भारतीय फोटो जर्नलिस्ट श्रीलंका में गिरफ्तार, ये है गंभीर आरोप

दिल्ली में न्यूज एजेंसी 'रॉयटर्स' (Reuters) के लिए काम करने वाले दानिश बम धमाकों की कवरेज करने गए थे

Last Modified:
Friday, 03 May, 2019
Danish

पत्रकारों को रिपोर्टिंग के दौरान तमाम तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कभी बदमाश उन्हें निशाना बनाते हैं तो कभी पुलिस पर उन्हें परेशान करने के आरोप लगते रहते हैं। ऐसा ही कुछ दिल्ली के रहने वाले फोटो पत्रकार दानिश सिद्दीकी के साथ हुआ है और श्रीलंका पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया है। दिल्ली में न्यूज एजेंसी 'रॉयटर्स' (Reuters) के लिए काम करने वाले दानिश श्रीलंका में करीब हफ्ते भर पहले हुए धमाकों की कवरेज करने के लिए वहां गए हुए थे। दानिश पर अधिकारियों की अनुमति के बिना नेगोंबो शहर के एक स्कूल में जबरदस्ती घुसने की कोशिश करने का गंभीर आरोप है। मजिस्ट्रेट ने दानिश को 15 मई तक के लिए रिमांड पर भेज दिया है।

बताया जाता है कि सेंट सेबेस्टियन चर्च में हादसे का शिकार हुए एक बच्चे के बारे में जानकारी एकत्रित करने के लिए दानिश उसके स्कूल में दाखिल होना चाहते थे, इसी बीच प्रिंसिपल की सूचना पर पहुंची पुलिस ने स्कूल में जबरन घुसने की कोशिश करने के आरोप में दानिश को गिरफ्तार कर लिया। गौरतलब है कि ईस्टर पर श्रीलंका में कई जगह हुए धमाकों में 250 लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा था, जबकि सैकड़ों लोग घायल हो गए थे। बताया जाता है कि दानिश को पुलित्जर अवॉर्ड भी मिल चुका है। दरअसल, रोहिंग्या शरणार्थियों की मार्मिक स्थिति को सामने लाने के लिए रॉयटर्स की जिस सात सदस्यीय टीम को पुलित्जर अवॉर्ड मिला था, उनमें दानिश भी शामिल थे।

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‘हिन्दुस्तान’ में बड़ा बदलाव, तीरविजय सिंह और केके उपाध्याय का हुआ ट्रांसफर

दिल्ली एडिशन के संपादक प्रताप सोमवंशी वेस्ट यूपी की यूनिटों के साथ ही उत्तराखंड स्टेट की मॉनीटरिंग करेंगे

Last Modified:
Wednesday, 26 June, 2019
Hindustan

हिन्दी के प्रमुख अखबार ‘हिन्दुस्तान’ (Hindustan) अखबार से बड़ी खबर सामने आई है। दरअसल, प्रबंधन ने यहां पर कई बड़े बदलाव किए हैं। इन बदलावों के तहत बिहार के स्टेट हेड और पटना संस्करण के संपादक तीरविजय सिंह का तबादला कर दिया गया है। अब उन्हें लखनऊ के संपादक की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यही नहीं, लखनऊ एडिशन के साथ ही वे पूर्वी यूपी, अवध औऱ बुंदेलखंड के छह एडिशंस की भी मॉनीटरिंग करेंगे। बता दें कि सोशियोलॉजी में पीएचडी तीरविजय सिंह ने बनारस से पत्रकारिता में डिग्री हासिल की है। लंबे समय से पत्रकारिता में सक्रिय तीरविजय सिंह ‘अमर उजाला’ के साथ बनारस के आरई के तौर पर भी काम कर चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने ‘दैनिक भास्कर’ के साथ भी काम किया है। वहीं, अखबार के दिल्ली एडिशन के संपादक प्रताप सोमवंशी वेस्ट यूपी की यूनिटों के साथ ही उत्तराखंड स्टेट की मॉनीटरिंग करेंगे।

