टीवी पत्रकार को धमकाना बीजेपी नेता व दो शिक्षकों को यूं पड़ गया भारी

काफी समय से मिल रही धमकी के बाद पत्रकार ने जताई थी अपनी हत्या की आशंका

Last Modified:
Friday, 21 June, 2019
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टीवी पत्रकार को जान से मारने की धमकी देने के मामले में पुलिस ने बीजेपी नेता व दो शिक्षकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। मामला उत्तर प्रदेश के कन्नौज का है। बताया जाता है कि तिर्वा क्रासिंग निवासी पत्रकार की शिकायत के बाद एसपी अमरेंद्र प्रसाद सिंह के आदेश पर कोतवाली पुलिस ने यह एफआईआर दर्ज की है। अपनी शिकायत में एक निजी टीवी चैनल के संवाददाता नित्य प्रकाश मिश्रा का कहना था कि उन्होंने पिछले दिनों तिर्वा कोतवाली क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय टिकरा को लेकर एक रिपोर्ट तैयार की थी। इसमें शिक्षकों के विवाद व बच्चों के साथ हो रहे भेदभाव को हाईलाइट किया गया था।

नित्य प्रकाश मिश्रा का कहना था कि इस विद्यालय में तैनात शिक्षक सुरजीत सिंह समेत उनके रिश्तेदार शिक्षक विवेक सिंह व विवेक के पिता और स्थानीय भाजपा नेता हरिबक्श सिंह ने उन पर दबाव बनाया कि वे खबर न चलाएं। नित्य प्रकाश मिश्रा का कहना था कि इस बात से इनकार करने पर शिक्षक व उनके रिश्तेदारों ने उनके दफ्तर में कई साथियों के साथ आकर जान से मारने की धमकी दी और 13 जून को विवेक सिंह ने मोबाइल पर फिर से धमकी दी। इसके बाद नित्य प्रकाश मिश्रा ने अपनी हत्या किए जाने की आशंका जताते हुए एसपी को प्रार्थना पत्र देकर न्याय की मांग की थी। अब एसपी के आदेश पर सदर कोतवाली में तीनों के खिलाफ एफआइआर दर्ज की गई। प्रभारी निरीक्षक भीमसेन पौनिया का कहना है कि आरोपित शिक्षकों को पकड़कर जल्द ही उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

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‘कितना विशाल व्यक्तित्व समेटे हुए थे जेटली जी, उस दिन अहसास हुआ’

जेटली जी सामने हों और चर्चा-परिचर्चा न हो, ऐसा कैसे मुमकिन है? लेकिन आश्चर्य कि उस दिन बात राजनीति से हटकर हुई

Last Modified:
Sunday, 25 August, 2019
Rakhee Bakshee

राखी बख्शी, वरिष्ठ पत्रकार।।

दोपहर में जब अरुण जेटली के दुनिया से अलविदा कह देने की खबर चलने लगी तो अचानक एक छोटी सी मुलाकात आंखों में घूम आयी। एक प्रतिबद्ध राजनीतिज्ञ, एक बुद्धिजीवी और एक रणनीतिकार व्यक्तित्व। इतना विशाल कि शब्दों की शायद कमी पड़ जाए। एक बार जब जेटली जी से मुखातिब हुई थी तो अलग व्यक्तित्व ही सामने थे। किसी के आमंत्रण पर मैं ठीक समय पर पहुंची थी। सामने के सोफे पर अरुण जेटली बैठे हुए थे। जेटली जी सामने हों और चर्चा-परिचर्चा न हो, ऐसा कैसे मुमकिन है? लेकिन आश्चर्य कि उस दिन बात राजनीति से हटकर हुई। चर्चा का केंद्र बना संगीत। बात संतूर पर शुरू हुई और कौतूहल बढ़ता गया। एक स्पष्ट तर्कसंगत व्यक्तित्व की कोमलता की परत खुलने लगी।

अपनी राजनैतिक गतिविधियों और व्यस्तताओं को एक ओर रख एक मर्मज्ञ की तरह अरुण जेटली जी संतूर की परत दर परत खोलने लगे। शिवकुमार शर्मा की संतूर के साथ जादूगरी की प्रशंसा उनकी आंखों को चमकदार बनाती गई। मैं मंत्रमुग्ध अपने द्वंद्व से जूझती आश्चर्य से भरी हुई किसी अनछुए पहलू के अनायास ही सामने आने से विस्मृत थी। अभी कोई दूसरा पहुंचा नहीं था और जेटली जी ने बताया कि उन्हें शॉल बहुत पसंद है। जामावत शॉल उनकी पसंदीदा शॉल में से एक थी। कितना विशाल व्यक्तित्व समेटे हुए थे जेटली जी, उस दिन अहसास हुआ।

दिल्ली में छात्र राजनीति से शुरुआत, फिर इमरजेंसी का विरोध, उसके बाद वकालत की शुरुआत और नब्बे के दशक में भाजपा से जुड़ना। जेटली जी को उस मुलाकात के बाद जब-तब देखा सुना और समझा तो बार-बार ये लगा कि सिर्फ विषय की तह तक जाकर उसे तर्कसंगत बनाना ही जेटली जी का मकसद नहीं होता था। बल्कि पेश आईं समस्याओं के समाधान में उनकी रुचि होती थी और जन-सामान्य के लिए क्या बेहतर और कैसे बेहतर हो सकता है, ये उनका लक्ष्य था। भाव हमेशा स्थाई और गंभीर होने के बावजूद एक मानवीय पहलू ऐसा जो हमेशा दूसरों की मदद के लिए तैयार रहता था। व्यक्तिगत क्षमता में भी जाकर उनका किसी दूसरे की मदद करना और किसी पद पर रहते हुए व्यक्ति को पीछे छोड़ संस्था व देश के कानून के साथ संतुलन साधना ये सार्वजनिक जीवन का सार है, जिसे उन्होने पूरी तरह से चरितार्थ किया।

राजनीति में सक्रिय होने के बाद उन्होंने संगठन से लेकर सरकार तक में कई पदों को संभाला, लेकिन पदभार को सिर्फ कर्तव्य मान उनका निर्वहन करना और सादगी के साथ कार्यकाल पूरा हो जाने पर उसे बिना हिचक छोड़ देना ये अनुशासित व्यक्तित्व ही कर सकता है। जेटली जी ने राष्ट्र के लिए जरूरी कानून में सुधारों तक जैसे कई आमूलचूल परिवर्तनों को अंजाम दिया। 2014 के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था को दुनिया की पांच बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल कराना। ईज ऑफ डूइंग बिज़नेस रैंकिंग में भारत की छलांग, निवेश का बढ़ना, महंगाई दर पर गजब का नियंत्रण, बैंकिंग सेवाओं में सुधार और एनपीए के भस्मासुर को काबू में लगा सिर्फ और सिर्फ उनके जैसे साधक के वश में ही था। संघीय ढांचे को बनाए रखते हुए जीएसटी जैसा बड़ा कर सुधार लागू करवाना उन बड़े कदमों में से एक था, जिन्होंने एक-एक कर भारतीय अर्थव्यवस्था को एक औपचारिक बंधन में बांधा और आम लोगों की गाढ़ी कमाई को सुरक्षित बनाया।

