कांड की मीडिया कवरेज पर सुप्रीम कोर्ट ने उठाया ये कदम

शीर्ष अदालत ने मामले से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी मीडिया में चलने पर नाराजगी जताई

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 12 December, 2019
Last Modified:
Thursday, 12 December, 2019
Media Coverage

हैदराबाद कांड में मीडिया की भूमिका पर उठे सवालों के बीच सुप्रीम कोर्ट ने मीडिया के साथ ही ‘प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया’ (पीसीआई) को नोटिस जारी किया है। शीर्ष अदालत चाहती है कि बलात्कार और हत्या जैसे संगीन मामलों की रिपोर्टिंग के संबंध में मीडिया को खास ध्यान रखना चाहिए। 

हालांकि अदालत ने साफ किया है कि उसका इरादा मीडिया को रिपोर्टिंग से रोकने का बिलकुल नहीं है, बल्कि वह जांच के पहलुओं को सार्वजनिक होने से रोकने पर विचार कर रही है। मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश एसए बोबड़े ने हैदराबाद कांड से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी मीडिया में चलने पर नाराजगी जताई। उन्होंने राज्य सरकार से पूछा कि आखिर मीडिया में सुबह से लेकर शाम तक केस से जुड़े सबूत क्यों दिखाए जाते रहे? इस पर तेलंगाना पुलिस की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा कि मीडिया में खबर आने के बाद ही इस बारे में सबको पता चला।

चीफ जस्टिस ने अदालत का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि हम मीडिया रिपोर्टिंग पर रोक नहीं लगा रहे हैं, हम केवल यही चाहते हैं कि जांच से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं को सार्वजनिक न किया जाए। अदालत ने वेटनरी डॉक्टर की बलात्कार के बाद हत्या के सभी आरोपितों के एनकाउंटर की सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त जज से जांच कराये जाने के आदेश भी दिए हैं।

गौरतलब है कि मीडिया ने इस मामले को प्रमुखता से उठाया था। इस फेर में कई मीडिया संस्थानों ने पीड़िता और उसके परिवार की न सिर्फ पहचान उजागर की थी, बल्कि पीड़िता की तस्वीर इंटरनेट पर वायरल हो गई थी। इसके अलावा, आरोपितों की तस्वीरें भी सार्वजनिक कर दी गई थीं।

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फोटो जर्नलिस्ट के सामने आई ये मजबूरी, कैमरा किनारे रख करनी पड़ रही मजदूरी

स्थानीय सहित राष्ट्रीय अखबारों में भी उनके द्वारा खींची गईं फोटो छपती रही हैं। उन्होंने पिछले साल शादी भी कर ली, मगर एक ही झटके में पूरी तस्वीर ही बदल गई

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 11 December, 2019
Last Modified:
Wednesday, 11 December, 2019
Photo Journalist

मजबूरी इंसान से क्या कुछ नहीं करा लेती। अपनी तस्वीरों से अखबारों में छाए रहने वाले फोटो जर्नलिस्ट मुनीब उल इस्लाम आज मजदूरी करके अपने परिवार का पेट पालने को विवश हैं। मुनीब के बुरे दिन कश्मीर को अनुच्छेद 370 से मिली आजादी के साथ शुरू हुए। कुछ दिन तो उन्होंने जैसे-तैसे गुजार लिए, लेकिन जब कोई रास्ता नजर नहीं आया तो उन्हें मजबूरन कैमरा किनारे रखकर ईंट-पत्थरों से भरे तसले उठाने पड़े।

अनंतनाग निवासी मुनीब फ्रीलांस फोटो जर्नलिस्ट के रूप में पिछले कई सालों से काम कर रहे हैं। स्थानीय सहित राष्ट्रीय अखबारों में भी उनके द्वारा खींची गईं फोटो छपती रही हैं। पांच अगस्त से पहले तक उनकी जिंदगी काफी अच्छी चल रही थी। उन्होंने पिछले साल शादी भी कर ली, मगर एक ही झटके में पूरी तस्वीर ही बदल गई।

दरअसल, अनुच्छेद 370 खत्म करने के साथ ही सरकार ने एहतियात के तौर पर घाटी में कई प्रतिबंध लगा दिए थे। इनमें फोन और इंटरनेट सेवा भी शामिल है। इंटरनेट सेवा तो अब तक पूरी तरह बहाल नहीं हो सकी है, जिसका खामियाजा मीडिया और पत्रकारों को भी उठाना पड़ा। खासकर मुनीब जैसे पत्रकार सबसे ज्यादा प्रभावित हुए, जिन्हें सैलरी नहीं मिलती।

वैसे, श्रीनगर के पत्रकार मीडिया सुविधा केंद्र में इंटरनेट उपयोग कर सकते हैं, लेकिन कश्मीर के अन्य जिलों में काम करने वाले पत्रकारों के लिए ऐसी कोई सुविधा नहीं है। इसके परिणामस्वरूप पत्रकारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। घाटी के माहौल के चलते मीडिया संस्थानों को विज्ञापन आदि से होने वाले कमाई में भी गिरावट आई है, इससे निपटने के लिए उनके द्वारा कर्मचारियों की छंटनी की जा रही है। 

