ZEE समूह में हेमलता शर्मा को मिली बड़ी जिम्मेदारी

हेमलता शर्मा ने कॉस्मिक सॉफ्टवेयर कंपनी में बतौर सॉफ्टवेयर इंजीनियर अपने करियर की शुरुआत की थी

Last Modified:
Thursday, 23 May, 2019
Hemlata Sharma

‘जी समूह’ में हेमलता शर्मा को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है। दरअसल, हेमलता शर्मा को ‘जी मीडिया कॉरपोरेशन लिमिटेड’ (ZMCL) में डिस्ट्रीब्यूशन हेड बनाया गया है। अपनी नई भूमिका में वह ‘ZMCL’ के सभी 14 चैनल्स (ZEE News, ZEE Uttar Pradesh Uttranchal, ZEE Madhya Pradesh Chhattisgarh, ZEE Hindustan, ZEE Salaam, ZEE Punjab Haryana Himachal, ZEE 24 Ganta, ZEE 24 Taas, ZEE Kalak, ZEE Rajasthan, ZEE Bihar Jharkhand, ZEE Orrisa, ZEE Business और WION) के डिस्ट्रीब्यूशन का कामकाज देखेंगी।

हेमलता शर्मा ने अपने करियर की शुरुआत ‘कॉस्मिक सॉफ्टवेयर’ (Cosmic Software) कंपनी में बतौर सॉफ्टवेयर इंजीनियर की थी। इसके बाद उन्होंने मार्केटिंग और सेल्स का दामन थाम लिया। हेमलता को 24 साल से ज्यादा का अनुभव है। डिस्ट्रीब्यूशन बिजनेस और मार्केटिंग के साथ ही केबल टीवी, चैनल्स और ब्रॉडकास्टिंग के क्षेत्र में उनकी अच्छी पकड़ है।

इससे पहले वह ‘सिटी’ (SITI),‘जीटीवी’ (Zee TV),‘जी टर्नर’(Zee Turner),‘रिलायंस’ (Reliance) और ‘भारती एयरटेल’(Bharti Airtel) जैसे ब्रैंड्स के साथ काम कर चुकी हैं। ZMCL में बतौर डिस्ट्रीब्यूशन हेड अपनी भूमिका संभालने से पहले वह ‘जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड’ ग्रुप की सहयोगी कंपनी ‘ताज टेलिविजन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड’ (Taj Television India Pvt Ltd) के साथ काम कर रही थीं। यहां वह सीनियर वाइस प्रेजिडेंट (डिस्ट्रीब्यूशन) के पद पर अपनी जिम्मेदारी संभाल रही थीं।

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न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन की 17 सितंबर को 12वीं वार्षिक आम बैठक के बाद हुई बोर्ड मीटिंग में की गई घोषणा

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Wednesday, 18 September, 2019
Last Modified:
Wednesday, 18 September, 2019
NBA

‘इंडिया टीवी’ के चेयरमैन और एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा को निजी टेलिविजन न्यूज चैनल्स का प्रतिनिधित्व करने वाले समूह 'न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन' (एनबीए) का दोबारा प्रेजिडेंट चुना गया है। 17 सितंबर को एनबीए की 12वीं वार्षिक आम बैठक के बाद हुई बोर्ड मीटिंग में यह घोषणा की गई। इस मौके पर एनबीए के नवनियुक्त पदाधिकारियों की घोषणा भी की गई।

एनबीए के बोर्ड में ‘न्यूज24 ब्रॉडकास्ट इंडिया लिमिटेड’ की चेयरपर्सन कम एमडी अनुराधा प्रसाद शुक्ला, ‘टाइम्स नेटवर्क’ के एमडी और सीईओ एमके आनंद, ‘मातृभूमि प्रिंटिंग एंड पब्लिशिंग कंपनी लिमिटेड’ के जॉइंट एमडी एमवी श्रेयम्स कुमार, ‘टीवी18 ब्रॉडकास्ट लिमिटेड’ के एमडी राहुल जोशी, ‘एबीपी न्यूज नेटवर्क’ के सीईओ अविनाश पांडे, ‘इनाडु टेलिविजन प्राइवेट लिमिटेड’ के डायरेक्टर आई. वेंकट, ‘टीवी टुडे नेटवर्क लिमिटेड’ की चेयरपर्सन और एमडी कली पुरी और ‘एनडीटीवी’ की एडिटोरियल डायरेक्टर सोनिया सिंह को शामिल किया गया है।  

