अब इन हिंदी पोर्टल्स के संग जुड़े प्रशांत कनौजिया, बोले- 'भारत माता' में यकीन नहीं

यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ को लेकर आपत्तिजनक पोस्ट के आरोप में पुलिस ने कुछ दिन पूर्व किया था गिरफ्तार

नीरज नैयर by नीरज नैयर
Published - Tuesday, 25 June, 2019
Last Modified:
Tuesday, 25 June, 2019
Prashant Kanojia

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने के मामले में गिरफ्तारी का सामना कर चुके पत्रकार प्रशांत कनौजिया का कहना है कि उनकी निष्ठा केवल संविधान के प्रति है और वह ‘भारत माता’ जैसी अवधारणा में यकीन नहीं रखते। कनौजिया का यह ताजा बयान विरोधियों को उनके खिलाफ मोर्चा खोलने का मौका दे सकता है।

‘द टेलीग्राफ’ को दिए इंटरव्यू में कनौजिया ने 8 जून को हुई घटना का जिक्र करते हुए अपने अनुभव साझा किये। कनौजिया ने बताया कि जब पुलिस उन्हें ले जा रही थी तो उन्हें अपने एनकाउंटर का डर था, क्योंकि यूपी पुलिस का रिकॉर्ड इस मामले में काफी दागदार रहा है।

बकौल कनौजिया, ‘सादा कपड़ों में जब पुलिस वालों ने मुझे पूर्वी दिल्ली से उठाया तो लगा कि वो मुझे दिल्ली या नोएडा के किसी पुलिस स्टेशन ले जाएंगे, मगर जैसे ही गाड़ी ग्रेटर नोएडा से आगे निकली, मेरी चिंताएं बढ़ने लगीं। मेरे मन में ख्याल चलने लगे कि यदि पुलिस ने मेरा एनकाउंटर कर दिया तो? क्या होगा यदि पुलिसवाले मुझे गोली मारकर यह थ्योरी बना दें कि मैं उनकी गिरफ्त से भागने का प्रयास कर रहा था? हालांकि, पुलिस मुझे सीधे लखनऊ ले गई, जहां पेशी के बाद मुझे जेल भेज दिया गया।’

प्रशांत कनौजिया की गिरफ्तारी के बाद उनके पुराने ट्वीट खंगालकर यह साबित करने का प्रयास किया गया कि वो जात-पांत के नाम पर सामाजिक सद्भाव को प्रभावित कर रहे हैं। सोशल मीडिया के साथ-साथ मेनस्ट्रीम मीडिया में कनौजिया के खिलाफ खबरें दिखाई गईं। मीडिया, खासकर कुछ पत्रकारों के इस रुख से कनौजिया खासे नाराज हैं।

कनौजिया का कहना है, ‘आप मेरे बारे में कुछ भी भला-बुरा बोल सकते हैं, लेकिन जो व्यक्ति कैमरे के सामने 100 करोड़ की रिश्वत मांगते पकड़ा गया हो, क्या वह पत्रकार है? इसी तरह, कठुआ कांड का समर्थन करने वाले खुद को पत्रकार कैसे कह सकते हैं’? कनौजिया का ट्विटर हैंडल विवादस्पद ट्वीट, फोटो से भरा पड़ा है। उनकी भाषा पर भी ऐतराज जताया जाता रहा है। यही वजह है कि जब उनकी गिरफ्तारी हुई  तो इसका समर्थन करने वालों की संख्या भी कम नहीं थी।

कनौजिया दलित हैं और दलितों पर होने वाले अत्याचारों को लेकर मुखर रहते हैं। इस बारे में उनका कहना है, ‘यदि कोई दलित को मारेगा, उसके मुंह में पेशाब करेगा तो मैं यह नहीं कहूंगा कि मैं इसकी कड़ी निंदा करता हूं। मैं चुभने वाले शब्द इस्तेमाल करूंगा, क्योंकि दलित होने के चलते मैंने भी बहुत कुछ सहा है।’

इस सवाल के जवाब में कि देश और उसके नेताओं के खिलाफ विवादास्पद विचार क्यों? कनौजिया ने कहा, ‘मेरी निष्ठा संविधान के प्रति है, देश और उसके नेताओं के प्रति नहीं। मैं ‘ये धरती मेरी मां है’ जैसी अवधारणा में विश्वास नहीं रखता।’ 8 जून के घटनाक्रम का जिक्र करते हुए कनौजिया ने कहा, ‘मुझे ले जाते हुए पुलिसवाले बोल रहे थे कि तुम वायर वालों को बहुत चर्बी चढ़ गई है, तुमको डालेंगे, फिर तुम्हारे बाप को भी डालेंगे।‘

गौरतलब है कि कनौजिया ‘द वायर’ के साथ काम कर चुके हैं। बकौल कनौजिया ‘लखनऊ में उन्हें मजिस्ट्रेट के घर ले जाया गया, जहां से पुलिस अस्पताल लेकर गई। अस्पताल में 150 पुलिसकर्मी मौजूद थे, डॉक्टर भी उन्हें ऐसे देख रहे थे जैसे वो कोई आतंकवादी हों। इसके बाद उन्हें लखनऊ सेंट्रल जेल ले जाया गया। कनौजिया के मुताबिक, जेल के कैदी भी इस बात को लेकर अचंभित थे कि मुख्यमंत्री पर टिप्पणी के चलते उन्हें जेल भेजा गया है।

प्रशांत कनौजिया फ़िलहाल फ्रीलांस पत्रकार के रूप में ‘द प्रिंट हिंदी और ‘सत्यहिंदी’ के साथ जुड़े हुए हैं।

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BIGG BOSS में एंट्री के लिए महिला पत्रकार के सामने रखी ऐसी ‘डिमांड’, थाने पहुंचा मामला

21 जुलाई को शुरू होने से पहले ही विवादों में फंसा टीवी शो बिग बॉस’ का तीसरा सीजन

पंकज शर्मा by पंकज शर्मा
Published - Tuesday, 16 July, 2019
Last Modified:
Tuesday, 16 July, 2019
Reporter

टीवी शो ‘बिग बॉस-3’ (तेलुगु) ऑनएयर होने से पहले ही कानूनी मुश्किलों में घिर गया है। हैदराबाद की वरिष्ठ महिला पत्रकार ने शो के चार ऑर्गनाइजर्स के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। हैदराबाद के बंजारा हिल्स पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई एफआईआर में महिला पत्रकार का कहना है कि शो में चयन के लिए ऑर्गनाइजर्स ने उनसे सेक्सुअल फेवर की मांग की। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

असिस्टेंट कमिशनर के श्रीनिवास राव के अनुसार, 13 जुलाई को दर्ज कराई अपनी एफआईआर में महिला पत्रकार ने बताया है कि उन्हें बिग बॉस तेलुगु की तरफ से एक कॉल आई। फोन करने वाले ने बताया कि 21 जुलाई से शुरू हो रहे बिग बॉस के तीसरे सीजन में उन्हें सेलेक्ट किया गया है। इस ऑफर के बाद पत्रकार शो के ऑर्गनाइजर्स से मिलने के लिए पहुंची थीं। आरोप है कि मीटिंग के दौरान शो के ऑर्गनाइजर्स अभिषेक, रविकांत, रघु और श्याम ने शो के फाइनल राउंड में एंट्री के लिए उनसे ‘बॉस’ के लिए सेक्सुअल फेवर की मांग की।

महिला पत्रकार का आरोप है कि ऑर्गनाइजर्स ने उनसे किसी तरह का कोई एग्रीमेंट नहीं किया और कई बार ये पूछा गया कि वे कैसे 'बॉस' को संतुष्ट कर सकती हैं? इसके बाद महिला पत्रकार ने एफआईआर दर्ज कराई। बता दें कि यह शो 21 जुलाई से शुरू हो रहा है। एक्टर अक्किनेनी नागार्जुन शो को होस्ट कर रहे हैं। 

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अश्लील मेसेज भेजने वाले को न्यूज एंकर ने इस तरह सिखाया सबक

न्यूज एंकर के पति की फटकार का भी आरोपित पर नहीं पड़ा था कोई असर

Last Modified:
Tuesday, 16 July, 2019
News Anchor

टीवी चैनल की न्यूज एंकर को कथित तौर पर अश्लील संदेश भेजने के आरोप में मुंबई पुलिस ने पश्चिम बंगाल के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपित की पहचान 40 वर्षीय अतनु रवींद्र कुमार के रूप में हुई है। वह इन दिनों बेरोजगार है। अतनु रवींद्र कुमार को अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे पूछताछ के लिए पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है।

पुलिस के अनुसार, कुछ दिनों पहले न्यूज एंकर ने मुंबई में कफ परेड पुलिस स्टेशन में संपर्क कर एक शिकायत दी थी। इस शिकायत में न्यूज एंकर का कहना था कि आरोपित उन्हें फेसबुक पर अश्लील संदेश भेज रहा है। जब एंकर ने उस फेसबुक प्रोफाइल को ब्लॉक कर दिया तो आरोपित ने अन्य प्रोफाइल बनाकर फिर से इस तरह की हरकत शुरू कर दी।

यही नहीं, जब न्यूज एंकर के पति ने आरोपित को फेसबुक पर फटकार लगाई तो उसने पति-पत्नी दोनों को ही अश्लील संदेश भेजने शुरू कर दिए। इसके बाद न्यूज एंकर ने पुलिस को इस मामले से अवगत कराते हुए शिकायत दी। न्यूज एंकर की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर लिया।

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दैनिक जागरण की सफलता में कौन से फैक्टर निभाते हैं खास रोल, पढ़ें यहां

सात करोड़ से ज्यादा पाठक संख्या के साथ ‘दैनिक जागरण’ ने प्रिंट मीडिया में अपनी खास जगह बनाई है

Last Modified:
Tuesday, 16 July, 2019
Dainik Jagran

सात करोड़ से ज्यादा पाठक संख्या के साथ हिंदी के प्रमुख अखबार ‘दैनिक जागरण’ ने प्रिंट मीडिया में अपनी एक खास जगह बनाई है। 31 मार्च 2019 को समाप्त तिमाही के आंकड़ों की बात करें तो जागरण प्रकाशन लिमिटेड ने टैक्स के बाद समेकित लाभ (consolidated profit after tax) 12.50 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 70.61 करोड़ रुपए होने की घोषणा की है। इसके अलावा ऐड रेवेन्यू में भी लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। दैनिक जागरण की रीडरशिप लगातार बढ़ने का ही नतीजा है कि यह सबसे आगे बना हुआ है। इंडियन रीडरशिप सर्वे 2019 की पहली तिमाही (IRS Q1 2019) के डाटा देखें तो रीडरशिप के मामले में इसने अपने सभी प्रतिद्वंद्वियों को पीछे छोड़ दिया है।

आखिर दैनिक जागरण अपनी पाठक संख्या को लगातार बढ़ाने और टॉप पर बने रहने के लिए किस तरह की स्ट्रैटेजी बनाता है? इस बारे में जागरण ग्रुप के सीईओ संजय गुप्त का कहना है कि वह अपना फोकस अच्छी पत्रकारिता करने पर रखना चाहते हैं, ताकि दैनिक जागरण पाठकों की पहली पसंद बना रहे। उनका कहना है कि हमेशा से ही उनका प्रयास अच्छी पत्रकारिता करने पर रहा है।

हालांकि, डिजिटल मीडिया के आने के बाद इसकी आंधी ने प्रिंट मीडिया के बिजनेस पर विपरीत प्रभाव डाला है, लेकिन दैनिक जागरण के बिजनेस पर इससे कोई फर्क नहीं पड़ा है। इस बारे में ‘जागरण प्रकाशन’ के सीनियर वाइस प्रेजिडेंट (स्ट्रैटेजी, ब्रैंड और बिजनेस डेवलपमेंट) बसंत राठौड़ का कहना है, ‘यहां डिजिटल और प्रिंट के बीच की लड़ाई नहीं है। डिजिटल के बारे में हमारा मानना है कि यह प्रिंट का पूरक है। इसके अलावा डिजिटल न्यूज के आने से न्यूज के उपभोग (news consumption) में एक नया आयाम जुड़ गया है। पहले के मुकाबले अब ज्यादा लोग न्यूज का उपभोग कर रहे हैं और न्यूज पर ज्यादा समय भी दे रहे हैं। दिन में घटने वाली घटनाओं और अपडेट के लिए डिजिटल न्यूज का उपभोग ज्यादा बढ़ रहा है, वहीं सुबह-शाम प्रिंट और टीवी पर न्यूज का उपभोग ज्यादा होता है।’

डिजिटल और प्रिंट दोनों प्लेटफॉर्म्स पर अपने रीडर्स को जोड़े रखने के लिए कंटेंट का किस तरह विभाजन किया जाता है और इसके लिए किस तरह की प्राथमिकता रखी जाती है?  इस बारे में  राठौड़ का कहना है, ‘हमारे लिए एक मात्र प्राथमिकता डिजिटल और प्रिंट दोनों में उत्कृष्टता हासिल करना है। ‘इन्मा’ (International News Media Association) के ग्लोबल मीडिया अवॉर्ड्स से इसे समझा जा सकता है, जहां पर दैनिक जागरण ने प्रिंट की रीडरशिप को बढ़ाने में बेस्ट आयडिया के लिए पहला पुरस्कार हासिल किया, वहीं डिजिटल रीडरशिप को बढ़ाने में बेस्ट आयडिया के लिए जागरणडॉटकॉम ने भी पहला स्थान हासिल किया। मुझे लगता है कि शायद हम ही ऐसी इकलौती मीडिया कंपनी थे, जिसने इस ग्लोबल प्रतियोगिता में यह मुकाम हासिल किया। प्रिंट और डिजिटल मीडिया दोनों साथ मिलकर एक-दूसरे की ताकत का लाभ उठाते हुए दर्शकों के लिए शानदार अनुभव उपलब्ध कराने की दिशा में काम करते हैं।  ’

आईआरएस 2019 की पहली तिमाही के डाटा पर नजर डालें तो 7,36,73,000 पाठक संख्या (कुल रीडरशिप) के साथ ‘दैनिक जागरण’ इस लिस्ट में टॉप पर है। ‘आईआरएस 2017’ में इस अखबार की कुल रीडरशिप 7,03,77,000 थी। दैनिक जागरण की एवरेज इश्यू रीडरशिप (AIR) वर्ष 2017 में जहां 20,241,000 थी, वह आईआरएस 2019 की पहली तिमाही में थोड़ी बढ़कर 20,258,000 हो गई। इस अखबार के 400 से ज्यादा एडिशंस और सब-एडिशंस हैं।    

ज्यादा रीडरशिप हासिल करने के लिए ‘दैनिक भास्कर’ ने बॉलिवुड एक्टर सलमान खान को अपना ब्रैंड एंबेसडर बनाया है, ऐसे में रीडरशिप को बढ़ाने में मदद के लिए क्या जागरण भी इसी तरह की कुछ प्लानिंग कर रहा है? इस बारे में राठौड़ का कहना है, ‘इस तरह सेलेब्रिटी का इस्तेमाल कर रीडरशिप बढ़ाने का हमारा कोई इरादा नहीं है। हमने जनजागरण के लिए सात सरोकार बनाए हैं और हमारी कंटेंट फिलॉसफी इन पर आधारित होती है, जिससे हमारी ब्रैंड बिल्डिंग होती है।’ उन्होंने कहा कि हम न्यूज को ज्यादा से ज्यादा स्थानीय बनाने पर भी काफी ध्यान देते हैं औऱ हर 30-40 किलोमीटर पर अपने कंटेंट को स्थानीय भाषा के अनुसार तैयार करते हैं। ज्यादा से ज्यादा किसी क्षेत्र की खबरें मिलने से वहां रीडरशिप के साथ ही विज्ञापन पर भी काफी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। मीडिया बॉयर्स का भी यही मानना है कि रीजनल के प्रति इस झुकाव ने भी जागरण को दूसरों पर बढ़त दिलाने में मदद की है।    

डेंट्सू एजिस नेटवर्क के सीईओ (ग्रेटर साउथ) और चेयरमैन व सीईओ (इंडिया) आशीष भसीन का कहना है, ‘देश में अंग्रेजी के मुकाबले रीजनल रीडरशिप ज्यादा तेजी से बढ़ रही है और इसके तहत रीजनल में दमदार मौजूदगी वाले न्यूजपेपर्स और ज्यादा मजबूत हो रहे हैं। विदेश में जहां प्रिंट की रीडरशिप में कमी हो रही है, इसके विपरीत मुझे लगता है भारत में अगले तीन से पांच सालों तक इसकी रीडरशिप में वृद्धि जारी रहेगी। जागरण की बात करें तो यह अच्छा अखबार है और काफी मजबूत स्थिति में है। इसने अपने पाठकों के बीच मजबूत पकड़ बना रखी है।’ वहीं, ‘पीएचडी मीडिया’ (PHD Media) की सीईओ ज्योति बंसल का मानना है कि जागरण की दो बातें इसे सबसे आगे रखती हैं। ये हैं निष्पक्षता और अपने पाठकों के प्रति सच्चाई। अखबार विभिन्न माध्यमों से अपने पाठकों से जुड़ा रहता है और उनकी आवाज को उठाने में लगातार जुटा रहता है। इस वजह से भी यह पाठकों के बीच पहली पसंद बना हुआ है।

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अमर उजाला का 21वां एडिशन हुआ लॉन्च

लॉन्चिंग के मौके पर अमर उजाला समूह के निदेशक तन्मय माहेश्वरी सहित अमर उजाला परिवार के कई लोग मौजूद रहे

Last Modified:
Tuesday, 16 July, 2019
Amar Ujala Logo

हिंदी के बड़े अखबारों में शुमार ‘अमर उजाला’ ने अपने विस्तार की दिशा में एक और कदम बढ़ा दिया है। इसके तहत अमर उजाला ने अब करनाल एडिशन लॉन्च किया है। यह ग्रुप का 21वां और हरियाणा में हिसार और रोहतक के बाद तीसरा एडिशन है। बताया जाता है कि करनाल संस्करण शुरू होने के बाद जीटी बेल्ट के करनाल, पानीपत, अंबाला यमुनानगर, कैथल, सोनीपत और कुरुक्षेत्र जिले के पाठकों को अब देर रात तक की अपडेट खबरें पढ़ने को मिलेंगी। नए एडिशन की लॉन्चिंग के मौके पर निर्मल कालोनी स्थित सिटी कार्यालय और प्रिंटिंग प्रेस में हवन यज्ञ के साथ विधिवत पूजा हुई। इस मौके पर अमर उजाला समूह के निदेशक तन्मय माहेश्वरी सहित अमर उजाला परिवार के कई लोग मौजूद रहे।

इस मौके पर तन्मय माहेश्वरी ने कहा, ‘करनाल से ग्रुप के 21वें प्रिंट एडिशन की लॉन्चिंग की घोषणा करते हुए मुझे काफी खुशी हो रही है। वर्ष 1948 में कुछ सौ कॉपियों के साथ इस अखबार की शुरुआत हुई थी और आज इसके पाठकों की संख्या 48 मिलियन तक पहुंच चुकी है। पाठकों के प्यार और भरोसे के साथ ही हमारी पूरी टीम के लगातार प्रयास की बदौलत ही यह देश का तीसरा सबसे बड़ा अखबार बना हुआ है। इसके लिए आप सभी लोग बधाई के पात्र हैं।’ 

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सुधीर चौधरी के खिलाफ TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने उठाया बड़ा कदम

संसद में दिए गए भाषण को लेकर दोनों के बीच काफी दिनों से चल रहा है विवाद

पंकज शर्मा by पंकज शर्मा
Published - Monday, 15 July, 2019
Last Modified:
Monday, 15 July, 2019
Sudhir-Mahua

‘जी न्यूज’ (Zee News) के एडिटर-इन-चीफ सुधीर चौधरी के खिलाफ तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने आपराधिक मानहानि का केस दर्ज कराया है। मोइत्रा ने आरोप लगाया है कि सुधीर ने लोगों में उनके बारे में गलत जानकारी का प्रसार किया। मोइत्रा की शिकायत पर संज्ञान लेते हुए मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट प्रीति परेवा ने इस मामले की सुनवाई करने का फैसला किया है। मामले की सुनवाई 20 जुलाई को होगी। उसी दिन मोइत्रा का बयान रिकार्ड किया जाएगा।

बता दें कि महुआ मोइत्रा ने संसद में 25 जून को एक भाषण दिया था, जिसके बारे में सुधीर चौधरी ने दावा किया था कि मोइत्रा के भाषण के अंश अमेरिकी वेबसाइट से हुबहू चुराये गये हैं। आरोप था कि यह आर्टिकल वाशिंगटन मंथली के Martin Longman ने अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बारे में लिखा था, जिसमें मोइत्रा ने कुछ अंश हूबहू उठा लिए और राष्ट्रपति का नाम हटा दिया। सुधीर चौधरी ने भाषण के अंशों को अंडरलाइन करके भी दिखाया था। हालांकि सुधीर चौधरी के ट्‌वीट के बाद वाशिंगटन मंथली के Martin Longman ने ट्‌वीट करके महुआ मोइत्रा का पक्ष लिया था।

इसके बाद भड़कीं महुआ मोइत्रा ने सुधीर चौधरी के दावे को गलत बताया था। मोइत्रा का कहना था कि यह भाषण उनका अपना था और अन्य मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए बीजेपी की ‘ट्रोल आर्मी’ की ओर से इस तरह के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने सुधीर चौधरी पर गलत रिपोर्टिंग के आरोप लगाते हुए लोकसभा में जीटीवी और सुधीर चौधरी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव भी पेश कर दिया था। हालांकि, स्पीकर ओम बिरला ने यह प्रस्ताव खारिज कर दिया था। बता दें कि पूर्व में इनवेस्टमेंट बैंकर रहीं मोइत्रा पश्चिम बंगाल की कृष्णानगर सीट से पहली बार सांसद बनी हैं।

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कैसी रही पत्रकारों संग फाइनैंस मिनिस्ट्री की 'डिनर डिप्लोमेसी', जानें यहां

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से दिल्ली के ताजमहल होटल में पत्रकारों के लिए आयोजित किया गया था डिनर

पंकज शर्मा by पंकज शर्मा
Published - Monday, 15 July, 2019
Last Modified:
Monday, 15 July, 2019
Finance Ministry

वित्त मंत्रालय में पत्रकारों की एंट्री के नए नियमों को लेकर शुरू हुआ विवाद गहराता जा रहा है। इसका नमूना वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा बजट के बाद दिए जाने वाले डिनर में देखने को मिला, जब गिने-चुने पत्रकार ही उसमें पहुंचे। एक मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शुक्रवार को दिल्ली के ताजमहल होटल में आयोजित डिनर में जो पत्रकार शामिल हुए, उनमें सिर्फ सात-आठ रिपोर्टर और 16 एडिटर्स ही शामिल थे, जबकि बड़ी संख्या में पत्रकारों ने इस डिनर का बायकॉट किया। बताया जा रहा है कि जो पत्रकार पोस्ट बजट डिनर में शामिल हुए, उनमें दो इंडियन एक्सप्रेस के, दो फाइनेंसियल एक्सप्रेस के, दो पीटीआई के और एक एएनआई के पत्रकार शामिल थे । गौरतलब है कि ये डिनर हर साल बजट के बाद फाइनेंस मिनिस्टर की ओर से आयोजित किया जाता है।

बताया जाता है कि 100 से ज्यादा पत्रकारों ने डिनर में शामिल न होने का निर्णय फाइनेंस मिनिस्ट्री के उस ताजा आदेश के बाद लिया था, जिसमें ये शर्त लगा दी गई है कि फाइनेंस मिनिस्ट्री के नॉर्थ ब्लॉक ऑफिस में PIB ऐक्रिटेड पत्रकारों को भी तभी एंट्री मिलेगी, जब उन्होंने किसी अधिकारी या मंत्री से पहले से अपॉइंटमेंट लिया हो। उल्लेखनीय  है कि अब तक साल में केवल दो महीने ही पत्रकारों की एंट्री रोकी जाती थी, जब बजट तैयार होता है।

रिपोर्ट के अनुसार, पोस्ट बजट डिनर में शामिल न होने के पत्रकारों के निर्णय के बारे में लंबे समय से वित्त मंत्रालय की कवरेज कर रहे एक वरिष्ठ पत्रकार का कहना था कि वर्तमान में कार्यरत और भविष्य में आने वाले पत्रकारों के हितों की रक्षा के लिए ही यह निर्णय लिया गया। बताया जा रहा है वित्त मंत्रालय कवर करने वाले पत्रकारों के वॉट्सएप ग्रुप FINMIN में शामिल 180 सदस्यों में से करीब 8 ही इस कार्यक्रम में शामिल हुए।

बताया जाता है कि पत्रकारों के स्वागत के लिए होटल के स्टाफ के अलावा वित्त मंत्रालय के 34 से ज्यादा अधिकारी होटल में तैनात किए गए थे। स्थिति यह थी कि डिनर में पत्रकारों से ज्यादा मेजबान मौजूद थे। अंग्रेजी मैगजीन से जुड़े एक पत्रकार का कहना था कि इस विरोध से स्पष्ट है कि नए नियम को लेकर पत्रकार घुटन महसूस कर रहे हैं और उनका आक्रोश बढ़ता जा रहा है, यह लोकतंत्र के लिए स्वस्थ संकेत नहीं है।

पत्रकारों का यह भी कहना है कि यदि इस नए नियम को वापस नहीं लिया गया तो मीडिया के लिए यह सही नहीं होगा, क्योंकि कोई भी न्यूज चैनल या अखबार ऐसे मंत्रालय में कोई रिपोर्टर तैनात नहीं करेगा, जहां से किसी एक्सक्लूसिव स्टोरी के निकलने की कोई गुंजाइश नहीं होगी। वित्त मंत्रालय के नए नियम का विरोध कर रहे पत्रकारों का यह भी कहना है कि यदि यह नया आदेश वापस नहीं लिया जाता है तो सरकार पर दबाव बनाने के लिए अधिकारियों से अपॉइंटमेंट को लेकर बड़े पैमाने पर एप्लीकेशन के साथ ही सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत बड़ी संख्या में एप्लीकेशन भेजी जाएंगी। कुल मिलाकर अभी भी यह मामला पेचीदा हो रहा है।

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दैनिक जागरण में पत्रकार आशुतोष अग्निहोत्री को मिली बड़ी जिम्मेदारी

राष्ट्रीय सहारा, आगरा से की अपने पत्रकारीय करियर की शुरुआत

Last Modified:
Monday, 15 July, 2019
Ashutosh Agnihotri

हिन्दी के प्रमुख अखबार ‘दैनिक जागरण’ प्रबंधन ने हेडऑफिस नोएडा में कार्यरत पत्रकार आशुतोष अग्निहोत्री को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। इसके तहत उन्हें नोएडा का ब्यूरो चीफ बनाया गया है। आशुतोष अग्निहोत्री को मीडिया के क्षेत्र में काम करने का करीब 14 साल का अनुभव है। उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2006 में आगरा में ‘राष्ट्रीय सहारा’ से की थी। हालांकि, वह यहां महज एक साल ही कार्यरत रहे और वर्ष 2007 में ‘राष्ट्रीय सहारा’ को अलविदा कहकर उन्होंने ‘अमर उजाला’ के आगरा एडिशन का दामन थाम लिया। करीब तीन साल बाद वर्ष 2010 में ‘अमर उजाला’ में उन्हें एटा के ब्यूरो चीफ की जिम्मेदारी दी गई।

वर्ष 2011 में ‘अमर उजाला’ को बाय बोलकर उन्होंने ‘दैनिक जागरण’ का रुख कर लिया और कानपुर में बतौर सीनियर सब एडिटर अपनी नई पारी शुरू कर दी। यहां वर्ष 2012 में प्रबंधन ने उन्हें रायबरेली का ब्यूरो चीफ नियुक्त कर दिया। इसके एक साल बाद ही वर्ष 2013 में उन्हें इटावा के ब्यूरो चीफ का जिम्मा संभालने का मौका मिला। यहां भी करीब एक साल तक यह जिम्मेदारी निभाने के बाद 2014 में उन्हें कानपुर में चीफ क्राइम रिपोर्टर की नई भूमिका सौंपी गई। इस पद पर उन्होंने करीब दो साल तक काम किया। इसके बाद आशुतोष अग्निहोत्री को प्रबंधन ने नोएडा भेज दिया, जहां उन्होंने हरियाणा डेस्क पर अपनी प्रतिभा दिखाई। इस बार के लोकसभा चुनाव में उन्हें दिल्ली-एनसीआर में चुनाव डेस्क की जिम्मेदारी मिली। अब प्रबंधन ने उन्हें नोएडा ब्यूरो चीफ की जिम्मेदारी सौंपी है। मूल रूप से उत्तर प्रदेश में फर्रुखाबाद के रहने वाले आशुतोष अग्निहोत्री ने वहीं से अपनी पढ़ाई-लिखाई पूरी की। उन्होंने आगरा से पत्रकारिता की पढ़ाई की है। 

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कपिल सिब्बल पर फूटा बरखा का गुस्सा, फीमेल स्टाफ के प्रति ये है 'नजरिया'

बरखा दत्त ने इस संबंध में कई ट्वीट किये हैं और अन्य पत्रकारों से भी आवाज उठाने की अपील की है

नीरज नैयर by नीरज नैयर
Published - Monday, 15 July, 2019
Last Modified:
Monday, 15 July, 2019
Barkha-Kapil

जमाने की आवाज उठाने वाले पत्रकार अपने साथ होने वाले शोषण के खिलाफ कुछ नहीं कर पाते। यही वजह है कि मीडिया हाउस मनमाने ढंग से पत्रकारों को ‘हांकते’ हैं। कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री कपिल सिब्बल के न्यूज चैनल ‘तिरंगा’ में भी आजकल कुछ ऐसा ही हो रहा है। यहां लगभग 200 पत्रकारों को नौकरी से निकाला जा रहा है, वो भी नियमों  के तहत मिलने वाले वेतन के बिना। वरिष्ठ पत्रकार बरखा दत्त ने इस मुद्दे को अपनी आवाज दी है। सोशल मीडिया पर उन्होंने ‘तिरंगा’ में पत्रकारों की स्थिति और कपिल सिब्बल के तानाशाही रवैये को उजागर किया है।

बरखा ने इस संबंध में एक के बाद एक कई ट्वीट किये हैं और अन्य पत्रकारों से भी इस पर मुखर होने की अपील की है। उन्होंने लिखा है,‘कपिल सिब्बल और उनकी पत्नी के @NewsHtn में भयावह स्थिति, 200 से अधिक कर्मचारियों को नौकरी से निकाला जा रहा है और उन्हें 6 महीने का वेतन भी नहीं दिया जा रहा।’

बरखा ने आगे लिखा है, ‘तिरंगा से जुड़ने के लिए कई पत्रकारों ने अन्य ऑफरों को ठुकरा दिया था, क्योंकि कपिल सिब्बल ने आश्वासन दिया था कि न्यूजरूम को पेशेवर तरीके से चलाया जाएगा और पत्रकारों का कार्यकाल कम से कम 2 साल का होगा। लेकिन पति-पत्नी में से किसी ने भी स्टाफ से बात नहीं की, इसके बजाय लाइव प्रोग्रामिंग को 48 घंटों के लिए बंद कर दिया।’ बरखा दत्त ने कपिल और उनकी पत्नी के खिलाफ अपने दिल का सारा गुबार निकाल दिया। उन्होंने निशाना साधते हुए लिखा, ‘सिब्बल की पत्नी जो मीट फैक्ट्री चलाती हैं, वो बड़े ताव में अपने कर्मचारियों से कहती हैं कि मैं एक पैसा दिए बिना ही फैक्ट्री बंद कर दूंगी, फिर 6 महीने की सैलरी मांगने वाले ये पत्रकार कौन होते हैं।’ गौरतलब है कि बाकी पत्रकारों की तरह बरखा ने भी चैनल की लॉन्चिंग से पहले उसका दामन थमा था, लेकिन उनका कहना है कि वो जो कुछ सिब्बल के बारे में लिख रही हैं, उसका मकसद उन 200 कर्मचारियों को इंसाफ दिलाना है, जिन्हें नियमों को नजरअंदाज कर वेतन दिए बिना निकाला जा रहा है।

अपनी लड़ाई वह अदालत में लड़ लेंगी। बरखा ने सिब्बल को विजय माल्या करार देते हुए कहा ‘सबसे ज्यादा शर्म की बात यह है कि हर रोज करोड़ों कमाने वाले सिब्बल 200 कर्मचारियों को नियमों के अनुसार 6 महीने या कम से कम 3 महीने का वेतन देने को भी तैयार नहीं हैं। वह 200 परिवारों की जिंदगी बर्बाद करने पर तुले हैं।’ बरखा ने अपने ट्वीट में यह भी कहा है कि सिब्बल और उनकी पत्नी का आरोप है कि चूंकि नरेंद्र मोदी ने उनका चैनल चलने नहीं दिया, इसलिए उन्हें मजबूरन कर्मचारियों को निकालना पड़ रहा है, जबकि ऐसा कुछ नहीं है। भारत सरकार की तरफ से इस तरह का कुछ नहीं किया गया है। कपिल और उनकी पत्नी ने कर्मचारियों से बात तक नहीं की, इसके बजाय दोनों छुट्टी मनाने लंदन चले गए। उनकी इस हरकत के चलते मैं उन्हें ‘माल्या’ कहने को मजबूर हूं। इतना ही नहीं बरखा ने मुताबिक, उन्हें इस मामले से पीछे हटने के लिए धमकियां भी मिल रही हैं।

अपने एक अन्य ट्वीट में उन्होंने लिखा है, ‘कर्मचारियों के अधिकारों के लिए लड़ने की वजह से मुझे धमकाया जा रहा है, मुझसे यह भी कहा जा रहा है कि मैं कपिल सिब्बल की माल्या से तुलना न करूं, लेकिन मैं पीछे नहीं हटूंगी। मैं ‘तिरंगा’ चैनल के स्टाफ के साथ खड़ी हूं और अंत तक उनका साथ देती रहूंगी।’ सिब्बल दंपती पर आरोपों की बात यहीं खत्म नहीं होती। बरखा दत्त का कहना है कि कपिल और उनकी पत्नी महिला कर्मचारियों को संबोधित करने के लिए अपशब्द का प्रयोग करते थे।

बरखा ने सभी पत्रकारों से इस विषय में अपनी आवाज बुलंद करने की अपील करते हुए कहा, ‘मैं अपने सभी पत्रकार दोस्तों से कहना चाहूंगी कि वो कपिल सिब्बल को तब तक ट्वीट करना जारी रखें, जब तक कि वो सभी कर्मचारियों को नियमानुसार वेतन नहीं दे देते और कर्मचारियों को धमकाने से बाज नहीं आते। कई पत्रकारों ने बरखा को आश्वासन दिया है कि वो इस लड़ाई को अंजाम तक पहुंचाने में उनका साथ देंगे। अब देखने वाली बात यह है कि क्या एडिटर्स गिल्ड और पत्रकार संघ जैसी संस्थाएं पत्रकारों के हक के लिए आगे आती हैं? 

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सरकार के इस कदम से प्रेस की स्वतंत्रता पर फिर उठे सवाल

मीडिया की स्वतंत्रता पर हमले का यह पहला मामला नहीं है

Last Modified:
Monday, 15 July, 2019
Media Freedom

प्रेस की स्वतंत्रता पर हमले को लेकर पाकिस्तान की इमरान खान सरकार एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। दरअसल, यह विवाद गुरुवार को पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की बेटी मरियम नवाज का इंटरव्यू जबरन रोके जाने को लेकर हो रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ‘पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज’ (पीएमएल-एन) की नेता मरियम नवाज पाकिस्तानी न्यूज चैनल ‘हम न्यूज’ (HUM News) पर पत्रकार नदीम मलिक को इंटरव्यू दे रही थीं, लेकिन चंद मिनट बाद ही इस इंटरव्यू को रुकवा दिया गया। बाद में इस इंटरव्यू को जबरदस्ती रोके जाने को लेकर नदीम मलिक ने ट्वीट भी किया, साथ ही इस इंटरव्यू का एक लिंक भी शेयर किया।

नदीम के ट्वीट के बाद ‘हम न्यूज’  ने अपने ट्विटर हैंडल पर एक बयान पोस्ट किया। इस ट्वीट में कहा गया कि हमारा चैनल एक स्वतंत्र और जिम्मेदार मीडिया में विश्वास करता है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा करना हमारे मूल नियमों में से एक है।

इससे पहले मरियम नवाज की एक प्रेस कान्फ्रेंस दिखाने के लिए पाकिस्तान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया नियामक प्राधिकरण (PEMRA) के आदेश पर तीन पाकिस्तानी समाचार चैनलों को नोटिस जारी किया गया था। उनकी प्रेस कान्फ्रेंस को भी बीच में रोक दिया गया था। मरियम ने तब इस घटना को अविश्वसनीय और शर्मनाक करार दिया था।

बता दें कि 6 जुलाई को मरियम नवाज ने न्यायाधीश अरशद मलिक का एक विडियो जारी किया था। इसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि उनके पिता के खिलाफ सबूतों की कमी होने के बावजूद जेल में डाल दिया गया। मरियम का यह भी आरोप था कि जज अरशद मलिक ने कथित तौर पर स्वीकार किया है कि नवाज शरीफ को सजा सुनाने के लिए उन्हें धमकी मिली थी। हालांकि, न्यायाधीश ने मरियम के आरोपों का खंडन किया था। बता दें कि नवाज शरीफ को भ्रष्टाचार के मामले में सजा सुनाई गई है। यह पहला मामला नहीं है, जब पाकिस्तान में ऐसा हुआ हो, इससे पहले एक जुलाई को भी कुछ ऐसा हुआ था, जब पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के इंटरव्यू को प्रसारित होने के कुछ देर बाद ही रोक दिया गया था।

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वरिष्ठ पत्रकार राहुल देव को मिला ये प्रतिष्ठित अवॉर्ड

दिल्ली में तीनमूर्ति स्थित नेहरू मेमोरियल सभागार में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने किया सम्मानित

Last Modified:
Monday, 15 July, 2019
Rahul Dev

वरिष्ठ पत्रकार राहुल देव को इस साल के पंडित हरिदत्त शर्मा पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। पंडित हरिदत्त शर्मा जयंती पुरस्कार समिति की ओर से शुक्रवार को दिल्ली में तीनमूर्ति स्थित नेहरू मेमोरियल सभागार में आयोजित समारोह में राहुल देव को यह अवॉर्ड दिया गया। इसके तहत उन्हें 51,000 रुपए, प्रशंसा पत्र, एक स्मारिका और एक शॉल दिया गया।

राहुल देव को इस पुरस्कार से सम्मानित करते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि पत्रकार के अंदर राजनीतिक चेतना होना बहुत जरूरी है। उन्होंने पंडित हरिदत्त शर्मा के जीवन मूल्य और प्रमुख उपलब्धियों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि राहुल देव एक प्रमुख हिंदी पत्रकार हैं, जिन्होंने हमेशा अपने मूल्यों का पालन किया है और आज तक वे अपने पेशे में अपनी मूल भाषा और निष्पक्ष राय पेश करने की इच्छाशक्ति रखते हैं।

वहीं, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जनार्दन द्विवेदी ने कहा कि पंडित हरिदत्त शर्मा के समय पत्रकारिता अलग थी। उस समय पत्रकार जो लिखता था, उसका उत्तरदायी होता था।

इस मौके पर केंद्रीय परिवहन राज्य मंत्री वीके सिंह, पूर्व केंद्रीय रेल मंत्री सुरेश प्रभु, डॉ. एचआर नागेंद्र, पत्रकार विनोद अग्निहोत्री, लेखक और कवि अशोक चक्रधर, एशियन फिल्म और टेलिविजन संस्थान के अध्यक्ष संदीप मारवाह और आयोजक राज कुमार शर्मा आदि भी उपस्थित थे।

गौरतलब है कि विख्यात पत्रकार, लेखक, विचारक, वक्ता, सामाजिक कार्यकर्ता, कुशल प्रशासक और राजनीतिज्ञ पंडित हरिदत्त शर्मा की याद में समिति की ओर से 25 वर्षों से इस कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। इसके तहत हर साल यह पुरस्कार सकारात्मक पत्रकारिता, लेखन और समाजसेवा के क्षेत्र में बेहतर काम करने वालों को दिया जाता है।

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