कंटेंट को लेकर लोकमत समूह ने उठाया ये बड़ा कदम

प्रतिष्ठित मराठी मीडिया समूह ‘लोकमत मीडिया प्राइवेट लिमिटेड’ (Lokmat Media Private Limited) ने एक नई पहल की है

Last Modified:
Tuesday, 16 April, 2019
LOKMAT

प्रतिष्ठित मराठी मीडिया समूह ‘लोकमत मीडिया प्राइवेट लिमिटेड’ (Lokmat Media Private Limited) ने एक नई पहल की है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस मीडिया समूह ने ‘गुलबदन टॉकीज प्राइवेट लिमिटेड’ (Gulbadan Talkies Private Limited) में हिस्सेदारी हासिल की है।

रिपोर्ट के अनुसार, इस बारे में ‘लोकमत मीडिया’ के एडिटोरियल व जॉइंट मैनेजिंग डायरेक्‍टर ऋषि दर्डा का कहना है, ‘इस हिस्सेदारी का इस्तेमाल कंटेंट की रेंज को और व्यापक बनाने में किया जाएगा। हमेशा से हमारा मानना है कि रीजनल कंटेंट के द्वारा कंज्यूमर्स से जुड़ाव को और मजबूत किया जा सकता है। इस साझेदारी से हम अपने ऑडियंस को शानदार और बेहतर कंटेंट देने की दिशा में काम करेंगे।’

गौरतलब है कि मुंबई में स्थित ‘गुलबदन टॉकीज’ भारतीय डिजिटल पार्टी (BhaDiPa) का संचालन करता है, जो कॉमेडी, ट्रेवल और म्यूजिक आदि जॉनर में कंटेंट तैयार करता है। इसके अलावा यह कुछ मीडिया प्लेयर्स के लिए वेब सीरीज भी प्रड्यूस करता है। इस बारे में ‘गुलबदन टॉकीज’ की सीईओ और फाउंडिंग डायरेक्टर पाउला मैकग्लिन (Paula McGlyn) का कहना है, ‘हम चाहते हैं कि लोकमत मीडिया के साथ हमारा यह संबंध लंबे समय तक बना रहे।’

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महीना भी नहीं हुआ सांसद बने, महिला पत्रकार के साथ किया ऐसा बर्ताव

अभी लोकसभा चुनाव के नतीजों को आए महीनाभर भी नहीं बीता है, पर नए सांसद साहब अपने बुरे बर्ताव के चलते सुर्खियों का हिस्सा बन गए हैं

Last Modified:
Tuesday, 18 June, 2019
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अभी लोकसभा चुनाव के नतीजों को आए महीनाभर भी नहीं बीता है, पर नए सांसद साहब अपने बुरे बर्ताव के चलते सुर्खियों का हिस्सा बन गए हैं। मामला ओडिशा के बीजू जनता दल के सांसद अनुभव महांती का है। सांसद महोदय एक्टर भी है। ऐसे में हीरो से वे सोशल मीडिया पर आजकर विलेन के तौर पर नजर आ रहे हैं। 


महिला पत्रकार सस्मिता ने उन पर आरोप लगाया कि उनका भाई उसे पर कमेंट और छींटाकशी कर उसे परेशान करता था इसलिए वे सांसद महोदय के पास उसकी शिकायत लेकर गई, पर सांसद ने उल्टा ये बात सुनकर उसके साथ दुर्व्यवहार किया और उसे धक्का दे दिया। महिला पत्रकार ने कहा कि 2017 में वे एक अखबार में इंटर्नशिप कर रही थीं तब झांझरीमंगला, चौधरी बाजार होते हुए जाना पड़ता था। उस समय अनुभव के भाई अनुप्रास आते-जाते समय कमेंट मारा करते थे। दो साल में कई बार इस तरह की घटना कई बार हुई, इससे परेशान होकर ही वे सांसद से मिलने गई थी। महिला पत्रकार की शिकायत पर पुलिस ने सांसद और उसके भाई के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है।


वहीं सांसद का कहना है, 12 जून को समिस्ता मेरे निवास स्थान पर आई थी और मेरे साथ अभद्र भाषा में बात करने लगी। वे मेरे घर के बाहर शोर-शराबा मचाने लगी तो मैंने पुलिस को बुलाकर कहा कि इस महिला को इसके घर ले जाए। 


