नेटवर्क18: बदलाव के दौर में न्यूज18हिंदी, बड़ी टीम को दिखाना होगा बड़ा कमाल

अब समूह की हिंदी वेबसाइट के एडिटोरियल कॉल को लेकर बदला प्रभार

Last Modified:
Wednesday, 08 May, 2019
Network18

नेटवर्क 18 समूह की हिंदी न्यूज वेबसाइट ‘न्यूज18हिंदी’ से आ रही खबर के मुताबिक आजकल वहां बदलाव की बयार चल रही है। मिली जानकारी के मुताबिक, ‘जी न्यूज’ (हिंदी) के संपादक (लैंग्वेजेस) दयाशंकर मिश्र के यहां जुड़ने के बाद अब प्रबंधन ने ‘न्यूज18हिंदी’ की कमान उन्हें सौंप दी है। अब वे करीब 100 लोगों की बड़ी टीम का नेतृत्व कर रहे हैं।

गौरतलब है कि मार्च में उन्होंने नेटवर्क 18 समूह में बतौर एडिटर ( Enterprise & Special Project) के तौर पर जॉइन किया था। पहले ‘न्यूज18हिंदी’ के पूरे एडिटोरियल का कार्यभार निधीश त्यागी के पास था, पर अब न्यूज18हिंदी का प्रभार अनौपचारिक तौर पर उनसे ले लिया गया है। वे  एडिटर(लैंग्वेज) के तौर पर अन्य भाषाओं का कार्यभार संभाल रहे हैं।

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, वहां नंबर दो पोजीशन पर काम देख रहे अजय शर्मा की नई पोजिशन भी अभी क्लियर नहीं है। माना जा रहा है कि 100 से अधिक एम्पलॉइज वाली ये टीम प्रबंधन के मनमुताबिक परिणाम नहीं दे पा रही थी, ऐसे में ये नए बदलाव एक तरह की चुनौती भी हैं।

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अमर उजाला का 21वां एडिशन हुआ लॉन्च

लॉन्चिंग के मौके पर अमर उजाला समूह के निदेशक तन्मय माहेश्वरी सहित अमर उजाला परिवार के कई लोग मौजूद रहे

Last Modified:
Tuesday, 16 July, 2019
Amar Ujala Logo

हिंदी के बड़े अखबारों में शुमार ‘अमर उजाला’ ने अपने विस्तार की दिशा में एक और कदम बढ़ा दिया है। इसके तहत अमर उजाला ने अब करनाल एडिशन लॉन्च किया है। यह ग्रुप का 21वां और हरियाणा में हिसार और रोहतक के बाद तीसरा एडिशन है। बताया जाता है कि करनाल संस्करण शुरू होने के बाद जीटी बेल्ट के करनाल, पानीपत, अंबाला यमुनानगर, कैथल, सोनीपत और कुरुक्षेत्र जिले के पाठकों को अब देर रात तक की अपडेट खबरें पढ़ने को मिलेंगी। नए एडिशन की लॉन्चिंग के मौके पर निर्मल कालोनी स्थित सिटी कार्यालय और प्रिंटिंग प्रेस में हवन यज्ञ के साथ विधिवत पूजा हुई। इस मौके पर अमर उजाला समूह के निदेशक तन्मय माहेश्वरी सहित अमर उजाला परिवार के कई लोग मौजूद रहे।

इस मौके पर तन्मय माहेश्वरी ने कहा, ‘करनाल से ग्रुप के 21वें प्रिंट एडिशन की लॉन्चिंग की घोषणा करते हुए मुझे काफी खुशी हो रही है। वर्ष 1948 में कुछ सौ कॉपियों के साथ इस अखबार की शुरुआत हुई थी और आज इसके पाठकों की संख्या 48 मिलियन तक पहुंच चुकी है। पाठकों के प्यार और भरोसे के साथ ही हमारी पूरी टीम के लगातार प्रयास की बदौलत ही यह देश का तीसरा सबसे बड़ा अखबार बना हुआ है। इसके लिए आप सभी लोग बधाई के पात्र हैं।’ 

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सुधीर चौधरी के खिलाफ TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने उठाया बड़ा कदम