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पत्रकारों के लिए इस सरकारी योजना में आवेदन करने की तारीख बढ़ी

अभी तक 20 सितंबर रखी गई थी योजना का लाभ लेने के लिए आवेदन फार्म जमा करने की तारीख

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Tuesday, 17 September, 2019
Last Modified:
Tuesday, 17 September, 2019
Media

मध्य प्रदेश सरकार के जनसंपर्क विभाग ने पत्रकार स्वास्थ्य एवं दुर्घटना समूह बीमा योजना में आवेदन करने की अंतिम तारीख को 20 सितंबर से बढ़ाते हुए 25 सितंबर कर दिया है। जनसंपर्क मंत्री पीसी शर्मा ने बताया कि पत्रकार बीमा योजना के तहत फार्म भरने की समय सीमा बढ़ाने के साथ-साथ बीमा कंपनी द्वारा बढ़ाए गए प्रीमियम को कम करने का प्रस्ताव बीमा कंपनी मुख्यालय भेजा गया है, ताकि अधिक से अधिक पत्रकार इस योजना का लाभ ले सकें।

एमपी वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन के अध्यक्ष राधावल्लभ शारदा ने समाचार4मीडिया.कॉम को बताया कि बीमा के प्रीमियम को कम करने के लिए यूनियन ने जनसंपर्क विभाग को इस बाबत ज्ञापन सौंपा था। प्रीमियम राशि कम न करने की सूरत में इस राशि को सरकार द्वारा जमा कराये जाने की अपील की गई थी, ताकि इस योजना में ग्रामीण अंचल के पत्रकारों को भी योजना का पूरा लाभ दिलाया जा सके।

यह भी पढ़ें: इस सरकारी योजना का लाभ लेने के लिए पत्रकारों के पास सुनहरा मौका

हालांकि प्रीमियम की राशि अभी तक कम नहीं की गई है, जिसके चलते पत्रकारों में ऊहापोह की स्थिति है। माना जा रहा है कि योजना की अंतिम तिथि से पूर्व 24 सितंबर को जनसंपर्क द्वारा इस संबंध में घोषणा की जा सकती है। मध्य प्रदेश जनसंपर्क विभाग द्वारा बीमा योजना से जुड़ी खबर को पढ़ने के लिए यहां क्लिक कर सकते हैं।

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हार्ट अटैक से पीड़ित वरिष्ठ पत्रकार का कुछ यूं छलका दर्द

ग्रामीण क्षेत्र के पत्रकारों के लिए सरकारी स्तर पर कल्याणकारी योजनाएं शुरू करने की उठाई मांग

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Tuesday, 17 September, 2019
Last Modified:
Tuesday, 17 September, 2019
Shankar Dev

पत्रकारों को अपने काम के दौरान तमाम तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। एक जुझारु पत्रकार इन सब परेशानियों से जूझते हुए अपनी कलम को कभी रुकने नहीं देता और लगातार अपने ‘मिशन’ में जुटा रहता है। लेकिन जब कभी पत्रकार पर संकट आता है, तो प्राय: देखने में आता है कि वह अकेला पड़ जाता है और उसके हकों की लड़ाई लड़ने के लिए कोई आगे नहीं आता है।

कुछ ऐसा ही हो रहा है आगरा के वरिष्ठ पत्रकार शंकर देव तिवारी के साथ जिन्होंने अपनी जिंदगी के करीब 35 साल पत्रकारिता के नाम कर दिए, लेकिन अब जब हार्ट अटैक के कारण वे बिस्तर पर हैं, तब उन्हें किसी भी तरह की मदद नहीं मिल रही है।