इसके अलावा यूपी के स्टेट हेड और लखनऊ के संपादक की जिम्मेदारी निभा रहे केके उपाध्याय को अब दो राज्यों बिहार और झारखंड की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वे पटना से अपनी जिम्मेदारी संभालेंगे और वहीं से बिहार-झारखंड की मॉनीटरिंग करेंगे। केके उपाध्याय ने पत्रकारिता में करियर की शुरुआत 1988 में ग्वालियर से दैनिक स्वदेश से की थी। उसके बाद उन्होंने दैनिक भास्कर ग्वालियर में जनरल डेस्क इंचार्ज के रूप में जॉइन किया।

1996-98 के दौरान केके उपाध्याय ने मध्य प्रदेश के पहले केवल टीवी जीएनटी की शुरुआत की, लेकिन किन्हीं कारणों के चलते उसे बंद करना पड़ा। फिर उन्होंने दैनिक भास्कर के श्री गंगानगर यूनिट की लॉन्चिंग पर संपादकीय इंचार्ज के पद पर जॉइन किया। एक  साल बाद बीकानेर संस्करण के संपादक बनाये गये। यहां से उन्होंने फिर वर्ष 2000 में अमर उजाला आगरा में डीएनई के पद पर जॉइन किया और यहां से वे दैनिक भास्कर भोपाल में रीजनल कोर्डिनेटर के पद पर पहुंचे। बाद में जयपुर में रहते हुये राजस्थान के स्टेट कोर्डिनेटर भी रहे। बाद में अमर उजाला चंडीगढ़, गोरखपुर और बरेली में रहने के बाद उन्होंने बतौर डिप्टी रेजिडेंट एडिटर हिन्दुस्तान जॉइन कर लिया था। 

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वरिष्ठ पत्रकार प्रभात मिश्रा ने अब इस मीडिया समूह के साथ शुरू किया नया सफर

अपने पत्रकारीय करियर में प्रभात मिश्रा कई प्रमुख मीडिया संस्थानों में निभा चुके हैं अहम जिम्मेदारी

Last Modified:
Wednesday, 26 June, 2019
Prabhat Mishra

वरिष्ठ पत्रकार प्रभात मिश्रा ने अपने पत्रकारीय करियर को नई दिशा देते हुए ‘अमर उजाला’ नोएडा के साथ नई पारी की शुरुआत की है। यहां वह क्वालिटी मैनेजमेंट डेस्क पर काम करेंगे। बता दें कि ‘अमर उजाला’ समूह के साथ प्रभात मिश्रा की यह दूसरी पारी है। इससे पहले वह ‘अमर उजाला’ जालंधर में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। ‘अमर उजाला’ के साथ दूसरी पारी शुरू करने से पहले वह ‘आउटलुक’ मैगजीन के साथ जुड़े हुए थे और महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा रहे थे।

झारखंड में डाल्टनगंज के रहने वाले प्रभात मिश्रा को पत्रकारिता के क्षेत्र में काम करने का काफी अनुभव है। अपने पत्रकारीय करियर में वह कई प्रमुख मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं। प्रभात मिश्रा ने अपने पत्रकारीय करियर की शुरुआत डाल्टनगंज से निकलने वाले दैनिक अखबार ‘राष्ट्रीय नवीन मेल’ से की थी। हालांकि इससे पहले कुछ समय के लिए उन्होंने ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ के लिए स्पोर्ट्स रिपोर्टिंग भी की थी।

इसके बाद उन्होंने ‘अमर उजाला’ जालंधर का दामन थाम लिया। यहां लंबे समय तक अपनी जिम्मेदारी निभाने के बाद वे ‘दैनिक जागरण’ के नोएडा संस्करण से जुड़ गए। ‘दैनिक जागरण’ को अलविदा कहकर ‘नई दुनिया’ और फिर ‘नेशनल दुनिया’ में जिम्मेदारी निभाने के बाद वे ‘आउटलुक’ से जुड़ गए थे। यही नहीं, प्रभात मिश्रा माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय के नोएडा कैंपस में गेस्ट फैकल्टी के रूप में भी अपनी सेवाएं देते हैं।  

