TRAI के फैसले का TV चैनल्स पर पड़ा ये असर, आर्थिक मंदी का दिखा डर

आर्थिक मंदी और ट्राई के नए टैरिफ ऑर्डर के कारण पिछला साल देश की मीडिया और एडवर्टाइजिंग इंडस्ट्री के लिए काफी चुनौती भरा रहा है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 17 February, 2020
Last Modified:
Monday, 17 February, 2020
TV

आर्थिक मंदी और ‘टेलिकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया’ (ट्राई) के नए टैरिफ ऑर्डर-2.0 (NTO 2.0) के कारण पिछला साल देश की मीडिया और एडवर्टाइजिंग इंडस्ट्री के लिए काफी चुनौती भरा रहा है। ‘न्यू टैरिफ ऑर्डर’ (NTO) की वजह से तीन बड़े ब्रॉडकास्टर्स का जहां सबस्क्रिप्शन रेवेन्यू बढ़ा है, वहीं इनके विज्ञापन रेवेन्यू में कमी दर्ज की गई है।  

यदि हम ट्रेडिशनल मीडिया की बात करें तो तिमाही तौर पर किए गए विश्लेषण से पता चलता है कि अधिकांश वर्षों के तुलना में जब चौथी तिमाही में त्योहारी सीजन के कारण विज्ञापन खर्च बढ़ जाता था, पिछले साल दूसरी तिमाही में आईपीएल, क्रिकेट वर्ल्ड कप और आम चुनावों के कारण ऐसा रहा था, जबकि तीसरी और चौथी तिमाही में इसमें क्रमश: तीन प्रतिशत और सात प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।  

पिछले दिनों जारी पिच मैडिसन ऐडवर्टाइजिंग रिपोर्ट 2020 (PMAR) के अनुसार, वर्ष 2019 में विज्ञापन खर्च (adex) में 11 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जबकि इसमें 13.4 प्रतिशत का अनुमान लगाया गया था और वर्ष 2018 में यह 15 प्रतिशत थी। रिपोर्ट में कहा गया है, ‘यदि हम विज्ञापन खर्च को ट्रेडिशनल (टीवी, प्रिंट और रेडियो) के हिसाब से अलग-अलग करें तो पता चलता है इसमें सिर्फ छह प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जो वर्ष 2018 में हासिल की गई 12 प्रतिशत ग्रोथ से आधी है।

तमाम उतार-चढ़ावों के बीच पिछले साल विज्ञापन खर्च में 37 प्रतिशत शेयर के साथ टीवी का सबसे ज्यादा योगदान जारी रहा है। हालांकि इस माध्यम में सिर्फ आठ प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। यह एक दशक में तीसरी सबसे कम ग्रोथ है। अब जब हम वित्तीय वर्ष 2019-20 के आखिरी महीने में प्रवेश करने जा रहे हैं, इस बीच आइए तीन बड़े ब्रॉडकास्टर्स ‘जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड’ (Zee Entertainment Enterprises Ltd), ‘सन टीवी नेटवर्क’ (Sun TV Network) और ‘टीवी18’ (Entertainment (Viacom18+AETN18+Indiacast) के तीसरी तिमाही के नतीजों पर नजर डालते हैं।  

जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (Zee Entertainment Enterprises Ltd)

तीसरी तिमाही के दौरान ‘जी’ (ZEE) का रेवेन्यू 5.5 प्रतिशत (साल दर साल) की दर से गिरावट के साथ 2048.7 करोड़ रुपए रह गया जबकि इसी तिमाही में इसका एडवर्टाइजिंग रेवेन्यू 15.8 प्रतिशत (साल दर साल) की दर से घटकर 1230.8 करोड़ रुपए रह गया है। इसके घरेलू एडवर्टाइजिंग रेवेन्यू में 15.7 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई जबकि इसी तिमाही में इंटरनेशनल एडवर्टाइजिंग रेवेन्यू 73.8 करोड़ रुपए रहा।   

वहीं, सबस्क्रिप्शन रेवेन्यू को देखें तो यह तीसरी तिमाही में 15.4 प्रतिशत (साल दर साल) की दर से बढ़कर 713.7 करोड़ रुपए हो गया। इसमें घरेलू सबस्क्रिप्शन रेवेन्यू में 21.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई और यह 631.7 करोड़ रुपए हो गया, जबकि इंटरनेशनल सबस्क्रिप्शन रेवेन्यू 82 करोड़ रुपए दर्ज किया गया।  

