Network18 में बिजनेस न्यूज की COO स्मृति मेहरा का हुआ प्रमोशन, संभालेंगी ये पद

नेटवर्क18 (Network18) ने वर्तमान में बिजनेस न्यूज की सीओओ स्मृति मेहरा को प्रमोट किया है

Last Modified:
Friday, 16 October, 2020
Smriti

नेटवर्क18 (Network18) ने वर्तमान में बिजनेस न्यूज की सीओओ स्मृति मेहरा को प्रमोट किया है। उन्हें अब नेटवर्क18 में बिजनेस न्यूज क्लस्टर का सीईओ बना दिया गया है।

वे अब क्लस्टर की जिम्मेदारी संभालेंगी और ‘सीएनबीसी-टीवी18’ (CNBC-TV18), ‘सीएनबीसी आवाज’ (CNBC Awaaz) और ‘सीएनबीसी बाजार’ (CNBC Bajar) को मजबूती देंगी।

अपनी नई भूमिका को लेकर स्मृति मेहरा ने कहा, ‘नेटवर्क18 में मेरा सफर काफी यादगार और प्रेरणादायक रहा है और मैं नई चुनौतियों को लेकर काफी उत्साहित हूं क्योंकि मेरे साथियों और मेंटर्स के सहयोग से मैं अपने और नेटवर्क के लिए एक सफल मार्ग प्रशस्त करने में सक्षम रही हूं। बेहद दिलचस्प और बदलाव के इस दौर में मुझे नेटवर्क को आगे ले जाने की उम्मीद है।  

नेटवर्क18 में अपनी पिछली भूमिका में स्मृति मेहरा ने campaign sponsorships और traditional FCT advertising से जुड़ीं कई महत्वपूर्ण डील्स को अंजाम तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई है। उन्हें ईवेंट-आधारित बिजनेस को वर्चुअल प्लेटफॉर्म पर संचालित किए जाने के सफलतापूर्वक बदलाव का श्रेय दिया जाता है। स्मृति मेहरा नेटवर्क18 में ब्रॉडकास्ट न्यूज के सीईओ अविनाश कौल को रिपोर्ट करेंगी।

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ZEE में हुए बड़े बदलाव, राहुल जौहरी को मिली ये जिम्मेदारी

जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (ZEE) ने बुधवार को ‘ZEE 4.0 स्ट्रेटजी’ के अनुरूप संगठन के रणनीतिक पुनर्गठन की घोषणा की

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 21 October, 2020
Last Modified:
Wednesday, 21 October, 2020
Zee

जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (ZEE) ने बुधवार को ‘ZEE 4.0 स्ट्रेटजी’ के अनुरूप संगठन के रणनीतिक पुनर्गठन की घोषणा की।

इस पुनर्गठन के तहत पुनीत मिश्रा कंटेंट व इंटरनेशनल मार्केट्स के प्रेजिडेंट की भूमिका निभाएंगे। वहीं अमित गोयनका डिजिटल बिजनेस एंड प्लेटफॉर्म्स के प्रेजिडेंट की जिम्मेदारी संभालेंगे। तरुण कात्याल जो ZEE5 इंडिया के बिजनेस का नेतृत्व कर रहे हैं, वे अमित गोयनका को रिपोर्ट करते रहेंगे।

शरीक पटेल इंटीग्रेटेड मूवीज बिजनेस का काम देखेंगे और अनुराग बेदी म्यूजिक बिजनेस संभालते रहेंगे।

इसके अलावा राहुल जौहरी को प्रेजिडेंट (बिजनेस- साउथ एशिया) के तौर पर नियुक्त किया गया है और वे इंटीग्रेटेड रेवेन्यू और मोनेटाइजिंग टीम का नेतृत्व करेंगे। जौहरी इससे पहले भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के पहले सीईओ थे और करीब चार साल तक उन्होंने इस पद पर अपनी जिम्मेदारी निभाई थी। बीसीसीआई से पहले वे करीब 15 साल तक डिस्कवरी नेटवर्क्स एशिया पैसिफिक में एग्जिक्यूटिव वाइस प्रेजिडेंट और जनरल मैनेजर (दक्षिण एशिया) के पद पर कार्यरत थे। करीब 15 साल तक डिस्कवरी से जुड़े रहने के बाद जौहरी ने बीसीसीआई के सीईओ का पदभार संभाला था।