 

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टीवी पत्रकारों के लिए पुलिस ने बिछाया ऐसा ‘जाल’  

एक जालसाज को पत्रकार के रूप में पुलिसवाले को ब्लैकमेल करना बहुत भारी पड़ा

Last Modified:
Tuesday, 18 June, 2019
arrested

एक जालसाज को पत्रकार के रूप में पुलिसवाले को ब्लैकमेल करना बहुत भारी पड़ा। पुलिस ने आरोपी सुधीर को उसकी सही जगह यानी सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है। सुधीर खुद को वरिष्ठ टीवी पत्रकार बताकर ट्रैफिक पुलिसकर्मी से दो लाख रुपए की मांग कर रहा था। पुलिस का कहना है कि आरोपी नरेला का रहने वाला है और उस गैंग का हिस्सा है जो दुकान मालिकों और पुलिसकर्मियों को किसी न किसी कारण से ब्लैकमेल करता है। सुधीर को पुलिस ने नरेला के पास से गिरफ्तार किया, जबकि उसका एक साथी भाग निकलने में कामयाब रहा। आरोपी सुधीर के बारे में पुलिस को तब पता चला जब कुछ ट्रैफिक पुलिस के जवानों ने शिकायत दर्ज कराई कि एक लोकप्रिय मीडिया हाउस का पत्रकार उन्हें ब्लैकमेल कर रहा है। 
 
सुधीर खुद को वरिष्ठ पत्रकार बताता था और पुलिसकर्मियों को धमकी देता था कि यदि उन्होंने पैसे नहीं दिए थे वो उनके गलत कार्यों के विडियो अपने चैनल पर वायरल कर देगा। इसी तरह की शिकायतें पुलिस को कुछ दुकान मालिकों से भी मिली थीं। पीड़ितों की तरफ से पुलिस को बताया गया था कि पत्रकारों का एक समूह उन्हें ब्लैकमेल कर रहा है। इन शिकायतों के आधार पर पुलिस ने आरोपियों की तलाश शुरू कर दी थी, लेकिन उसे सफलता तब मिली जब मंगोलपुरी सर्किल में तैनात कांस्टेबल ने 2 लाख रुपए मांगे जाने की शिकायत दर्ज कराई। अब चूंकि मामले में पत्रकारों का नाम लिया जा रहा था, इसलिए पुलिस ने बड़ी सूझबूझ से काम लिया। 

शिकायतकर्ता को आरोपियों की बताई जगह पर भेजा गया और पुलिसकर्मी भी वहां घात लगाकर बैठ गए। जैसे ही बाइक सवार दो आरोपी वहां पहुंचे, पुलिसकर्मियों ने उन्हें घेर लिया। जब आरोपियों से प्रेस कार्ड दिखाने को कहा गया, तो वो घबरा गए। इस बीच मौका पाकर एक आरोपी भाग निकला, जबकि सुधीर पुलिस के हत्थे चढ़ गया।    

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महिला पत्रकार का दर्द: किसी पुरुष संपादक ने नहीं स्वीकारी गर्भपात से जुड़ी स्टोरी

गर्भपात जैसे संवेदनशील और गंभीर मामलों पर मीडिया और खासकर पुरुष संपादकों का क्या रुख रहता है

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Tuesday, 18 June, 2019

गर्भपात जैसे संवेदनशील और गंभीर मामलों पर मीडिया और खासकर पुरुष संपादकों का क्या रुख रहता है, यह अमेरिकी पत्रकार ने अपने एक लेख में रेखांकित किया है। कोलंबिया जर्नलिज्म रिव्यु नामक वेबसाइट पर प्रकाशित इस लेख में मेगन विंटर ने अपने अनुभवों को साझा किया है। गौरतलब है कि अमेरिका के अलबामा में पिछले महीने गर्भपात पर प्रतिबंध को लेकर बिल पारित किया गया है। इसी तरह लुइसियाना, मिसिसिपी, ओहियो और जॉर्जिया भी इस राह पर चल निकले हैं। मिसौरी भी जल्द ही देश का पहला ऐसा राज्य बन सकता है, जहां गर्भपात की सुविधा प्रदान नहीं की जाएगी। इन ख़बरों के बीच मेगन विंटर उस दौर से लोगों को रूबरू करा रही हैं, जब उनकी एक के बाद एक गर्भपात से जुड़ी कई स्टोरियों को किसी भी मीडिया हाउस ने जगह नहीं दी थी। लिहाजा मेगन का मानना है कि जब तक इस मुद्दे की गंभीरता को नहीं समझा जाएगा, तब तक स्थिति बदलने वाली नहीं है।


