वरिष्ठ टीवी पत्रकार रजत शर्मा ने उठाया चौंकाने वाला कदम

‘इंडिया टीवी’ के चेयरमैन और एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा ने अपने फैसले की जानकारी सोशल मीडिया पर शेयर की है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 16 November, 2019
Last Modified:
Saturday, 16 November, 2019
Rajat Sharm

‘इंडिया टीवी’ के चेयरमैन और एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा ने ‘दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ’ (DDCA) के प्रेजिडेंट पद से इस्तीफा दे दिया है। रजत शर्मा का कहना है, ‘ऐसा लगता है कि ईमानदारी और पारदर्शिता के मेरे उसूलों के साथ ‘DDCA’ में आगे जाना संभव नहीं है। मैं अपने उसूलों के साथ समझौता करने को तैयार नहीं हूं।

रजत शर्मा ने अपने इस्तीफे की जानकारी अपने ट्विटर हैंडल पर भी शेयर की है। इस ट्वीट में रजत शर्मा ने  लिखा है,‘यहां काम करना आसान नहीं था, लेकिन आपके विश्वास ने मुझे ताकत दी। आज मैंने डीडीसीए का अध्यक्ष पद छोड़ने का फैसला किया है और अपना इस्तीफा एपेक्स काउंसिल को भेज दिया है। आपने जो प्यार और सम्मान मुझे दिया है उसके लिए आपका आभार।

उन्होंने ट्वीट में यह भी लिखा है, ‘जब से आपने मुझे ‘DDCA’ का अध्यक्ष चुना है, मैं समय-समय पर आपको अपने काम के बारे में जानकारी देता रहा हूं। मैने ‘DDCA’ को बेहतर बनाने के लिए, प्रोफेशनल और पारदर्शी बनाने के लिए जो कदम उठाये, उसके बारे में आपको बताया। आपसे किए गए वादों के पूरा होने की जानकारी दी।’

बता दें कि रजत शर्मा जुलाई 2018 में दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ (डीडीसीए) के अध्यक्ष बने थे। उन्होंने इसके लिए हुए चुनाव में पूर्व क्रिकेटर मदन लाल को हराया था। रजत शर्मा को 1521 वोट मिले थे, वहीं मदन लाल को 1004 वोट हासिल हुए थे।

रजत शर्मा ने ‘DDCA’ के सदस्यों के लिए एक लेटर भी लिखा है। अंग्रेजी में लिखे इस लेटर को आप यहां हूबहू पढ़ सकते हैं।

Dear Members,
 
I take this opportunity to thank you all to have reposed faith in me during my tenure as the President of DDCA. In my short stint I have made every effort to discharge my obligations in the best interest of the Association with honesty and sincerity. The sole agenda was welfare of the Association and transparency in each and every aspect. In my endeavour though I faced many road blocks, opposition and oppressions, just to keep me from discharging my duties in fair and transparent manner, however, somehow I kept moving with only one agenda that all promises made to the members must be fulfilled while keeping the interest and welfare of Cricket paramount at all times. 
 
​​However, cricket administration here is full of pulls and pressures all the time. I feel that vested interests are always actively working against the interest of cricket. It seems that it may not be possible to carry on in DDCA with my principles of integrity, honesty and transparency, which I am not willing to compromise at any cost. That’s why I have decided to call it a day and hereby tender my resignation to the Apex Council from the post of President, DDCA with immediate effect.
 
I would like to add that when I took over as President, coffers of DDCA were empty and now we have a corpus of around Rs.25 Crores, I urge upon you that this money be spent only for promoting cricket and helping cricketers. 

I thank you all for the overwhelming support, respect and affection you have given me throughout my tenure. Whatever I have contributed here would have not been possible without your support.

Best wishes to you all.
 
Sincerely,

RAJAT SHARMA
President
DELHI & DISTRICT CRICKET ASSOCIATION

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अब नए अंदाज में खबरों से रूबरू कराएंगी वरिष्ठ पत्रकार फे डिसूजा

व्युअर्स को कम से कम समय में तथ्यों के साथ पूरी जानकारी उपलब्ध कराने के लिए शुरू की गई है यह पहल

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 23 January, 2020
Last Modified:
Thursday, 23 January, 2020
Faye D'souza

वरिष्ठ पत्रकार फे डिसूजा अब लोगों को नए अंदाज में खबरों से रूबरू कराएंगी। सिलिकन वैली (Silicon Valley) के  शॉर्ट विडियो नेटवर्क ‘फायरवर्क’ (Firework) के साथ अपनी नई पारी के दौरान फे डिसूजा देश भर की खास खबरों को 30 सेकेंड के विडियो में दिखाएंगी।

इस बारे में ‘फायरवर्क’ के सीईओ सुनील नायर का कहना है, ‘शॉर्ट फॉर्मेट विडियो कैटेगरी में फे डिसूजा के साथ यह शो गेमचेंजर साबित होगा। इस तरह के न्यूज फॉर्मेट को 18 से 25 साल के युवाओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। मेरा मानना है कि इस उम्र के युवा बड़े-बड़े टेलिविजन डिबेट शो देखने के बजाय तेजी से और शॉर्ट में न्यूज चाहते हैं। आज की पीढ़ी ऐसे कई चेहरों को नहीं पहचानती है, जो टीवी चैनल्स पर लंबे समय से हैं। फे इस बात को समझती हैं और वह दर्शकों को इस तरह से खबरें पेश करती हैं, जिससे न्यूज को आसानी से और तेजी से समझा जा सके।’  

