अब ये वरिष्ठ पत्रकार संभालेंगे राष्ट्रपति के प्रेस सचिव की जिम्मेदारी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली कैबिनेट की नियुक्ति समिति ने दी मंजूरी, पूर्व में कई मीडिया संस्थानों में निभा चुके हैं अहम भूमिका

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 17 September, 2019
Last Modified:
Tuesday, 17 September, 2019
RamNath Kovind

काफी दिनों से चल रही राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के नए प्रेस सचिव की तलाश अब पूरी हो गई है। इस पद पर वरिष्ठ पत्रकार अजय कुमार सिंह को नियुक्त किया गया है। कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की ओर से जारी आधिकारिक आदेश के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली कैबिनेट की नियुक्ति समिति ने अजय कुमार सिंह (55) की नियुक्ति को मंजूरी दी है। उनकी नियुक्ति एक साल के लिए या अगले आदेश तक अनुबंध के आधार पर की गई है।

अजय कुमार सिंह को प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में काम करने का करीब 30 साल का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1985 में ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ (लखनऊ) से की थी। बाद में उन्होंने दिल्ली में ‘द पॉयनियर’ जॉइन कर लिया था। पूर्व में वह ‘बिजनेस स्टैंडर्ड’ ‘स्टार न्यूज’ (अब एबीपी न्यूज) और ‘न्यूज एक्स’ में भी अपनी जिम्मेदारी निभा चुके हैं।   

‘फर्स्टपोस्ट’ में एग्जिक्यूटिव एडिटर की भूमिका निभाने से पहले वह ‘गवर्नमेंस नाउ’ मैगजीन में एडिटर के रूप में काम कर रहे थे। इसके बाद उन्होंने दोबारा ‘गवर्नमेंस नाउ’ में डायरेक्टर (एडिटोरियल) के पद पर वापसी की थी और इस साल की शुरुआत में इस मैगजीन का प्रिंट एडिशन बंद होने तक इसी पद पर काम कर रहे थे। यहां वह मैगजीन के अंग्रेजी और मराठी एडिशन की कमान संभाल रहे थे। फिलहाल वे 'फर्स्टपोस्ट' से कंट्रीब्यूटर के तौर पर जुड़े हुए हैं।

बता दें कि राष्ट्रपति के प्रेस सचिव के रूप में वरिष्ठ पत्रकार अशोक मलिक का दो साल का कार्यकाल पूरा होने पर कई दिनों से नए प्रेस सचिव की तलाश की जा रही थी। इस दौड़ में इन दिनों ‘ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन’ (ORF) से जुड़े पूर्व पत्रकार गौतम चिकरमाने (Gautam Chikermane) और हिंदोल सेनगुप्ता (Hindol Sengupta) आदि शामिल थे।

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किसान आंदोलन की मीडिया कवरेज को लेकर एडिटर्स गिल्ड ने जारी की ये एडवाइजरी

संपादकों की संस्था ‘एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया’ (Editors Guild Of India) ने इन दिनों चल रहे किसान आंदोलन की मीडिया कवरेज को लेकर एडवाइजरी जारी की है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 04 December, 2020
Last Modified:
Friday, 04 December, 2020
Editors Guild

संपादकों की संस्था ‘एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया’ (Editors Guild Of India) ने इन दिनों चल रहे किसान आंदोलन की कवरेज को लेकर मीडिया एडवाइजरी जारी की है। इस बारे में एडिटर्स गिल्ड द्वारा एक स्टेटमेंट भी जारी किया गया है।

इस स्टेटमेंट में कहा गया है, ‘एडिटर्स गिल्ड इस बात को लेकर चिंतित है कि रिपोर्टिंग के दौरान मीडिया का एक वर्ग बिना किसी सबूत के आंदोलनकारियों के लिए ‘खालिस्तानी’ (Khalistanis) अथवा ‘राष्ट्रविरोधी’ (Anti-Nationals) जैसी शब्दावली का इस्तेमाल कर रहा है। यह जिम्मेदारी और नैतिक पत्रकारिता के खिलाफ है। इस तरह की रिपोर्टिंग से मीडिया की विश्वसनीयत प्रभावित होती है।’

