डिजिटल मीडिया में 26 प्रतिशत विदेशी निवेश की अनुमति, जानिए फायदे

डिजिटल मीडिया में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को लेकर सरकार ने रास्ता स्पष्ट कर दिया है। इसके लिए सरकार की अनुमति की आवश्यकता होगी

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 17 October, 2020
Last Modified:
Saturday, 17 October, 2020
Digital Media

डिजिटल मीडिया में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को लेकर सरकार ने रास्ता स्पष्ट कर दिया है। इसके लिए सरकार की अनुमति की आवश्यकता होगी। सरकार ने डिजिटल मीडिया या वेबसाइट पर सूचनाएं देने वाली कंपनियां या मीडिया ग्रुप्स को समाचार उपलब्ध कराने वाली न्यूज एजेंसीज (News Agencies), न्यूज एग्रीगेटर्स (News Aggregators) को 26 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) सीमा नियमों का पालन करने का आदेश दिया है।

उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्द्धन विभाग (डीपीआईआईटी) के नए आदेश के मुताबिक अब इन सभी कंपनियों को एक साल के भीतर केंद्र सरकार की मंजूरी लेकर 26 परसेंट विदेशी निवेश के कैप का पालन करना होगा। सभी डिजिटल मीडिया न्यूज संस्थानों को शेयरहोल्डिंग जरूरतों को पूरा करने के लिए एक साल का वक्त दिया गया है।

केंद्रीय सूचना व प्रसारण मंत्रालय द्वारा 18 सितंबर, 2019 को केंद्र की तरफ से डिजिटल न्यूज मीडिया को 26 फीसदी एफडीआई की इजाजत दी गई थी। इसको ध्यान में रखकर डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को मिलने वाली सुविधाएं देने का फैसला हुआ है।  

मीडिया उद्योग के एक वर्ग और विशेषज्ञों ने सरकार से इसे इस नियम को लेकर स्पष्टीकरण की मांग की थी। उनका कहना था कि डिजिटल मीडिया में एफडीआई को 26 प्रतिशत पर सीमित रखने से सवाल खड़ा होता है इसे स्पष्ट करने की जरूरत है।

केंद्रीय उद्योग व आंतरिक व्यापार विकास विभाग के निदेशक (एफडीआई) निखिल कुमार कनोडिया की तरफ से जारी स्पष्टीकरण में कहा गया है कि किसी भी डिजिटल न्यूज प्लेटफार्म को अधिकतम 26 फीसदी एफडीआई लेने की ही अनुमति मिलेगी और इन प्लेटफार्म की कंपनियां भारत में ही पंजीकृत होनी चाहिए।

जानिए, FDI से क्या होगा फायदा?

पहले से संचालित न्यूज एग्रीगेटर्स, डिजिटल मीडिया कंपनियों को खबरें प्रदान करने वाली न्यूज एजेंसीज और सभी तरह की खबरें या ताजा समाचार वेबसाइट पर अपलोड करने वाली कंपनियों को भी 26 फीसदी एफडीआई के दायरे का पालन करना होगा। इन कंपनियों को अपने पास मौजूद एफडीआई को 26 फीसदी के स्तर पर लाकर एक साल के अंदर केंद्र सरकार से मंजूरी लेनी होगी। एफडीआई नियमों के पालन की जिम्मेदारी निवेश करने वाली कंपनी की होगी।

इसके अलावा कंपनी के बोर्ड में अधिकतर निदेशक और उसका सीईओ भारतीय नागरिक होना चाहिए। कंपनी को ऐसे सभी विदेशी कर्मचारियों के लिए सरकार से सुरक्षा अनुमति लेनी होगी, जिन्हें साल में 60 दिन से ज्यादा के लिए अपने साथ जोड़ा गया है। यह नियम सलाहकार, अनुबंधित, नियुक्ति या अन्य किसी भी तरह के जुड़ाव के लिए लागू होगा। 

