PIB-RNI का नाम बदलेगा, प्रत्येक मंत्रालय में बनेगी नई डिवीजन!

दस सदस्यीय कमेटी की अध्यक्षता ब्यूरो ऑफ आउटरीच कम्युनिकेशन के डायरेक्टर जनरल सत्येंद्र प्रकाश कर रहे हैं। जल्द ही सरकार को सौंपी जाएगी ये रिपोर्ट

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 22 November, 2019
Last Modified:
Friday, 22 November, 2019
MIB

’भारतीय सूचना सेवा‘ (Indian Information Service) में पुनर्गठन की कवायद चल रही है। इसके लिए एक कमेटी का गठन भी किया गया है। न्यूज पोर्टल ‘द प्रिंट’ (The Print) में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, इस बारे में कमेटी ने अपनी कुछ सिफारिशें तैयार की हैं। इसमें ‘भारतीय सूचना सेवा’ का दायरा और बढ़ाकर दोगुने से ज्यादा करने, टॉप लेवल पर नई पोस्ट तैयार करने, विभिन्न मंत्रालयों में भारतीय सूचना सेवा के अधिकारियों की पोस्टिंग करने और न्यू मीडिया विंग्स स्थापित करने जैसी सिफारिशें शामिल हैं।

‘ब्यूरो ऑफ आउटरीच कम्युनिकेशन’ (BOC) के डायरेक्टर जनरल सत्येंद्र प्रकाश की अध्यक्षता में गठित ‘Cadre Review and Restructuring Committee’ (CRRC) में 10 सदस्य शामिल हैं। बताया जाता है कि कमेटी की ओर से जल्दी ही इन सिफारिशों को लेकर सरकार के समक्ष विस्तृत रिपोर्ट पेश की जाएगी। बता दें कि ब्‍यूरो ऑफ आउटरीच एंड कम्‍युनिकेशन, सूचना-प्रसारण मंत्रालय (MIB)  के तहत काम करने वाली मीडिया यूनिट है, जबकि भारतीय सूचना सेवा के अधिकारियों का चयन केंद्रीय लोक सेवा आयोग (UPSC) की ओर से आयोजित सिविल सर्विसेज परीक्षा के तहत किया जाता है। भारतीय सूचना सेवा सरकारी कम्युनिकेशन का प्रमुख आधार है और यह सरकार व मीडिया के बीच महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

नई मीडिया विंग्स (New Media Wings): कमेटी ने भारतीय सूचना सेवा में वर्तमान में 971 पदों के विपरीत इनकी संख्या बढ़ाकर 2244 करने का सुझाव रखा है, ताकि कम्युनिकेशन नेटवर्क को और बढ़ाया जा सके। इसके साथ ही आईआईएस अधिकारियों के शीर्ष पदों में बढ़ोतरी की भी सिफारिश की गई है। इनमें प्रिंसिपल डायरेक्टर जनरल लेवल की दो अतिरिक्त पोस्ट के अलावा डायरेक्टर जनरल लेवल की 4 पोस्ट और एडिशनल डायरेक्टर जनरल लेवल की 56 पोस्ट क्रिएट करने की सिफारिश भी शामिल है।      

इन सिफारिशों में कहा गया है कि 150 पोस्ट रिजर्व रखी जानी चाहिए, जो वर्तमान में नहीं है जबकि, ‘कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग’ की गाइडलाइंस के अनुसार ऐसा करना आवश्यक है। इन सिफारिशों में ग्रुप ए कैडर की लगभग आठ प्रतिशत पोस्ट को ट्रेनिंग, प्रोबेशन, डेपुटेशन और छुट्टी आदि के लिए रिजर्व रखा गया है, जबकि बी कैडर में यह संख्या पांच प्रतिशत रखी गई है।

कमेटी ने ‘Directorate General of Media Research and Training’ (DGMRT) के नाम से एक विंग गठित करने की सिफारिश भी की है। यह भी कहा गया है कि इस समय काम कर रही मीडिया यूनिट ‘Electronic Media Monitoring Centre’ (EMMC) और ‘New Media Wing’ (NMW) को आपस में मिला देना चाहिए और इसे ‘DGMRT’ के तहत ले आना चाहिए। नई विंग मीडिया, सोशल मीडिया, फीडबैक और रिसर्च की मॉनीटरिंग के साथ ही उसका विश्लेषण भी करेगी। इस समय ’ EMMC’ टीवी चैनल्स की मॉनीटरिंग करती है कि वे प्रोग्राम और एडवर्टाइजिंग के लिए तय नियमों का पालन कर रहे हैं अथवा नहीं, वहीं ‘NMW’ सोशल मीडिया के विश्लेषण का काम देखती है।    