अरुण जेटली जैसे कुशल राजनीतिज्ञ का जाना वाकई एक क्षति है, जिसे पूरा नहीं किया जा सकता। उनके सार्वजनिक जीवन के योगदान को देखकर कहा जा सकता है कि कोई व्यक्तित्व अपने जीवनकाल में किस तरह एक रणनीतिकार, एक संगठनकर्ता और एक ऊर्जावान पौध खड़ा करता है, जो राष्ट्र के आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन को बेहतर और भी बेहतर बनाते चले जाते हैं।

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ऐसे में बीस-पच्चीस साल पुराने अरुण जेटली याद आते थे, बोले वरिष्ठ पत्रकार आलोक जोशी

जान लगा देने का जज्बा ही था कि लंबी बीमारी के बावजूद वो मोदी सरकार में न सिर्फ महत्वपूर्ण मंत्रालय संभालते रहे, बल्कि तमाम मोर्चों पर संकट मोचक की भूमिका भी निभाते रहे

Last Modified:
Sunday, 25 August, 2019
Alok Joshi

आलोक जोशी, वरिष्ठ पत्रकार।।

मेरा अरुण जेटली से कभी कोई निजी रिश्ता नहीं रहा। पच्चीस साल पहले एक रिपोर्टर के तौर पर बड़े मुकदमों के सिलसिले में उनकी छोटी टिप्पणियां रिकॉर्ड करने से लेकर पिछले कुछ वर्षों में वित्तमंत्री के इंटरव्यू करने तक चंद औपचारिक मुलाकातें ही हैं। इनमें भी ज़्यादातर भागते दौड़ते, कट टू कट बातचीत। जिंदगी अक्सर सांस लेने का भी वक्त नहीं देती।

दो-चार मौकों पर संपादकों से बातचीत वाले औपचारिक भोज सत्रों में भी मुलाकातें हुईं, लेकिन पिछले कुछ सालों में ये साफ दिखता था कि सेहत उन्हें परेशान कर रही है। बैठक या इंटरव्यू के दौरान भी ये दबाव महसूस होने लगा था। ऐसे में बीस-पच्चीस साल पुराने अरुण जेटली याद आते ही आते थे। हंसते, मुस्कुराते, जिंदादिल अरुण जेटली। शुरुआती दिनों में जिसने भी उन्हें देखा, वो उनकी शख्सियत के जादू से अछूता नहीं रह सकता। मुस्कुराहट, हंसी, तर्क की ताकत और मुकदमों में जान लगा देने का जज्बा।

जान लगा देने का जज्बा ही था कि लंबी बीमारी के बावजूद वो मोदी सरकार में न सिर्फ महत्वपूर्ण मंत्रालय संभालते रहे, बल्कि तमाम मोर्चों पर संकट मोचक की भूमिका भी निभाते रहे। पार्टी के बाहर और राजनीति के बाहर भी अरुण जेटली बहुतों के दोस्त, हितैषी और मददगार थे। बैठकबाज भी थे। इसलिए पत्रकारों की एक मंडली भी थी, जो निरंतर उनके आसपास देखी जाती थी और इस नज़दीकी का फायदा भी उठाती थी। लेकिन किस्सा इस मंडली तक का नहीं है।

बहुत से पत्रकार हैं और गैर पत्रकार भी, जिनकी वक्त जरूरत जेटली जी ने मदद की। खासकर बुरे वक्त पर उनके पास जाने वाले निराश नहीं लौटते थे। मदद तो उन्होंने राजनीति में भी की। ऐसे लोगों की काफी मदद की जो फर्श से अर्श तक पहुंचे और उन्हें जेटली जी हमेशा मित्र और हितैषी दिखते रहे।

राजनीति में भी उन्होंने एक अलग अंदाज से ही अपना मुक़ाम बनाया। लोग सोचते रहे, कहते रहे और लिखते रहे कि अब जेटली कमजोर पड़ रहे हैं, लेकिन वो लगातार मजबूत होते रहे। नरेंद्र मोदी उन पर कितना भरोसा करते रहे, ये कम ही लोगों को पता है, मगर अब धीरे-धीरे ज्यादा लोगों को महसूस होगा, जैसे-जैसे उनके न रहने से पैदा हुआ खालीपन सामने आएगा।

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'जेटली जी ने वायदा पूरा करने का समय ही नहीं दिया'

मीडिया का अरुण जी बहुत संम्मान करते थे लेकिन अपने अंतिम इंटरव्यू में उन्होंने राफेल पर कुछ मीडिया समूहों की पत्रकारिता पर बहुत दुख जताते हुए कहा था कि आपके जीवन में विश्वस्नीयता आपकी सबसे बड़ी चीज

Last Modified:
Sunday, 25 August, 2019
Ashok Srivastava

अशोक श्रीवास्तव, वरिष्ठ एंकर, डीडी न्यूज

एक वायदा सुषमा स्वराज जी ने मुझसे किया था, जिसे उन्होंने पूरा नहीं किया और एक वायदा मैंने अरुण जेटली जी से किया था जिसे मैं पूरा नहीं कर पाया।  क्योंकि ये दोनों ही प्रखर राजनेता असमय ही हम सबको छोड़ कर चले गए। 

सुषमा जी से 2016 में मुझसे वायदा किया था कि जब भी वो टेलीविज़न चैनलों को इंटरव्यू देना शुरु करेंगी तो सबसे पहला इंटरव्यू मुझे ही देंगी। ये बात तब की है जब वो भारत की विदेश मंत्री थीं। विदेश मंत्री बनने के बाद से ही मैं डीडी न्यूज़ के लिए उनका इंटरव्यू करना चाहता था। भारत में ही नहीं एक बार न्यूयॉर्क में भी संयुक्त राष्ट्र की बैठक में जब वो हिस्सा लेने गईं थीं तब भी मैंने उनसे ऐसा अनुरोध किया था। 2016 में एक बार उन्होंने मुझे बुलाया और कहा कि वो किसी न्यूज़ चैनल को इंटरव्यू नहीं दे रहीं हैं पर साथ ही वायदा किया कि जब ये सिलसिला शुरू करेंगी, सबसे पहले मुझे बुलाएंगी।

विधि का विधान देखिए कि सुषमा जी का इंटरव्यू तो मैं नहीं कर पाया पर अरुण जेटली जी का अंतिम टीवी इंटरव्यू मैंने ही किया।

लोकसभा चुनावों के दौरान 23 मार्च को उनका समय मिला। शाम को जब मैं अपनी कैमरा टीम के साथ अरुण जी के घर पहुंचा तब मैंने अपनी पुस्तक "नरेन्द्र मोदी सेंसर्ड" की एक प्रति साथ रख ली और सोचा कि मौका मिला तो उनको पुस्तक भेंट कर दूंगा। हम लोग अरुण जी के स्टडी रूम में उनका इंतज़ार कर रहे थे। मैंने अपनी पुस्तक टेबुल पर रख दी। जैसे ही अरुण जी आये हम सब लोग एक-एक करके उनका अभिवादन करने लगे। हम लोग अरुण जी को देख रहे थे पर उनकी नज़र मेरी पुस्तक पर थी जो उनकी पहुंच से थोड़ी दूर पर थी। अचानक जेटली जी आगे बढ़े और पूरा हाथ बढ़ा कर पुस्तक उठा ली और बोले -ये क्या है?

