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कैसी रही पत्रकारों संग फाइनैंस मिनिस्ट्री की 'डिनर डिप्लोमेसी', जानें यहां
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से दिल्ली के ताजमहल होटल में पत्रकारों के लिए आयोजित किया गया था डिनर
पंकज शर्मा 6 years ago
वित्त मंत्रालय में पत्रकारों की एंट्री के नए नियमों को लेकर शुरू हुआ विवाद गहराता जा रहा है। इसका नमूना वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा बजट के बाद दिए जाने वाले डिनर में देखने को मिला, जब गिने-चुने पत्रकार ही उसमें पहुंचे। एक मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शुक्रवार को दिल्ली के ताजमहल होटल में आयोजित डिनर में जो पत्रकार शामिल हुए, उनमें सिर्फ सात-आठ रिपोर्टर और 16 एडिटर्स ही शामिल थे, जबकि बड़ी संख्या में पत्रकारों ने इस डिनर का बायकॉट किया। बताया जा रहा है कि जो पत्रकार पोस्ट बजट डिनर में शामिल हुए, उनमें दो इंडियन एक्सप्रेस के, दो फाइनेंसियल एक्सप्रेस के, दो पीटीआई के और एक एएनआई के पत्रकार शामिल थे । गौरतलब है कि ये डिनर हर साल बजट के बाद फाइनेंस मिनिस्टर की ओर से आयोजित किया जाता है।
बताया जाता है कि 100 से ज्यादा पत्रकारों ने डिनर में शामिल न होने का निर्णय फाइनेंस मिनिस्ट्री के उस ताजा आदेश के बाद लिया था, जिसमें ये शर्त लगा दी गई है कि फाइनेंस मिनिस्ट्री के नॉर्थ ब्लॉक ऑफिस में PIB ऐक्रिटेड पत्रकारों को भी तभी एंट्री मिलेगी, जब उन्होंने किसी अधिकारी या मंत्री से पहले से अपॉइंटमेंट लिया हो। उल्लेखनीय है कि अब तक साल में केवल दो महीने ही पत्रकारों की एंट्री रोकी जाती थी, जब बजट तैयार होता है।
रिपोर्ट के अनुसार, पोस्ट बजट डिनर में शामिल न होने के पत्रकारों के निर्णय के बारे में लंबे समय से वित्त मंत्रालय की कवरेज कर रहे एक वरिष्ठ पत्रकार का कहना था कि वर्तमान में कार्यरत और भविष्य में आने वाले पत्रकारों के हितों की रक्षा के लिए ही यह निर्णय लिया गया। बताया जा रहा है वित्त मंत्रालय कवर करने वाले पत्रकारों के वॉट्सएप ग्रुप FINMIN में शामिल 180 सदस्यों में से करीब 8 ही इस कार्यक्रम में शामिल हुए।
बताया जाता है कि पत्रकारों के स्वागत के लिए होटल के स्टाफ के अलावा वित्त मंत्रालय के 34 से ज्यादा अधिकारी होटल में तैनात किए गए थे। स्थिति यह थी कि डिनर में पत्रकारों से ज्यादा मेजबान मौजूद थे। अंग्रेजी मैगजीन से जुड़े एक पत्रकार का कहना था कि इस विरोध से स्पष्ट है कि नए नियम को लेकर पत्रकार घुटन महसूस कर रहे हैं और उनका आक्रोश बढ़ता जा रहा है, यह लोकतंत्र के लिए स्वस्थ संकेत नहीं है।
पत्रकारों का यह भी कहना है कि यदि इस नए नियम को वापस नहीं लिया गया तो मीडिया के लिए यह सही नहीं होगा, क्योंकि कोई भी न्यूज चैनल या अखबार ऐसे मंत्रालय में कोई रिपोर्टर तैनात नहीं करेगा, जहां से किसी एक्सक्लूसिव स्टोरी के निकलने की कोई गुंजाइश नहीं होगी। वित्त मंत्रालय के नए नियम का विरोध कर रहे पत्रकारों का यह भी कहना है कि यदि यह नया आदेश वापस नहीं लिया जाता है तो सरकार पर दबाव बनाने के लिए अधिकारियों से अपॉइंटमेंट को लेकर बड़े पैमाने पर एप्लीकेशन के साथ ही सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत बड़ी संख्या में एप्लीकेशन भेजी जाएंगी। कुल मिलाकर अभी भी यह मामला पेचीदा हो रहा है।
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