बताया जाता है कि शुरुआत में फे डिसूजा सप्ताह के सामान्य दिनों (weekdays) में चार न्यूज सेगमेंट पोस्ट करेंगी और सप्ताहांत (weekends) में एक न्यूज सेगमेंट पोस्ट किया जाएगा। प्रत्येक न्यूज सेगमेंट 30 सेकेंड की क्लिप होगी और इसे ‘Facts First with Faye’ शीर्षक से पोस्ट किया जाएगा।  

डिसूजा का कहना है, ‘आज न्यूज की कोई कमी नहीं है, बस वह स्पष्ट होनी चाहिए। देश का युवा काफी समझदार और वैचारिक है। युवा वर्ग ऐसी न्यूज चाहता है जो तथ्यों के साथ निष्पक्ष और शॉर्ट फॉर्मेट में हो। यह शो इसी तरह की न्यूज उपलब्ध कराएगा।’

बता दें कि इससे पहले सितंबर 2019 तक डिसूजा टाइम्स नेटवर्क के अंग्रेजी न्यूज चैनल ‘मिरर नाउ’ (Mirror Now) में एग्जिक्यूटिव एडिटर के तौर पर काम कर रही थीं। ‘मिरर नाउ’ के शो ‘द अर्बन डिबेट’ (The Urban Debate) की एंकरिंग के दौरान उन्हें काफी प्रसिद्धि मिली थी। इस शो में वह भ्रष्टाचार, सांप्रदायिक हिंसा और प्रेस की स्वतंत्रता जैसे मुद्दों को उठाती थीं। फे डिसूजा को वर्ष 2018 में 'जर्नलिस्ट ऑफ द ईयर' के लिए रेडइंक अवॉर्ड दिया जा चुका है।

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सरकार को नहीं भायी पत्रकार की ये ‘गुस्ताखी’, लिया हिरासत में

पाकिस्तान में सरकार और सेना के खिलाफ आवाज उठाने की पत्रकारों को भारी कीमत चुकानी पड़ रही है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 22 January, 2020
Last Modified:
Wednesday, 22 January, 2020
Journalist

पाकिस्तान में सरकार और सेना के खिलाफ आवाज उठाने की पत्रकारों को भारी कीमत चुकानी पड़ रही है। अजहर उल वाहिद अपनी फेसबुक पोस्ट के लिए पिछले छह दिनों से पुलिस की हिरासत में हैं। इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया का अनुभव रखने वाले वाहिद ने सत्ता प्रतिष्ठान के खिलाफ एक के बाद एक कई पोस्ट किए थे। उन्होंने अपने हालिया पोस्ट में पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ की फांसी पर रोक लगाने के अदालत के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा था कि यह लोकतंत्र का मजाक है।

पुलिस ने वाहिद के फेसबुक अकाउंट पर सरकार के खिलाफ अपमानजनक सामग्री का हवाला देते हुए उन्हें पिछले गुरुवार को पूर्वी लाहौर से हिरासत में लिया था, तब से वह अब तक बाहर नहीं आ सके हैं। वहीं, वाहिद के वकील ने पुलिस की इस कार्रवाई को प्रेस की आजादी पर हमला करार दिया है। साथ ही उनका कहना है कि अदालत को वाहिद की जमानत पर जल्द से जल्द फैसला करना चाहिए।

रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स के एशिया-पैसिफिक प्रमुख डैनियल बास्टर्ड ने भी वाहिद के खिलाफ की गई कार्रवाई को गलत बताते हुए उन्हें तुरंत रिहा करने की मांग की है। बास्टर्ड ने कहा, ‘यह निश्चित तौर पर पत्रकारों को डराने का प्रयास है। पाकिस्तानी अदालत को वाहिद पर लगाये गए आरोपों को खारिज करके उन्हें आजाद करना चाहिए।’

गौरतलब है कि पाकिस्तान लंबे समय से पत्रकारों के लिए दुनिया के सबसे खतरनाक स्थानों में से एक रहा है। इमरान सरकार भले ही मीडिया की आजादी की बात करती है, लेकिन हकीकत इससे काफी अलग है। पत्रकार द्वारा सैन्य प्रतिष्ठान की तरफ से बढ़ते दबाव की शिकायतें अब आम हो गई हैं। 2018 में कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट ने पाया था कि पाक सेना ने ‘चुपचाप लेकिन प्रभावी रूप से’ सामान्य समाचार रिपोर्टिंग के दायरे में सख्त सीमाएं लागू की हैं।

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इन पत्रकारों के सिर सजा प्रतिष्ठित रामनाथ गोयनका अवॉर्ड का ताज