मीडिया विशेषज्ञों के अनुसार, आर्थिक मंदी और ट्राई के नए टैरिफ ऑर्डर की वजह से एडवर्टाइजिंग रेवेन्यू में गिरावट के कारण ‘जी’ के लिए यह तिमाही ज्यादा बेहतर नहीं रहा। वहीं, फ्रीडिश प्लेटफॉर्म से चैनलों को हटाने ने भी इसमें अपनी भूमिका निभाई।

इस बारे में ‘ZEEL’ के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ पुनीत गोयनका का कहना है, ‘हमारे लिए तीसरी तिमाही का समय सामान्य रूप से ग्रोथ के हिसाब से ठीक रहा है। हालांकि, चुनौतीपूर्ण अर्थव्यवस्था के कारण हमारे ऐडवर्टाइजिंग रेवेन्यू में कमी आई है। हमारे अधिकांश ऐडवर्टाइर्स की ग्रोथ काफी धीमी है, यही कारण है कि विज्ञापन खर्च में कटौती की गई है।’ अगली तिमाही में बेहतरी की उम्मीद जताते हुए गोयनका ने कहा, ‘ट्राई के नए टैरिफ ऑर्डर को कोर्ट में चुनौती दी गई है और हम फैसले का इंतजार कर रहे हैं।’       

टीवी18 (Entertainment (Viacom18+AETN18+Indiacast)

‘टीवी18’ (TV18) का समेकित ऑपरेटिंग रेवेन्यू साल दर साल (YoY) तीन प्रतिशत की गिरावट के साथ 1475 करोड़ रुपए से घटकर 1425 करोड़ रुपए रह गया है। एंटरटेनमेंट रेवेन्यू में भी चार प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है वित्तीय वर्ष 2019 की तीसरी तिमाही (Q3FY19) में 1184 करोड़ रुपए के मुकाबले यह घटकर 1137 करोड़ रुपए रह गया। सबस्क्रिप्शन रेवेन्यू 40 प्रतिशत की ग्रोथ के साथ 458 करोड़ रुपए हो गया। ‘Earnings before interest, tax, depreciation and amortization’ (EBITDA) में 262 प्रतिशत की ग्रोथ देखी गई और वर्ष 2019 की तीसरी तिमाही में 68 करोड़ के मुकाबले यह बढ़कर 245 करोड़ रुपए रह गया। सबस्क्रिप्शन ग्रोथ के बारे में ब्रॉडकास्टर का कहना है कि न्यू टैरिफ ऑर्डर से पारदर्शी माहौल बना है, जिससे टीवी सबस्क्रिप्शन रेवेन्यू का बढ़ना जारी है। हालांकि, इस ब्रॉडकास्टर के सबस्क्रिप्शन रेवेन्यू में ग्रोथ देखी गई है, लेकिन ऐडवर्टाइजिंग रेवेन्यू को लेकर इस पर काफी दबाव बना हुआ है।

सन टीवी नेटवर्क (Sun TV Network)

नए टैरिफ ऑर्डर और तमिलनाडु में डिजिटलीकरण के कारण ‘सन टीवी नेटवर्क’ (Sun TV Network) के सबस्क्रिप्शन रेवेन्यू में भी ग्रोथ देखने को मिली है। 31 दिसंबर 2018 को समाप्त हुई तिमाही में 349.60 करोड़ रुपए की तुलना में इस तिमाही में सबस्क्रिप्शन रेवेन्यू 18 प्रतिशत बढ़कर 411.85 करोड़ रुपए हो गया है। इस तिमाही में प्रॉफिट आफ्टर टैक्स भी छह प्रतिशत बढ़कर 373.45 करोड़ रुपए हो गया है, जबकि इसी अवधि में पहले यह 351.33 करोड़ रुपए था। हालांकि, नेटवर्क के रेवेन्यू में साल दर साल (9.89) की दर से गिरावट दर्ज की गई। मीडिया विशेषज्ञों की मानें तो विभिन्न नेटवर्क्स की तरह ‘सन टीवी नेटवर्क’ को भी चुनौतियों का सामना करना पड़ा और इसके ऐड रेवेन्यू में भी गिरावट दर्ज की गई।

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कोरोना का खौफ: प्रशासन की कार्रवाई से पत्रकारों में नाराजगी

शासकीय आदेशों का उल्लंघन करने पर थाना श्यामला हिल्स ने कोरोना पॉजिटिव पाए गए पत्रकार केके सक्सेना के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है।

नीरज नैयर by
Published - Saturday, 28 March, 2020
Last Modified:
Saturday, 28 March, 2020
corona-virus