मैंने कहा कि सर यह मेरी पुस्तक है अभी कुछ दिन पहले ही इसका लोकार्पण हुआ है। जेटली जी पुस्तक को पूरी दिलचस्पी के साथ उलट-पलट कर देखने लगे तो मैं उन्हें पुस्तक की विषय-वस्तु के बारे में बताने लगा। फिर उन्होंने पुस्तक हाथ में ली और बोले तस्वीर खींचों। मैं सकपका गया। फटाफट उनके साथ खड़ा हो गया और अपने प्रोड्यूसर तुमुल को कहा कि जल्दी से फोटो खींच लो। फोटो सेशन खत्म हुआ तो बोले -"मैं इसको पढूंगा ज़रूर, लेकिन हिन्दी में किताबें पढ़ने का अभ्यास छूट गया है। तुम इसको इंग्लिश में भी प्रकाशित करो। मैंने उनसे वायदा किया कि जल्द ही मैं "नरेन्द्र मोदी सेंसर्ड" का इंग्लिश अनुवाद प्रकाशित करूँगा। मैंने मन ही मन सोचा कि अंग्रेजी संस्करण का लोकार्पण अरुण जेटली जी के हाथों से ही कराऊंगा। लेकिन इससे पहले कि मैं पुस्तक का अनुवाद करवाता जेटली जी दुनिया को अलविदा कह गए। 

जितने साल से मैं पत्रकारिता कर रहा हूँ, जेटली जी से मेरा परिचय लगभग उतना ही पुराना है। क्योंकि मैंने बीजेपी बीट की रिपोर्टिंग के साथ अपने करियर की शुरुआत की इसलिए जेटली जी से परिचय तो होना ही था। उनकी प्रेस कॉन्फ्रेंस और औपचारिक पीसी के बाद पत्रकारों के साथ अनौपचारिक पीसी में बहुत कुछ जानने को मिलता था, सीखने को मिलता था। हालांकि मेरी उनसे बहुत निकटता कभी नहीं रही। क्योंकि वो बड़े-बड़े और खासकर अंग्रेज़ी के पत्रकारों से घिरे रहते थे तो मैं दूर से ही उन्हें सुनता था दूर से ही उनसे सवाल करता था।

पर वो मेरे जैसे युवा और नए पत्रकारों को भी पूरा सम्मान दिया करते थे। मुझे लगता था कि अरुण जी मुझे पहचानते नहीं होंगे लेकिन एक दिन अचानक उन्होंने जब मुझे नाम से पुकारा और मेरी एक रिपोर्ट पर चर्चा करने लगे तब मुझे अहसास हुआ कि वो बीजेपी कवर करने वाले सभी पत्रकारों को पहचानते थे और उनकी रिपोर्ट्स पढ़ते थे। 

हालांकि पत्रकारों का, मीडिया का अरुण जी बहुत संम्मान करते थे लेकिन अपने अंतिम इंटरव्यू में उन्होंने राफेल पर कुछ मीडिया समूहों की पत्रकारिता पर बहुत दुख जताते हुए कहा था कि आपके जीवन में विश्वस्नीयता आपकी सबसे बड़ी चीज होती है, जब आप इसे गंवा देते हैं तो कुछ नहीं बचता।"

2014 के लोकसभा चुनावों के बाद जब अरुण जेटली जी को सूचना प्रसारण मंत्रालय का दायित्व दिया गया उसके बाद कई बार मेरी उनसे निजी मुलाकात हुई और कई बार उनका इंटरव्यू करने का मौका मिला। ऐसा ही एक अवसर 2017 में बजट के बाद आया। जब मैंने और नीलम शर्मा दोनों ने मिल कर अरुण जी का इंटरव्यू लिया था। दुर्भाग्य देखिए पिछले शनिवार नीलम हम सबको छोड़ कर चली गईं और इस शनिवार अरुण जी !
 

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अरुण जेटली की यही खूबी उन्हें खास बनाती थी

अपनी पीढ़ी के नेताओं को बहुत पीछे छोड़ दिया था अरुण जेटली ने, अब उनके निधन से पुरानी और नई भाजपा के बीच का पुल टूट गया

Last Modified:
Sunday, 25 August, 2019
Arun Jail

विनोद अग्निहोत्री, कंसल्टिंग एडिटर, अमर उजाला।।

पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली भले ही लोकसभा का सिर्फ एक ही चुनाव लड़े और वो भी हार गए, तब जबकि पूरे देश में मोदी लहर थी, लेकिन राजनीति की पिच पर जेटली ने अपनी पीढ़ी के सभी नेताओं को बहुत पीछे छोड़ दिया। जेटली भाजपा में एक ऐसे शीर्ष नेता थे, जिन्हें भले ही अटल बिहारी वाजपेयी या नरेंद्र मोदी की तरह करिश्माई जन नेता न माना जाता रहा हो, लेकिन अपनी पार्टी के हर स्तर के कार्यकर्ताओं से उनका संपर्क और संवाद इतना सशक्त और जीवंत था कि आज अरुण जेटली के असमय चले जाने से भाजपा का हर कार्यकर्ता ऐसा महसूस कर रहा है कि मानो कोई उसका अपना चला गया हो। पूरब से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण हर राज्य में पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच अरुण जेटली की लोकप्रियता अपने समकक्ष नेताओं में सबसे ज्यादा थी।

जेटली उस युवा पीढ़ी के नेता थे, जिसका राजनीतिक शिक्षण प्रशिक्षण विश्वविद्यालयों की छात्र राजनीति में हुआ। जिससे निकलकर सत्तर-अस्सी के दशक में अनेक युवा छात्र नेताओं ने देश की राजनीति में आजादी के बाद के सबसे बड़े आंदोलन की इबारत लिखी थी। जेटली के असमय चले जाने से उस तत्कालीन युवा पीढ़ी की एक बड़ी कड़ी और टूट गई, जिसने राजनीति से संन्यास ले चुके बूढ़े जय प्रकाश नारायण के आह्वान पर उन इंदिरा गांधी की सर्वशक्तिमान सत्ता को चुनौती दी थी, जिन्हें 1971 में भारत पाकिस्तान युद्ध में जीत के बाद विपक्ष के दिग्गज नेताओं ने भी अपराजेय और भारतीय राजनीति की दुर्गा मान लिया था।

अरुण जेटली जब 1974 में दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ के अध्यक्ष चुने गए, तब वह विद्यार्थी परिषद में थे और दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति में कांग्रेस के छात्र संगठन की तूती बोलती थी, लेकिन अरुण के करिश्माई चेहरे ने यहां भाजपा के छात्र संगठन विद्यार्थी परिषद का झंडा गाड़ दिया,इसीलिए आज तक दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ के पूर्व अध्यक्षों में सबसे ज्यादा अगर किसी को याद किया जाता है तो अरुण जेटली को ही। यह भी सियासी बिडंबना है कि न जाने कितने भाजपा नेताओं-कार्यकर्ताओं को विधायक और सांसद बनवाने वाले जेटली छात्र संघ चुनाव के बाद सिर्फ एक सीधा चुनाव लड़े। 2014 में अमृतसर लोकसभा टिकट से पार्टी ने उन्हें उतारा, लेकिन पूरे देश में चल रही मोदी लहर के बावजूद कांग्रेस के कैप्टन अमरिंदर सिंह के हाथों उन्हें हारना पड़ा।