इस रिपोर्ट में ‘डायरेक्टरेट जनरल ऑफ न्यूज’ (Directorate General of News) के नाम से एक और विंग प्रस्तावित की गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इसे पब्लिक ब्रॉडकास्टर ‘प्रसार भारती’ के तहत लाना चाहिए जो ‘ऑल इंडिया रेडियो’ (AIR) और ‘दूरदर्शन’ (DD) की न्यूज डिवीजन की देखरेख करेगी। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों विंग- ‘DGMRT’ और ‘Directorate General of News’ की कमान प्रिंसिपल डायरेक्टर जनरल लेवल के ऑफिसर के हाथ में दी जानी चाहिए। कमेटी की सिफारिशों में फिल्म संबंधी कार्यों के साथ समन्वय स्थापित करने के लिए डीजी रैंक के अफसर के नेतृत्व में ‘डायरेक्टरेट जनरल ऑफ फिल्म्स’ (Directorate General of Films) के नाम से एक और विंग बनाने की बात कही गई है।

युवा वर्ग में डिजिटल को बढ़ावा देना (Digital push to reach out to population under 35): देश की दो तिहाई जनसंख्या 35 साल से कम उम्र वालों की है। ऐसे में इस आयुवर्ग के लोगों के बीच ज्यादा से ज्यादा पहुंच बढ़ाने के लिए कमेटी ने डिजिटल को ज्यादा बढ़ावा देने की बात अपनी सिफारिशों में शामिल की है। कमेटी का कहना है कि सरकार को कम्युनिकेशन के लिए पुराने तरीकों से अलग हटकर काम करना चाहिए। ‘भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण’ (TRAI) के डाटा का उल्लेख करते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में इंटरनेट सबस्क्राइबर्स की संख्या वर्ष 2007 में 40 मिलियन से बढ़कर वर्ष 2019 में 665 मिलियन हो गई है और यह दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा इंटरनेट यूजर बेस बन चुका है।

मीडिया कंटेंट की शिकायत की जांच आईआईएस को करनी चाहिए (Media content complaint redressal to be handled by IIS):  रिपोर्ट में सिफारिश की गई है कि मीडिया कंटेंट संबंधी शिकायतों की जांच करने वाली ‘स्क्रूटनी कमेटी’ (Scrutiny Committee) और ‘इंटर मिनिस्ट्रियल कमेटी’ (Inter-Ministerial Committee) को नई विंग ‘DG Content Complaint Redressal’ में शामिल करना चाहिए। इसे ‘DGMRT’ के तहत लाया जाना चाहिए। यह भी कहा गया है कि ‘DGMRT’ के तहत इस नई विंग को ‘Secretariat of the Committee’ की भूमिका निभानी चाहिए। इसका काम एडवर्टाइजिंग कंटेंट पर नजर रखने के लिए ‘बीओसी’ में गठित ‘Committee for Content Regulation in Government Advertising’ (CCRGA) के लिए होना चाहिए।     

‘पीआईबी और आरएनआई के नाम में बदलाव’ (Renaming PIB, RNI): रिपोर्ट में यह भी सिफारिश की गई है कि ‘प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो’ (PIB) का नाम बदलकर ‘डायरेक्टर जनरल ऑफ मीडिया एंड कम्युनिकेशन’ (Directorate General of Media and Communication) और ‘बीओसी’ का नाम बदलकर ‘डायरेक्टरेट जनरल ऑफ आउटरीच एंड कम्युनिकेशन’(Directorate General of Outreach and Communication) कर देना चाहिए। इसके साथ ही ‘रजिस्ट्रार ऑफ न्यूजपेपर्स फॉर इंडिया’ (RNI) का नाम बदलकर ‘डायरेक्टरेट जनरल ऑफ रजिस्ट्रेशन एंड लाइसेंसिग’ (DGRL) करने की सिफारिश की गई है। ‘RNI’ की भूमिका को बढ़ाकर मल्टीपल सिस्टम ऑपरेटर्स की लाइसेंसिंग तक करने के लिए कहा गया है।       