संसद में दिए गए भाषण को लेकर दोनों के बीच काफी दिनों से चल रहा है विवाद

Last Modified:
Monday, 15 July, 2019
Sudhir-Mahua

‘जी न्यूज’ (Zee News) के एडिटर-इन-चीफ सुधीर चौधरी के खिलाफ तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने आपराधिक मानहानि का केस दर्ज कराया है। मोइत्रा ने आरोप लगाया है कि सुधीर ने लोगों में उनके बारे में गलत जानकारी का प्रसार किया। मोइत्रा की शिकायत पर संज्ञान लेते हुए मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट प्रीति परेवा ने इस मामले की सुनवाई करने का फैसला किया है। मामले की सुनवाई 20 जुलाई को होगी। उसी दिन मोइत्रा का बयान रिकार्ड किया जाएगा।

बता दें कि महुआ मोइत्रा ने संसद में 25 जून को एक भाषण दिया था, जिसके बारे में सुधीर चौधरी ने दावा किया था कि मोइत्रा के भाषण के अंश अमेरिकी वेबसाइट से हुबहू चुराये गये हैं। आरोप था कि यह आर्टिकल वाशिंगटन मंथली के Martin Longman ने अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बारे में लिखा था, जिसमें मोइत्रा ने कुछ अंश हूबहू उठा लिए और राष्ट्रपति का नाम हटा दिया। सुधीर चौधरी ने भाषण के अंशों को अंडरलाइन करके भी दिखाया था। हालांकि सुधीर चौधरी के ट्‌वीट के बाद वाशिंगटन मंथली के Martin Longman ने ट्‌वीट करके महुआ मोइत्रा का पक्ष लिया था।

इसके बाद भड़कीं महुआ मोइत्रा ने सुधीर चौधरी के दावे को गलत बताया था। मोइत्रा का कहना था कि यह भाषण उनका अपना था और अन्य मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए बीजेपी की ‘ट्रोल आर्मी’ की ओर से इस तरह के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने सुधीर चौधरी पर गलत रिपोर्टिंग के आरोप लगाते हुए लोकसभा में जीटीवी और सुधीर चौधरी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव भी पेश कर दिया था। हालांकि, स्पीकर ओम बिरला ने यह प्रस्ताव खारिज कर दिया था। बता दें कि पूर्व में इनवेस्टमेंट बैंकर रहीं मोइत्रा पश्चिम बंगाल की कृष्णानगर सीट से पहली बार सांसद बनी हैं।

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कैसी रही पत्रकारों संग फाइनैंस मिनिस्ट्री की 'डिनर डिप्लोमेसी', जानें यहां

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से दिल्ली के ताजमहल होटल में पत्रकारों के लिए आयोजित किया गया था डिनर

Last Modified:
Monday, 15 July, 2019
Finance Ministry

वित्त मंत्रालय में पत्रकारों की एंट्री के नए नियमों को लेकर शुरू हुआ विवाद गहराता जा रहा है। इसका नमूना वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा बजट के बाद दिए जाने वाले डिनर में देखने को मिला, जब गिने-चुने पत्रकार ही उसमें पहुंचे। एक मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शुक्रवार को दिल्ली के ताजमहल होटल में आयोजित डिनर में जो पत्रकार शामिल हुए, उनमें सिर्फ सात-आठ रिपोर्टर और 16 एडिटर्स ही शामिल थे, जबकि बड़ी संख्या में पत्रकारों ने इस डिनर का बायकॉट किया। बताया जा रहा है कि जो पत्रकार पोस्ट बजट डिनर में शामिल हुए, उनमें दो इंडियन एक्सप्रेस के, दो फाइनेंसियल एक्सप्रेस के, दो पीटीआई के और एक एएनआई के पत्रकार शामिल थे । गौरतलब है कि ये डिनर हर साल बजट के बाद फाइनेंस मिनिस्टर की ओर से आयोजित किया जाता है।

बताया जाता है कि 100 से ज्यादा पत्रकारों ने डिनर में शामिल न होने का निर्णय फाइनेंस मिनिस्ट्री के उस ताजा आदेश के बाद लिया था, जिसमें ये शर्त लगा दी गई है कि फाइनेंस मिनिस्ट्री के नॉर्थ ब्लॉक ऑफिस में PIB ऐक्रिटेड पत्रकारों को भी तभी एंट्री मिलेगी, जब उन्होंने किसी अधिकारी या मंत्री से पहले से अपॉइंटमेंट लिया हो। उल्लेखनीय  है कि अब तक साल में केवल दो महीने ही पत्रकारों की एंट्री रोकी जाती थी, जब बजट तैयार होता है।