स्टेटमेंट में कहा गया है, ‘गिल्ड की सलाह है कि किसान आंदोलन के दौरान मीडिया संस्थान निष्पक्ष और संतुलित रिपोर्टिंग करें।’ एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया की ओर से जारी स्टेटमेंट को आप यहां देख सकते हैं।

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Hindustan Times से जुड़े उत्कर्ष आनंद, अहम भूमिका निभाते आएंगे नजर

उत्कर्ष आनंद को पिछले 14 वर्षों में लीगल अफेयर्स कॉरेस्पोंडेंट और एडिटर के रूप में काम करने का अनुभव है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 04 December, 2020
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Friday, 04 December, 2020
utkarsh

हिन्दुस्तान टाइम्स (Hindustan Times) ने लीगल एडिटर के तौर पर उत्कर्ष आनंद को नियुक्त किया है। आनंद को पिछले 14 वर्षों में लीगल अफेयर्स कॉरेस्पोंडेंट और एडिटर के रूप में काम करने का अनुभव है। इस दौरान उन्होंने प्रिंट, टीवी और वेब के लिए देश की कुछ बड़ी लीगल स्टोरीज और अहम केसेज को कवर किया है।

दिल्ली यूनिवर्सिटी से लॉ ग्रेजुएट रहे आनंद ने 2006 में ‘प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया’ (Press Trust of India) से अपना करियर शुरू किया। उन्होंने ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ (The Indian Express) में भी काम किया है, जहां उन्होंने मुख्य तौर पर सुप्रीम कोर्ट को कवर किया। इसके बाद उन्होंने  सीएनuएन-न्यूज18 (CNN-News18) अपना योगदान दिया और फिर यहां से एचटी में आ गए, यहां भी उन्होंने लीगल कवरेज की जिम्मेदारी संभाली है।

एचटी में, वे सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाई को कवर करेंगे, दिल्ली में स्थित कानूनी मामलों के संवाददाता के तौर पर काम करेंगे, साथ ही देश के कानूनी कवरेज को भी सुव्यवस्थित करेंगे। अब्राहम थॉमस, जो सुप्रीम कोर्ट को कवर करते हैं और ऋचा बांका, जो दिल्ली हाई कोर्ट को कवर करती हैं, अब आनंद को रिपोर्ट करेंगी। वहीं निचली अदालतों को कवर करने के लिए एक संवाददाता को नियुक्त किया जाएगा, जिसकी प्रक्रिया चल रही है।

 

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पत्रकारिता में दैनिक भास्कर के चेयरमैन के योगदान को कुछ यूं मिला सम्मान

दैनिक भास्कर ने अपने चेयरमैन स्वर्गीय रमेश चंद्र अग्रवाल की 76वीं जयंती के अवसर पर एक स्मारक डाक टिकट जारी किया

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 04 December, 2020
Last Modified:
Friday, 04 December, 2020
dainikbhaskar

दैनिक भास्कर ने अपने चेयरमैन स्वर्गीय रमेश चंद्र अग्रवाल की 76वीं जयंती के अवसर पर एक स्मारक डाक टिकट जारी किया। समाज के लिए उनके योगदान को चिह्नित करने के लिए स्वर्गीय रमेश चंद्र की स्मृति में जारी यह टिकट उनके 76वें जन्मदिवस 30 नवंबर को 12 राज्यों के मुख्यमंत्रियों और चार राज्यपालों को भेंट किया गया, जिसे उन्होंने लोकार्पित किया।

दैनिक भास्कर समूह ने मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, गुजरात, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, झारखंड और उत्तराखंड के मुख्यमंत्रियों के साथ-साथ छत्तीसगढ़, बिहार, चंडीगढ़ और झारखंड के राज्यपालों का आभार व्यक्त किया है। 

