BW Disrupt 40 Under 40 अवॉर्ड्स से नवाजे गए ये युवा, देखें पूरी लिस्ट

बिजनेसवर्ल्ड की ओर से देश के 40 साल से कम उम्र वाले ऐसे युवाओं को अवॉर्ड दिया गया, जिन्होंने एंटरप्रिन्योरशिप की दुनिया में धूम मचा रखी है

Last Modified:
Friday, 25 October, 2019
Businessworld

एंटरप्रिन्योरशिप की दुनिया में धूम मचाने वाले देश के 40 साल की उम्र से कम वाले 40 चुनिंदा ‘डिस्रप्टिव फाउंडर्स’ (disruptive founders), कॉरपोरेट लीडर्स और इंडस्ट्री की दशा व दिशा बदलने वालों की तलाश आखिरकार पूरी हो गई। दिल्ली में 23 अक्टूबर को आयोजित (BW Businessworld 40 under 40 Awards) के तीसरे एडिशन के तहत इन सभी विजेताओं को सम्मानित किया गया। बिजनेसवर्ल्ड (BW Businessworld) की ओर से इस कार्यक्रम का आयोजन स्टार्टअप्स के लिए लॉन्च किए गए मीडिया प्लेटफॉर्म ‘BW Disrupt’ के साथ मिलकर किया गया।

बता दें कि विजेताओं का चयन करने के लिए एक जूरी का गठन किया गया था। जूरी को (40 under 40 awards) के लिए इस साल 267 एंट्रीज मिली थीं। इस साल जूरी में ‘माइक्रोसॉफ्ट इंडिया’ के पूर्व चेयरपर्सन भास्कर प्रमाणिक, ‘वेंचर गुरुकुल’ (Venture Gurukool) के फाउंडर महेंद्र स्वरूप आदि शामिल थे।

इससे पहले 10 अक्टूबर को जूरी मीट का आयोजन किया गया था, जहां पर जूरी मेंबर्स ने शॉर्टलिस्ट किए गए 120 कैंडिडेट्स में से 40 विजेताओं के नाम पर मुहर लगाई। जूरी मेंबर और ‘लाइटस्पीड इंडिया पार्टनर्स’ (Lightspeed India Partners) के पार्टनर वैभव अग्रवाल ने बताया, ‘विजेताओं का चयन काफी मुश्किल काम था और यह प्रक्रिया काफी लंबी चली। इसमें हमें जूरी के अन्य सदस्यों के अनुभव का भी लाभ मिला।’  

जूरी के एक अन्य सदस्य और ‘टीपीजी ग्रोथ’ (TPG Growth) के हेड (भारत और दक्षिण अफ्रीका) शैलेष राव ने कहा, ‘प्रतिभागियों के जुनून, महत्वाकांक्षा, विचारशीलता और परिपक्वता देखकर मैं काफी प्रभावित हूं। इन युवाओं को देखकर मैं कह सकता हूं कि देश और दुनिया काफी अच्छे हाथों में है।’

इस दौरान कार्यक्रम को कई शख्सियतों ने संबोधित भी किया, जिनमें ‘रिपब्लिक टीवी’ के को-फाउंडर, एमडी और एडिटर-इन-चीफ अरनब गोस्वामी, ‘पॉलिसी बाजार’ के को-फाउंडर और डायरेक्टर आलोक बंसल, ‘JJUST Music’ के फाउंडर जैकी भगनानी, ‘अवाना कैपिटल’ (Avana Capital) की फाउंडर अंजलि बंसल और ‘Bobble AI’ के फाउंडर अंकित प्रसाद आदि शामिल थे।

इस अवॉर्ड को पाने वालों की लिस्ट आप यहां देख सकते हैं।

1. Abhay Hanjura, Co-Founder, Licious (Delightful Gourmet)

2. Akshay Mehrotra, Co-Founder & CEO, EarlySalary

3. Angad Bhatia, Founder & COO, MensXP

4. Anindita Sampath, Co-founder & CEO, Yoga Bars (Sproutlife)

5. Anindya Dutta, MD & Co-founder, Stanza Living

6. Ankit Prasad, Founder & CEO, Bobble AI

7. Annu Talreja, Co-Founder & CEO, Oxfordcaps Student Residences

8. Anurag Jain, Founder, KredX

9. Archit Gupta, Founder & CEO, Cleartax

10. Arjun Vaidya, CEO, Dr. Vaidya's

11. Aseem Garg, Founder & Promoter, DCDC Health Services

12. Ashwin Suresh, Founder, Pocket Aces Pictures

13. Bala Sarda, Founder & CEO, Vahdam Teas

14. Bhavin Turakhia, CEO & co-founder, Zeta

15. Dr. B. Abhinay, CEO, Krishna Institute of Medical Sciences

16. Gaurav Goel, Founder & CEO, Samagra | Transforming Governance

17. Ghazal Alagh, Co-founder, MamaEarth

18. Gita Ramanan, CEO, Design Cafe

19. Karan Bedi, Founder-CEO, MX Player

20. Kruti Bharucha, Founder & CEO, Peepul

21. Kushagra Nandan, Co-founder, President, SunSource Energy

22. Malika Sadani, Founder, The Moms Co.

23. Mayank Kachhwaha, COO & Co-Founder, IndiaLends

24. Mayukh Choudhury, Co-founder & CEO, Milaap Social Ventures

25. Miniya Chatterji, Founder & CEO, Sustain Labs Paris

26. Nidhi Kumra, Co-founder & CEO, Your Space

27. Nitin Tewari, Director, Together at 12th & BarTrender OPC

28. Piyush Jain, Co-Founder & CEO, Impact Guru Technology Ventures

29. Priyanka Gill, Founder, and CEO, Luxeva India

30. Pushkar Mukewar, Co-founder and Co-CEO, Drip Capital

31. Rahul Garg, CEO, Moglix - Mogli Labs India

32. Ramakant Sharma, COO & co-founder, Livspace.com

33. Ryan Pinto, CEO, Ryan International Group of Institutions

34. Suhail Sameer, CEO-FMCG, RP-Sanjiv Goenka Group

35. Tuttu M Tomy, Creative Director, Uberdogg design

36. Upasana Taku, Co-founder & COO, Mobikwik

37. Varun Dua, Founder & CEO, ACKO General Insurance

38. Varun Jain, Founder, Director & CEO, Upcurve Business( udChalo)

39. Vipin Pathak, CEO, Aegis Care Advisor

40. Vivek Kumar Singh, Co-Founder & Director, ToneTag

Special Mentions:

Kanika Gupta Shori, Founder and COO, Square Yards

Madhav Sheth, CEO, REALME MOBILE TELCO

Sarvesh Shashi, Founder, and CEO, SARVA – Yoga, Mindfulness & Beyond

आप अपनी राय, सुझाव और खबरें हमें mail2s4m@gmail.com पर भेज सकते हैं या 01204007700 पर संपर्क कर सकते हैं। (हमें फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन और यूट्यूब पर फॉलो करें)

समाचार4मीडिया की नवीनतम खबरें अब आपको हमारे नए वॉट्सऐप नंबर (9958894163) से मिलेंगी। हमारी इस सेवा को सुचारु रूप से जारी रखने के लिए इस नंबर को आप अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव करें।
न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

‘पार्लियामेंट्री बिजनेस’ के ग्रुप सीईओ रोहित सक्सेना को मिला ये सम्मान

रोहित सक्सेना की खेलों में रुचि शुरू से रही है। वे ताइक्वोंडो के राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी रह चुके हैं और कई बार वे अपने वेट के यूपी चैम्पियन रहने के साथ कोरिया से 2nd DAN  ब्लैक बेल्ट हैं।

Last Modified:
Thursday, 06 May, 2021
RohitSaxena545

‘पार्लियामेंट्री बिजनेस’ के ग्रुप सीईओ व मैनेजिंग एडिटर रोहित सक्सेना को खेलो और समाज के लिए किए जा रहे प्रयासों को तब बल मिला, जब उन्हें एशिया पैसिफिक चैम्बर ऑफ कॉमर्स व टोंगा की कॉमनवेल्थ यूनिवर्सिटी ने ‘एशिया पैसिफिक एक्सिलेंस अवॉर्ड’ के लिए चुना। यह सम्मान उन्हें ‘मोस्ट प्रॉमिसिंग पर्सनॉलिटी ऑफ द ईयर’ कैटेगरी के तहत मिला।

उन्होंने खेल संगठनों, खिलाड़ियों और कोरोना काल में जरूरतमंदो की जिस तरह से मदद की है, उसी के चलते उन्हें यह अवॉर्ड दिया गया है।

रोहित सक्सेना की खेलों में रुचि शुरू से रही है। वे ताइक्वोंडो के राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी रह चुके हैं और कई बार वे अपने वेट के यूपी चैम्पियन रहने के साथ कोरिया से 2nd DAN  ब्लैक बेल्ट हैं। देश के कई खेल संगठनो (ताइक्वोंडो, बॉक्सिंग और बॉड़ी बिल्डिंग) के चेयरमैन और अध्यक्ष होने के साथ 21 वर्षो में मीडिया के शुरुआती पद से ग्रुप सीईओ तक का मुकाम  हासिल किया है। रोहित भारत सरकार की मीडिया एंड एंटरटेनमेंट स्किल काउंसिल के वारिष्ठ सलाहकार भी हैं।

उन्होंने  एशिया पैसिफिक चैम्बर ऑफ कॉमर्स को धन्यवाद देने के साथ ये विश्वास भी दिलाया कि उनकी लोगों के काम आने की मुहिम यूं ही चलती रहेगीl  उन्होंने लोगों को यह संदेश भी दिया की बहुत जरूरी हो, तभी बाहर निकले और कोविड  प्रोटोकाल का पालन करेंl

समाचार4मीडिया की नवीनतम खबरें अब आपको हमारे नए वॉट्सऐप नंबर (9958894163) से मिलेंगी। हमारी इस सेवा को सुचारु रूप से जारी रखने के लिए इस नंबर को आप अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव करें।
न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

नहीं रहे NE TV समेत कई चैनलों के मालिक व पूर्व कांग्रेसी नेता मतंग सिंह

कोरोना काल में पूर्व केंद्रीय मंत्री, पूर्व कांग्रेसी नेता व कई चैनलों के मालिक रहे मतंग सिंह का निधन हो गया। उन्होंने दिल्ली के एक अस्पताल में अंतिम सांस ली।

Last Modified:
Thursday, 06 May, 2021
matangsingh5454

कोरोना काल में पूर्व केंद्रीय मंत्री, पूर्व कांग्रेसी नेता व कई चैनलों के मालिक रहे मतंग सिंह का निधन हो गया। उन्होंने दिल्ली के ILBS अस्पताल में अंतिम सांस ली। वे 58 साल के थे।

बताया जा रहा है कि मतंग सिंह ने 22 अप्रैल को कोविड-19 का टेस्ट कराया था और उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आयी थी। उन्हें लीवर से संबंधित बीमारी भी थी।

मतंग सिंह पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव के करीबी थे और उनकी सरकार के दौरान वे केंद्रीय मंत्री थे। सिंह 1992 में असम से राज्यसभा सदस्य के तौर पर चुने गए थे और 1994 से 1998 तक संसदीय मामले में केंद्रीय राज्य मंत्री के तौर पर कार्य किया।