दिल्ली में आयोजित एक समारोह में राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने कई कैटेगरी में विजेताओं को किया सम्मानित, द क्विंट के चार पत्रकारों को मिला अवॉर्ड

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 21 January, 2020
Last Modified:
Tuesday, 21 January, 2020
Awards

पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले पत्रकारों को प्रतिष्ठित रामनाथ गोयनका उत्कृष्ट पत्रकारिता पुरस्कार से नवाजा गया। दिल्ली में सोमवार को आयोजित एक समारोह में राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने साल 2018 में प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में बेहतरीन काम करने वाले पत्रकारों को यह पुरस्कार प्रदान किया।

राष्ट्रपति ने प्रिंट कैटेगरी में ‘गांव कनेक्शन’ की दिति बाजपेई और ब्रॉडकास्ट में ‘द क्विंट.कॉम’ के पत्रकार शादाब मोइजी को पुरस्कृत किया। ‘द क्विंट.कॉम’ की ही पूनम अग्रवाल को भी इस अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। रिपोर्टिंग फ्रॉम कनफ्लिक्टिंग जोन कैटेगरी में इंडियन एक्सप्रेस के दीपांकर घोष(प्रिंट/डिजिटल), ब्रॉडकास्ट में दूरदर्शन के धीरज कुमार, दूरदर्शन के ही दिवंगत पत्रकार अच्युतानंद साहू, मोरमुकट साहू को पुरस्कृत किया गया।

वहीं, रीजनल कैटेगरी में अल समय (प्रिंट/डिजिटल) की अन्वेषा बैनर्जी और ब्रॉडकास्ट में मनोरमा न्यूज के सनीश टीके को यह अवॉर्ड दिया गया। पर्यावरण और विज्ञान कैटेगरी में स्क्रॉल.इन की मृदुला चारी और विनिता गोविंदराजन, जबकि ब्रॉडकास्ट में बीबीसी हिंदी सर्विस की सर्वप्रिया सांगवान को इस अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। अनकवरिंग इंडिया इनविजिबल कैटेगरी (प्रिंट/डिजिटल) में इंडियन एक्सप्रेस की हिना रोहतकी, ब्रॉडकास्ट में दक्विंट.कॉम की अस्मिता नंदी और दक्विंट.कॉम के ही मेघनाद बोस को पुरस्कृत किया गया।

बुक (नॉन-फिक्शन) कैटेगरी में ज्ञान प्रकाश और फोटो पत्रकारिता कैटेगरी में टाइम्स ऑफ इंडिया के फोटो जर्नलिस्ट सुरेश कुमार को इस अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। बता दें कि वर्ष 2006 में स्थापित रामनाथ गोयनका पुरस्कार उत्कृष्ट पत्रकारिता पुरस्कार प्रिंट, ब्रॉडकास्ट और डिजिटल मीडिया के ऐसे पत्रकारों को दिया जाता है, जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में सही और तथ्यपरक समाचार देते हुए चरित्र और समर्पण की असाधारण शक्ति दिखाई है।

हर श्रेणी में एक लाख रुपए की पुरस्कार राशि के साथ उसके लेखक को सम्मानित किया गया। इस मौके पर राष्ट्रपति का कहना था कि पत्रकारिता बिना किसी डर या पक्षपात के होनी चाहिए। इसकी मूलभूत प्रतिबद्धता सच्चाई को सबसे ऊपर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि फेक न्यूज एक नई बुराई के रूप में सामने आई है, जिनके पैरोकार खुद को पत्रकार बताते हैं और इस महान पेशे को कलंकित करते हैं।

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Fake News के खिलाफ इन दो मीडिया समूहों ने मिलकर छेड़ी 'जंग', यूं करेंगे मुकाबला

आज के दौर में फेक न्यूज की समस्या लगातार बढ़ती जा रही है। आए दिन फेक न्यूज के मामले सामने आ रहे हैं। भारत ही नहीं, दुनिया के अन्य देश भी इस समस्या का सामना कर रहे हैं।

Last Modified:
Monday, 20 January, 2020
Fake News

आज के दौर में फेक न्यूज की समस्या लगातार बढ़ती जा रही है। आए दिन फेक न्यूज के मामले सामने आ रहे हैं। भारत ही नहीं, दुनिया के अन्य देश भी इस समस्या का सामना कर रहे हैं। हालांकि, फेक न्यूज से निपटने के लिए कवायद भी की जा रही है, इसके बावजूद इस पर पूरी तरह रोक नहीं लग पा रही है।

अब तो यह हाल हो गया है कि जब वॉट्सऐप पर कोई न्यूज मिलती है तो मन में आशंका रहती है कि क्या यह न्यूज सही है? कहीं यह फर्जी तो नहीं? सिर्फ वॉट्सऐप के साथ ही ऐसा नहीं है, सोशल मीडिया के अन्य प्लेटफॉर्म्स जैसे-फेसबुक और ट्विटर पर मिलने वाली अधिकतर न्यूज को लेकर भी कई लोग उसके सही अथवा फेक होने की आशंका से घिरे रहते हैं। हालांकि, ऐसे भी कई लोग हैं जो यह जाने बिना कि न्यूज सही है अथवा फेक, उसे आगे फॉरवर्ड कर देते हैं और जाने-अनजाने में कई बार फेक न्यूज को भी बढ़ावा दे देते हैं।