रमेश चंद्र अग्रवाल भारत के प्रमुख बिजनेसमैन और समाज के गणमान्य व्यक्तियों में से एक थे, जिन्होंने समाज पर अमिट छाप छोड़ते हुए व्यवसाय और सामुदायिक सेवा दोनों क्षेत्रों में अपनी अलग पहचान बनाई। ये उनके विजन और स्पष्ट लक्ष्य का ही नतीजा है कि आज भास्कर 50 बिलियन से ज्यादा टर्नओवर के साथ 3 भाषाओं में 65 संस्करणों के साथ 12 राज्यों में फैलने वाला देश का सबसे बड़ा मीडिया समूह बन गया।

12 अप्रैल, 2017 का दिन था, जब सुबह अहमदाबाद एयरपोर्ट पर रमेश चंद्र अग्रवालजी ने सीने में दर्द की शिकायत की थी, जिसके कुछ समय बाद वे गिर पड़े थे और उन्हें तत्काल अहमदाबाद के अपोलो अस्पताल ले जाया गया था, जहां हार्टअटैक से उनका निधन हो गया था। उस समय वे 73 साल के थे।

10 दिसबंर 2005 को वे डीबी कॉर्प के बोर्ड में शामिल हुए थे और अपने अंतिम दिनों तक वे इसके साथ जुड़े रहे। उन्हें प्रकाशन और अखबार के कारोबार का बेहद लंबा अनुभव था। वे भोपाल यूनिवर्सिटी से पॉलिटिकल साइंस में पोस्ट ग्रेजुएट थे।

रमेश चंद्र जी मध्य प्रदेश में FICCI (Federation of Indian Chambers of Commerce and Industry) के चेयरमैन भी रह चुके थे। उन्हें साल 2003, 2006 और 2007 में इंडिया टुडे मैगजीन द्वारा 50 सबसे शक्तिशाली बिजनेस घरानों की सूची में शामिल किया जा चुका था। साल 2012 में तो वे प्रतिष्ठित मैगजीन ‘फोर्ब्स’ द्वारा जारी भारत के सबसे अमीर लोगों की सूची में 95वें स्थान पर थे।

30 नवंबर 1944 को उत्तर प्रदेश के झांसी में जन्मे रमेश चंद्र अग्रवाल 1956 में पिता सेठ द्वारकाप्रसाद अग्रवाल के साथ भोपाल आ गए थे। उन्होंने 1958 में मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से दैनिक भास्कर की नींव रखी थी। 1983 में इंदौर संस्करण की शुरुआत की थी। उन्हीं के ही नेतृत्व में समूह ने हिंदी अखबार ‘दैनिक भास्कर’, गुजराती अखबार ‘दिव्य भास्कर’, अंग्रेजी अखबार ‘डीएनए’, मराठी समाचार पत्र ‘दिव्य मराठी’, रेडियो चैनल ‘माय एफएम’ और ‘डीबी डिजिटल’ को मीडिया जगत में सबसे अग्रणी बनाया। उन्हें पत्रकारिता में राजीव गांधी लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से भी सम्मानित किया जा चुका था।

‘दैनिक भास्कर’ (Dainik Bhaskar) ग्रुप के प्रमोटर डायरेक्टर गिरीश अग्रवाल का कहना है, ‘हमें उस विरासत का हिस्सा होने पर गर्व है, जो हमारे चेयरमैन रमेश चंद्र अग्रवाल ने अपने समय में तैयार की थी। पत्रकारिता की अखंडता पर उनके विशेष फोकस ने नया बेंचमार्क स्थापित किया, जिसे हम इस्तेमाल करते हैं। खासकर इस तरह के मुश्किल समय में। वह अपने पीछे जो विरासत छोड़ गए हैं वह काफी उल्लेखनीय है और इसने दैनिक भास्कर ग्रुप को मजबूत और मजबूत होते हुए देखा है। हम भारतीय डाक सेवा का धन्यवाद अदा करते हैं, जिन्होंने रमेश चंद्र अग्रवाल जी पर डाक टिकट जारी किया। पूरी भास्कर फैमिली के लिए यह काफी गर्व का क्षण है और उससे हमें अपने प्रयासों को और मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।’

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‘स्टार’ और ‘डिज्नी इंडिया’ के चेयरमैन उदय शंकर बने FICCI के प्रेजिडेंट