अपने लेख में मेगन ने लिखा है ‘2016 में मैंने मिसौरी राज्य की राजधानी जेफर्सन सिटी की यात्रा की। मैं उस वक़्त एक फ्रीलांस पत्रकार के रूप में कई राज्यों में घूमकर गर्भपात-विरोधी आंदोलन पर रिपोर्टिंग कर रही थी, और मैंने मिसौरी को केस स्टडी के रूप में चुना। जब मैंने इस विषय में गहराई से उतरना शुरू किया, तो आभास हुआ कि मैं जितना समझ रही थी स्थिति उससे ज्यादा भयावह है। मिसौरी में जो कुछ हो रहा था, उसका राष्ट्रीय स्तर पर दूरगामी प्रभाव पड़ने वाला था। इसलिए मैंने तुरंत इस पर काम शुरू किया, लेकिन उस मीडिया हाउस की तलाश बेहद मुश्किल साबित हुई जो गर्भपात से जुड़ी मेरी स्टोरी को जगह देने का साहस दिखा सके। 

कई महीनों की मशक्कत के बाद रोलिंग स्टोन, बज़फीड, द न्यू रिपब्लिक, हार्पर, हैफिंगटन पोस्ट हाइलाइन और अटलांटिक के संपादकों ने या तो मेरे स्टोरी आईडिया को सिरे से खारिज कर दिया या प्रारंभिक उत्तरों के बाद मुझे जवाब देने में विफल रहे। मेरे लिए चौंकाने वाली बात तो यह रही कि उन संपादकों में से कुछ तो महिलाएं थीं और और हफ़पोस्ट के संपादक को छोड़कर सभी पुरुष चीफ एडिटर के अधीन कार्यरत थीं। मैंने लगातार कई महीनों तक सभी प्रमुख संपादकों को यहाँ की स्थिति से अवगत कराया, मगर किसी ने मेरी स्टोरी को गंभीरता से नहीं लिया, जैसे उनके लिए यह कोई मुद्दा ही नहीं था। प्रजनन-स्वास्थ्य पर मेरी पांच सालों की रिपोर्टिंग में किसी भी पुरुष संपादक ने गर्भपात से जुड़ी मेरी स्टोरी को स्वीकार नहीं किया। मीडिया का या रुख दर्शाता है कि महिलाओं के हित की बात करना और उसके लिए खड़े रहना दोनों अलग-अलग बातें हैं’।

मेगन के मुताबिक, उन्होंने अब तक केवल एक पुरुष संपादक के लिए महिलाओं की स्वास्थ्य देखभाल विषय पर लिखा है, वो भी इसलिए कि उक्त संपादक की पत्नी के साथ मेगन ने काम किया था और उन्होंने ही मेगन का नाम अपने पति को सुझाया था। हालांकि, मेगन मानती हैं कि भले ही महिला संपादकों ने गर्भपात से संबंधित मेरी स्टोरियों को स्वीकार न किया हो, लेकिन उन्होंने मेरे काम की सराहना की, अपने सहकर्मियों से मेरी अन्य ख़बरों के लिए ज्यादा पैसे देने की सिफारिश की। मेगन की नज़र में पुरुष संपादकों का पूरा ध्यान राजनीतिक मुद्दों पर रहता है और इस वजह से महिलाओं से जुड़े मुद्दे पीछे छूट जाते हैं। 

मेगन के अनुसार, 2012 में, द कट के संपादक ने मुझे गुमनाम रूप से महिलाओं से उनके गर्भपात के विषय में सवाल जवाब करने का मौका दिया, जो न्यूयॉर्क मैगज़ीन की कवर स्टोरी बन गई। कॉस्मोपॉलिटन के लिए मेरे द्वारा गर्भपात विरोधी आंदोलन पर लिखा गया एक फीचर 2016 के नेशनल मैगज़ीन अवार्ड के लिए नामांकित किया गया था। मेगन का कहना है कि सियासी ख़बरों के चलते गर्भपात जैसे विषयों को नज़रंदाज़ करना पूरी तरह गलत है। अब मीडिया संस्थानों को यह फैसला लेना होगा कि क्या महिलाओं की हित की बातें सिर्फ बातों तक ही सीमित हैं।