वरिष्ठ पत्रकार केके सक्सेना के कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद से भोपाल प्रशासन सकते में है। प्रशासन द्वारा पत्रकारों के घर पर ‘Covid19 डू नॉट विजिट’ पोस्टर चस्पा किये जा रहे हैं। ताज्जुब की बात यह है कि इनमें वह पत्रकार भी शामिल हैं, जो पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ की प्रेस कांफ्रेंस में मौजूद नहीं थे। इसी बात को लेकर प्रशासन और पत्रकारों में ठन गई है। पोस्टर लगाने पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम से कई पत्रकारों का विवाद भी हुआ। पत्रकारों का कहना है कि सरकार बिना वजह दहशत फैला रही है। हमने खुद आगे बढ़कर टेस्ट कराने को कहा है, लेकिन वह पोस्टर चिपकाने तक सीमित है। जो पत्रकार प्रेस कांफ्रेंस में गए भी नहीं थे, उनके भी नाम संदिग्धों की सूची में डाल दिए गए हैं। आखिर ऐसा किस आधार पर किया जा रहा है?

शुक्रवार को भी स्वास्थ्य विभाग की टीम कुछ पत्रकारों के घर पोस्टर लगाने गई थी। इस दौरान उनका पत्रकारों से विवाद भी हुआ। पत्रकारों ने प्रेस कांफ्रेंस में न होने का हवाला भी दिया, लेकिन कर्मचारी कुछ सुनने को तैयार नहीं थे। हालांकि, कड़े विरोध को देखते हुए उन्हें बिना पोस्टर लगाये ही वापस लौटना पड़ा।

कर्मचारियों का कहना है कि वह सिर्फ कलेक्टर के आदेश की तालीम कर रहे हैं। उन्हें जिन पत्रकारों की सूची सौंपी गई है, उसी के आधार पर पोस्टर लगाये जा रहे हैं।

सोशल मीडिया पर एक विडियो भी वायरल हो रहा है, जिसमें पत्रकार को पोस्टर लगाने पहुंचे स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों को भगाते हुए दिखाया गया है। विडियो में पत्रकार पूछता है कि क्या कमलनाथ या शिवराज सिंह के घर पर पोस्टर लगाये हैं? नहीं, तो फिर यहां कैसे आये’? इस विडियो के सामने आने के बाद जहां कुछ पत्रकारों उक्त पत्रकार के बर्ताव पर नाराजगी जाता रहे हैं। वहीं कुछ की नजर में यह प्रशासन की बेवकूफी से उपजा गुस्सा है। नाराजगी जताने वालों का कहना है कि भले ही प्रशासन ने गलती की, लेकिन अधिकारियों का गुस्सा कर्मचारियों पर नहीं निकाला जाना चाहिए।
केके सक्सेना के खिलाफ केस दर्ज

वहीं, शासकीय आदेशों का उल्लंघन करने पर थाना श्यामला हिल्स ने कोरोना पॉजिटिव पाए गए पत्रकार केके सक्सेना के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। सक्सेना के खिलाफ धारा 188, 269, 270 भा.द.वि. के तहत अपराध पंजीबद्ध कर वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। सक्सेना ने न केवल कोरोना संक्रमित होकर लापरवाही की बल्कि इलाज के लिये गए सरकारी डॉक्टरों के साथ दुर्व्यवहार भी किया था।

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IBF की बड़ी पेशकश, मुफ्त में देख सकेंगे ये चार टीवी चैनल्स

कोरोनावायरस (कोविड-19) के खिलाफ लड़ाई में सरकार के सपोर्ट के लिए ‘इंडियन ब्रॉडकास्टिंग फाउंडेशन’ भी आगे आया है।

Last Modified:
Saturday, 28 March, 2020
Channel

कोरोनावायरस (कोविड-19) के खिलाफ लड़ाई में सरकार के सपोर्ट के लिए ‘इंडियन ब्रॉडकास्टिंग फाउंडेशन’ (Indian Broadcasting Foundation) भी आगे आया है। इसके तहत ‘इंडियन ब्रॉडकास्टिंग फाउंडेशन’ के सदस्यों ने सोनी के चैनल ‘सोनी पल’, स्टार इंडिया के चैनल ‘स्टार उत्सव’ जी टीवी के चैनल ‘जी अनमोल’ और ‘वायकॉम18’ के कलर्स बुके (bouquet) में शामिल चैनल ‘कलर्स रिश्ते’ को दो माह तक मुफ्त में प्रसारित करने की पेशकश की है। ये सभी चैनल पे चैनल्स (pay channels) हैं।

