महामारी में वरदान साबित होगी एफमैक की पहल, 15 दिनों में तैयार किया प्री कोविड अस्पताल

आगरा के जूता निर्यातकों की सबसे बड़ी संस्था एफमैक ने कोरोना महामारी से निपटने के लिए जिला प्रशासन के सहयोग से एफमैक प्री कोविड हॉस्पिटल की शुरुआत की है।

Last Modified:
Tuesday, 11 May, 2021
FMEC-Hospital54

कोरोना संकट के बीच आगरा के लोगों के लिए ये राहत भरी खबर है। आगरा के जूता निर्यातकों की सबसे बड़ी संस्था एफमैक ने कोरोना महामारी से निपटने के लिए जिला प्रशासन के सहयोग से एफमैक प्री कोविड हॉस्पिटल की शुरुआत की है। लगभग 15 दिनों से युद्ध स्तर पर इसकी तैयारी चल रही थी, जिसे मंगलवार की सुबह अंतिम रूप दे दिया गया। कोविड मरीजों के इलाज के लिए बनकर तैयार हुए 350 बेड के इस प्री कोविड हॉस्पिटल के बारे में संस्था पदाधिकारियों ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर जानकारी दी। इस दौरान एफमैक के अध्यक्ष पूरन डावर ने बताया कि किस प्रकार इस मुहिम को गति मिली।

विभागों के आपसी समन्वयन से मिली सफलता

एफमैक अध्यक्ष पूरन डावर ने बताया कि जिला प्रशासन के सभी विभागों के आपसी समन्वय से इस प्री कोविड हॉस्पिटल को इतने कम समय में हमने बनाकर तैयार किया। जिलाधिकारी आगरा प्रभु नारायण सिंह के निर्देशन में प्रशासन का भरपूर सहयोग मिला। नगर आयुक्त आगरा निखिल टीकाराम फंदे, डीवीएनएल एमडी इंजी. सुधीर कुमार वर्मा, स्वास्थ्य विभाग में मुख्य चिकित्सा अधिकारी आगरा डॉ. आरसी पांडे आदि अधिकरियों और इनकी कुशल टीम की तत्परता से यह कार्य सम्भव हुआ।

चिकित्सा व्यवस्थाओं को संभालेगा जिला प्रशासन

एफमैक प्री कोविड हॉस्पिटल में चिकित्सा व्यवस्थाओं को एफमैक से जुड़े डेढ़ दर्जन से अधिक चिकित्सकों के साथ जिला प्रशासन संभालेगा, जिसमें एसीएमओ और डिप्टी एसीएमओ को जिम्मेदारी दी गईं है। साथ ही चिकित्सा विभाग ने डॉ. जीतेन्द्र लवानिया को नोडल अधिकारी नियुक्त किया है। एफमैक प्री कोविड हॉस्पिटल की प्रशंसा करते हुए जिलाधिकारी प्रभु नारायण सिंह ने कहा कि अस्थाई कोविड सेंटर के रूप में एफमैक का यह प्री हॉस्पिटल मॉडल साबित हो रहा है।

अभी इस श्रेणी के मरीजों का होगा इलाज

कॉन्फ्रेंस के दौरान एफमैक पदाधिकारियों ने बताया कि हॉस्पिटल में 350 बेड्स की व्यवस्था है, जिसमें अभी एल वन और एल प्लस श्रेणी के मरीजों का इलाज होगा। कुछ दिनों में हम एल-टू श्रेणी के मरीजों को भी इसमें शामिल कर लेंगे। अभी हमारे यहां 200 बेड पर ऑक्सीजन सिलेंडर की व्यवस्था है। प्री कोविड हॉस्पिटल की प्रशासनिक जिम्मेदारियों को चंद्र शेखर जीपीआई निभा रहे हैं। हॉस्पिटल को जिला प्रशासन के कोविड कमांड सेंटर से भी जोड़ा गया है। भर्ती होने वाले मरीज कमांड सेंटर के जरिये और हॉस्पिटल के हेल्पलाइन नंबर 9557597705 पर संपर्क कर भर्ती होने की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

विशेषज्ञों ने मरीजों के लिए तैयार किया खास डाइट चार्ट

प्रतिदिन आहार वितरण सूची इस प्रकार है-

•             जीरा/अजवाइन गरम पानी   7:00 सुबह

•             सुबह का नाश्ता   8:30 सुबह

•             चाय / कॉफी   9:00 सुबह

•             सूप    12:00 दोपहर

•             दोपहर भोज 12:30 दोपहर     

•             दालचीनी नींबू शहद (CLH) 4:00 सांय

•             चाय / कॉफी   6:00 सांय

•             रात्रि भोजन    7:30 सांय

•             ग्रीन-टी (जरूरत के अनुसार)

नियमित योग और मेडिटेशन को भी किया गया है इलाज में शामिल

योग और मेडिटेशन को भी इलाज में शामिल किया गया है, जिसका प्रतिदिन नियमित समय सुबह 6 बजे से 7 बजे तक रहेगा, साथ ही दोपहर 12 बजे से एक घंटे के लिए मरीज की जरूरत के अनुसार रहेगा सूक्ष्म योग, यौगिक सूक्ष्म व्यायाम, पवनमुक्तासन, वज्रासन की योग क्रियाएं योगाचार्य के निर्देशन में होंगी। तीन बजे मेडिटेशन का समय निर्धारित किया गया है। कोविड सेंटर में आईसीयू वार्ड के साथ कुल 5 हाल बनाए गए हैं, जिनमें लगातार आध्यत्मिक ध्वनि के संगीत की व्यवस्था की गई है।  