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अरनब गोस्वामी की सरकार को धमकी, देश में विपक्ष भले न हो लेकिन हमारी आवाज नहीं दबेगी

रिपब्लिक टीवी नेटवर्क के एडिटर-इन-चीफ अरनब गोस्वामी ने लोगों से एकजुट होने का आह्वान किया

Last Modified:
Tuesday, 25 June, 2019
ARNAB GOSWAMI

रिपब्लिक टीवी नेटवर्क के एडिटर-इन-चीफ अरनब गोस्वामी हरियाणा की भाजपा सरकार से खासे खफा हैं। अपने शो ‘डिबेट विद अरनब’ में उन्होंने न केवल खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की, बल्कि एक तरह से सरकार को चुनौती भी डे डाली कि मीडिया और जनता खामोश नहीं रहेगी। दरअसल, मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर और उनके मंत्री बलात्कार के दो मामलों में 20 साल की सजा काट रहे गुरमीत राम रहीम को जेल से बाहर लाने के लिए बेताब हैं। इसके लिए नियम-कानून को भी ताक पर रखा जा रहा है।

नियमों के मुताबिक, दो साल की सजा पूरी होने के बाद ही किसी कैदी को पैरोल मिल सकती है। गुरमीत राम रहीम को जेल में रहते हुए अभी दो साल पूरे नहीं हुए हैं, लेकिन उसने पैरोल के लिए अर्जी दाखिल कर दी है और सुनारिया जेल प्रशासन ने आवेदन स्वीकार भी कर लिया है। यह सारी कवायद इस साल अक्टूबर में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर है। यदि बाबा बाहर आता है  तो उसके लाखों अनुयायी भाजपा के पक्ष में वोट डालने से नहीं झिझकेंगे। अरनब इस बात को लेकर नाराज हैं कि आखिर पूरी की पूरी सरकार एक ऐसे व्यक्ति का समर्थन करती कैसे नजर आ रही है, जो बलात्कार जैसे गंभीर अपराध का दोषी है।

‘डिबेट विद अरनब’ की शुरुआत में ही गोस्वामी ने जमकर हरियाणा सरकार के मंत्रियों पर हमला बोला। बेहद गंभीर मुद्रा में अरनब ने लोगों से इस विषय पर एकजुट होने का आह्वान भी किया। उन्होंने कहा, ‘बलात्कारी गुरमीत राम रहीम जेल से बाहर आना चाहता है और हरियाणा सरकार इसका समर्थन कर रही है। मैं आप सभी से कहता हूं कि एकसाथ आयें और सुनिश्चित करें कि ऐसा संभव न हो।’

उन्होंने आगे कहा, ‘नेता और तथाकथित बाबा कानून का दुरुपयोग करना अच्छी तरह से जानते हैं, लेकिन यदि हम सब एक साथ खड़े हो जाएं तो हम उन्हें हरा सकते हैं। आप और मैं सभी जानते हैं कि राम रहीम हत्यारा है, किसान नहीं।’ इसके बाद अरनब ने हरियाणा सरकार को निशाने पर लेते हुए कहा, ‘हरियाणा सरकार राम रहीम की पैरोल के विरोध के बजाय उसका समर्थन कर रही है, ताकि वो विधानसभा चुनाव में कुछ वोट के लिए उसके साथ सौदेबाजी कर सके और यदि आप और हम एकसाथ अपनी आवाज बुलंद करते हैं  तो हम हरियाणा सरकार को शिकस्त दे सकते हैं और हम ऐसा करके रहेंगे।’

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए अरनब ने कहा, ‘हमें अपनी आवाज बुलंद करनी होगी और तेज आवाज में सरकार से सवाल पूछना होगा। यदि आज राम रहीम को नहीं रोका गया तो कल आसाराम भी इस दावे के साथ जेल से बाहर आ जायेगा कि वो बलात्कारी नहीं, बल्कि व्यापारी है और इसलिए यह समय है कि हम सभी आवाज उठायें।’