उन्होंने फोकस टीवी, हमार टीवी, एनई टीवी समेत कुल छह चैनल व एक रेडियो स्टेशन की नींव रखी थी। बताया जाता है कि टीवी ब्रॉडकास्ट के कारोबार में उनका आना भी अपनी पत्नी और पूर्व पत्रकार मनोरंजना सिंह के चलते हुआ था। 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मनोरंजना ने न्यूज ब्रॉडकास्ट लाइसेंस के लिए 2003 में आवेदन किया था। इसके बाद उन्होंने पॉजिटिव टीवी (POSITIV TELEVISION PRIVATE LIMITED) नाम की एक कंपनी लॉन्च की, जिसके डायरेक्टर खुद मतंग सिंह, पवन सिंह व मैनेजिंग डायरेक्टर रूपेंद्र नाथ सिंह थे। इस बैनर के तले हिंदी न्यूज चैनल ‘फोकस टीवी’ सहित कुछ और चैनल भी चलते थे। हालांकि हिंदी में महिलाओं पर केंद्रित चैनल ‘फोकस टीवी’ कोई खास असर तो नहीं छोड़ पाया। लेकिन, पूर्वोत्तर में लॉन्च किए गए क्षेत्रीय चैनल शुरुआत में तो अच्छे चले, लेकिन बाद में चैनलों की भीड़ बढ़ गई तो पॉजिटिव टीवी के लिए डगर कठिन हो गई और कंपनी घाटे में चलने लगी थी।    

मनोरंजना मतंग सिंह से कई साल पहले अलग हो गईं थीं। उन्होंने अपने पति पर घरेलू हिंसा का आरोप भी लगाया था। दोनों में पॉजिटिव टीवी के मालिकाना हक को लेकर लंबी कानूनी लड़ाई भी चली। 

मतंग सिंह का जन्म 1962 में असम के तिनसुकिया में एसपी सिंह और रानी रुक्मिणी सिंह के घर हुआ था। उनका नाम शारदा चिटफंड घोटाले में भी आया था।

समाचार4मीडिया की नवीनतम खबरें अब आपको हमारे नए वॉट्सऐप नंबर (9958894163) से मिलेंगी। हमारी इस सेवा को सुचारु रूप से जारी रखने के लिए इस नंबर को आप अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव करें।
न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

नहीं रहे 'युगधर्म' के प्रधान संपादक भगवतीधर वाजपेयी

 वयोवृद्ध पत्रकार और राष्ट्रीय भावधारा के लेखक भगवतीधर वाजपेयी का जबलपुर में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया।

Last Modified:
Thursday, 06 May, 2021
bhagwatidhar8454

 वयोवृद्ध पत्रकार और राष्ट्रीय भावधारा के लेखक भगवतीधर वाजपेयी का जबलपुर में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। वे 96 वर्ष के थे। 

वे 'युगधर्म' जबलपुर के प्रधान संपादक थे व हिंदी एक्सप्रेस जबलपुर के संपादक रवि वाजपेयी के पिता थे। भगवतीधर वाजपेयी एक वरिष्ठ समाजसेवी, साहित्यकार, पत्रकार और बीजेपी के नेता थे। उनका निधन जबलपुर पत्रकारिता के लिए बड़ी छति माना जा रहा है। 

उनके निधन पर भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी) के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी ने गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि युगधर्म (नागपुर-जबलपुर) के संपादक के रूप में उनकी पत्रकारिता ने राष्ट्रीय चेतना का विस्तार किया। वे सिर्फ एक पत्रकार ही नहीं, मूल्यआधारित पत्रकारिता और भारतीयता के प्रतीक पुरुष थे। उनका समूचा जीवन इस देश की महान संस्कृति के प्रचार-प्रसार में समर्पित रहा।

 प्रो. द्विवेदी ने कहा कि 1957 में नागपुर में युगधर्म के संपादक के रूप में कार्यभार ग्रहण करने के बाद उन्होंने 1990 तक सक्रिय पत्रकारिता करते हुए युवा पत्रकारों की एक पूरी पौध तैयार की। उनकी समूची पत्रकारिता में मूल्यनिष्ठा, भारतीयता, संस्कृति के प्रति अनुराग और देशवासियों को सामाजिक और आर्थिक न्याय दिलाने की भावना दिखती है। 1952 में स्वदेश के माध्यम से अपनी पत्रकारिता का प्रारंभ करने वाले श्री वाजपेयी का निधन एक ऐसा शून्य रच रहा है, जिसे भर पाना कठिन है। 2006 में उन्हें मध्यप्रदेश शासन द्वारा माणिकचन्द्र वाजपेयी राष्ट्रीय पत्रकारिता पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

प्रो.द्विवेदी ने कहा कि उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी एक विचार के लिए लगा दी और संघर्षपूर्ण जीवन जीते हुए भी घुटने नहीं टेके। आपातकाल में न सिर्फ उनके अखबार पर ताला डाल दिया गया, वरन उन्हें जेल भी भेजा गया। इसके बाद भी न तो झुके, न ही डिगे। यह संयोग ही है कि अटलबिहारी वाजपेयी जी, भगवती धर जी और माणिक चंद्र वाजपेयी जी तीनों एक ही गांव बटेश्वर (आगरा) से आए। तीनों का जीवन पत्रकारिता से शुरू हुआ। पर तीनों एक ही विचार के लिए जिए।

समाचार4मीडिया की नवीनतम खबरें अब आपको हमारे नए वॉट्सऐप नंबर (9958894163) से मिलेंगी। हमारी इस सेवा को सुचारु रूप से जारी रखने के लिए इस नंबर को आप अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव करें।
न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

इन 4 राज्यों ने भी पत्रकारों को माना फ्रंटलाइन वॉरियर्स, वैक्सीनेशन में मिलेगी प्राथमिकता