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पत्रकार बोला, पहले मंत्री ने मारा थप्पड़ फिर दी धमकी

देश में तो लगातार पत्रकारों की शोषण की खबरें सामने आ ही रही थी

Last Modified:
Tuesday, 18 June, 2019
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देश में तो लगातार पत्रकारों की शोषण की खबरें सामने आ ही रही थी, अब पाकिस्तान से भी ऐसी ही एक खबर सामने आई है।  मामला पाकिस्तान के एक टीवी पत्रकार और वहां के विज्ञान-प्रोद्योगिकी मंत्री के बीच का है। टीवी चैनल बोल न्यूज के पत्रकार समी इब्राहिम ने मंत्री चौधरी इमरान खान पर आरोप लगाते हुए कहा कि फैसलाबाद में एक शादी समारोह के दौरान उन्हें मंत्री ने सिर्फ थप्पड़ जड़ दिया बल्कि उसे गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी भी दी।

इन आरोपों पर मंत्री ने कहा कि ऐसा नहीं होना चाहिए था, पर ये दुर्भाग्यपूर्ण घटना है।  पत्रकार मुझसे बदतमीजी कर रहा था और उसने मुझे ‘भारतीय जासूस’ भी कहा। 

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सरकार द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्तियों को लेकर लिया गया ये फैसला

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने अब जारी होने वाली सरकारी प्रेस विज्ञप्तियों को लेकर एक बड़ा निर्णय लिया है

Last Modified:
Tuesday, 18 June, 2019
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उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने अब जारी होने वाली सरकारी प्रेस विज्ञप्तियों को लेकर एक बड़ा निर्णय लिया है। यूपी के सूचना विभाग को आदेश दिया गया है कि वे अब प्रदेश सरकार द्वारा जारी होने वाली प्रेस रिलीज को संस्कृत भाषा में भी जारी करेगा। अभी तक प्रेस रिलीज अंग्रेजी, हिंदी और उर्दू भाषा में ही जारी की जाती थी।  

योगी के आदेश को अमली जामा पहनाते हुए इसकी शुरुआत भी सोमवार से कर दी गई है। सूचना विभाग ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नीति आयोग के साथ हुई बैठक का प्रेस नोट संस्कृत भाषा में जारी किया। सूचना विभाग के निदेशक शिशिर ने बताया कि इससे संस्कृत भाषा को बढ़ावा मिलेगा और संस्कृत के छात्र-छात्राओं का उत्साहवर्धन भी होगा।
 

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पत्रिका समूह: कोठारी परिवार में शोक

देश के बड़े मीडिया हाउस में शुमार पत्रिका समूह में आज शोक की लहर है

Last Modified:
Tuesday, 18 June, 2019
Patrika


देश के बड़े मीडिया हाउस में शुमार पत्रिका समूह में आज शोक की लहर है। समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी के छोटे भाई मिलाप कोठारी का आकस्मिक निधन हो गया है। वे 69 वर्ष के थे। उन्होंने मंगलवार की सुबह अंतिम सांस ली। 

1950 में जन्मे मिलाप पत्रिका समूह के निदेशक और संपादक के पद पर कार्य कर चुके हैं। उनकी शवयात्रा निवास ‘स्वस्ति, 11, हॉस्पिटल मार्ग, सी स्कीम’ से रवाना होगी। उनका अंतिम संस्कार शाम सवा पांच बजे आदर्श नगर में किया जाएगा। 

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने ट्वीट कर स्व.कोठारी के निधन पर गहरा शोक जताया है। 
 

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दैनिक जागरण को अलविदा कह पत्रकार सुशील मिश्रा ने शुरू की नई पारी