शंकर देव तिवारी का इस बारे में कहना है कि सरकार को ग्रामीण पत्रकारों की मदद के लिए सरकारी योजनाएं बनानी चाहिए, ताकि किसी भी तरह का संकट आने पर वे उसका सामना कर सकें। उनका कहना है कि ग्रामीण क्षेत्र के पत्रकारों को भविष्य निधि जैसी किसी तरह की सुविधा नहीं मिलती है, ऐसे में गंभीर बीमारी अथवा अन्य विपदा के समय काफी मुश्किल होती है। शंकर देव तिवारी के अनुसार, आजकल पत्रकारिता एक मिशन नहीं रह गई है, शब्द बेकार हो गए हैं और पत्रकारिता की आड़ में कुछ लोग अपने हित साधने में लगे हैं।

गौरतलब है कि शंकर देव तिवारी ने वर्ष 1984 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत ‘विकासशील भारत’ के साथ की थी। वर्ष 1986 में यहां से अलविदा कहकर उन्होंने ‘अमर उजाला’ से अपनी नई पारी शुरू की और 1993 तक यहां अपनी सेवाएं दीं। इसके बाद वे ‘आज’ से जुड़ गए। इस अखबार के साथ वह करीब 12 साल तक जुड़े रहे और अपनी जिम्मेदारियों को बखूबी निभाया।

वर्ष 2005 में ‘आज’ के बाद उन्होंने ‘दैनिक भास्कर’ का दामन थाम लिया और करीब तीन साल की पारी के दौरान ग्वालियर व धौलपुर में ब्यूरो चीफ के पद पर अपनी भूमिका का निर्वाह किया। 2008 में उन्होंने ‘अमर उजाला’ में वापसी की और करीब दो साल तक अपनी जिम्मेदारी निभाई।

शंकर देव तिवारी का सफर यहीं नहीं रुका। वर्ष 2010 में वे ‘बीपीएन टाइम्स’ से बतौर संपादक जुड़ गए करीब 2016 तक यहां अपनी सेवाएं दीं। इसके बाद उन्होंने ‘सी एक्सप्रेस’ में बतौर न्यूज एडिटर अपनी जिम्मेदारी संभाली। 14 फरवरी 2018 को उन्हें आगरा में बतौर रेजिडेंट एडिटर ‘जनसंदेश टाइम्स’ अखबार की लॉन्चिंग का जिम्मा सौंपा गया था। इन दिनों वे समाचार संपादक के रूप में इस अखबार की लॉन्चिंग की तैयारियों में जुटे हुए थे। इसी बीच 28 अगस्त 2019 को उन्हें हार्ट अटैक आ गया और उन्हें अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। फिलहाल ग्लोबल अस्पताल के डॉ. सुवीर गुप्ता की देखरेख में उनका इलाज चल रहा है और वे बेड रेस्ट पर हैं।

ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन की उत्तर प्रदेश इकाई के उपाध्यक्ष शंकर देव तिवारी का कहना है कि उन्हें बीमारी की हालत में न किसी संस्थान से और न ही सरकार से किसी तरह की आर्थिक मदद मिली। इलाज-दवाओं का खर्च सब निजी तौर पर करना पड़ा। उन्होंने मांग उठाई है कि सरकार को इस बारे में आगे आकर ग्रामीण पत्रकारों के भले के लिए कुछ कल्याणकारी योजनाएं शुरू करनी चाहिए, ताकि उनकी तरह किसी और पत्रकार को इस तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

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वसूली के लिए काम नहीं आया तीन ‘पत्रकारों’ का ये फंडा, भेजे गए जेल

तीनों आरोपितों ने खुद को वेबपोर्टल का पत्रकार बताया था, पीड़ित की शिकायत पर पुलिस ने तीनों को कर लिया गिरफ्तार

पंकज शर्मा by पंकज शर्मा
Published - Tuesday, 17 September, 2019
Last Modified:
Tuesday, 17 September, 2019
Crime

खुद को पत्रकार बताकर अवैध वसूली करना तीन लोगों को भारी पड़ गया। पीड़ित की शिकायत पर पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार कर लिया। कोर्ट के आदेश पर उन्हें जेल भेज दिया गया है। बता दें कि हरियाणा के फरीदाबाद स्थित बल्लभगढ़ के दशहरा मैदान में इन दिनों छठ मेला लगा हुआ है।