अब चार राज्य और सामने आए हैं, जिन्होंने  पत्रकारों को फ्रंटलाइन वॉरियर्स माना और उन्हें वैक्सीनेशन में प्राथमिकता देने की बात कही है।

विकास सक्सेना by
Published - Thursday, 06 May, 2021
Last Modified:
Thursday, 06 May, 2021
Journalists6

कोरोनावायरस का संक्रमण लगातार फैल रहा है। हर दिन इस घातक वायरस से रिकॉर्ड मौतें दर्ज की जा रही हैं। इस बीच उत्तराखंड, बिहार, ओडिशा, मध्य प्रदेश, पंजाब और उत्तर प्रदेश राज्यों में पत्रकारों को फ्रंटलाइन वर्कर घोषित किया हुआ है, लेकिन अब चार राज्य और सामने आए हैं, जिन्होंने  पत्रकारों को फ्रंटलाइन वॉरियर्स माना और उन्हें वैक्सीनेशन में प्राथमिकता देने की बात कही है।

बता दें कि पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री की शपथ लेने के बाद ममता बनर्जी ने भी ऐलान कर दिया कि वह राज्य के सभी पत्रकारों को कोरोना वॉरियर्स घोषित करती हैं। ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार से सभी को फ्री में वैक्सीन देने की मांग की है। उन्होंने कहा कि इसमें लगभग 30 करोड़ रुपए खर्च होंगे और 30 करोड़ रुपए केंद्र सरकार के लिए कुछ नहीं है।

वहीं, झारखंड की हेमंत सरकार ने भी राज्य के पत्रकारों को प्राथमिकता के तौर पर कोरोना वैक्सीन अभियान से जोड़ने पर जोर दिया है। इस संबंध सीएम सोरेन ने स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव को निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना की इस लड़ाई में सभी मिलकर लड़ते हुए जीत हासिल करेंगे। उन्होंने कहा कि कोरोना फिर हारेगा और झारखंड फिर जीतेगा।

इस संबंध में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, झारखंड ने राज्य के सभी डीसी को पत्र लिखा है। इसके तहत झारखंड में 45 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के पत्रकारों को प्राथमिकता के आधार पर वैक्सीनेशन लगाने की बातें कही गई है। कहा गया कि कोरोना से संबंधित विभिन्न प्रकार की सूचनाओं को संग्रहित एवं प्रचारित-प्रसारित करने के उद्देश्य से टीवी और प्रिंट मीडिया के पत्रकार क्षेत्र में लगातार घूमते हैं। इस क्रम में इनका प्राथमिकता के आधार पर वैक्सीनेशन करने की जरूरत है।

कर्नाटक सरकार ने भी पत्रकारों को अग्रिम मोर्चे का कोविड वॉरियर्स मानने और प्राथमिकता के आधार पर उनका वैक्सीनेशन कराने का फैसला किया है। राज्य में कोविड-19 के बढ़ते मामलों को लेकर मुख्यमंत्री बी.एस. येदियुरप्पा ने मंगलवार को मंत्रिमंडल की विशेष बैठक की। बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने संवाददाताओं से कहा, ‘हम पत्रकारों को अग्रिम मोर्चे का कर्मी मानेंगे और प्राथमिकता के आधार पर उनका वैक्सीनेशन कराएंगे।’

हालांकि, येदियुरप्पा ने पत्रकारों से घटनाओं की इस तरह रिपोर्टिंग नहीं करने की अपील की, ताकि लोगों में दहशत न फैले।

कोरोनोवायरस संक्रमणों की दूसरी लहर के बीच, मणिपुर सरकार ने भी सभी मान्यता प्राप्त पत्रकारों को फ्रंटलाइन वर्कर घोषित करने का निर्णय लिया है। राज्य अब प्राथमिकता के तौर पर कोविड-19 के खिलाफ पत्रकारों का वैक्सीनेशन करेगा।

राज्य के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने ट्विटर पर लिखा, ‘तमाम जोखिमों के बावजूद खबरों को लोगों तक पहुंचाने में पत्रकारों के प्रयासों की हम सराहना करते हैं। ये किसी भी मायने में दूसरे फ्रंटलाइन वर्कर्स से कम नहीं हैं। राज्य सरकार मान्यता प्राप्त सभी पत्रकारों का फ्रंटलाइन वॉरियर्स के तौर पर प्राथमिकता के आधार पर वैक्सीनेशन करेगी।’

समाचार4मीडिया की नवीनतम खबरें अब आपको हमारे नए वॉट्सऐप नंबर (9958894163) से मिलेंगी। हमारी इस सेवा को सुचारु रूप से जारी रखने के लिए इस नंबर को आप अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव करें।
न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

iTV Network ने अपनी सेल्स टीम को कुछ यूं दी मजबूती

देश के बड़े न्यूज ब्रॉडकास्टर्स में शुमार ‘आईटीवी नेटवर्क’ (iTV Network) ने अपनी सेल्स टीम को मजबूती दी है।

Last Modified:
Wednesday, 05 May, 2021
ITV Network

देश के बड़े न्यूज ब्रॉडकास्टर्स में शुमार ‘आईटीवी नेटवर्क’ (iTV Network) ने अपनी सेल्स टीम को मजबूती दी है। इसके तहत मीनाक्षी सिंह को नेटवर्क के हिंदी न्यूज चैनल ‘इंडिया न्यूज’ के प्रेजिडेंट (Govt Sales & Retail) के पद पर प्रमोट किया गया है। मीनाक्षी सिंह को इंडस्ट्री में काम करने का करीब 21 साल का अनुभव है। वह तमाम बहुराष्ट्रीय कंपनियों जैसे Gecis (GE), Dell, Neoteric में अपनी जिम्मेदारी निभा चुकी हैं। उन्होंने कई सारे अवार्ड भी अपने नाम किए हैं। वह आईटीवी नेटवर्क के वाइस प्रेजिडेंट ( सेल्स एंड मार्केटिंग) के रूप में वर्ष 2020 से इंडिया न्यूज से जुड़ी हैं।