‘स्टार’ (Star) और ‘डिज्नी इंडिया’ (Disney India) के चेयरमैन उदय शंकर को ‘भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग महासंघ’ (FICCI) का प्रेजिडेंट चुना गया है

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Published - Friday, 04 December, 2020
Last Modified:
Friday, 04 December, 2020
uday Shankar

‘स्टार’ (Star) और ‘डिज्नी इंडिया’ (Disney India) के चेयरमैन उदय शंकर को ‘भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग महासंघ’ (FICCI) का प्रेजिडेंट चुना गया है। उनका यह चुनाव वर्ष 2020-21 के लिए किया गया है। 11, 12 व 14 दिसंबर को होने वाली फिक्की की 93वीं वार्षिक आम बैठक में वह फिक्की प्रेजिडेंट और ‘अपोलो हॉस्पिटल्स ग्रुप’ की जॉइंट मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. संगीता रेड्डी की जगह ये जिम्मेदारी संभालेंगे। उदय शंकर भारत में मीडिया और इंडस्ट्री के पहले ऐसे एग्जिक्यूटिव हैं, जो फिक्की जैसे नेशनल इंडस्ट्री चैंबर का नेतृत्व करेंगे।

बता दें कि डिज्नी और स्टार में अपनी लीडरशिप भूमिका के अलावा उदय शंकर ने देश में मीडिया और एंटरटेनमेंट सेक्टर की ग्रोथ को एक नया आयाम देने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, ताकि इंडस्ट्री से स्टेकहोल्डर्स के साथ-साथ कंज्यूमर्स को भी लाभ मिल सके।

टेलिविजन ब्रॉडकास्टिंग में कंटेंट के रेगुलेशन और ब्रॉडकास्टिंग सेक्टर में डिजिटाइजेशन जैसी उल्लेखनीय पहल के मामलों में वह अग्रिम मोर्चे पर रहे हैं। उदय शंकर पूर्व में ‘इंडियन ब्रॉडकास्टिंग फाउंडेशन’ (IBF) के प्रेजिडेंट और फिक्की की मीडिया और एंटरटेनमेंट कमेटी के चेयरमैन रह चुके हैं। 

देश में टेलिविजन न्यूज को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में उदय शंकर ने अपनी अहम भूमिका निभाई है। स्टार से पहले वे मीडिया कंटेंट एंड कम्युनिकेशंस सर्विसेज (Media Content and Communications Services) के सीईओ व एडिटर थे। वे ‘टीवी टुडे समूह’ में भी एडिटर व न्यूज डायरेक्टर के तौर पर अपना ‘करिश्मा’ दिखा चुके हैं। यहां उनके नेतृत्व में ही वर्ष 2000 में ‘आजतक’ और वर्ष 2003 में ‘हेडलाइंस टुडे’ का शुभारंभ हुआ था। उदय शंकर ने दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से एमफिल की डिग्री ली है।

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PR-कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस इंडस्ट्री के प्रतिभाशाली युवाओं की बनेगी लिस्ट, मिलेगी नई पहचान

‘एक्सचेंज4मीडिया’ (exchange4media) ने ‘e4m PR and Corporate Communications 30 Under 30’ के पहले एडिशन को लॉन्च करने की घोषणा की है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 03 December, 2020
Last Modified:
Thursday, 03 December, 2020
30 Under 30

कोरोनावायरस (कोविड-19) के कहर के कारण इस साल तमाम उद्योग-धंधों पर काफी बुरा असर पड़ा है। कम्युनिकेशन इंडस्ट्री भी इससे अछूती नहीं रही है। लेकिन, इंडस्ट्री से जुड़े लोगों ने काफी दृढ़ता से इस मुश्किल समय का सामना किया है। तमाम चुनौतियों के बावजूद कम्युनिकेशन प्रोफेशन से जुड़े लोगों के सामूहिक प्रयासों ने इंडस्ट्री को सामान्य रूप से वापस लौटने में काफी मदद की है।

इंडस्ट्री के 30 साल से कम उम्र के ऐसे ही 30 युवाओं की मेहनत व उनके हौसले को पहचानने व उन्हें सम्मानित करने के लिए ‘एक्सचेंज4मीडिया’ (exchange4media) ने ‘e4m PR and Corporate Communications 30 Under 30’ के पहले एडिशन को लॉन्च करने की घोषणा की है।