प्रत्येक मंत्रालय में कम्युनिकेशन डिवीजन (Communication division in every ministry): इस कमेटी की रिपोर्ट में यह सिफारिश भी की गई है कि भारतीय सूचना सेवा के अधिकारियों को निश्चित समय सीमा के लिए ‘प्रसार भारती’ में तैनात करना चाहिए, जहां उन्हें संस्थान का हिस्सा माना जाना चाहिए। अभी तक भारतीय सूचना सेवा के अधिकारी सिर्फ ‘AIR’ और ‘DD’ में तैनात किए जाते हैं। कमेटी की सिफारिशों के अनुसार, भारतीय सूचना सेवा के अधिकारियों को चरणबद्ध तरीके से मंत्रालयों में तैनात किया जाना चाहिए और प्रत्येक मंत्रालय में एक कम्युनिकेशन डिवीजन बनाई जानी चाहिए। रिपोर्ट में भारतीय सूचना सेवा के अधिकारियों की ‘सूचना प्रसारण मंत्रालय’ (MIB) की कैडर कंट्रोल विंग में तैनाती की सिफारिश भी की गई है।   

कमेटी ने रेवेन्यू, कस्टम, रेलवे और पोस्टल की तर्ज पर इंडियन इंफॉर्मेशन सर्विस बोर्ड अथवा इंफॉर्मेशन एंड कम्युनिकेशन बोर्ड गठित करने की सिफारिश भी की है। रिपोर्ट के अनुसार, इस बोर्ड को ही ग्रुप ए और बी के आईआईएस अधिकारियों की पोस्टिंग और ट्रांसफर की जिम्मेदारी भी दी जानी चाहिए। इसके अलावा सूचन-प्रसारण मंत्रालय में पॉलिसी तय करने वाले पदों पर भी आईआईएस अधिकारियों को शामिल करने की सिफारिश इस रिपोर्ट में की गई है।

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पिछले तीन दशकों में मैंने पत्रकारों से बहुत कुछ सीखा है: डॉ. हर्षवर्धन

कोरोना महामारी की रोकथाम में पत्रकारों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। कोरोना वारियर्स की मेरी लिस्ट में पत्रकारों का स्थान बेहद खास है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 27 November, 2020
Last Modified:
Friday, 27 November, 2020
drharshvardhan54

'कोरोना महामारी की रोकथाम में पत्रकारों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। कोरोना वारियर्स की मेरी लिस्ट में पत्रकारों का स्थान बेहद खास है। मैं उनके जज्बे, जुनून और साहस को सलाम करता हूं।' यह विचार केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने शुक्रवार को भारतीय जन संचार संस्थान (आईआईएमसी) के सत्रारंभ समारोह-2020 के अंतिम दिन व्यक्त किए।

इस अवसर पर आईआईएमसी के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी, अपर महानिदेशक के. सतीश नम्बूदिरिपाड सहित आईआईएमसी के सभी केंद्रों के संकाय सदस्य एवं विद्यार्थी उपस्थित थे।

'कोरोना महामारी में स्वास्थ्य पत्रकारिता' विषय पर बोलते हुए डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि कोरोना के दौर में भी पत्रकारों ने लोगों के लिए ‘ग्राउंड जीरो’ से लगातार रिपोर्टिंग की है। इस दौरान हमने अपने कई पत्रकारों को भी खोया है। उन्होंने कहा कि पिछले तीन दशकों में मैंने पत्रकारों से बहुत कुछ सीखा है। पत्रकारिता लोकतंत्र का चौथा और सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ है। इसलिए संकट के समय पत्रकार की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।

डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि मैं भारतीय जन संचार संस्थान के महानिदेशक से आग्रह करता हूं कि वे स्वास्थ्य पत्रकारिता पर एक कोर्स शुरू करें, जिससे स्वास्थ्य के क्षेत्र में बेहतर कम्युनिकेटर तैयार किए जा सकें। इसके अलावा मैं चाहता हूं कि आईआईएमसी विज्ञान के क्षेत्र में भी अच्छे पत्रकार एवं कम्युनिकेटर तैयार करने पर ध्यान दें। 

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि भारत सरकार चाहती है कि वर्ष 2022 तक सभी बच्चों को अच्छी सेहत और अच्छा खानपान मिले। और इस अभियान में पत्रकारों का महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने कहा कि एक वक्त में हमने भारत को पोलियो मुक्त बनाने का सपना देखा था और इस सपने को साकार करने में मीडिया ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। मैं चाहता हूं कि इस महामारी के समय में भी पत्रकार नकारात्मक माहौल को सकारात्मक माहौल में बदलने में मदद करें।

डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि अगर आपने लॉकडाउन में अपने घरों में रहकर समय बिताया है, कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने और फैलने के लिए शारीरिक दूरी का पालन किया है, साफ-सफाई पर ध्यान दिया है और हमेशा अपने चेहरे को ढककर रखा है या मास्क पहना है, तो आपने भी कोरोना वायरस संक्रमण को फैलने से रोकने में अहम भूमिका निभाई है।