आरोप है कि रविवार को तीन लोग वहां पहुंचे और खुद को वेब पोर्टल का पत्रकार बताते हुए मेला संचालक आमिर खान पर अश्लीलता फैलाने का आरोप लगाया। इसके बाद तीनों ने विडियो वायरल करने की धमकी देते हुए मेला संचालक से रुपयों की मांग शुरू कर दी और पांच हजार रुपए ऐंठ लिए।

तीनों 20 हजार रुपए की मांग और कर रहे थे। मेला संचालक ने इसकी शिकायत पुलिस से कर दी। इस पर पुलिस ने तीनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया। सोमवार को तीनों को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। पुलिस के अनुसार, आरोपितों की पहचान जौली, मनोज और केसी माहौर के रूप में हुई है। तीनों युवकों ने खुद को वेब पोर्टल का पत्रकार बताया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

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अब ये वरिष्ठ पत्रकार संभालेंगे राष्ट्रपति के प्रेस सचिव की जिम्मेदारी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली कैबिनेट की नियुक्ति समिति ने दी मंजूरी, पूर्व में कई मीडिया संस्थानों में निभा चुके हैं अहम भूमिका

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Tuesday, 17 September, 2019
Last Modified:
Tuesday, 17 September, 2019
RamNath Kovind

काफी दिनों से चल रही राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के नए प्रेस सचिव की तलाश अब पूरी हो गई है। इस पद पर वरिष्ठ पत्रकार अजय कुमार सिंह को नियुक्त किया गया है। कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की ओर से जारी आधिकारिक आदेश के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली कैबिनेट की नियुक्ति समिति ने अजय कुमार सिंह (55) की नियुक्ति को मंजूरी दी है। उनकी नियुक्ति एक साल के लिए या अगले आदेश तक अनुबंध के आधार पर की गई है।

अजय कुमार सिंह को प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में काम करने का करीब 30 साल का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1985 में ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ (लखनऊ) से की थी। बाद में उन्होंने दिल्ली में ‘द पॉयनियर’ जॉइन कर लिया था। पूर्व में वह ‘बिजनेस स्टैंडर्ड’ ‘स्टार न्यूज’ (अब एबीपी न्यूज) और ‘न्यूज एक्स’ में भी अपनी जिम्मेदारी निभा चुके हैं।   

‘फर्स्टपोस्ट’ में एग्जिक्यूटिव एडिटर की भूमिका निभाने से पहले वह ‘गवर्नमेंस नाउ’ मैगजीन में एडिटर के रूप में काम कर रहे थे। इसके बाद उन्होंने दोबारा ‘गवर्नमेंस नाउ’ में डायरेक्टर (एडिटोरियल) के पद पर वापसी की थी और इस साल की शुरुआत में इस मैगजीन का प्रिंट एडिशन बंद होने तक इसी पद पर काम कर रहे थे। यहां वह मैगजीन के अंग्रेजी और मराठी एडिशन की कमान संभाल रहे थे। फिलहाल वे 'फर्स्टपोस्ट' से कंट्रीब्यूटर के तौर पर जुड़े हुए हैं।

बता दें कि राष्ट्रपति के प्रेस सचिव के रूप में वरिष्ठ पत्रकार अशोक मलिक का दो साल का कार्यकाल पूरा होने पर कई दिनों से नए प्रेस सचिव की तलाश की जा रही थी। इस दौड़ में इन दिनों ‘ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन’ (ORF) से जुड़े पूर्व पत्रकार गौतम चिकरमाने (Gautam Chikermane) और हिंदोल सेनगुप्ता (Hindol Sengupta) आदि शामिल थे।

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अब चिदंबरम के पक्ष में आए The Hindu ग्रुप के चेयरमैन एन.राम

आईएनएक्स मीडिया मामले में पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम की गिरफ्तारी की निंदा के लिए तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी की ओर से बुलाई गई थी बैठक

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Monday, 16 September, 2019
Last Modified:
Monday, 16 September, 2019
chidambaram