अरुण जेटली ने जब छात्र राजनीति में प्रवेश किया तब और उसके पहले देश और विशेषकर उत्तर भारत की छात्र राजनीति में समाजवादी युवजन सभा और कहीं कहीं सीपीआई व सीपीएम के छात्र संगठन एआईएसएफ और एसएफआई का दबदबा था। जयपुर से लेकर मेरठ, अलीगढ़, आगरा, कानपुर, लखनऊ, फैजाबाद, इलाहाबाद, बनारस, गोरखपुर, पटना तक ज्यादातर विश्वविद्यालयों के छात्रसंघों पर समाजवादी विचारधारा के छात्र एवं युवा संगठन समाजवादी युवजन सभा का कब्जा था। मेरठ विश्वविद्यालय में छात्र राजनीति में सत्यपाल मलिक का दबदबा था, तो आगरा में उदयन शर्मा, कानपुर में रघुनाथ सिंह, प्रेम कुमार त्रिपाठी, इलाहाबाद में जगदीश दीक्षित, गोरखपुर में रवींद्र प्रताप सिंह, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में देवव्रत मजूमदार, पटना में शिवानंद तिवारी, लखनऊ में आलोक भारती और अलीगढ़ में मोहम्मद अदीब,जैसे छात्र नेता शिखर पर थे। उन दिनों आमतौर पर बीएचयू, एएमयू, इलाहाबाद, लखनऊ और पटना विश्वविद्यालयों को उत्तर भारत की छात्र राजनीति का गढ़ माना जाता था और बीएचयू छात्र संघ के अध्यक्ष का कद अन्य छात्र संघों के नेताओं की तुलना में ज्यादा बड़ा माना जाता था। हालांकि, इलाहाबाद विश्वविद्यालय से उसे चुनौती मिलती रहती थी।

1974 में जब छात्रों का बिहार आंदोलन शुरु हुआ, तब दिल्ली विश्वविद्यालय में अरुण जेटली छात्र संघ अध्यक्ष थे, जेएनयू में आनंद कुमार जो बीएचयू छात्र संघ के भी अध्यक्ष रह चुके थे, छात्र संघ की कमान संभाल रहे थे और बीएचयू में मोहन प्रकाश छात्र संघ अध्यक्ष थे, जबकि लालू प्रसाद यादव पटना विश्वविद्यालय छात्रसंघ के अध्यक्ष थे और कानपुर में प्रेम कुमार त्रिपाठी, रामकृष्ण अवस्थी, शिवकुमार बेरिया छात्र राजनीति की कमान संभाले हुए थे। इसी दौर की छात्र राजनीति से देश की मुख्य राजनीति में आए अन्य बड़े नामों में प्रकाश करात, सीताराम येचुरी, नीतीश कुमार, अतुल कुमार अंजान, आरिफ मोहम्मद खान, रामविलास पासवान आदि शामिल हैं। जबकि जबलपुर विश्वविद्यालय छात्र संघ के अध्यक्ष रह चुके शरद यादव 1974 का उपचुनाव जीतकर लोकसभा में पहुंचे थे।

इनमें से ज्यादातर नेता जेपी आंदोलन में शामिल हुए और पूरे उत्तर भारत में इंदिरा सरकार के खिलाफ छात्रों और युवाओं को आंदोलित करने में उनकी अहम भूमिका थी। इन्हें आपातकाल में गिरफ्तार करके जेल भी भेजा गया। फिर 1977 से सबने अपनी अपनी राह पकड़ी। जहां जेटली जनसंघ से जनता पार्टी और भाजपा की राजनीति में शिखर तक पहुंचे, वहीं सत्यपाल मलिक, शरद यादव, लालू यादव, नीतीश कुमार, रामविलास पासवान, मोहन प्रकाश गैर कांग्रेस, गैर भाजपा राजनीति के तमाम ठिकानों पर रहते हुए इन दिनों अलग-अलग ठिकानों पर हैं। सत्यपाल मलिक भाजपा में आए और जम्मू कश्मीर के राज्यपाल हैं। शरद यादव लंबी राजनीतिक पारी खेल चुके हैं। लालू प्रसाद यादव बिहार के मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री होते हुए जेल में हैं। मोहन प्रकाश कांग्रेस में हैं और आरिफ मोहम्मद खान सक्रिय राजनीति से दूर सामाजिक कार्यकर्ता की भूमिका में हैं। प्रकाश करात और सीताराम येचुरी माकपा के शीर्ष नेतृत्व में हैं। आनंद कुमार जेएनयू के प्रोफेसर रहे और कुछ दिनों तक आम आदमी पार्टी में भी सक्रिय रहे। रामविलास पासवान भाजपा के साथ केंद्रीय मंत्री हैं तो नीतीश कुमार बिहार में भाजपा के साथ साझा सरकार चला रहे हैं। शिवानंद तिवारी, मोहम्मद अदीब अब सिर्फ पूर्व सांसद हैं, वहीं दादा देवव्रत मजूमदार स्वर्गवासी हैं और चंचल कुमार सिंह अपने गांव में हैं।

कुल मिलाकर 1965 से 1975 के दशक के तमाम छात्र नेताओं में अरुण जेटली एक ऐसे नेता रहे, जिन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। जेटली ने अपनी विचारधारा और संगठन में अपना महत्व लगातार बढ़ाया और देश की राजनीति में शीर्ष पर पहुंचे। उनकी यही पृष्ठभूमि भाजपा में उन्हें खास बनाती थी। वह दिल्ली के सत्ता गलियारों और पेज थ्री वर्ग के बीच भी खप जाते थे तो दूसरी तरफ बिहार, उत्तर प्रदेश के खांटी भाजपा कार्यकर्ताओं की भी सुनते थे। जेपी आंदोलन की पृष्ठभूमि उन्हें गैर भाजपा दलों के नेताओं के साथ भी अच्छे निजी रिश्ते बनाने में काम आती थी, तो वकालत के पेशे ने उन्हें कानून की दुनिया में दिग्गज बनाया। अच्छी अंग्रेजी, हिंदी में समान अधिकार और अपनी बात को तार्किक तरीके से समझाने की उनकी शैली विपक्षियों को भी चित कर देती थी और इससे कई बार वह राजनीतिक विमर्श की दिशा बदल देते थे। 2004 और 2009 की लगातार पराजय से त्रस्त भाजपा के मनोबल को अगर जिन नेताओं ने गिरने नहीं दिया और तत्कालीन सत्ता पक्ष को लगातार घेरा, उनमें एक जेटली थे तो दूसरीं सुषमा स्वराज। यह दुर्योग है कि महज इसी अगस्त महीने में दोनों चिरनिद्रा में सो गए।