रिपोर्ट के अनुसार, पोस्ट बजट डिनर में शामिल न होने के पत्रकारों के निर्णय के बारे में लंबे समय से वित्त मंत्रालय की कवरेज कर रहे एक वरिष्ठ पत्रकार का कहना था कि वर्तमान में कार्यरत और भविष्य में आने वाले पत्रकारों के हितों की रक्षा के लिए ही यह निर्णय लिया गया। बताया जा रहा है वित्त मंत्रालय कवर करने वाले पत्रकारों के वॉट्सएप ग्रुप FINMIN में शामिल 180 सदस्यों में से करीब 8 ही इस कार्यक्रम में शामिल हुए।

बताया जाता है कि पत्रकारों के स्वागत के लिए होटल के स्टाफ के अलावा वित्त मंत्रालय के 34 से ज्यादा अधिकारी होटल में तैनात किए गए थे। स्थिति यह थी कि डिनर में पत्रकारों से ज्यादा मेजबान मौजूद थे। अंग्रेजी मैगजीन से जुड़े एक पत्रकार का कहना था कि इस विरोध से स्पष्ट है कि नए नियम को लेकर पत्रकार घुटन महसूस कर रहे हैं और उनका आक्रोश बढ़ता जा रहा है, यह लोकतंत्र के लिए स्वस्थ संकेत नहीं है।

पत्रकारों का यह भी कहना है कि यदि इस नए नियम को वापस नहीं लिया गया तो मीडिया के लिए यह सही नहीं होगा, क्योंकि कोई भी न्यूज चैनल या अखबार ऐसे मंत्रालय में कोई रिपोर्टर तैनात नहीं करेगा, जहां से किसी एक्सक्लूसिव स्टोरी के निकलने की कोई गुंजाइश नहीं होगी। वित्त मंत्रालय के नए नियम का विरोध कर रहे पत्रकारों का यह भी कहना है कि यदि यह नया आदेश वापस नहीं लिया जाता है तो सरकार पर दबाव बनाने के लिए अधिकारियों से अपॉइंटमेंट को लेकर बड़े पैमाने पर एप्लीकेशन के साथ ही सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत बड़ी संख्या में एप्लीकेशन भेजी जाएंगी। कुल मिलाकर अभी भी यह मामला पेचीदा हो रहा है।

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दैनिक जागरण में पत्रकार आशुतोष अग्निहोत्री को मिली बड़ी जिम्मेदारी

राष्ट्रीय सहारा, आगरा से की अपने पत्रकारीय करियर की शुरुआत

Last Modified:
Monday, 15 July, 2019
Ashutosh Agnihotri

हिन्दी के प्रमुख अखबार ‘दैनिक जागरण’ प्रबंधन ने हेडऑफिस नोएडा में कार्यरत पत्रकार आशुतोष अग्निहोत्री को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। इसके तहत उन्हें नोएडा का ब्यूरो चीफ बनाया गया है। आशुतोष अग्निहोत्री को मीडिया के क्षेत्र में काम करने का करीब 14 साल का अनुभव है। उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2006 में आगरा में ‘राष्ट्रीय सहारा’ से की थी। हालांकि, वह यहां महज एक साल ही कार्यरत रहे और वर्ष 2007 में ‘राष्ट्रीय सहारा’ को अलविदा कहकर उन्होंने ‘अमर उजाला’ के आगरा एडिशन का दामन थाम लिया। करीब तीन साल बाद वर्ष 2010 में ‘अमर उजाला’ में उन्हें एटा के ब्यूरो चीफ की जिम्मेदारी दी गई।

वर्ष 2011 में ‘अमर उजाला’ को बाय बोलकर उन्होंने ‘दैनिक जागरण’ का रुख कर लिया और कानपुर में बतौर सीनियर सब एडिटर अपनी नई पारी शुरू कर दी। यहां वर्ष 2012 में प्रबंधन ने उन्हें रायबरेली का ब्यूरो चीफ नियुक्त कर दिया। इसके एक साल बाद ही वर्ष 2013 में उन्हें इटावा के ब्यूरो चीफ का जिम्मा संभालने का मौका मिला। यहां भी करीब एक साल तक यह जिम्मेदारी निभाने के बाद 2014 में उन्हें कानपुर में चीफ क्राइम रिपोर्टर की नई भूमिका सौंपी गई। इस पद पर उन्होंने करीब दो साल तक काम किया। इसके बाद आशुतोष अग्निहोत्री को प्रबंधन ने नोएडा भेज दिया, जहां उन्होंने हरियाणा डेस्क पर अपनी प्रतिभा दिखाई। इस बार के लोकसभा चुनाव में उन्हें दिल्ली-एनसीआर में चुनाव डेस्क की जिम्मेदारी मिली। अब प्रबंधन ने उन्हें नोएडा ब्यूरो चीफ की जिम्मेदारी सौंपी है। मूल रूप से उत्तर प्रदेश में फर्रुखाबाद के रहने वाले आशुतोष अग्निहोत्री ने वहीं से अपनी पढ़ाई-लिखाई पूरी की। उन्होंने आगरा से पत्रकारिता की पढ़ाई की है। 