इस पेशकश के तहत अब ये चारों चैनल देश भर में सभी ‘डायरेक्ट टू होम’ (DTH) और केबल नेटवर्क्स पर दो महीने के लिए मुफ्त में देखने को मिलेंगे। यानी देश भर के दर्शकों को इन चारों चैनल्स को देखने के लिए कोई शुल्क नहीं देना पड़ेगा।     

दरअसल, इन सभी ब्रॉडकास्टर्स का मानना है कि जब लॉकडाउन के कारण लोगों को 21 दिनों तक अपने घरों से बाहर न निकलने की सलाह दी गई है, ऐसे मे इस कदम से लोगों को थोड़ा एंटरटेनमेंट और स्फूर्तिदायक कंटेंट मिल सकेगा, जो लोगों को काफी राहत प्रदान करेगा।   

बता दें कि कोरोनावायरस के प्रकोप को देखते हुए सरकार ने लोगों से सोशल डिस्टिंग अपनाने के साथ ही घरों पर ही रहने को कहा है। ऐसे में इन चारों ब्रॉडकास्टर्स ने भी आगे आकर इन चारों चैनल्स के लिए दो महीने तक अपने सभी तरह के टैरिफ और शुल्क को दर्शकों के लिए मुफ्त करने का निर्णय कर कोरोना से ‘जंग’ में अपना साथ दिया है।

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पत्रकारों के लिए सरकार ने शुरू की ये योजना, इस तरह मिलेगा लाभ

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य के पत्रकारों को एक बड़ी सौगात दी है

Last Modified:
Saturday, 28 March, 2020
Journalist

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य के पत्रकारों को एक बड़ी सौगात दी है। दरअसल, मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को बिहार पत्रकार सम्मान पेंशन योजना की शुरुआत की है। इसके तहत बिहार के पत्रकारों को हर महीने 6000 रुपए की पेंशन दी जाएगी। फिलहाल राज्य के 48 पत्रकारों को यह पेंशन मिलेगी। यह योजना 14 नवंबर 2019 से प्रभावी की गई है और पेंशन पाने वाले पत्रकारों को एरियर का भुगतान भी किया जाएगा।

मुख्यमंत्री के निर्देश पर शुक्रवार को 40 पत्रकारों के खाते में पेंशन की राशि स्थानांतरित कर दी गयी। इन 40 पत्रकारों के अतिरिक्त पांच पत्रकारों को 6 मार्च 2020 तथा तीन पत्रकारों को 16 मार्च 2020 के प्रभाव से पेंशन का लाभ मिलेगा।

जिन 40 पत्रकारों को नवंबर 2019 से लाभ मिलना है, उनके लिए 1.36 लाख रुपए का भुगतान किया गया है। वहीं, जिन पत्रकारों के पेंशन की स्वीकृति मार्च से दी गयी है, उनके खाते में पेंशन की राशि अगले महीने स्वीकृति के एक माह पूरा होने के बाद जाएगी।

राज्य में पेंशन योजना को स्वीकृत किए जाने के मौके पर उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार चौधरी, स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय. कृषि मंत्री डॉ. प्रेम कुमार, जल संसाधन मंत्री संजय कुमार झा, मुख्य सचिव दीपक कुमार, डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय, सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के सचिव अनुपम कुमार आदि वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

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प्रेस एसोसिएशन ने पीएम को लिखा पत्र, पत्रकारों के लिए मांगी ये सुविधा

एसोसिएशन ने पीएम से गुहार लगाई है कि कोरोना की खबर देने के लिए पत्रकार फील्ड से रिपोर्ट भेज रहे है और लोगों से मिलकर जानकारी ग्रहण कर रहे है, इसलिए वह खतरे का सामना कर रहे हैं।

Last Modified:
Friday, 27 March, 2020
Journalist

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को कोरोना से जंग लड़ रही आशा कार्यकर्ताओं, स्वच्छता कर्मचारियों, मेडिकल और पैरा-मेडिकल स्टाफ के लिए 50 लाख रुपए के बीमा कवर का ऐलान किया है, जिसका फायदा 20 लाख मेडिकल स्टाफ और कोरोना वॉरियर्स को मिलेगा। लेकिन अपनी जान जोखिम में डालकर देश को जागरूक करने वाले पत्रकारों को इस बीमा कवर से दूर रखा गया है। लिहाजा, मान्यताप्राप्त पत्रकारों के एक संगठन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पत्रकारों को उस विशेष बीमा योजना में शामिल करने का अनुरोध किया है जिसकी घोषणा सरकार ने गुरुवार को की।