साथ ही इसके तहत डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म्स भी सरकारी विज्ञापन ले सकेंगे। उनके कर्मचारियों को पीआईबी मान्यता मिलेगी। न्यूज वेबसाइट के कर्मचारी भी प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के कर्मचारियों को मिलने वाली सरकारी सुविधाएं ले सकेंगे।

मंत्रालय ने कहा कि प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की तरह ही डिजिटल मीडिया भी स्व-नियमन संस्थान गठित कर पाएगा, ताकि भविष्य में सरकार के सामने उनका आधिकारिक पक्ष पेश किया जा सके।

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अब CBI  के हाथो में रेटिंग घोटाले का मामला, दर्ज की FIR

टेलीविजन इंडस्ट्री को हिलाकर रख देने वाले रेटिंग घोटाले की जांच का जिम्मा अब सीबीआई (CBI) ने अपने हाथ में ले लिया है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 21 October, 2020
Last Modified:
Wednesday, 21 October, 2020
CBI

टेलीविजन इंडस्ट्री को हिलाकर रख देने वाले रेटिंग घोटाले की जांच का जिम्मा अब सीबीआई (CBI) ने अपने हाथ में ले लिया है और यूपी में की गई एक शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया है।

इस मामले की जांच में सीबीआई की एंट्री तब हुई, जब मामले की जांच मुंबई पुलिस कर रही है, जिसने रिपब्लिक टीवी सहित तीन चैनलों पर टीआरपी में हेरफेर करने का आरोप लगाया है।

केंद्रीय जांच एजेंसी ने उत्तर प्रदेश सरकार की सिफारिश पर लखनऊ पुलिस से जांच को अपने हाथ मे लिया और वह भी तब जब यूपी में इससे संबंधित एक मामला दर्ज किया गया है। लखनऊ पुलिस ने रविवार को विज्ञापन कंपनी ‘गोल्डन रैबिट कम्युनिकेशंस’ कंपनी के सीईओ कमल शर्मा की शिकायत के आधार पर एक प्राथमिकी दर्ज की। शिकायत दर्ज होने के बाद, योगी आदित्यनाथ सरकार ने सीबीआई मामले की सिफारिश की। 24 घंटे के भीतर केंद्र सरकार ने सीबीआई जांच के लिए यूपी सरकार के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी।

वहीं, रिपब्लिक टीवी ने भी मामले में सीबीआई जांच की मांग की थी। चैनल का कहना था कि सुशांत सिंह राजपूत केस में आवाज उठाने के लिए मुंबई पुलिस उनके पीछे पड़ी है, क्योंकि उन्होंने इस मामले में कवरेज के दौरान मुंबई पुलिस की जांच पर सवाल उठाए थे।

खबरों के मुताबिक, सीबीआई की एक टीम मामले से जुड़े दस्तावेज जुटाने के लिए लखनऊ पहुंची है। एजेंसी ने अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है।

सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले के बाद से अब यह दूसरी बार है कि किसी जांच ने मुंबई पुलिस से भाजपा शासित राज्य और फिर सीबीआई तक का रास्ता बनाया है।

इस महीने की शुरुआत में मुंबई पुलिस ने कहा था कि अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में जांच के दौरान न्यूज में हेरफेर और गलत टिप्पणियों के बड़े पैमाने पर विश्लेषण के दौरान टीआरपी रेटिंग घोटाले का खुलासा हुआ था।

मुंबई के पुलिस कमिश्नर परम बीर सिंह ने कहा कि चुनिंदा घरों में रेटिंग मीटर लगाने वाली एजेंसी हंसा के पूर्व कर्मचारियों ने गोपनीय डेटा को तीन चैनलों के साथ साझा किया था। हंसा के डेटा का उपयोग BARC (ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल) द्वारा किया जाता है, जो देश भर के चैनलों के लिए साप्ताहिक रेटिंग के आंकड़े जारी करता है।