पुनीत मिश्रा, अमित गोयनका, शरीक पटेल, अनुराग बेदी और राहुल जौहरी कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर और चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर पुनीत गोयनका को रिपोर्ट करेंगे। कंपनी में किए गए ये बदलाव तुरंत प्रभाव से लागू हो गए हैं।

 

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अब इस तरह का कंटेंट प्रोडक्शन हाउसेज से सीधे तैयार करा सकेगा प्रसार भारती

15 अक्टूबर को हुई प्रसार भारती बोर्ड की 163वीं बैठक में इस संबंध में लिया गया निर्णय

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 21 October, 2020
Last Modified:
Wednesday, 21 October, 2020
Prasar Bharati

नेशनल पब्लिक ब्रॉडकास्टर ‘प्रसार भारती’  (Prasar Bharati) प्रसार भारती अधिनियम, 1990 के विभिन्न प्रावधानों के अनुरूप अब रणनीतिक, राष्ट्रीय व अन्य प्रतिष्ठित महत्व की परियोजनाओं के लिए जाने-माने प्रॉडक्शन हाउसेज, क्रिएटिव डायरेक्टर्स और प्रड्यूसर्स को सीधे कंटेंट का प्रोडक्शन प्रदान कर सकता है।

प्रसार भारती बोर्ड ने इसके लिए दिशा-निर्देशों को अपनी मंजूरी दे दी है। प्रसार भारती बोर्ड की 15 अक्टूबर को हुई 163वीं बोर्ड बैठक में ‘Policy Guidelines for Commissioning of Programmes under DAP (Direct Assignment Process)’ को मंजूरी दे दी गई है। ये गाइडलाइंस सभी पूर्व और वर्तमान नीतियों में ‘DAP’  के लिए निर्धारित प्रक्रियाओं में लागू होंगी।

इन गाइडलाइंस के अनुसार प्रसार भारती प्रबंधन सीधे असाइमेंट के लिए समय-समय पर रणनीतिक/राष्ट्रीय व प्रतिष्ठित महत्व के टॉपिक्स/सब्जेक्ट/थीम्स को शॉर्टलिस्ट करेगा। जिन प्रतिष्ठित प्रोडक्शन हाउसेज, क्रिएटिव डायरेक्टर्स और प्रड्यूसर्स को डाइरेक्ट असाइमेंट दिया जाना है, उनकी पहचान प्रसार भारती प्रबंधन करेगा। ‘DAP’ प्रक्रिया शुरू करने से पहले शॉर्टलिस्ट किए गए सभी नामों के बारे में संबंधित बोर्ड समिति को सूचित किया जाएगा।

प्रतिष्ठित प्रोडक्शन हाउसेज, क्रिएटिव डायरेक्टर्स और प्रड्यूसर्स की ओर से रणनीतिक/राष्ट्रीय व प्रतिष्ठित महत्व के कंटेंट को तैयार करने के लिए मिलने वाले स्वत:प्रस्तावों को भी पहले संबंधित बोर्ड कमेटी के सामने शॉर्टलिस्टिंग के लिए रखना होगा। इसके बाद मूल्यांकन के लिए उन्हें ‘DAP’ की कमेटी के सामने रखा जाएगा।

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बॉम्बे हाई कोर्ट ने सुनीं TRAI-ब्रॉडकास्टर्स की दलीलें, दिया ये आदेश

बॉम्बे उच्च न्यायलय में चल रही है सुनवाई। कोर्ट ने फिलहाल अपना फैसला सुरक्षित रखा है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 21 October, 2020
Last Modified:
Wednesday, 21 October, 2020
TRAI

