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रेडियो की आवाज से बदलाव की मिसाल तक: निशा नारायणन की यात्रा की प्रेरक झलक
बोर्डरूम बैठकों और ब्रॉडकास्ट रील्स से परे निशा नारायणन एक ऐसी शख्सियत भी हैं जिन्हें शास्त्रीय संगीत, हैंडलूम वस्त्रों और समग्र विज्ञान में गहरी दिलचस्पी है।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 9 months ago
जब कोई शख्स ढाई दशक से भी ज्यादा वक्त तक भारतीय रेडियो की दुनिया को एक नई पहचान देने में लगा रहा हो, तो उसका जन्मदिन सिर्फ एक सालाना उत्सव नहीं होता, बल्कि उस विरासत की गूंज होती है जो अब भी आकार ले रही है। जी हां, यहां बात हो रही है RED FM और Magic FM की डायरेक्टर व COO निशा नारायणन की, जो अपना जन्मदिन मना रही हैं। वह अब भी इंडस्ट्री में एक ऐसी ताकत बनी हुई हैं जिसे 'नेटिव लोकल' कहा जा सकता है, यानी पूरी तरह जमीन से जुड़ी, स्पष्ट मौजूदगी वाली और हमेशा वही आवाज उठाने वाली जो सही वक्त और सही जगह पर सबसे जरूरी हो।
ऑल इंडिया रेडियो में पत्रकार के तौर पर अपने करियर की शुरुआत करने वाली निशा का सफर महज पदों की उन्नति नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा रास्ता है जो जुनून, जिज्ञासा और बार-बार खुद को नए सांचे में ढालने की ताकत से बना है। जब बाकी लोग अपने तय रास्ते पर चलते रहे, निशा ने पूरी नई राहें बनाईं- जैसे Red Indies और Red Podcasts जैसी पहल शुरू करके। उनके नेतृत्व में Red FM एक ऐसा मंच बना जो केवल सुना नहीं गया, बल्कि महसूस भी किया गया।
उनके नाम पर कई पुरस्कार हैं- दादासाहेब फाल्के इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल अवॉर्ड, कई WCRC सम्मान और एक प्रतिष्ठित Chevening स्कॉलरशिप। लेकिन उन्हें अलग बनाता है उनकी सोच, जो रेडियो इंडस्ट्री के ढांचे को बदलने की लगातार कोशिश करती रही है। वह नीति सुधार की प्रखर पक्षधर रही हैं और रेडियो माध्यम की संभावनाओं को रोकने वाली रुकावटों पर खुलकर सवाल उठाती रही हैं। कार्यकारी कुशलता और संपादकीय स्पष्टता के इसी संगम ने उन्हें एक लीडर से कहीं ज्यादा, एक प्रड्यूसर बना दिया है।
संस्कृति के स्तर पर भी निशा ने हमेशा क्षेत्रीय और इंडी कंटेंट पर दांव लगाया- यह एक चलन नहीं, एक दृष्टिकोण रहा है। मराठी सिनेमा से लेकर दक्षिण भारतीय इंडी म्यूजिक तक, उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि 'स्थानीय' कभी 'सीमित' न हो, बल्कि पूरे देश का प्रतिनिधित्व करे।
और फिर, इन बोर्डरूम बैठकों और ब्रॉडकास्ट रील्स से परे निशा नारायणन एक ऐसी शख्सियत भी हैं जिन्हें शास्त्रीय संगीत, हैंडलूम वस्त्रों और समग्र विज्ञान में गहरी दिलचस्पी है। परंपरा और परिवर्तन का यही मेल उन्हें एक ऐसा नेता बनाता है जो बदलाव को केवल तरंगों के जरिए नहीं, बल्कि ठोस क़दमों से प्रसारित करती हैं।
उनकी कहानी बताती है कि कैसे आवाज सिर्फ सुनी नहीं जाती, सही दिशा में भेजी जाए तो वह बदलाव भी ला सकती है।
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