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दूरदर्शन-आकाशवाणी के कंटेंट नीलाम करने की नीति पर उठे सवाल, CEO ने दिया जवाब
प्रसार भारती द्वारा आकाशवाणी और दूरदर्शन के आर्काइवल कंटेंट के इस्तेमाल करने का अधिकार दूसरे पक्षों को देने की नीति पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं
समाचार4मीडिया ब्यूरो 4 years ago
प्रसार भारती द्वारा आकाशवाणी और दूरदर्शन के आर्काइवल कंटेंट के इस्तेमाल करने का अधिकार दूसरे पक्षों को देने की नीति पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं, जिसके बाद सार्वजनिक प्रसारक के सीईओ शशि शेखर वेम्पति ने सभी तरह के आरोपों से इनकार किया है।
शशि शेखर वेमपति ने इस विषय पर वरिष्ठ पत्रकार प्रभु चावला के सवालों भरे एक ट्वीट के जवाब में साफ तौर पर कहा कि ऐसा कोई फैसला नहीं किया गया है। वेमपति ने लिखा, ‘कंटेंट के प्रसारण अधिकार को 'सिंडिकेट' करने के लिए (प्रसारण अधिकार के लिए व्यावसायिक तौर पर समूह बनाने) हाल की अधिसूचित नीति को समझने में लगता है गलती की गयी है।’
उन्होंने कहा, 'ये अधिकारों और सीमाओं पर विशिष्ट कानूनी पहलू हैं, जिन पर ऐसे किसी भी 'सिंडिकेशन' के लाइसेंस समझौतों में गौर किया जाएगा। इस समय केवल व्यापक नीति को अधिसूचित किया गया है। विस्तृत लाइसेंस समझौते ई-नीलामी अधिसूचना का हिस्सा होंगे, जब वे आयोजित किए जाएंगे।'
वेमपति ने अपने ट्वीट के साथ इस नीति की पूरी अधिसूचना के लिंक को भी टैग किया है जिसमें पुराने कार्यक्रमों के प्रसारण के अधिकार प्राप्त करने की तमाम शर्तें भी हैं।
The Hon'ble MP it appears has been misinformed, there is no such decision. A recently notified policy for syndicating content rights seems to have been misinterpreted. The policy can be found here for a correct understanding https://t.co/1RnTVPVGkh
— Shashi Shekhar Vempati शशि शेखर (@shashidigital) October 18, 2021
बता दें कि चावला ने अपने ट्वीट में यह सवाल किया था कि क्या सरकार इन कंटेंट्स को भविष्य में खुद इस्तेमाल करने के लिए विदेशियों को पैसा देगी? उन्होंने कहा कि पहले हमारे दस्तावेज अंग्रेज उठा ले गए थे और अब यह? बीच में कौन बैठा है जो बाहर के लोगों के लिए काम कर रहा है? उन्होंने उसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और प्रसार भारती को भी टैग किया था।
Its implications? GOI would have to pay to the successful highest bidder for accessing pictures and speeches of our great national leaders including Sardar Patel? @prasarbharati should offer syndicate services and make huge money. @ianuragthakur @AmitShah @narendramodi https://t.co/ePELTxXqWd
— PrabhuChawla (@PrabhuChawla) October 18, 2021
चावला ने अपने इस पत्र के साथ मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के मदुरै (तमिलनाडु) से निर्वाचित लोकसभा सांसद एस वेंकटेशन द्वारा सूचना-प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर को लिखे पत्र को भी लगाया है, जिसमें सांसद ने प्रसार भारती के अभिलेखागार में संग्रहीत आकाशवाणी और दूरदर्शन की पुरानी सामग्री को नीलाम करने के सरकार के निर्णय की आलोचना की है और इसे रोके जाने की मांग की है।
Thanks for clarifications. Am sure copyrights will remain with the PB. And due credit would be given to while sharing its content? That is the normal business model adopted by media oganisations. PB should retain its right to use it without any charges. @narendramodi https://t.co/STiTVDHIR2
— PrabhuChawla (@PrabhuChawla) October 18, 2021
बता दें कि मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) सांसद एस वेंकटेशन ने सूचना-प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर को इस संबंध में एक पत्र लिखा था, जिसमें उन्होंने कहा था कि यह गौर करना अफसोसजनक है कि मुद्रीकरण ऐतिहासिक खजाने के विपणन तक चला गया है। इसका इस देश की राजनीति के साथ ही शांति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। वेंकटेशन ने पत्र में सरकार पर आरोप लगाया कि केवल राजकोषीय घाटे के प्रबंधन की अल्पकालिक जरूरतों के मद्देनजर यह कदम उठाया जा रहा है।
Prasar Bharathi has decided to e auction archival contents of historical importance including Debates in Constituent assembly and Mile stone events of Indian history. History is not a commodity for making money. That is the Nation's invaluable treasure. #History@ianuragthakur pic.twitter.com/uLpMAeDLX0
— Su Venkatesan MP (@SuVe4Madurai) October 18, 2021
इस पर वेमपति ने माकपा सांसद को जवाब देते हुए ट्वीट किया, 'आपके जैसे प्रतिष्ठित और विद्वान व्यक्ति की दुर्भाग्यपूर्ण टिप्पणी, महाशय। ऐसा लगता है कि आपने नीति दस्तावेज नहीं पढ़ा है। कृपया इसे पढ़ लें।'
वहीं प्रसार भारती के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) और तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य जवाहर सरकार ने भी इस कदम पर सवाल उठाया। उन्होंने ट्वीट किया,'हमारे देश के अमूल्य रिकॉर्ड की यह नीलामी वास्तव में क्या है? तुरंत स्पष्ट करें!'
आपको बता दें कि हाल ही में यह खबर आयी थी कि प्रसार भारती ने आकाशवाणी और दूरदर्शन के अभिलेखागार में संग्रहीत पुरानी रिकॉर्ड की हुई सामग्री (आर्काइवल कंटेंट) को मोनेटाइज करने यानी कि इसे व्यवसायिक तरीके से सैटेलाइट टीवी चैनलों और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को नीलाम करने का फैसला किया है।
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