इतना ही नहीं, अरनब ने नेताओं को यह चेतावनी भी दे डाली कि यदि उन्होंने सही-गलत में भेद करना नहीं सीखा, तो उन्हें विरोध करना बखूबी आता है। अरनब ने तेज स्वर में कहा, ‘देश में विपक्ष भले ही न हो, लेकिन हम हैं। देश में विपक्ष भले ही न हो, लेकिन कुछ मीडिया संस्थान अभी भी हैं, देश में विपक्ष भले ही न हो, लेकिन लोग हैं और वे राजनीतिक फायदे के लिए इस बलात्कारी को जेल से बाहर निकालने पर खामोश नहीं रहेंगे। दर्शकों मैं आपको फिर से याद दिलाना चाहूंगा कि इस देश में विपक्ष भले ही न हो, लेकिन मैं और आप हैं और हमारी आवाज नहीं दबेगी।’

शो में बतौर अतिथि मौजूद भाजपा नेता और समर्थक भी अरनब के गुस्से से नहीं बच सके। उन्होंने भाजपा प्रवक्ता से कहा, ‘एक बलात्कारी के साथ राजनीतिक सौदा करके आप उसके पैरोल का विरोध नहीं कर रहे। आप कह रहे हैं कि वो खेती करेगा, एक बलात्कारी को आप किसान कहकर किसानों का अपमान कर रहे हैं। यदि आपको विश्वास है कि आप चुनाव हार जायेंगे, तो हार जाइये। मैं कहूंगा कि हार जाइये, मगर एक बलात्कारी के साथ डील मत कीजिये।’

इतना ही नहीं, उन्होंने भाजपा नेता से पूछा कि क्या आप इसकी गारंटी लेती हैं कि राम रहीम बाहर आने के बाद कोई अपराध नहीं करेगा, देश छोड़कर नहीं भागेगा? आपके पास बोलने के लिए कुछ नहीं है, लेकिन अपनी अंतरात्मा में झांकिये कि एक बलात्कारी के पास क्या खेती है। आप किस कानून की बात कर रहे हैं, आप उसका विरोध क्यों नहीं कर रहे हैं’?

अरनब यहीं नहीं रुके, उन्होंने राम रहीम की पैरोल का समर्थन करनी वालीं भाजपा नेता से कहा ‘अनीला सिंह शायद आपको लगता है कि इस चुनाव के बाद देश में विपक्ष नहीं है, लेकिन मैं आपको कह रहा हूं कि ये बलात्कारी बाहर नहीं दिखेगा, लोग खड़े हो जाएंगे। लोग आपकी सरकार के खिलाफ खड़े हो जाएंगे, आप सुधर जाइये, विरोध कीजिये, आप नहीं करेंगे तो करवाया जाएगा। मैं धमकी नहीं दे रहा हूं, आप सुधर जाइये। मुझे दूसरे मीडिया के बारे में पता नहीं, लेकिन रिपब्लिक है, आज यह बलात्कारी निकल गया तो कल आसाराम निकल जाएगा।’ पूरे शो में भाजपा नेता और पैरोल का समर्थन करने वाले अरनब के तीखे सवालों का सामना करते रहे।

अरनब गोस्वामी का ये डिबेट शो आप यहां देख सकते हैं-

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अब इस अस्पताल में मीडिया रिपोर्टिंग को लेकर हुआ हंगामा

पुलिस ने मीडिया कर्मियों को काफी मुश्किल से बार्ड से बाहर निकाला

Last Modified:
Tuesday, 25 June, 2019
Reporting

खतरनाक बीमारी से कई बच्चों की मौत के बाद बिहार में मुजफ्फरपुर स्थित श्रीकृष्ण सिंह मेडिकल कालेज अस्पताल के आईसीयू में बेधड़क घुसकर रिपोर्टिंग करने के मामले में पत्रकारों को तमाम आलोचनाओं का शिकार करना पड़ रहा है। कई पत्रकार तो इस मसले पर अपनी सफाई भी दे चुके हैं।

कुछ ऐसा ही मामला राजस्थान के बाड़मेर जिले से सामने आया है, जहां पर अस्पताल में कुछ मीडियाकर्मी घुस गए और कवरेज करने लगे। हालांकि, वहां तैनात पुलिस अधिकारियों ने उन्हें ऐसा करने से रोक दिया। काफी देर तक हंगामे के बाद पुलिस अधिकारियों ने इन पत्रकारों को अस्पताल के बार्ड से बाहर किया।