बॉम्बे हाई कोर्ट का कहना है कि वर्ष 2020 के रेगुलेटरी फ्रेमवर्क (नियामक ढांचे) को लागू न किए जाने को लेकर ‘भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण’ (TRAI) ब्रॉडकास्टर्स के खिलाफ जबरन कोई कठोर कदम नहीं उठा सकता है।

सूत्रों के अनुसार, इस मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने हाल ही में दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं। बताया जाता है कि कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रखा है। इसके साथ ही कहा गया है कि जब तक फैसला नहीं आ जाता, ट्राई इस मामले में ब्रॉडकास्टर्स के खिलाफ कोई कड़ी कार्रवाई नहीं कर सकता है।

इससे पहले एक सुनवाई में बॉम्बे हाई कोर्ट के जस्टिस ए.ए. सैयद और जस्टिस अनुजा प्रभुदेसाई की डिवीजन बेंच ने ट्राई से कई सवाल पूछे थे। बता दें कि तमाम ब्रॉडकास्टर्स और आईबीएफ ने ट्राई के नए टैरिफ ऑर्डर (NTO-2) को बॉम्बे हाई कोर्ट में चुनौती दी है। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद हाई कोर्ट ने इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रखा है।

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पत्रकारों की सुरक्षा के लिए इस राज्य में जल्द लागू होगा कानून

लंबे समय से चली आ रही पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करने की मांग पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मंगलवार को झारखंड जर्नलिस्ट एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल को यह आश्वासन दिया है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 21 October, 2020
Last Modified:
Wednesday, 21 October, 2020
Journalist Protection Act

झारखंड में जल्द ‘पत्रकार सुरक्षा कानून’ (Journalist Protection Act) लागू होगा। लंबे समय से चली आ रही इस मांग पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मंगलवार को झारखंड जर्नलिस्ट एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल को यह आश्वासन दिया है। मुख्यमंत्री का कहना है कि राज्य में पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करने के लिए कानूनी पहलुओं पर विशेषज्ञों की राय ली जाएगी। उसके बाद इस पर जल्द निर्णय लिया जाएगा। ।

मुख्यमंत्री से बातचीत के दौरान एसोसिएशन ने दिवंगत पत्रकारों के परिजनों को मुआवजा देने, गंभीर रूप से बीमार पत्रकारों को आर्थिक सहायता देने और पत्रकार पेंशन योजना में सुधार करने की मांग की। इस पर मुख्यमंत्री ने जरूरतमंद सभी पत्रकारों को पत्रकार पेंशन योजना का लाभ देने, इसकी खामियों में सुधार करने की बात कही। उन्होंने गंभीर रूप से बीमार 10 पत्रकारों को सरकार की ओर से आर्थिक सहायता देने का निर्देश भी दिया।

मुख्यमंत्री से मुलाकात करने वाले प्रतिनिधिमंडल में भारतीय श्रमजीवी पत्रकार संघ के राष्ट्रीय महासचिव शाहनवाज हसन, झारखंड जर्नलिस्ट एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष देवेंद्र सिंह, रांची जिला अध्यक्ष आलोक सिन्हा और पत्रकार नईमुल्ला खान आदि शामिल थे।

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यूपी सरकार की सिफारिश पर सीबीआई ने संभाला टीआरपी घोटाले की जांच का जिम्मा

टेलीविजन इंडस्ट्री को हिलाकर रख देने वाले रेटिंग घोटाले की जांच का जिम्मा अब सीबीआई (CBI) ने अपने हाथ में ले लिया है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 21 October, 2020
Last Modified:
Wednesday, 21 October, 2020
CBI

टेलीविजन इंडस्ट्री को हिलाकर रख देने वाले रेटिंग घोटाले की जांच का जिम्मा अब सीबीआई (CBI) ने अपने हाथ में ले लिया है और यूपी में की गई एक शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया है।