नेटवर्क ने संजय सिंघल को भी प्रेजिडेंट के पद पर पदोन्नत किया है। वह इंडिया न्यूज के लिए गवर्नमेंट, नॉर्थ जोन हरियाणा, पंजाब, हिमाचल और आज समाज, चंडीगढ़ और दिल्ली की जिम्मेदारी संभालेंगे। संजय सिंघल को मीडिया के क्षेत्र में काम करने का करीब तीन दशक का अनुभव है। वह वर्ष 2010 से इंडिया न्यूज के साथ जुड़े हुए हैं। प्रमोशन से पहले वह आईटीवी नेटवर्क में सीनियर वाइस प्रेजिडेंट के तौर पर आज समाज और इंडिया न्यूज (हरियाणा, पंजाब और हिमाचल) की कमान संभाल रहे थे। वहीं, इससे पहले वह वर्ष 2000 से 2010 तक हिंदुस्तान टाइम्स की चंडीगढ़ यूनिट में डिप्टी जनरल मैनेजर के तौर पर अपनी जिम्मेदारी संभाल रहे थे। गवर्नमेंट हेड के तौर पर वह वर्ष 1990 से 2000 तक इंडियन एक्सप्रेस और जनसत्ता में भी काम कर चुके हैं। 

इसके अलावा सुमन सिंह को भी डिप्टी जनरल मैनेजर (सेल्स) के पद पर पदोन्नत किया गया है। सुमन सिंह को मीडिया इंडस्ट्री में काम करने का 11 साल से भी अधिक का अनुभव है। वह वर्ष 2016 से ही इंडिया न्यूज के साथ जुड़े हुए हैं। इससे पहले वह गवर्नमेंट सेल्स टीम,दिल्ली के साथ काम कर रहे थे। इस बारे में आईटीवी नेटवर्क के सीईओ वरुण कोहली का कहना है, ‘मीनाक्षी, संजय और सुमन की नई जिम्मेदारी को लेकर हम काफी खुश है।, iTV नेटवर्क को उनके कौशल और विशाल अनुभव का काफी लाभ मिलेगा और आने वाले समय में यह और ऊंचाइयों को छुएगा।’

समाचार4मीडिया की नवीनतम खबरें अब आपको हमारे नए वॉट्सऐप नंबर (9958894163) से मिलेंगी। हमारी इस सेवा को सुचारु रूप से जारी रखने के लिए इस नंबर को आप अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव करें।
न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

एशियानेट से जुड़े नचिकेत पंतवैद्य, मिली यह बड़ी जिम्मेदारी

नचिकेत इससे पहले बालाजी टेलिफिल्म्स में ग्रुप सीओओ और ऑल्ट बालाजी में सीईओ के तौर पर जिम्मेदारी निभा रहे थे।

Last Modified:
Tuesday, 04 May, 2021
Nachiket Pantvaidya

‘एशियानेट न्यूज मीडिया एंड एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड’ (AMEL) ने नचिकेत पंतवैद्य (Nachiket Pantvaidya) को मैनेजिंग डायरेक्टर के पद पर नियुक्त किया है। बता दें कि ‘AMEL’ के पोर्टफोलियो में ‘एशियानेटन्यूज.कॉम’ (asianetnews.com) और ‘इंडिगोम्यूजिक.कॉम’ (indigomusic.com) आदि कई डिजिटल ब्रैंड्स शामिल हैं और यह विभिन्न भाषाओं में कंज्यूमर्स को सर्विस प्रदान करता है।

नचिकेत इससे पहले बालाजी टेलिफिल्म्स (Balaji Telefilms) में ग्रुप चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर और ऑल्ट बालाजी (ALTBalaji) में सीईओ के तौर पर जिम्मेदारी निभा रहे थे। उन्होंने दिसंबर 2015 में ऑल्ट बालाजी जॉइन किया था।

इसके अलावा नचिकेत एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री की कुछ जानी-मानी कंपनियों जैसे- सोनी एंटरटेनमेंट टेलिविजन, स्टार प्लस, स्टार प्रवाह और फॉक्स टेलिविजन स्टूडियो में वरिष्ठ पदों पर अपनी जिम्मेदारी निभा चुके हैं। वह डिज्नी और बीबीस का हिस्सा भी रहे हैं।

इस बारे में ‘एशियानेट न्यूज मीडिया एंड एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड’ के एग्जिक्यूटिव चेयरमैन राजेश कालरा का कहना है, ‘AMEL परिवार में नचिकेत के शामिल होने पर मुझे काफी खुशी है। कंपनी को और ऊंचाई पर ले जाने में उनके नेतृत्व कौशल और अनुभव का काफी फायदा मिलेगा।’

समाचार4मीडिया की नवीनतम खबरें अब आपको हमारे नए वॉट्सऐप नंबर (9958894163) से मिलेंगी। हमारी इस सेवा को सुचारु रूप से जारी रखने के लिए इस नंबर को आप अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव करें।
न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

खबरों के मामले में कौन सा मीडिया माध्यम है सबसे ज्यादा भरोसेमंद, पढ़ें ये सर्वे

मीडिया कंसल्टिंग फर्म ‘ऑरमैक्स मीडिया’ (Ormax Media) ने ‘फैक्ट या फेक?’ नाम से अपनी रिपोर्ट का दूसरा एडिशन जारी कर दिया है