‘द हिन्दू ग्रुप (THG) पब्लिकेशंस प्राइवेट लिमिटेड के चेयरमैन एन.राम आईएनएक्स मीडिया (INX Media) मनी लॉन्ड्रिंग केस में दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम व कांग्रेसी नेता पी. चिदंबरम के समर्थन में खुलकर सामने आ गए हैं। चेन्नई में रविवार को एन.राम ने कहा कि इस मामले में हत्यारोपित इंद्राणी मुखर्जी और पीटर मुखर्जी के बयान के अलावा कोई सबूत न होने के बावजूद पी चिदंबरम को जेल भेज दिया गया। ऐसे में चिदंबरम के साथ घोर अन्याय हुआ है।

चिदंबरम की गिरफ्तारी की निंदा के लिए तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी (TNCC) की ओर से बुलाई गई बैठक में एन. राम ने कहा, चिदंबरम को जेल भेजने में कुछ लोगों ने साजिश रची है, ऐसे लोग चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा समय तक उन्हें जेल में रखा जाए।’

उन्होंने कहा कि इस मामले में उच्च न्यायपालिका खासकर दिल्ली हाई कोर्ट के रिस्पॉंस की कड़ी आलोचना हुई। एन. राम के अनुसार, ‘सात महीने तक इस मामले में फैसला रिजर्व रखा गया, जज के रिटायर होने से तुरंत पहले इस मामले में फैसला आ गया, जबकि चिदंबरम को अपील करने के अधिकार से भी वंचित कर दिया गया।‘

एन. राम के अनुसार, ‘पी चिदंबरम की जमानत खारिज करने के जस्टिस आर भानुमति और जस्टिस एएस बोपन्ना के आदेश में कई तथ्यात्मक गलतियां हैं, जैसे- आदेश में कहा गया है कि चिदंबरम की संपत्ति को जब्त कर लिया गया है, यह पूरी तरह गलत है।‘   

इसके साथ ही एन. राम ने यह भी कहा कि इस मामले में शीघ्रता से उसी बेंच के समक्ष रिव्यू पिटीशन दायर करने अथवा क्यूरेटिव पिटीशन (curative petition) दायर करने की जरूरत है, जो पांच जजों के सामने जाएगी। एन. राम के अनुसार, ‘इस मामले में दो हत्यारोपितों के बयान के सिवाय चिदंबरम के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई करने का कोई आधार नहीं है। इस मामले में दस्तावेजों से छेड़छाड़ किए जाने का भी कोई खतरा नहीं था। किसी गवाह को भी कोई धमकाए जाने का खतरा नहीं था। यह बहुत ही शर्मनाक है कि इस मामले में न्याय नहीं हुआ है।’

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मीडिया की स्वतंत्रता मामले में क्या बोले सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस, पढ़ें यहां

कश्मीर टाइम्स की संपादक अनुराधा भसीन की याचिका पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से रखा गया अपना पक्ष

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Monday, 16 September, 2019
Last Modified:
Monday, 16 September, 2019
Media

जम्मू कश्मीर में मीडिया की स्वतंत्रता को लेकर सुप्रीम सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने सरकार से राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए इस बारे में फैसला लेने को कहा है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर में जनजीवन सामान्य करने, कल्याणकारी सुविधाओं तक लोगों की पहुंच सुनिश्चित करने, स्कूल और कॉलेज खोले जाने को भी कहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कश्मीर में अगर तथाकथित बंद है तो उससे जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट निपट सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल से इन हलफनामों का विवरण मांगा है। इसके साथ ही कहा है कि सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए प्रयास किए जाएं।

इस दौरान केंद्र सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि कश्मीर के 88 प्रतिशत से अधिक थाना क्षेत्रों से प्रतिबंध हटा दिए गए हैं। एक गोली भी नहीं चलाई गई और कुछ स्थानीय प्रतिबंध लगाए गए हैं। वहां, दूरदर्शन जैसे टीवी चैनल और अन्य निजी चैनल, एफएम नेटवर्क काम कर रहे हैं। प्रतिबंधित इलाकों में आने-जाने के लिए मीडिया को ‘पास’ दिए गए हैं। इसके अलावा पत्रकारों को फोन और इंटरनेट की सुविधा भी उपलबध कराई गई है।