इस मामले की जांच में सीबीआई की एंट्री तब हुई, जब मामले की जांच मुंबई पुलिस कर रही है, जिसने रिपब्लिक टीवी सहित तीन चैनलों पर टीआरपी में हेरफेर करने का आरोप लगाया है।

केंद्रीय जांच एजेंसी ने उत्तर प्रदेश सरकार की सिफारिश पर लखनऊ पुलिस से जांच को अपने हाथ मे लिया और वह भी तब जब यूपी में इससे संबंधित एक मामला दर्ज किया गया है। लखनऊ पुलिस ने रविवार को विज्ञापन कंपनी ‘गोल्डन रैबिट कम्युनिकेशंस’ कंपनी के सीईओ कमल शर्मा की शिकायत के आधार पर एक प्राथमिकी दर्ज की। शिकायत दर्ज होने के बाद, योगी आदित्यनाथ सरकार ने सीबीआई मामले की सिफारिश की। 24 घंटे के भीतर केंद्र सरकार ने सीबीआई जांच के लिए यूपी सरकार के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी।

वहीं, रिपब्लिक टीवी ने भी मामले में सीबीआई जांच की मांग की थी। चैनल का कहना था कि सुशांत सिंह राजपूत केस में आवाज उठाने के लिए मुंबई पुलिस उनके पीछे पड़ी है, क्योंकि उन्होंने इस मामले में कवरेज के दौरान मुंबई पुलिस की जांच पर सवाल उठाए थे।

खबरों के मुताबिक, सीबीआई की एक टीम मामले से जुड़े दस्तावेज जुटाने के लिए लखनऊ पहुंची है। एजेंसी ने अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है।

सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले के बाद से अब यह दूसरी बार है कि किसी जांच ने मुंबई पुलिस से भाजपा शासित राज्य और फिर सीबीआई तक का रास्ता बनाया है।

इस महीने की शुरुआत में मुंबई पुलिस ने कहा था कि अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में जांच के दौरान न्यूज में हेरफेर और गलत टिप्पणियों के बड़े पैमाने पर विश्लेषण के दौरान टीआरपी रेटिंग घोटाले का खुलासा हुआ था।

मुंबई के पुलिस कमिश्नर परम बीर सिंह ने कहा कि चुनिंदा घरों में रेटिंग मीटर लगाने वाली एजेंसी हंसा के पूर्व कर्मचारियों ने गोपनीय डेटा को तीन चैनलों के साथ साझा किया था। हंसा के डेटा का उपयोग BARC (ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल) द्वारा किया जाता है, जो देश भर के चैनलों के लिए साप्ताहिक रेटिंग के आंकड़े जारी करता है।

मुंबई के पुलिस कमिश्नर परम बीर सिंह के मुताबिक, सिटी पुलिस टीआरपी के हेरफेर से जुड़े घोटाले की जांच कर रही है। पुलिस ने आरोप लगाया कि आरोपी एक विशेष चैनल को चलाने के लिए घरों में रिश्वत दे रहे थे। मामले में अब तक तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें से दो मराठी चैनल फक्त मराठी और बॉक्स सिनेमा के मालिक हैं, जबकि तीसरे आरोपी को उत्तर प्रदेश से गिरफ्तार किया गया है।

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सुधीर चौधरी के इन सवालों पर अमित शाह ने कुछ यूं रखी ‘मन की बात’

जी न्यूज के एडिटर-इन-चीफ सुधीर चौधरी से बातचीत में गृहमंत्री अमित शाह ने बिहार चुनाव में बीजेपी की स्थिति, सुशांत केस से लेकर टीआरपी घोटाले समेत तमाम मुद्दों पर चर्चा की

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 20 October, 2020
Last Modified:
Tuesday, 20 October, 2020
Sudhir Chaudhary Amit Shah

