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एजेंडा आधारित मीडिया को लेकर ANI की एडिटर स्मिता प्रकाश ने कही ये बात
‘गवर्नेंस नाउ’ के एमडी कैलाशनाथ अधिकारी के साथ बातचीत में न्यूज एजेंसी ‘एएनआई’ की एडिटर स्मिता प्रकाश ने तमाम पहलुओं पर अपने विचार रखे
समाचार4मीडिया ब्यूरो 5 years ago
न्यूज एजेंसी ‘एएनआई’ (ANI) की एडिटर स्मिता प्रकाश का कहना है कि हमारे देश में अधिकांश मीडिया का स्वामित्व उद्योगपतियों के पास है, जिसका इस्तेमाल सत्ता को लुभाने और अपने व्यावसायिक हितों को साधने के लिए एक टूल की तरह किया जाता है।
‘गवर्नेंस नाउ’ (Governance Now) के एमडी कैलाशनाथ अधिकारी के साथ एक बातचीत में स्मिता प्रकाश का कहना था, ‘मीडिया एक सेवा है। अगर तमाम उद्योगपतियों को सत्ता अथवा अपने व्यावसायिक हितों को नहीं साधना है तो वे मीडिया में दिलचस्पी क्यों लेते हैं? यदि मीडिया संस्थान सत्ता के लिए एक टूल के रूप में काम करते हैं तो वे अपनी व्युअरशिप खो देते हैं। व्युअर्स काफी स्मार्ट हैं और वे समझ जाते हैं कि फलां मीडिया हाउस एजेंडा पर चलता है। यदि मीडिया सिर्फ टूल की तरह काम करता है तो इस तरह की स्थिति ज्यादा समय तक नहीं चलती है।’
पब्लिक पॉलिसी प्लेटफॉर्म पर ‘विजिनरी टॉक सीरीज’ (Visionary Talk series) के तहत होने वाले इस वेबिनार के दौरान स्मिता प्रकाश का कहना था कि अमेरिका में भी तमाम मीडिया एनजीओ नहीं बल्कि बड़े बिजनमैनों के स्वामित्व में हैं, क्योंकि एनजीओ के पास इतनी आर्थिक मजबूती नहीं होती है। उन्होंने कहा, ‘मीडिया को बनाए रखने के लिए आपको इंडस्ट्री के पैसे की जरूरत होती है। बहुत कम ऐसे आत्मनिर्भर प्रतिष्ठान हैं, जो पूरी तरह मीडिया द्वारा चलाए जाते हैं।’
स्मिता प्रकाश के अनुसार, ‘दुर्भाग्य से हमारे देश में मीडिया का इस्तेमाल राजनीतिज्ञों अथवा बिजनेसमैनों द्वारा टूल के रूप में किया जाता है। मेरा मानना है कि मीडिया को सेल्फ रेगुलेट होना चाहिए। यह हर इंडस्ट्री में है।‘
इस बातचीत के दौरान स्मिता प्रकाश का कहना था कि कई वर्षों से तमाम सरकारों द्वारा मीडिया का इस्तेमाल किया जाता रहा है। स्मिता प्रकाश के अनुसार, ‘लगभग प्रत्येक सरकार में ऐसा होता आया है। विपक्ष में बैठा राजनीतिक दल मीडिया की स्वतंत्रता के बारे में बात करता है और मीडिया पर उंगली भी उठाता है, लेकिन सत्ता में आने पर वह भी यही करता है।’
पिछले दिनों एक न्यूज चैनल के एडिटर-इन-चीफ की गिरफ्तारी के बारे में स्मित प्रकाश ने कहा कि तमाम आलोचनाओं के बावजूद उनके प्रशंसकों की संख्या बहुत ज्यादा है। उन्होंने कहा कि टियर-वन, टू और थ्री शहरों के साथ ही महाराष्ट्र के छोटे शहरों और गांवों के पत्रकार भी भारी दबाव में हैं। जो पत्रकार नक्सल प्रभावित क्षेत्र और रेत माफिया को कवर करते हैं, उनकी स्टोरीज कभी अखबारों में नहीं आती है।
यह पूछे जाने पर कि बिना सीमा रेखा लांघे सोशल मीडिया की ताकत को कैसे अधिकतम बढ़ाया जा सकता है, स्मिता प्रकाश का कहना था कि सिर्फ कानूनों के माध्यम से इसका सही इस्तेमाल किया जा सकता है।’ उन्होंने कहा कि मीडिया टेक्नोलॉजी के साथ विकसित होता है और जो नई-नई पहल करते रहेंगे, वे ही अस्तित्व में रह पाएंगे।
यह पूछे जाने पर कि क्या न्यूज टेलिविजन पर सच बताया जा रहा है, स्मिता प्रकाश ने कहा कि लोगों को यह देखना होगा कि कौन सा न्यूज संस्थान कंटेंट को परोसने से पहले उसकी कई स्तर पर जांच करता है और कौन सा अखबार ज्यादा से ज्यादा दृष्टिकोण सामने रखता है, न कि कोई एक नजरिया।
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