गौरतलब है कि बाड़मेर जिले के बालोतरा कस्बे में रविवार को एक धार्मिक आयोजन के दौरान आंधी के कारण पंडाल गिरने से 16 श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी और लगभग 55 लोग घायल हो गए थे। घायलों को बाड़मेर के जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इसी की रिपोर्टिंग करने के लिए मीडियाकर्मी बाड़मेर के अस्पताल में पहुंचे थे।

इस घटना से जुड़ा विडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसे आप यहां देख सकते हैं-

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अब इन हिंदी पोर्टल्स के संग जुड़े प्रशांत कनौजिया, बोले- 'भारत माता' मे यकीन नहीं

यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ को लेकर आपत्तिजनक पोस्ट के आरोप में पुलिस ने कुछ दिन पूर्व किया था गिरफ्तार

Last Modified:
Tuesday, 25 June, 2019
Prashant Kanojia

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने के मामले में गिरफ्तारी का सामना कर चुके पत्रकार प्रशांत कनौजिया का कहना है कि उनकी निष्ठा केवल संविधान के प्रति है और वह ‘भारत माता’ जैसी अवधारणा में यकीन नहीं रखते। कनौजिया का यह ताजा बयान विरोधियों को उनके खिलाफ मोर्चा खोलने का मौका दे सकता है।

‘द टेलीग्राफ’ को दिए इंटरव्यू में कनौजिया ने 8 जून को हुई घटना का जिक्र करते हुए अपने अनुभव साझा किये। कनौजिया ने बताया कि जब पुलिस उन्हें ले जा रही थी तो उन्हें अपने एनकाउंटर का डर था, क्योंकि यूपी पुलिस का रिकॉर्ड इस मामले में काफी दागदार रहा है।

बकौल कनौजिया, ‘सादा कपड़ों में जब पुलिस वालों ने मुझे पूर्वी दिल्ली से उठाया तो लगा कि वो मुझे दिल्ली या नोएडा के किसी पुलिस स्टेशन ले जाएंगे, मगर जैसे ही गाड़ी ग्रेटर नोएडा से आगे निकली, मेरी चिंताएं बढ़ने लगीं। मेरे मन में ख्याल चलने लगे कि यदि पुलिस ने मेरा एनकाउंटर कर दिया तो? क्या होगा यदि पुलिसवाले मुझे गोली मारकर यह थ्योरी बना दें कि मैं उनकी गिरफ्त से भागने का प्रयास कर रहा था? हालांकि, पुलिस मुझे सीधे लखनऊ ले गई, जहां पेशी के बाद मुझे जेल भेज दिया गया।’

प्रशांत कनौजिया की गिरफ्तारी के बाद उनके पुराने ट्वीट खंगालकर यह साबित करने का प्रयास किया गया कि वो जात-पांत के नाम पर सामाजिक सद्भाव को प्रभावित कर रहे हैं। सोशल मीडिया के साथ-साथ मेनस्ट्रीम मीडिया में कनौजिया के खिलाफ खबरें दिखाई गईं। मीडिया, खासकर कुछ पत्रकारों के इस रुख से कनौजिया खासे नाराज हैं।

कनौजिया का कहना है, ‘आप मेरे बारे में कुछ भी भला-बुरा बोल सकते हैं, लेकिन जो व्यक्ति कैमरे के सामने 100 करोड़ की रिश्वत मांगते पकड़ा गया हो, क्या वह पत्रकार है? इसी तरह, कठुआ कांड का समर्थन करने वाले खुद को पत्रकार कैसे कह सकते हैं’? कनौजिया का ट्विटर हैंडल विवादस्पद ट्वीट, फोटो से भरा पड़ा है। उनकी भाषा पर भी ऐतराज जताया जाता रहा है। यही वजह है कि जब उनकी गिरफ्तारी हुई  तो इसका समर्थन करने वालों की संख्या भी कम नहीं थी।