जेटली की राजनीतिक खुलेपन की पृष्ठभूमि भाजपा के तब बेहद काम आई, जब बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद देश की राजनीति में भाजपा लगभग अछूत हो गई थी। तब भाजपा के शीर्ष नेतृत्व अटल-आडवाणी-जोशी ने जेटली के युवा राजनीति के संपर्कों का पार्टी के लिए इस्तेमाल किया और वाजपेयी के एनडीए से लेकर मौजूदा मोदी के एनडीए के गठन और संचालन में अरुण जेटली की अति महत्वपूर्ण भूमिक रही। इसलिए उनके निधन से देश की राजनीति में साझा सरकारों के एक प्रमुख शिल्पकार की गैरमौजूदगी लंबे समय तक खलती रहेगी और भाजपा में भी आसानी से अरुण जेटली का विकल्प मिलता दिखता नहीं है।

(यह लेखक के निजी विचार हैं)

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पत्रकारिता की आड़ में कर रहे थे गलत काम, हुआ ये अंजाम

दो पत्रकार पूर्व में भी जेल जा चुके हैं, आरोपितों में लखनऊ का एक पत्रकार भी शामिल

पंकज शर्मा by पंकज शर्मा
Published - Saturday, 24 August, 2019
Last Modified:
Saturday, 24 August, 2019
Journalist

पत्रकारिता की आड़ में अवैध वसूली में लिप्त रहने के आरोप में चार पत्रकारों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। इनमें लखनऊ का भी एक पत्रकार शामिल हैं। इनकी गिरफ्तारी गाजियाबाद, लखनऊ और ग्रेटर नोएडा से की गई है। गिरफ्तार चार पत्रकारों में से दो पूर्व में भी जेल जा चुके हैं। नोएडा पुलिस ने बीटा 2 कोतवाली में इन पत्रकारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।

जिन पत्रकारों को गिरफ्तार किया गया है, उनमें चंदन रॉय, नीतीश पांडेय, सुशील पंडित और उदित गोयल शामिल हैं। पांचवां आरोपित पत्रकार रमन ठाकुर फिलहाल फरार है। पुलिस ने उसकी तलाश शुरू कर दी है। गिरफ्तार पत्रकारों पर गैंगस्टर लगाया गया है।

नोएडा पुलिस के ट्विटर हैंडल पर एसएसपी वैभव कृष्ण ने इस पूरे मामले की जानकारी दी है।  

वहीं, मीडिया जगत में चर्चा है कि इन पत्रकारों की गिरफ्तारी नोएडा पुलिस और कप्तान के खिलाफ लगातार खबरें छापने को लेकर की गई है। बताया जाता है कि ये पूरा मामला दो आईपीएस अधिकारियों वैभव कृष्ण और अजयपाल शर्मा के बीच आपसी ‘जंग’ का नतीजा है। गिरफ्तार किए गए पत्रकारों को अजयपाल शर्मा के खेमे का माना जाता है जबकि वैभव कृष्ण इन दिनों नोएडा के एसएसपी हैं।

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कवरेज के लिए पहुंचीं पत्रकार मौसमी सिंह के साथ हुआ ये सलूक, देखें विडियो

श्रीनगर एयरपोर्ट पर हंगामा होने के बाद राहुल गांधी समेत अन्य 11 विपक्षी नेताओं को शनिवार को वापस लौटा दिया गया

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Saturday, 24 August, 2019
Last Modified:
Saturday, 24 August, 2019
Mausami Singh

श्रीनगर एयरपोर्ट पर हंगामा होने के बाद राहुल गांधी समेत अन्य 11 विपक्षी नेताओं को शनिवार को वापस लौटा दिया गया है। उन्हें श्रीनगर एयरपोर्ट से बाहर ही नहीं निकले दिया गया था। बताया जाता है कि इस दौरान मीडिया से बदसलूकी भी की गई। आरोप है कि स्थानीय पुलिस ने मौके पर कवरेज के लिए पहुंचीं हिंदी न्यूज चैनल आजतक की पत्रकार मौसमी सिंह समेत कई पत्रकारों के साथ दुर्व्यवहार किया।

इस दौरान मौसमी सिंह चिल्ला-चिल्लाकर कहतीं रहीं कि आप मुझे धक्का क्यों दे रहे हैं? आखिर आप ये क्या कर रहे हैं? आप मीडिया के साथ मारपीट नहीं कर सकते हैं, लेकिन पुलिस ने उनकी एक नहीं सुनी। इस छीनाझपटी में मौसमी सिंह के खरोंचें भी आई हैं। मौसमी सिंह के अनुसार, पुलिसकर्मियों ने मौसमी सिंह समेत पत्रकार से दुर्व्यवहार भी किया, जिसका विडियो भी वायरल हो गया है। इस विडियो को आप यहां देख सकते हैं।

गौरतलब है कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी की अगुआई में कई विपक्षी दलों के नेता शनिवार को जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर पहुंचे थे। प्रशासन के मना करने के बावजूद ये नेता यहां आए थे। कश्मीर पहुंचने वाले नेताओं में राहुल गांधी, गुलाम नबी आजाद, आनंद शर्मा के अलावा शरद यादव आदि शामिल थे।

न्यूज एजेंसी ANI की रिपोर्ट के अनुसार इन सभी नेताओं को वापस भेज दिया गया है।

इससे पहले जम्मू-कश्मीर सरकार ने शुक्रवार रात बयान जारी कर राजनेताओं से घाटी की यात्रा नहीं करने को कहा था, क्योंकि इससे धीरे-धीरे शांति और आम जनजीवन बहाल करने में बाधा पहुंचेगी। बयान में यह भी कहा गया था कि सियासतदानों की यात्रा पाबंदियों का उल्लंघन करेंगी जो घाटी के कई इलाकों में लगाई गई हैं।

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जानें, क्यों इस कार्यक्रम में आमंत्रित पत्रकारों को करना पड़ा अप्रिय स्थिति का सामना

कार्यक्रम की कवरेज के लिए पत्रकारों को इस महीने की शुरुआत में ही आमंत्रण पत्र के साथ ही नंबर टैग और पार्किंग पास तक बांट दिए गए थे

Last Modified:
Friday, 23 August, 2019
Media

दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में आमंत्रित पत्रकारों को उस समय काफी अप्रिय स्थिति का सामना करना पड़ा, जब उन्हें पता चला कि मीडिया को कार्यक्रम के कवरेज की अनुमति नहीं है। मीडियाकर्मियों के साथ इस तरह का व्यवहार भारतीय इंटेलिजेंस एजेंसी ‘रिसर्च एंड एनालिसिस विंग’ (RAW) के मुख्यालय में 20 अगस्त को आयोजित आरएन काओ मेमोरियल लेक्चर के दौरान हुआ। कार्यक्रम को गृहमंत्री अमित शाह ने संबोधित किया।

अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित खबर में बताया गया है कि इस कार्यक्रम की कवरेज के लिए पत्रकारों को इस महीने की शुरुआत में ही आमंत्रण पत्र के साथ ही नंबर टैग और पार्किंग पास तक बांट दिए गए थे। रविवार को रॉ के ऑफिस से फोन कर पत्रकारों को बताया गया कि मीडिया को इस कार्यक्रम को कवर करने की अनुमति नहीं है। इस बारे में रॉ अधिकारी ने जोर दिया कि उनकी लिस्ट में शामिल प्रत्येक पत्रकार से इस बारे में संपर्क किया जा रहा है।