फेक न्यूज से निपटने के लिए अब दो बड़े मीडिया समूह ‘दैनिक भास्कर’ और ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ ने मिलकर एक नई पहल शुरू की है। इस पहल को ‘कौन बनेगा, कौन बनाएगा’ नाम दिया गया है। इसके तहत फिल्मों की सीरीज के द्वारा लोगों को फेक न्यूज के दुष्परिणामों के बारे में बताने के साथ ही अखबार पढ़ने के महत्व के प्रति जागरूक भी किया जाएगा।

दैनिक भास्कर’ में छपी खबर के अनुसार, समूह के प्रमोटर, निदेशक गिरीश अग्रवाल का कहना है कि लोगों को फेक न्यूज के खतरे से बचाने के लिए दोनों मीडिया समूह एक साथ आए हैं। समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को देखते हुए इस पहल के तहत लोगों को फेक न्यूज के खिलाफ जागरूक किया जाएगा। इसके लिए हमें सबसे पहले तो खुद से यह सवाल करना चाहिए कि हम अपनी खबरें कहां से पाते हैं, उनका स्रोत क्या है?

वहीं, ‘बेनेट, कोलमैन एंड कंपनी लिमिटेड’ (BCCL) के प्रेसिडेंट (रेवेन्यू) शिवकुमार सुंदरम कहते हैं कि गलत मैसेज फॉरवर्ड करने से सामाजिक तानाबाना कमजोर पड़ रहा है। ऐसे में बड़े अखबार समूह के तौर पर हमारी जिम्मेदारी बनती है कि हम पाठकों को सही खबर फॉलो करने के लिए जागरूक करें। उनका कहना था कि कई रिसर्च से साबित हो चुका है कि पाठक उसे ही सच मानता है, जो अखबार में छपा होता है। मोबाइल पर फॉरवर्ड खबर फेक है अथवा सही, इस बारे में जांचने के लिए कई लोग अगली सुबह के अखबार का इंतजार करते हैं।

इस पहल के तहत फेक न्यूज के खिलाफ किस तरह लोगों को जागरूक किया जाएगा, वह आप यहां इस विडियो में देख सकते हैं।

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सिर्फ इतनी सी बात पर अधिकारी ने पत्रकार को जड़ दिए थप्पड़ पर थप्पड़

अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई न होने पर दिल्ली पत्रकार संघ ने केजरीवाल सरकार को दी सड़कों पर उतरने की चेतावनी

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 18 January, 2020
Last Modified:
Saturday, 18 January, 2020
Slap

मीडिया में अपने खिलाफ चली खबर से तिलमिलाए दिल्ली सरकार के एक अधिकारी ने पत्रकार से मारपीट कर दी। मामले के तूल पकड़ने के बाद अब संबंधित अधिकारी पर कार्रवाई की मांग हो रही है। वहीं, दिल्ली पत्रकार संघ ने केजरीवाल सरकार को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि सरकार कोई कदम नहीं उठाती, तो पत्रकारों को सड़कों पर उतरना होगा। इस बीच, अधिकारी के बचाव में भी दलीलें दी जाने लगी हैं। सोशल मीडिया पर एक विडियो वायरल किया जा रहा है जिसमें उक्त पत्रकार को गालीगलौज करते दिखाया गया है।

यह पूरा मामला ‘टीवी9 भारतवर्ष’ के दिल्ली संवाददाता मानव यादव से जुड़ा है। मानव का आरोप है कि सूचना और प्रचार निदेशालय (डीआईपी) के निदेशक शमीम अख्तर ने उनके साथ मारपीट की, अख्तर उनके द्वारा चलाई गई एक खबर से नाराज थे।

मानव यादव के मुताबिक, डीआईपी के कार्यालय में कुछ पोस्टर चिपकाए गए थे, जिसकी खबर उन्होंने कवर की थी। जब इस संबंध में उन्होंने डीआईपी अधिकारी शमीम अख्तर से सवाल किया, तो वह भड़क गए और मारपीट कर डाली। मामला सामने आने के बाद पत्रकारों ने संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग मुख्यमंत्री केजरीवाल से की है।

वरिष्ठ पत्रकार अजित अंजुम ने घटना का जिक्र करते हुए ट्वीट किया है कि ‘किसी भी सूरत में एक रिपोर्टर पर हाथ उठाने वाले इस अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। अब तक नहीं हुई है तो हैरानी की बात है। कोई अधिकारी इतना बददिमाग कैसे हो सकता है? और अगर है तो किसके दम पर’?