सुशांत सिंह राजपूत केस की रिपोर्टिंग के दौरान ही टीआरपी घोटाला सामने आने के बाद मीडिया की भूमिका को लेकर उठे सवाल के बारे में गृहमंत्री अमित शाह का कहना है कि व्यवस्था सुधारने की जरूरत है। राजनीति नहीं होनी चाहिए। ‘जी न्यूज’ (Zee News) के एडिटर-इन-चीफ सुधीर चौधरी के साथ एक बातचीत के दौरान गृहमंत्री ने बिहार चुनाव, कोरोना काल में चीन से तनातनी और टीआरपी घोटाले की आंच में मीडिया की विश्‍वसनीयता समेत तमाम पहलुओं पर अपनी बात रखी।

क्या मीडिया विवाद पर कानून का पालन होना चाहिए था? इस बारे में अमित शाह का कहना था, 'मीडिया संस्थाओं और अदालत को इसे ठीक करना चाहिए'। इन मुद्दों पर मीडिया की आलोचना के बारे में अमित शाह का कहना था कि मीडिया बैलेंस रिपोर्टिंग करे, खबर मार्केटिंग की चीज नहीं है।

बातचीत के दौरान राष्‍ट्रीय सुरक्षा के सवाल पर अमित शाह का कहना था कि भारत की एक इंच की भूमि पर कोई अतिक्रमण नहीं कर पाएगा। ये भारत सरकार का अटल निर्णय है। कोविड-19 से मुकाबले को लेकर पूछे गए एक सवाल के जवाब में अमित शाह ने कहा, 'देखिए, बहुत समय से पढ़ाई-लिखाई का समय नहीं मिला था। डेढ़ महीने में मुझे पढ़ाई-लिखाई का समय मिल गया। दूसरी बात, कई सारी चीज़ों को पीछे मुड़कर देखने का, सोचने का समय भी मिला। कई गलतियां मुझसे स्वयं से कहां हुईं, क्या हुईं, इसके बारे में भी सोचा और आगे वो गलती न हों, इसके लिए अपने आपको तैयार भी किया। विशेषकर पढ़ाई-लिखाई पर मेरा ज्यादा ध्यान रहा।

बिहार में सुशांत सिंह राजपूत के चुनावी मुद्दा बन जाने के बारे में अमित शाह का कहना था, 'हो सकता है कि कुछ लोग इस मुद्दे पर भी वोट डालें। मगर दो चीजें एक साथ हुईं। इतना विवाद हुआ कि मुझे आश्चर्य इस बात का था कि महाराष्ट्र सरकार ने क्यों सीबीआई को केस पहले नहीं दे दिया। सुप्रीम कोर्ट को दखल देना पड़ा। पहले से ही सीबीआई को केस दे देते, परिवार की मांग है, तो बात खत्म हो जाती। खैर अब मीडिया ने  भी उसको ज्‍यादा तूल भी दिया'।

इस पूरी बातचीत को आप यहां देख सकते हैं—

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मातृभूमि ग्रुप में नवीन श्रीनिवासन का कद बढ़ा, मिली नई जिम्मेदारी

मातृभूमि (Mathrubhumi) ग्रुप में नवीन श्रीनिवासन को प्रमोट किए जाने की खबर सामने आई है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 20 October, 2020
Last Modified:
Tuesday, 20 October, 2020
Naveen

मातृभूमि (Mathrubhumi) ग्रुप में नवीन श्रीनिवासन को प्रमोट किए जाने की खबर सामने आई है। उन्हें मीडिया सॉल्यूशंस टीआडी (टेलीविजन, रेडियो और डिजिटल) का हेड बनाया गया है। अब मातृभूमि न्यूज टेलीविजन चैनल (Mathrubhumi News Television Channel), कप्पा टीवी (Kappa TV), क्लब एफएम (Club FM) और मातृभूमि डिजिटल (Mathrubhumi Digital) के सेल्स व मार्केटिंग कार्यों की जिम्मेदारी उन्हीं के कंधों पर होगी।