इस लिस्ट में 30 साल से कम उम्र के 30 ऐसे युवाओं के नाम शामिल किए जाएंगे, जिन्होंने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति से न सिर्फ खुद को साबित किया है,  बल्कि सीखने के साथ नई पहल करने व जोखिम लेने का रिस्क भी उठाया है।

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#MeToo: सरकारी टीवी चैनल के एंकर पर लगा यौन उत्पीड़न का आरोप

मीडियाकर्मी झोऊ झाऊ शियाशुआन उर्फ शायनजी एक जाने-माने टीवी एंकर के खिलाफ कोर्ट पहुंची हैं।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 03 December, 2020
Last Modified:
Thursday, 03 December, 2020
MeToo2

चीन में कार्यस्थलों पर यौन उत्पीड़न रोकने के लिए बनाए गए विशेष कानून के तहत पहली सुनवाई शुरू हो गई है। वहीं अब इसे 'मी-टू' (#metoo) आंदोलन में एक बड़ी कामयाबी के रूप में देखा जा रहा है। दरअसल, मीडियाकर्मी झाऊ शियाशुआन उर्फ शायनजी एक जाने-माने टीवी एंकर के खिलाफ कोर्ट पहुंची हैं। उनका आरोप है कि जाने माने टीवी एंकर झू जुन ने 2014 में उनका यौन शोषण किया था।

2018 में 27वर्षीय झाऊ ने अपना 2014 का अनुभव 3000 शब्दों के एक लेख में बताया था। उनका आरोप था कि जब वे चीनी सरकारी मीडिया चैनल ‘सीसीटीवी’ (CCTV) में इंटर्नशिप कर रही थीं, तब जाने-माने टीवी होस्ट झू जुन ने उन्हें जबरन किस किया था।

झाऊ ने मुकदमा शुरू होने को चीन के इतिहास का एक बड़ा क्षण बताया है। दरअसल, चीन का नया कानून इसी साल मई में पारित हुआ है। इसके तहत यौन उत्पीड़न की परिभाषा को विस्तृत कर दिया गया।

झाऊ ने बुधवार को एक न्यूज एजेंसी से कहा, मैं बहुत नर्वस हूं। लेकिन हम हारें या जीतें, इस केस का एक खास मतलब है। अगर हम केस हार भी गए तब भी मैंने जो सवाल उठाए हैं, वे इतिहास में दर्ज रहेंगे। किसी न किसी को तो उसका जवाब देना होगा।

बुधवार को सुनवाई शुरू हुई तो हाइदियान पीपुल्स कोर्ट के बाहर बड़ी भीड़ इकट्ठी हो गई। चीन में इसे राजनीतिक सक्रियता का एक बड़ा मामला समझा गया है। वहां मौजूद लोग झाऊ के प्रति अपना समर्थन जता रहे थे और मांग कर रहे थे कि इस मामले में उठे सवालों के जवाब दिए जाएं। लेकिन वहां पुलिस ने लोगों से प्लेकार्ड ना दिखाने को कहा। कुछ खबरों के मुताबिक पुलिस ने जबरन वहां लगाए प्लेकार्ड्स को हटा दिया।

शियांजी ने यह भी बताया कि उन्होंने पुलिस में भी शिकायत दर्ज करवाई थी, लेकिन पुलिस ने उन्हें आरोप वापस लेने को कहा क्योंकि झू जुन एक बड़े टीवी होस्ट हैं और समाज में उनका काफी रुतबा है।

झाऊ ने उम्मीद जताई है कि ये केस चीन की कानूनी व्यवस्था में एक प्रगति साबित होगा। झाऊ का आरोप है कि 2014 में वे ड्रेसिंग रूम में झू जुन के साथ अकेली रह गई थीं। तब झू जुन ने उनसे पूछा कि क्या तुम इस चैनल में आगे भी काम करना चाहती हो। जब झाऊ ने हां कहा, तो झू जुन ने उन्हें जकड़ लिया और जबरन किस किया।