दिल्ली पत्रकार संघ ने भी एक बयान जारी कर पत्रकार के साथ मारपीट की निंदा करते हुए आरोपित अधिकारी पर कार्रवाई की मांग की है। संघ के अध्यक्ष मनोहर सिंह की तरफ से कहा गया है कि ‘उपराज्यपाल, प्रमुख सचिव और चुनाव आयोग से मारपीट करने वाले अधिकारी को तुरंत बर्खास्त कर उसके खिलाफ क़ानूनी कार्रवाई करने की मांग की जाती है। यदि कार्रवाई नहीं की गई, तो दिल्ली के पत्रकार सड़कों पर उतरने के लिए तैयार हैं।’

वहीं, सोशल मीडिया पर ‘टीवी9 भारतवर्ष’ के पत्रकार मानव यादव के खिलाफ भी मुहिम शुरू हो गई है। अरुण अरोरा नामक यूजर ने एक विडियो पोस्ट किया है, जिसमें मानव को पुलिस की मौजूदगी में अधिकारी से गालीगलौच करते दिखाया गया है। हालांकि, इस विषय पर मानव ने अपनी सफाई दी है। उन्होंने अपने जवाबी ट्वीट में कहा है, ‘हां! निष्पक्षता से खबर चलाने के बदले मिले 3 थप्पड़ों के बाद मैंने उसको गाली दी लेकिन ये विडियो 6 बजे के बाद का है। 5:30 बजे के आसपास इन्होंने मुझे पीटा। 5:50 पर PCR पहुंची। पुलिस ने मुझे उनके केबिन में आकर बैठने को कहा, मैंने विरोध किया। कमरे के अंदर की पूरी recording मेरे पास है’।

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TV इंडस्ट्री ने 2018-19 में चली ऐसी ‘चाल’, रिपोर्ट में आया ये ‘हाल’

‘टेलिकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया’ (TRAI) ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट जारी कर दी है

Last Modified:
Friday, 17 January, 2020
TV CHANNELS

‘टेलिकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया’ (TRAI) ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट जारी कर दी है। इस रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2018-19 में देश में टेलिविजन इंडस्ट्री की ग्रोथ में 12.12 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। वर्ष 2017-18 में 66000 करोड़ रुपए से बढ़कर यह इंडस्ट्री वर्ष 2018-19 में 74000 करोड़ रुपए की हो गई है। इस रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पूरी इंडस्ट्री के रेवेन्यू में सबस्क्रिप्शन रेवेन्यू का शेयर 58.7 प्रतिशत है, जबकि बाकी का रेवेन्यू एडवर्टाइजिंग से आया है।  

अब सबस्क्रिप्शन रेवेन्यू की बात करें तो इसमें भी 10.69 प्रतिशत की वृद्धि देखने को मिली है। वर्ष 2017-18 के दौरान जहां सबस्क्रिप्शन रेवेन्यू 39300 करोड़ रुपए था, वह वर्ष 2018-19 में बढ़कर 43500 करोड़ रुपए हो गया है। वहीं, इस अवधि के दौरान एडवर्टाइजिंग रेवेन्यू भी 14.23 प्रतिशत की दर से बढ़कर 30,500 करोड़ रुपए हो गया है, जबकि वर्ष 2017-18 के दौरान यह 26700 करोड़ रुपए था।

इंडस्ट्री के अनुमानों के अनुसार, वर्ष 2018 तक देश के 298 मिलियन घरों में से करीब 197 मिलियन घरों में टेलिविजन सेट है। इन 197 मिलियन घरों में दूरदर्शन के टेरेस्ट्रियल नेटवर्क (terrestrial network) के साथ ही केबल टीवी सर्विस, डीटीएच सर्विस आदि के द्वारा सेवाएं दी जा रही हैं। दूरदर्शन के टेरेस्ट्रियल नेटवर्क की पहुंच देश में सबसे ज्यादा है और टेरेस्ट्रियल ट्रांसमीटर्स के काफी बड़े नेटवर्क के द्वारा देश की करीब 92 प्रतिशत आबादी तक इसकी पहुंच बनी हुई है। करीब 103 मिलियन घरों में केबल टीवी लगा हुआ है, 72.44 मिलियन घरों में डीटीएच के माध्यम से टीवी देखा जाता है। टेलिविजन ब्रॉडकास्टिंग सेक्टर की बात करें तो इसमें 350 ब्रॉडकास्टर्स शामिल हैं और इनमें से 39 ब्रॉडकास्टर्स पे चैनल्स (pay channels) का प्रसारण कर रहे हैं।

वहीं, टेलिविजन डिस्ट्रीब्यूशन का रुख करें तो सूचना प्रसारण मंत्रालय (MIB) में 1469 मल्टी सिस्टम ऑपरेटर्स (MSOs), करीब 60,000 केबल ऑपरेटर्स, दो हिट्स (HITS) ऑपरेटर्स, पांच पे डीटीएच ऑपरेटर्स और कुछ ‘आईपीटीवी ऑपरेटर्स’ (IPTV operators) रजिस्टर्ड हैं। इसके अलावा पब्लिक ब्रॉडकास्टर ‘दूरदर्शन’ भी देश में फ्री-टू-एयर डीटीएच सर्विस उपलब्ध कराता है। 31 मार्च 2019 तक सूचना प्रसारण मंत्रालय ने 902 प्राइवेट सैटेलाइट टीवी चैनल्स को मंजूरी दे रखी थी। इनमें से 229 स्टैंडर्ड डेफिनेशन (SD) और 99 हाई डेफिनेशन (HD) पे टीवी चैनल्स हैं।

