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लंबे समय तक चली विलय संबंधी गतिविधियों से ZEE का परिचालन प्रभावित: आर गोपालन
एक इनवेस्टर्स कॉफ्रेंस कॉल के दौरान, गोपालन ने यह भी दोहराया कि ZEE बोर्ड और मैनेजमेंट जी-सोनी विलय के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं। फिलहाल कंपनी उचित मंचों पर अपना बचाव करेगी
समाचार4मीडिया ब्यूरो 1 year ago
जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (ZEEL) के निदेशक मंडल (बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स) के चेयरमैन आर. गोपालन ने सोमवार को कहा कि सोनी (कल्वर मैक्स एंटरटेनमेंट) द्वारा मर्जर डील को समापन "समय से पहले" (premature) ही कर दिया गया, जबकि ZEEL उनके साथ सद्भावना वार्ता में लगा हुआ था। उन्होंने यह दावा भी किया कि लंबे समय तक और विलय-संबंधी तेज गतिविधियों ने कंपनी के संचालन को प्रभावित किया है।
सोमवार शाम को आयोजित एक इनवेस्टर्स कॉफ्रेंस कॉल के दौरान, गोपालन ने यह भी दोहराया कि ZEE बोर्ड और मैनेजमेंट जी-सोनी विलय के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं। फिलहाल कंपनी उचित मंचों पर अपना बचाव करेगी।
उन्होंने कहा, “सोनी के साथ विलय की विफलता पर हम दोहराते हैं कि ZEE बोर्ड और मैनेजमेंट कुछ स्थायी और अपरिवर्तनीय कदम उठाकर विलय को पूरा करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध थे। इस प्रक्रिया के दौरान बोर्ड ने सोनी के साथ चर्चा भी की।''
गोपालन ने इनवेस्टर्स कॉल के दौरान कहा, ''बोर्ड के तत्वावधान में, ZEEL मैनेजमेंट विलय को समाप्त करने के लिए सोनी के साथ सद्भावना चर्चा में लगा हुआ था। एमडी (पुनीत गोयनका) भी विलय के हित में पद छोड़ने के लिए सहमत थे। हालांकि, 22 जनवरी 2024 को अपने कम्युनिकेशन में, सोनी ने एकतरफा मर्जर को-ऑपरेशन एग्रीमेंट को समाप्त कर दिया और कानूनी प्रक्रियाएं शुरू कर दीं। सोनी का यह कदम समय से पहले था। चूंकि ZEEL सद्भावनापूर्ण बातचीत में लगा हुआ था और पिछले दो वर्षों में इंटीग्रेशन जर्नी को लेकर आवश्यक कदम उठा रहा था, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि योजना जल्द से जल्द लागू हो।''
उन्होंने आगे कहा कि सोनी का यह दावा कि विलय की समापन शर्तें ZEEL द्वारा पूरी नहीं की गईं, सही नहीं है।
उन्होंने कहा, ''हम उचित स्तर पर विलय समझौते के उल्लंघन के लिए कल्वर मैक्स और BEPL के खिलाफ काउंटरक्लेम करेंगे। फिलहाल बोर्ड का फोकस कॉर्पोरेट गवर्नेंस, कम्प्लॉयंस और प्रोसेस कंट्रोल के उच्चतम मानकों को सुनिश्चित करने पर है।''
ZEEL के प्रदर्शन पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि 2020 से, इंडस्ट्री पर छायी मंदी, अस्थायी मुद्दे और विलय गतिविधियों के कारण मैनेजमेंट के बिजी रहने से उत्पन्न दिक्कतों के चलते प्रदर्शन प्रभावित हुआ है।
उन्होंने कहा, “मुख्य रूप से तीन मुद्दे जिन्होंने ZEEL के प्रदर्शन को प्रभावित किया, वे हैं COVID व इससे संबंधित व्यवधान, धीमी गति से विज्ञापन खर्च और पिछले कुछ वर्षों में तीव्र और लंबे समय तक विलय संबंधी गतिविधियां चलीं, जिनमें समय और ऊर्जा तो बर्बाद हुआ ही, बल्कि मैनेजमेंट भी व्यस्त रहा, जिससे परिचालन व्यवसाय प्रभावित हुआ।''
उन्होंने कहा कि बोर्ड का मानना है कि ZEEL मैनेजमेंट के पास निष्पादन क्षमता (execution capability) है और इसने ZEE को 2019 तक लगातार शानदार प्रदर्शन करने में सक्षम बनाया है।
उन्होंने कहा, “इसी मैनेजमेंट ने सोनी डील को टेबल तक पहुंचा दिया, जो शेयरहोल्डर्स के लिए एक बड़ी डील थी। हम पूरी तरह से जानते हैं कि परफॉर्मेंश में वृद्धि की गुंजाइश है और हम ZEEL द्वारा एक पुनरुद्धार योजना (revival plan) पर काम कर रहे हैं और ग्रोथ में तेजी लाने और लाभप्रदता बढ़ाने के लिए इसे पहले से ही क्रियान्वित किया जा रहा है।''
गोपालन ने आगे कहा, “हमारा मानना है कि हम अगली कुछ तिमाही में आर्थिक रूप से काफी मजबूत स्थिति में होंगे और हम पुनरुद्धार योजना की परफॉर्मेंश के लिए प्रतिबद्ध हैं। गोपालन ने कहा, निदेशक मंडल ने कंपनी के एमडी/सीईओ द्वारा प्रस्तुत बिजनेस मॉडल और योजना की बारीकी से मॉनिटर करने का फैसला किया है।''
बोर्ड के चेयरमैन ने यह भी कहा कि गलत सूचना, बाजार अफवाहों और अटकलों के व्यापक प्रसार के कारण कंपनी के निदेशक मंडल ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश डॉ. सतीश चंद्रा की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र जांच समिति का गठन किया है, जिसमें कंपनी के स्वतंत्र निदेशक (स्वतंत्र निदेशक) उत्तम अग्रवाल और डॉ. पी वी रमण मूर्ति शामिल हैं।
उन्होंने कहा, “यह समिति बोर्ड को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी और आवश्यक कार्रवाई का सुझाव देगी। इसके अतिरिक्त, कंपनी किसी भी तथ्यात्मक रूप से गलत दावे के खिलाफ उचित कानूनी मंचों पर सख्ती से अपना बचाव करना जारी रखेगी। ”
कथित फंड डायवर्जन मामले में चल रही सेबी जांच के संबंध में गोपालन ने कहा कि ZEE और बोर्ड ने पूरा सहयोग दिया है, लेकिन कंपनी को ऐसे किसी भी आदेश की जानकारी नहीं है, जहां सेबी ने अभी तक कोई निष्कर्ष दिया हो।
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