देश के नंबर वन अखबार दैनिक जागरण के मेरठ एडिशन से खबर है कि

Last Modified:
Tuesday, 18 June, 2019


देश के नंबर वन अखबार दैनिक जागरण के मेरठ एडिशन से खबर है कि वहां कार्यरत आउटपुट हेड सुशील मिश्रा ने इस्तीफा दे दिया है। सुशील ने जागरण के साथ एक दशक से भी अधिक समय तक काम किया है। उन्होंने वहां सिटी डेस्क, इसपुट डेस्क व यूपी डेस्क के इंजार्च के तौर पर भी अपनी सेवाएं दी है। सुशील मूल तौर पर उत्तर प्रदेश के ही निवासी है। 

इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से पढ़ाई करने वाले सुशील ने अब अपनी नई पारी अमर उजाला के मेरठ संस्करण के साथ शुरू की है। वहां उनकी नियुक्ति डिप्टी न्यूज एडिटर के पद पर हुई है।


 

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राष्ट्रीय सहारा के कानपुर एडिशन को मिला नया रेजिडेंट एडिटर

जेश मिश्रा पहले से ही कानपुर यूनिट में कार्यरत हैं और ये पद उन्हें प्रमोशन के तौर पर मिला है

Last Modified:
Monday, 17 June, 2019
Rastriya Sahara


सहारा मीडिया से आ रही खबर के मुताबिक अखबार के कानपुर संस्करण के नए रेजिडेंट एडिटर के तौर पर ब्रजेश मिश्रा को नियुक्त किया गया है। ब्रजेश मिश्रा पहले से ही कानपुर यूनिट में कार्यरत हैं और ये पद उन्हें प्रमोशन के तौर पर मिला है।  इस बावत राष्ट्रीय सहारा के समूह संपादक मनोज तोमन ने पत्र जारी किया है, जो हम आपके साथ नीचे शेयर कर रहे हैं।


 

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इस पत्रकार की तारीफ तो बनती ही है

असली पत्रकार स्थिति और उसकी गंभीरता को पल भर में समझ लेता है और टीवी9 के पत्रकार ने भी तुरंत भाप लिया

Last Modified:
Monday, 17 June, 2019

नियम-कानून क्या केवल आम जनता के लिए है, यह सवाल अक्सर पूछा जाता है? और जब इस सवाल का कारण सामने मौजूद हो तो फिर एक पत्रकार को दूसरा अहम् सवाल दागने में देर नहीं करनी चाहिए। टीवी9 भारतवर्ष के मुजफ्फरपुर के पत्रकार रूपेश कुमार ने भी कुछ ऐसा ही किया। जब उन्होंने नेताजी को नियम कायदों की धज्जियाँ उड़ाते हुए देखा तो उनके रुतबे को दरकिनार करते हुए पूछ ही लिया कि ‘आप नियम से बड़े कैसे हो गए’?

मामला बिहार के मुजफ्फरपुर का है। यहां एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) के चलते 100 से ज्यादा बच्चों की मौत हो गई है। ऐसे में नेताओं से लेकर प्रशासन और मीडिया सभी व्यस्त हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्द्धन भी स्थिति का जायजा लेने मुजफ्फरपुर के श्रीकृष्ण सिंह मेडिकल कालेज अस्पताल पहुंचे। उनके साथ-साथ नेताओं-कार्यकर्ताओं की भीड़ भी वहां पहुँच गई। कुछ देर के लिए अस्पताल, अस्पताल कम कोई सरकारी कार्यालय नज़र आने लगा। इस बीच टीवी9 भारतवर्ष के पत्रकार की नज़रें वहां मौजूद एक नेताजी पर गईं। दरअसल, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्द्धन अस्पताल के जिस हिस्से में मरीजों से मिल रहे थे, वहां मीडिया के जाने पर पाबंदी लगाई गई थी। इसलिए रिपोर्टर ने जब कोई दूसरी खबर तलाशना शुरू किया, तो आईसीयू में बैठे नेताजी नज़र आ गए।

असली पत्रकार स्थिति और उसकी गंभीरता को पल भर में समझ लेता है और टीवी9 के पत्रकार ने भी तुरंत भाप लिया कि यह खबर वायरल हो सकती है। भाजपा के उक्त नेता आईसीयू के केबिन में नर्स की कुर्सी पर बैठे थे और नर्स पास में खड़ी हुई थी। इतना ही नहीं जहां मीडियाकर्मियों को अंदर जाने की मनाही थी वहां नेताजी जूतों के साथ बड़े इत्मिनान से आराम फरमा रहे थे। जबकि आईसीयू में दाखिल होने से पहले जूते-चप्पल बाहर ही उतारने होते हैं। रिपोर्टर ने अपने कैमरामैन को पीछे लिए और यह बोलते हुए सीधे नेताजी के सामने पहुंच गए कि ‘मीडिया को जहाँ अनुमति नहीं है, वहां नेताजी की पहुंच देखिये। यहां से जो जाता है वो जूते उतारकर जाता है, लेकिन नेताजी जूते पहनकर बैठे हैं।’ एकदम से कैमरा देखकर नेताजी सकपका गए। उन्हें समझ ही नहीं आया कि बोलना क्या है। जब रिपोर्टर ने पूछा कि मीडिया को यहाँ आने की मनाही है, तो आप यहाँ कैसे बैठे हैं, इस पर नेताजी ने कहा ‘मरीज देखने आये हैं।’ रिपोर्टर ने तुरंत दूसरा सवाल दागते हुए कहा कहा कि कौन है आपका मरीज, कितने नंबर पर है? नेताजी इसका कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दे सके। इसके बाद जब उन्होंने देखा कि रिपोर्टर के सवाल ख़त्म होने का नाम ही नहीं ले रहे हैं, तो उन्होंने सच्चाई स्वीकारते हुए कहा कि ‘हमारे नेता, अभिभावक यहां आये हुए हैं।’

सवाल-जवाब का सिलसिला यहीं नहीं रुका, टीवी9 भारतवर्ष के पत्रकार ने इस पर कहा ‘आपके नेता हर्षवर्द्धन जी यहां आये हुए हैं तो आप आईसीयू में जूते पहनकर बैठेंगे? नेताजी फिर निरुत्तर हो गए। हालांकि उन्होंने अपना बचाव करते हुए कहा कि ये आईसीयू नहीं है, बाहर है। इसके बाद वह सीधे दरवाजे तक पहुंचे और अपने जूते उतार दिए। रिपोर्टर ने वहां मौजूद अस्पताल कर्मी से भी बात की कि आखिर नेताजी को ऐसे कैसे प्रवेश करने दिया गया, लेकिन कोई सही जवाब नहीं मिल सका। जायज है, नेताओं के आगे भला क्या किसी की चल पाई है। वैसे, इस बेवाकी के लिए टीवी9 भारतवर्ष के पत्रकार की जितनी तारीफ की जाये कम है, क्योंकि आजकल पत्रकार भी नेताओं से सीधे लड़ाई मोल नहीं लेते।

आप इस पूरे घटनाक्रम का विडियो नीचे देख सकते हैं...

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जेल से नहीं छूट पाए नोएडा से गिरफ्तार ये 3 पत्रकार

एक न्यूज चैनल से गिरफ्तार तीन पत्रकारों की मुश्किल कम होने का नाम नहीं ले रही है

Last Modified:
Monday, 17 June, 2019
crime

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लेकर विवादित शो का प्रसारण के करने के बाद नोएडा के एक न्यूज चैनल से गिरफ्तार तीन पत्रकारों की मुश्किल कम होने का नाम नहीं ले रही है। 

उल्लेखनीय है कि न्यूज चैनल नेशन लाइव की एमडी इशिका सिहं, एमडी अनुज शुक्ला, और एंकर अंशुल ने जमानत के लिए अर्जी दी थी, पर शुक्रवार को कोर्ट में इस मसले की सुनवाई नहीं हुई। कोर्ट ने अगली डेट मुकर्रर कर दी है। अब इन सबकी जमानत पर 18 जून यानी मंगलवार को सुनवाई की जाएगी। 

इस बावत बचाव पक्ष के वकील के.के.सिंह ने कहा कि जिला जज के अवकाश पर होने के चलते ये मामला एडीजे प्रथम के कोर्ट में भेजा गया था, पर वहां केसों की ज्यादा संख्या के चलते इस मामले को 18 जून की तारीख दी गई है। वैसे इस मामले में चैनल हेड अजय शाह अभी फरार चल रहे हैं। पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने के लिए दबिश दे रही है। 
 

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