बता दें कि इस एजेंसी के संस्थापक आरएन काओ की पुण्यतिथि पर वर्ष 2007 में लेक्चर सीरीज की शुरुआत की गई थी। सिर्फ इसी दिन मीडिया के एक वर्ग को लोदी रोड के निकट कड़ी सुरक्षा वाले रॉ मुख्यालय में प्रवेश की अनुमति दी जाती थी। यही नहीं, मीडिया को इस दौरान स्पीकर से सवाल पूछने के साथ ही वहां आमंत्रित व्यक्तियों से खुले तौर पर बातचीत की आजादी मिल पाती थी।

पूर्व में कई राजनयिक, अधिकारी और उद्यमी यहां लेक्चर दे चुके हैं। इनमें शशि थरूर, कुमारमंगलम बिड़ला, एनएन बोहरा, पियूष पांडे, रघुराम राजन, नरेश चंद्रा और प्रताप भानु मेहता आदि शामिल हैं। यह पहला मौका था, जब किसी मंत्री को यह लेक्चर देने के लिए आमंत्रित किए गया। गौरतलब है कि इससे पहले वित्त मंत्रालयन ने एक आदेश जारी किया था, जिसके तहत अब PIB एक्रिटेड पत्रकार भी बिना अपॉइंटमेंट के मंत्रालय में सीधे अंदर नहीं जा सकते हैं।

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Realty Plus के इस कार्यक्रम में दिखा रियल एस्टेट सेक्टर का ‘दम’, दिए अवॉर्ड्स

कार्यक्रम के दौरान कई पैनल डिस्कशंस भी हुए, जिसमें दिग्गजों ने अपने विचार शेयर किए

Last Modified:
Friday, 23 August, 2019
Reality Plus

11वें रियलिटी प्लस कॉन्क्लेव और एक्सीलेंस अवॉर्ड्स-वेस्ट जोन का आयोजन 16 अगस्त को मुंबई के होटल ताज लैंड्स एंड (Taj Lands End) में किया गया। इस मौके पर रियल एस्टेट, आर्किटेक्चर, फाइनेंस और मार्केटिंग जगत की जानी-मानी हस्तियां मौजूद रहीं। इस दौरान कई पैनल डिस्कशंस भी हुए, जिसमें दिग्गजों ने अपने विचार शेयर किए।

कार्यक्रम की शुरुआत रियलिटी प्लस कॉन्क्लेव से हुई, जिसमें ‘बिजनेस वर्ल्ड’ और ‘एक्सचेंज4मीडिया’ के चेयरमैन व एडिटर-इन-चीफ डॉ. अनुराग बत्रा, प्रमुख रियल एस्टेट कंसल्टेंसी फर्म ‘साईं एस्टेट कंसल्टेंट चेम्बूर प्राइवेट लिमिटेड’ के को-फाउंडर अमित वाधवानी और ‘JLL India’ के सीईओ व कंट्री हेड रमेश नायर ने अपने विचार रखे।

‘Finance - Moving Up The Ladder -Filling The Funding Vacuum In Real Estate’  टाइटल से हुए सबसे पहले पैनल डिस्कशन को ‘BSR &Associates’ के पार्टनर जयेश कारिया ने मॉडरेट किया। इस सेशन के पैनलिस्ट में ‘Nisus Finance’ के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ अमित गोयनका, ‘KPDL’ के ग्रुप सीईओ गोपाल सारदा, ‘Pankti Group’ के मैनेजिंग डायरेक्टर अश्विन मेहता, ‘Kotak Realty Fund’ के एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर केतन शाह, ‘Walton Street India Real Estate Advisors’ के एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर कौशिक देसाई, ‘Aadhar Housing Finance Ltd’  के एमडी और सीईओ देव शंकर त्रिपाठी और ‘Motilal Oswal Real Estate Investment Advisors II Pvt. Ltd’ के एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर और सीईओ शरद मित्तल शामिल थे। इस पैनल में वर्तमान दौर में रियल एस्टेट के क्षेत्र में फंड के संकट पर चर्चा की गई।   

कार्यक्रम में दूसरे पैनल का टाइटल ‘Making Time For What Matters -Voice Of Architecture In Public Discourse’ रखा गया। इस पैनल को इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ आर्किटेक्ट्स एंड मेंबर के प्रेजिडेंट दिव्य कुश ने मॉडरेट किया। इस पैनल में ‘Prem Nath and Associates’ के फाउंडर और प्रिंसिपल आर्किटेक्ट प्रेम नाथ, गोदरेज ग्रुप के लैंड होल्डिंग्स (विक्रोली) के बिजनेस हेड आर्किटेक्ट अनुभव गुप्ता, ‘MMRDA’ की चीफ (प्लानिंग डिवीजन) उमा अडसुमिली और महाराष्ट्र सरकार व मुख्यमंत्री की एडवाइजर श्वेता शर्मा शामिल थीं।

तीसरे पैनल डिस्शन का टाइटल Agility in Chaos: Keeping Pace with the Sustainability Demands था। इस पैनल डिस्कशन को ‘CII’ के इंडियन ग्रीन बिल्डिंग काउंसिल (IGBC) के वाइस चेयरमैन गुरमीत सिंह अरोड़ा ने मॉडरेट किया। इसमें ‘Collaborative Architecture’ की को-फाउंडर और प्रिंसिपल आर्किटेक्ट ललिता थरानी, ‘Raymond Realty’ के सीईओ आर्किटेक्ट के. मुकुंद राज, ‘Mahindra Lifespaces Developers Ltd’  के चीफ (Design and Sustainability) अमर तेंदुलकर और  ‘Vihan Electricals’ के मैनेजिंग डायरेक्टर विहान जैन शामिल थे।

कार्यक्रम में चौथा पैनल डिस्कशन ‘Starve Failure: Has Budget Brought Cheer to the Real Estate’ टाइटल से हुआ। इस पैनल डिस्कशन में हाल ही में घोषित हुए बजट और रियल एस्टेट सेक्टर पर इसके प्रभाव के बारे में चर्चा की गई। इस सेशन को ‘Liases Foras’ के फाउंडर और एमडी पंकज कपूर ने मॉडरेट किया और इस सेशन में ‘One Industrial Spaces’ के फाउंडर और सीईओ अंशुल सिंघल, ‘Marathon Realty’ के वाइस चेयरमैन चेतन शाह, ‘Tata Realty and Infrastructure Ltd’ के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ संजय दत्त और ‘Indiabulls Asset Management Company Limited’ के सीईओ (प्राइवेट इक्विटी फंड्स) अंबर माहेश्वरी शामिल थे।      