बता दें कि प्रेस एसोसिएशन ने कोरोना महामारी को देखते हुए पीएम मोदी को पत्र लिखकर पत्रकारों के लिए भी 50 लाख रुपए के बीमा की मांग की है। एसोसिएशन ने अपने पत्र में पीएम से गुहार लगाई है कि कोरोना की खबर देने के लिए देश के पत्रकार फील्ड से रिपोर्ट भेज रहे है और लोगों से मिलकर जानकारी ग्रहण कर रहे है, इसलिए वह खतरे का सामना कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि पत्रकार भी महामारी के खिलाफ लड़ाई में योगदान दे रहे हैं, जिस तरह वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने डॉक्टरों, स्वास्थ्य कर्मचारियों आदि के लिए 50 लाख बीमे की घोषणा की उसी तरह यह सुविधा पत्रकारों को भी मिलनी चाहिए। उन्होंने मोदी से अपील की कि सरकार अपनी स्कीम में पत्रकारों को शामिल करें, जिससे पत्रकार निर्भीक होकर अपना काम कर सके।

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‘उस’ प्रेस कांफ्रेंस में नहीं जाने वाले खुद को मान रहे खुशनसीब

भोपाल के वरिष्ठ पत्रकार के.के. सक्सेना के कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद से यहां हड़कंप मच गया है। सक्सेना मुख्यमंत्री के तौर पर कमलनाथ की आखिरी प्रेस कांफ्रेंस में भी मौजूद थे

Last Modified:
Thursday, 26 March, 2020
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भोपाल के वरिष्ठ पत्रकार के.के. सक्सेना के कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद से यहां हड़कंप मच गया है। सक्सेना मुख्यमंत्री के तौर पर कमलनाथ की आखिरी प्रेस कांफ्रेंस में भी मौजूद थे, लिहाजा अन्य पत्रकार भी खौफ में हैं।

बताया जा रहा है कि के.के. सक्सेना कांग्रेस नेता रवि सक्सेना के भाई हैं, ऐसे में उनके के भी संक्रमित होने की आशंका जताई जा रही है। पत्रकार होने के नाते सक्सेना का हर रोज काफी लोगों से मिलना रहता था। वह अकसर सघन बसावट वाले पुराने भोपाल भी जाया करते थे, इस वजह से लोगों में घबराहट का माहौल है। वहीं, प्रशासन भी स्थिति की गंभीरता को समझ रहा है।

कुछ स्थानीय पत्रकारों का कहना है कि संक्रमित सक्सेना के कांग्रेस नेता भाई की भी जांच कराई जानी चाहिए और यदि वह पॉजिटिव आती है, तो स्थिति बहुत ही भयानक हो जाएगी, क्योंकि उनका बड़ी संख्या में पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं से मिलना-जुलना रहता है।

वहीं, मामला सामने आने के बाद करीब 30 पत्रकारों की स्क्रीकिंग करवाई गई है। अच्छी बात यह है कि एक भी पत्रकार में कोरोना के लक्षण नहीं पाए गए। फिर भी इन पत्रकारों को अगले कुछ दिनों तक होम क्वॉरेंटाइन रहने को कहा गया है।

गौरतलब है कि खुद का अखबार चलाने वाले के.के. सक्सेना भोपाल में कोरोना की पहली महिला मरीज के पिता हैं। उनकी बेटी 18 मार्च को ही लंदन से भोपाल आई थी और उसके नमूनों की जांच में कोरोना वायरस की पुष्टि हुई है। लंदन से लौटने के बाद पत्रकार की बेटी 2 दिन तक अपने परिवार के साथ रही थी। स्थानीय पत्रकारों में सक्सेना को लेकर इसलिए नाराजगी है कि उन्होंने सरकार के बार-बार कहने के बावजूद भी विदेश से आई अपनी बेटी के बारे में सूचना नहीं दी, जिसकी वजह से अब कई लोगों पर कोरोना का खतरा मंडरा रहा है।

कुछ पत्रकारों की मांग है कि के.के. सक्सेना के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए, क्योंकि उन्होंने कई लोगों की जान को खतरे में डाला है। वहीं, कुछ को उनके प्रति सहानुभूति भी है, लेकिन वह अपने को खुशनसीब मान रहे हैं कि वो कमलनाथ की आखिरी प्रेस कांफ्रेंस में नहीं थे।