मुंबई के पुलिस कमिश्नर परम बीर सिंह के मुताबिक, सिटी पुलिस टीआरपी के हेरफेर से जुड़े घोटाले की जांच कर रही है। पुलिस ने आरोप लगाया कि आरोपी एक विशेष चैनल को चलाने के लिए घरों में रिश्वत दे रहे थे। मामले में अब तक तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें से दो मराठी चैनल फक्त मराठी और बॉक्स सिनेमा के मालिक हैं, जबकि तीसरे आरोपी को उत्तर प्रदेश से गिरफ्तार किया गया है।

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सुधीर चौधरी के इन सवालों पर अमित शाह ने कुछ यूं रखी ‘मन की बात’

जी न्यूज के एडिटर-इन-चीफ सुधीर चौधरी से बातचीत में गृहमंत्री अमित शाह ने बिहार चुनाव में बीजेपी की स्थिति, सुशांत केस से लेकर टीआरपी घोटाले समेत तमाम मुद्दों पर चर्चा की

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 20 October, 2020
Last Modified:
Tuesday, 20 October, 2020
Sudhir Chaudhary Amit Shah

सुशांत सिंह राजपूत केस की रिपोर्टिंग के दौरान ही टीआरपी घोटाला सामने आने के बाद मीडिया की भूमिका को लेकर उठे सवाल के बारे में गृहमंत्री अमित शाह का कहना है कि व्यवस्था सुधारने की जरूरत है। राजनीति नहीं होनी चाहिए। ‘जी न्यूज’ (Zee News) के एडिटर-इन-चीफ सुधीर चौधरी के साथ एक बातचीत के दौरान गृहमंत्री ने बिहार चुनाव, कोरोना काल में चीन से तनातनी और टीआरपी घोटाले की आंच में मीडिया की विश्‍वसनीयता समेत तमाम पहलुओं पर अपनी बात रखी।

क्या मीडिया विवाद पर कानून का पालन होना चाहिए था? इस बारे में अमित शाह का कहना था, 'मीडिया संस्थाओं और अदालत को इसे ठीक करना चाहिए'। इन मुद्दों पर मीडिया की आलोचना के बारे में अमित शाह का कहना था कि मीडिया बैलेंस रिपोर्टिंग करे, खबर मार्केटिंग की चीज नहीं है।

बातचीत के दौरान राष्‍ट्रीय सुरक्षा के सवाल पर अमित शाह का कहना था कि भारत की एक इंच की भूमि पर कोई अतिक्रमण नहीं कर पाएगा। ये भारत सरकार का अटल निर्णय है। कोविड-19 से मुकाबले को लेकर पूछे गए एक सवाल के जवाब में अमित शाह ने कहा, 'देखिए, बहुत समय से पढ़ाई-लिखाई का समय नहीं मिला था। डेढ़ महीने में मुझे पढ़ाई-लिखाई का समय मिल गया। दूसरी बात, कई सारी चीज़ों को पीछे मुड़कर देखने का, सोचने का समय भी मिला। कई गलतियां मुझसे स्वयं से कहां हुईं, क्या हुईं, इसके बारे में भी सोचा और आगे वो गलती न हों, इसके लिए अपने आपको तैयार भी किया। विशेषकर पढ़ाई-लिखाई पर मेरा ज्यादा ध्यान रहा।

बिहार में सुशांत सिंह राजपूत के चुनावी मुद्दा बन जाने के बारे में अमित शाह का कहना था, 'हो सकता है कि कुछ लोग इस मुद्दे पर भी वोट डालें। मगर दो चीजें एक साथ हुईं। इतना विवाद हुआ कि मुझे आश्चर्य इस बात का था कि महाराष्ट्र सरकार ने क्यों सीबीआई को केस पहले नहीं दे दिया। सुप्रीम कोर्ट को दखल देना पड़ा। पहले से ही सीबीआई को केस दे देते, परिवार की मांग है, तो बात खत्म हो जाती। खैर अब मीडिया ने  भी उसको ज्‍यादा तूल भी दिया'।

इस पूरी बातचीत को आप यहां देख सकते हैं—

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मातृभूमि ग्रुप में नवीन श्रीनिवासन का कद बढ़ा, मिली नई जिम्मेदारी