कार्यक्रम के तहत पांचवें और अंतिम पैनल में बिजनेस में सोशल मीडिया के महत्वपूर्ण पहलू के बारे में प्रकाश डाला गया। ‘Managing Online Reputation: Perils of Social Media & Trolling’ टाइटल से हुए इस सेशन को ‘Hunk Golden & Media’ की मैनेजिंग पार्टनर और ‘#SheDares’ की फाउंडर सोनिया कुलकर्णी ने मॉडरेट किया। इस सेशन में स्पीकर्स के रूप में ‘VTP Realty’ के सीईओ सचिन भंडारी, ‘Amura Marketing Technologies’ के एमडी विक्रम कोटनिस, रियल एस्टेट इंडस्ट्री एक्सपर्ट जेएस ऑगस्टीन, ‘Rajesh Lifespaces’ के एसोसिएट वाइस प्रेजिडेंट (मार्केटिंग) सीजे मैथ्यूज और लेखक व इंटीरियर आर्किटेक्ट निशा जामवाल शामिल थीं।

रियलिटी प्लस की ओर से इंडस्ट्री के दिग्गजों को इस फील्ड में किए गए उल्लेखनीय कार्यों के लिए ‘Scroll of Honour’ से सम्मानित भी किया गया। पुरस्कार पाने वालों के नाम आप यहां देख सकते हैं।

  • Abha narain Lambah, Principal Architect, Abha Narain Lambah Associates
  • Chetan Shah, Vice-Chairman, Marathon Group
  • Divya Kush, President, Indian Institute of Architects & Member, Council of Union of International Architects
  • Jayesh Shah, Director, Damji Shamji Shah Group
  • Khushru Jijina, Managing Director, Piramal, Capital & Housing Finance Ltd.
  • Kishore D Pradhan, Founder & Principal, Architect, Kishore D. Pradhan: Architecture + Landscape
  • Vikas Dilawari, Founder, Vikas Dilawari Conservation Architects
  • Vinay Sah, Former Managing Director & CEO, LIC Housing Finance Ltd.

देर रात को कार्यक्रम में रियलिटी प्लस एक्सीलेंस अवॉर्ड्स दिए गए। इस मौके पर ‘NAREDCO’ के प्रेजिडेंट और ‘Hiranandani Group’ के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. निरंजन हीरानंदानी के साथ ही ‘CREDAI India’ के चेयरमैन और ‘Savvy Infrastructure Pvt. Ltd’ के मैनेजिंग डायरेक्टर जैक्सी शाह (Jaxay Shah) ने कार्यक्रम को संबोधित किया और लोगों को बेहतर काम करते रहने के लिए प्रेरित किया।

रियलिट प्लस एक्सीलेंस अवॉड्स के विजेताओं की सूची आप यहां देख सकते हैं।

REAL ESTATE PROJECTS AWARDS

Commercial Project of the Year – K Raheja Corp for Mindspace, Airoli West -Metro

Luxury Project of the Year –Hiranandani Constructions  for One Hiranandani Park- Metro

Luxury Project of the Year – Kolte Patil Developers for Atria – Non-Metro

Luxury Project of the Year –Supreme Universal  for Amadore -Non-Metro

Integrated Township Project of the Year – Rustomjee Developers for Rustomjee Urbania- Metro

Integrated Township Project of the Year – Pegasus Properties Pvt Ltd for Megapolis – Non-Metro

Residential Project of the Year- Dosti Realty for Dosti West County – Metro

Residential Project of the Year  – Sobha Limited for Sobha Nesara -Non-Metro

Affordable Housing Project of the Year – Manisha Constructions & Vascon Engineers Ltd for Citron -Non-Metro

Mid-Segment Project of the Year- Raymond Realty for Ten X Habitat- Metro

Ultra Luxury-Lifestyle Project of the Year – Rustomjee Developers for Rustomjee Seasons – Metro

Ultra Luxury-Lifestyle Project of the Year – Kolte Patil Developers for Opula – Non-Metro

Design Project of the Year – Piramal Realty for   Piramal Aranya – Metro

Themed Project of the Year- Tata Housing for Serein- Metro

Themed Project of the Year – Adani Realty for Atelier Greens- Non-Metro

Iconic Project of the Year- L&T Realty for L&T Seawoods Grand Central – Metro

Iconic Project of the Year – VTP Realty for  Hi-Life – Non-Metro

Skyscraper of the Year– DB Realty for One Mahalaxmi-  Metro

Residential Complex of the Year – Raymond Realty for Ten X Habitat- Metro

Mixed-Use Project of the Year – Siddha Group for Siddha Sky – Metro

Most Environment-Friendly Commercial Space – K Raheja Corp  for Mindspace Business Park, Airoli East- Metro

Most Environment-Friendly Residential Space- PrinceCare Homes LLP    for PrinceCare Zinnia – Metro

Most Environment-Friendly Residential Space- Avantis Group for Ofira Posh- Non-Metro

Plotted Development of the Year – NCS Properties for Yogeshwar Prime – Non-Metro

Most Popular Mall of the Year- Runwal Group   for RCity- Metro

Redevelopment Project of the Year- Kalpataru Ltd for Kalpataru Yashodhan- Metro

Co-Working Space of the Year- True Value Infracon LLP – The Address- Non-Metro

BUILDERS & DEVELOPERS AWARDS

Developer of the Year – Commercial – Gera Developments – Non-Metro

Developer of the Year – Residential – Ajmera Realty & Infra India Limited – Metro

Developer of the Year- Residential- VTP Realty  – Non-Metro

Emerging Developer of the Year – Piramal Realty – Metro

Excellence in Delivery –  Supreme Universal for  Supreme 19

Excellence in Delivery- Gera Developments for  Gera’s ChildCentricTM Homes- Non-Metro

ARCHITECTS AWARDS

Architectural Firm of the Year – DSP Design Associates                                                                          

Architectural Design of the Year – Residential – Runwal Group   for Runwal Elegante- Metro

Architectural Design of the Year – Commercial –Windsor Realty for Windsor Corporate Park – Metro

Architect of the Year- Kush Shah, Founder & Principal Architect, Scarlett Designs Pvt. Ltd for- Non-Metro

INTERIOR DESIGN AWARDS

Interior Design Firm of the Year – Imagination Inc. – Non-Metro

REALTY CONSULTANT AWARDS

Property Consultant of the Year – Evervantage Consulting LLP-  Metro

BRANDING & MARKETING AWARDS

Marketer of the Year- Ankit Nalotia, Founder, Mo Mantra – Metro

Digital Marketing Campaign of the Year- Amura Marketing Technologies for Hiranandani Estate, Thane – Metro

Innovative Marketing Concept of the year- Insomniacs for #SayNoToRent

Project Launch of the Year – L&T Realty for Seawood Residences- Metro

Project Launch of the Year- Birla Estates Private Limited for Birla Vanya

Integrated Brand Campaign of the year – SD Corp: A Shapoorji Pallonji – Dilip Thacker Group Venture for Sarova

Integrated Brand Campaign of the year- VTP Realty for Blue Water #WantItAll Campaign – Non-Metro

Advertising Agency of the Year- Alchemist Marketing Talent Solutions Pvt. Ltd.        – Metro

OOH Campaign of the Year- Tata Housing for Serein

OOH Campaign of the Year- The Blue Print for   India’s Biggest Home Buying Movement

Print Campaign of the Year- Brandniti – Regenti Media Pvt. Ltd.                            