एक वरिष्ठ पत्रकार ने कहा, ‘मैंने आखिरी वक्त पर पूर्व मुख्यमंत्री की प्रेस कांफ्रेंस में न जाने का फैसला लिया और अब मुझे इसकी खुशी है। इतना ही नहीं, उसी रात सक्सेना मुझे भोपाल बाजार में भी दिखाई दिए, लेकिन बातचीत नहीं हो सकी। मेरे लिए तो दोनों ही संयोग बेहद अच्छे रहे’। इससे पहले बुधवार को स्वास्थ्य अधिकारियों की टीम जब सक्सेना के आवास पर पहुंची तो उन्होंने एम्स चलने से इनकार कर दिया। बाद में जब कलेक्टर ने फटकार लगाई तब कहीं जाकर वह एम्स में भर्ती हुए।

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इस वजह से छत्तीसगढ़ विधानसभा में पत्रकारों के प्रवेश पर लगी रोक

कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए देशभर में ऐहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं। इसी बीच छत्त्तीसगढ़ विधानसभा में पत्रकारों के प्रवेश पर रोक लगा दी गयी है

Last Modified:
Thursday, 26 March, 2020
chhattisgarhassembly

कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए देशभर में ऐहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं। इसी बीच छत्त्तीसगढ़ विधानसभा में पत्रकारों के प्रवेश पर रोक लगा दी गयी है।

बता दें कि अभी छत्तीसगढ़ विधानसभा का बजट सत्र चल रहा है। देश में तेजी से फैल रहे कोरोना संक्रमण को देखते हुए पहले विधानसभा की कार्यवाही को 25 मार्च तक के लिए स्थगित कर दिया गया था, लेकिन गुरुवार यानी आज से विधानसभा की कार्यवाही फिर से शुरू हो गई।  

विधानसभा के प्रमुख सचिव चंद्रशेखर गंगवाड़े ने बताया, कोरोना वायरस के संक्रमण की रोकथाम के लिए केंद्र और राज्य सरकार द्वारा जारी की गई एडवाइजरी व लॉक डाउन को ध्यान में रखते हुए पत्रकार दीर्घा को बंद कर दिया गया है। विधानसभा परिसर में पत्रकारों का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा। विधानसभा में केवल विधायक अफसर और विधानसभा सचिवालय के अफसर और कर्मचारी ही रहेंगे। विधानसभा की दर्शक दीर्घा को पहले ही बंद किया जा चुका है।

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 छत्तीसगढ़ सरकार ने पत्रकारों को दी यह सलाह, दिलाया भरोसा

कोरोना के खौफ के चलते जहां पूरा देश थम गया है। अधिकांश जनता अपने घरों में बैठी है, वहीं पत्रकार घूम-घूमकर खबरें जुटा रहे हैं, ताकि लोगों तक हर जरुरी जानकारी पहुंचाई जा सके

Last Modified:
Thursday, 26 March, 2020
CM

कोरोना के खौफ के चलते जहां पूरा देश थम गया है। अधिकांश जनता अपने घरों में बैठी है, वहीं पत्रकार घूम-घूमकर खबरें जुटा रहे हैं, ताकि लोगों तक हर जरूरी जानकारी पहुंचाई जा सके। पत्रकारों के इस जज्बे को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सराहा है। वहीं, राज्य सरकारें भी अपने-अपने स्तर पत्रकारों का ख्याल रखने का प्रयास कर रही हैं। छत्तीसगढ़ सरकार ने बाकायदा संदेश जारी करके पत्रकारों को महामारी की कवरेज के दौरान विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। साथ ही इस विषम परिस्थिति में निर्बाध रूप से खबरें पहुंचाने के लिए उन्हें सराहा है।

जनसंपर्क आयुक्त तारन प्रकाश सिन्हा की तरफ से जारी किये गए इस संदेश में कहा गया है कि ‘आम जनता तक सही सूचना पहुंचाने और उन्हें जागरूक करने में सभी समाचार माध्यमों के प्रतिनिधियों की भूमिका महत्वपूर्ण है। ऐसे समय में जब पूरा देश लॉकडाउन में है, आप दिन रात समाज और देश के प्रति अपने दायित्व को निभाने के लिए कठिन स्थितियों में परिश्रम कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने इस पर चिंता जताई है कि कई बार पत्रकार अपने कर्तव्य की पूर्ति के क्रम में अपनी सुरक्षा के प्रति लापरवाह हो जाते हैं और इसका विपरीत प्रभाव उनके स्वास्थ्य पर पड़ सकता है। विश्व के कई पत्रकार कोरोना की कवरेज के दौरान इसकी चपेट में आ चुके हैं, लिहाजा सभी पत्रकारों से आग्रह है कि पूरी सावधानी बरतें।’