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कपिल सिब्बल पर फूटा बरखा का गुस्सा, फीमेल स्टाफ के प्रति ये है 'नजरिया'

बरखा दत्त ने इस संबंध में कई ट्वीट किये हैं और अन्य पत्रकारों से भी आवाज उठाने की अपील की है

Last Modified:
Monday, 15 July, 2019
Barkha-Kapil

जमाने की आवाज उठाने वाले पत्रकार अपने साथ होने वाले शोषण के खिलाफ कुछ नहीं कर पाते। यही वजह है कि मीडिया हाउस मनमाने ढंग से पत्रकारों को ‘हांकते’ हैं। कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री कपिल सिब्बल के न्यूज चैनल ‘तिरंगा’ में भी आजकल कुछ ऐसा ही हो रहा है। यहां लगभग 200 पत्रकारों को नौकरी से निकाला जा रहा है, वो भी नियमों  के तहत मिलने वाले वेतन के बिना। वरिष्ठ पत्रकार बरखा दत्त ने इस मुद्दे को अपनी आवाज दी है। सोशल मीडिया पर उन्होंने ‘तिरंगा’ में पत्रकारों की स्थिति और कपिल सिब्बल के तानाशाही रवैये को उजागर किया है।

बरखा ने इस संबंध में एक के बाद एक कई ट्वीट किये हैं और अन्य पत्रकारों से भी इस पर मुखर होने की अपील की है। उन्होंने लिखा है,‘कपिल सिब्बल और उनकी पत्नी के @NewsHtn में भयावह स्थिति, 200 से अधिक कर्मचारियों को नौकरी से निकाला जा रहा है और उन्हें 6 महीने का वेतन भी नहीं दिया जा रहा।’

बरखा ने आगे लिखा है, ‘तिरंगा से जुड़ने के लिए कई पत्रकारों ने अन्य ऑफरों को ठुकरा दिया था, क्योंकि कपिल सिब्बल ने आश्वासन दिया था कि न्यूजरूम को पेशेवर तरीके से चलाया जाएगा और पत्रकारों का कार्यकाल कम से कम 2 साल का होगा। लेकिन पति-पत्नी में से किसी ने भी स्टाफ से बात नहीं की, इसके बजाय लाइव प्रोग्रामिंग को 48 घंटों के लिए बंद कर दिया।’ बरखा दत्त ने कपिल और उनकी पत्नी के खिलाफ अपने दिल का सारा गुबार निकाल दिया। उन्होंने निशाना साधते हुए लिखा, ‘सिब्बल की पत्नी जो मीट फैक्ट्री चलाती हैं, वो बड़े ताव में अपने कर्मचारियों से कहती हैं कि मैं एक पैसा दिए बिना ही फैक्ट्री बंद कर दूंगी, फिर 6 महीने की सैलरी मांगने वाले ये पत्रकार कौन होते हैं।’ गौरतलब है कि बाकी पत्रकारों की तरह बरखा ने भी चैनल की लॉन्चिंग से पहले उसका दामन थमा था, लेकिन उनका कहना है कि वो जो कुछ सिब्बल के बारे में लिख रही हैं, उसका मकसद उन 200 कर्मचारियों को इंसाफ दिलाना है, जिन्हें नियमों को नजरअंदाज कर वेतन दिए बिना निकाला जा रहा है।