कनौजिया दलित हैं और दलितों पर होने वाले अत्याचारों को लेकर मुखर रहते हैं। इस बारे में उनका कहना है, ‘यदि कोई दलित को मारेगा, उसके मुंह में पेशाब करेगा तो मैं यह नहीं कहूंगा कि मैं इसकी कड़ी निंदा करता हूं। मैं चुभने वाले शब्द इस्तेमाल करूंगा, क्योंकि दलित होने के चलते मैंने भी बहुत कुछ सहा है।’

इस सवाल के जवाब में कि देश और उसके नेताओं के खिलाफ विवादास्पद विचार क्यों? कनौजिया ने कहा, ‘मेरी निष्ठा संविधान के प्रति है, देश और उसके नेताओं के प्रति नहीं। मैं ‘ये धरती मेरी मां है’ जैसी अवधारणा में विश्वास नहीं रखता।’ 8 जून के घटनाक्रम का जिक्र करते हुए कनौजिया ने कहा, ‘मुझे ले जाते हुए पुलिसवाले बोल रहे थे कि तुम वायर वालों को बहुत चर्बी चढ़ गई है, तुमको डालेंगे, फिर तुम्हारे बाप को भी डालेंगे।‘

गौरतलब है कि कनौजिया ‘द वायर’ के साथ काम कर चुके हैं। बकौल कनौजिया ‘लखनऊ में उन्हें मजिस्ट्रेट के घर ले जाया गया, जहां से पुलिस अस्पताल लेकर गई। अस्पताल में 150 पुलिसकर्मी मौजूद थे, डॉक्टर भी उन्हें ऐसे देख रहे थे जैसे वो कोई आतंकवादी हों। इसके बाद उन्हें लखनऊ सेंट्रल जेल ले जाया गया। कनौजिया के मुताबिक, जेल के कैदी भी इस बात को लेकर अचंभित थे कि मुख्यमंत्री पर टिप्पणी के चलते उन्हें जेल भेजा गया है।

प्रशांत कनौजिया फ़िलहाल फ्रीलांस पत्रकार के रूप में ‘द प्रिंट हिंदी और ‘सत्यहिंदी’ के साथ जुड़े हुए हैं।

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CM ऑफिस के बाहर पत्रकार ने उठाया खतरनाक कदम, पुलिस के फूले हाथ-पांव

उत्तर प्रदेश में उन्नाव के रहने वाले पत्रकार की एक फोटो कुछ दिन पूर्व वॉट्सऐप पर हुई थी वायरल

Last Modified:
Tuesday, 25 June, 2019
Reporter

लखनऊ में मुख्यमंत्री आवास के बाहर एक पत्रकार ने अपने साथी के साथ जहर खा लिया। पत्रकार द्वारा जहर खाने की जानकारी मिलते ही पुलिस के हाथ-पांव फूल गए। मौके पर पहुंचे वरिष्ठ अधिकारियों ने उन्हें लखनऊ के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया, जहां पत्रकार की हालत नाजुक बनी हुई है।

बताया जाता है कि उन्नाव के शुक्लागंज थाना गंगाघाट के रहने वाले पत्रकार शैलेंद्र द्विवेदी की एक फोटो कुछ दिन पूर्व वॉट्सऐप पर वायरल हुई थी। इसके बाद से वह परेशान चल रहे थे। इसी के चलते वह अपने साथी के साथ मुख्यमंत्री आवास पहुंचे और जहर का सेवन कर लिया।

गौरतलब है कि इससे पहले उत्तर प्रदेश के रामपुर में पुलिस की कार्यशैली से नाराज उबैद खान नामक पत्रकार ने एसपी कार्यालय में जहर खाकर जान देने का प्रयास किया था। गंभीर हालत में पुलिस ने उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया था।

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लाइव शो के दौरान नेता ने कर दी पत्रकार की पिटाई, विडियो वायरल