30 वर्षीय मुनीब ने कभी नहीं सोचा था कि उन्हें इस तरह मजदूरी करनी पड़ेगी। वह कहते हैं, ‘मैंने पिछले साल शादी की थी। मेरी पत्नी प्रेग्नेंट हैं, जिसकी देखभाल के लिए मुझे पैसों की जरूरत रहती है। यही वजह है कि जब हालात नहीं बदले तो मुझे मजदूरी करने पर विवश होना पड़ा। हालांकि, पिछले कुछ महीनों में से अधिकांश दिन मैं बेरोजगार ही रहा।’

ऐसा नहीं है कि मुनीब ने घाटी की फिजा को कैमरे में उतारना बंद कर दिया है। अनुच्छेद 370 हटने के बाद भी उन्होंने सैकड़ों तस्वीरें खींचीं, लेकिन इंटरनेट सेवा बहाल नहीं होने के चलते वह उन्हें किसी पब्लिकेशन को भेज नहीं सके। मुनीब और उनके जैसे पत्रकारों के लिए बार-बार श्रीनगर जाना संभव नहीं है। नतीजतन, उनकी फोटो-खबरें बस उनकी ही होकर रह गई हैं।

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पत्रकार के खिलाफ FIR मामले में प्रेस काउंसिल आई हरकत में, उठाया ये कदम

उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में स्कूली बच्चों को मिड-डे मील में नमक-रोटी दिए जाने की खबर दिखाने पर पत्रकार के खिलाफ दर्ज किया गया था मुकदमा

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 11 December, 2019
Last Modified:
Wednesday, 11 December, 2019
PCI

उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले के एक सरकारी स्कूल में मिड-डे मील के तहत बच्‍चों को नमक-रोटी दिए जाने की खबर को लेकर मुकदमे का सामना कर रहे ‘जनसंदेश टाइम्स’ अखबार के पत्रकार पवन जायसवाल के मामले में अब ‘प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया’ (PCI) भी हरकत में आ गई है। काउंसिल ने इस मामले में उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव, गृह सचिव, पुलिस महानिदेशक और मिर्जापुर के पुलिस अधीक्षक को तलब किया है। इन अधिकारियों से 18 दिसंबर तक अपना जवाब देने को कहा गया है।  

बता दें कि ‘एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया’ पहले ही पवन जायसवाल के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने को पत्रकारों के खिलाफ क्रूर कदम बताते हुए इसकी निंदा पर चुका है।

गौरतलब है कि कुछ माह पूर्व मिर्जापुर में हिनौता स्थित एक प्राइमरी स्कूल के बच्चों को मिड-डे मील के नाम पर नमक-रोटी खिलाने का मामला सामने आया था। पवन जायसवाल ने इस घटना का विडियो बनाकर सरकारी तंत्र की लापरवाही को उजागर किया था। वहीं, मिर्जापुर के जिला प्रशासन का आरोप था कि पवन जायसवाल ने फर्जी तरीके से और गलत नीयत से यह विडियो बनाया। इसके बाद प्रशासन ने पवन जायसवाल के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया था।

प्रशासन ने पवन जायसवाल के खिलाफ आपराधिक षडयंत्र, सरकारी कर्मचारी के काम में बाधा उत्पन्न करने, झूठे साक्ष्य और धोखाधड़ी के आरोप में मुकदमा दर्ज किया था। एफआईआर के मुताबिक, इस विडियो को रिकॉर्ड करने के लिए गांव के एक अधिकारी ने जायसवाल के साथ साजिश रची थी, क्योंकि उन्हें पता था कि स्कूल में काम करने वाले रसोइए के पास सामान नहीं था।

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वरिष्ठ पत्रकार के घर में दिनदहाड़े घुसा अंजान शख्स, दे गया ये धमकी

पत्रकार ने पुलिस को पूरे मामले से अवगत कराते हुए आवश्यक कार्रवाई करने की गुजारिश की है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 10 December, 2019
Last Modified:
Tuesday, 10 December, 2019
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मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार रविंद्र जैन को जान से मारने की धमकी मिलने का मामला सामने आया है। बताया जाता है कि इस धमकी की वजह पिछले दिनों मध्यप्रदेश कैडर के आईएएस अधिकारी राधेश्याम जुलानिया के संबंध में लिखी गई खबर है। रविंद्र जैन ने इस घटना से पुलिस को अवगत करा दिया है। दरअसल, रविंद्र जैन ने अपनी न्यूज वेबसाइट ‘सबकी खबर’ पर 18 नवंबर को एक खबर प्रकाशित की थी। इस खबर में बताया गया था कि कैसे जुलानिया ने अपनी बेटी की कंपनी को अरबों के ठेके दिलवाए। इस खुलासे ने प्रदेश में हडकंप मचा दिया था।