मरीजों को इलाज के साथ होगा प्रकृति से निकटता का अहसास

भव्य क्षेत्र में फैले एफमैक प्री कोविड हॉस्पिटल में मरीजों को इलाज के साथ-साथ प्रकृति से निकटता का अहसास भी होगा। आस-पास हरभरा वातावरण यहां मरीजों की जल्दी रिकवरी का भी माध्यम बनेगा।

अपनी सामाजिक जिम्मेदारी हमें निभानी ही होगी

एफमैक के अध्यक्ष पूरन डावर ने कहा कि देश एक बड़ी महामारी से जूझ रहा है। स्वाभाविक रूप से जो देश में व्यवस्थाए हैं नाकाफी हैं। सरकार या हेल्थ सेक्टर कितना भी करे ऐसी महामारियों के लिए पर्याप्त नहीं हो सकता। औद्योगिक संगठन हों या सामाजिक संगठन अपनी सामाजिक जिम्मेदारी हमें निभानी ही होगी। सरकार, प्रशासन और डॉक्टर्स के साथ मिलकर एफमैक ट्रस्ट का यह प्रयास मुझे लगता है लोगों के लिए विशेष लाभकारी साबित होगा।

आपदा में कोई भी व्यक्ति इलाज से वंचित न रहे

एफमैक की उपाध्यक्ष रूबी सहगल ने कहा कि यदि किसी बीमारी से पीड़ित होकर पूरा शहर हॉस्पिटल की ओर भगा चला आए तो यह संभव नहीं कि किसी भी देश या प्रदेश का प्रशासन हॉस्पिटल या ऑक्सीजन तुरंत उपलब्ध करा पाए। ऐसे आपातकाल में सामूहिक प्रयासों से ही जीत हासिल की जा सकती है। कोरोना की इस आपदा में कोई भी व्यक्ति इलाज से वंचित न रहे, इसके लिए एफमैक की ओर से यह एक जनहितैषी प्रयास है।

आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिए तैयार हैं हम

वहीं, एफमैक के कन्वेनर कैप्टन एएस राणा ने कहा कि कोरोना संक्रमण की यह दूसरी लहर है, लोग लगातार इस संक्रमण का शिकार हो रहे हैं। हालांकि कुछ दिन से राहत की खबर आ रही है वहीं दूसरी ओर कुछ एक्सपर्ट तीसरी वेब की बात कह रहे हैं ऐसी किसी भी आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिए हम तैयार हैं। कोविड के इस प्री हॉस्पिटल में विदेशी चिकित्सक भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये अपनी सेवाएं देंगे।

विशेष रूप से रहे मौजूद

पत्रकार वार्ता के दौरान जूता निर्यातक और एफमैक के वरिष्ठ सदस्य विजय निझावन, चंद्रमोहन सचदेवा, अनिरुद्ध तिवारी, अशोक अरोरा  इन्क्रेडिबल इंडिया फांउंडेशन के महासचिव अजय शर्मा, ब्रजेश शर्मा और डॉ. आरएन शर्मा आदि विशेष रूप से मौजूद रहे।

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इस मीडिया कंपनी के साथ संभावित विलय की खबरों को ZEE एंटरटेनमेंट ने सिरे से किया खारिज

देश के बड़े मीडिया समूहों में शुमार ‘जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड’ ने ’वायकॉम18’ के साथ संभावित विलय की खबरों को सिरे से खारिज कर दिया है।

Last Modified:
Monday, 21 June, 2021
Zee

देश के बड़े मीडिया समूहों में शुमार ‘जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड’ (ZEE ENTERTAINMENT ENTERPRISES LTD) ने ’वायकॉम18’ (Viacom18) के साथ संभावित विलय की खबरों को सिरे से खारिज कर दिया है। बता दें कि एक बड़े बिजनेस अखबार ने खबर दी थी कि ‘जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड’ और ’वायकॉम18’ संभावित विलय के लिए शुरुआती बातचीत के दौर में हैं और यह मिलकर एक बड़ी मीडिया फर्म बना सकते हैं।  

इस बारे में नियामक संस्था को दी गई जानकारी (Regulatory filing) में ’ZEEL’ का कहना है, ’ZEEL’ और ’वायकॉम18’ के संभावित विलय की खबर के बारे में हमारा कहना है कि इस तरह की खबरों में कोई सच्चाई नहीं है।’

अखबार की रिपोर्ट में सूत्र के हवाले से जानकारी दी गई थी कि यह विलय शेयर हस्तांतरण (शेयर स्वैप सौदे) के जरिये किया जाएगा और इसमें नकद लेन-देन की संभावना नहीं है। इसके साथ ही यह भी कहा गया था कि विलय के बाद संयुक्त इकाई में वायकॉम18 के प्रमोटर्स की सबसे ज्यादा हिस्सेदारी हो सकती है, क्योंकि ZEEL के 65 प्रतिशत से ज्यादा शेयर का स्वामित्व विदेशी संस्थागत निवेशकों के पास है।

सूत्र का यह भी कहना था कि यह डील तभी परवान चढ़ेगी, जब ZEEL के शेयर की कीमत वर्तमान से 15 से 20 प्रतिशत नीचे आ जाएगी। बता दें कि वायकॉम18 जॉइंटवेंचर में रिलांयस और वायकॉम की 51:49 हिस्सेदारी है जबकि ZEEL का अधिकांश स्वामित्व विदेशी संस्थागत निवेशकों के पास है।