अपनी लड़ाई वह अदालत में लड़ लेंगी। बरखा ने सिब्बल को विजय माल्या करार देते हुए कहा ‘सबसे ज्यादा शर्म की बात यह है कि हर रोज करोड़ों कमाने वाले सिब्बल 200 कर्मचारियों को नियमों के अनुसार 6 महीने या कम से कम 3 महीने का वेतन देने को भी तैयार नहीं हैं। वह 200 परिवारों की जिंदगी बर्बाद करने पर तुले हैं।’ बरखा ने अपने ट्वीट में यह भी कहा है कि सिब्बल और उनकी पत्नी का आरोप है कि चूंकि नरेंद्र मोदी ने उनका चैनल चलने नहीं दिया, इसलिए उन्हें मजबूरन कर्मचारियों को निकालना पड़ रहा है, जबकि ऐसा कुछ नहीं है। भारत सरकार की तरफ से इस तरह का कुछ नहीं किया गया है। कपिल और उनकी पत्नी ने कर्मचारियों से बात तक नहीं की, इसके बजाय दोनों छुट्टी मनाने लंदन चले गए। उनकी इस हरकत के चलते मैं उन्हें ‘माल्या’ कहने को मजबूर हूं। इतना ही नहीं बरखा ने मुताबिक, उन्हें इस मामले से पीछे हटने के लिए धमकियां भी मिल रही हैं।

अपने एक अन्य ट्वीट में उन्होंने लिखा है, ‘कर्मचारियों के अधिकारों के लिए लड़ने की वजह से मुझे धमकाया जा रहा है, मुझसे यह भी कहा जा रहा है कि मैं कपिल सिब्बल की माल्या से तुलना न करूं, लेकिन मैं पीछे नहीं हटूंगी। मैं ‘तिरंगा’ चैनल के स्टाफ के साथ खड़ी हूं और अंत तक उनका साथ देती रहूंगी।’ सिब्बल दंपती पर आरोपों की बात यहीं खत्म नहीं होती। बरखा दत्त का कहना है कि कपिल और उनकी पत्नी महिला कर्मचारियों को संबोधित करने के लिए अपशब्द का प्रयोग करते थे।

बरखा ने सभी पत्रकारों से इस विषय में अपनी आवाज बुलंद करने की अपील करते हुए कहा, ‘मैं अपने सभी पत्रकार दोस्तों से कहना चाहूंगी कि वो कपिल सिब्बल को तब तक ट्वीट करना जारी रखें, जब तक कि वो सभी कर्मचारियों को नियमानुसार वेतन नहीं दे देते और कर्मचारियों को धमकाने से बाज नहीं आते। कई पत्रकारों ने बरखा को आश्वासन दिया है कि वो इस लड़ाई को अंजाम तक पहुंचाने में उनका साथ देंगे। अब देखने वाली बात यह है कि क्या एडिटर्स गिल्ड और पत्रकार संघ जैसी संस्थाएं पत्रकारों के हक के लिए आगे आती हैं? 

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सरकार के इस कदम से प्रेस की स्वतंत्रता पर फिर उठे सवाल

मीडिया की स्वतंत्रता पर हमले का यह पहला मामला नहीं है

Last Modified:
Monday, 15 July, 2019
Media Freedom

प्रेस की स्वतंत्रता पर हमले को लेकर पाकिस्तान की इमरान खान सरकार एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। दरअसल, यह विवाद गुरुवार को पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की बेटी मरियम नवाज का इंटरव्यू जबरन रोके जाने को लेकर हो रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ‘पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज’ (पीएमएल-एन) की नेता मरियम नवाज पाकिस्तानी न्यूज चैनल ‘हम न्यूज’ (HUM News) पर पत्रकार नदीम मलिक को इंटरव्यू दे रही थीं, लेकिन चंद मिनट बाद ही इस इंटरव्यू को रुकवा दिया गया। बाद में इस इंटरव्यू को जबरदस्ती रोके जाने को लेकर नदीम मलिक ने ट्वीट भी किया, साथ ही इस इंटरव्यू का एक लिंक भी शेयर किया।

नदीम के ट्वीट के बाद ‘हम न्यूज’  ने अपने ट्विटर हैंडल पर एक बयान पोस्ट किया। इस ट्वीट में कहा गया कि हमारा चैनल एक स्वतंत्र और जिम्मेदार मीडिया में विश्वास करता है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा करना हमारे मूल नियमों में से एक है।

इससे पहले मरियम नवाज की एक प्रेस कान्फ्रेंस दिखाने के लिए पाकिस्तान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया नियामक प्राधिकरण (PEMRA) के आदेश पर तीन पाकिस्तानी समाचार चैनलों को नोटिस जारी किया गया था। उनकी प्रेस कान्फ्रेंस को भी बीच में रोक दिया गया था। मरियम ने तब इस घटना को अविश्वसनीय और शर्मनाक करार दिया था।