मातृभूमि (Mathrubhumi) ग्रुप में नवीन श्रीनिवासन को प्रमोट किए जाने की खबर सामने आई है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 20 October, 2020
Last Modified:
Tuesday, 20 October, 2020
Naveen

मातृभूमि (Mathrubhumi) ग्रुप में नवीन श्रीनिवासन को प्रमोट किए जाने की खबर सामने आई है। उन्हें मीडिया सॉल्यूशंस टीआडी (टेलीविजन, रेडियो और डिजिटल) का हेड बनाया गया है। अब मातृभूमि न्यूज टेलीविजन चैनल (Mathrubhumi News Television Channel), कप्पा टीवी (Kappa TV), क्लब एफएम (Club FM) और मातृभूमि डिजिटल (Mathrubhumi Digital) के सेल्स व मार्केटिंग कार्यों की जिम्मेदारी उन्हीं के कंधों पर होगी।

अपनी नई भूमिका पर नवीन श्रीनिवासन ने कहा कि सही कहूं तो मैं इस जिम्मेदारी को लेने के लिए काफी उत्साहित हूं। परिस्थितियां वैसे तो चुनौतीपूर्ण है, लेकिन हमारे पास एक बेहतरीन टीम है जो कि इसका मुकाबला करने के लिए सक्षम है। इसके अलावा, एक मीडिया समूह के तौर पर हम हमेशा केरल के सामाजिक माहौल के साथ गहराई से जुड़े रहे हैं और मलयाली लोगों ने हम पर पूरा भरोसा जताया है, जिसका हमें काफी फायदा मिला है।

अलग-अलग इंडस्ट्रीज और डोमेन्स में काम करने का अनुभव रखने वाले नवीन आईआईएम लखनऊ के छात्र रह चुके हैं। इससे पहले वे दैनिक ‘मातृभूमि’ के लिए क्लस्टर हेड सेल्स की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। उन्हें कंपनी के लिए नए इनोवेटिव आइडियाज और सेल्स संचालित गतिविधियां बनाने का श्रेय दिया जाता है। फिलहाल वे मातृभूमि ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर एम.वी. श्रेयम्स कुमार को रिपोर्ट करेंगे।

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ABP न्यूज की टीम पर हमला, एंकर अखिलेश आनंद की गाड़ी पर फेंके गए पत्थर

सोमवार को एबीपी न्यूज के खास कार्यक्रम 'कौन बनेगा मुख्यमंत्री' की टीम अरवल पहुंची, जहां कार्यक्रम के दौरान ही कुछ असामाजिक तत्वों ने एबीपी न्यूज टीम पर हमला कर दिया

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 20 October, 2020
Last Modified:
Tuesday, 20 October, 2020
ABP News

बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Elections 2020) को लेकर चुनावी मैदान में उतरे सभी राजनीतिक दल राज्य की सत्ता तक पहुंचने के लिए पुरजोर कोशिश में जुटे हुए हैं। ऐसे में मीडिया भी बिहार चुनाव से जुड़ी हर छोटी-बड़ी खबरें दर्शकों और पाठकों तक पहुंचाने के लिए ग्राउंड रिपोर्टिंग कर रही हैं। लिहाजा इसी सिलसिले में सोमवार को एबीपी न्यूज के खास कार्यक्रम 'कौन बनेगा मुख्यमंत्री' की टीम अरवल पहुंची, जहां कार्यक्रम के दौरान ही कुछ असामाजिक तत्वों ने एबीपी न्यूज टीम पर हमला कर दिया और एंकर अखिलेश आनंद को निशाना बनाने की कोशिश की।

एबीपी न्यूज के मुताबिक, कार्यक्रम में बीजेपी, जेडीयू, आरजेडी समेत अन्य दलों के कार्यक्रताओं का जमावड़ा था, काफी गहमागहमी थी। इसी दौरान राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता अपने-अपने नेताओं के समर्थन में नारेबाजी करने लगे। तभी कुछ लोगों ने हाथापाई करने की कोशिश की। इस बीच कुछ लोग अखिलेश आनंद को भी निशाना बनाने की कोशिश की और हमला करने के लिए उनकी तरफ दौड़ पड़े। हमले से बचने के लिए जैसे-तैसे एंकर अखिलेश आनंद अपनी टीम के साथ गाड़ी की तरफ भागे। इसके बाद असमाजिक तत्वों ने गाड़ी पर पत्थड़ फेंके और हाथों से शीशा तोड़ने की कोशिश की।