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प्रेस काउंसिल ने अखबार को भेजा कारण बताओ नोटिस, मांगा जवाब

बीएमएसआईसीएल, पटना के मैनेजिंग डॉयरेक्टर के प्रदीप कुमार की शिकायत पर जारी किया गया है नोटिस

Last Modified:
Monday, 21 June, 2021
PCI

कोरोना काल में बिहार सरकार और स्वास्थ्य विभाग के संबंध में गलत खबर छापने के आरोप में प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) ने बुधवार को दैनिक अखबार को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ‘बिहार चिकित्सा सेवाएं एवं आधारभूत संरचना निगम’(बीएमएसआईसीएल), पटना के मैनेजिंग डॉयरेक्टर के प्रदीप कुमार की शिकायत पर पटना से प्रकाशित होने वाले दैनिक अखबार के एडिटर के खिलाफ नोटिस जारी किया गया है।

इसके साथ ही 14 दिनों के अंदर इस नोटिसस का जवाब देने के लिए कहा गया है कि आखिर क्यों काउंसिल उनके खिलाफ कार्रवाई ना करे। बताया जाता है कि रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद प्रेस काउंसिल की जांच समिति अपने स्तर से मामले को देखेगी और उसी के अनुसार फैसला लेगी।

प्रदीप कुमार की ओर से प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया को लिखे गए पत्र में कहा गया है कि बुधवार को एक दैनिक अखबार में गलत, तथ्यहीन और भ्रामक खबर छापी गई है। खबर में दी गई जानकारी कि बिहार स्वास्थ्य विभाग ने कोरोना काल में ब्लैक लिस्टेड कंपनी से आरटीपीसीआर जांच वैन भाड़े पर ली, सच्चाई से एकदम दूर है।

पत्र में कहा गया कि विभाग द्वारा जानकारी देने के बावजूद खबर छापने से पहले तथ्यों की सही से जांच नहीं की गई है। ऐसी खबर की वजह से न सिर्फ सरकार और विभाग की क्षवि धूमिल हुई, बल्कि बीते दो महीने से जो स्वास्थ्यकर्मी लगातार काम कर रहे हैं, उनका मनोबल भी घटा है। ऐसे में मामले की जांच कर दैनिक अखबार के खिलाफ कार्रवाई की जाए।.

दरअसल, बुधवार को पटना से छपने वाले एक दैनिक अखबार में ये खबर छपी थी कि बिहार स्वास्थ्य विभाग ने कोरोना काल में आरटीपीसीआर जांच के लिए 29 करोड़ में ब्लैकलिस्टेड कंपनी से पांच वैन तीन महीने के लिए किराए पर ली। वहीं, ये सवाल भी किया कि एक दागी कंपनी से इतनी ऊंची कीमत पर सरकार ने सौदा क्यों किया? इसी खबर को गलत ठहराते हुए के प्रदीप कुमार की ओर से पीसीआई को पत्र लिखा गया है।

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न्यूज ब्रॉडकास्टर्स के इस संगठन का NBF में हुआ विलय

न्यूज ब्रॉडकास्टर्स फेडरेशन के गवर्निंग बोर्ड की बैठक में इस निर्णय की पुष्टि की गई है।

Last Modified:
Saturday, 19 June, 2021
NBF

न्यूज इंडस्ट्री से जुड़े मुद्दे सुलझाने और न्यूज ब्रॉडकास्टर्स के हितों की रक्षा के लिए गठित ‘न्यूज ब्रॉडकास्टर्स फेडरेशन’ (News Broadcasters Federation)  में ‘एसोसिएशन ऑफ रीजनल टीवी ब्रॉडकास्टर्स ऑफ इंडिया’ (ARTBI) का विलय हो गया है।

फेडरेशन की ओर से जारी एक बयान के अनुसार, एनबीएफ के गवर्निंग बोर्ड की बैठक में इस निर्णय की पुष्टि की गई है। इस निर्णय को काफी महत्वपूर्ण बताते हुए फेडरेशन का कहना है कि इससे क्षेत्रीय समाचार चैनल्स और उनके डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को नियामकीय जरूरतों (regulatory requirements) को समझने और उनका पालन करने में मदद मिलेगी।

‘एनबीएफ’ का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य बड़े पैमाने पर लोकहित में फेडरेशन को 'अधिक लोकतांत्रिक, विविध और भावनात्मक रूप से एकजुट' कर न्यूज ब्रॉडकास्टिंग इंडस्ट्री को और मजबूत करना है।

इस बारे में ‘एनबीएफ’ के प्रेजिडेंट अरनब गोस्वामी का कहना है, ‘एआरटीबीआई के विलय के बाद एनबीएफ निर्विवाद रूप से देशभर में ब्रॉडकास्टर्स की सबसे बड़ी इकाई बन गई है, जो मौजूद अन्य ब्रॉडकास्टर्स संगठनों से दोगुनी से ज्यादा बड़ी है। इस उपलब्धि के बाद एनबीएफ नए न्यूज स्टैंडर्ड्स के साथ ही उच्चतम सेल्फ रेगुलेशन और एडिटोरियल स्टैंडर्ड्स स्थापित करेगी।‘