देश में वर्ष 2010 में सूचना प्रसारण मंत्रालय से मंजूरी प्राप्त चैनल्स की संख्या 524 थी, जो वर्ष 2019 में बढ़कर 902 हो गई है। वहीं, स्टैंडर्ड डेफिनेशन (SD) पे चैनल्स की संख्या वर्ष 2010 में 147 के मुकाबले अब बढ़कर वर्ष 2019 में 229 हो गई। ट्राई ने अपनी रिपोर्ट में यह भी बताया है कि पिछले दस वर्षों में ब्रॉडकास्टर्स द्वारा बड़ी संख्या में हाई डेफिनेशन (HD) पे टीवी चैनल्स लॉन्च किए गए हैं और अब देश में कुल 99 हाई डेफिनेशन (HD) पे टीवी चैनल्स संचालित हो रहे हैं।

ट्राई की इस रिपोर्ट में ‘फ्रीक्वेंसी मॉडुलेशन’ (FM) रेडियो ब्रॉडकास्टिंग सेक्टर का भी जिक्र किया गया है, जिसमें प्रभावी ग्रोथ दर्ज की गई है। रेडियो इंडस्ट्री पूरी तरह एडवर्टाइजिंग रेवेन्यू पर निर्भर करती है और वर्ष 2018-19 के दौरान इसमें 9.74 प्रतिशत की ग्रोथ हुई है। एडवर्टाइजिंग रेवेन्यू में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है और वर्ष 2017-18 में 2381.51 करोड़ एडवर्टाइजिंग रेवेन्यू के मुकाबले वर्ष 2018-19 में बढ़कर यह 2517.56 करोड़ रुपए हो गया है।

ट्राई की इस वार्षिक रिपोर्ट में बताया गया है कि मार्च 2019 तक पब्लिक सर्विस ब्रॉडकास्टर ‘ऑल इंडिया रेडियो’ (AIR) के टेरेस्ट्रियल रेडियो नेटवर्क (terrestrial radio network) के अलावा देश में 356 प्राइवेट एफएम रेडियो स्टेशन संचालित थे।

‘ऑल इंडिया रेडियो’ की सर्विस देश के 99.20 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र के साथ करीब 99019 प्रतिशत आबादी को कवर करती हैं। जहां तक कम्युनिटी रेडियो स्टेशनों की बात है तो मार्च 2019 के आखिर तक देश में 215 कम्युनिटी रेडियो स्टेशन चालू हो गए थे।

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महिला पत्रकार के ऐसा करने पर कांग्रेस पार्षद का फूटा गुस्सा, फिर कर दी ये हरकत

पीड़ित पत्रकार का नाम तबस्सुम है और वह ‘इंडियन एक्सप्रेस’ के लिए काम करती हैं। तबस्सुम ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर घटना के बारे में विस्तार से बताया है।

Last Modified:
Friday, 17 January, 2020
congress

सत्ता का नशा जब सिर पर चढ़ जाए तो फिर कुछ समझ नहीं आता। महाराष्ट्र में एक कांग्रेस पार्षद ने मेट्रो स्टेशन पर महिला पत्रकार के साथ बदसलूकी की। पत्रकार का कसूर सिर्फ इतना था कि उसने रेल कर्मचारियों पर गुस्सा निकालने से पार्षद को रोकने का प्रयास किया था। इस घटना का विडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

पीड़ित पत्रकार का नाम तबस्सुम (Tabassum Barnagarwala) है और वह ‘इंडियन एक्सप्रेस’ के लिए काम करती हैं। तबस्सुम ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर घटना के बारे में विस्तार से बताया है। उनके मुताबिक, जब वह मेट्रो स्टेशन में दाखिल हुईं, तो ठाने से कांग्रेस पार्षद विक्रांत चव्हाण को रेल कर्मचारियों पर चिल्लाते पाया। उन्होंने कर्मचारियों से चव्हाण के गुस्से की वजह जाननी चाही, तो जवाब मिला कि वह कॉर्पोरेटर हैं, इसीलिए चिल्ला रहे हैं, कुछ भी सुनने को तैयार नहीं हैं।’ कुछ देर तक तबस्सुम सबकुछ देखती रहीं, लेकिन जब कर्मचारियों के लाख समझाने के बावजूद पार्षद साहब शांत नहीं हुए, तो उन्होंने बीच-बचाव करने का फैसला लिया।

पत्रकार होने के नाते तबस्सुम ने जब पार्षद विक्रांत चव्हाण से सवाल-जवाब किए, तो वह एकदम से नाराज हो गए। उन्होंने तबस्सुम से वहां से निकल जाने के लिए कहा, इस पर पत्रकार ने अपने मोबाइल से विडियो बनाना शुरू कर दिया। कैमरा देखते ही चव्हाण इस कदर बौखला गए कि तबस्सुम का हाथ झटक दिया। हालांकि तब तक यह पूरा वाकया कैमरे में कैद हो चुका था। मामला बढ़ता देख कांग्रेस पार्षद विक्रांत चव्हाण स्टेशन से निकलते बने, इसके बाद महिला पत्रकार ने सोशल मीडिया पर पार्षद की करतूत से सबको अवगत कराया। तबस्सुम ने चव्हाण के खिलाफ किसी तरह की शिकायत दर्ज नहीं कराई है।

