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ऑस्कर के लिए नॉमिनेट हुई दलित महिला पत्रकारों पर बनी ये डॉक्यूमेंट्री
दलित महिलाओं द्वारा संचालित भारत के एकमात्र समाचार पत्र ‘खबर लहरिया’ पर आधारित इस भारतीय डॉक्यूमेंट्री को 'सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री फीचर' श्रेणी में नॉमिनेट किया गया है।
समाचार4मीडिया ब्यूरो 4 years ago
‘एकेडमी अवॉर्ड्स’ (Academy awards) के 94वें एडिशन में पत्रकारिता पर आधारित भारतीय डॉक्यूमेंट्री 'राइटिंग विद फायर' (Writing With Fire) को 'सर्वश्रेष्ठ वृत्तचित्र फीचर' श्रेणी में नॉमिनेट किया गया है। अवॉर्ड समारोह 27 मार्च को लॉस एंजिल्स के डॉल्बी थिएटर में आयोजित किया जाएगा।
भारतीय सिनेमा के लिए ये पल किसी गौरव से कम नहीं है। दुनिया के सबसे बड़े अवॉर्ड समारोह में भारत ने एक बार फिर अपनी जगह बनाई है। इस डॉक्यूमेंट्री को अतंरराष्ट्रीय स्तर पर कई पुरस्कार मिल चुके हैं। अब इसे ऑस्कर अवार्ड मिलने की भी उम्मीद जताई जा रही है।
इस नॉमिनेशन की घोषणा ट्रेसी एलिस रॉस (Tracee Ellis Ross) और लेस्ली जॉर्डन (Leslie Jordan) ने मंगलवार को ट्विटर पर की। रिंटू थॉमस (Rintu Thomas) और सुष्मित घोष (Sushmit Ghosh) द्वारा निर्देशित 'राइटिंग विद फायर' दलित महिलाओं द्वारा संचालित भारत के एकमात्र समाचार पत्र ‘खबर लहरिया’ (Khabar Lahariya) के उदय और इसके आगे बढ़ने व प्रिंट से डिजिटल में परिवर्तित होने की कहानी है।
Presenting the 94th #Oscars Nominations Show. #OscarNoms https://t.co/Zh1c00Anje
— The Academy (@TheAcademy) February 8, 2022
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस बारे में घोष का कहना है, ‘हमारी खुशी की कल्पना नहीं की जा सकती है। यह हमारे लिए और भारतीय सिनेमा के लिए एक बहुत बड़ा क्षण है। यह डॉक्यूमेंट्री निडर दलित महिला पत्रकारों के बारे में है जो शक्तिशाली होने के अर्थ को फिर से परिभाषित कर रही हैं।’
Oh My God!!!! Writing With Fire just got nominated for @TheAcademy Award. Oh My God!!!!!!!! #OscarNoms #WritingWithFire pic.twitter.com/X9TlcCF2Xd
— Rintu Thomas (@RintuThomas11) February 8, 2022
यह डॉक्यूमेंट्री महत्वाकांक्षी दलित महिलाओं के बारे में है, जिनका नेतृत्व उनकी मुख्य रिपोर्टर मीरा कर रही है। टीम ने प्रासंगिक बने रहने के लिए प्रिंट से डिजिटल का रुख कर लिया है। स्मार्टफोन, साहस और दृढ़ विश्वास से लैस ये महिलाएं स्थानीय पुलिस बल की अक्षमता का सामने लाती हैं। जातिगत और लैंगिक हिंसा के शिकार पीड़ितों की आवाज बनती हैं और उनके साथ खड़ी होती हैं। इसके साथ ही लंबे समय से चली आ रहीं कुप्रथाओं को चुनौती देती हैं।
गौरतलब है कि 'खबर लहरिया' सिर्फ महिलाओं द्वारा चलाया जाने वाला देश का इकलौता अखबार था। इसकी शुरुआत वर्ष 2002 में उत्तर प्रदेश के चित्रकूट में निरंतर एनजीओ ने मीरा जाटव, शालिनी जोशी और कविका बुंदेलखंडी के साथ मिलकर की थी। जब इस अखबार की शुरुआत हुई, उस वक्त इसमें काम करने वाली महिला पत्रकार और रिपोर्टर्स खुद अपने हाथ से खबरों को एक पन्ने पर लिखती थीं।
इस अखबार को रिपोर्टर्स पैदल सुदूर ग्रामीण इलाकों में पहुंचाया करती थीं। पाठक बढ़ने पर इसकी छपाई शुरू की गई। धीरे-धीरे यह अखबार तमाम जिलों तक पहुंचने लगा। वर्ष 2015 से ‘खबर लहरिया‘ पूरी तरह डिजिटल हो गया और अब इसकी अपनी वेबसाइट है, जिस पर जनसरोकार से जुड़ी तमाम खबरें पढ़ी जा सकती हैं। इस संस्थान की रिपोर्टर्स स्मार्टफोन के जरिये अलग-अलग इलाकों में जाकर रिपोर्ट तैयार करती हैं।
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