लॉकडाउन में सभी इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया के पत्रकारों को छूट मिली हुई है, लेकिन इसके बावजूद पुलिस अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रही है। राजधानी दिल्ली में ही कई वरिष्ठ पत्रकारों को पुलिस की बर्बरता का सामना करना पड़ा है। इन घटनाओं को देखते हुए अन्य शहरों के पत्रकार भी आशंका में घिर गए हैं। छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के पत्रकारों की इस आशंका को दूर करने का भी प्रयास किया है।

जनसंपर्क आयुक्त की ओर से जारी संदेश में यह स्पष्ट किया गया है कि पत्रकारों को कवरेज के दौरान किसी तरह की परेशानी नहीं होगी। संदेश में कहा गया है, ‘माननीय मुख्यमंत्री ने प्रदेश के सभी जिला कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि पत्रकारों को लॉकडाउन के दौरान समाचार संकलन में किसी तरह की कठनाई न आये’। हालांकि, अब पुलिस इसका कितना पालन करती है यह देखने वाली बात होगी।

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सामने आया पुलिसकर्मियों का अमानवीय चेहरा, रिपोर्टिंग के दौरान ET Now के पत्रकार को पीटा

देश में 21 दिन के लॉकडाउन के दौरान मीडियाकर्मी को बहाल रखा गया है। बावजूद इसके रिपोर्टिंग के दौरान पुलिसकर्मियों द्वारा पत्रकारों से बदसलूकी के मामले सामने आ रहे हैं।

Last Modified:
Thursday, 26 March, 2020
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कोरोना वायरस के चलते पूरे देश में 21 दिन का लॉकडाउन है। लेकिन इस दौरान कुछ जरूरी सेवाओं और लोगों को बहाल रखा गया है, जिनमें मीडियाकर्मी भी शामिल हैं। बावजूद इसके लॉकडाउन पर रिपोर्टिंग के दौरान पुलिसकर्मियों द्वारा पत्रकारों से बदसलूकी के मामले सामने आ रहे हैं। ऐसा ही ताजा मामला महाराष्ट्र के ठाणे से सामने आया है।

बता दें कि अंग्रेजी न्यूज चैनल ‘ईटी नाउ’ (ET Now) के डिप्टी न्यूज एडिटर उत्कर्ष चतुर्वेदी ने बुधवार को आरोप लगाया कि ठाणे जिले में लॉकडाउन पर रिपोर्टिंग के दौरान पुलिसकर्मियों ने उनके साथ मारपीट की।

अपने आरोप में उत्कर्ष चतुर्वेदी ने कहा कि पुलिसकर्मिंयों को अपना प्रेस कार्ड भी दिखाया लेकिन पुलिस वालों ने फिर भी उनके साथ मारपीट की। उन्होंने बताया कि यह घटना ठाणे ग्रामीण पुलिस क्षेत्र के तहत पश्चिम उपनगर में दहिसर पुलिस चौकी के पास हुई।

उत्कर्ष चतुर्वेदी ने ट्विटर के जरिए मुंबई पुलिस और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को टैग करते हुए इस बात की जानकारी दी। उन्होंने घटना के बारे में ठाणे ग्रामीण के एसपी शिवाजी राठौड़ को भी सूचित किया है, लेकिन इस संबंध में की गयी कॉल और भेजे गए मैसेज का उन्होंने जवाब नहीं दिया।

 

 

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कमलनाथ की प्रेस कॉन्फ्रेंस से क्यों मच रहा हड़कंप, जानें यहां

मुख्यमंत्री के तौर पर कमलनाथ की पिछले दिनों भोपाल में हुई इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में भोपाल ही नहीं, दिल्ली के भी कई पत्रकार शामिल थे।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 25 March, 2020
Last Modified:
Wednesday, 25 March, 2020
Press Conference

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ की प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद रहे एक पत्रकार में कोरोना वायरस (COVID-19) की पुष्टि हुई है। पत्रकार की बेटी भी कोरोना पॉजीटिव मिली है। यह मामला सामने आते ही पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है। मुख्यमंत्री के तौर पर कमलनाथ की पिछले दिनों भोपाल में हुई इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद सभी पत्रकार अब क्वारंटाइन में जाएंगे। इस कॉन्फ्रेंस में भोपाल ही नहीं, दिल्ली के भी कई पत्रकार शामिल थे।  

