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MeitY की डिजिटल रफ्तार पर ब्रेक, संसदीय समिति ने उठाए सवाल
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के लिए वित्त वर्ष 2024-25 के बजट में 32.5% की बढ़ोतरी की गई है, जिससे कुल आवंटन बढ़कर ₹21,936.90 करोड़ हो गया है।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 6 months ago
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के लिए वित्त वर्ष 2024-25 के बजट में 32.5% की बढ़ोतरी की गई है, जिससे कुल आवंटन बढ़कर ₹21,936.90 करोड़ हो गया है। लेकिन संसद में इस पर कोई खुशी नहीं दिख रही है, क्योंकि बीते साल के बजट में से ₹1,574 करोड़ खर्च ही नहीं हो पाए।
संचार और सूचना प्रौद्योगिकी पर स्थायी समिति ने MeitY (इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय) की कड़ी आलोचना की है, जिसे उसने 'खराब योजना और ढीली निगरानी' कहा है। इस प्रदर्शन में गिरावट की जड़ में दो बड़ी डिजिटल योजनाएं हैं: प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) प्रोग्राम और संशोधित सेमीकंडक्टर एवं डिस्प्ले मैन्युफैक्चरिंग मिशन। इन दोनों योजनाओं में कुल ₹1,097 करोड़ से अधिक की राशि खर्च नहीं हो सकी।
यह केवल कोई नौकरशाही अड़चन नहीं है। जिन योजनाओं का बजट खर्च नहीं हो पाया, वही योजनाएं भारत के उस सपने की नींव हैं, जिसमें वह एक वैश्विक सेमीकंडक्टर हब बनने, डिजिटल मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ाने और AI क्षमताओं को तेजी से आगे बढ़ाने का लक्ष्य रखता है और भारत की इन डिजिटल महत्वाकांक्षाओं को देख रही मार्केटिंग और मीडिया इंडस्ट्री के लिए ये रुकावटें मायने रखती हैं।
वित्त वर्ष 2024-25 के लिए बजट में बढ़ोतरी को सरकार के तकनीक-प्रमुख दृष्टिकोण का हिस्सा बताया गया था, जिसमें सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, इंडिया AI मिशन और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों पर जोर दिया गया। ये सभी क्षेत्र उस डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत बनाते हैं जो OTT डिलीवरी से लेकर प्रोग्रामेटिक विज्ञापन मापन, मार्केटिंग टेक प्लेटफॉर्म और नए उपभोक्ता टचपॉइंट्स तक सबका आधार हैं।
इसलिए जब ये योजनाएं धीमी पड़ती हैं, तो इसका असर दूर तक फैलता है। एक वरिष्ठ एजेंसी प्लानर ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “PLI से जुड़ी चिप महत्वाकांक्षाएं उन मुख्य संकेतों में से एक थीं जिनके जरिए हम भारत की लॉन्ग-टर्म क्षमता को एक मार्केटिंग टेक्नोलॉजी मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में आंक रहे थे। यदि क्रियान्वयन इतना असंगत हो, तो यह भ्रमित करने वाला संकेत देता है।”
अपना पक्ष रखते हुए MeitY ने कहा कि अब वह जमीनी हकीकत पर आधारित बजटीय अनुमान के साथ काम कर रहा है और सचिव की अध्यक्षता में साप्ताहिक समीक्षा भी की जा रही है। लेकिन समिति इससे संतुष्ट नहीं है। उसने ज्यादा सख्त निगरानी तंत्र, फंड उपयोग के लिए रियल-टाइम डैशबोर्ड और प्रदर्शन आधारित कार्य संस्कृति की मांग की है।
यह उस समय पर हो रहा है जब भारत की व्यापक डिजिटल अर्थव्यवस्था- जो ताजा इंडस्ट्री रिपोर्ट्स के मुताबिक पहले ही ₹7.3 लाख करोड़ की विज्ञापन और मीडिया मशीन बन चुकी है- इन्फ्रास्ट्रक्चर-स्तरीय नवाचारों पर बुरी तरह निर्भर है। विशेष रूप से IndiaAI मिशन को सुरक्षित, स्केलेबल और आर्थिक रूप से लाभदायक AI तैनाती की आधारशिला के रूप में प्रस्तुत किया गया था, जिसमें डिजिटल मार्केटिंग इंडस्ट्री की भी गहरी भागीदारी है।
जैसे-जैसे ब्रांड्स फ़र्स्ट-पार्टी डेटा ईकोसिस्टम, उन्नत टार्गेटिंग और रियल-टाइम एट्रिब्यूशन की मांग कर रहे हैं, वैसे-वैसे सरकार की तकनीकी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन कोई परिधीय मुद्दा नहीं रह जाता बल्कि यह एक ढांचागत आवश्यकता बन जाता है।
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