वहीं टीवी एंकर झू जुन ने आरोपों का खंडन किया और झाऊ पर उल्टा मानहानि का केस कर दिया है।

शुरुआत में झू जुन के खिलाफ केस व्यक्तिगत अधिकार कानून के तहत दर्ज हुआ था। इस कानून में व्यक्तियों की सेहत और शरीर की रक्षा का प्रावधान है, लेकिन जब मई में नया कानून बना, तो उनके वकीलों ने इसके तहत मामले की सुनवाई की अर्जी दी।

2018 में दुनिया भर में मी-टू आंदोलन के तहत अनगिनत महिलाएं सामने आई थीं और अतीत में हुए उनके साथ हुए यौन उत्पीड़न के मामलों का खुलासा किया था। झाऊ भी तभी सामने आई थीं। मी-टू आंदोलन चीन में काफी जोरशोर से चला था।

 

 

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PIB की इस शाखा के नए डायरेक्टर नियुक्त किए गए अजय महिमा

अजय महिमा ने पदभार ग्रहण कर लिया है। वह इससे पहले कोलकाता में निदेशक के पद पर सेवारत थे।

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Published - Thursday, 03 December, 2020
Last Modified:
Thursday, 03 December, 2020
PIB

अजय महिमा प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी) की सिक्किम शाखा के नए निदेशक (Director)  (मीडिया और संचार) नियुक्त किए गए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सहायक निदेशक एस मित्रा ने बताया कि भारतीय सूचना सेवा के अधिकारी महिमा ने पदभार ग्रहण कर लिया है। वह इससे पहले कोलकाता में निदेशक के पद पर सेवारत थे।

जुलाई 2015 में तत्कालीन निदेशक सीके दोर्जी की सेवानिवृत्ति के बाद अजय महिमा ने अब पीआईबी का नेतृत्व संभाला है। इससे पहले यह पद खाली था।

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‘देशबंधु’ के प्रधान संपादक ललित सुरजन का निधन, राजकीय सम्मान के साथ होगी अंतिम विदाई

देशबंधु समाचार समूह के प्रधान संपादक व वरिष्ठ पत्रकार ललित सुरजन का बुधवार रात करीब 8 बजे निधन हो गया

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 03 December, 2020
Last Modified:
Thursday, 03 December, 2020
LalitSurjan

देशबंधु समाचार समूह के प्रधान संपादक व वरिष्ठ पत्रकार ललित सुरजन का बुधवार रात करीब 8 बजे निधन हो गया। 74 वर्षीय ललित सुरजन के परिवार के सदस्यों ने बताया कि वे कैंसर के इलाज के लिए दिल्ली में थे। सोमवार को अचानक ब्रेन स्ट्रोक होने के बाद उन्हें धर्मशीला अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उनका निधन हो गया। छत्तसीगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने उनके अंतिम संस्कार को पूरे राजकीय सम्मान के साथ करने के निर्देश प्रशासन को दिए हैं।

छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ पत्रकार ललित सुरजन के परिवार में पत्नी और तीन बेटियां हैं। उनके निधन पर राज्यपाल अनुसुईया उइके और मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने दुख जताया है। राज्यपाल उइके ने ट्वीट कर कहा, ‘वरिष्ठ पत्रकार व देशबंधु पत्र के प्रधान संपादक श्री ललित सुरजन जी के निधन का दुःखद समाचार प्राप्त हुआ। पत्रकारिता के क्षेत्र में श्री सुरजन जी के योगदान को सदैव याद किया जाएगा। मैं ईश्वर से प्रार्थना करती हूं कि दिवंगत आत्मा को शांति एवं परिजनों को संबल प्रदान करें।’

वहीं ट्विटर के जरिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपने शोक संदेश में कहा, ‘ललित सुरजन जी के निधन की सूचना ने स्तब्ध कर दिया है। आज छत्तीसगढ़ ने अपना एक सपूत खो दिया। सांप्रदायिकता और कूपमंडूकता के खिलाफ देशबंधु के माध्यम से जो लो मायाराम सुरजन जी ने जलाई थी, उसे ललित भैया ने बखूबी आगे बढ़ाया।’