 

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हाई कोर्ट ने कहा, इस तरह का कंटेंट प्रसारित न करें टीवी चैनल्स

अदालत का कहना है कि इस तरह के कंटेंट से युवाओं व बच्चों के दिमाग पर बुरा असर पड़ सकता है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 27 November, 2020
Last Modified:
Friday, 27 November, 2020
Madras HC

मद्रास हाई कोर्ट ने टीवी चैनल्स से कहा है कि वह इस तरह के विज्ञापन अथवा कार्यक्रम प्रसारित न करें, जो अश्लीलता को बढ़ावा देने वाले हों। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हाई कोर्ट का कहना है कि रात में 10 बजे के बाद तमाम टीवी चैनल्स पर एक ही तरह के विज्ञापन आ रहे होते हैं, ये कॉन्डम और कामोत्तेजन वस्तुओं आदि के विज्ञापन होते हैं, जिनके जरिये अश्लीलता को बढ़ावा दिया जा रहा होता है।

अदालत का कहना है कि इस तरह के विज्ञापन केबल टेलीविजन नेटवर्क (विनियमन) अधिनियम, 1995 की धारा 16 के तहत दंडनीय है और इस तरह के कंटेंट से युवाओं व बच्चों के दिमाग पर बुरा असर पड़ सकता है।

इसके साथ ही टीवी चैनल्स पर प्रसारित किए जाने वाले कंटेंट की सेंशरशिप को लेकर अदालत ने प्रतिक्रिया भी मांगी है। इस मामले में अगली सुनवाई अब एक दिसंबर को होगी।

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इन दिग्गजों की जूरी करेगी enba 2020 के विजेताओं का चुनाव, देखें लिस्ट

यह अवॉर्ड मीडिया में कार्यरत उन शख्सियतों को दिया जाता है, जिन्होंने देश में टेलिविजन न्यूज इंडस्ट्री को एक नई दिशा दी है और इस इंडस्ट्री को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 27 November, 2020
Last Modified:
Friday, 27 November, 2020
enba

कोरोनावायरस (कोविड-19) महामारी जैसी चुनौतियों के बावजूद देश में न्यूज की व्युअरशिप ने रिकॉर्ड ऊंचाइयों को छुआ है। इस सबके पीछे तमाम लोगों की लगन व मेहनत है, जिन्होंने महामारी के बीच अपने कर्तव्य के निर्वहन में किसी तरह की कोई कसर नहीं छोड़ी।

ऐसे में देश में टेलिविजन न्‍यूज इंडस्‍ट्री को नई दिशा देने और इंडस्‍ट्री को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने में अहम योगदान देने वालों को सम्मानित करने के लिए ‘एक्सचेंज4मीडिया’ बहुप्रतिष्ठित ‘एक्‍सचेंज4मीडिया न्‍यूज ब्रॉडकास्टिंग अवॉर्ड्स’ (enba) 2020  का आयोजन करने जा रहा है। इनबा का यह 13वां एडिशन है।

बता दें कि वर्ष 2008 में अपनी शुरुआत के बाद से ही यह अवॉर्ड मीडिया में कार्यरत उन शख्सियतों को दिया जाता है, जिन्‍होंने देश में टेलिविजन न्‍यूज इंडस्‍ट्री को एक नई दिशा दी है और इस इंडस्‍ट्री को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है।

तमाम एंट्रीज में से विजेताओं का चुनाव एक जूरी के द्वारा किया जाएगा। जूरी में विभिन्न कंपनियों के सीईओ से लेकर संसद सदस्य शामिल हैं। जूरी चेयर की घोषणा अगले कुछ हफ्तों में की जाएगी। जूरी में शामिल सदस्यों की लिस्ट आप यहां देख सकते हैं। 

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RAM Ratings: जानिए, इस बार किस रेडियो FM का बिगड़ा 'खेल', किसे हुआ 'फायदा'

देश के चार बड़े शहरों दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और बेंगलुरु के लिए 39 से 42वें हफ्ते (20 सितंबर-17 अक्टूबर) के बीच की ‘रेडियो ऑडियंस मीजरमेंट’ (RAM) रेटिंग्स जारी हो गई हैं

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 27 November, 2020
Last Modified:
Friday, 27 November, 2020
FM Radio