बता दें कि 6 जुलाई को मरियम नवाज ने न्यायाधीश अरशद मलिक का एक विडियो जारी किया था। इसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि उनके पिता के खिलाफ सबूतों की कमी होने के बावजूद जेल में डाल दिया गया। मरियम का यह भी आरोप था कि जज अरशद मलिक ने कथित तौर पर स्वीकार किया है कि नवाज शरीफ को सजा सुनाने के लिए उन्हें धमकी मिली थी। हालांकि, न्यायाधीश ने मरियम के आरोपों का खंडन किया था। बता दें कि नवाज शरीफ को भ्रष्टाचार के मामले में सजा सुनाई गई है। यह पहला मामला नहीं है, जब पाकिस्तान में ऐसा हुआ हो, इससे पहले एक जुलाई को भी कुछ ऐसा हुआ था, जब पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के इंटरव्यू को प्रसारित होने के कुछ देर बाद ही रोक दिया गया था।

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वरिष्ठ पत्रकार राहुल देव को मिला ये प्रतिष्ठित अवॉर्ड

दिल्ली में तीनमूर्ति स्थित नेहरू मेमोरियल सभागार में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने किया सम्मानित

Last Modified:
Monday, 15 July, 2019
Rahul Dev

वरिष्ठ पत्रकार राहुल देव को इस साल के पंडित हरिदत्त शर्मा पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। पंडित हरिदत्त शर्मा जयंती पुरस्कार समिति की ओर से शुक्रवार को दिल्ली में तीनमूर्ति स्थित नेहरू मेमोरियल सभागार में आयोजित समारोह में राहुल देव को यह अवॉर्ड दिया गया। इसके तहत उन्हें 51,000 रुपए, प्रशंसा पत्र, एक स्मारिका और एक शॉल दिया गया।

राहुल देव को इस पुरस्कार से सम्मानित करते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि पत्रकार के अंदर राजनीतिक चेतना होना बहुत जरूरी है। उन्होंने पंडित हरिदत्त शर्मा के जीवन मूल्य और प्रमुख उपलब्धियों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि राहुल देव एक प्रमुख हिंदी पत्रकार हैं, जिन्होंने हमेशा अपने मूल्यों का पालन किया है और आज तक वे अपने पेशे में अपनी मूल भाषा और निष्पक्ष राय पेश करने की इच्छाशक्ति रखते हैं।

वहीं, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जनार्दन द्विवेदी ने कहा कि पंडित हरिदत्त शर्मा के समय पत्रकारिता अलग थी। उस समय पत्रकार जो लिखता था, उसका उत्तरदायी होता था।

इस मौके पर केंद्रीय परिवहन राज्य मंत्री वीके सिंह, पूर्व केंद्रीय रेल मंत्री सुरेश प्रभु, डॉ. एचआर नागेंद्र, पत्रकार विनोद अग्निहोत्री, लेखक और कवि अशोक चक्रधर, एशियन फिल्म और टेलिविजन संस्थान के अध्यक्ष संदीप मारवाह और आयोजक राज कुमार शर्मा आदि भी उपस्थित थे।

गौरतलब है कि विख्यात पत्रकार, लेखक, विचारक, वक्ता, सामाजिक कार्यकर्ता, कुशल प्रशासक और राजनीतिज्ञ पंडित हरिदत्त शर्मा की याद में समिति की ओर से 25 वर्षों से इस कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। इसके तहत हर साल यह पुरस्कार सकारात्मक पत्रकारिता, लेखन और समाजसेवा के क्षेत्र में बेहतर काम करने वालों को दिया जाता है।

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अपराधियों के निशाने पर आया पत्रकार, गई जान

हत्या के कारणों के बारे में फिलहाल पता नहीं चल पाया है

Last Modified:
Monday, 15 July, 2019
Murder

पत्रकारों पर हमलों की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। इसी तरह की घटना में एक रेडियो पत्रकार की हत्या का मामला सामने आया है। यह मामला अफगानिस्तान से जुड़ा है। अफगान पुलिस के हवाले से मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि पूर्वी पक्तिया प्रांत में रेडियो चैनल ‘रेडियो गार्देज’ में पत्रकार नादिर शाह की शनिवार को कुछ लोगों ने हत्या कर दी।