Last Modified:
Tuesday, 04 May, 2021
Media

मीडिया कंसल्टिंग फर्म ‘ऑरमैक्स मीडिया’ (Ormax Media) ने ‘फैक्ट या फेक?’ (Fact or Fake?) नाम से अपनी रिपोर्ट का दूसरा एडिशन जारी कर दिया है। यह रिपोर्ट न्यूज कंज्यूमर्स के सर्वे पर आधारित है और विभिन्न न्यूज मीडिया की विश्वसनीयता के साथ-साथ ‘फेक न्यूज’ की समग्र धारणा को मापती है। रिपोर्ट का यह दूसरा एडिशन अप्रैल 2021 में एकत्रित किए गए डाटा पर आधारित है।

इस रिपोर्ट का पहला एडिशन सितंबर 2020 में जारी किया गया था। यह सर्वे देश के केंद्र शासित प्रदेशों और 17 राज्यों के 15 वर्ष से ऊपर के शहरी समाचार उपभोक्ताओं (Urban news consumers ) के बीच आयोजित किया गया था।

रिपोर्ट के अनुसार, क्रेडिबिलिटी के मामले में 62 प्रतिशत के साथ प्रिंट मीडिया पिछली बार की तरह लगातार सबसे आगे बना हुआ है। वहीं, 56 प्रतिशत के साथ रेडियो दूसरे नंबर पर बना हुआ है, जबकि वर्ष 2020 में इसका प्रतिशत 57 प्रतिशत था। हालांकि, अन्य सभी मीडिया में थोड़ी या ज्यादा कमी देखी गई है। जैसे टेलिविजन में यह प्रतिशत 56 से घटकर 53 प्रतिशत, डिजिटल न्यूज ऐप्स और वेबसाइट्स में 42 प्रतिशत से घटकर 37 प्रतिशत, सोशल मीडिया में 32 प्रतिशत से 27 प्रतिशत और मैसेंजर ऐप्स में 29 प्रतिशत से घटकर 24 प्रतिशत रह गया है।

सोशल मीडिया की बात करें तो पिछली बार के मुकाबले क्रेडिबिलिटी प्रतिशत में कमी के बावजूद ट्विटर न्यूज क्रेडिबिलिटी इंडेक्स में 47 प्रतिशत के साथ नंबर वन बना हुआ है। अन्य कोई भी सोशल मीडिया अथवा मैसेंजर एप प्लेटफॉर्म 30 प्रतिशत के आंकड़े को भी नहीं छू सका है। नया लॉन्च हुआ ऐप कू (Koo) क्रेडिबिलिटी के मामले में 24 प्रतिशत तक ही पहुंच सका है।

रिपोर्ट और इसके निष्कर्षों पर टिप्पणी करते हुए ऑरमैक्स मीडिया के फाउंडर व सीईओ शैलेश कपूर का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में दुनिया भर में फर्जी खबरों के बारे में चिंताएं बढ़ रही हैं, लेकिन सिर्फ सात महीने में ही विश्वसनीयता का प्रतिशत 39 से और घटकर 35 रह गया है, जो भारतीय न्यूज इंडस्ट्री के लिए अच्छा नहीं है। महामारी के बीच में न्यूज की विश्वसनीयता और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। हम उम्मीद करते हैं कि टेलिविजन समाचार और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स इस चिंता को और अधिक गंभीरता से लेंगे।

समाचार विश्वसनीयता सूचकांक (News Credibility Index) और मीडिया विश्वसनीयता सूचकांक (Media Credibility Index) समाचार उपभोक्ताओं (खबरें देखने वालों का) का एक प्रतिशत है, जो फेक न्यूज को एक बड़ी परेशानी के तौर पर नहीं देखते हैं।

समाचार4मीडिया की नवीनतम खबरें अब आपको हमारे नए वॉट्सऐप नंबर (9958894163) से मिलेंगी। हमारी इस सेवा को सुचारु रूप से जारी रखने के लिए इस नंबर को आप अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव करें।
न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

इन राज्य सरकारों ने पत्रकारों को किया फ्रंटलाइन वर्कर्स घोषित, यूं दी प्राथमिकताएं

कोरोनावायरस (कोविड-19) का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। कोरोना का विकराल रूप नियंत्रण में आने की बजाय अधिक विकराल होता जा रहा है।

विकास सक्सेना by
Published - Tuesday, 04 May, 2021
Last Modified:
Tuesday, 04 May, 2021
journalist534.jpg

कोरोनावायरस (कोविड-19) का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। कोरोना का विकराल रूप नियंत्रण में आने की बजाय अधिक विकराल होता जा रहा है। कोरोनावायरस के खिलाफ पूरे देश में ‘जंग’ जारी है। संकट के इस दौर में अपनी जान को जोखिम में डालते हुए तमाम पत्रकार अपनी ड्यूटी निभा रहे हैं और कोरोना को लेकर रिपोर्टिंग भी कर रहे हैं। ऐसे में कई पत्रकारों के कोरोनावायरस की चपेट में आने से मौत की खबरें भी सामने आई हैं और तमाम पत्रकार विभिन्न अस्पतालों में अपना इलाज करा रहे हैं। लिहाजा, इसे देखते हुए उत्तराखंड, बिहार, ओडिशा, मध्य प्रदेश, पंजाब और उत्तर प्रदेश राज्यों में पत्रकारों को फ्रंटलाइन वर्कर घोषित किया गया है।

उत्तराखंड:

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने एक महीने पहले ही राज्य के सभी पत्रकारों को फ्रंट लाइन वर्कर घोषित किया कर दिया था, साथ ही सभी को कोरोना वैक्सीन दिए जाने की मंजूरी भी दी हुई है।  ऐसा करने वाला वह पहला राज्य था। यहां पत्रकारों के लिए उम्र की कोई सीमा नहीं रखी गई है।

बिहार:

बिहार में मान्यता प्राप्त पत्रकारों के साथ-साथ गैर मान्यता प्राप्त पत्रकारों को भी फ्रंटलाइन वर्कर की श्रेणी में शामिल कर सरकार प्राथमिकता के आधार पर उनका टीकाकरण कराएगी। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने रविवार को इस आशय का निर्देश दिया, जो पत्रकार सूचना एवं जनसंपर्क विभाग द्वारा मान्यता प्राप्त पत्रकारों की सूची में नहीं हैं, उन्हें जिला जनसंपर्क अधिकारी द्वारा सत्यापित किए जाने के बाद टीका लग सकेगा। सभी चिह्नित पत्रकारों को प्राथमिकता के आधार पर कोविड-19 का टीकाकरण कराया जाएगा। प्रिंट मीडिया के साथ-साथ इलेक्ट्रानिक व वेब मीडिया के पत्रकारों को भी फ्रंटलाइन वर्कर माना जाएगा।

ओडिशा:

ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने पत्रकारों को भी फ्रंटलाइन कोरोना वारियर्स घोषित किया है। इस घोषणा से गोपबंधु पत्रकार स्वास्थ्य योजना में शामिल राज्य के छह हजार 944 पत्रकारों को इसका लाभ मिलेगा। योजना में पत्रकारों को दो लाख का स्वास्थ्य बीमा का लाभ मिलेगा। कोविड के समय कार्यरत किसी भी पत्रकार की मृत्यु होने पर परिवार को 15 लाख रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा मुख्यमंत्री ने की है।

मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश में सभी पत्रकारों को फ्रंटलाइन वर्कर घोषित किया गया है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने यह ऐलान करते हुए कहा कि पत्रकार कोरोना महामारी के खतरे के बीच अपनी जान खतरे में डालकर अपनी ड्यूटी पूरी कर रहे हैं, जिसको ध्यान  में रखते हुए हमने  मान्यता प्राप्त पत्रकारों को मध्य प्रदेश में फ्रंटलाइन वर्कर्स घोषित करने का निर्णय  लिया है और इसी आधार पर उनका केयर किया जाएगा। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मध्यप्रदेश में करीब 4000 पत्रकारों को सरकारी मान्यता प्राप्त है। मध्य प्रदेश के जनसंपर्क विभाग के एक अधिकारी के मुताबिक अभी सरकार ने इस ऐलान से संबंधित नियमों का निर्धारण नहीं किया है, जिसके बारे में बाद में सूचित किया जाएगा।

पंजाब:

वहीं, पंजाब सरकार ने सूबे के मान्यता प्राप्त और येलो कार्ड धारक पत्रकारों को फ्रंटलाइन वॉरियर्स की सूची में शामिल कर लिया है। पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि पत्रकार प्राथमिकता के आधार पर टीका लगवाने सहित उन सभी लाभों के लिए योग्य होंगे, जो बाकी फ्रंटलाइन वर्कर्स राज्य सरकार से हासिल करने के हकदार हैं।  

उत्तर प्रदेश:  

बता दें कि पंजाब और मध्य प्रदेश के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने भी कोरोना के खिलाफ जंग में पत्रकारों को फ्रंटलाइन वर्कर घोषित किया। अब उन्हें प्राथमिकता के आधार पर कोरोना का टीका लगाया जाएगा। सीएम योगी ने निर्देश दिए हैं कि मीडियाकर्मियों के लिए अलग सेंटर अलॉट किए जाएं और जरूरत हो तो उनके कार्य स्थलों पर जाकर निर्धारित मानकों को पूरा करते हुए उनके 18 साल से ऊपर के परिजनों को फ्री वैक्सीनेशन किया जाए।  

 

समाचार4मीडिया की नवीनतम खबरें अब आपको हमारे नए वॉट्सऐप नंबर (9958894163) से मिलेंगी। हमारी इस सेवा को सुचारु रूप से जारी रखने के लिए इस नंबर को आप अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव करें।
न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

मीडियाकर्मियों के लिए यूपी सरकार का बड़ा फैसला, NBA ने भी उठाया था ये मुद्दा

मीडियाकर्मियों के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बड़ा फैसला लिया है।

Last Modified:
Tuesday, 04 May, 2021
Yogi45

भारत में कोरोना की दूसरी लहर बेहद भयावह रूप ले रही है, जिसके साथ ही यह आए दिन नए रिकॉर्ड भी बना रही है। इस बीच कोरोना के खिलाफ जंग में तमाम पत्रकार अपनी जान जोखिम में डालकर रिपोर्टिंग कर रहे हैं और तमाम अपडेट्स लोगों तक पहुंचा रहे हैं। ऐसे में देश में कई स्थानों पर पत्रकार कोरोना से संक्रमित हो रहे हैं और कई तो कोरोना से लड़ते हुए जिंदगी की जंग भी हार गए हैं, लिहाजा इसे देखते हुए मीडियाकर्मियों के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बड़ा फैसला लिया है।

सीएम योगी आदित्यनाथ ने निर्देश दिए हैं कि मीडियाकर्मियों को वैक्सीनेशन में प्राथमिकता दी जाए। उनके लिए अलग सेंटर अलॉट किए जाएं और जरूरत हो तो उनके कार्य स्थलों पर जाकर निर्धारित मानकों को पूरा करते हुए उनके 18 साल से ऊपर के परिजनों को फ्री वैक्सीनेशन किया जाए। इसके साथ ही यूपी सरकार ने कोरोना के खिलाफ जंग में पत्रकारों, जजों, सरकारी अधिकारियों व कर्मचारियों को फ्रंटलाइन वर्कर घोषित किया है।

