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Leading From The Front: यही खासियत विनीत जैन को दूसरों से बनाती है अलग

इस सीरीज के तहत आज हम बताएंगे कि विनीत जैन के विजन और नेतृत्व में ‘टाइम्स ग्रुप’ ने किस तरह अपने ‘पंख’ फैलाए हैं और किस तरह इसे एक अग्रणी मल्टीमीडिया मीडिया समूह बनाने में उनकी अहम भूमिका रही है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो 2 years ago

'समाचार4मीडिया' की सहयोगी वेबसाइट ‘एक्सचेंज4मीडिया’ (exchange4media) ने पिछले हफ्ते ‘Leading From The Front’ नाम से कॉलम की एक सीरीज शुरू की है। इस सीरीज में देश के उन टॉप बिजनेस लीडर्स को शामिल किया गया है, जिन्होंने देश की मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में खास मुकाम हासिल किया है और उसे नई ऊंचाइंयों पर ले जाने में अपनी अहम भूमिका अदा कर रहे हैं। इस सीरीज के तहत आज हम बताएंगे कि विनीत जैन के विजन और नेतृत्व में ‘टाइम्स ग्रुप’ ने किस तरह अपने ‘पंख’ फैलाए हैं और किस तरह इसे एक अग्रणी मल्टीमीडिया मीडिया समूह बनाने में उनकी अहम भूमिका रही है।

विनीत जैन ने वर्ष 1987 में ‘द टाइम्स’ (The Times) समूह जॉइन किया था। इसके बाद प्रिंट को आगे बढ़ाने के अलावा मीडिया में समूह को विविधता प्रदान करने के लिए एक दूरदर्शी रणनीतिकार के रूप में उन्होंने समूह के अखबारों, टीवी, रेडियो और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स में तमाम नई पहल कीं, जो बाद में इंडस्ट्री के लिए एक खास पहचान बन गईं। वर्ष 1993 में डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर और उसके करीब पांच साल बाद मैनेजिंग डायरेक्टर के रूप में नियुक्ति के बाद से वह समूह के दिन-प्रतिदिन के कार्यों, जैसे-मार्केटिंग, कॉस्ट फंक्शंस, एचआर और ब्रैंड मैनेजमेंट आदि को संभाल रहे हैं।

जब विनीत जैन टाइम्स समूह में शामिल हुए थे, तो उन्होंने शुरू में ओवरऑल कंटेंट स्ट्रैटेजी और इसके निष्पादन (execution) का काम देखा, जिसमें समूह के प्रमुख समाचार पत्रों यानी ‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’, ‘द इकनॉमिक टाइम्स’ और ‘नवभारत टाइम्स’ के पेजिनेशन, डिजाइन और एडिटोरियल इनोवेशन शामिल था। इसमें उन्होंने ‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’ के कई शहरों में एडिशन शुरू कराए और पेजों की संख्या बढ़ाने के साथ ही उन शहरों की कवरेज पर फोकस किया, जिसने एक राष्ट्रीय अखबार में स्थानीय खबरों की प्रमुखता मिलने लगी, जिसने इंडस्ट्री में एक नया ट्रेंड सेट कर दिया। 

यह पहली बार था जब किसी राष्ट्रीय अखबार के लिए इतने बड़े पैमाने पर ऐसा किया गया था। विनीत जैन ने समय को परखते हुए अखबार के तमाम सेक्शंस को बेहतर बनाने और उन्हें स्थापित करने में भी मदद की। एक दूरदर्शी के तौर पर उन्होंने कई दशक पहले, जब इंटरनेट आगे बढ़ने लगा था, यह भी महसूस कर लिया था कि पाठकों का ध्यान आकर्षित करने के लिए छोटे न्यूज आर्टिकल्स को अधिक विविधता में शामिल किया जा सकता है। इसके तहत उन्होंने ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ और ‘इकनॉमिक टाइम्स’ में न्यूज पेजों में एक पैराग्राफ के बॉक्स की शुरुआत की, ताकि न्यूज और व्यूज की सीमा को बनाए रखते हुए न्यूज के बारे में पाठकों के विश्लेषण को शामिल किया जा सके।

ऐसे में अखबार की वास्तुकला और इसकी कंटेंट स्ट्रैटेजी का आधुनिकीकरण विनीत जैन द्वारा किया गया था, जो 1990 के दशक के अंत तक समूह के चीफ कंटेंट स्ट्रैटेजिस्ट के रूप में उभरे थे। कंटेंट स्ट्रैटेजी और आर्किटेक्चर में मूलभूत परिवर्तनों के माध्यम से आधुनिक समाचार पत्र के लिए ये इनोवेशंस (वाइस चेयरमैन समीर जैन द्वारा संचालित आमंत्रण/कवर मूल्य निर्धारण और सदस्यता योजनाओं जैसे नवाचारों के साथ), टाइम्स ऑफ इंडिया दिल्ली में हिन्दुस्तान टाइम्स से आगे निकलने के लिए जिम्मेदार थे। 

इसी तरह उनके विस्तार-उन्मुख दृष्टिकोण ने पाठकों की अधिक समाचारों की आवश्यकता को समझा और टाइम्स ऑफ इंडिया अखबार में मुख्य रूप से स्टॉक लिस्टिंग, क्रॉसवर्ड और रीडर एंगेजमेंट सेक्शन, फिल्म समीक्षा आदि जैसी अधिक पाठक-अनुकूल सामग्री पेश की। 

विनीत जैन को देश में अग्रणी लाइफस्टाइल और एंटरटेनमेंट जर्नलिज्म का श्रेय भी दिया जाता है। उन्होंने टाइम्स ऑफ इंडिया के एडिशन वाइस सप्लीमेंट्स जैसे- दिल्ली टाइम्स, बॉम्बे टाइम्स आदि की कल्पना की और उन्हें मूर्त रूप दिया, जो लाखों युवा पाठकों और नए ऑडियंस सेगमेंट में स्वास्थ्य, फैशन, फिटनेस, फिल्मों, मनोरंजन आदि पर ध्यान केंद्रित करने वाले थे। ये विज्ञापनदाताओं के साथ हिट थे और विशेष रूप से न्यूजपेपर इंडस्ट्री में कॉपी किए गए हैं। इसके अलावा सामान्य रूप से टीवी और डिजिटल जैसे अन्य प्लेटफार्म्स में संशोधित रूप में इस्तेमाल किए गए हैं। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि उदारीकरण के बाद के भारत में नए पाठकों के तहत भारतीय समाचार पत्रों के लिए फैशन, डिजाइन, स्वास्थ्य, फिटनेस, कल्याण आदि के लिए विज्ञापनदाताओं की नई शैलियों के लिए ये एक तरह से एंट्री प्वॉइंट्स बन गए हैं।

इंडस्ट्री के विशेषज्ञ बताते हैं कि विनीत जैन युवाओं और शहरी संस्कृति को बहुत अच्छी तरह से समझते हैं। वास्तव में, उनके नेतृत्व में मीडिया में लाइफस्टाइल जर्नलिज्म के निर्माण ने पूरी तरह से नए दर्शकों और विज्ञापनदाताओं के साथ एक बड़ी नई इवेंट इंडस्ट्री शुरू की। यहां एक बार फिर से टाइम्स ग्रुप नेतृत्व की भूमिका में नजर आया। शुरुआत में टाइम्स के लाइफस्टाइल सप्लीमेंट्स विज्ञापनदाताओं के लिए इवेंट्स को प्रायोजित करने के लिए प्रेरक का काम करते, क्योंकि इस समूह ने पूरी इंडस्ट्री को परिपक्व और प्रोफेशनल बनाने में मदद की। इसके बाद ये मॉडल सभी शैलियों के इवेंट राजस्व का एक अलग प्रमुख स्रोत बन गए, और इस मॉडल को बाद में पूरे मीडिया जगत में चुना गया।

पब्लिकेशन में इस विरासत के अलावा विनीत जैन ने समूह को प्रिंट के अलावा अन्य सभी संभावित मीडिया क्षेत्रों में विविधता प्रदान की है। उन्होंने शुरुआत में ही इंटरनेट की मौलिक चुनौती को पहचान लिया और इसलिए टाइम्स ऑफ इंडिया वर्ष 1997 में वेबसाइट शुरू करने वाले पहले समाचार पत्रों में से एक था। इसके साथ वर्ष 2000 में टाइम्स इंटरनेट लिमिटेड की स्थापना की गई, जिसने बड़ी संख्या में डिजिटल संस्थाओं को जन्म दिया और जिसने इसे देश का सबसे बड़ा डिजिटल मीडिया हाउस बना दिया।

लेकिन इससे पहले 1990 के दशक के मध्य में विनीत जैन शायद एकमात्र ऐसे भारतीय मीडिया मालिक थे, जिन्होंने रेडियो की शक्ति को पहचाना। ‘टाइम्स एफएम’ (Times FM) आकाशवाणी पर प्रसारण करने वाली पहली निजी संस्था थी और सरकार द्वारा निजी एफएम रेडियो स्टेशनों को अनुमति दिए जाने के बाद इसे ‘रेडियो मिर्ची’ (अब मिर्ची) में तब्दील कर दिया गया। ‘मिर्ची’ आज भी मार्केट लीडर बनी हुई है Qj भारतीय एफएम रेडियो इंडस्ट्री के गॉडफादर के रूप में अपनी जगह पक्की कर रही है।

विनीत जैन ने भी टीवी की दुनिया में कदम बढ़ाए, लेकिन बुद्धिमानी से तब तक दूर रहे जब तक कि कुछ अन्य इसमें नहीं आ गए। लेकिन टाइम्स नाउ (टाइम्स नेटवर्क के अन्य अग्रणी चैनलों के समूह) के प्रवेश के साथ भारतीय न्यूज टेलीविजन का पहले जैसा दौर फिर नहीं आएगा। इसलिए, टाइम्स समूह को एक प्रिंट अखबार और मैगजीन पब्लिशर से एशिया के सबसे बड़े मीडिया समूहों में से एक में बदलने में विनीत जैन की काफी बड़ी भूमिका है। उन्होंने अपनी पहलों में पाठकों, दर्शकों और श्रोताओं को सबसे पहले रखा है। हर बदलाव को समझते हुए टेक्नोलॉजी उद्योग-व्यापी सर्वोत्तम प्रथाओं का उपयोग करके विश्व स्तरीय टीम का निर्माण किया है।

एक बड़े इंडस्ट्री लीडर के रूप में, जिन्होंने भारतीय मीडिया के लिए कई नियम फिर से लिखे हैं और देश की मीडिया वैल्यू चेन को कंटेंट, स्ट्रैटेजी व मुनाफे में बदलकर प्रिंट व मीडिया इंडस्ट्री के अन्य क्षेत्रों के लिए एक बड़ी विरासत छोड़ी है। इंडस्ट्री के लिए उन्होंने जो अगला चैप्टर लिखा है, वह देखना काफी दिलचस्प होगा, जो अभी सामने आना बाकी है। वर्ष 2013 में ‘एक्सचेंज4मीडिया’ (exchange4media) समूह ने इन तमाम कारणों और इंडस्ट्री को ऊंचाइयों पर ले जाने में उनकी अग्रणी भूमिका के कारण विनीत जैन को ‘इंपैक्ट पर्सन ऑफ द ईयर’ (IPOY) का खिताब दिया।  

हालांकि लोकप्रिय धारणा बनी हुई है कि विनीत जैन ने ही टाइम्स ग्रुप में टीवी, डिजिटल और रेडियो जैसे नए बिजनेस का निर्माण किया है और यह कहना सही है कि विनीत जैन 1987 में 21 साल की उम्र में TOI में शामिल हुए थे और तीन दशकों से भी ज्यादा समय तक उन्होंने प्रिंट के बिजनेस में महत्वपूर्ण योगदान दिया। जब विनीत जैन अपने पिता अशोक जैन और बड़े भाई समीर जैन के साथ जुड़े, तो बिजनेस का मुख्य आधार प्रिंट व न्यूजपेपर था।

जबकि समीर जैन को पिछले तीन दशकों से भी अधिक समय तक लीड करने, रणनीति बनाने, रिस्पॉन्स, मॉनेटाइजिंग, इनविटेशन प्राइजिंग का श्रेय दिया जाता है और अब पिछले 15 वर्षों में ब्रैंड कैपिटल के साथ युवा जैन ने अपने बड़े भाई समीर जैन के साथ प्रिंट बिजनेस और न्यूजपेपर बिजनेस में भी जबरदस्त योगदान दिया है।  

वरिष्ठ अधिकारी विनीत जैन को याद करते हुए कहते हैं कि वह न्यूजपेपर व प्रिंट ऑर्गनाइजेशंस का नेतृत्व करने और उसे चलाने में पूरी तरह से जुड़े हुए थे। वह पूरी तरह से HR व हायरिंग और लीडरशिप मेंटरिंग और सुवरविजन में भी जुड़े रहते थे। जैन न्यूजपेपर व प्रिंट बिजनेस के प्रॉडक्ट व मार्केटिंग में भी शामिल रहते थे। विनीत जैन प्रिंट प्रॉडक्ट्स के एडिटोरियल को लेकर भी निर्णय लेते थे। उन्होंने नए एंटरटेनमेंट सप्लीमेंट्स शुरू किए, जिसकी पहले तो काफी आलोचना हुई फिर पूरी मीडिया इंडस्ट्री ने इसे अपना लिया।  

विनीत जैन ने सिटी सप्लीमेंट और अखबारों में स्थानीय खबरों पर भी जोर दिया और यह सुनिश्चित किया कि ये सप्लीमेंट एडिटोरियल के साथ-साथ रेवेन्यू में योगदान देने वाले भी बनें।  टाइम्स ग्रुप में सक्रिय होने के चलते पिछले 36 वर्षों से विनीत जैन की एडमिनिस्ट्रेशन, प्रिंटिंग और मैनेजमेंट के सभी पहलुओं में सक्रिय भागीदारी रहती थी। ढाई दशक पहले विनीत जैन इन अखबारों को इंटरनेट से जोड़ने में मदद की थी। उनके नेतृत्व में समाचार पत्रों की साइटों का शुभारंभ किया गया।

विनीत जैन को टीवी बिजनेस, रेडियो बिजनेस, डिजिटल व इंटरनेट बिजनेस और टाइम्स ग्रुप के एजुकेशन बिजनेस के निर्माण का श्रेय दिया जाता है। अपने नेतृत्व में पहले के 18-20 वर्षों में उन्होंने न्यूजपेपर व प्रिंट बिजनेस के अधिक क्षेत्रों में जबरदस्त योगदान दिया और कई स्ट्रैटजिक एडिटोरियल, मार्केटिंग और प्रॉडक्ट इनिशिएटिव्स का नेतृत्व किया, जिसकी छाप टाइम्स ग्रुप के बिजनेस पर अभी भी है। टाइम्स ग्रुप पर विनीत जैन की छाप जबरदस्त रही, जोकि प्रिंट से शुरू हुई। लेकिन अपने गहरे दृष्टिकोण से उन्होंने एक भविष्यवादी समूह बनाने की प्रक्रिया का नेतृत्व किया।


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