‘एआरटीबीआई‘ के फाउंडर कार्तिकेय शर्मा ने इस कदम को लेकर खुशी जताई है। एनबीएफ की ओर से जारी बयान में कार्तिकेय शर्मा के हवाले से कहा गया है, ‘हम देश के पहले मान्यता प्राप्त ‘एसोसिएशन ऑफ रीजनल टेलिविजन ब्रॉडकास्टर्स ऑफ इंडिया’ के ‘एनबीएफ’ के साथ विलय से खुश हैं। समय की मांग को देखते हुए हमने एआरटीबीआई और एनबीएफ को मिलाकर सबसे बड़ा निकाय बनाया है और इस तरह हम इसके सभी स्टेकहोल्डर्स के लिए और बेहतर कर सकते हैं।‘

वहीं, इसके संयोजक राकेश शर्मा का कहना है, ‘एआरटीबीआई पिछले एक दशक से अधिक समय से राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर क्षेत्रीय चैनल्स के मुद्दों के समाधान के लिए सरकार और अन्य एजेंसियों के साथ काम कर रहा है।’

इसके साथ ही उनका यह भी कहना है, ‘इस अवधि के दौरान प्रसारण उद्योग विकसित हुआ है। क्षेत्रीय और राष्ट्रीय ब्रॉडकास्टर्स के मुद्दे लगभग समान हैं। प्रसारण उद्योग को और मजबूत व प्रभावी बनाने के लिए ARTBI का NBF के साथ विलय करने का निर्णय लिया गया है। मुझे विश्वास है कि यह पहल क्षेत्रीय चैनलों के उद्देश्य को मजबूती प्रदान करेगी।’

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हैप्पी बर्थडे सुधीर चौधरी: ऐसे ही नहीं बनाई आपने लोगों के दिलों में जगह

'जी न्यूज' के एडिटर-इन-चीफ सुधीर चौधरी आज मीडिया जगत में किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। वह एक ऐसे इंसान हैं, जिन्होंने टीवी पत्रकारिता में हमेशा नए प्रयोग किए हैं और सफल भी हुए हैं।

Last Modified:
Friday, 18 June, 2021
Sudhir Chaudhary

'जी न्यूज' के एडिटर-इन-चीफ सुधीर चौधरी आज मीडिया जगत में किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। वह एक ऐसे इंसान हैं, जिन्होंने टीवी पत्रकारिता में हमेशा नए प्रयोग किए हैं और सफल भी हुए हैं। आज उनके लिए बेहद खास दिन है, क्योंकि आज उनका जन्मदिन है।

दरअसल, फील्ड रिपोर्टिंग से लेकर एंकरिंग तक ऐसा कोई काम नहीं है जो सुधीर चौधरी ने नहीं किया है। वर्तमान समय में ‘जी न्यूज’ पर रात 9 बजे आने वाले उनके प्राइम टाइम शो ‘डीएनए’ के बहुसंख्य दर्शक हैं। लोग इस शो को काफी पसंद करते हैं। अपनी रिसर्च से कई बार वह लोगों को चौंका देते हैं। उनके प्राइम टाइम में ऐसी खबरें होती हैं, जो न सिर्फ सामाजिक सरोकार से जुड़ी होती हैं, बल्कि लोगों के ज्ञान को भी बढ़ाती हैं।

सुधीर चौधरी अपनी टीम और अपने काम को लेकर किस कदर जुनूनी हैं, इसका अंदाजा आप सिर्फ इस बात से लगा सकते हैं कि कोविड-19 के दौर में एक दिन भी ऐसा नहीं हुआ, जब वह ऑफिस न गए हों और वहां जाकर खुद अपने एम्प्लॉयीज को प्रोत्साहित न किया हो। भावनात्मक मजबूती को बढ़ाना और उस डर को दूर करना बहुत जरूरी था और यही एक असली लीडर की पहचान होती है।हालांकि यह अलग बात है कि कोरोना संक्रमित होने के बाद मजबूरन उन्हें कुछ दिनों के लिए ऑफिस से दूर रहना पड़ा।

‘इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन’ (IIMC) से पढ़कर निकले सुधीर चौधरी ने करियर के शुरुआती दौर में ही अपना लक्ष्य सोच लिया था और जैसे अर्जुन को सिर्फ चिड़िया की आंख दिखाई देती थी, उसी तरह सुधीर चौधरी को सिर्फ अपने लक्ष्य दिखाई देते हैं और उन्हें पाने के लिए वो दिन-रात एक कर देते हैं। टीवी में छोटे पद से लेकर सीईओ तक का सफर उन्होंने तय किया है।

आपको यह जानकार हैरानी होगी कि जब ‘डीएनए’ का कंटेंट तैयार किया जाता है तो उसमें महिलाओं और बच्चों का भी पूरा ध्यान रखा जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि इस शो को लॉन्च करने  से पहले उनकी टीम ने पूरे देश में सर्वे किया और यह पता लगाया कि लोग क्या देखना चाहते हैं और अब उसी तरह का कंटेंट वे अपने शो में देते हैं। यही वजह है कि आज उनका प्राइम टाइम शो लोगों के दिलों पर राज करता है।

आज ट्विटर पर सुधीर चौधरी के छह मिलियन से अधिक फॉलोअर्स हैं और इस लिहाज से भी वह सबसे प्रसिद्ध एंकर्स में से एक हैं। उनकी दीवानगी का आलम यह है ये कि जब हाल ही में वह कोरोना वायरस से संक्रमित हुए तो देश-दुनिया से उनकी सलामती के संदेश आने लगे। सुधीर चौधरी खुद जानते हैं कि उनकी ताकत उनकी फैंन-फॉलोइंग है। लिहाजा, उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और कोरोना से जमकर लड़ाई लड़ी और उसे मात दी।

