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कोर्ट ने दिल्ली क्राइम ब्रांच को दिए निर्देश, इस मामले की जानकारी मीडिया में न हो लीक
पीठ ने डीसीपी क्राइम ब्रांच को निर्देश दिया है कि वे कोर्ट में 2 सप्ताह के भीतर बताएं कि क्या किसी आरोपी के बारे में पत्रकार या सोशल मीडिया में कोई जानकारी दी गयी है या नहीं?
समाचार4मीडिया ब्यूरो 5 years ago
दिल्ली हिंसा और पिंजरा तोड़ ग्रुप के सदस्यों को लेकर कोई जानकारी अब सार्वजनिक नहीं की जाएगी। दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच को इस हिंसा को लेकर निर्देश दिए हैं, जिसमें कहा गया है कि दिल्ली हिंसा से जुड़े किसी भी आरोपी और पिंजरा तोड़ ग्रुप के सदस्यों को लेकर किसी भी तरह की जानकारी मीडिया या सोशल प्लेटफॉर्म पर शेयर नहीं की जाएगी। यानी क्राइम ब्रांच किसी थर्ड पर्सन या पत्रकार से भी जानकारी साझा नहीं कर सकेगा।
सोशल मीडिया पर भी जानकारी शेयर करने पर हाई कोर्ट ने रोक लगाई है। न्यायमूर्ति विभु बाखरू की पीठ ने डीसीपी क्राइम ब्रांच को निर्देश दिया है कि वे कोर्ट में 2 सप्ताह के भीतर हलफनामा दायर कर बताएंगे कि क्या किसी आरोपी के बारे में किसी थर्ड पर्सन यानी पत्रकार या सोशल मीडिया में कोई जानकारी दी गयी है या नहीं?
दरअसल, पिंजरा तोड़ ग्रुप की सदस्य देवांगना कलिता ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर कर क्राइम ब्रांच पर आरोप लगाया है कि मीडिया या सोशल मीडिया पर आरोपियों के बारे में जानकारी लीक की जा रही है। देवांगना कलिता ने अपनी याचिका में कहा कि अपराध शाखा के अधिकारी जानबूझकर मनगढंत जानकारी लीक कर रहे हैं जो गलत है। इन जानकारियों के वायरल होने से उनके परिवार वालों को जान को खतरा हो सकता है। उन्होंने मांग की कि पुलिस द्वारा दी जा रही जानकारी पर रोक लगाई जाए।
इस पर ही सुनवाई के दौरान कोर्ट ने दिल्ली क्राइम ब्रांच को निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 9 जुलाई को है।
बता दें कि भारत सारकार द्वारा जारी नागिरकता संसोधन कानून को लेकर दिल्ली में विरोध के दौरान हिंसा हुई थी। इसी मामले में दिल्ली की क्राइम ब्रांच पुलिस जांच कर रही है। मामले में कई आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है।
वहीं, पिंजरा तोड़ कॉलेज की छात्राओं का एक ऐसा संगठन है, जिसमें दिल्ली यूनिवर्सिटी के कई नामी कॉलेज की छात्राएं भी शामिल हैं। ये संगठन कॉलेज हॉस्टल के नियमों के खिलाफ जाकर काम करता है। दिल्ली हिंसा में कई बार इस संगठन का नाम सामने आ चुका है। ऐसे में अब हाई कोर्ट ने संस्था के किसी भी सदस्य से जुड़े विवरण को सार्वजिनक करने पर रोक लगा दी है।
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