अपनी नई भूमिका पर नवीन श्रीनिवासन ने कहा कि सही कहूं तो मैं इस जिम्मेदारी को लेने के लिए काफी उत्साहित हूं। परिस्थितियां वैसे तो चुनौतीपूर्ण है, लेकिन हमारे पास एक बेहतरीन टीम है जो कि इसका मुकाबला करने के लिए सक्षम है। इसके अलावा, एक मीडिया समूह के तौर पर हम हमेशा केरल के सामाजिक माहौल के साथ गहराई से जुड़े रहे हैं और मलयाली लोगों ने हम पर पूरा भरोसा जताया है, जिसका हमें काफी फायदा मिला है।

अलग-अलग इंडस्ट्रीज और डोमेन्स में काम करने का अनुभव रखने वाले नवीन आईआईएम लखनऊ के छात्र रह चुके हैं। इससे पहले वे दैनिक ‘मातृभूमि’ के लिए क्लस्टर हेड सेल्स की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। उन्हें कंपनी के लिए नए इनोवेटिव आइडियाज और सेल्स संचालित गतिविधियां बनाने का श्रेय दिया जाता है। फिलहाल वे मातृभूमि ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर एम.वी. श्रेयम्स कुमार को रिपोर्ट करेंगे।

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ABP न्यूज की टीम पर हमला, एंकर अखिलेश आनंद की गाड़ी पर फेंके गए पत्थर

सोमवार को एबीपी न्यूज के खास कार्यक्रम 'कौन बनेगा मुख्यमंत्री' की टीम अरवल पहुंची, जहां कार्यक्रम के दौरान ही कुछ असामाजिक तत्वों ने एबीपी न्यूज टीम पर हमला कर दिया

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 20 October, 2020
Last Modified:
Tuesday, 20 October, 2020
ABP News

बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Elections 2020) को लेकर चुनावी मैदान में उतरे सभी राजनीतिक दल राज्य की सत्ता तक पहुंचने के लिए पुरजोर कोशिश में जुटे हुए हैं। ऐसे में मीडिया भी बिहार चुनाव से जुड़ी हर छोटी-बड़ी खबरें दर्शकों और पाठकों तक पहुंचाने के लिए ग्राउंड रिपोर्टिंग कर रही हैं। लिहाजा इसी सिलसिले में सोमवार को एबीपी न्यूज के खास कार्यक्रम 'कौन बनेगा मुख्यमंत्री' की टीम अरवल पहुंची, जहां कार्यक्रम के दौरान ही कुछ असामाजिक तत्वों ने एबीपी न्यूज टीम पर हमला कर दिया और एंकर अखिलेश आनंद को निशाना बनाने की कोशिश की।

एबीपी न्यूज के मुताबिक, कार्यक्रम में बीजेपी, जेडीयू, आरजेडी समेत अन्य दलों के कार्यक्रताओं का जमावड़ा था, काफी गहमागहमी थी। इसी दौरान राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता अपने-अपने नेताओं के समर्थन में नारेबाजी करने लगे। तभी कुछ लोगों ने हाथापाई करने की कोशिश की। इस बीच कुछ लोग अखिलेश आनंद को भी निशाना बनाने की कोशिश की और हमला करने के लिए उनकी तरफ दौड़ पड़े। हमले से बचने के लिए जैसे-तैसे एंकर अखिलेश आनंद अपनी टीम के साथ गाड़ी की तरफ भागे। इसके बाद असमाजिक तत्वों ने गाड़ी पर पत्थड़ फेंके और हाथों से शीशा तोड़ने की कोशिश की।

पूरी घटना पर अखिलेश आनंद का कहना है कि एक निष्पक्ष पत्रकार होने के नाते सच्चाई से लोगों से रूबरू कराते रहेंगे। चाहे लोगों को बुरा ही क्यों न लगे। उन्होंने ट्वीट किया, ‘आज बिहार के अरवल में कौन बनेगा मुख्यमंत्री कार्यक्रम के दौरान मुझ पर हमला हुआ। बचने के लिए मैं कार के अंदर जाकर बैठ गया तो मेरा पीछा कर पत्थर बरसाये गए। गुंडे किस पार्टी के थे, मैं जानता हूं। भगवान उन्हें सद्बुद्धि दें। मैं सच बोलता रहूंगा,चाहे किसी को बुरा लगे या भला..