सीएम बघेल ने कहा कि पूरी ज़िंदगी उन्होंने मूल्यों को लेकर कोई समझौता नहीं किया। मैं ईश्वर से उनकी आत्मा की शांति और शोक संतप्त परिवार को संबल देने की प्रार्थना करता हूं। ललित भैया को मैं छात्र जीवन से ही जानता था और राजनीति में आने के बाद समय-समय पर मार्गदर्शन लेता रहता था।

एक अन्य ट्वीट में सीएम लिखते हैं, ‘वे राजनीति पर पैनी नजर रखते थे और लोकतंत्र में उनकी गहरी आस्था थी। नेहरू जी के प्रति उनकी अगाध श्रद्धा मुझे बहुत प्रेरित करती थी। उनके नेतृत्व में देशबंधु ने दर्जनों ऐसे पत्रकार दिए हैं, जिन पर छत्तीसगढ़ और मप्र दोनों को गर्व हो सकता है।’

ललित सुरजन देशबंधु पत्र समूह के प्रधान संपादक थे। वे 1961 से एक पत्रकार के रूप में कार्यरत थे। वे एक जाने माने कवि व लेखक थे। ललित सुरजन स्वयं को एक सामाजिक कार्यकर्ता मानते थे तथा साहित्य, शिक्षा, पर्यावरण, सांप्रदायिक सदभाव व विश्व शांति से सम्बंधित विविध कार्यों में उनकी गहरी संलग्नता थी।

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अपने सबस्क्राइबर्स के लिए BARC India ने किया ये बदलाव

नियामक संस्था ने इस बारे में अपने सबस्क्राइबर्स को एक ई-मेल भेजकर जानकारी दी है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 02 December, 2020
Last Modified:
Wednesday, 02 December, 2020
BARC India

देश में टेलिविजन दर्शकों की संख्या मापने वाली संस्था ‘ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल’ (BARC) इंडिया ने ‘इंप्रेशंस 000’ (Impressions'000) का नाम बदलकर अब ‘एवरेज मिनट ऑडियंस’ (AMA'000) कर दिया है।  

अपने सबस्क्राइबर्स को भेजे एक ई-मेल में इस नियामक संस्था ने कहा है, ‘एक औद्य़ोगिक इकाई होने के नाते इंडस्ट्री को वैश्विक मानकों से मेल खाने वाले डाटा उपलब्ध कराने के लिए इसे विकसित करना और लगातार काम करना अनिवार्य है।’

इंप्रेशंस को ऐसे व्यक्तियों की संख्या से परिभाषित किया जा सकता है जो औसत रूप से प्रति मिनट किसी कार्यक्रम को देखते हैं। इसे टीवीटी (TVT) या ‘एवरेज मिनट ऑडियंस’ के रूप में भी जाना जाता है। बार्क का कहना है, ‘सबस्क्राइबर्स एक दिसंबर को जारी इन परिवर्तनों को सभी लॉगइन और मॉड्यूल पोस्ट पर अपने वर्जन (versions) को अपग्रेड कर देख सकेंगे।’

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पत्रकारों के प्रमुख संगठन ने सुप्रीम कोर्ट से किया ये अनुरोध

बता दें कि हाथरस गैंगरेप और हत्या मामले को सकरने जाते समय पुलिस ने पांच अक्टूबर को मथुरा से केरल के पत्रकार सिद्दीकी कप्पन समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया था।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 02 December, 2020
Last Modified:
Wednesday, 02 December, 2020
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देश में पत्रकारों के प्रमुख संगठन केरल यूनियन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स (KUWJ) ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया है कि पत्रकार सिद्दीकी कप्पन की गैरकानूनी गिरफ्तारी और हिरासत के तथ्यों का पता लगाने के लिए शीर्ष अदालत के सेवानिवृत्त न्यायाधीश से स्वतंत्र जांच करायी जाए।