कोरोना को मात देने के बाद सुधीर चौधरी चाहते तो सीधे टीवी पर आ सकते थे, लेकिन उन्होंने उससे पहले फेसबुक लाइव करने का निर्णय किया, ताकि उनके लाखों चाहने वाले उनसे बात कर सकें। जब वो फेसबुक लाइव हुआ तो वो कोई साधारण लाइव नहीं था। उसने एक तरह से इतिहास रच दिया। मीडिया जगत में शायद ही पहले कभी हुआ हो कि किसी प्राइम टाइम एंकर के फेसबुक लाइव को करीब नौ मिलियन लोगों ने देखा हो।

सुधीर चौधरी ने अलग-अलग संस्थानों में काम करते हुए कई बड़े मुद्दों को कवर किया है। उन्होंने लोकसभा चुनावों के साथ कई राज्यों के विधानसभा चुनावों को भी कवर किया है। इसके अलावा उन्होंने तमाम बड़े राजनेताओं के साक्षात्कार भी किए हैं। सुधीर चौधरी उन युवाओं के लिए प्रेरणा का स्तोत्र हैं, जो पत्रकारिता जगत में कदम रख रहे हैं। बहुत ही कम समय में उन्होंने न केवल आसमान की बुलंदियों को छुआ है, बल्कि वे अब अपनी दमदार एंकरिंग और अपनी प्रतिभा से मीडिया जगत में एक चमकता सितारा हैं। समाचार4मीडिया की ओर से सुधीर को जन्मदिन की ढेर सारी शुभकामनाएं।

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माइक्रोसॉफ्ट में CEO सत्या नडेला का हुआ प्रमोशन, अब निभाएंगे यह जिम्मेदारी

दो दशकों में पहली बार माइक्रोसॉफ्ट का कोई सीईओ इसके चेयरमैन के रूप में भी काम करेगा।

Last Modified:
Thursday, 17 June, 2021
Satya nadella

अमेरिका की दिग्गज टेक्नोलॉजी कंपनी ‘माइक्रोसॉफ्ट’ (Microsoft) में चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर (सीईओ) सत्या नडेला का कद और बढ़ गया है। दरअसल, कंपनी ने अब उन्हें अपना नया चेयरमैन नामित किया है। नडेला को वर्ष 2014 में माइक्रोसॉफ्ट का सीईओ बनाया गया था।

दो दशकों में पहली बार माइक्रोसॉफ्ट का कोई सीईओ इसके चेयरमैन के रूप में भी काम करेगा। इससे पहले बिल गेट्स ने कंपनी में दोहरी भूमिका निभाई हैं। बता दें कि बिल गेट्स ने वर्ष 2000 में सीईओ और इसके बाद 2014 में चेयरमैन का पद छोड़ दिया था। इसके बाद जॉन थॉम्पसन (John Thompson) ने इंडिपेंडेट चेयरमैन का पदभार संभाला था। नडेला अब जॉन थॉम्पसन की जगह लेंगे।

भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिक नडेला चेयरमैन के रूप में अब बोर्ड के लिए एजेंडा तय करने और स्ट्रैटेजिक अवसरों की पहचान करने समेत तमाम रणनीतियों की दिशा में काम करेंगे। सत्या नडेला का जन्म 19 अगस्त 1967 को हैदराबाद में हुआ था।

उनके पिता एक प्रशासनिक अधिकारी और मां संस्कृत की अध्यापिका थीं। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई भी यहीं से की है और इसके बाद कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई करने के लिए वह अमेरिका चले गए थे। उन्होंने वर्ष 1996 में शिकागो के बूथ स्कूल ऑफ बिजनेस से एमबीए की पढ़ाई की है।

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टीवी-फिल्म कंटेंट में निवेश को लेकर सन टीवी नेटवर्क ने लिया ये निर्णय

वित्तीय वर्ष 2021 की चौथी तिमाही की अर्निंग कॉन्फ्रेंस कॉल (earnings conference call) के दौरान कंपनी प्रबंधन ने कई अहम योजनाओं के बारे में बताया

Last Modified:
Tuesday, 15 June, 2021
Sun TV Network

‘सन टीवी नेटवर्क’ (Sun TV) के प्रबंधन ने घोषणा की है कि कंपनी वित्तीय वर्ष 2022 (FY22) में और इसके बाद टीवी कंटेंट व फिल्म कंटेंट में बड़ा निवेश करेगी। इस दौरान वित्तीय वर्ष की पहली छमाही में ओटीटी कंटेंट में निवेश को कम करना जारी रखेगी। इसके साथ ही कंपनी ने सैटेलाइट अधिकारों के अधिग्रहण के लिए 200-250 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना बनाई है।

वित्तीय वर्ष 2021 की चौथी तिमाही की अर्निंग कॉन्फ्रेंस कॉल (earnings conference call) के दौरान कंपनी प्रबंधन ने कहा, 'तेलुगु और मलयालम मार्केट में वित्तीय वर्ष के दौरान अंतर्राष्ट्रीय फॉर्मेट पर आधारित पांच-छह बड़े बजट के नॉन फिक्शन शो (non-fiction shows) लॉन्च किए जाएंगे। 30-40 एपिसोड वाले ये शो 3-4 महीने तक चलेंगे और प्रति शो की लागत करीब 25-30 करोड़ रुपये आएगी।' बता दें कि कंपनियों के लिए अर्निंग कॉन्फ्रेंस कॉल उसके सभी निवेशकों सहित विश्लेषकों को जानकारी देने का एक तरीका है।