देश के चार बड़े शहरों दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और बेंगलुरु के लिए 39 से 42वें हफ्ते (20 सितंबर-17 अक्टूबर) के बीच की ‘रेडियो ऑडियंस मीजरमेंट’ (RAM) रेटिंग्स जारी हो गई हैं। इन रेटिंग्स के अनुसार, बेंगलुरु में ‘रेडियो सिटी’ (Radio City) को और कोलकाता में ‘रेडियो मिर्ची’ (Radio Mirchi) को सबसे ज्यादा लाभ हुआ है।

मुंबई में 12 साल से ऊपर आयुवर्ग के 12.2 मिलियन श्रोताओं में ‘फीवर एफएम’ (Fever FM)  का मार्केट शेयर सबसे ज्यादा 16.8 प्रतिशत रहा है। श्रोताओं की हिस्सेदारी में ‘रेडियो सिटी’ (Radio City) 14 प्रतिशत शेयर के साथ दूसरे स्थान पर रहा। 13.1 प्रतिशत मार्केट शेयर के साथ ‘बिग एफएम’ (Big FM) इस लिस्ट में तीसरे नंबर पर आ गया है। सुबह 11 बजे से दोपहर 12 बजे तक यहां रेडियो सबसे ज्यादा सुना गया। इस अवधि में बेंगलुरु और कोलकाता के लोगों ने सबसे ज्यादा रेडियो सुना। इन चार हफ्तों में 95.3 प्रतिशत श्रोताओं ने सभी जगह रेडियो को सुना, जबकि 91.6 प्रतिशत लोगों ने घर से बाहर रेडियो सुना।

दिल्ली के मार्केट की बात करें तो 12 साल से ऊपर आयुवर्ग के 16.5 मिलियन श्रोताओं में 22.5 प्रतिशत मार्केट शेयर के साथ ‘फीवर एफएम’ (Fever FM) इस लिस्ट में पहले नंबर पर रहा है। दिल्ली के मार्केट में 12.2 प्रतिशत शेयर के साथ ‘रेड एफएम’ (Red FM)  दूसरे नंबर पर और 11.7 प्रतिशत शेयर के साथ ‘रेडियो सिटी’ तीसरे नंबर पर रहा है। यहां श्रोताओं की संख्या सबसे ज्यादा सुबह 9:00 बजे से 10:00 बजे के बीच रही। इन चार हफ्तों में यहां 97.2 प्रतिशत श्रोताओं ने सभी जगह रेडियो को सुना, जबकि 89.7 प्रतिशत लोगों ने घर से बाहर रेडियो सुना।

वहीं, बेंगलुरु के 5.3 मिलियन श्रोताओं में 25.3 प्रतिशत लोगों ने ‘रेडियो सिटी’ (Radio City) को सुना और यह इस लिस्ट में टॉप पर रहा। ‘बिग एफएम’ (Big FM) 23.3 प्रतिशत के साथ दूसरे और ‘फीवर एफएम’ (Fever FM) 15.7 प्रतिशत के साथ तीसरे स्थान पर रहा। यहां सुबह आठ से नौ बजे के बीच श्रोताओं की संख्या सबसे ज्यादा थी। इन चार हफ्तों में यहां 89.6 प्रतिशत श्रोताओं ने सभी जगह रेडियो को सुना, जबकि 91.5 प्रतिशत लोगों ने घर से बाहर रेडियो सुना।

अब कोलकाता के मार्केट को देखें तो यहां एफएम सुनने वाले 9.1 मिलियन श्रोताओं में से 27.6 प्रतिशत श्रोताओं ने ‘रेडियो मिर्ची’ (Radio Mirchi) को सुना और यह लिस्ट में टॉप पर रहा। 26.3 प्रतिशत श्रोताओं के साथ ‘बिग एफएम’ (Big FM) इस लिस्ट में दूसरे नंबर पर है, जबकि ‘रेड एफएम’ (Red FM) इस लिस्ट में 15.7 प्रतिशत के साथ तीसरे नंबर पर है। सुबह 9:00 बजे से 10:00 बजे के बीच श्रोताओं की संख्या यहां सबसे ज्यादा रही है। इन चार हफ्तों में यहां 78.9 प्रतिशत श्रोताओं ने सभी जगह रेडियो को सुना, जबकि 98.3 प्रतिशत लोगों ने घर से बाहर रेडियो सुना।

इस अवधि में मुंबई औक कोलकाता मार्केट्स में रेडियो की पहुंच श्रोताओं के बीच सबसे ज्यादा रही। बेंगलुरु और मुंबई के मार्केट्स में घर से बाहर रेडियो सुनने वालों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है।

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OTT के खिलाफ अदालती मामलों को लेकर MIB उठा सकती है ये कदम

डिजिटल प्लेटफार्म्स को अपने दायरे में लाने के बाद सूचना-प्रसारण मंत्रालय (MIB) अब कथित तौर पर भारत में OTT प्लेटफार्म्स के खिलाफ सभी अदालती मामलों को...