बता दें कि कोरोना के चलते देशभर में कई मीडियाकर्मियों की मौत हो चुकी है। रिपोर्टिंग के सिलसिले में मीडियाकर्मियों को फील्ड में जाना पड़ता है, जहां संक्रमण की संभावना ज्यादा रहती है। ऐसे में मीडियकर्मियों की तरफ से यह मांग की जा रही थी उन्हें भी वैक्सीनेशन में प्राथमिकता मिले, जो कि योगी सरकार ने मान ली है और अधिकारियों को यह निर्देश दिया है। इस बारे में निजी टेलिविजन न्यूज चैनल्स का प्रतिनिधित्व करने वाले समूह ‘न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन’ (NBA) ने मुख्यमंत्री को एक पत्र भी लिखा था।

एनबीए प्रेजिडेंट रजत शर्मा की ओर से लिखे गए इस लेटर में एनबीए का कहना था कि सभी मीडियाकर्मियों को वैक्सीनेशन की बहुत आवश्यकता है। ऐसे में निवेदन है कि उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से इन सभी मीडियाकर्मियों  और उनके परिवारवालों के लिए वैक्सीन उपलब्ध करा दी जाए तो अच्छा रहेगा। अपने लेटर में एनबीए का यह भी कहना था कि मीडिया संस्थानों की तरफ से हम इसका पूरा खर्चा उठाने के लिए तैयार हैं। 

एनबीए की ओर से मुख्यमंत्री को लिखे गए लेटर की कॉपी आप यहां देख सकते हैं।

समाचार4मीडिया की नवीनतम खबरें अब आपको हमारे नए वॉट्सऐप नंबर (9958894163) से मिलेंगी। हमारी इस सेवा को सुचारु रूप से जारी रखने के लिए इस नंबर को आप अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव करें।
न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

जजों की टिप्पणियों की मीडिया रिपोर्टिंग को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कही ये बात

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कोर्ट में सुनवाई के दौरान जब भी जजों द्वारा कोई मौखिक बयान या टिप्पणी होती है, तो मीडिया को उसकी रिपोर्ट करने से नहीं रोका जा सकता है।

Last Modified:
Monday, 03 May, 2021
SC

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि कोर्ट में सुनवाई के दौरान जब भी जजों द्वारा कोई मौखिक बयान या टिप्पणी होती है, तो मीडिया को उसकी रिपोर्ट करने से नहीं रोका जा सकता है। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग ने अपनी एक अर्जी में कोर्ट से गुजारिश की थी कि अदालत में सुनवाई के दौरान जब भी कोई मौखिक बयान या टिप्पणी की जाए, तो उसे मीडिया रिपोर्ट न करे।  

दरअसल, चुनाव आयोग में मद्रास हाई कोर्ट की उस टिप्पणी के खिलाफ चुनाव आयोग में अर्जी दाखिल कर चुनौती दी है जिसमें हाई कोर्ट ने कहा था कि हत्या का केस चुनाव आयोग के अधिकारियों पर चलना चाहिए। चुनाव आयोग की अर्जी में कहा गया है कि अदालत में सुनवाई के दौरान जब कोई मौखिक बयान या टिप्पणी दी जाती है तो उसे मीडिया रिपोर्ट न करे। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में कहा कि मीडिया को रिपोर्ट करने से रोका नहीं जा सकता है, क्योंकि ये जवाबदेही तय करती है। सुप्रीम कोर्ट चुनाव आयोग की अर्जी पर अलग से आदेश पारित करेगा।

दरअसल, कोरोना महामारी की दूसरी लहर के बीच विधानसभा चुनाव कराने को लेकर चुनाव आयोग की काफी आलोचना हुई है। आयोग को सबसे कड़ी फटकार मद्रास हाई कोर्ट ने लगाई है। कोर्ट ने आयोग को 'दूसरी लहर के लिए अकेले जिम्मेदार' बताया है। 26 अप्रैल को मद्रास हाई कोर्ट ने कहा था कि कोरोना की दूसरी लहर का जिम्मेदार सिर्फ चुनाव आयोग ही है। इतना ही नहीं हाई कोर्ट ने कहा कि आयोग के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए।

सोमवार को जब सुप्रीम कोर्ट में इस मामले में सुनवाई हुई तो जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़ ने कहा कि लोग जानना चाहते हैं कि आखिर अदालत में क्या चल रहा है। अदालत में क्या हो रहा है और क्या दिमागी कसरत हो रही है। इन तमाम विषयों पर लोग जानकारी चाहते हैं। इससे जूडिशियल प्रोसेस के प्रति लोगों का विश्वास बढ़ता है। हाई कोर्ट न्यायिक प्रक्रिया के अहम अंग हैं, हम उन्हें इस मामले में हतोत्साहित नहीं कर सकते। जब मामले में सुनवाई होती है तो तमाम दलीलें पेश की जाती है और अदालत की टिप्पणियां होती है। उसे सही तरह से लिया जाए।

चुनाव आयोग की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट राकेश द्विवेदी ने कहा कि हाई कोर्ट के सामने ऐसा कोई तथ्य नहीं था और बिना साक्ष्य के चुनाव आयोग पर हत्या का केस चलाने जैसी टिप्पणी की है। उन्होंने दलील दी कि जब चुनावी रैलियां हो रही थी तो स्थिति इतनी बदतर नहीं थी। इस टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर लगातार बयान चलने लगा और कहा जाने लगा कि चुनाव आयोग हत्यारा है। मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम नहीं जानते कि आखिर ऐसा क्या हुआ था कि जज को ऐसी टिप्पणी करनी पड़ी। कई बार ऐसा भी होता है कि लगातार आदेश होता है और उस पर अमल नहीं होता है और तब ग्राउंड रियलिटी को देखकर अदालत टिप्पणी करती है। उपयुक्त शब्दों का इस्तेमाल होना चाहिए।

समाचार4मीडिया की नवीनतम खबरें अब आपको हमारे नए वॉट्सऐप नंबर (9958894163) से मिलेंगी। हमारी इस सेवा को सुचारु रूप से जारी रखने के लिए इस नंबर को आप अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव करें।
न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए