iTV नेटवर्क के इस मंच पर जुटे दिग्गज, अहम मुद्दों पर हुआ ‘मंथन’

देश के बड़े न्यूज ब्रॉडकास्टर्स में शुमार ‘आईटीवी नेटवर्क’ ने गुरुवार को देश के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक हालातों पर चर्चा करने के लिए ‘इंडिया न्यूज मंच’ का आयोजन किया।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 17 December, 2021
Last Modified:
Friday, 17 December, 2021
India News Manch

देश के बड़े न्यूज ब्रॉडकास्टर्स में शुमार ‘आईटीवी नेटवर्क’ (iTV Network) ने गुरुवार को देश के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक हालातों पर चर्चा करने के लिए ‘इंडिया न्यूज मंच’ का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का आयोजन दिल्ली स्थित इम्पीरियल होटल (Imperial Hotel) में किया गया। इस आयोजन में केंद्रीय मंत्री, राज्य मंत्री, सांसद, पार्टी प्रवक्ता से लेकर सीएम तक ने भाग लिया। इस मंच पर देश के वर्तमान हालात पर चर्चा के अलावा आने वाले पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव पर भी मंथन हुआ।

इस आयोजन को लेकर ‘आईटीवी नेटवर्क’ के संस्थापक कार्तिकेय शर्मा ने इसे गर्व का विषय बताया और कहा कि एक ऐसे समय में जब पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव नजदीक हैं, 7 केंद्रीय मंत्री, 28 सांसद, एक राज्य के सीएम और राजनीतिक दलों के प्रवक्ताओं को एक ही मंच पर बुलाना उनके लिए गर्व की बात है।

उन्होंने कहा कि एक ही मंच से इतने विद्वान और गुणी राजनेताओं को सुनना दर्शकों के लिए एक अलग अनुभव रहा है। देश के ज्वलंत मुद्दे उठाने में हमारे नेटवर्क की बड़ी भूमिका रही है और सिर्फ इस इस मंच के माध्यम से ही नहीं, बल्कि आईटीवी नेटवर्क के हर चैनल के माध्यम से लोग हमसे जुड़े हैं। उन्होंने आगे कहा कि आईटीवी नेटवर्क की देश के विकास और बदलाव में अहम भूमिका है और हम आने वाले साल में भी ऐसे कार्यक्रम का आयोजन करते रहेंगे। सबसे पहले इस मंच से दिवंगत चीफ डिफेंस ऑफ़ स्टाफ बिपिन रावत को श्रद्वा सुमन अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई। कार्यक्रम का सीधा प्रसारण ‘न्यूज एक्स’ (News X) और ‘इंडिया न्यूज’ पर किया गया।

इसके अलावा नेटवर्क के सभी क्षेत्रीय चैनल्स ‘इंडिया न्यूज राजस्थान’ (India News Rajasthan), ‘इंडिया न्यूज हरियाणा’ (India News Haryana), ‘इंडिया न्यूज पंजाब’ (India News Punjab), ‘इंडिया न्यूज गुजरात’ (India News Gujarat), ‘इंडिया न्यूज यूपी/यूके’ (India News UP/Uttarakhand), ‘इंडिया न्यूज एमपी/छत्तीसगढ़’ (India News MP/Chhattisgarh), ‘इंडिया न्यूज जॉय बांग्ला’ (India News Joy Bangla) और ‘एनई न्यूज’ (NE News) पर भी कार्यक्रम से जुड़े अंशों का प्रसारण किया गया। साथ ही यू-ट्यूब के अलावा ओटीटी प्लेटफॉर्म्स डेली हंट, जी5, शेमारूमी, एमएक्स प्लेयर, वाचो, मजालो, जियो टीवी, टाटा स्काई और पेटीएम लाइव स्ट्रीम पर भी इसका प्रसारण हिंदी और अंग्रेजी भाषा में किया गया।

कार्यक्रम में शामिल होने वाले मुख्य अतिथियों में नितिन गडकरी (Union Minister, Road, Transport & Highways),पीयूष गोयल (Union Minister, Commerce & Industry), अनुराग ठाकुर (Union Minister, Information & Broadcasting), गजेंद्र शेखावत (Union Minister, Jal Shakti), मुख्तार अब्बास नकवी (Union Minister, Minority Affairs) दिल्ली के सीएम अरविन्द केजरीवाल, जितेंद्र सिंह (Union Minister, Civil Aviation), राजीव चंद्रशेखर (Union Minister, Skill Development & Entrepreneurship), जनरल जेजे सिंह (Former Chief Of Indian Army), अनिल चोपड़ा, एयर मार्शल (Air Marshal) (R), यूपी के पूर्व सीएम और लोकसभा सांसद अखिलेश यादव, लोकसभा सांसद असदुद्दीन ओवैसी, लोकसभा सांसद डॉक्टर फारुख अब्दुल्ला, राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी, राज्यसभा सांसद मनोज झा, राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा, राज्यसभा सांसद और आरएसएस विचारक राकेश सिन्हा, राज्यसभा सांसद अमी याजनिक और बीजेपी के पूर्व  नेशनल जरनल सेक्रेट्री (National General Secretary) राम माधव आदि शामिल रहे।

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दूरसंचार मंत्रालय के प्रवक्ता बने राजीव जैन

राजीव जैन को पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस, आवास एवं शहरी मामलों का मंत्रालय  के साथ दूरसंचार मंत्रालय के लिए एडिशनल डायरेक्टर जनरल (एडीजी) व स्पोक्सपर्सननियुक्त किया गया है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 26 September, 2022
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Monday, 26 September, 2022
rajiv46813

राजीव जैन को पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस, आवास एवं शहरी मामलों का मंत्रालय  के साथ दूरसंचार मंत्रालय के लिए एडिशनल डायरेक्टर जनरल (एडीजी) व स्पोक्सपर्सन (प्रवक्ता) नियुक्त किया गया है।

इससे पहले जैन रेल मंत्रालय में एडिशनल डायरेक्टर जनरल (एडीजी) थे, साथ ही यहां पीआर का काम भी देखते थे।

राजीव जैन प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, आवास एवं शहरी मामलों का मंत्रालय, नागरिक उड्डयन और आयुष मंत्रालय के एडिशनल डायरेक्टर जरनल (एडीजी) रह चुके हैं। इसके अतिरिक्त वे दूरदर्शन न्यूज के डायरेक्टर रह चुके हैं और डीडी मध्य प्रदेश को भी हेड कर चुके हैं।

राजीव जैन प्रतिष्ठित यूसी बर्कले और आईआईएम अहमदाबाद के पूर्व छात्र हैं।

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‘हैप्पी बर्थडे: KG सुरेश बोले तो Knowledge Guru सुरेश’

सत्य, तथ्य, धर्म, दायित्व, शोध, सुधार, नवाचार, गुणवत्ता, समस्या, समाधान, विश्वास, शिक्षा, सेवा, राष्ट्रधारा और कर्तव्य पथ का प्रार्थी बोल रहा हूं। मैं केजी सुरेश का विद्यार्थी बोल रहा हूं।

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Published - Monday, 26 September, 2022
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Monday, 26 September, 2022
KG Suresh

सत्य, तथ्य, धर्म, दायित्व, शोध, सुधार, नवाचार, गुणवत्ता, समस्या, समाधान, विश्वास, शिक्षा, सेवा, राष्ट्रधारा और कर्तव्य पथ का प्रार्थी बोल रहा हूं। मैं केजी सुरेश का विद्यार्थी बोल रहा हूं। वो भी उनके जन्मदिन पर। हालांकि ये कोई जन्मदिन भर नहीं है। यह KG यानी Knowledge Guru दिन है या KG दिवस। वह इसलिए क्योंकि KG हुआ जा सकता है, बना नहीं जा सकता। KG कोई व्यक्ति नहीं है। KG ज्ञान गुरु हैं।

दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित महाविद्यालय अम्बेडकर में 1999 में KG सर की कक्षा लगी। जिस दिन लगी, उसी दिन कक्षा का हर विद्यार्थी KG सर का शिष्य हो गया और उन्होंने अपने हर शिष्य को अपने गर्भ में धारण किया। यह भारतीय गुरुकुल प्रणाली है जब गुरू अपने शिष्य को गुरुकुल में लेते समय यह घोषणा करता है कि मैं तुम्हें अपने गर्भ रूपी गुरुकुल में धारण करता हूं। उस दिन KG सर ने ऐसा ही किया और अपने गुरुरूपी गर्भ से तरह-तरह के रत्नों का आविष्कार किया। सप्ताह में एक दिन KG सर की क्लास होती थी और क्लास पूरी ठस्सम ठस्स।

दरअसल, झगड़ा होता था कि कौन आगे बैठेगा। तो झगड़े को पहली बार उन्होंने दूर किया 1999 में रोटेशन पर आगे बैठने के नियम को लागू कर। और फिर शुरू होता था उनके धाराप्रवाह होने वाला लेक्चर, जिसे सुनकर हर विद्यार्थी रोमांचित हो उठता और समझने लगता था कि मैं स्वयं KG हूं। मैं भी खुद को KG मानता था। और सबसे बड़ा KG मैं ही था, क्योंकि उस कक्षा में मैं मॉनिटर नियुक्त था। जब भी KG सर की कक्षा होती, मेरे भीतर का KG उभरता जाता। इसलिए कहा मैंने KG हुआ तो जा सकता है परन्तु बना नहीं जा सकता। क्योंकि सप्ताह भर की कक्षा में वे जीवन भर का सबक दे जाते थे।

कक्षा का मॉनिटर होने के नाते मैं उनका पहला विद्यार्थी था और आज भी हूं। उन्होंने मेरे जैसे विद्यार्थियों को अपने उसी गर्भ में धारण किया जो ज्ञान से विशेष ज्ञान की धुरी है। निरंतर तराशते रहे। आज भी तराशते हैं। एक कुशल साध के रूप में जौहरी के रूप में नहीं। साध के रूप में इसलिए क्योंकि हीरा परखे जौहरी, शब्दहि परखे साध। कबीर परखे साध को, ताका मता अगाध। वे शब्द के पारखी हैं। भाव के निरूपक हैं। बात-बात में व्यक्ति के चरित्र में इनका निर्माण कर देते हैं।

उसी कक्षा की चारदीवारी में उन्होंने 1999 के उस बैच को साध के रूप में तराशने का काम किया था, जिसमें अधिकांश विद्यार्थियों ने राष्ट्रपटल पर पत्रकारिता के मूल्यों को स्थापित करने का कार्य किया। इसका मुख्य कारण मैं उनका प्रथम विद्यार्थी होते हुआ मानता हूं कि उन्हें कोई वहम नहीं है, क्योंकि उनमें अहम नहीं है। कभी स्वयं की तारीफ और भेंट उनसे ज्ञान पाने के लिए कारगर नहीं रही। विमर्श, विचार, शब्द, पड़ताल, भाव की पवित्रता उन्हें अधिक भाव-विभोर करती है।

कक्षा से बाहर वे खाटी पत्रकार और कक्षा में परिपाटी के गुरू दिखते हैं। आज भी उनका हर विद्यार्थी उनके संपर्क में है। जैसे भारतीय ज्ञान प्रणाली में गुरू जीवनपर्यंत शिष्य के कल्याण की कामना और आवश्यकता पड़ने पर उसका मार्गदर्शन करता है, उसी रूप में विद्यार्थी कल्याण उनकी कार्यसूची में शीर्ष पर रहा है। एक्सपीरियंशल लर्निंग का उदाहरण मुझे आज भी याद है। जब कक्षा में उन्होंने हरियाणा के चरखी-दादरी के विमान हादसे की रिपोर्टिंग का उदाहरण बताते हुए एक्सपीरियंशल लर्निंग और आपदा प्रबंधन की पत्रकारिता के गुर शिष्यों को सिखा दिए थे। उपहार कांड की रिपोर्टिंग कैसे की और कैसे नवपत्रकार खोज कर रिपोर्ट लिखे, उन्होंने उस घटना के वृतांत्त से रोम रोम को रोमांचित कर दिया था। कैसे उन्होंने एके47 के निर्माता रूसी वैज्ञानिक का मौका पाकर साक्षात्कार लिया और न्यूज ब्रेक की।

उन्होंने हर विद्यार्थी को फैक्टिविस्ट बनाया है न कि एक्टिविस्ट। वे आज भी बात-बात में सम्मुख बैठे विद्यार्थी में फैक्टिविजम जगा देते हैं। जो सत्य की डगर पर राष्ट्र के नवजागरण और पुनर्जागरण के भाव को कलम से कागद पर कुरेदता है। वे कहते हैं कि न्यूज कभी फेक हो ही नहीं सकती क्योंकि फेक पत्रकार होता है, फेक कलम की स्याही होती है, फेक धारणा है, फेक विमर्श होता है, फेक विचार होते हैं, फेक दृष्टि होती है क्योंकि इनके फेयर होने के कोई पैरामीटर नहीं होते परन्तु न्यूज के पैरामीटर होते हैं। पत्रकार जब-जब पैरामीटर पर सूचना या विचार का लेखन करता है वो फेयर होगा। फेक तो कंटेंट होता है।

अपने इस राष्ट्रीय विचार से KG सर राष्ट्र विरोधी विमर्श को लक्ष्य मानकर लिखने वाले पत्रकारों को आईना तो दिखाते ही हैं, साथ ही नवपत्रकारों को न्यूज पैरामीटर की सीख भी देते हैं। पत्रकारिता पेशे और पत्रकारिता शिक्षण की कई भ्रांतियों को KG सर ने राष्ट्रीय विमर्श के रूप में स्थापित किया है। अब नागरिक पत्रकारिता को ही ले लीजिए। KG सर अक्सर बोलते हैं कि जब सिटीजन डॉक्टर नहीं होता, सिटीजन इंजीनियर नहीं होता, सिटीजन वकील नहीं होता तो सिटीजन जर्नलिस्ट घातक व्यवस्था है। क्योंकि जर्नलिस्ट वही है जो प्रवीण है और राष्ट्र जिसके केंद्र में है। बाकी सब सिटीजन कम्युनिकेटर हैं, जर्नलिस्ट नहीं।

यही नहीं बात-बात में KG सर ने सिखाया है की गूगल के बाद की पत्रकारिता नहीं गूगल से पहले की पत्रकारिता की संस्थापना ही उनका ध्येय है। जब पत्रकार को मिट्टी की समझ होती थी। गूगल के बाद चिट्ठी की समझ नहीं रही। ऐसे में शिक्षकों का दायित्व बढ़ जाता है उनके विचारों में अक्सर यह बल रहता है। इसी क्रम में शब्दों, विचारों, विमर्शों और व्यवस्थाओँ में व्याप्त विसंगतियों की खाल नोंचने के माहिर हैं KG सर। सबने माना फैक्ट चेक आज के दौर में जरूरी है। और लगभग हर पत्रकार बन बैठा फैक्टचेकर।

KG सर कहते हैं अगर कोई फैक्ट है तो उसे चेक करने की किसी की हिम्मत तक नहीं है। वे कहते हैं कंटेंट चेक हो सकता है परन्तु जो पहले से ही फैक्ट है, उसे चेक करने की कोई आवश्यकता नहीं। फैक्ट की रात के घनघोर अंधेरे के बाद भानू प्रकाशमान होगा। फैक्ट है। इसे चेक नहीं किया जा सकता। क्योंकि फैक्ट की कसौटी ही पूर्व में चेक किए गए सत्य से होकर साबित हुई है। वे जहां भी होते हैं, उस संस्था के विद्यार्थी और कर्मचारी उनकी वरीयता में होते हैं। छात्र कल्याण, कर्मचारी कल्याण उनका धर्म है। मैं स्वयं गवाह हूं कि किसी कर्मचारी की विषम स्थिति में उनके साथ KG सर के खड़े होने का। अभी हाल की घटना जरूर हम सबने उनकी एफबी वॉल पर देखी है।

सत्य, सनातन और मूल्याधिष्ठित शिक्षण प्रविधि उनकी कोर वैल्यू है। बात-बात में हर बात सिद्ध करती है इनकी शिक्षा। इसलिए वे क्रिकेट मैच के ऐसे कप्तान हैं, जिसमें उनका हर विद्यार्थी उनका बल्ला है जो चलेगा ही रुकेगा नहीं। मैंने जैसा कहा कि मैं स्वयं को KG मानता था और हूं अगर ऐसा हुआ तो मेरी कलम से KG सर क्या बोलेंगे। तो सुनें- 

सत्य की रचना। विश्वास की संरचना। मीडिया का धर्म। मीडिया शिक्षकों का कर्म। राष्ट्र विमर्श। निर्माणकारी परामर्श। कलम की सार्थकता और भारतीय व्रतधारी मीडिया का यशस्वी पत्रकार। यही विचार सर्वेश बोलता हूं। मैं KG सुरेश बोल रहा हूं।

फेक न्यूज नहीं। फेक कंटेंट। गूगल के बाद की पत्रकारिता नहीं गूगल से पहले की पत्रकारिता। घटना प्रधान लेखन नहीं। समस्या प्रधान लेखन बताने वाला सुलेख लिख रहा हूं। मैं KG सुरेश बोल रहा हूं।

नित नए प्रयोग। हर घड़ी सुयोग। नई रचनाएं। नई परिघटनाएं। नई विधियां, गतिविधियां। नए कीर्तिमान। पुराने प्रतिमान। नए लोग। सबका योग। मैं राष्ट्र का प्रलेख बोल रहा हूं। मैं KG सुरेश बोल रहा हूं।

एक मीडिया के छात्र की कलम से मीडिया गुरू के प्रति जन्मदिवस पर भाव चेतना। आप स्वस्थ रहें। व्यस्त रहें और मस्त रहें। आपका एक –एक शब्द राष्ट्र निर्माण करे। आपको जन्मदिवस की अनंतकोटि बधाई और शुभकामनाएं।     

डॉ. नीरज कर्ण सिंह, सहायक आचार्य,  हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय, महेंद्रगढ़।।

(यह लेखक के निजी विचार हैं)

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सरकार ने राष्ट्रपति के प्रेस सचिव अजय कुमार सिंह का कार्यकाल बढ़ाया

कैबिनेट की नियुक्ति समिति ने अजय कुमार सिंह के सेवा विस्तार को अपनी मंजूरी प्रदान कर दी है। अब 25 सितंबर 2024 तक वह इस पद पर बने रहेंगे।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Sunday, 25 September, 2022
Last Modified:
Sunday, 25 September, 2022
Ajay Kumar Singh

वरिष्ठ पत्रकार और लेखक अजय कुमार सिंह दो साल तक और राष्ट्रपति के प्रेस सचिव के पद पर बने रहेंगे। दरअसल, इस पद पर उनका दो साल कार्यकाल बढ़ा दिया गया है। कैबिनेट की नियुक्ति समिति (The Appointment Committee of Cabinet) ने इस पद पर अजय कुमार सिंह के दो साल के सेवा विस्तार को अपनी मंजूरी प्रदान कर दी है।

कैबिनेट की नियुक्ति समिति की सेक्रेटरी दीप्ति उमाशंकर की ओर से इस बारे में आदेश भी जारी कर दिया गया है। इस शासनादेश में कहा गया है कि अगले दो साल के लिए अजय कुमार सिंह का राष्ट्रपति के प्रेस सचिव के पद पर कार्यकाल बढ़ाया गया है। यह सेवा विस्तार कांट्रैक्ट बेस (संविदा के आधार पर) पर होगा और 26 सितंबर 2022 से 25 सितंबर 2024 तक अथवा अग्रिम आदेश तक (जो भी पहले हो) प्रभावी होगा। इससे पहले सिंह को जुलाई में दो महीने का सेवा विस्तार दिया गया था, जिसकी अवधि रविवार को खत्म हो रही थी।

अजय कुमार सिंह को प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में काम करने का तीन दशक से ज्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1985 में ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ (लखनऊ) से की थी। बाद में उन्होंने दिल्ली में ‘द पॉयनियर’ जॉइन कर लिया था। पूर्व में वह ‘बिजनेस स्टैंडर्ड’ ‘स्टार न्यूज’ (अब एबीपी न्यूज) और ‘न्यूज एक्स’ में भी अपनी जिम्मेदारी निभा चुके हैं।   

‘फर्स्टपोस्ट’ में एग्जिक्यूटिव एडिटर की भूमिका निभाने से पहले वह ‘गवर्नमेंस नाउ’ मैगजीन में एडिटर के रूप में भी काम कर चुके हैं। इसके बाद उन्होंने दोबारा ‘गवर्नमेंस नाउ’ में डायरेक्टर (एडिटोरियल) के पद पर वापसी की थी और इस मैगजीन का प्रिंट एडिशन बंद होने तक इसी पद पर काम कर रहे थे। यहां वह मैगजीन के अंग्रेजी और मराठी एडिशन की कमान संभाल रहे थे। फिर वह 'फर्स्टपोस्ट' से कंट्रीब्यूटर के तौर पर जुड़ गए थे। 

इसके बाद राष्ट्रपति के प्रेस सचिव के रूप में वरिष्ठ पत्रकार अशोक मलिक का दो साल का कार्यकाल पूरा होने पर अजय कुमार सिंह को इस पद पर नियुक्त किया गया था। तब से वह इस पद पर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे।अब उनके सेवाकाल में दो साल का विस्तार किया गया है। 

बता दें कि अजय सिंह ने ‘आर्किटेक्ट ऑफ द न्यू बीजेपी: हाउ नरेंद्र मोदी ट्रांसफॉर्म्ड द पार्टी’ नाम से किताब भी लिखी है। अंग्रेजी में लिखी इस किताब को ‘पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया’ (PRHI) ने पब्लिश किया है। अजय सिंह ने इस पुस्तक में बताया है कि किस तरह नरेंद्र मोदी ने भारतीय जनता पार्टी की कायाकल्प की। मोदी के सांगठनिक कौशल पर केंद्रित इस पुस्तक में बताया गया है कि एक रणनीतिकार के तौर पर नरेंद्र मोदी में ऐसी क्या विशेषता है, जो उन्हें बाकी नेताओं से अलग खड़ा करती हैं और भाजपा में जब भी मोदी को जो भी भूमिका मिली, उनकी बनाई रणनीति ने कैसे पार्टी को लाभ पहुंचाया।

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इंडियन न्यूजपेपर सोसाइटी के प्रेजिडेंट चुने गए के. राजा प्रसाद रेड्डी

तेलुगू दैनिक ‘साक्षी’ से जुड़े के. राजा प्रसाद रेड्डी शुक्रवार को इंडियन न्यूजपेपर सोसाइटी (आईएनएस) के प्रेजिडेंट चुने गए

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 24 September, 2022
Last Modified:
Saturday, 24 September, 2022
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तेलुगू दैनिक ‘साक्षी’ से जुड़े के. राजा प्रसाद रेड्डी शुक्रवार को इंडियन न्यूजपेपर सोसाइटी (आईएनएस) के प्रेजिडेंट चुने गए। मीडिया संगठन ने यह जानकारी दी।

एक बयान में बताया गया है कि आईएनएस की 83वीं वार्षिक आम बैठक में समाचार पत्र ‘आज समाज’ के राकेश शर्मा को आईएनएस (INS) का ‘डिप्टी प्रेजिडेंट’ और मातृभूमि आरोग्य मासिक के एम.वी.एस. कुमार को ‘वाइस प्रेजिडेंट’ चुना गया।

बयान के अनुसार, ‘अमर उजाला’ समाचार पत्र के तन्मय माहेश्वरी को आईएनएस का ट्रेजरर (कोषाध्यक्ष) चुना गया है।

इसमें कहा गया है, ‘आईएनएस की आज वार्षिक आम बैठक वीडियो कांफ्रेंस और अन्य डिजिटल माध्यमों के जरिये हुई।’

आईएनएस की 41 सदस्यीय कार्यकारिणी समिति में मोहित जैन (द इकोनॉमिक टाइम्स), विवेक गोयनका (द इंडियन एक्सप्रेस), जयंत एम. मैथ्यू (मलयाला मनोरमा), अतिदेब सरकार (द टेलीग्राफ) और के.एन. तिलक कुमार (डेक्कन हेराल्ड और प्रजावाणी) शामिल हैं

अन्य सदस्यों की सूची यहां देखें:

गिरीश अग्रवाल (दैनिक भास्कर, भोपाल)
समहित बल (प्रगतिवादी)
समुद्र भट्टाचार्य (हिन्दुस्तान टाइम्स, पटना)
होर्मसजी एन. कामा (बॉम्बे समाचार)
गौरव चोपड़ा (फिल्म दुनिया)
विजय कुमार चोपड़ा (पंजाबी केसरी, जालंधर)
करण राजेंद्र दर्डा (लोकमत, औरंगाबाद)
विजय जवाहरलाल दर्डा (लोकमत, नागपुर)
जगजीत सिंह दर्दी (चारदीकला डेली)
विवेक गोयनका (द इंडियन एक्सप्रेस, मुंबई)
महेंद्र मोहन गुप्ता (दैनिक जागरण)
प्रदीप गुप्ता (डेटाक्वेस्ट)
संजय गुप्ता (दैनिक जागरण, वाराणसी)
शिवेंद्र गुप्ता (बिजनेस स्टैंडर्ड)
विवेक गुप्ता (संमार्ग)
सर्विंदर कौर (अजीत)
लक्ष्मीपति (दिनमलर)
विलास ए मराठे (दैनिक हिन्दुस्तान, अमरावती)
नरेश मोहन (रविवार स्टेट्समैन)
अनंत नाथ (गृहशोभिका, मराठी)
प्रताप जी. पवार (साकाल)
राहुल राजखेवा (द सेंटिनल)
आर एम आर रमेश (दिनाकरन)
अतिदेब सरकार (द टेलीग्राफ)
पार्थ पी सिन्हा (नवभारत टाइम्स)
प्रवीण सोमेश्वर (द हिन्दुस्तान टाइम्स)
किरण डी ठाकुर (तरुण भारत, बेलगाम)
बीजू वर्गीस (मंगलम साप्ताहिक)
आई वेंकट (अन्नदाता)
कुंदन आर व्यास (व्यापार, मुंबई)
रवींद्र कुमार (द स्टेट्समैन)
किरण बी वडोदरिया (संभव मेट्रो)
पी वी चंद्रन (गृहलक्ष्मी)
सोमेश शर्मा (राष्ट्रदूत सप्तहिक)
शैलेश गुप्ता (मिड-डे)
एल आदिमूलम (स्वास्थ्य और एंटीसेप्टिक)

बता दें कि आईएनएस देश में समाचार पत्रों और पत्रिकाओं का शीर्ष संगठन है।

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सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई का अब होगा सीधा प्रसारण, चैनल शुरू करने को लेकर उठी मांग

अब आप कोर्ट में चल रही सुनवाई को लाइव देख सकेंगे। फिर चाहे वह जनहित का मामला हो या देशहित व संविधान से जुड़े मामले सबकी सुनवाइयों का सीधा प्रसारण किया जाएगा।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 22 September, 2022
Last Modified:
Thursday, 22 September, 2022
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देश में ऐसे कई मामले होते हैं जिनकी सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में चल रही होती है, जिन्हें निष्पक्ष न्याय के लिए सुप्रीम कोर्ट भेजा जाता है। ऐसे में जनता की निगाहें भी इनके फैसले पर होती हैं, लेकिन अब एक अच्छी खबर सामने आई है। अब आप कोर्ट में चल रही सुनवाई को लाइव देख सकेंगे। फिर चाहे वह जनहित का मामला हो या देशहित व संविधान से जुड़े मामले सबकी सुनवाइयों का सीधा प्रसारण किया जाएगा। यह ऐतिहासिक फैसला मंगलवार को लिया गया।

बता दें कि पिछले काफी समय से इस पर काम चल रहा था, जिसके बाद अब जाकर सारी चीजें तय हुई हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने अगले सप्ताह यानी 27 सितंबर से सभी संवैधानिक बेंच की सुनवाइयों का लाइव स्ट्रीमिंग यानी सीधा प्रसारण करने का निर्णय लिया है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) उदय उमेश ललित ने मंगलवार शाम को इसे लेकर शीर्ष अदालत के सभी जजों की एक बैठक बुलाई थी, जिसमें सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया।

बता दें कि लाइव स्ट्रीमिंग (Live Streaming) की शुरुआत संविधान पीठ में चल रहे मामलों से होगी, बाद में इसे दूसरे मामलों के लिए भी शुरू किया जाएगा।

हाल में ही सीनियर एडवोकेट इंदिरा जयसिंह ने इस बारे में चीफ जस्टिस समेत सुप्रीम कोर्ट के सभी जजों को लिखकर सूचित किया था। इसमें उन्होंने जनहित व संवैधानिक महत्व वाले मामलों की सुनवाई के सीधा प्रसारण की बात तो कही ही साथ ही इस दौरान वकीलों के बहस का भी रिकॉर्ड रखने पर जोर दिया था।

सीनियर एडवोकेट ने कहा कि EWS, हिजाब मामला, नागरिकता संशोधन विधेयक जैसे देश हित के मामलों की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में हो रही है, जिसका सीधा प्रसारण होना चाहिए। उन्होंने इसके लिए 2018 के फैसले का हवाला दिया जिसके अनुसार हर नागरिक का मूल अधिकार है कि उसे सूचना या जानकारी पाने की आजादी मिले। साथ ही सभी को न्याय पाने का भी अधिकार है।

सीनियर एडवोकेट इंदिरा जयसिंह ने सुप्रीम कोर्ट का एक अपना चैनल होने की भी सलाह दी है। साथ ही उन्होंने कहा कि तब तक शीर्ष कोर्ट अपनी वेबसाइट के साथ-साथ यूट्यूब पर लाइव स्ट्रीमिंग की शुरुआत कर सकता है। कई मौकों पर सुप्रीम कोर्ट ने लाइव स्ट्रीमिंग किया भी है। इसका जिक्र करते हुए सीनियर एडवोकेट ने कहा कि कोर्ट के पास इसके लिए पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूद है। इस क्रम में उन्होंने पूर्व चीफ जस्टिस एन वी रमना की रिटायरमेंट की तारीख पर हुए लाइव स्ट्रीमिंग के बारे में बताया। उन्होंने गुजरात, ओडिशा, कर्नाटक, झारखंड, पटना और मध्य प्रदेश के हाई कोर्ट में यू ट्यूब के जरिए होने वाले लाइव स्ट्रीमिंग की भी चर्चा की।

गौरतलब है कि 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले में सुनवाई की लाइव स्ट्रीमिंग का फैसला दिया था। कोरोनाकाल में भी सुप्रीम कोर्ट में मामलों की वीडियो कांफ्रेसिंग के द्वारा सुनवाई की गई थी। हालांकि तब आम लोगों को यह सुनवाई देखने की व्यवस्था नहीं थी। इस साल 26 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने तत्कालीन चीफ जस्टिस एन.वी. रमना को विदाई देने के लिए बैठी सेरेमोनियल बेंच की कार्रवाई का सीधा प्रसारण किया था। अब शुरुआत में यह प्रसारण यूट्यूब पर किया जाएगा, बाद में सुप्रीम कोर्ट इसके लिए अपनी वेब भी सेवा शुरू करेगा। 

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सुप्रीम कोर्ट ने न्यूज चैनलों को लगाई फटकार, कहा- तय हो न्यूज एंकर्स की जिम्मेदारी

सुप्रीम कोर्ट ने न्यूज चैनलों में होने वाली बहस की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए नाराजगी व्यक्त की है और टीवी चैनलों को फटकार लगाई है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 21 September, 2022
Last Modified:
Wednesday, 21 September, 2022
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सुप्रीम कोर्ट ने न्यूज चैनलों में होने वाली बहस की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए नाराजगी व्यक्त की है और टीवी चैनलों को फटकार लगाई है।  कोर्ट ने कहा कि न्यूज चैनल भड़काऊ बयानबाज़ी का प्लेटफार्म बन गए हैं। प्रेस की आजादी अहमियत रखती है लेकिन बिना रेगुलेशन के टीवी चैनल हेट स्पीच का जरिया बन गए हैं। जस्टिस केएम जोसेफ और जस्टिस ऋषिकेश रॉय की बेंच ने बुधवार को यह बात कही।

कोर्ट ने कहा कि राजनेताओं ने इसका सबसे अधिक फायदा उठाया है और टेलीविजन चैनल उन्हें इसके लिए मंच देते हैं। इस पर सीनियर एडवोकेट संजय हेगड़े ने कहा कि चैनल और राजनेता ऐसी हेट स्पीच से ही चलते हैं। चैनलों को पैसा मिलता है इसलिए वे दस लोगों को बहस में रखते हैं।

कोर्ट ने कहा कि मेनस्ट्रीम मीडिया या सोशल मीडिया चैनल बिना रेगुलेशन के हैं। न्यूज एंकर्स की जिम्मेदारी पर सवाल उठाते हुए कोर्ट ने कहा कि एंकर की जिम्मेदारी कि बहस में कोई भड़काऊ बात न हो, लेकिन एंकर ऐसा नहीं करते। इससे सख्ती से निपटा नहीं जा रहा है। एंकर की जिम्मेदारी तय होनी। अगर किसी एंकर के कार्यक्रम में भड़काऊ कंटेंट होता है, तो उसको ऑफ एयर किया जाना चहिए और जुर्माना लगाना चहिए। कोर्ट ने पूछा कि इस मामले में सरकार मूकदर्शक क्यों बनी हुई है? क्या यह एक मामूली मुद्दा है?

कोर्ट ने यह भी कहा कि प्रेस की स्वतंत्रता महत्वपूर्ण है, लेकिन हमें पता होना चाहिए कि रेखा कहां खींचनी है। हेट स्पीच का हमारे दिमाग पर गंभीर प्रभाव पड़ता। यहां की मीडिया को अमेरिका जितनी आजादी नहीं है, लेकिन यह पता होना चाहिए कि सीमा रेखा कहां खींचनी है। लिहाजा टीवी पर अभद्र भाषा बोलने की आजादी नहीं दी जा सकती है। कोर्ट ने कहा कि ऐसा करने वाले यूनाइटेड किंगडम के एक टीवी चैनल पर भारी जुर्माना लगाया गया था। लेकिन हमारे यहां ऐसा नहीं है। उनसे सख्ती नहीं हो रही है। अगर मंजूरी मिलती है तो हम जुर्माना लगा सकते हैं या उन्हें ऑफ एयर कर सकते हैं।

नफरत फैलाने वाले शो दर्शकों को क्यों पसंद आते हैं, इस पर कोर्ट ने कहा कि किसी रिपोर्ट में नफरत से भरी भाषा कई लेवल पर होती है। ठीक वैसे, जैसे किसी को मारना। आप इसे कई तरह से अंजाम दे सकते हैं। चैनल हमें कुछ विश्वासों के आधार पर बांधे रखते हैं। लेकिन, सरकार को प्रतिकूल रुख नहीं अपनाना चाहिए। उसे कोर्ट की मदद करनी चाहिए।

हरिद्वार में पिछले साल आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान दिए गए भड़काऊ भाषण मामले पर सुनवाई के दौरान न्यूज चैनलों पर होने वाली डिबेट की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए सुनवाई करने वाली बेंच के जज जस्टिस के एम जोसेफ ने कहा कि टीवी पर दस लोगों को डिबेट में बुलाया जाता है। जो अपनी बात रखना चाहते है, उन्हें म्यूट कर दिया जाता है। उन्हें अपनी बात रखने का मौका ही नहीं मिलता।

टीवी चैनलों की हेट स्पीच वाली रिपोर्ट वाली याचिकाओं पर अगली सुनवाई 23 नवंबर को होगी। कोर्ट ने केंद्र को निर्देश दिया है कि वह ये स्पष्ट करे कि क्या वह हेट स्पीच पर अंकुश लगाने के लिए विधि आयोग की सिफारिशों पर कार्रवाई करने का इरादा रखती है।

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कोविड से जान गंवाने वाले पत्रकारों के परिजनों को CM योगी ने दी आर्थिक सहायता

कोरोना वायरस की वजह से जान गंवाने वाले प्रदेश के पत्रकारों के परिवारों को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 10 लाख रुपए की सहायता राशि जारी की है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 21 September, 2022
Last Modified:
Wednesday, 21 September, 2022
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कोरोना वायरस (कोविड-19) की वजह से जान गंवाने वाले प्रदेश के पत्रकारों के परिवारों को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 10-10 लाख रुपए की सहायता राशि जारी की है।

यह सूचना उत्तर प्रदेश के सूचना एवं जनसंचार विभाग की ओर से 20 सितंबर को जारी की गई। इस योजना के तहत कुल 53 पत्रकारों के परिवारों को यह धनराशि दी जाएगी। इस योजना को राज्यपाल की अनुमति के बाद लागू किया गया, जिसमें उत्तर प्रदेश सरकार कुल 5.30 करोड़ रुपए खर्च करेगी।

गौरतलब है कि योगी आदित्यनाथ ने इस साल हिंदी पत्रकारिता दिवस (30 मई) पर कोरोनावायरस (कोविड-19) की वजह से जान गंवाने वाले प्रदेश के पत्रकारों के परिवारों को 10 लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया था। मुख्यमंत्री का निर्देश मिलने के बाद प्रदेश का सूचना विभाग कोविड-19 की वजह से जान गंवाने वाले पत्रकारों का ब्यौरा जुटाने में लग गया था, ताकि उनके परिवारों को जल्द से जल्द आर्थिक सहायता प्रदान की जा सके। इसके लिए पीड़ित परिवारों से प्रार्थना पत्र मांगे गए थे।

इस योजना के तहत आर्थिक सहायता पाने के लिए मृतक पत्रकार का मान्यता प्राप्त होना जरूरी नहीं था, यानी किसी भी पेशेवर पत्रकार की मौत कोरोना संक्रमण से होने की परिस्थिति में उसके परिवार को आर्थिक सहायता दी जाएगी।

इस घोषणा के बाद, 31 जुलाई को लखनऊ के लोक भवन सभागार में आयोजित कार्यक्रम में, मुख्यमंत्री योगी ने दिवंगत मीडियाकर्मियों के परिजनों को सहायता राशि का चेक सौंपा था। इसकी धनराशि 20 सितम्बर 2022 को सरकार द्वारा पत्रकार कल्याण कोष में डाली गई है, जिसे अब सभी परिवारों को सौंप दिया जाएगा।

बता दें कि कोरोना काल में कवरेज के दौरान कई पत्रकार कोरोना से संक्रमित हो गए थे, जिनमें कई का निधन हो गया है। ऐसे में उनके परिजनों के सामने भरण-पोषण की मुश्किल आ गई है। इसे देखते हुए ही योगी सरकार ने यह फैसला किया है।  

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अनुराग ठाकुर ने यूं समझाया 'वास्तविक पत्रकारिता' का अर्थ, मीडिया को लेकर कही ये बात

दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में सूचना प्रसारण मंत्री ने कहा कि मेनस्ट्रीम मीडिया के लिए सबसे बड़ा खतरा नए जमाने के डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से नहीं, बल्कि खुद मुख्यधारा के मीडिया चैनलों से है।

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Published - Wednesday, 21 September, 2022
Last Modified:
Wednesday, 21 September, 2022
Anurag Thakur

सूचना प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर का कहना है कि वास्तविक पत्रकारिता का मतलब है कि बिना तोड़े-मरोड़े खबरों को दिखाया जाए और सभी पक्षों को अपनी बात रखने का मौका दिया जाए।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नई दिल्ली में ‘एशिया पैसिफिक इंस्टीट्यूट फॉर ब्रॉडकास्टिंग डेवलपमेंट’ (AIBD) के एक कार्यक्रम में अनुराग ठाकुर ने कहा कि असली पत्रकारिता तथ्यों का सामना करने, सच्चाई पेश करने और सभी पक्षों को अपने विचार रखने के लिए मंच देने के बारे में है।

अनुराग ठाकुर के अनुसार, ‘मेरा व्यक्तिगत रूप से मानना है कि मेनस्ट्रीम मीडिया के लिए सबसे बड़ा खतरा नए जमाने के डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से नहीं, बल्कि खुद मुख्यधारा के मीडिया चैनलों से है। यदि आप अपने चैनल पर उन मेहमानों को आमंत्रित करने का निर्णय लेते हैं जो ध्रुवीकरण कर रहे हैं, जो झूठी खबरें फैलाते हैं और जो काफी चीखते- चिल्लाते हैं, तो आपके चैनलों की विश्वसनीयता कम हो जाती है।’  अनुराग ठाकुर ने कहा कि ऐसे में आपका शो देखने के लिए दर्शक एक मिनट के लिए रुक तो सकते हैं, लेकिन खबरों के विश्वसनीय और पारदर्शी स्रोत के रूप में कभी भी आपके एंकर, आपके चैनल अथवा ब्रैंड पर भरोसा नहीं करेंगे।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सूचना प्रसारण मंत्री का यह भी कहना था कि ब्रॉडकास्टर्स यह तय कर सकते हैं कि कंटेंट को कैसे सही तरीके से पेश किया जाए। खबरों में तटस्थता वापस लाने की वकालत करते हुए उन्होंने कहा कि तीखी बहसों से टीवी चैनल्स को व्युअरशिप तो मिल सकती है, लेकिन विश्वसनीयता नहीं।

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‘9X मीडिया’ ने भूपेंद्र माखी को किया प्रमोट, बनाया CEO

‘9X मीडिया’ ने भूपेंद्र माखी को चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर (सीईओ) के रूप में प्रमोट किया है।

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Published - Tuesday, 20 September, 2022
Last Modified:
Tuesday, 20 September, 2022
BhupendraMakhi458433

‘9X मीडिया’ ने भूपेंद्र माखी को चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर (सीईओ) के रूप में प्रमोट किया है। 9X मीडिया में लंबे समय तक माखी कंपनी के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) रहे हैं और अभी इसी पद पर कार्यरत थे। इसके पहले वे फाइनेंस के वाइस प्रेजिडेंट थे। वह 2007 से इस ऑर्गनाइजेशन के साथ जुड़े हुए हैं।

भूपेंद्र अब अपनी नई भूमिका में कंपनी के लिए स्ट्रैटजिक बिजनेस डेवलपमेंट का नेतृत्व करेंगे, यानी भारत में कंपनी के बिजनेस की ग्रोथ को और मजबूत बनाने की रणनीति पर काम करेंगे।

माखी को फाइनेंशियल सेक्टर की गहरी समझ है और मीडिया व एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में एक प्रभावशाली ट्रैक-रिकॉर्ड है।  

सीईओ के रूप में प्रमोट किए जाने पर टिप्पणी करते हुए भूपेंद्र माखी ने कहा, ‘मैं अपने निवेशकों और बोर्ड का आभारी हूं कि उन्होंने मुझे यह जिम्मेदारी सौंपी। 9X मीडिया एक महत्वपूर्ण पड़ाव पर पहुंच गया है और सकारात्मक प्रदर्शन कर रहा है। हम अत्यधिक उत्साहित हैं और मैं कंपनी के फायदे के लिए सभी टीमों के साथ मिलकर काम करना जारी रखूंगा और अपने सभी स्टेकहोल्डर्स की वैल्यू को बनाए रखूंगा।

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अरविंद केजरीवाल ने PM के मीडिया सलाहकार पर संपादकों को धमकाने का लगाया आरोप

दिल्ली को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मीडिया सलाहकार पर पत्रकारों व संपादकों को धमकाने का आरोप लगाया है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 20 September, 2022
Last Modified:
Tuesday, 20 September, 2022
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आम आदमी पार्टी के संयोजक व दिल्ली को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मीडिया सलाहकार पर पत्रकारों व संपादकों को धमकाने का आरोप लगाया है दरअसल, 18 सितंबर को अरविंद केजरीवाल ने पार्टी के पहले राष्ट्रीय जनप्रतिनिधि सम्मेलन को संबोधित किया। इस दौरान ही उन्होंने प्रधानमंत्री के मीडिया सलाहकार पर मीडिया को धमकाने का आरोप लगाया।

अरविंद केजरीवाल ने अपने भाषण में कहा कि मुझे बड़े-बड़े न्यूज चैनलों के एडिटर और मालिकों ने गंदी गालियां और धमकी भरे नोट दिखाए हैं कि पीएमओ में कार्यरत मीडिया सलाहकार कैसे-कैसे मैसेज उन्हें भेजते हैं। वे लिखकर भेजते हैं कि केजरीवाल को दिखाया तो ये कर देंगे, केजरीवाल को दिखाया तो वो कर देंगे। ‘आप’ को दिखाने की जरूरत नहीं है, आप अपने चैनल का दुरुपयोग कर रहे हों, क्या धमकियां दे रहे हैं वो, ऐसे देश चलाएंगे, फोन कर के धमकियां देते हैं।’

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि मैं उन मीडिया सलाहकार को एक ही बात कहना चाहता हूं कि आप जो मैसेज और धमकियां देते हो, यदि किसी ने उसका स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर डाल दिया, तो आप और प्रधानमंत्री जी शक्ल दिखाने लायक नहीं बचोगे। आपकी धमकियों को कई लोगों ने रिकॉर्ड करके रखा है, अगर सोशल मीडिया पर डाल दी तो चेहरा नहीं दिखा पाओगे, बंद करो इस तरह से मीडिया को धमकाना।

बता दें कि पहली बार रविवार को राष्ट्रीय जनप्रतिनिधि सम्मेलन में देशभर से आप पार्टी के सभी निर्वाचित प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। पार्टी ने संगठन को मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा करने के लिए बैठक बुलाई गई थी।

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