यह भी पढ़ें: मीडिया से जुड़े इस मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं महिला संपादक

इसके अलावा केंद्र सरकार ने कोर्ट को यह भी बताया कि कश्मीर में सभी अखबार सुचारु रूप से चल रहे हैं और सरकार हरसंभव मदद मुहैया करा रही है। बता दें कि ‘कश्मीर टाइम्स’ की संपादक अनुराधा भसीन ने सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में कहा था कि घाटी में अभी न इंटरनेट है और  न ही संचार की अन्य कोई सुविधा है। इसी मामले में कोर्ट में सोमवार को सुनवाई हुई थी।

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मारपीट कर दूरदर्शन के पत्रकार को बना लिया बंधक, फिर किया ये काम

देर रात घर जाने के लिए कैब में बैठे थे पीड़ित पत्रकार, शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच में जुटी पुलिस

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Monday, 16 September, 2019
Last Modified:
Monday, 16 September, 2019
Crime

पुलिस के तमाम दावों के बाद भी अपराध कम होने का नाम नहीं ले रहे हैं। अब दिल्ली से सटे नोएडा में दूरदर्शन के पत्रकार के साथ लूट की एक बड़ी वारदात सामने आई है। बताया जाता है कि बदमाशों ने पत्रकार को बंधक बनाकर न सिर्फ मोबाइल, पर्स और बैग लूट लिया, बल्कि डेबिट कार्ड का पिन नंबर पूछकर उनके खाते से 61 हजार रुपए निकाल लिए।

यही नहीं, बदमाशों ने उनके क्रेडिट कार्ड से कई स्थानों से करीब 2,66,314 रुपये की खरीदारी भी कर ली। इस दौरान पीड़ित पत्रकार को बदमाश अपने साथ गाड़ी में लेकर घूमते रहे और बाद में रात करीब 11 बजे सेक्टर-49 की रेड लाइट के पास फेंककर फरार हो गए। पीड़ित की शिकायत पर थाना सेक्टर-39 की पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

ग्रेटर नोएडा के जीटा स्थित एटीएस डोल्स सोसायटी में रहने वाले प्रेम शंकर श्रीवास्तव दिल्ली स्थित दूरदर्शन में कार्यरत हैं। शुक्रवार शाम करीब 8 बजे प्रेम शंकर श्रीवास्तव को उनके मित्र महामाया फ्लाईओवर के पास छोड़कर गए थे। यहां से घर जाने के लिए वह कैब का इंतजार कर रहे थे।

इसी बीच एक कैब वहां आकर रुकी, जिसमें पहले से तीन लोग बैठे हुए थे। लिफ्ट लेकर प्रेम शंकर भी उनके साथ बैठ गए। कुछ दूर जाते ही कार में पीछे बैठे दो युवकों ने चाकू दिखाकर प्रेम शंकर से मोबाइल, पर्स और बैग लूट लिया। फिर उनसे मारपीट कर उनका डेबिट कार्ड और क्रेडिट कार्ड का पिन नंबर उगलवा लिया और वारदात को अंजाम देकर फरार हो गए।

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PCI ने इस मसले पर रिपोर्टिंग को लेकर तय कीं गाइडलाइंस

प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया ने विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट को देखते हुए अपनाईं ये गाइडलाइंस, एक्ट का दिया हवाला

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Saturday, 14 September, 2019
Last Modified:
Saturday, 14 September, 2019
PCI

‘प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया’ (PCI) ने सुसाइड केसों व मानसिक बीमारी संबंधी मामलों की रिपोर्टिंग के संबंध में मीडिया के लिए गाइडलाइंस तय की हैं। इन गाइडलाइंस में मीडिया से गुजारिश की गई है कि संबंधित व्यक्ति की सहमति के बिना मानसिक स्वास्थ्य संस्थान में उपचार करा रहे किसी व्यक्ति की तस्वीरें या कोई अन्य जानकारी पब्लिश न करें। काउंसिल ने एक बयान में यह भी कहा है कि आत्महत्या के मामलों को रोकने के बारे में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की रिपोर्ट को देखते हुए इन गाइडलाइंस को अपनाया गया है।