‘सन टीवी नेटवर्क’ के एमडी महेश कुमार का कहना है, ‘हम कुछ अंतर्राष्ट्रीय फॉर्मेट के गैर-फिक्शन शो की ओर देख रहे हैं। मुझे लगता है कि यदि आप वास्तव में गुणवत्ता बढ़ाना चाहते हैं और बेहतरीन प्रॉडक्ट देना चाहते हैं तो लागत में 30-40 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो सकती है। मुझे लगता है कि तीन-चार महीने में मार्केट में यह निवेश आ जाएगा।’ प्रबंधन ने यह भी कहा कि 1200 करोड़ रुपये के निवेश से अगले दो वर्षों में आठ फिल्मों की योजना बनाई गई है।

वहीं, ‘सन टीवी नेटवर्क’ के ग्रुप सीएफओ एसएल नारायणन का कहना है कि मूवी कंटेंट में निवेश और बढ़ाया जाएगा। ‘सन टीवी नेटवर्क’ के सीएफओ वीसी उन्नीकृष्णन का कहना है कि चार फिल्में निर्माणाधीन हैं। उनकी शूटिंग शुरू हो चुकी है और कई चरण पूरे हो चुके हैं, जबकि एक फिल्म लगभग पूरी होने वाली है। कुछ फिल्मों की शूटिंग 30 से 40 फीसदी तक पूरी हो चुकी है। चौथी फिल्म की शूटिंग अभी शुरू हुई है। आठ में से दो फिल्में बड़े बजट की हैं और उनमें दक्षिण भारत के मेगा स्टार्स लीड रोल में हैं।

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सरकार की आलोचना करने वाले पत्रकारों को बनाया जा रहा निशाना: एडिटर्स गिल्ड

यूपी के प्रतापगढ़  जिले में ‘एबीपी गंगा’  के पत्रकार सुलभ श्रीवास्तव की संदिग्ध मौत के मामले पर एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने चिंता जताई और पुलिस के रवैये को आश्चर्यजनक करार दिया है।

Last Modified:
Tuesday, 15 June, 2021
Editors Guild

उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़  जिले में ‘एबीपी गंगा’  के पत्रकार सुलभ श्रीवास्तव की संदिग्ध मौत के मामले पर एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने चिंता जताई और पुलिस के रवैये को आश्चर्यजनक करार दिया है। सोमवार को एक बयान जारी कर एडिटर्स गिल्ड ने कहा है कि प्रतापगढ़ में टीवी पत्रकार सुलभ श्रीवास्तव की रहस्यमयी मौत को लापरवाही बरती जा रही है।  

गिल्ड का कहना है कि सुलभ ने शराब माफिया के गलत कामों का भंडाफोड़ किया था, जिसके बाद पत्रकार को शराब माफियाओं की तरफ से धमकी दी गई, उन्होंने इस संबंध में अपनी जान को खतरा बताते हुए पुलिस को पत्र भी लिखा था, फिर भी पुलिस ने कोई सुरक्षा नहीं दी। अब मौत के बाद जल्दबाजी में पुलिस दावे कर रही है कि मौत दुर्घटना है और हैंडपंप से टकरा जाने की वजह से हादास हुआ है। गिल्ड ने कहा कि ऐसी जल्दबाजी से हैरत हो रही है।

एडिटर्स गिल्ड की तरफ से जारी बयान में यह भी कहा गया है कि ये मामला ऐसे समय में सामने आया है जब मीडिया पर केंद्र और राज्य सरकारों का दबाव बढ़ रहा है कि वह महामारी के मामले में अधिकारियों के नरैटिव पर चलें।

गिल्ड ने राजद्रोह और UAPA जैसे कानूनों के गलत इस्तेमाल का जिक्र करते हुए कहा है कि यह चिंताजनक है कि पुलिस और स्थानीय अधिकारी UAPA का इस्तेमाल पत्रकारों के खिलाफ कर रहे हैं। एडिटर्स गिल्ड ने विनोद दुआ का भी जिक्र किया है, जिनके खिलाफ राजद्रोह का केस दर्ज किया गया था, लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को रद्द कर दिया था।

गिल्ड ने कहा कि सरकार की आलोचना करने वाले पत्रकारों और कार्टूनिस्ट्स को भी सोशल मीडिया पर निशाना बनाया जा रहा है। सरकार इन प्लेटफॉर्म्स पर सरकार की आलोचना करने वाले ऐसे पत्रकारों को हटाने के लिए दबाव डाल रही है। सरकार का कहना है कि उनकी आलोचना करने वाले देश के कानून का उल्लंघन कर रहे हैं। सरकार के ये काम उन वादों के उलट हैं जो पीएम मोदी ने लोकतंत्र, खुलेपन और सत्तावाद को लेकर G-7 सम्मेलन में किए थे।

गिल्ड की टिप्पणी प्रधानमंत्री मोदी के G-7 शिखर सम्मेलन में संबोधन के एक दिन बाद आई है। पीएम मोदी ने अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया था कि साइबर स्पेस लोकतांत्रिक मूल्यों को आगे बढ़ाने के लिए एक अवसर बना रहना चाहिए, उसे नष्ट करने का नहीं।

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TRAI में हुई नए सचिव की एंट्री!