उन्होंने इस संबंध में ट्वीट कर कहा है ‘इस घटना के बाद मुझे काफी कॉल आये, आप सभी का धन्यवाद। मेरा उद्देश्य केवल सत्ता के दुरुपयोग को सामने लाना था। न मैं पीड़ित हूं और न ही मुझे कोई चोट आई है। चव्हाण ने विडियो रोकने के लिए मुझ पर हमला किया था, मैं कोई पुलिस कंप्लेंट नहीं चाहती।’ मामला सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर पार्षद विक्रांत चव्हाण की जमकर आलोचना हो रही है।

घटना का विडियो आप नीचे दिए ट्वीट में देख सकते हैं: 

 

 

 

 

 

 

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जानिए, किस बात पर भड़के पूर्व डीजीपी, पत्रकार से कहा- ‘नशे में हो क्या?’

केरल के पूर्व डीजीपी टीपी सेनकुमार द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक पत्रकार से दुर्व्यवहार का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि इस दौरान पत्रकार के साथ न केवल धक्का-मुक्की बल्कि मारपीट भी की गई।

Last Modified:
Friday, 17 January, 2020
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केरल के पूर्व डीजीपी टीपी सेनकुमार द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक पत्रकार से दुर्व्यवहार का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि इस दौरान पत्रकार के साथ न केवल धक्का-मुक्की बल्कि मारपीट भी की गई, जिसके बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में अन्य पत्रकारों ने भी इसका विरोध किया। हालांकि पीड़ित पत्रकार ने पूर्व डीजीपी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है।

दरअसल, यह वाकया गुरुवार को उस समय हुआ, जब त्रिवेंदम क्लब में पूर्व डीजीपी श्री नारायण धर्म परिपालन योगम केस को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे थे। इसी दौरान पत्रकार कदाविल राशिद ने वहां खड़े होकर पूर्व डीजीपी से एक सवाल पूछ लिया। केरल में नेता प्रतिपक्ष रमेश चेनिथला ने हाल ही में बयान दिया था कि टीपी सेनकुमार की डीजीपी के रूप में नियुक्ति बड़ी गलती थी। सवाल इसी से जुड़ा था, लिहाजा सवाल सुनकर पूर्व डीजीपी भड़क गए और पत्रकार से कहा, ‘क्या आप नशे में हैं? आप जिस तरह से बात और व्यवहार कर रहे हैं, उसके लगता है कि आप नशे में हैं?’

हालांकि इसके बाद पूर्व डीजीपी पत्रकार को कमरे से बाहर जाने को कहते हैं। इसके बाद पूर्व डीजीपी के सहयगियों ने पत्रकार के साथ धक्का-मुक्की की और उसे कमरे से बाहर निकालने लगे। इस दौरान प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद अन्य पत्रकार भी समर्थन में खड़े हो गए और पूर्व डीजीपी के सहयोगियों का बदसलूकी के लिए विरोध किया।

वहीं वर्किंग जनर्लिस्ट की केरल यूनिट ने टीपी सेनकुमार से माफी की मांग की है। दूसरी तरफ, पीड़ित पत्रकार ने भी पूर्व डीजीपी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। घटना का विडियो अब तेजी से वायरल हो रहा है।   

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सहारा में वरिष्ठ पत्रकार उपेंद्र राय की कामयाबी को लगे 'नए पंख'

उपेंद्र राय ने कुछ माह पूर्व ही सहारा समूह की मास मीडिया कंपनी से मेनस्ट्रीम मीडिया में वापसी की है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 16 January, 2020
Last Modified:
Thursday, 16 January, 2020
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‘सहारा इंडिया मीडिया’ (Sahara India Media) के सीईओ और एडिटर-इन-चीफ उपेंद्र राय की जिम्मेदारियों में और इजाफा किया गया है। उन्हें अब ‘सहारा वन मीडिया एंड एंटरटेनमेंट’ की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसकी घोषणा सहाराश्री ने एक सर्कुलर के जरिए की है।

बता दें कि वरिष्ठ पत्रकार उपेंद्र राय ने कुछ माह पूर्व ही सहारा समूह की मास मीडिया कंपनी से मेनस्ट्रीम मीडिया में वापसी की है। उस दौरान उन्हें कंपनी में बतौर सीनियर एडवाइजर नियुक्त किया गया था। इसके बाद कंपनी ने उपेंद्र राय की जिम्मेदारी में परिवर्तन करते हुए उन्हें ‘सहारा इंडिया मीडिया’ के सीईओ और एडिटर-इन-चीफ की जिम्मेदारी सौंपी थी।  