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 27 November, 2020
Last Modified:
Friday, 27 November, 2020
MIB

डिजिटल प्लेटफार्म्स को अपने दायरे में लाने के बाद सूचना-प्रसारण मंत्रालय (MIB) अब कथित तौर पर भारत में OTT प्लेटफार्म्स के खिलाफ सभी अदालती मामलों को सुप्रीम कोर्ट में स्थानांतरित करने के लिए एक याचिका दायर करने की योजना बना रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मंत्रालय ने पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया ताकि उन्हें इसके अगले कदम के बारे में सूचित किया जा सके। देश के अलग-अलग हिस्सों में कई ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ 23 से अधिक अदालती मामले दायर किए गए हैं। रिपोर्ट्स में कहा गया है कि एमआईबी का प्रतिनिधित्व करने वाले वरिष्ठ अधिकारियों को दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु आदि शहरों में जाना पड़ता है, लिहाजा मंत्रालय का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट के तहत सभी मामलों को लाना बेहतर होगा।

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 Netflix में इस बड़े पद से स्वाति मोहन का इस्तीफा

नेटफ्लिक्स (Netflix) में मार्केटिंग के डायरेक्टर स्वाति मोहन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 26 November, 2020
Last Modified:
Thursday, 26 November, 2020
Swati Mohan

नेटफ्लिक्स (Netflix) में मार्केटिंग की डायरेक्टर स्वाति मोहन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इस खबर की पुष्टि खुद स्वाति मोहन ने हमारी सहयोगी वेबसाइट एक्सचेंज4मीडिया (exchange4media.com) से की।

नेटफ्लिक्स में अपने 2.5 साल के कार्यकाल के दौरान  मोहन ने इस प्लेटफॉर्म के लिए भारत में मार्केटिंग की जिम्मेदारियां संभाली और एक मजबूत टीम का निर्माण किया। उन्होंने नए-नए मार्केटिंग कैंपेन्स के जरिए इस स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म की लोकप्रियता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

नेटफ्लिक्स में शामिल होने से पहले, मोहन अप्रैल 2015 से नेशनल जियोग्राफिक (National Geographic) और फॉक्स नेटवर्क्स ग्रुप, इंडिया (Fox Networks Group, India) की कंट्री हेड थीं। जनवरी 2012 से मार्च 2015 के बीच वे इंडिया में फॉक्स इंटरनेशनल चैनल में कंटेंट और प्रोग्रामिंग की वाइस प्रेजिडेंट के तौर पर इसके कई चैनल्स के लिए प्रोग्रामिंग और कंटेंट पोर्टफोलियो की जिम्मेदारी संभाल रही थीं।

उन्हें इस इंडस्ट्री में 16 वर्षों का अनुभव है। इस बीच इन्होंने Group M, O&M, FBC Media and और Endemol जैसी कंपनियों में काम किया।

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इस मामले की मीडिया रिपोर्टिंग पर लगाई रोक सुप्रीम कोर्ट ने हटाई

आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा हाई कोर्ट के 15 सितंबर के आदेश को चुनौती देते हुए दायर की गई याचिका पर सुनवाई के दौरान बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने ये स्टे ऑर्डर जारी किया।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 26 November, 2020
Last Modified:
Thursday, 26 November, 2020
SC

अमरावती भूमि घोटाले मामले में मीडिया रिपोर्टिंग पर लगाई रोक को सुप्रीम कोर्ट ने हटा दी है। यह रोक आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने लगाई थी। आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा हाई कोर्ट के 15 सितंबर के आदेश को चुनौती देते हुए दायर की गई याचिका पर सुनवाई के दौरान बुधवार को जस्टिस अशोक भूषण, आर. सुभाष रेड्डी और एमआर शाह की पीठ ने ये स्टे ऑर्डर जारी किया।

बेंच ने इस मामले में एफआइआर की जांच पर रोक सहित हाई कोर्ट के अन्य निर्देशों पर रोक लगाने इनकार कर दिया। जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस आरएस रेड्डी और जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने मामले की अंतिम सुनवाई अगले साल जनवरी में करेगी।