इससे पहले 31 मई तक सुनील कुमार गुप्ता निभा रहे थे यह जिम्मेदारी, अब वह दूरसंचार विभाग में वरिष्ठ उपमहानिदेशक के रूप में अपनी सेवाएं देंगे।

Last Modified:
Monday, 14 June, 2021
TRAI

‘भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण’ (TRAI) में नए सचिव की एंट्री की खबर सामने आई है। मिली खबर के मुताबिक, अब वी. रघुनंदन ‘ट्राई’ के नए सचिव के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वी. रघुनंदन इस पद पर सुनील कुमार गुप्ता की जगह लेंगे। वी. रघुनंदन इससे पहले दूरसंचार विभाग (Department of Telecommunications) में डिप्टी डायरेक्टर जनरल के पद पर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे।

सुनील कुमार गुप्ता को 31 मई, 2021 तक ट्राई सचिव के रूप में सेवा करने के लिए मार्च में दो महीने का विस्तार दिया गया था। अब वह दूरसंचार विभाग में वरिष्ठ उपमहानिदेशक के रूप में अपनी सेवाएं देंगे। वह 22 लाइसेंस सेवा क्षेत्रों (एलएसए) के तहत फील्ड यूनिट्स का कार्यभार संभालेंगे।

बता दें कि सुनील कुमार गुप्ता ने सितंबर 2017 में ट्राई के सचिव के रूप में कार्यभार ग्रहण किया था। उन्हें सुधीर गुप्ता के सेवानिवृत्त होने के बाद इस पद पर नियुक्ति दी गई थी। उससे पहले वह ट्राई में मुख्य सलाहकार (ब्रॉडकास्टिंग एवं केबल सर्विसेज) के रूप में अपनी जिम्मेदारी संभाल रहे थे।  

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भारतीय मूल की पत्रकार मेघा राजगोपालन को मिला पुलित्जर अवॉर्ड, देखें विजेताओं की पूरी लिस्ट

कोरोनावायरस (कोविड-19) के संकट के बीच प्रतिष्ठित पुलित्जर पुरस्कार के विजेताओं की घोषणा कर दी गई है।

Last Modified:
Monday, 14 June, 2021
Megha Rajgopalan

कोरोनावायरस (कोविड-19)  के संकट के बीच प्रतिष्ठित पुलित्जर पुरस्कार के विजेताओं की घोषणा कर दी गई है। इस साल के पुलित्जर पुरस्कार के विजेताओं की सूची में भारतीय मूल की पत्रकार मेघा राजगोपालन शामिल हैं। उन्हें यह अवॉर्ड इंटरनेशनल रिपोर्टिंग की कैटेगरी में दिया गया है। उन्होंने अपनी रिपोर्ट्स में चीन के डिटेंशन कैंपों की सच्चाई दुनिया के सामने रखी थी।

अपनी रिपोर्ट्स में सैटेलाइट तस्वीरों का विश्लेषण कर मेघा राजगोपालन ने बताया था कि चीन ने किस तरह से लाखों उइगुर मुसलमानों को कैद कर रखा है।  मेघा के साथ इंटरनेट मीडिया बजफीड न्यूज (BuzzFeed News) के दो पत्रकारों को भी पुलित्जर पुरस्कार दिया गया। भारतीय मूल के पत्रकार नील बेदी को भी स्थानीय रिपोर्टिंग कैटेगरी में पुलित्जर पुरस्कार दिया गया है।

‘तांपा बे टाइम्स’ (Tampa Bay Times) के रिपोर्टर नील बेदी को फ्लोरिडा में सरकारी अधिकारियों के बच्चों की तस्करी को लेकर इंवेस्टीगेशन स्टोरी की थी और कई अहम खुलासे किए थे। वहीं, अमेरिका की डार्नेला फ्रेजियर को 'पुलित्जर स्पेशल साइटेशन' का अवार्ड दिया गया है। उन्होंने मिनेसोटा में उस घटना को रिकॉर्ड किया था, जिस दौरान अश्वेत-अमेरिकन जॉर्ज फ्लॉएड की जान चली गई थी। इसके बाद नस्लीय हिंसा के विरोध में दुनियाभर में काफी प्रदर्शन हुए थे।

यह अवॉर्ड मिलने पर मेघा राजगोपालन ने अपने पिता के बधाई संदेश को ट्विटर पर शेयर किया है। इसमें मेघा के पिता ने उन्हें पुलित्जर पुरस्कार मिलने की बधाई दी है। अपने ट्वीट में उन्होंने लिखा है, ‘मम्मी ने मुझे अभी ये मैसेज फॉरवर्ड किया है। पुलित्जर पुरस्कार। बहुत बढ़िया।‘ मेघा ने इसके जवाब में उन्हें थैंक्यू लिखा है।

बता दें कि पुलित्जर पुरस्कार की शुरुआत 1917 में की गई थी। यह अमेरिका का एक प्रमुख पुरस्कार है, जो समाचार पत्रों की पत्रकारिता, साहित्य एवं संगीत रचना के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वालों को दिया जाता है।

22 श्रेणियों में दिए जाने वाले इस अवॉर्ड के विजेताओं की पूरी लिस्ट आप यहां देख सकते हैं। 