गौरतलब है कि उपेन्द्र राय पूर्व में 'तहलका' (Tehelka) समूह और सहारा समूह में सीईओ और एडिटर-इन-चीफ की जिम्मेदारी निभा चुके हैं। वह 'बिजनेस वर्ल्ड' मैगजीन (Businessworld Magazine) के साथ भी एडिटोरियल एडवाइजर के तौर पर जुड़े रह चुके हैं। राय ने अपने करियर की शुरुआत 1 जून, 2000 को लखनऊ में ‘राष्ट्रीय सहारा’ से की थी। उन्होंने यहां विभिन्न पदों पर काम किया और वे यहां सबसे कम उम्र के ब्यूरो चीफ बनकर मुंबई पहुंचे।

इसके बाद वे साल 2002 में ‘स्टार न्यूज’ की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। वहां उन्हें दो साल से भी कम समय में वरिष्ठ संवाददाता बनने का मौका मिला। वहीं से 'सीएनबीसी टीवी18' (CNBC TV18) में 10 अक्टूबर, 2004 को प्रमुख संवाददाता के रूप में जॉइन किया।

बतौर विशेष संवाददाता अक्टूबर 2005 में 'स्टार न्यूज' (अब 'एबीपी न्यूज') में वापसी की और दो वर्षो के अंदर एक और पदोन्नति मिली और चैनल में सबसे युवा असोसिएट एडिटर बन गए। फिर जनवरी 2010 से दिसंबर 2014 तक 'सहारा न्यूज नेटवर्क' में एडिटर और न्यूज डायरेक्टर की जिम्मेदारी संभाली। साथ ही वे इस दौरान प्रिंटर और पब्लिशर की भूमिका में भी रहे।

उपेंद्र राय की जिम्मेदारी में इजाफे को लेकर सहाराश्री द्वारा जारी किए गए सर्कुलर को आप यहां देख सकते हैं।

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मीडिया के बारे में कही गई इस बात से PCI खफा, CM को भेजा नोटिस

केंद्र और राज्यों की सत्ता पर काबिज होने वालीं कई सियासी पार्टियों द्वारा मीडिया को नियंत्रित करने की कोशिशें वक्त-वक्त पर की जाती रहती हैं

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 16 January, 2020
Last Modified:
Thursday, 16 January, 2020
PCI

केंद्र और राज्यों की सत्ता पर काबिज होने वालीं कई सियासी पार्टियों द्वारा मीडिया को नियंत्रित करने की कोशिशें वक्त-वक्त पर की जाती रहती हैं। इसके लिए विज्ञापन को सबसे बड़े हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। यानी बात मानने वाले को ‘विज्ञापन’ और नहीं मानने वाले को ‘इंतजार’। इसी तरह का ‘प्रयास’ राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पिछले साल किया था, जिसके कारण अब उन्हें नोटिस का सामना करना पड़ा है।

प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (पीसीआई) ने गहलोत को नोटिस भेजकर दो हफ्ते में जवाब मांगा है। इसके आलावा, सोशल मीडिया पर अपने इस अलोकतांत्रिक ‘प्रयास’ के लिए उनकी आलोचना भी हो रही है। वहीं, विपक्ष में बैठी भाजपा भी एकदम से आक्रामक हो गई है। दरअसल, सरकार के एक साल पूरा होने के मौके पर 16 दिसंबर को मुख्यमंत्री आवास पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई थी। इस दौरान मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बातों-बातों में यह कह डाला था कि विज्ञापन चाहिए तो हमारी खबर दिखानी होगी। पत्रकारों से मुखातिब होते हुए गहलोत ने कहा था ‘मीडिया संस्थान करोड़ों के विज्ञापन लेते हैं, लेकिन सरकार की योजनाओं का कोई प्रचार-प्रसार नहीं करते। इसके लिए मीडिया वालों को फोन करके अनुरोध करना पड़ता है. हम नज़र रखे हुए हैं, विज्ञापन चाहिए तो हमारी खबर दिखानी होगी।’   

मुख्यमंत्री की इस तरह खुलेआम ‘धमकी’ को प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया ने गंभीरता से लिया है। पीसीआई अध्यक्ष और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश चंद्रमौली कुमार प्रसाद ने नोटिस जारी करते हुए अशोक गहलोत से प्रेस काउंसिल एक्ट 1979 की धारा 13 के तहत दो हफ्ते में अपना जवाब दाखिल करने के लिए कहा है। इस नोटिस पर मुख्यमंत्री ने कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं दी है, लेकिन भाजपा को उन्हें निशाने पर लेने का मौका जरूर मिल गया है। राजस्थान भाजपा अध्यक्ष सतीश पूनिया का कहना है कि ‘अशोक गहलोत देश के पहले ऐसे मुख्यमंत्री हैं, जिनसे प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया ने नोटिस भेजा है, इससे साबित होता है कि मौजूदा सरकार मीडिया की आजादी के लिए खतरा है। 

बता दें कि 1966 में अस्तित्व में आई प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (पीसीआई) एक अर्द्ध न्यायिक और स्वायत्त संगठन है। पीसीआई के पास दो स्पष्ट अधिकार हैं। पहला प्रेस और पत्रकारों की आजादी की रक्षा करना और दूसरा पत्रकारिता में नैतिकता की निगरानी और इसके ऊंचे मानकों को बरकरार रखना।

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