 

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जमानती बॉन्ड न भर पाने के कारण पत्रकार समेत चार लोगों को न्यायिक हिरासत में भेजा

पिछले दिनों हाथरस जाते समय केरल के पत्रकार सिद्दीकी कप्पन और तीन अन्य लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया था

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 20 October, 2020
Last Modified:
Tuesday, 20 October, 2020
Detained

पिछले दिनों हाथरस जाते समय गिरफ्तार किए गए केरल के पत्रकार सिद्दीकी कप्पन और तीन अन्य लोगों को जमानती बॉन्ड न भर पाने के कारण 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। इन लोगों की गिरफ्तारी पिछले दिनों उस दलित महिला के हाथरस स्थित घर जाने के दौरान हुई थी, जिसकी कथित सामूहिक दुष्कर्म के बाद पिछले दिनों दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में मौत हो गई थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार उत्तर प्रदेश में मथुरा के एसडीएम ने सोमवार को चारों को समाज में शांति कायम रखने के लिए बॉन्ड भरने का आदेश दिया। लेकिन रिहाई के लिए एक-एक लाख रुपये के जमानती मुचलके नहीं देने तक, मथुरा में मांट के उप मंडलीय दंडाधिकारी (एसडीएम) सुरेश कुमार ने सिद्दीकी कप्पन और तीन अन्य को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

यह भी पढ़ें: हाथरस जाते समय पत्रकार अरेस्ट, रिहाई के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला

रिपोर्ट्स के अनुसार, चारों को वीडियो लिंक के जरिये मथुरा जेल से एसडीएम के समक्ष पेश किया गया था। आरोपित कप्पन, अतीक-उर-रहमान, आलम और मसूद पर कथित कट्टरपंथी समूह पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया और उससे संबद्ध संगठनों से संबंध रखने का आरोप है। उनकी राजद्रोह और आतंकी मामले में 14 दिन की न्यायिक हिरासत मंगलवार को खत्म हो रही थी और उन्हें तब न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने हिरासत बढ़ाने के लिए पेश किया जाना था।

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HC ने MIB से पूछा, मीडिया ट्रायल से संबंधित शिकायतों पर क्यों नहीं लिया गया एक्शन?

बॉम्बे हाईकोर्ट ने सूचना-प्रसारण मंत्रालय से इस बात की जानकारी मांगी है कि वह बॉलीवुड अभिनेता सुशांत की मौत के मामले में मीडिया ट्रायल से संबंधित शिकायतों पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं शुरू कर पायी है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 20 October, 2020
Last Modified:
Tuesday, 20 October, 2020
Mumbai High Court

बॉम्बे हाईकोर्ट में अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत से जुड़ी न्यूज कवरेज को लेकर दाखिल कई जनहित याचिकाओं की सुनवाई चल रही है। इस मामले में कोर्ट ने सूचना-प्रसारण मंत्रालय (MIB) से इस बात की जानकारी मांगी है कि वह बॉलीवुड अभिनेता सुशांत की मौत के मामले में मीडिया ट्रायल से संबंधित शिकायतों पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं शुरू कर पायी है? साथ ही यह भी पूछा कि न्यूज चैनल्स द्वारा प्रसारित विषयवस्तु को नियंत्रित करने के लिए न्यूज ब्रॉडकास्टर्स स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी (एनबीएसए) जैसी निजी संस्थाओं के दिशानिर्देशों पर अपनी मुहर लगाकर उन्हें लागू क्यों नहीं कर पाई है?

मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति जी एस कुलकर्णी की पीठ ने कहा कि एनबीएसए की विस्तृत आचार संहिता और दिशानिर्देश है। पीठ ने कहा कि इनका सभी सदस्य चैनलों से पालन करने की अपेक्षा की जाती है और उसे कुछ अधिकार दिये जा सकते हैं और सरकार द्वारा लागू करने योग्य बनाया जा सकता है। पीठ ने कहा, ‘क्या हम सरकार से यह अनुरोध नहीं कर सकते कि दिशानिर्देश बने हुए हैं तो उन दिशानिर्देशों पर मुहर लगाई जाए और उन्हें लागू किया जा सके?’