बेंच ने सभी पक्षकारों को निर्देश दिया है कि इस बीच वे हलफनामा दायर करें, साथ ही हाई कोर्ट से भी गुजारिश की है कि इस बीच वे मामले में कोई फैसला न लें।

सुप्रीम कोर्ट ने अपील पर मुख्यमंत्री वाइएस जगन मोहन रेड्डी को नोटिस जारी नहीं किया और आंध्र प्रदेश के पुलिस महानिदेशक और राज्य के पूर्व महाधिवक्ता सहित अन्य से प्रतिक्रिया मांगी, जिनकी याचिका पर उच्च न्यायालय ने आदेश पारित किया था।   

मामले की सुनवाई के दौरान आंध्र प्रदेश सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने हाई कोर्ट के आदेश को अभूतपूर्व बताया। उन्होंने कहा कि इस तरह के अंतरिम आदेश को पारित नहीं किया जाना चाहिए था। धवन ने घोटाले के बारे में कुछ तथ्यों का भी हवाला दिया, जो कथित तौर पर पूर्व महाधिवक्ता और अन्य लोगों से जुड़े विभिन्न लेनदेन को लेकर था।

इससे पहले 15 सितंबर को, आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय ने जांच पर रोक लगा दी थी। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो द्वारा दर्ज की गई प्राथमिकी के बाद हाई कोर्ट ने यह फैसला लिया था। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो द्वारा 2014 में राज्य के विभाजन के बाद अमरावती को राजधानी में स्थानांतरित करने के संबंध में भ्रष्टाचार और अवैध भूमि के लेन-देन का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज की थी। हाई कोर्ट ने एफआईआर के संबंध में कोई भी सूचना किसी भी इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट या सोशल मीडिया में सार्वजनिक नहीं किए जाने का आदेश जारी किया था।

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‘कादम्बिनी’ पत्रिका के प्रभारी संपादक रहे वरिष्ठ पत्रकार राजीव कटारा का निधन

कोरोना ने हिन्दुस्तान टाइम्स की कादम्बिनी पत्रिका के प्रभारी संपादक रह चुके वरिष्ठ पत्रकार राजीव कटारा को भी अपनी जद में ले लिया, जिसकी चलते उनका निधन हो गया।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 26 November, 2020
Last Modified:
Thursday, 26 November, 2020
rajivkatara

देश में कोरोना वायरस के मामलों में एक बार फिर तेजी देखने को मिल रही है। वहीं इस बीच कोरोना ने हिन्दुस्तान टाइम्स की कादम्बिनी पत्रिका के प्रभारी संपादक रह चुके वरिष्ठ पत्रकार राजीव कटारा को भी अपनी जद में ले लिया, जिसकी चलते उनका निधन हो गया। कोविड संक्रमण के बाद दिल्ली के बत्रा अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था।

गौरतलब है कि वरिष्ठ पत्रकार राजीव कटारा 2006 से हिन्दुस्तान मीडिया वेंचर के साथ एक लंबी पारी खेल रहे थे। 2 महीने पहले तक वे ‘कादंबिनी’ पत्रिका  के प्रभारी संपादक थे। सौम्य स्वभाव के राजीव कटारा की हर विषय की अच्छी पकड़ थी।

कटारा ‘चौथी दुनिया’, ‘अमर उजाला’ समेत कई प्रतिष्ठित संस्थानों में वरिष्ठ पदों पर रह चुके थे। 1983 में ‘नवभारत टाइम्स’ से ट्रेनिंग लेने के बाद ‘चौथी दुनिया’, ‘संडे ’, ‘राष्ट्रीय सहारा’, ‘माया’, ‘आजतक’, ‘दैनिक जागरण’, ‘अमर उजाला’, ‘दैनिक भास्कर’ में काम करने के बाद ‘हिन्दुस्तान’ से जुड़े। समाचार4मीडिया से एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने बताया था कि 1986 में ‘चौथी दुनिया’ ने उन्हें पत्रकारिता का बड़ा ब्रेक दिया। वे कहते थे कि कमर वहीद नकवी, रामकृपाल सिंह और संतोष भारतीय की टीम ने बहुत कुछ सिखाया। वो उनकी पत्रकारिता का यादगार दौर था। वहां काम करते वक्त गजब का आत्मविश्वास पैदा होता था।