'के 21 न्यूज' पर 'न्यूज लाइन विद आफताब मुघेरी' का शो चल रहा था

Last Modified:
Tuesday, 25 June, 2019
Live Deabate

डिबेट शो के दौरान आपने एंकर और राजनीतक दलों के नेताओं के बीच तीखी बहस तो बहुत देखी-सुनी होगी, लेकिन ये मामला थोड़ा अलग है। दरअसल, पाकिस्तान से जुड़े इस मामले में पैनल चर्चा के दौरान सत्ताधारी पार्टी ‘पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ’ (पीटीआई) के एक नेता ने वरिष्ठ पत्रकार की पिटाई कर दी। लाइव शो के दौरान हुई इस घटना का विडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है।

बताया जाता है कि 'के 21 न्यूज' पर 'न्यूज लाइन विद आफताब मुघेरी' का शो चल रहा था। इस पैनल में पीटीआई के नेता मसरूर अली सियाल और कराची प्रेस क्लब के प्रमुख इम्तियाज खान भी शामिल थे। इसी दौरान दोनों के बीच बहस शुरू हो गई। इसके बाद मसरूर अली सियाल ने इम्तियाज खान को धक्का देकर फर्श पर गिरा दिया और पीटना शुरू कर दिया। दोनों को शो में मौजूद दूसरे मेहमानों और क्रू ने किसी तरह अलग किया।

पाकिस्तान की पत्रकार @nailainayat (नायला इनायत) द्वारा इस बारे में अपने ट्विटर हैंडल पर एक विडियो शेयर किया गया है। अपने ट्वीट में उन्होंने लिखा है, 'क्या यही नया पाकिस्तान है? पीटीआई के मसरूर अली सियाल ने कराची प्रेस क्लब के अध्यक्ष इम्तियाज खान पर लाइव न्यूज शो के दौरान हमला कर दिया।'

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भ्रष्टाचार के मामले में प्रशासन का पक्ष मांगना पत्रकारों को कुछ यूं पड़ गया भारी

काफी देर तक हंगामे के बाद कलेक्टर के हस्तक्षेप पर किसी तरह सुलझा मामला

Last Modified:
Tuesday, 25 June, 2019
Media

पत्रकारों को अपना काम करने के दौरान तमाम मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। आए दिन पत्रकारों को धमकी मिलने और बदसलूकी के मामले सामने आते रहते हैं। इस कड़ी में अब छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले का नाम भी जुड़ गया है। यहां बीजापुर जिला पंचायत के सीईओ राहुल वेंकट पर कई पत्रकारों से बदसलूकी का आरोप लगा है। बताया जाता है कि स्थानीय पत्रकारों ने ओडीएफ के नाम पर लाखों रुपए के भ्रष्टाचार का मामला उजागर किया था। इसी मामले में पत्रकारों का एक दल प्रशासन का पक्ष लेने के लिए जिला पंचायत सीईओ के पास गया था।

आरोप है कि सीईओ ने सोमवार को अपने दफ्तर में करीब 200 अधिकारी और कर्मचारियों की मौजूदगी में पत्रकारों के कैमरे और मोबाइल फोन भी छीन लिए। इसके साथ ही पत्रकारों को पीटने की धमकी भी दी गई। हालांकि बाद में कलेक्टर के हस्तक्षेप के बाद मामला सुलझा। इसके बाद पत्रकारों के मोबाइल फोन और कैमरे लौटाए गए। बताया जाता है कि इस घटना से आक्रोशित पत्रकारों ने इस मामले की शिकायत सरकार से करने का निर्णय लिया है।

वहीं, सीईओ का कहना है कि एक चैनल में चलाई गई खबर के बारे में संबंधित पत्रकार से जानकारी मांगी गई थी। गलत खबर चलाने पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई। एक सप्ताह से इस मामले से संबंधित पत्रकार को बुलाया जा रहा था। सोमवार को कई पत्रकारों ने आते ही चैंबर में बिना पूछे कैमरे से रिकॉर्डिंग शुरू कर दी थी। इसके बाद पत्रकारों का कैमरा और मोबाइल कलेक्टर के पास जमा करवा दिए गए थे, जो बाद में लौटा दिए गए।

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ABP समूह: इस बड़े पद से बोनी मुखर्जी ने कहा 'अलविदा'

मुंबई विश्वविद्यालय के छात्र रह चुके डी.एन मुखर्जी लंबे समय से एबीपी समूह के साथ कर रहे थे काम