Electronic Media Campaign of the Year (Radio/TV) – The Blue Print or India’s Biggest Home Buying Movement

Real-Estate Website of the Year- Amura Marketing Technologies for www.amanora.com – Metro

CSR EXCELLENCE AWARDS

CSR Excellence Awards  – Kalpataru Group – Metro

INDIVIDUAL ACHIEVEMENT AWARDS

Young Achiever of the Year- . Vivek Mohanani, Managing Director & CEO, Ekta World Metro

Lifetime Achievement of the Year- Shri. Rajnikant Shamalji Ajmera, Chairman & Managing Director, Ajmera group   

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सरकार ने इन वरिष्ठ पत्रकार को सौंपी बड़ी जिम्मेदारी, मिला कैबिनेट मंत्री का दर्जा

इन पत्रकार को मीडिया के क्षेत्र में काम करने का 43 साल से ज्यादा का अनुभव है। इस दौरान वह कई मीडिया संस्थानों में ब्यूरो चीफ समेत अनेक पदों पर काम कर चुके हैं

पंकज शर्मा by पंकज शर्मा
Published - Friday, 23 August, 2019
Last Modified:
Friday, 23 August, 2019
Journalist

वरिष्ठ पत्रकार और इंडियन जर्नलिस्ट्स यूनियन (IJU) के महासचिव देवुलपल्ली अमर को आंध्र प्रदेश सरकार ने बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। उन्हें राज्य सलाहकार के पद पर नियुक्त किया गया है। अपनी इस भूमिका में देवलपल्ली अमर राष्ट्रीय मीडिया और अंतर्राज्यीय मामलों की निगरानी करेंगे। अमर का यह पद कैबिनेट मंत्री की रैंक का होगा। मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी के निर्देश पर उनकी नियुक्ति की गई है।

देवुलपल्ली अमर को मीडिया के क्षेत्र में काम करने का 43 साल से ज्यादा का अनुभव है। इस दौरान वह कई मीडिया संस्थानों में ब्यूरो चीफ समेत अनेक पदों पर काम कर चुके हैं। दिवंगत मुख्यमंत्री वाईएस राजशेखर रेड्डी के शासनकाल में वे प्रेस अकादमी के चेयरमैन भी रह चुके हैं। इसके अलावा वह संयुक्त आंध्र प्रदेश के दौरान आंध्र प्रदेश वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन के अध्यक्ष भी रहे हैं।

इन दिनों वे ‘साक्षी टीवी’ (Sakshi TV) पर एक न्यूज प्रोग्राम होस्ट करते हैं और अखबार के कंसल्टिंग एडिटर भी हैं। उन्हें तेलुगू यूनिवर्सिटी और नारला फाउंडेशन (Narla Foundation) द्वारा लाइफटाइम अवॉर्ड से भी नवाजा जा चुका है।

अपनी नियुक्ति के बारे में अमर ने कहा कि वह मुख्यमंत्री द्वारा सौंपी गई जिम्मेदारी का सफलतापूर्वक पालन करेंगे। गौरतलब है कि इससे पूर्व तेलंगाना सरकार ने वरिष्ठ पत्रकार टंकशाला अशोक (Tankashala Ashok) को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। उन्हें राज्य सरकार का स्पेशल एडवाइजर नियुक्त करते हुए अंतरराज्यीय मामलों की जिम्मेदारी सौंपने के साथ ही कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया गया है।

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हिंदी पत्रकारिता के इन तीन दिग्गजों को केजरीवाल सरकार ने दिया बड़ा सम्मान

इन तीनों ही पत्रकारों को नकद धनराशि भी दी जाएगी, कुल 15 हस्तियों को सम्मान से नवाजा गया है

Last Modified:
Friday, 23 August, 2019
Awards

दिल्ली सरकार ने 2018-19 के लिए हिंदी अकादमी, दिल्ली के पुरस्कार विजेताओं के नामों का ऐलान कर दिया है। इनमें दो पत्रकारों को भी इस सम्मान के लिए चुना गया है। ये दोनों ही चेहरे जाने-पहचाने हैं। इनमें से एक ‘आजतक’ के न्यूज डायरेक्टर सुप्रिय प्रसाद और दूसरे दैनिक ‘हिन्दुस्तान’ अखबार के एग्जिक्यूटिव एडिटर प्रताप सोमवंशी हैं। सुप्रिय प्रसाद को ये सम्मान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए दिया गया है तो प्रिंट मीडिया के लिए प्रताप सोमवंशी को चुना गया है। इन दोनों ही विजेताओं को एक-एक लाख रुपए की नकद धनराशि भी दी जाएगी। कुल 15 हस्तियों को इस सम्मान से नवाजा गया है, जाने माने स्टैंडअप कॉमेडियन और राइटर वरुण ग्रोवर को भी हास्य व्यंग्य के लिए हिंदी अकादमी सम्मान के लिए चुना गया है।

सुप्रिय प्रसाद ने आईआईएमसी से कोर्स करने के बाद करीब 24 साल पहले ‘आजतक’ जॉइन किया था, बीच में कुछ समय के लिए वो ‘न्यूज24’ लॉन्च करने गए थे, लेकिन जल्द ही पूरी टीम के साथ वापस लौटे और तब से वहीं हैं और इन दिनों न्यूज डायरेक्टर के पद पर काम कर रहे हैं। ये खबर आने के बाद उन्होंने नीलेश मिश्रा, निशांत चतुर्वेदी, चित्रा त्रिपाठी और आईआईएमसी एलुमिनाई के बधाई ट्वीट्स रिट्वीट भी किए।

वहीं प्रताप सोमवंशी की इस अवॉर्ड के बाद कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, ट्विटर पर तो कम से कम उन्होंने कुछ नहीं लिखा है। साहित्य की दुनिया में कवि के तौर पर विख्यात प्रताप सोमवंशी गिनती के संजीदा पत्रकारों में गिने जाते हैं और अक्सर उनकी लाइनें कई प्रख्यात पत्रकारों के ट्विटर हैंडल पर शेयर होती रहती हैं। समाचार4मीडिया इन दोनों ही वरिष्ठ पत्रकारों को उन्हें मिले इस सम्मान के लिए बधाई देता है।

वहीं, वरिष्ठ पत्रकार रह चुकीं शीला झुनझनवाला को हिंदी अकादमी, दिल्ली शिखर सम्मान (विशेष सृजनात्मक योगदान के लिए) दिया गया है। इसका राशि दो लाख रुपये है। शीला झुनझुनवाला दिल्ली की एक पत्रकार हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया और हिन्दुस्तान टाइम्स प्रकाशन समूह की हिन्दी साहित्यिक पत्रिकाऑं (धर्मयुग व कादम्बिनी) का उन्होंने सम्पादन किया।भारत सरकार ने उन्हें साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्यों के लिये सन् 1991 में पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया। वे 'साप्ताहिक हिन्दुस्तान' की प्रधान संपादक भी रह चुकी है। कानपुर में जन्मीं शीला साहित्यकार सम्मान; पत्रकारिता गौरव सम्मान; गणेश शंकर विद्यार्थी पुरस्कार; पंडित अंबिका प्रसाद बाजपेयी सम्मान आदि से अलंकृत है।

विजेताओं की पूरी लिस्ट आप यहां देख सकते हैं।

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