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राहुल कंवल: जुनून, पत्रकारिता और नेतृत्व का बेहतरीन मिश्रण
‘एनडीटीवी’ में सीईओ और एडिटर-इन-चीफ के रूप में शामिल होने जा रहे राहुल कंवल के पास ब्रॉडकास्ट जर्नलिज्म में 25 से अधिक वर्षों का अनुभव है।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 9 months ago
‘कुछ लोग खबरों को पढ़ते हैं, कुछ उन्हें जीते हैं।’
राहुल कंवल का नाम भारतीय पत्रकारिता में उस पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करता है, जिसने न केवल टीवी न्यूज की भाषा को बदला, बल्कि उसे दर्शकों की नब्ज के साथ जोड़ने का हुनर भी दिखाया। अब, ‘एनडीटीवी’ में बतौर सीईओ और एडिटर-इन-चीफ नई पारी शुरू करने के साथ, उनका सफर भारतीय मीडिया के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है।
‘सेबी’ के नियमों के तहत स्टॉक एक्सचेंज को दी गई सूचना के मुताबिक, 25 अप्रैल 2025 को एनडीटीवी की पैरेंट कंपनी की बोर्ड मीटिंग में इस नियुक्ति को औपचारिक मंजूरी दी गई, और सूचना व प्रसारण मंत्रालय की अंतिम स्वीकृति के बाद वह 16 जून 2025 से यह जिम्मेदारी संभालेंगे। वह AMG मीडिया नेटवर्क्स (एनडीटीवी और IANS का स्वामित्व इसी के पास है) के सीईओ और एडिटर-इन-चीफ संजय पुगलिया के नेतृत्व में काम करेंगे। यहां राहुल की भूमिका-संपादकीय और बिजनेस ऑपरेशंस को संभालने की होगी।
बता दें कि ‘टीवी टुडे नेटवर्क’ से इस्तीफे के बाद राहुल कंवल की अगली भूमिका को लेकर अटकलें तेज थीं। ऐसे समय में जब न्यूज ईकोसिस्टम पर AI और डिजिटल परिवर्तनों का गहरा प्रभाव पड़ रहा है, एनडीटीवी में राहुल कंवल की नियुक्ति एक मास्टरस्ट्रोक मानी जा रही है। हाल ही में, ‘इंडिया टुडे’ से एक अन्य वरिष्ठ पत्रकार शिव अरूर के ‘एनडीटीवी’ में मैनेजिंग एडिटर के रूप में शामिल होने के बाद अब राहुल की नियुक्ति से ‘एनडीटीवी’ की संपादकीय व नेतृत्व क्षमता और मजबूत होने की उम्मीद जताई जा रही है।
राहुल कंवल का जन्म 14 सितंबर 1980 को महाराष्ट्र के देवलाली में हुआ। उनके पिता, ब्रिगेडियर गुरमीत कंवल, एक प्रतिष्ठित रक्षा विश्लेषक और लेखक थे। राहुल ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा इलाहाबाद (अब प्रयागराज) के सेंट जोसेफ स्कूल से शुरू की और बाद में आर्मी पब्लिक स्कूल, धौला कुआं, नई दिल्ली से पूरी की। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की।
राहुल ने अपनी शैक्षणिक यात्रा को और समृद्ध करते हुए हार्वर्ड बिजनेस स्कूल (HBS) से 2022 में जनरल मैनेजमेंट प्रोग्राम पूरा किया। इसके अलावा, उन्होंने HBS से अर्थशास्त्र, वित्त और रणनीति में उन्नत पाठ्यक्रम उच्च सम्मान के साथ पूर्ण किए। बतौर चेवनिंग स्कॉलर, उन्होंने कार्डिफ यूनिवर्सिटी (यूके) से इंटरनेशनल ब्रॉडकास्ट जर्नलिज्म का कोर्स किया और रोरी पेक ट्रस्ट ग्रांट के तहत Hostile Environment Journalism की ट्रेनिंग ली। यह नींव उनके पत्रकारिता करियर की मजबूत आधारशिला बनी।
राहुल कंवल ने वर्ष 1999 में 'जी न्यूज' के साथ अपने करियर की शुरुआत की, जहां उन्हें सबसे युवा न्यूज एंकर के रूप में पहचान मिली। वर्ष 2002 में वह ‘आजतक’ में प्रमुख संवाददाता और एंकर के रूप में शामिल हुए। इसके बाद, इंडिया टुडे समूह के साथ उनकी लंबी पारी शुरू हुई, जहां उन्होंने न्यूज डायरेक्टर और बिजनेस टुडे के एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर जैसे शीर्ष पदों तक का सफर तय किया। उनके प्राइम टाइम शो ‘न्यूजट्रैक’ और वीकेंड इंटरव्यू शो ‘जब वी मेट’ ने दर्शकों के बीच खास लोकप्रियता हासिल की, जिसमें उन्होंने कठिन खबरों को आकर्षक कहानी के साथ पेश करने का हुनर दिखाया।
राहुल की पत्रकारिता राजनीतिक रिपोर्टिंग, चुनावी कवरेज और खोजी पत्रकारिता में गहरी विशेषज्ञता के लिए जानी जाती है। ‘हेडलाइंस टुडे’ और ‘आजतक’ जैसे चैनलों में वरिष्ठ संपादकीय भूमिकाओं के बाद, उन्होंने इंडिया टुडे टीवी पर अपनी पहचान को और मजबूत किया। यहां से जब राहुल कंवल ने इस्तीफा दिया, तब इंडिया टुडे समूह की वाइस चेयरपर्सन और ग्रुप एडिटोरियल डायरेक्टर कली पुरी ने उनकी मेहनत और नेतृत्व को सराहते हुए उन्हें ‘मेरिट और कड़ी मेहनत की प्रेरक कहानी’ बताया।
दरअसल, राहुल कंवल ने सिर्फ खबरें पेश करने तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि पत्रकारिता में बुनियादी सुधार और नवाचार किए। उन्होंने Anti-Fake News War Room (AFWA) की शुरुआत की, जो फेक न्यूज और दुष्प्रचार से निपटने का एक सशक्त मंच बना। Open Source Intelligence Desk (OSINT) की स्थापना से खोजी पत्रकारिता को नई धार मिली, जिसमें आधुनिक डिजिटल फॉरेंसिक्स का उपयोग हुआ। इसके अलावा, Data Intelligence Unit (DIU) ने चुनावी डेटा और ट्रेंड्स की गहन पड़ताल को आसान बनाया। ये पहल भारतीय मीडिया में विश्वसनीयता के लिए नए मानक स्थापित करती हैं, खासकर ऐसे समय में जब फेक न्यूज वैश्विक चुनौती बन चुकी है।
राहुल कंवल को पत्रकारिता में उत्कृष्ट योगदान के लिए ‘एक्सचेंज4मीडिया न्यूज ब्रॉडकास्टिंग अवॉर्ड्स’ (enba) समेत कई पुरस्कार मिले हैं। उनकी निडर फील्ड रिपोर्टिंग के लिए उन्हें रोरी पेक ट्रस्ट ग्रांट भी प्राप्त हुआ।
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