‘समाचार4मीडिया’ से बातचीत में जैन ने बताया, ‘8 दिसंबर को एक अंजान शख्स हाथ में फाइल लिए मेरे आवास पर पहुंचा, लेकिन उस वक्त मैं घर पर नहीं था। उसने बताया कि उसे राधेश्याम जुलानिया ने कुछ जरूरी बात करने के लिए भेजा है। इस पर मेरे बेटे ने उसे घर के अंदर बुलाया। कुछ देर यहां-वहां की बातें करने के बाद उसने मेरे बेटे से कहा कि तुम्हारे पिता राधेश्याम जुलानिया को जानते नहीं हैं, जुलानिया उन्हें पूरी तरह बर्बाद कर देंगे, आप भी उनकी लाश नहीं ढूंढ पाओगे। इतना कहने के बाद वो वहां से निकल गया, लेकिन मेरे बेटे ने उसकी एक फोटो खींच ली।’ जैन ने श्यामला हिल्स पुलिस स्टेशन में इस संबंध में लिखित शिकायत दर्ज की है।

बता दें कि रविंद्र जैन अब तक कई खुलासे कर चुके हैं। पुलिस और प्रशासन पर गहरी पकड़ रखने वाले जैन ने अपनी धारधार लेखनी की बदौलत सियासी गलियारों में भी जमकर हडकंप मचाया है। भोपाल से प्रकाशित होने वाले दैनिक ‘राज एक्सप्रेस’ में समूह संपादक की जिम्मेदारी संभालने के दौरान उन्होंने सत्ता प्रतिष्ठान की नींद उड़ा रखी थी। इसके बाद जब उन्होंने टैबलॉयड अखबार ‘अग्निबाण’ की कमान संभाली, तो तकरीबन रोजाना कोई न कोई विशेष खबर अखबार के फ्रंट पेज पर रहती थी। फिलहाल वह अपने न्यूज पोर्टल पर ध्यान केंद्रित किये हुए हैं और यहां भी उनकी खबरें सुर्खियां बंटोर रही हैं।

लोगों का कहना है कि चूंकि यह मामला सीधे तौर पर वरिष्ठ आईएएस अधिकारी से जुड़ा है, लिहाजा यह देखने वाली बात होगी कि पुलिस क्या कार्रवाई करती है। जैन के अनुसार, मुख्यमंत्री कमलनाथ ने इस विषय में पुलिस को एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं।

जिस खबर के चलते रविंद्र जैन को धमकी मिली, उसे आप यहां क्लिक कर पढ़ सकते हैं:

रविंद्र जैन के बेटे द्वारा पुलिस में दी गई शिकायत की कॉपी आप यहां पढ़ सकते हैं:

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HT को बाय बोल वरिष्ठ पत्रकार कुमार उत्तम ने नई दिशा में बढ़ाए कदम

पूर्व में कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अपनी जिम्मेदारी निभा चुके हैं कुमार उत्तम

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 10 December, 2019
Last Modified:
Tuesday, 10 December, 2019
Kumar Uttam

‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ (Hindustan Times) में बतौर एसोसिएट एडिटर कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार कुमार उत्तम ने यहां से बाय बोल दिया है। उन्होंने अब नई दिशा में कदम बढ़ाते हुए प्रतिष्ठित विमान निर्माता कंपनी ‘एयरबस’ (AirBus) का दामन थामा है। खबर है कि यहां उन्हें डायरेक्टर (कॉर्पोरेट अफेयर्स) की जिम्मेदारी सौंपी गई है।  

बता दें कि कुमार उत्तम पूर्व में कई मीडिया संस्थानों में अपनी जिम्मेदारी निभा चुके हैं। मूल रूप से रांची (झारखंड) के रहने वाले कुमार उत्तम ने हरियाणा के हिसार स्थित गुरु जम्भेश्वर यूनिवर्सिटी से मास्टर्स इन मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की है।

कुमार उत्तम ने वर्ष 2000 में ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ में बतौर करेसपॉन्डेंट अपने करियर की शुरुआत की थी। करीब पौने पांच साल (दिसंबर 2000-सितंबर 2005) यहां काम करने के बाद उन्होंने अक्टूबर 2005 में बतौर प्रिंसिपल करेसपॉन्डेंट ‘डेक्कन क्रॉनिकल होल्डिंग्स लिमिटेड’ का दामन थाम लिया। यहां करीब दो साल अपनी जिम्मेदारी निभाने के बाद उन्होंने यहां से बाय बोल दिया और सितंबर 2007 में स्पेशल पॉलिटिकल करेसपॉन्डेंट के तौर पर ‘द पॉयनियर’ से जुड़ गए। यहां करीब साढ़े छह साल तक उन्होंने अपनी सेवाएं दीं और फिर यहां से अलविदा कहकर फरवरी 2014 में एक बार फिर ‘एचटी मीडिया लिमिटेड’ के साथ जुड़ गए। अब करीब छह साल पुरानी अपनी पारी को विराम देकर कुमार उत्तम ने ‘एयरबस’  के साथ अपनी नई पारी शुरू की है।

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