उन्होंने बताया था कि अजय चौधरी, वीरेंद्र सैंगर, अर्चना झा, आदियोग के साथ उन्होंने वहां खूब काम किया। उसके बाद उदयन शर्मा के साथ ‘संडे ऑब्जर्वर’ के जरिए उन्होंने अपनी पारी आगे बढ़ाई। करीब साढ़े तीन साल वहां काम करने के बाद वे ‘राष्ट्रीय सहारा’ गए। उस दौरान सुमिता, शेषनारायण सिंह जैसे पत्रकार उनके साथी रहे। वहां नौ महीने काम करने के बाद ‘माया’ जॉइन की, पर वहां भी वे नौ महीने ही काम कर पाए। उसके बाद वे ‘आजतक’ चले गए।

इसके बाद 1996 में उनकी जागरण में बतौर फीचर एडिटर दिल्ली में जॉइनिंग हुई। जागरण के साथ उन्होंने फीचर के कई प्रयोग किए। सहस्त्राब्दि अंकों का संयोजन किया। 2001 में ‘अमर उजाला’ के साथ सातों दिनों के फीचर पेज की शुरुआती की। 2003 में सीएसई की फैलोशिप के अंतर्गत बैतूल में उन्होंने काम किया। फिर 2006 में ‘हिन्दुस्तान’ आए और यहां रिसर्च और स्पेशल प्रोजेक्ट के इंजार्च, खेल संपादक के पद पर काम करते हुए ‘कादम्बिनी’ का प्रभार इस वर्ष सितंबर तक संभाला।

पत्रकारिता के क्षेत्र में अहम योगदान के देने लिए उन्हें 2013 के ‘गणेश शंकर विद्यार्थी’ सम्मान से सम्मानित किया गया था। यह सम्मान उन्हें पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने प्रदान किया था। 

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प्रेस की स्वतंत्रता को कुछ यूं सुनिश्चित करेगी एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया

पैनल में वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल, श्याम दीवान, राजीव नायर, संजय हेगड़े, मेनका गुरुस्वामी, प्रशांत कुमार और शाहरुख आलम को शामिल किया गया है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 25 November, 2020
Last Modified:
Wednesday, 25 November, 2020
EGI

संपादकों की संस्था ‘एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया’ (Editors Guild Of India) ने एक कानूनी सलाहकार पैनल नियुक्त किया है। यह पैनल प्रेस की स्वतंत्रता से संबंधित महत्वपूर्ण मुद्दों पर गिल्ड को सलाह मशविरा देगा और मिलकर काम करेगा।

इस बारे में गिल्ड की ओर से एक बयान भी जारी किया गया है। इस बयान में कहा गया है, ‘यह कानूनी पैनल सिविल और आपराधिक कानूनों के मामलों में गिल्ड की मदद करेगा।’ पैनल में वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल, श्याम दीवान, राजीव नायर, संजय हेगड़े, मेनका गुरुस्वामी, प्रशांत कुमार और शाहरुख आलम को शामिल किया गया है।

बताया जाता है कि आने वाले समय में पैनल का विस्तार किया जाएगा और इसमें विभिन्न राज्यों से ऐसे कानूनी सलाहकारों को शामिल किया जाएगा, जिन्होंने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और मीडिया से संबंधित मुद्दों पर काम किया है।

 

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The Walt Disney Company को बाय बोल नए सफर पर निकले पवन शर्मा

पवन शर्मा ‘द वॉल्ट डिज्नी कंपनी’ के साथ 11 साल से ज्यादा समय से जुड़े हुए थे।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 26 November, 2020
Last Modified:
Thursday, 26 November, 2020
Pawan Sharma

‘द वॉल्ट डिज्नी कंपनी’ (The Walt Disney Company) इंडिया के नेशनल हेड-रेवेन्यू (branded content and Bindass) पवन शर्मा ने कंपनी को अलविदा कह दिया है। सूत्रों के हवाले से मिली खबर के अनुसार उन्होंने अब प्रतिष्ठित मीडिया समूह में शामिल नेटवर्क18 (Network 18) के साथ अपनी नई पारी शुरू की है।

पवन शर्मा ‘द वॉल्ट डिज्नी कंपनी’ के साथ 11 साल से ज्यादा समय से जुड़े हुए थे। उन्होंने वर्ष 2009 में इस कंपनी को जॉइन किया था। वर्ष 2013 में उन्हें रीजनल सेल्स हेड (UTV Action और World Movies) के पद पर प्रमोट किया गया था।

बता दें कि शर्मा पूर्व में ‘स्टार इंडिया’ (Star India) और ‘रिलायंस बिग एंटरटेनमेंट’ (Reliance Big Entertainment) के साथ भी अपनी जिम्मेदारी निभा चुके हैं। कॉरपोरेट के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए उन्हें Rex Karmaveer Gold Category Award भी मिल चुका है।  

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