वहीं सुनवाई के दौरान, एनबीए और एनबीएसए का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ वकील अरविंद दातार और नीला गोखले ने बताया कि चैनल्स के लिए स्व-नियामक तंत्र लगन से काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि निजी संस्था ने न्यूज चैनल्स के खिलाफ प्राप्त अनेक शिकायतों पर कार्रवाई की है।

वकीलों ने कहा कि एनबीएसए ने पहले कुछ न्यूज चैनल्स पर दिशानिर्देशों का उल्लंघन करने वाली सामग्री के प्रसारण पर अधिकतम एक लाख रुपए का जुर्माना लगाया था। दातार ने कहा कि अन्य सभी चैनल्स ने माफी मांगी है और जुर्माना अदा किया है, वहीं एक एनबीए से अलग हो गया।

दातार ने कहा कि एनबीएसए ने उच्चतम न्यायालय के पिछले फैसलों के आधार पर समाचार प्रसारणकर्ताओं के लिए स्व-नियमन की प्रणाली का समर्थन किया है। एनबीएसए एक स्वतंत्र इकाई है जिसका गठन एनबीए ने प्रसारणकर्ताओं के बारे में शिकायतों पर विचार करने और निर्णय लेने के लिए किया था।

इसके बाद दातार की दलीलों पर पीठ ने पूछा कि अगर स्व-नियामक प्रणाली विफल हो गई और कोई एक चैनल दिशानिर्देशों का पालन करने से इनकार कर दे, तो क्या होगा? एक उदाहरण के जरिए पीठ ने कहा, ‘जब डॉक्टरों को रियायती दरों पर पीजी कोर्स में प्रवेश दिया जाता है, तो उन्हें ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा करनी होती है। यदि वे उस शर्त को पूरा नहीं करते हैं, तो डॉक्टरों को उनका प्रमाण पत्र नहीं दिया जाता है। यदि वे शर्त से इनकार करते हैं, तो उन पर जुर्माना लगाया जाता है।’

अदालत ने कहा, ‘आपके पास इस तरह के दिशानिर्देश क्यों नहीं हो सकते? इन दिशानिर्देशों में इस तरह की शक्ति होनी चाहिये।’

इस पर दातार ने कहा कि अगर किसी चैनल ने एनबीएसए के दिशानिर्देशों का पालन करने से इनकार कर दिया या अगर उसने जुर्माना देने से इनकार कर दिया, तो सूचना-प्रसारण मंत्रालय दखल दे सकता है और कार्रवाई कर सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि स्व-नियमन विफल हो गया, तो अदालत को भी कदम उठाने की पर्याप्त शक्ति है।

हालांकि, उन्होंने कहा कि एनबीएसए मीडिया को विनियमित करने के लिए किसी नए वैधानिक निकाय के पक्ष में नहीं है।

अदालत जनहित याचिकाओं पर अंतिम सुनवाई कर रही है। ये याचिकाएं कई पूर्व आईपीएस अधिकारियों समेत नामी हस्तियों की तरफ से दाखिल की गई हैं, जिसमें अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले के मीडिया ट्रॉयल पर रोक लगाने की मांग की गई है। हाई कोर्ट अब बुधवार को इस मामले की सुनवाई करेगा।

पीठ ने अतिरिक्त सॉलिसीटर जनरल अनिल सिंह को अगली सुनवाई पर अदालत को सूचित करने का निर्देश दिया कि सूचना-प्रसारण मंत्रालय मिली शिकायतों को आगे एनबीएसए के पास क्यों बढ़ा रहा है? पीठ ने पूछा, ‘क्या ऐसे उदाहरण हैं, जहां चैनल्स को मंत्रालय द्वारा प्रतिबंधित किया गया है?’

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