बताया जाता है कि इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों और मंत्रियों समेत तमाम नेता शामिल हुए थे। जिला प्रशासन की ओर से इन सभी लोगों की लिस्ट बनाई जा रही है और सभी को क्वारंटाइन में भेजा जाएगा। वहीं, यह मामला सामने आते ही पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने खुद को आइसोलेट कर लिया है।  

बता दें कि कमलनाथ ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से पहले 20 मार्च को अपने निवास पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी, जिसे कवर करने के लिए कई पत्रकार पहुंचे थे। इनमें वह पत्रकार भी शामिल था, जिसकी बेटी कोरोना से संक्रमित पाई गई है।

इस बीच खबर है कि कोरोना संक्रमित पत्रकार के संपर्क में आए मीडिया विभाग, मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी से जुड़े अभय दुबे ने खुद को होम क्वारंटाइन कर लिया है। दुबे ने मुख्यमंत्री कमल नाथ की प्रेस कॉन्फ्रेंस में कोरोना पीड़ित पत्रकार से हाथ मिलाया था।

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कोरोना से लड़ाई में सरकार की मदद के लिए सामने आई नेटवर्क18 की टीम

दुनिया में खौफ का सबब बन चुके कोरोना वायरस (कोविड-19) के खिलाफ ‘जंग’ में पूरा देश एकजुट होने लगा है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 25 March, 2020
Last Modified:
Wednesday, 25 March, 2020
Network18

दुनिया में खौफ का सबब बन चुके कोरोना वायरस (कोविड-19) के खिलाफ ‘जंग’ में पूरा देश एकजुट होने लगा है। इस खतरनाक वायरस के संक्रमण को फैलने से रोका जा सके, इसके लिए प्रधानमंत्री ने एहतियाती कदम उठाते हुए पूरे देश में 21 दिनों के लॉकडाउन की घोषणा की है, वहीं लोगों की परेशानी को समझते हुए वित्त मंत्रालय ने भी लोगों को करों में छूट समेत कई रियायतें दी हैं।  

ऐसे में देश के प्रतिष्ठित मीडिया समूह ‘नेटवर्क18’ (Network 18) ने लॉकडाउन के दौरान देश के गरीब व निचले तबके के लोगों को आर्थिक रूप से समर्थन देने के लिए #IndiaGives कैंपेन शुरू किया है। इस कैंपेन के शुरुआती चरण में ‘नेटवर्क18’ के 6000 से ज्यादा एंप्लाईज ने ‘प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष’ (PMNRF) में अपने एक दिन की सैलरी का योगदान दिया है। इसका उद्देश्य उन दैनिकभोगी वर्कर्स को राहत पहुंचाना है, जिनकी आजीविका इस लॉकडाउन के कारण प्रभावित है। ‘आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण’ (Periodic Labour Force Survey) की मई-2019 की रिपोर्ट के अनुसार, करोड़ों भारतीयों के पास किसी तरह की आर्थिक सुरक्षा नहीं है या बहुत कम है। देश के करीब 77.2 प्रतिशत यानी करीब 200 मिलियन घरों में लोग या तो खुद का काम करते हैं अथवा दैनिक वेतनभोगी श्रमिक हैं। कोरोनावायरस के कारण देश में तीन हफ्ते के लॉकडाउन के कारण इनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो सकता है।

इसलिए, ऐसे लोगों की आर्थिक रूप से मदद करने के लिए नेटवर्क18 समूह के पत्रकार और मीडिया ब्रैंड्स जैसे- न्यूज18इंडिया, सीएनबीसी-टीवी18, सीएनएन न्यूज18, न्यूज18 के सभी प्रादेशिक चैनल्स, सीएनबीसी आवाज, सीएनबीसी बाजार, मनीकंट्रोल, फर्स्टपोस्ट, News18.com और फोर्ब्स इंडिया इन लोगों की स्टोरीज पर विशेष ध्यान देंगे, जिनकी रोजी-रोटी इस लॉकडाउन के कारण सर्वाधिक रूप से प्रभावित होगी।

‘नेटवर्क18’ का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दैनिक वेतनभोगी और अनियोजित श्रमिकों के हितों की रक्षा करने की तत्काल आवश्यकता की बात कही है। ऐसे में प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष में योगदान महान देशसेवा होगी। ‘नेटवर्क18’ ने देश के आर्थिक रूप से सक्षम लोगों से #IndiaGives कैंपेन में शामिल होने की अपील भी की है।

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