Sl. No.    Category    Winner
     JOURNALISM

1.    Public service-The New York Times
2.    Criticism- Wesley Morris of The New York Times
3.    Editorial writing- Robert Greene of the Los Angeles Times
4.    International Reporting- Megha Rajagopalan, Alison Killing and Christo Buschek of BuzzFeed News
5.    Breaking News Reporting-Staff of the Star Tribune, Minneapolis, Minn.
6.    Investigative Reporting- Matt Rocheleau, Vernal Coleman, Laura Crimaldi, Evan Allen and Brendan McCarthy of The Boston Globe
7.    Explanatory Reporting- Andrew Chung, Lawrence Hurley, Andrea Januta, Jaimi Dowdell and Jackie Botts of Reuters
8.    Local Reporting- Kathleen McGrory and Neil Bedi of the Tampa Bay Times
9.    National Reporting- Staffs of The Marshall Project; AL.com, Birmingham; IndyStar, Indianapolis; and the Invisible Institute, Chicago
10.    Feature Writing- Mitchell S. Jackson, freelance contributor, Runner’s World
11.    Commentary- Michael Paul Williams of the Richmond (Va.) Times-Dispatch
12.    Breaking News Photography- Photography Staff of Associated Press
13.    Feature Photography- Emilio Morenatti of Associated Press
14.    Audio Reporting-Lisa Hagen, Chris Haxel, Graham Smith and Robert Little of National Public Radio

     BOOKS, DRAMA, AND MUSIC

15.    Fiction- The Night Watchman by Louise Erdrich
16.    Drama- The Hot Wing King, by Katori Hall
17.    History- Franchise: The Golden Arches in Black America, by Marcia Chatelain (Liveright/Norton)
18.    Biography or autobiography- The Dead Are Arising: The Life of Malcolm X by Les Payne and Tamara Payne
19.    Poetry- Postcolonial Love Poem by Natalie Diaz
20.    General nonfiction- Wilmington’s Lie: The Murderous Coup of 1898 and the Rise of White Supremacy by David Zucchino
21.    Music- Stride, by Tania León (Peermusic Classical)
22.    Special Citation- Darnella Frazier, The teenager who recorded the killing of George Floyd

 

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ब्रॉडकास्टर्स की इस मांग को सूचना-प्रसारण मंत्रालय ने ठुकराया, कहा- नहीं कर सकते भेदभाव

सूचना-प्रसारण मंत्रालय ने एक आदेश जारी कर स्पष्ट कर दिया है कि मंत्रालय टीवी चैनलों और अखबारों के डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म को नए आइटी नियमों के दायरे से बाहर नहीं करेगा।

Last Modified:
Saturday, 12 June, 2021
MIB

सूचना-प्रसारण मंत्रालय ने एक आदेश जारी कर स्पष्ट कर दिया है कि मंत्रालय टीवी चैनलों और अखबारों के डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म को नए आइटी नियमों के दायरे से बाहर नहीं करेगा। साथ ही मंत्रालय ने इनसे आइटी नियम, 2021 के प्रावधानों के अनुपालन के लिए तत्काल कदम उठाने को कहा है।

सूचना-प्रसारण मंत्रालय ने कहा कि संगठनों की वेबसाइट को कानून के दायरे में लाने का औचित्य तर्कपूर्ण है। मंत्रालय ने डिजिटल न्यूज पब्लिशर, पब्लिशर ऑफ ऑनलाइन क्यूरेटट कंटेंट या ओटीटी प्लेटफॉर्म और एसोसिएशन ऑफ डिजिटल मीडिया पब्लिशर को दिए स्पष्टीकरण में यह बात कही।

मंत्रालय ने कहा कि कानून में किसी तरह के अपवाद को शामिल करने का मतलब उन डिजिटल न्यूज पब्लिशर के साथ भेदभाव करना है, जो पारंपरिक टीवी या प्रिंट मीडिया से नहीं जुड़े हैं।

जब से नए आईटी नियम अस्तित्व में आए हैं, तभी से अधिकांश मीडिया संगठनों ने, फिर चाहे वह टेलीविजन हो या प्रिंट सभी ने इन नए नियमों के तहत आने का विरोध किया है। परंपरागत मीडिया ने तर्क दिया कि वे पहले से ही विभिन्न नियमों और कानूनों के तहत बंधे हुए है।

वहीं, इसी कवायद के तहत नेशनल ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन (एनबीए) ने हाल ही में मंत्रालय को पत्र भी लिखा, जिसमें पारंपरिक टेलीविजन न्यूज मीडिया और उनके डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म को सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती संस्थानों के लिए दिशा-निर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियमों, 2021 के दायरे से बाहर रखने और छूट प्रदान करने का अनुरोध किया था। एनबीए ने कहा था कि ये पहले से ही विभिन्न नियमों, कानूनों, दिशानिर्देशों और संहिताओं से बंधे हुए हैं।

वहीं, अब मंत्रालय ने एनबीए के अनुरोध को अस्वीकार करते हुए कहा कि 'चूंकि, आचार संहिता यह कहती है कि ऐसे डिजिटल प्लेटफॉर्म पारंपरिक प्रिंट और टीवी मीडिया के लिए मौजूदा मानदंडों/ सामग्री नियमों का पालन करेंगे, इसलिए ऐसी संस्थाओं के लिए कोई अतिरिक्त नियामक बोझ नहीं हैं। इसलिए डिजिटल मीडिया नियमों से बाहर रखने के उनके अनुरोध को स्वीकार नहीं किया जा सकता है।'

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