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यदि ऐसा होता तो सरकार विरोधी स्टोरीज नहीं चलाती मीडिया: नलिन कोहली
‘गवर्नेंस नाउ’ के एमडी कैलाशनाथ अधिकारी के साथ बातचीत में बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता नलिन कोहली ने मीडिया को लेकर तमाम पहलुओं पर रखी अपनी राय
समाचार4मीडिया ब्यूरो 5 years ago
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता नलिन कोहली का कहना है कि भारत में एक मजबूत मीडिया है। ‘गवर्नेंस नाउ’ (Governance Now) के एमडी कैलाशनाथ अधिकारी के साथ एक बातचीत में नलिन कोहली का कहना था कि यदि मीडिया मजबूत व स्वतंत्र नहीं होती तो न्यूज चैनल्स और अन्य आउटलेट्स अपने प्लेटफॉर्म्स पर मोदी विरोधी अथवा भाजपा विरोधी स्टोरीज नहीं चलाते।
पब्लिक पॉलिसी प्लेटफॉर्म पर ‘विजिनरी टॉक सीरीज’ (Visionary Talk series) के तहत होने वाले इस वेबिनार के दौरान नलिन कोहली ने मीडिया को महत्वपूर्ण और लोकतंत्र का मजबूत स्तंभ बताया। उन्होंने कहा, ‘भारत में मीडिया स्वतंत्र और जीवंत है। सोशल मीडिया पर आप जो देखते हैं, वह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का प्रदर्शन है।’
इस दौरान उन्होंने मीडिया का मुंह बंद किए जाने के आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि मीडिया पर सिर्फ एक बार आपातकाल के दौरान रोक लगाई गई थी और सभी लोगों को वे दिन याद हैं।
इस बातचीत के दौरान नलिन कोहली का कहना था,‘यदि मीडिया का मुंह वास्तव में बंद होता तो तमाम लोग कैसे प्रधानमंत्री, नरेंद्र मोदी और बीजेपी सरकार के खिलाफ खुलेआम और स्वतंत्र रूप से निशाना बनाने के लिए मीडिया का इस्तेमाल कर रहे हैं। मेरा मानना है कि देश में मीडिया पूरी तरह स्वतंत्र है।’
कोहली ने तमाम मुद्दों के लिए विपक्ष को जिम्मेदार ठहराया और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का गला घोंटने के आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि भाजपा सरकार पर यह आरोप बिना किसी आधार के लगाया गया है। उन्होंने कहा, ‘विपक्ष के नाते उनके पास मुद्दों को उठाने का अधिकार है, लेकिन दुर्भाग्यवश ये मुद्दे बिना किसी आधार के उठाए जा रहे हैं।’
सोशल मीडिया के कंटेंट को सरकार किस तरह विनियमित (regularize) करेगी, इस सवाल के जवाब में भाजपा की राष्ट्रीय मीडिया सेल के संयोजक कोहली ने कहा, ‘जब सोशल मीडिया की बात आती है तो यह क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र का मुद्दा है।’ उन्होंने दोहराया कि संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता काफी मूल्यवान मौलिक अधिकार है, लेकिन यह इस आजादी पर उचित प्रतिबंध भी लगाता है। कुछ भी संवैधानिक ढांचे से परे नहीं हो सकता है और सबसे अच्छा रास्ता आत्म नियमन यानी सेल्फ रेगुलेशन है।
इसके साथ ही कोहली ने यह भी कहा, ’अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मतलब डराकर अन्य व्यक्तियों की स्वतंत्रता को रोकना नहीं है, क्योंकि संविधान का अनुच्छेद जीने की आजादी देता है। यदि कोई व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार के कारण भयभीत या डरा हुआ महसूस करता है तो उसकी भी समीक्षा करने की आवश्यकता है। हम उस बिंदु पर पहुंच रहे हैं, जहां पर इन मुद्दों पर चर्चा की जा रही है। शायद इसमें कुछ समय लगे और किसी तरह का फ्रेमवर्क आ सकता है या इन प्लेटफॉर्म्स द्वारा सेल्फ रेगुलेशन हो सकता है। इस पर कानून के लिए अदालत को हस्तक्षेप की जरूरत होगी, यह बड़ी बहस का मुद्दा है।’
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