आज वरिष्ठ पत्रकार सुशांत सिन्हा का जन्मदिन है। यह महज एक तारीख नहीं, बल्कि उस आवाज का उत्सव है जो वर्षों से देश की सियासत, समाज और सिस्टम से सवाल पूछती रही है- बेबाकी से, लेकिन गरिमा के साथ।
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Vikas Saxena
आज वरिष्ठ पत्रकार और टीवी एंकर सुशांत सिन्हा का जन्मदिन है। यह महज एक तारीख नहीं, बल्कि उस आवाज का उत्सव है जो वर्षों से देश की सियासत, समाज और सिस्टम से सवाल पूछती रही है- बेबाकी से, लेकिन गरिमा के साथ। सुशांत सिन्हा उन पत्रकारों में शुमार हैं, जिनकी भाषा में तल्खी नहीं, लेकिन सवालों में तपिश होती है।
वर्तमान में वह 'न्यूज18 इंडिया' में बतौर कंसल्टिंग एडिटर कार्यरत हैं और यहां प्राइम टाइम शो 'देश की पाठशाला' होस्ट करते हैं। सुशांत सिन्हा दर्शकों के बीच एक भरोसेमंद चेहरा बन चुके हैं। लेकिन इस मुकाम तक पहुंचने की उनकी यात्रा आसान नहीं रही। यह कहानी सिर्फ करियर ग्राफ की नहीं, बल्कि समर्पण, संघर्ष और उस जज्बे की है, जिसमें पत्रकारिता सिर्फ पेशा नहीं बल्कि जिम्मेदारी बन जाती है।
पत्रकारिता की नींव से राष्ट्रीय पहचान तक
पटना के सेंट जेवियर्स हाई स्कूल से शुरुआती शिक्षा लेने वाले सुशांत ने इग्नू से सूचना प्रौद्योगिकी में स्नातक किया। टेक्नोलॉजी की दुनिया से उनका मन जल्द ही सवालों की दुनिया में रम गया। पत्रकारिता में उनकी शुरुआत 2002 में 'जैन टीवी' से हुई और फिर उन्होंने लाइव इंडिया में लगभग छह वर्षों तक एंकर और प्रड्यूसर के तौर पर काम किया।
इसके बाद न्यूज24, NDTV इंडिया, इंडिया न्यूज, और फिर इंडिया टीवी- हर मंच पर उन्होंने अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। कहीं डिबेट शो को नई धार दी, तो कहीं जमीनी मुद्दों को बहस की मेज तक लाकर लोगों को सोचने पर मजबूर किया।
उनके बहुचर्चित शो ‘प्रश्नकाल’, ‘सुनो इंडिया’, ‘जवाब तो देना होगा’ और 'न्यूज की पाठशाला' जैसे कार्यक्रमों ने देशभर में एक सजग दर्शक वर्ग तैयार किया, जो खबरों को केवल देखना नहीं, समझना चाहता है।
डिजिटल दौर की बेबाक आवाज
2021 में उन्होंने 'Sushant Sinha' नाम से एक यूट्यूब चैनल शुरू किया। यह केवल डिजिटल प्लेटफॉर्म नहीं था, बल्कि एक ऐसा मंच बना, जहां लाखों लोग उन्हें सुनते नहीं, महसूस करते हैं। आज इस चैनल पर लाखों सब्सक्राइबर्स हैं और सैकड़ों वीडियो अपलोड हो चुके हैं, जिनमें सुशांत समाज के हर उस सवाल को उठाते हैं, जिसे मुख्यधारा की बहस अक्सर नजरअंदाज कर देती है।
इस मंच ने सुशांत को न सिर्फ एक स्वतंत्र आवाज दी, बल्कि उन्हें उन दर्शकों से जोड़ा जो बिना लाग-लपेट के खबरें सुनना और समझना चाहते हैं।
सम्मान, सवाल और संवेदनशीलता
पत्रकारिता के क्षेत्र में सुशांत सिन्हा को कई सम्मान मिल चुके हैं। लेकिन उनसे जुड़ी सबसे बड़ी उपलब्धि शायद ये है कि वह दर्शकों के बीच सिर्फ एक एंकर नहीं, एक संवेदनशील विचार की तरह देखे जाते हैं। वह न शोर मचाते हैं, न दिखावे की आक्रामकता लाते हैं, बल्कि तथ्य, सवाल और दृष्टिकोण को सामने रखते हैं।
एक निजी स्पर्श, एक सार्वजनिक जिम्मेदारी
जो लोग सुशांत सिन्हा को सिर्फ टीवी पर देखते हैं, उन्हें यह जानकर सुखद आश्चर्य होगा कि कैमरे के पीछे वह बेहद सरल, विनम्र और विचारशील व्यक्ति हैं। क्रिकेट के शौकीन, किताबों के प्रेमी और विचारों के सजग संवाददाता- सुशांत का व्यक्तित्व जितना प्रोफेशनल है, उतना ही निजी तौर पर संतुलित और सधा हुआ।
उनका ट्विटर और यूट्यूब अकाउंट इस बात का सबूत है कि वह संवाद में विश्वास रखते हैं- वह संवाद जो बहस नहीं, समझदारी पैदा करता है।
आज उनके जन्मदिन पर यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि सुशांत सिन्हा उस पत्रकारिता की मिसाल हैं जो आवाज तो बनती है, लेकिन शोर नहीं। जो सवाल तो पूछती है, लेकिन गरिमा के साथ। जो पक्षधर होती है, लेकिन सच के।
जन्मदिन की ढेरों शुभकामनाएं, सुशांत सिन्हा! आप यूं ही पत्रकारिता की रोशनी बनकर देश को सवालों की दिशा दिखाते रहें और सच के पक्ष में, देश की आवाज बने रहें- निडर, निष्पक्ष और निर्भीक।
'S4M पत्रकारिता 40 अंडर 40' कार्यक्रम में हिन्दुस्तान के प्रधान संपादक शशि शेखर ने युवा पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि पत्रकारिता का भविष्य उन लोगों का है, जो प्रमाणित सच के साथ खड़े रहेंगे।
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Vikas Saxena
समाचार4मीडिया के प्रतिष्ठित 'पत्रकारिता 40 अंडर 40' कार्यक्रम में हिन्दुस्तान के प्रधान संपादक शशि शेखर ने युवा पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि पत्रकारिता का भविष्य उन लोगों का है, जो प्रमाणित सच के साथ खड़े रहेंगे। उन्होंने कहा कि आज सूचना हर पल उपलब्ध है, लेकिन सबसे बड़ी कमी सत्य की है। ऐसे समय में पत्रकारों की जिम्मेदारी पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई है।
अपने संबोधन की शुरुआत उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में की। उन्होंने कहा कि सुबह तेज बारिश देखकर उन्हें लगा कि देश की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था की राजधानी के चौराहे शायद पानी में डूब गए होंगे और कार्यक्रम तक पहुंचना मुश्किल होगा। लेकिन उन्होंने मन बना लिया कि जब आने का वादा किया है तो उसे निभाना ही है। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, "तैरना तो नहीं आता, लेकिन कोशिश करेंगे, पहुंच ही जाएंगे।"
इसके बाद उन्होंने कहा कि आज जब '40 अंडर 40' के युवा पत्रकारों को सम्मानित किया जा रहा है, तो उन्हें अपना शुरुआती पत्रकारिता का दौर याद आ रहा है। उन्होंने बताया कि करीब 40 साल पहले, मात्र 25 वर्ष की उम्र में वह 'आज' अखबार के इलाहाबाद संस्करण के स्थानीय संपादक थे। उस समय देश में तीन बड़ी घटनाएं हुई थीं—शाहबानो मामला, राम जन्मभूमि का ताला खुलना और बोफोर्स सौदा। उन्होंने कहा कि उस समय शायद किसी को अंदाजा नहीं था कि ये घटनाएं आगे चलकर भारत की राजनीति और समाज की दिशा बदल देंगी।
शशि शेखर ने कहा कि आज वर्ष 2026 में भी दुनिया और देश तेजी से बदल रहे हैं। संभव है कि आज जो घटनाएं हमारे सामने घट रही हैं, वे आने वाले वर्षों में इतिहास की दिशा तय करें। इसलिए पत्रकारों का काम केवल खबर लिखना नहीं, बल्कि समय की नब्ज को पहचानना भी है। उन्होंने कहा कि अगर उन्हें 1986 में यह अहसास होता कि वे इतिहास के एक निर्णायक दौर के गवाह हैं, तो शायद वे और बेहतर रिपोर्टिंग करते, ज्यादा गंभीरता से नोट्स बनाते और समय के ज्यादा काम आते। इसी अनुभव के आधार पर उन्होंने युवा पत्रकारों से अपील की कि वे आज की हर बड़ी घटना को गंभीरता से देखें और समझें।
मीडिया के बदलते स्वरूप पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा था, जब सूचना के बहुत सीमित स्रोत थे। यदि कोई कह देता था कि "बीबीसी में सुना है", तो लोग उसे लगभग अंतिम सत्य मान लेते थे। उस दौर में आकाशवाणी और दूरदर्शन ही प्रमुख माध्यम थे। लेकिन आज सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के कारण हर व्यक्ति सूचना का स्रोत बन गया है। ऐसे माहौल में पत्रकार की जिम्मेदारी कई गुना बढ़ गई है, क्योंकि अब सूचना से ज्यादा जरूरी उसकी सत्यता है।
उन्होंने हाल की एक घटना का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले लाठीचार्ज जैसी घटनाओं के दौरान लोगों की प्रतिक्रिया अलग होती थी, लेकिन अब माहौल बदल गया है। उन्होंने कहा कि उन्होंने ऐसे दृश्य देखे, जहां लाठीचार्ज के दौरान भी कुछ लोग वीडियो बनाने और रील रिकॉर्ड करने में लगे थे। कोई कह रहा था कि रील ठीक से नहीं बनी, तो कोई आंसू गैस की बात कर रहा था। उन्होंने कहा कि यह केवल समाज की मानसिकता में बदलाव नहीं है, बल्कि व्यवस्था और कानून-व्यवस्था संभालने वाली एजेंसियों को भी इस नई मानसिकता को समझना होगा।
हालांकि उन्होंने सुरक्षा बलों के प्रति गहरा सम्मान भी व्यक्त किया। उन्होंने मणिपुर में बिताए अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्होंने बहुत करीब से देखा है कि किस तरह जवान अपनी जान की परवाह किए बिना देश की सुरक्षा करते हैं। उन्होंने एक पुलिस अधिकारी का किस्सा सुनाया, जिसने बेहद कठिन परिस्थितियों में सीमित संसाधनों के बावजूद डटे रहने की बात कही थी। शशि शेखर ने कहा कि ऐसे अनुभवों के बाद वह कभी भी सुरक्षा बलों के त्याग और साहस को कम करके नहीं आंकते।
उन्होंने प्रसिद्ध लेखक मार्क ट्वेन का उल्लेख करते हुए कहा कि व्यंग्य अक्सर एक छोटी क्रांति की शुरुआत होता है। उनके अनुसार सोशल मीडिया आने के बाद नेताओं और सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों की भाषा और व्यवहार भी बदल गया है, क्योंकि अब हर बात रिकॉर्ड हो सकती है और तुरंत लोगों तक पहुंच सकती है। यही बदलाव आज लोकतंत्र और संवाद की नई वास्तविकता बन चुका है।
टेलीविजन पत्रकारिता के अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने बताया कि वर्ष 2001 में जब वह एक नए समाचार चैनल की लॉन्चिंग से जुड़े थे, तब किसी को अंदाजा नहीं था कि वह देश का सबसे बड़ा और सबसे तेज चैनल बन जाएगा। उसी दौरान गुजरात भूकंप, अमेरिका में 9/11 आतंकी हमला, भारतीय संसद पर हमला और नेपाल राजपरिवार की हत्या जैसी कई बड़ी घटनाएं हुईं। उन्होंने कहा कि वह समय टेलीविजन पत्रकारिता के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण और सीख देने वाला था।
उन्होंने कहा कि उस समय खबर जुटाने पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाते थे। वर्ष 2002 में केवल न्यूज़ गैदरिंग पर लगभग 16 करोड़ रुपये का खर्च आया था। गुजरात भूकंप और अफगानिस्तान जैसे स्थानों पर रिपोर्टिंग के लिए चार्टर्ड विमान तक लेने पड़े थे। लेकिन आज मीडिया संस्थानों के लिए उस स्तर पर संसाधन जुटाना आसान नहीं है।
अफगानिस्तान में रिपोर्टिंग के दौरान अपने सहयोगी प्रभात शुंगलू का जिक्र करते हुए शशि शेखर भावुक हो गए। उन्होंने बताया कि प्रभात जिस झोपड़ी में रह रहे थे, उसके बगल वाले हिस्से में एक फ्रांसीसी पत्रकार ठहरा हुआ था, जिसकी उसके दुभाषिए ने हत्या कर दी थी। यह जानने के बाद उन्होंने प्रभात से वापस लौट आने को कहा, लेकिन प्रभात ने जवाब दिया कि अभी लौटना नहीं है, पहले काम पूरा करना है। शशि शेखर ने कहा कि पत्रकारिता ऐसे ही समर्पित और साहसी लोगों की वजह से मजबूत बनी हुई है और उनसे बहुत कुछ सीखने को मिलता है।
अपने संबोधन के अंत में उन्होंने पत्रकारिता की सबसे बड़ी कसौटी बताते हुए कहा कि आज हर पल खबर सामने आ रही है, लेकिन सबसे बड़ा संकट सच का है। उन्होंने कहा, "अगर कोई मुझसे पूछता है कि पत्रकारिता क्या है, तो मेरा जवाब यही होता है कि पत्रकारिता वही है, जिसमें हम ऐसा सच कहें जिसे प्रमाणित किया जा सके। जब तक यह सिद्धांत जीवित रहेगा, तब तक पत्रकारिता भी जीवित रहेगी।"
उन्होंने युवा पत्रकारों से कहा कि यदि वे सच के साथ खड़े रहेंगे, तो आने वाले समय में लोग उन्हें खोजकर पढ़ेंगे, सुनेंगे और उन पर भरोसा करेंगे। उन्होंने विश्वास जताया कि भविष्य उन्हीं पत्रकारों का होगा, जो तथ्यों, ईमानदारी और विश्वसनीयता के साथ समाज के सामने सच्चाई रखेंगे। अपने संबोधन का समापन उन्होंने सभी युवा पत्रकारों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं देते हुए किया
इंडस्ट्री से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि क्षिप्रा जटाना पिछले कुछ समय से केवल नेटवर्क18 ही नहीं, बल्कि रिलायंस समूह के स्तर पर भी कानूनी, नियामक और नीतिगत मामलों में अहम भूमिका निभा रही हैं।
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Samachar4media Bureau
‘नेटवर्क18’ (Network18) ने 'न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एंड डिजिटल एसोसिएशन' (NBDA) में अपने प्रतिनिधि के रूप में समूह की लीगल और रेगुलेटरी अफेयर्स प्रमुख क्षिप्रा जटाना को नामित करने का फैसला किया है। वह कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर राहुल जोशी की जगह लेंगी। इस घटनाक्रम की पुष्टि नेटवर्क18 ने की है।
यह नियुक्ति राहुल जोशी के NBDA से इस्तीफा देने के बाद की गई है। राहुल जोशी ने बढ़ती पेशेवर जिम्मेदारियों के चलते इंडस्ट्री के इस प्रमुख संगठन से अलग होने का फैसला लिया है। हालांकि, वह पहले की तरह नेटवर्क18 के मैनेजिंग डायरेक्टर बने रहेंगे।
क्षिप्रा जटाना की नियुक्ति ऐसे समय में हुई है, जब मीडिया इंडस्ट्री में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की टेलीविजन रेटिंग नीति को लेकर हाल ही में व्यापक चर्चा हुई थी। विशेष रूप से टेलीविजन रेटिंग में 'लैंडिंग पेज' व्यूअरशिप को शामिल किए जाने के मुद्दे पर ब्रॉडकास्टर्स के बीच अलग-अलग राय सामने आई थी।
इंडस्ट्री सूत्रों के अनुसार, इस विषय पर हुई चर्चाओं के दौरान 'इंडियन ब्रॉडकास्टिंग एंड डिजिटल फाउंडेशन' (IBDF) ने मौजूदा लैंडिंग पेज व्यवस्था को बनाए रखने का समर्थन किया था। वहीं, नेटवर्क18 ने टेलीविजन ऑडियंस मेजरमेंट प्रणाली में सुधार की जरूरत बताते हुए लैंडिंग पेज व्यूअरशिप को रेटिंग से हटाने की वकालत की थी।
इंडस्ट्री से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि क्षिप्रा जटाना पिछले कुछ समय से केवल नेटवर्क18 ही नहीं, बल्कि रिलायंस समूह के स्तर पर भी कानूनी, नियामक और नीतिगत मामलों में अहम भूमिका निभा रही हैं।
इंडस्ट्री से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, क्षिप्रा जटाना नेटवर्क18 में लीगल, रेगुलेटरी और सरकारी मामलों की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ समूह स्तर के मामलों पर भी काम कर रही हैं। ऐसे में उनकी नियुक्ति से उद्योग संगठनों में कंपनियों के लिए नीतिगत स्तर पर एक साझा प्रतिनिधित्व स्थापित होगा।
बताया गया है कि प्रसारण सुधार, ऑडियंस मेजरमेंट, डिजिटल न्यूज नीति, कंटेंट रेगुलेशन और विज्ञापन मानकों जैसे कई नियामकीय विषयों पर चल रही प्रक्रियाओं के बीच क्षिप्रा जटाना की बढ़ी हुई जिम्मेदारियां विशेष महत्व रखती हैं।
कंपनी की जानकारी के अनुसार, क्षिप्रा जटाना नेटवर्क18 में ग्रुप लीगल काउंसिल हैं और कंपनी के लीगल, पॉलिसी एवं रेगुलेटरी अफेयर्स विभाग का नेतृत्व करती हैं। वह समूह के विभिन्न कारोबारों और संयुक्त उपक्रमों से जुड़े नियामकीय और सरकारी मामलों की निगरानी करती हैं। साथ ही समूह की कानूनी और नियामकीय रणनीति तैयार करने, कारोबार के विकास को गति देने और बेहतर कॉरपोरेट गवर्नेंस को मजबूत करने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है।
मीडिया इंडस्ट्री में कानूनी, नियामकीय और नीतिगत मामलों को संभालने का उन्हें करीब तीन दशक का अनुभव है। इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का कहना है कि समूह स्तर पर उनकी बढ़ती जिम्मेदारियों के बाद मीडिया क्षेत्र में वह रिलायंस समूह की प्रमुख कानूनी और नीतिगत आवाज के रूप में उभरी हैं।
इंडस्ट्री के जानकारों का मानना है कि NBDA में उनका प्रतिनिधित्व केवल राहुल जोशी की जगह लेने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समूह की मीडिया कंपनियों के लिए एक समान नियामकीय दृष्टिकोण को संस्थागत रूप देने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है।
वहीं, राहुल जोशी का NBDA से इस्तीफा पूरी तरह प्रशासनिक कारणों से लिया गया फैसला माना जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, नेटवर्क18 के ब्रॉडकास्ट और डिजिटल न्यूज कारोबार की बढ़ती जिम्मेदारियों के कारण उनके लिए NBDA की बैठकों और समितियों की चर्चाओं में नियमित रूप से शामिल होना संभव नहीं हो पा रहा था। वह आगे भी नेटवर्क18 के मैनेजिंग डायरेक्टर के रूप में अपनी जिम्मेदारियां निभाते रहेंगे।
सूत्रों के अनुसार, राहुल जोशी ने बढ़ती पेशेवर जिम्मेदारियों के कारण यह फैसला लिया है। हालांकि, वह नेटवर्क18 के मैनेजिंग डायरेक्टर के रूप में अपनी जिम्मेदारियां पहले की तरह निभाते रहेंगे।
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Samachar4media Bureau
‘नेटवर्क18’ (Network18) के मैनेजिंग डायरेक्टर राहुल जोशी ने ‘न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एंड डिजिटल एसोसिएशन’ (NBDA) में अपनी भूमिका से इस्तीफा दे दिया है। हालांकि, वह नेटवर्क18 के मैनेजिंग डायरेक्टर के रूप में अपनी जिम्मेदारियां पहले की तरह निभाते रहेंगे।
सूत्रों के अनुसार, राहुल जोशी ने बढ़ती पेशेवर जिम्मेदारियों के कारण यह फैसला लिया है। व्यस्त कार्यक्रम के चलते वह NBDA की बैठकों और अन्य गतिविधियों में नियमित रूप से शामिल नहीं हो पा रहे थे। बताया जा रहा है कि यह निर्णय किसी रणनीतिक या नीतिगत मतभेद के कारण नहीं, बल्कि प्रशासनिक बदलाव के तहत लिया गया है।
मामले से जुड़े एक सूत्र ने बताया कि समय की कमी के कारण राहुल जोशी कई बैठकों में शामिल नहीं हो पा रहे थे। ऐसे में एसोसिएशन का मानना है कि कंपनी की ओर से ऐसा वरिष्ठ अधिकारी प्रतिनिधित्व करे, जो संगठन की गतिविधियों के लिए अधिक समय दे सके।
सूत्रों के मुताबिक, नेटवर्क18 अब NBDA में अपने प्रतिनिधि के रूप में किसी अन्य वरिष्ठ अधिकारी को नामित करेगा। माना जा रहा है कि कंपनी का कोई शीर्ष अधिकारी एसोसिएशन की नीतिगत चर्चाओं, गवर्नेंस बैठकों और नियामकीय मामलों में सक्रिय रूप से भागीदारी करेगा।
बताया गया है कि राहुल जोशी आगे भी नेटवर्क18 के मैनेजिंग डायरेक्टर बने रहेंगे और समूह के ब्रॉडकास्ट तथा डिजिटल न्यूज कारोबार का नेतृत्व करते रहेंगे।
बता दें कि NBDA इस समय प्रसारण और डिजिटल समाचार क्षेत्र से जुड़े विभिन्न नीतिगत एवं नियामकीय मुद्दों पर सरकार और संबंधित संस्थाओं के साथ सक्रिय रूप से संवाद कर रहा है। एसोसिएशन प्रसारण नियमों, कंटेंट मानकों, डिजिटल न्यूज नीति, स्व-नियमन और मीडिया से जुड़े बदलते विधायी ढांचे जैसे विषयों पर इंडस्ट्री का पक्ष रखता रहा है।
इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का कहना है कि विभिन्न मंत्रालयों और नियामकीय संस्थाओं के साथ बढ़ती बैठकों और परामर्श प्रक्रियाओं के कारण सदस्य कंपनियों के प्रतिनिधियों की जिम्मेदारियां भी बढ़ी हैं। ऐसे में कंपनियां ऐसे अधिकारियों को नामित कर रही हैं, जो एसोसिएशन के कार्यों में पर्याप्त समय दे सकें।
सूत्रों ने यह भी स्पष्ट किया कि राहुल जोशी के इस्तीफे का अर्थ यह नहीं है कि NBDA से नेटवर्क18 दूरी बना रहा है। कंपनी एसोसिएशन में अपनी सक्रिय भागीदारी जारी रखेगी और जल्द ही नए वरिष्ठ प्रतिनिधि का नाम घोषित करेगी।
पिछले कुछ समय में मीडिया इंडस्ट्री के वरिष्ठ अधिकारियों पर काम का दबाव लगातार बढ़ा है। टेलीविजन ऑडियंस मेजरमेंट में सुधार, प्रसारण नीति, डिजिटल कंटेंट नियम, विज्ञापन मानकों और वितरण से जुड़े कई विषयों पर इंडस्ट्री लगातार नियामकीय स्तर पर संवाद कर रही है।
गौरतलब है कि NBDA देश के प्रमुख टेलीविजन न्यूज ब्रॉडकास्टर्स और डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स का प्रतिनिधित्व करने वाला प्रमुख इंडस्ट्री निकाय है। यह सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय समेत विभिन्न सरकारी विभागों और नियामकीय संस्थाओं के साथ न्यूज ब्रॉडकास्टिंग क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर इंडस्ट्री की ओर से संवाद करता है। संगठन की विभिन्न समितियां संपादकीय मानकों, स्व-नियमन, कानूनी मामलों और नीतिगत सुझावों पर विचार-विमर्श करती हैं।
हालांकि खबर लिखे जाने तक नेटवर्क18 या NBDA की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई थी। हमारी सहयोगी वेबसाइट एक्सचेंज4मीडिया द्वारा भेजे गए सवालों का भी दोनों पक्षों की ओर से कोई जवाब नहीं मिला था।
पुणे टाइम्स मिरर से जुड़ने से पहले निर्मल शाह ‘जी मीडिया’ (Zee Media) में रेवेन्यू हेड (डिजिटल) के पद पर कार्यरत थे।
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Samachar4media Bureau
‘पुणे टाइम्स मिरर’ समाचार पत्र ने मीडिया इंडस्ट्री के अनुभवी प्रोफेशनल निर्मल शाह को चीफ रेवेन्यू ऑफिसर (CRO) के पद पर नियुक्त किया है। अपनी नई जिम्मेदारी में वह प्रिंट, डिजिटल, इवेंट्स और ब्रैंडेड कंटेंट से जुड़ी रेवेन्यू स्ट्रैटेजी का नेतृत्व करेंगे। साथ ही विज्ञापन से होने वाली आय बढ़ाने और राष्ट्रीय स्तर पर ब्रैंड पार्टनरशिप के विस्तार पर उनका विशेष फोकस रहेगा।
निर्मल शाह के पास मीडिया सेल्स और रेवेन्यू लीडरशिप का 22 वर्षों से अधिक का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर में इंटीग्रेटेड एडवरटाइजिंग, स्पॉन्सरशिप, ब्रैंडेड कंटेंट, प्रोग्रामेटिक और डिजिटल मोनेटाइजेशन जैसे क्षेत्रों में काम किया है। इसके अलावा उन्होंने कई प्रमुख डिजिटल पब्लिशर्स, ओटीटी प्लेटफॉर्म, स्पोर्ट्स और मीडिया संगठनों के साथ मिलकर रेवेन्यू बिजनेस को आगे बढ़ाने और लंबे समय तक क्लाइंट्स के साथ मजबूत संबंध बनाने का काम किया है।
पुणे टाइम्स मिरर से जुड़ने से पहले निर्मल शाह ‘जी मीडिया’ (Zee Media) में रेवेन्यू हेड (डिजिटल) के पद पर कार्यरत थे। वहां वह कंपनी के डिजिटल पोर्टफोलियो की मोनेटाइजेशन और रेवेन्यू स्ट्रेटजी के लिए जिम्मेदार थे। उनके कार्यक्षेत्र में डिस्प्ले, कनेक्टेड टीवी (CTV), प्रोग्रामेटिक रेवेन्यू, ब्रैंडेड कंटेंट और इवेंट मोनेटाइजेशन शामिल थे।
इससे पहले वह फैनकोड में स्पॉन्सरशिप और एडवरटाइजिंग सेल्स का नेतृत्व कर चुके हैं। इस दौरान उन्होंने क्रिकेट (इंटरनेशनल बाइलेटरल), फुटबॉल, फॉर्मूला-1, गोल्फ, रग्बी, हॉकी, बास्केटबॉल, वॉलीबॉल और बेसबॉल समेत कई खेलों से जुड़े विज्ञापन और स्पॉन्सरशिप कारोबार को संभाला तथा विज्ञापनदाताओं के लिए इंटीग्रेटेड ब्रैंड सॉल्यूशंस उपलब्ध कराए।
निर्मल शाह 'सोनीलिव' (SonyLIV) में नेशनल सेल्स हेड के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। वहां उन्होंने प्लेटफॉर्म के विज्ञापन कारोबार को मजबूत बनाने के साथ-साथ 'कौन बनेगा करोड़पति', 'शार्क टैंक इंडिया', 'इंडियन आइडल', फीफा, यूईएफए यूरो, ला लीगा, ओलंपिक, कॉमनवेल्थ गेम्स और एमिरेट्स एफए कप जैसी प्रमुख प्रॉपर्टीज के लिए स्पॉन्सरशिप हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
अपने करियर के दौरान वह नेटवर्क18 मीडिया एंड इन्वेस्टमेंट्स, सिफी टेक्नोलॉजीज और हिंदुस्तानटाइम्स डॉट कॉम जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में भी नेतृत्वकारी भूमिकाओं में काम कर चुके हैं। यहां उन्होंने स्ट्रैटेजिक क्लाइंट पार्टनरशिप, नए रेवेन्यू मॉडल और मजबूत सेल्स टीम तैयार करने में अहम योगदान दिया।
अपनी नियुक्ति पर निर्मल शाह ने कहा कि आज का मीडिया परिदृश्य तेजी से बदल रहा है और ब्रैंड अब अलग-अलग विज्ञापन माध्यमों के बजाय एकीकृत समाधान चाहते हैं। उन्होंने कहा कि पुणे टाइम्स मिरर प्रिंट, डिजिटल, इवेंट्स, ब्रैंडेड कंटेंट, परफॉर्मेंस और ऑडियंस एंगेजमेंट को एक मंच पर लाकर ऐसी जरूरतों को पूरा करने की मजबूत स्थिति में है। उन्होंने कहा कि वह टीम के साथ मिलकर ऐसे प्रभावी और परिणाम आधारित मार्केटिंग सॉल्यूशंस तैयार करने की दिशा में काम करेंगे, जो विज्ञापनदाताओं के लिए मूल्य पैदा करें और संस्थान की मौजूदगी को हर स्तर पर मजबूत करें।
कंपनी के अनुसार, निर्मल शाह मीडिया इंडस्ट्री में अपनी व्यापक विशेषज्ञता और मजबूत साख के साथ जुड़े हैं। ऐसे समय में जब पुणे टाइम्स मिरर खुद को एक मल्टी-सिटी और इंटीग्रेटेड मीडिया कंपनी के रूप में विकसित कर रहा है, उनकी नियुक्ति कंपनी की विकास रणनीति में अहम भूमिका निभाएगी।
द लेक्सिकॉन ग्रुप और पुणे टाइम्स मिरर के सीएमडी पंकज शर्मा ने कहा कि मीडिया इंडस्ट्री तेजी से बदल रही है और आज ब्रैंड केवल मीडिया स्पेस नहीं, बल्कि इंटीग्रेटेड मार्केटिंग सॉल्यूशंस चाहते हैं। प्रिंट, डिजिटल, ओटीटी, इवेंट्स, ब्रैंडेड कंटेंट और स्पॉन्सरशिप जैसे क्षेत्रों में निर्मल शाह का अनुभव उन्हें इस दिशा में सबसे उपयुक्त नेतृत्वकर्ता बनाता है। उनका अनुभव और रणनीतिक दृष्टिकोण पुणे टाइम्स मिरर को देश के सबसे प्रगतिशील इंटीग्रेटेड मीडिया ब्रैंड्स में शामिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
दिल्ली स्टेट इंडस्ट्रियल एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (DSIIDC) ने सोशल मीडिया और क्रिएटिव एजेंसी की नियुक्ति के लिए 2.20 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया है।
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Samachar4media Bureau
तसमयी लाहा रॉय, एडिटर, एक्सचेंज4मीडिया ।।
दिल्ली स्टेट इंडस्ट्रियल एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (DSIIDC) ने सोशल मीडिया और क्रिएटिव एजेंसी की नियुक्ति के लिए 2.20 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया है। यह कॉन्ट्रैक्ट शुरुआती तौर पर एक साल के लिए होगा, जिसे एजेंसी के प्रदर्शन के आधार पर एक और साल के लिए बढ़ाया जा सकता है।
exchange4media को मिली रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (RFP) के अनुसार, चुनी गई एजेंसी DSIIDC की विभिन्न संस्थागत गतिविधियों के लिए एकीकृत कम्युनिकेशन सपोर्ट उपलब्ध कराएगी। इसमें औद्योगिक बुनियादी ढांचे का विकास, MSME को बढ़ावा देना, उद्यमिता से जुड़ी पहल, स्टेकहोल्डर्स के साथ संवाद, प्रदर्शनियां, वर्कशॉप, कार्यक्रम और सरकारी योजनाओं के प्रचार-प्रसार से जुड़े कार्य शामिल होंगे।
इस कॉन्ट्रैक्ट के तहत एजेंसी को सोशल मीडिया मैनेजमेंट, डिजिटल आउटरीच, क्रिएटिव सर्विसेज, ऑडियो-वीडियो कंटेंट तैयार करने और अन्य कम्युनिकेशन से जुड़े कार्यों की जिम्मेदारी निभानी होगी।
एजेंसी DSIIDC के आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का संचालन करेगी। इसके अलावा उसे रील्स, एनिमेशन, एक्सप्लेनर वीडियो और कैंपेन फिल्म जैसे डिजिटल कंटेंट तैयार करने होंगे। संगठन की वेबसाइट का रखरखाव, कार्यक्रमों और प्रदर्शनियों में सहयोग, फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी, प्रेस रिलीज, भाषण, ब्रोशर और वार्षिक रिपोर्ट जैसे कॉरपोरेट कम्युनिकेशन मैटेरियल तैयार करना, साथ ही मीडिया मॉनिटरिंग और रिसर्च का काम भी एजेंसी की जिम्मेदारी होगी।
RFP में हर महीने किए जाने वाले कार्यों का भी अनुमान दिया गया है। इसके अनुसार एजेंसी को हर महीने 50 से 70 सोशल मीडिया पोस्ट या क्रिएटिव, 10 से 15 शॉर्ट वीडियो, 4 से 6 मोशन ग्राफिक्स, 10 से 15 क्रिएटिव डिजाइन, 10 तक कार्यक्रमों या साइट विजिट्स की कवरेज और 2 से 3 डिजिटल कैंपेन तैयार करने होंगे।
वहीं सालभर में एजेंसी को एक कॉरपोरेट रिपोर्ट, चार तक संस्थागत फिल्में, 12 न्यूजलेटर और बड़े कार्यक्रमों व स्टेकहोल्डर आउटरीच गतिविधियों के लिए कम्युनिकेशन सपोर्ट भी देना होगा।
DSIIDC ने सोशल मीडिया प्रदर्शन को लेकर भी लक्ष्य तय किए हैं। एजेंसी से उम्मीद की गई है कि वह हर सक्रिय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर हर महीने कम-से-कम 5 प्रतिशत फॉलोअर्स या सब्सक्राइबर्स की वृद्धि दर्ज कराने का प्रयास करेगी। इसके साथ ही रीच, इम्प्रेशन, व्यूज, लाइक्स, शेयर और वॉच टाइम जैसे एंगेजमेंट मेट्रिक्स में भी लगातार सुधार दिखाना होगा।
टेंडर में हिस्सा लेने के लिए कुछ जरूरी पात्रता शर्तें भी तय की गई हैं। बोली लगाने वाली एजेंसी का सेंट्रल ब्यूरो ऑफ कम्युनिकेशन (CBC) में पंजीकृत (Empanelled) होना जरूरी है। इसके अलावा पिछले तीन वित्तीय वर्षों में एजेंसी का औसत वार्षिक कारोबार कम-से-कम 10 करोड़ रुपये होना चाहिए।
एजेंसी के पास कम-से-कम 50 फुल-टाइम प्रोफेशनल्स होने चाहिए और उसका संचालन एक से अधिक शहरों में होना चाहिए। साथ ही पिछले पांच वर्षों में एजेंसी ने सरकारी विभागों या सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) के लिए कम-से-कम तीन ऐसे कम्युनिकेशन प्रोजेक्ट पूरे किए हों, जिनमें प्रत्येक की कीमत 1.5 करोड़ रुपये या उससे अधिक रही हो।
एजेंसी का चयन क्वालिटी एंड कॉस्ट बेस्ड सिलेक्शन (QCBS) प्रक्रिया के तहत किया जाएगा। इसमें 70 प्रतिशत वेटेज तकनीकी मूल्यांकन और 30 प्रतिशत वेटेज वित्तीय बोली को दिया जाएगा।
तकनीकी मूल्यांकन के दौरान एजेंसी के कारोबार, सरकारी परियोजनाओं का अनुभव, प्रस्तावित कोर टीम और DSIIDC की कम्युनिकेशन रणनीति एवं कैंपेन अप्रोच पर आधारित प्रस्तुति (Presentation) का आकलन किया जाएगा।
WPP Media ने भारत में अपने एडवांस्ड टीवी कारोबार को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए राजीव राजगोपाल को एडवांस्ड टीवी (Advanced TV) का सीनियर वाइस प्रेजिडेंट नियुक्त किया है।
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Samachar4media Bureau
WPP Media ने भारत में अपने एडवांस्ड टीवी कारोबार को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए राजीव राजगोपाल को एडवांस्ड टीवी (Advanced TV) का सीनियर वाइस प्रेजिडेंट नियुक्त किया है। इस नई भूमिका में वह भारत में कंपनी के एडवांस्ड टीवी बिजनेस का नेतृत्व करेंगे और इसे WPP Media की मीडिया सॉल्यूशंस रणनीति का अहम हिस्सा बनाने पर काम करेंगे।
राजीव राजगोपाल ने अपनी LinkedIn पोस्ट के जरिए इस नई जिम्मेदारी की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि उनकी भूमिका भारत के लिए WPP Media की एडवांस्ड टीवी रणनीति तैयार करने और उसे लागू करने की होगी। इसके तहत वह कनेक्टेड टीवी (CTV) के लिए ऑडियंस प्लानिंग, एड्रेसेबिलिटी, मेजरमेंट और अकाउंटेबिलिटी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को आगे बढ़ाने पर ध्यान देंगे।
इसके अलावा वह विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म्स, ब्रॉडकास्टर्स और विज्ञापनदाताओं के साथ मिलकर नए और प्रभावी समाधान विकसित करेंगे। साथ ही रिसर्च आधारित थॉट लीडरशिप को भी बढ़ावा देंगे, ताकि एडवांस्ड टीवी इकोसिस्टम को और मजबूत बनाया जा सके।
राजीव राजगोपाल को मीडिया इंडस्ट्री में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है। उन्होंने रेडियो, ब्रॉडकास्ट टेलीविजन और डिजिटल मीडिया जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है।
उन्होंने वर्ष 2016 में WPP Media (तत्कालीन GroupM) में बिजनेस ग्रुप हेड के रूप में अपनी शुरुआत की थी। इसके बाद उन्होंने कंपनी में कई वरिष्ठ पदों पर काम किया और अब उन्हें सीनियर वाइस प्रेजिडेंट, एडवांस्ड टीवी की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है।
WPP Media से जुड़ने से पहले राजीव राजगोपाल Star India, Red FM और Radio Mirchi (टाइम्स ग्रुप) जैसी प्रमुख मीडिया कंपनियों में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं।
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) लंबे समय से चर्चा में रहे टेलीविजन विज्ञापनों की अवधि (Ad Duration) से जुड़े नियमों में बदलाव की तैयारी कर रहा है।
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Samachar4media Bureau
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) लंबे समय से चर्चा में रहे टेलीविजन विज्ञापनों की अवधि (Ad Duration) से जुड़े नियमों में बदलाव की तैयारी कर रहा है। इस मुद्दे पर मंत्रालय ने ब्रॉडकास्टर्स, विज्ञापनदाताओं और विज्ञापन एजेंसियों के साथ व्यापक स्तर पर चर्चा पूरी कर ली है। अब मंत्रालय सभी पक्षों से मिले सुझावों को एक विस्तृत आंतरिक रिपोर्ट में शामिल कर रहा है, जिसके आधार पर अंतिम नीतिगत फैसला लिया जाएगा। इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी रखने वाले कई लोगों ने यह जानकारी दी है।
प्रस्तावित संशोधनों से टेलीविजन उद्योग को लंबे समय से अपेक्षित नियामकीय राहत मिलने की संभावना है। हालांकि, सरकार पूरी तरह से नियमों को खत्म करने (Complete Deregulation) के पक्ष में नहीं दिख रही है। इसके बजाय अधिकारी मौजूदा विज्ञापन सीमा (Ad Cap) में संतुलित बदलाव पर विचार कर रहे हैं, ताकि एक ओर ब्रॉडकास्टर्स की आर्थिक स्थिति मजबूत हो और दूसरी ओर दर्शकों के हित भी सुरक्षित रहें।
इस मामले से जुड़े विचार-विमर्श की जानकारी रखने वाले एक वरिष्ठ अधिकारी ने e4m को बताया, "परामर्श प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है। मंत्रालय अब सभी हितधारकों के सुझावों को शामिल करते हुए एक व्यापक रिपोर्ट तैयार कर रहा है। इन्हीं सिफारिशों के आधार पर विज्ञापन अवधि से जुड़े नियमों में संशोधन पर सक्रिय रूप से विचार किया जा रहा है।"
टीवी विज्ञापन सीमा पर ISA के समर्थन को लेकर e4m की रिपोर्ट भी पढ़ें।
परामर्श प्रक्रिया में सीधे शामिल एक अन्य व्यक्ति ने बताया कि मंत्रालय केवल विज्ञापनों की अधिकतम सीमा (Numerical Cap) की ही समीक्षा नहीं कर रहा, बल्कि यह भी देख रहा है कि बदलते मीडिया परिदृश्य में मौजूदा व्यवस्था आज भी कितनी प्रासंगिक है।
उन्होंने कहा, "पिछले दो दशकों में टेलीविजन का पूरा इकोसिस्टम काफी बदल चुका है। उपभोक्ताओं की आदतें, विज्ञापन का आर्थिक मॉडल और प्रतिस्पर्धा—तीनों में बड़ा बदलाव आया है। मंत्रालय यह मूल्यांकन कर रहा है कि मौजूदा नियम आज के समय में कितने प्रासंगिक हैं।"
संतुलित राहत देने पर विचार
चर्चा से जुड़े लोगों के अनुसार सरकार ऐसे बदलावों पर विचार कर रही है, जिनसे ब्रॉडकास्टर्स को कुछ अतिरिक्त लचीलापन मिल सके, लेकिन दर्शकों का देखने का अनुभव प्रभावित न हो।
अधिकारियों का कहना है कि जिस प्रस्ताव पर विचार हो रहा है, उसके तहत ब्रॉडकास्टर्स को कुछ अतिरिक्त विज्ञापन स्लॉट (Advertising Inventory) मिल सकते हैं। हालांकि, उद्योग कई वर्षों से जिस तरह की पूरी नियामकीय छूट (Complete Regulatory Forbearance) की मांग करता रहा है, उसकी संभावना फिलहाल कम नजर आ रही है।
विज्ञापन सीमा को लेकर ब्रॉडकास्टर्स और MIB की बैठक पर e4m की रिपोर्ट पढ़ें।
इस विषय पर जानकारी रखने वाले एक उद्योग प्रतिनिधि ने कहा, "यदि पूरी छूट नहीं भी मिलती है, तब भी प्रस्तावित संशोधन से उद्योग को काफी राहत मिलने की उम्मीद है। सरकार ब्रॉडकास्टर्स की वित्तीय चुनौतियों को समझती है, लेकिन वह यह भी चाहती है कि दर्शकों को संतुलित देखने का अनुभव मिलता रहे।"
नीति समीक्षा से जुड़े एक अन्य अधिकारी ने बताया कि मंत्रालय ब्रॉडकास्टिंग इकोसिस्टम से जुड़े सभी पक्षों के हितों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है। उद्योग से जुड़े अधिकारियों का सुझाव है कि अंतिम फैसला लागू करने से पहले सरकार मसौदा (Draft) सार्वजनिक परामर्श के लिए जारी करे।
उन्होंने कहा, "मकसद असीमित विज्ञापन दिखाने की अनुमति देना नहीं है। उद्देश्य यह है कि नियमों को आधुनिक बनाया जाए, ताकि ब्रॉडकास्टर्स अपनी कमाई बढ़ा सकें और साथ ही दर्शकों को जरूरत से ज्यादा विज्ञापनों का सामना भी न करना पड़े।"
विज्ञापन सीमा नियम पर पुनर्विचार की ब्रॉडकास्टर्स की मांग पर e4m की रिपोर्ट पढ़ें।
मामले की जानकारी रखने वाले लोगों के अनुसार, सभी हितधारकों के सुझावों की समीक्षा पूरी होने के बाद मंत्रालय अपनी सिफारिशों को अंतिम रूप देगा और फिर केबल टेलीविजन नेटवर्क नियमों (Cable Television Networks Rules) में संशोधन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
उद्योग की राय बंटी हुई
मंत्रालय की परामर्श प्रक्रिया में उद्योग के सभी प्रमुख पक्ष शामिल हुए, लेकिन उनके सुझावों में काफी मतभेद देखने को मिले।
इंडियन सोसाइटी ऑफ एडवर्टाइजर्स (ISA) ने मौजूदा विज्ञापन सीमा को हर एक घंटे में 20 प्रतिशत से बढ़ाकर 25 प्रतिशत करने का प्रस्ताव दिया। इसका मतलब होगा कि ब्रॉडकास्टर्स को हर घंटे 15 मिनट तक विज्ञापन दिखाने की अनुमति मिल सकेगी। चर्चा से जुड़े लोगों के अनुसार ISA का मानना है कि इससे ब्रॉडकास्टर्स की आय बढ़ेगी और दर्शकों पर इसका कोई बड़ा नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा।
वहीं एडवर्टाइजिंग एजेंसीज एसोसिएशन ऑफ इंडिया (AAAI) ने पूरी तरह बाजार आधारित व्यवस्था (Market-Driven Framework) की वकालत की। एसोसिएशन का कहना है कि विज्ञापनों की अवधि तय करना सरकार का काम नहीं होना चाहिए।
AAAI ने मंत्रालय से कहा कि आज टेलीविजन की सीधी प्रतिस्पर्धा डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से है, जहां विज्ञापनों की अवधि पर कोई कानूनी सीमा नहीं है। ऐसे में टेलीविजन पर प्रतिबंध और डिजिटल पर पूरी छूट, प्रतिस्पर्धा के लिहाज से असमान स्थिति पैदा करती है।
इसके अलावा AAAI ने सरकार से जल्द से जल्द टीवी ऑडियंस रेटिंग्स (Television Audience Ratings) बहाल करने की भी मांग की। एसोसिएशन का कहना है कि मीडिया प्लानिंग और विज्ञापन निवेश के लिए विज्ञापनदाताओं को विश्वसनीय ऑडियंस मापन व्यवस्था की जरूरत होती है।
ब्रॉडकास्टर्स की मांग- पूरी नियामकीय छूट
परामर्श के दौरान ब्रॉडकास्टर्स ने अपनी पुरानी मांग दोहराते हुए विज्ञापन सीमा से पूरी तरह राहत (Complete Regulatory Forbearance) देने की मांग की।
इंडियन ब्रॉडकास्टिंग एंड डिजिटल फाउंडेशन (IBDF) का कहना था कि यदि किसी चैनल पर जरूरत से ज्यादा विज्ञापन दिखाए जाते हैं, तो दर्शक खुद ही दूसरा चैनल देखना शुरू कर देते हैं। ऐसे में बाजार अपने आप संतुलन बना लेता है और सरकार के हस्तक्षेप की जरूरत नहीं पड़ती।
उद्योग से जुड़े अधिकारियों के अनुसार फाउंडेशन का कहना था कि दर्शकों का व्यवहार ही सबसे बड़ा नियंत्रण तंत्र है।
न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एंड डिजिटल एसोसिएशन (NBDA) ने भी नियामकीय छूट की मांग का समर्थन किया, लेकिन साथ ही न्यूज चैनलों की अलग आर्थिक परिस्थितियों पर भी जोर दिया।
चर्चा में मौजूद लोगों के अनुसार एसोसिएशन ने कहा कि न्यूज चैनलों को लगातार लाइव रिपोर्टिंग और ताजा कंटेंट पर निवेश करना पड़ता है, जबकि मनोरंजन चैनल पुराने कार्यक्रमों को दोबारा दिखाकर भी कमाई कर सकते हैं। इसके अलावा चुनाव, प्राकृतिक आपदाओं और राष्ट्रीय आपात स्थितियों के दौरान न्यूज चैनल महत्वपूर्ण सार्वजनिक सेवा भी प्रदान करते हैं।
एक वरिष्ठ ब्रॉडकास्टिंग अधिकारी ने कहा, "उद्योग का लगातार यही कहना रहा है कि जहां लागत पूरी तरह बाजार तय करता है, वहीं राजस्व पर अब भी नियामकीय नियंत्रण बना हुआ है। इससे संरचनात्मक असंतुलन पैदा होता है, खासकर तब जब डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर ऐसी कोई पाबंदी नहीं है।"
डिजिटल प्रतिस्पर्धा ने बदली तस्वीर
उद्योग से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल मीडिया के तेज विस्तार ने टेलीविजन उद्योग की आर्थिक व्यवस्था को पूरी तरह बदल दिया है।
जहां टेलीविजन चैनलों पर विज्ञापन अवधि को लेकर कानूनी सीमा लागू है, वहीं डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर ऐसी कोई सीमा नहीं है, जबकि दोनों एक ही विज्ञापन बाजार के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं।
मामले की जानकारी रखने वाले एक अन्य व्यक्ति ने कहा, "मंत्रालय यह समझता है कि प्रतिस्पर्धा का पूरा परिदृश्य बदल चुका है। इसलिए किसी भी नए नीति संशोधन में इन संरचनात्मक बदलावों को ध्यान में रखना होगा, साथ ही उपभोक्ताओं के हितों की भी रक्षा करनी होगी।"
उद्योग के अधिकारियों के अनुसार मंत्रालय द्वारा तैयार की जा रही आंतरिक रिपोर्ट ही आगे की नीतिगत चर्चा का आधार बनेगी।
एक अन्य अधिकारी ने कहा, "सरकार चाहती है कि किसी भी संशोधन का आधार ठोस तथ्यों और मजबूत कानूनी प्रक्रिया पर हो। इसलिए सभी हितधारकों के सुझावों का सावधानीपूर्वक मूल्यांकन किया जा रहा है, उसके बाद ही अंतिम ढांचा तैयार किया जाएगा।"
पृष्ठभूमि
टेलीविजन विज्ञापनों की समय-सीमा को लेकर विवाद की शुरुआत वर्ष 2012 में हुई थी, जब ट्राई (TRAI) ने टीवी चैनलों पर एक घंटे में अधिकतम 12 मिनट तक ही विज्ञापन दिखाने की सीमा तय की थी। TRAI का तर्क था कि यह कदम दर्शकों के देखने के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए जरूरी है।
ब्रॉडकास्टर्स ने इस नियम को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। उनका कहना था कि विज्ञापन स्लॉट पूरी तरह व्यावसायिक निर्णय का विषय है और नियामक ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर यह फैसला लिया है।
इस साल की शुरुआत में यह मामला फिर चर्चा में आया, जब दिल्ली हाई कोर्ट ने TRAI के विज्ञापन सीमा तय करने के अधिकार को बरकरार रखा। अदालत ने माना कि यह नियम व्यापक जनहित में है।
अब सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की ताजा समीक्षा यह तय करेगी कि भारत के बदलते मीडिया और विज्ञापन इकोसिस्टम को देखते हुए मौजूदा व्यवस्था में किस तरह का बदलाव किया जाए।
यदि मौजूदा नियमों में थोड़ी भी ढील दी जाती है, तो यह कई वर्षों में टीवी विज्ञापन अवधि से जुड़ा पहला बड़ा नीतिगत बदलाव होगा। इससे विज्ञापन बाजार की धीमी रफ्तार और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच ब्रॉडकास्टर्स को अतिरिक्त राजस्व अर्जित करने में मदद मिल सकती है।
वरिष्ठ पत्रकार सुमित अवस्थी ने कहा कि AI का इस्तेमाल खबरों को बेहतर बनाने के लिए किया जा सकता है, लेकिन अंतिम फैसला हमेशा पत्रकार और संपादक की समझ का होना चाहिए।
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Vikas Saxena
वरिष्ठ पत्रकार सुमित अवस्थी ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पत्रकारिता के लिए एक बेहतरीन टूल है, लेकिन इसे कभी भी संपादक नहीं बनने देना चाहिए। उन्होंने कहा कि AI का इस्तेमाल खबरों को बेहतर बनाने के लिए किया जा सकता है, लेकिन अंतिम फैसला हमेशा पत्रकार और संपादक की समझ का होना चाहिए।
समाचार4मीडिया के 'मीडिया संवाद 2026' कार्यक्रम में 'मीडिया: कल, आज और कल' विषय पर आयोजित सत्र को संबोधित करते हुए सुमित अवस्थी ने कहा कि '40 अंडर 40' जैसी पहल उन युवा पत्रकारों को पहचान देने का काम कर रही है, जो अपने काम के दम पर अलग पहचान बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि जूरी के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होती है कि देशभर से आए प्रतिभाशाली पत्रकारों में से सर्वश्रेष्ठ का चयन किया जाए।
उन्होंने कहा कि वह उस पीढ़ी से हैं, जिसने पत्रकारिता में कई बड़े बदलाव देखे हैं। एक समय था जब दूरदर्शन और आकाशवाणी के समाचार वाचकों को देखकर लोग पत्रकार बनने का सपना देखते थे। बाद में उन्हें उन्हीं लोगों के साथ काम करने का अवसर भी मिला।
सुमित अवस्थी ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी को कमतर आंकना सही नहीं है। अगर युवाओं को देश, संविधान या राजनीति के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं है, तो इसके लिए केवल उन्हें दोष नहीं दिया जा सकता। यह जिम्मेदारी वरिष्ठ पीढ़ी की भी है कि वह उन्हें सही दिशा दिखाए और बेहतर तरीके से तैयार करे।
उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी वाई-फाई, सोशल मीडिया और ओटीटी के दौर में बड़ी हुई है। इसलिए उनकी सोच और दुनिया को देखने का नजरिया पहले से अलग है। ऐसे में नई पीढ़ी को समझने की जरूरत है, न कि उसकी आलोचना करने की।
पत्रकारिता में आए बदलाव का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि मीडिया संस्थानों को भी आत्ममंथन करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक मीडिया युवा दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित करने की कोशिश करता रहा, लेकिन इस दौरान अपने पुराने और भरोसेमंद दर्शकों को भी खो दिया। आज का युवा वहां है, जहां उसकी पसंद का कंटेंट उपलब्ध है, इसलिए मीडिया को भी समय के साथ खुद को बदलना होगा।
उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा था जब कुछ ही न्यूज चैनल होते थे और उनकी टीआरपी 60 प्रतिशत तक पहुंच जाती थी। आज चैनलों की संख्या बढ़ गई है और प्रतिस्पर्धा भी पहले से कहीं ज्यादा हो गई है। ऐसे में मीडिया के सामने अपनी विश्वसनीयता बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती है।
सोशल मीडिया पर अपनी राय रखते हुए सुमित अवस्थी ने कहा कि आज यह दुनिया में विचारों को प्रभावित करने वाला सबसे बड़ा माध्यम बन चुका है। ऐसे समय में संवाद की परंपरा को मजबूत बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत यही है कि यहां हर विचार को सामने रखने की आजादी है और यही लोकतंत्र की असली ताकत भी है।
अपने संबोधन के अंत में उन्होंने AI के बढ़ते इस्तेमाल पर चिंता और उम्मीद, दोनों जाहिर कीं। उन्होंने कहा कि AI कई काम आसान कर सकता है और पत्रकारों के लिए एक उपयोगी टूल है, लेकिन उसे संपादक की भूमिका नहीं निभानी चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर AI किसी नेता की फर्जी बाइट बना दे, तो असली पत्रकार वही होगा जो सवाल पूछे और तथ्यों की जांच करे। इसलिए पत्रकारिता में तकनीक का इस्तेमाल जरूर होना चाहिए, लेकिन संपादकीय निर्णय हमेशा इंसान के हाथ में ही रहने चाहिए।
यूपी के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा है कि पत्रकार समाज और देश के हित में काम करते हैं। वे सम्मान या पुरस्कार के लिए नहीं, बल्कि अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए हर परिस्थिति में डटे रहते हैं।
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Vikas Saxena
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा है कि पत्रकार समाज और देश के हित में काम करते हैं। वे सम्मान या पुरस्कार के लिए नहीं, बल्कि अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए हर परिस्थिति में डटे रहते हैं। उन्होंने कहा कि कई बार पत्रकार युद्ध जैसी कठिन परिस्थितियों में भी अपनी जान जोखिम में डालकर लोगों तक सही जानकारी पहुंचाने का काम करते हैं।
ब्रजेश पाठक मंगलवार को नई दिल्ली स्थित इंडिया इंटरनेशनल सेंटर (IIC) में आयोजित समाचार4मीडिया के '40 अंडर 40' सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस कार्यक्रम में देशभर से चयनित 40 वर्ष से कम आयु के युवा पत्रकारों को पत्रकारिता में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया। इस वर्ष भी प्रिंट, टीवी और डिजिटल मीडिया से जुड़े पत्रकारों को यह सम्मान प्रदान किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और एक्सचेंज4मीडिया ग्रुप के चेयरमैन एवं एडिटर-इन-चीफ डॉ. अनुराग बत्रा ने सभी विजेता पत्रकारों को सम्मानित किया। इस अवसर पर हिंदुस्तान के प्रधान संपादक शशि शेखर भी मौजूद रहे।
अपने संबोधन में ब्रजेश पाठक ने युवा पत्रकारों को पत्रकारिता में उत्कृष्ट कार्य जारी रखने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि पत्रकार लोकतंत्र का मजबूत स्तंभ हैं और समाज के प्रति उनकी जिम्मेदारी बहुत बड़ी है। मीडिया का दायित्व निष्पक्ष और तथ्यात्मक जानकारी लोगों तक पहुंचाना है और पत्रकार इस जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा के साथ निभा रहे हैं।
समारोह के दौरान उपमुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार युवाओं को सशक्त बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। नई शिक्षा नीति और विभिन्न रोजगार योजनाओं के माध्यम से युवाओं के लिए नए अवसर तैयार किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में निवेश, रोजगार और विकास को बढ़ावा देने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है और राज्य तेजी से विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है।
कार्यक्रम से पहले पूरे दिन 'मीडिया संवाद 2026' का आयोजन भी किया गया। 'मीडिया: कल, आज और कल' विषय पर आयोजित इस सम्मेलन में वरिष्ठ पत्रकारों, संपादकों और मीडिया विशेषज्ञों ने पत्रकारिता के बदलते स्वरूप पर विस्तार से चर्चा की। इस दौरान मीडिया के भविष्य, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), नई तकनीकों और डिजिटल दौर में पत्रकारिता की चुनौतियों एवं अवसरों पर भी विचार साझा किए गए।
डॉ. अनुराग बत्रा ने कहा कि '40 अंडर 40' सम्मान का उद्देश्य देशभर के उन युवा पत्रकारों को प्रोत्साहित करना है, जिन्होंने अपनी मेहनत, प्रतिभा और उत्कृष्ट पत्रकारिता के दम पर अलग पहचान बनाई है। उन्होंने बताया कि विभिन्न राज्यों से पत्रकारों का चयन उनके कार्य, उपलब्धियों और पेशेवर योगदान के आधार पर किया गया।
कार्यक्रम में मीडिया जगत की कई प्रमुख हस्तियों ने हिस्सा लिया। वक्ताओं ने युवा पत्रकारों से निष्पक्ष, जिम्मेदार और जनहित की पत्रकारिता को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आह्वान किया और कहा कि बदलते तकनीकी दौर में भी पत्रकारिता की विश्वसनीयता और मूल्यों को बनाए रखना सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।
इससे पहले वह ब्लूमबर्गक्विंट (BloombergQuint) में एग्जिक्यूटिव वाइस प्रेजिडेंट के पद पर कार्यरत थे।
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Samachar4media Bureau
‘एनडीटीवी इंटरनेशनल’ (NDTV International) ने विशाल श्रीवास्तव को अपना नया बिजनेस हेड नियुक्त किया है। इससे पहले वह ब्लूमबर्गक्विंट (BloombergQuint) में एग्जिक्यूटिव वाइस प्रेजिडेंट के पद पर कार्यरत थे।
ब्लूमबर्गक्विंट से पहले विशाल श्रीवास्तव CNBC TV18 में एग्जिक्यूटिव वाइस प्रेजिडेंट एवं हेड ऑफ ग्लोबल बिजनेस की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। इसके अलावा वह हिंदुस्तान टाइम्स के साथ भी काम कर चुके हैं।
विशाल श्रीवास्तव के पास ब्रॉडकास्ट और प्रिंट मीडिया से जुड़े ब्रैंड्स के साथ काम करने का 21 वर्षों का अनुभव है।