इन गाइडलाइंस के अनुसार, मेंटल हेल्थ केयर एक्ट 2017 के सेक्शन 24 (1) के अनुसार, इस तरह के मामलों की रिपोर्टिंग करते समय किसी मानसिक स्वास्थ्य संस्थान में इलाज करा रहे व्यक्ति के बारे में संबंधित व्यक्ति की सहमति के बिना मीडिया किसी भी तरह की जानकारी अथवा फोटो को पब्लिश नहीं करेगा। इसके साथ ही इसी एक्ट के सेक्शन 30 (a) के तहत प्रिंट मीडिया द्वारा समय-समय पर इस एक्ट का व्यापक प्रचार किया जाएगा।

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इस सदमे ने लील ली पत्रकार कौशलेंद्र प्रपन्न की जिंदगी

हार्ट अटैक आने पर शिक्षक और पत्रकार कौशलेंद्र प्रपन्न को दिल्ली के एक अस्पताल में कराया गया था भर्ती

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Saturday, 14 September, 2019
Last Modified:
Saturday, 14 September, 2019
Kaushlendra

पेशे से शिक्षक, पत्रकार, शिक्षा के क्षेत्र में नए प्रयोग करने वाले व्यक्ति और चिंतक कौशैलेंद्र प्रपन्न का आज दिल्ली में निधन हो गया। 45 वर्षीय प्रपन्न ने दिल्ली के रोहिणी स्थित सरोज अस्पताल में आखिरी सांस ली। गंभीर हालत में उन्हें पांच सितंबर को इस अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वह करीब छह साल से टेक महिंद्रा फाउंडेशन में वाइस प्रेजिडेंट (एजुकेशन) के तौर पर काम कर रहे थे। कौशलेंद्र प्रपन्न के परिवार में उनकी पत्नी विशाखा अग्रवाल और 11 महीने का बेटा है।

बताया जाता है कि 25 अगस्त को उन्होंने दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था पर एक लेख लिखा था। ‘शिक्षा: न पढ़ा पाने की कसक’ शीर्षक से यह लेख एक प्रतिष्ठित अखबार में छपा था। इस लेख में उन्होंने नगर निगम के स्कूलों के काबिल और उत्साही शिक्षकों की पीड़ा की चर्चा की थी। उनका कहना था कि आजकल शिक्षक चाह कर भी स्कूलों में पढ़ा नहीं पा रहे हैं। पठन-पाठन के अलावा, शिक्षकों के पास ऐसे कई दूसरे सरकारी काम होते है, जिससे उनकी शिक्षा में कुछ नए प्रयोग करने की प्रक्रिया थम सी जाती है।

इस लेख के बाद कंपनी ने उन्हें नौकरी से निकाल दिया था। आरोप है कि संस्थान के ही कुछ ​​अधिकारियों ने उन्हें उन्हें बेइज्जत किया था। इसी सदमे में हार्ट अटैक आने के कारण उन्हें पांच सितंबर को आईसीयू में भर्ती कराया गया था।

प्रपन्न टेक महिंद्रा से पहले पत्रकार के रूप में भी काम कर चुके थे। उन्होंने वर्ष 2008-09 के दौरान टाइम्स ग्रुप के हिंदी बिजनेस डेली इकोनॉमिक टाइम्स में भी अपनी सेवाएं दी थीं। इससे पहले वह दिल्ली सरकार के स्कूल में बतौर शिक्षक नौकरी कर चुके थे। शिक्षा सुधार और उन्नति पर प्रपन्न ने कई किताबें लिखी हैं। देश की शिक्षा पद्धति को कैसे बेहतर बनाया जाये, इसके लिए वह जापान, इंडोनेशिया और चीन की यात्रा भी कर चुके थे। ्इसके अलावा वह समय-समय पर लेख भी लिखते रहते थे।

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