Last Modified:
Tuesday, 25 June, 2019
Bonny Mukerjea

मीडिया इंडस्ट्री में बोनी मुखर्जी (Bonny Mukerjea) के नाम से मशहूर डी.एन मुखर्जी ने एबीपी ग्रुप का साथ छोड़ दिया है। मुंबई विश्वविद्यालय के छात्र रह चुके डी.एन मुखर्जी ने जनवरी 2010 में ‘फॉर्च्यून इंडिया’ (Fortune India) को जॉइन किया था। सितंबर 2010 में लॉन्च हुई ‘फॉर्च्यून इंडिया’ में उन्हें एडिटर की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इसके बाद उन्होंने एबीपी ग्रुप में विभिन्न जिम्मेदारियों को निभाया।

फिलहाल वे प्रेजिडेंट (डिजिटल, एबीपी प्राइवेट लिमिटेड) और फॉर्च्यून इंडिया के एडिटर की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। इस बारे में मुखर्जी का कहना है कि वह फिलहाल कहीं जॉइन नहीं करने जा रहे हैं। मुखर्जी के अनुसार, ‘एबीपी ग्रुप में उनका अब तक का सफर बहुत अच्छा रहा है।‘

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काम नहीं आई पुलिस से बचने की ये ट्रिक, साथियों संग हवालात पहुंचा 'पत्रकार'

गिरफ्तारी के लिए उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों की पुलिस दे रही थी दबिश

Last Modified:
Monday, 24 June, 2019
Arrest

खुद को तहलका इंडिया न्यूज चैनल का पत्रकार बताकर लोगों को ब्लैकमेल करने और उनसे रंगदारी मांगने के आरोप में फरार चल रहा अनुज अग्रवाल आखिरकार पुलिस के हत्थे चढ़ गया। दरअसल, ओडिशा पुलिस ने ब्लैकमेलिंग के नए मामले में उसे गिरफ्तार कर लिया है।

ब्लैकमेलिंग और रंगदारी से जुड़े कई मामलों में अनुज अग्रवाल काफी समय से फरार चल रहा था और उसे दबोचने के लिए उप्र समेत कई राज्यों की पुलिस उसके पीछे लगी हुई थी। पुलिस से बचने के लिए यहां से भागकर अनुज ने ओडिशा को अपना ठिकाना बना रखा था। बताया जाता है कि अनुज ने 12 जून को ओडिशा के बरगड जिले में एक कंपनी के असिस्टेंट मैनेजर से रंगदारी मांगी थी। असिस्टेंट मैनेजर की शिकायत पर पुलिस ने अनुज अग्रवाल को उसके तीन साथियों विशाल गंभीर, इमरान खान और तपन कुमार साहू के साथ तीन लाख रुपए की रंगदारी लेते हुए गिरफ्तार कर लिया। इनके पास से कैमरा, माइक आईडी, प्रेसकार्ड समेत लैपटॉप बरामद हुआ है।

गौरतलब है कि इससे पहले खुद को पत्रकार बताकर अनुज अग्रवाल ने मोदी स्टील फैक्ट्री के जीएम को ब्लैकमेल कर एक करोड़ रुपए की रंगदारी मांगी थी। उत्तर प्रदेश में गाजियाबाद के मोदीनगर क्षेत्र से जुड़े इस मामले की जांच में पता चला था कि अनुज अग्रवाल नामक कथित पत्रकार हिस्ट्रीशीटर है और उसके खिलाफ देहरादून के थानों में कई मामले दर्ज हैं। इस मामले में पीड़ित ने कथित पत्रकार समेत सात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कराया था। इसके अलावा देहरादून के श्रीमहंत इंद्रेश अस्पताल प्रबंध समिति के वरिष्ठ जनसंपर्क अधिकारी भूपेंद्र रतूड़ी ने भी अनुज अग्रवाल और उसके साथियों के खिलाफ रंगदारी मांगने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रतूड़ी का कहना था कि अनुज अग्रवाल ने खुद को ‘तहलका चैनल’ का पत्रकार बताते हुए कुछ विडियो शूट कर रंगदारी मांगी थी।

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