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NBDA ने टीवी रेटिंग जारी करने वाली संस्था BARC को दिए ये सुझाव
न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एंड डिजिटल एसोसिएशन (NBDA) ने ब्रॉडकास्टर्स ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (बार्क) इंडिया को यह सुझाव दिया है
समाचार4मीडिया ब्यूरो 3 years ago
न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एंड डिजिटल एसोसिएशन (NBDA) ने ब्रॉडकास्टर्स ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (बार्क) इंडिया को यह सुझाव दिया है कि उसे टीवी + डिजिटल मीजरमेंट सिस्टम शुरू करने से पहले मौजूदा टीवी व्युरअरशिप मीजरमेंट सिस्टम में सुधार करना चाहिए।
एनबीडीए ने पिछले साल सूचना-प्रसारण मंत्रालय (एमआईबी) को यह सुझाव दिया था कि टेलीविजन रेटिंग का पता लगाने के लिए मौजूदा सैम्पल साइज को बढ़ाया जाना चाहिए, जोकि 44,000 है, ताकि डेटा और अधिक अच्छा और विश्वसनीय हो जाए। वित्तीय वर्ष 2022 के लिए अपनी वार्षिक रिपोर्ट में एमआईबी ने एनबीडीए के सुझावों की मुख्य विशेषताओं का उल्लेख किया था।
बता दें कि नवंबर 2021 में, एमआईबी ने 'भारत में टीवी रेटिंग एजेंसियों पर दिशानिर्देश’ की समीक्षा करने वाली रिपोर्ट पर एनबीडीए सहित कई अन्य उद्योग निकायों से सुझाव/टिप्पणियां मांगीं थी। एमआईबी ने मौजूदा टीवी रेटिंग प्रणाली में किस तरह के सुधार किए जाएं, इस पर सुझाव देने के लिए प्रसार भारती के पूर्व सीईओ शशि शेखर की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया था। समिति ने जनवरी 2021 में अपनी रिपोर्ट सौंप दी थी।
गौरतलब है कि इंडियन सोसाइटी ऑफ एडवर्टाइजर्स (आईएसए) के अध्यक्ष सुनील कटारिया ने हाल ही में कहा था कि एसोसिएशन ‘यूनिफाइड क्रॉस-मीडिया मीजरमेंट मेथड’ को लाने पर बार्क के साथ मिलकर काम कर रहा है, जिसकी 2023 की पहली छमाही में शुरू होने की उम्मीद है। बता दें कि आईएसए बार्क में एक स्टेक होल्डर है।
एनबीडीए ने यह भी सुझाव दिया कि बार्क के बोर्ड स्तर पर मजबूत कॉर्पोरेट गवर्नेंस की जरूरत है। एनबीडीए ने सुझाव दिया कि बार्क की तकनीकी और निगरानी समितियों में न केवल स्वतंत्र सदस्य शामिल होने चाहिए, बल्कि सभी स्टेकहोल्डर्स के सदस्यों को भी शामिल किया जाना चाहिए, क्योंकि स्टेकहोल्डर्स भी बार्क से पारदर्शिता और सही डेटा की उम्मीद कर रहे हैं और इसे लेकर वे भी चितिंत हैं।
टीवी न्यूज निकाय ने यह भी कहा कि कुछ ऐसा हो कि उसे भी बार्क बोर्ड के समझ अपनी बात रखने का मौका मिलना चाहिए, चूंकि 'न्यूज' एक बहुत ही महत्वपूर्ण जॉनर है, लिहाजा एनबीडीए को बोर्ड में प्रतिनिधित्व करने का मौका मिलना चाहिए, ताकि वह न्यूज चैनलों की रेटिंग से संबंधित किसी भी मुद्दे पर बार्क को महत्वपूर्ण जानकारी दे सके।
एनबीडीए ने रिटर्न पाथ डेटा (आरपीडी) प्रक्रिया के उपयोग को लेकर जारी की गई सिफारिशों का समर्थन किया, जबकि आरपीडी को कैसे लागू किया जाएगा, इस बारे में अपनी आशंका व्यक्त की है। एनबीडीए ने सुझाव दिया कि आरपीडी को बहुत सारी खामियों से भरे पैनल डेटा को सीधे तौर पर एक्सट्रप्लेशन नहीं करना चाहिए।
एनबीडीए ने अपने सुझाव में कहा कि इसके बजाय दो इंडिपेंडेंट स्ट्रीम शुरू की जानी चाहिए और आरपीडी को सही समय पर लागू किया जाना चाहिए। एनबीडीए ने यह भी सुझाव दिया कि लैंडिंग यूजर्स बिहेवियर और ड्यूल एलसीएन बिहेवियर के लिए एक पैटर्न रिकॉगनाजेशन को भी जोड़ा जाना चाहिए।
एनबीडीए का यह भी विचार था कि जब तक रिसर्च डिजाइन को सरल नहीं बनाया जाता, तब तक व्युअरशिप डेटा की क्राउडसोर्सिंग भी आरपीडी प्रक्रिया जैसी ही समस्याओं से जूझती रहेगी, जिसमें लागत, अशुद्धि, डेटा के हेरफेर की संभावना और डेटा की गोपनीयता की चिंता बनी रहती है। इसलिए, ऑडियंस व्युरशिप सिस्टम पर काम करने के लिए पहला फोकस रिसर्च डिजाइन और इनपुट स्तर के डेटा के संग्रह पर होना चाहिए।
एसोसिएशन ने सुझाव दिया कि बार्क को ड्यूल एलसीएन (LCN), लैंडिंग पेज या किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ जैसे अनुचित तरीकों से बनाए गए स्पाइक्स को हटाने के लिए एक मैकेनिज्म (तंत्र) विकसित करना चाहिए। साथ ही यह भी कहा गया है कि बार्क के निवेश वॉटरमार्क के दायरे से बाहर होने चाहिए। वास्तव में ड्यूल और लैंडिंग फीड खोजने का प्रयास करना चाहिए, क्योंकि इस तरह के नए तरीके को प्रोत्साहित करने और इस क्षेत्र में स्टार्ट-अप को विकसित करने की जरूरत है।
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