बता दें कि हाथरस गैंगरेप और हत्या मामले को कवर करने जाते समय पुलिस ने पांच अक्टूबर को मथुरा से केरल के पत्रकार सिद्दीकी कप्पन समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया था। इस महिला की बाद में मृत्यु हो गयी थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, केरल यूनियन आफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने जवाबी हलफनामे में यूपी पुलिस के इस दावे को ‘पूरी तरह गलत और झूठा’ बताया है कि सिद्दीकी कप्पन पापुलर फ्रंट ऑफ इंडिया का कार्यालय सचिव हैं। संगठन ने दावा किया है कि कप्पन सिर्फ पत्रकार के रूप में ही काम करते हैं।

इस संगठन ने अपले हलफनामे में कहा है, ‘आरोपी सिद्दीकी कप्पन ने अपने अधिवक्ता से विशेषरूप से शीर्ष अदालत से यह अनुरोध करने के लिये कहा है कि उसे खुद को निर्दोष बताने के लिये उसका नार्को टेस्ट या ब्रेन मैंपिंग टेस्ट या किसी भी तरह के दूसरे वैज्ञनिक परीक्षण कराने की अनुमति दी जाये।’

यह हलफनामा यूपी पुलिस के जवाब के प्रत्युत्तर में दाखिल किया गया है। यूपी पुलिस ने अपने हलफनामे में दावा किया था कि कप्पन पत्रकारिता की आड़ में जातीय कटुता और कानून व्यवस्था की स्थिति बिगाड़ने की योजना से हाथरस जा रहे थे। शीर्ष अदालत इस पत्रकार की गिरफ्तारी पर सवाल उठाते हुए उसकी जमानत पर रिहाई के लिये दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, केयूडब्लूजे ने आरोप लगाया है कि राज्य सरकार ने गैरकानूनी और अवैध हिरासत को न्यायोचित ठहराने और दुर्भावनापूर्ण कानूनी कार्यवाही को सही ठहराने के प्रयास में गुमराह करने और गलत तथ्यों के साथ हलफनामा दाखिल किया है। हलफनामे में कहा गया है कि कप्पन को गिरफ्तार करने के दावे के समर्थन में कोई सामग्री नही है।

कप्पन की कथित गैरकानूनी और अवैध हिरासत से रिहाई का अनुरोध करते हुये इस संगठन ने कहा है कि शीर्ष अदालत को अपने ही सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में इस मामले की न्यायिक जांच करानी चाहिए। हलफनामे में कहा गया है कि प्राथमिकी को पढ़ने मात्र से ही पता चलता है कि कथित अपराध के लिये जरूरी तथ्य इसमें नहीं हैं और आरोपी निर्दोष है।

हलफनामे में कहा गया है कि गिरफ्तारी की तारीख से 29 दिन तक आरोपी को उसके परिवार से दूर रखने की प्रतिवादी की कार्रवाई को किसी भी तरह से न्यायोचित नही ठहराया जा सकता।

सिद्दीकी कप्पन को पांच अक्टूर को हाथरस जाते समय रास्ते में गिरफ्तार किया गया था। वह हाथरस में सामूहिक बलात्कार की शिकार हुयी दलित युवती के घर जा रहे थे। इस युवती की बाद में सफदरजंग अस्पताल में मृत्यु हो गयी थी। केरल यूनियन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स ने इस पत्रकार की गिरफ्तारी को शीर्ष अदालत में चुनौती दे रखी है। मथुरा पुलिस ने इस संबंध में दावा किया था कि उसने पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया से संबंध रखने वाले चार व्यक्तियों को मथुरा में गिरफ्तार किया है, जिनके नाम मल्लापुरम निवासी सिद्दीकी, मुजफ्फरनगर निवासी अतीकुर रहमान, बहराइच निवासी मसूद अहमद और रामपुर निवासी आलम हैं। इस मामले में पुलिस ने पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया या पीएफआई से कथित रूप से संबंध रखने के आरोप में चार व्यक्तियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता के प्रावधानों के साथ ही गैर कानूनी गतिविधियां रोकथाम कानून (यूएपीए) के तहत प्राथमिकी दर्ज की है।

पीएफआई पर पहले भी इस साल के शुरू में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ देशव्यापी विरोध के लिये धन मुहैया कराने के आरोप लग चुके हैं।

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