पुलिस प्रमुख मोहम्मद होस्मान जाहनबाज के अनुसार, नादिर शाह की हत्या के कारणों के बारे में फिलहाल पता नहीं चल पाया है। बता दें कि पक्तिया प्रांत तालिबान के मुख्य गुट हक्कानी नेटवर्क का गढ़ है।

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पत्रकार मोनिका शेखर ने दैनिक भास्कर को बोला बाय, नई पारी जल्द

दैनिक जागरण में लंबी पारी खेलने के बाद करीब दो साल पहले थामा था दैनिक भास्कर का दामन

Last Modified:
Saturday, 13 July, 2019
Monika Shekhar

पत्रकार मोनिका शेखर के बारे में खबर है कि उन्होंने ‘दैनिक भास्कर’ को अलविदा कह दिया है। मोनिका शेखर ने करीब दो साल पहले दैनिक भास्कर में जॉइन किया था और इन दिनों रीजनल डेस्क फरीदाबाद/गुरुग्राम की जिम्मेदारी संभाल रही थीं। फिलहाल वह 15 जुलाई तक यहां नोटिस पीरियड पर काम करेंगी। खबर है कि वह जल्द ही नई पारी शुरू करने जा रही हैं। हालांकि अभी इस बारे में उन्होंने कोई खुलासा नहीं किया है। दैनिक भास्कर को जॉइन करने से पहले मोनिका शेखर ‘दैनिक जागरण’, नोएडा में डेस्क पर कार्यरत थी। ‘दैनिक जागरण’ में 10 साल 4 महीने की पारी खेलने के बाद मार्च 2017 में उन्होंने इस संस्थान को बाय बोल दिया था।

मोनिका शेखर ने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 2006 में ‘दैनिक जागरण’ के लुधियाना एडिशन से बतौर ट्रेनी की थी। वर्ष 2008 में लुधियाना से वे नोएडा जागरण डॉट कॉम (jagran.com) में आ गईं और अप्रैल 2014 तक डिजिटल विंग में ही रहीं। मई 2014 के बाद वे एक बार प्रिंट में आ गईं और तब से 2017 तक दिल्ली/एनसीआर डेस्क पर फरीदाबाद एडिशन की जिम्मेदारी संभाली। शिक्षा की बात करें तो मोनिका शेखऱ ने जागरण इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड मास कम्युनिकेशन (Jagran Institute Of Management And Mass Communication) से मास कम्युनिकेशन में पीजी डिप्लोमा करने के बाद पटना की नालंदा ओपन यूनिवर्सिटी से मास्टर ऑफ जर्नलिज्म किया है।

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महिला पत्रकार पर कसा कानून का शिकंजा, ये है गंभीर आरोप

स्थानीय अदालत ने महिला पत्रकार को न्यायिक हिरासत में भेजा

Last Modified:
Saturday, 13 July, 2019
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वरिष्ठ पत्रकार और तेलुगु न्यूज नेटवर्क ‘मोजो टीवी’ (Mojo TV) की पूर्व सीईओ रेवती पोगडांडा (Revathi Pogadadanda) को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। हैदराबाद पुलिस ने शुक्रवार को रेवती की यह गिरफ्तारी एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत की है। बताया जाता है कि इस मामले में जातीय दलित हकुला पोरता समिति (, Jatiya Dalitha Hakkula Porata Samithi) के राष्ट्रीय महासचिव वरप्रसाद उर्फ हमरा प्रसाद ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी।

इस शिकायत में प्रसाद का कहना था कि केरल के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश के लेकर चर्चा के लिए उन्हें चैनल में बतौर गेस्ट बुलाया गया था, जहां रेवती और उनके सहयोगी रघु ने जानबूझकर उन्हें अपमानित किया था। इस शो को रेवती और रघु ने मॉडरेट किया था, जहां पर उनकी वरप्रसाद से तीखी बहस हो गई थी, जिसके बाद वरप्रसाद को शो से बाहर जाने को कह दिया गया था।

पुलिस का कहना है कि इस मामले की जांच में रेवती पुलिस का सहयोग नहीं कर रही थीं। इससे पहले भी उन्हें दो बार नोटिस भेजे गए थे, लेकिन उन्होंने इसका कोई जवाब नहीं दिया। इसके बाद अब पुलिस ने रेवती को उनके घर से गिरफ्तार कर लिया। रेवती को इसके बाद स्थानीय अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

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