पूरी घटना पर अखिलेश आनंद का कहना है कि एक निष्पक्ष पत्रकार होने के नाते सच्चाई से लोगों से रूबरू कराते रहेंगे। चाहे लोगों को बुरा ही क्यों न लगे। उन्होंने ट्वीट किया, ‘आज बिहार के अरवल में कौन बनेगा मुख्यमंत्री कार्यक्रम के दौरान मुझ पर हमला हुआ। बचने के लिए मैं कार के अंदर जाकर बैठ गया तो मेरा पीछा कर पत्थर बरसाये गए। गुंडे किस पार्टी के थे, मैं जानता हूं। भगवान उन्हें सद्बुद्धि दें। मैं सच बोलता रहूंगा,चाहे किसी को बुरा लगे या भला..

 

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जमानती बॉन्ड न भर पाने के कारण पत्रकार समेत चार लोगों को न्यायिक हिरासत में भेजा

पिछले दिनों हाथरस जाते समय केरल के पत्रकार सिद्दीकी कप्पन और तीन अन्य लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया था

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 20 October, 2020
Last Modified:
Tuesday, 20 October, 2020
Detained

पिछले दिनों हाथरस जाते समय गिरफ्तार किए गए केरल के पत्रकार सिद्दीकी कप्पन और तीन अन्य लोगों को जमानती बॉन्ड न भर पाने के कारण 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। इन लोगों की गिरफ्तारी पिछले दिनों उस दलित महिला के हाथरस स्थित घर जाने के दौरान हुई थी, जिसकी कथित सामूहिक दुष्कर्म के बाद पिछले दिनों दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में मौत हो गई थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार उत्तर प्रदेश में मथुरा के एसडीएम ने सोमवार को चारों को समाज में शांति कायम रखने के लिए बॉन्ड भरने का आदेश दिया। लेकिन रिहाई के लिए एक-एक लाख रुपये के जमानती मुचलके नहीं देने तक, मथुरा में मांट के उप मंडलीय दंडाधिकारी (एसडीएम) सुरेश कुमार ने सिद्दीकी कप्पन और तीन अन्य को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

यह भी पढ़ें: हाथरस जाते समय पत्रकार अरेस्ट, रिहाई के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला

रिपोर्ट्स के अनुसार, चारों को वीडियो लिंक के जरिये मथुरा जेल से एसडीएम के समक्ष पेश किया गया था। आरोपित कप्पन, अतीक-उर-रहमान, आलम और मसूद पर कथित कट्टरपंथी समूह पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया और उससे संबद्ध संगठनों से संबंध रखने का आरोप है। उनकी राजद्रोह और आतंकी मामले में 14 दिन की न्यायिक हिरासत मंगलवार को खत्म हो रही थी और उन्हें तब न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने हिरासत बढ़ाने के लिए पेश किया जाना था।

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HC ने MIB से पूछा, मीडिया ट्रायल से संबंधित शिकायतों पर क्यों नहीं लिया गया एक्शन?

बॉम्बे हाईकोर्ट ने सूचना-प्रसारण मंत्रालय से इस बात की जानकारी मांगी है कि वह बॉलीवुड अभिनेता सुशांत की मौत के मामले में मीडिया ट्रायल से संबंधित शिकायतों पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं शुरू कर पायी है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 20 October, 2020
Last Modified:
Tuesday, 20 October, 2020
Mumbai High Court

बॉम्बे हाईकोर्ट में अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत से जुड़ी न्यूज कवरेज को लेकर दाखिल कई जनहित याचिकाओं की सुनवाई चल रही है। इस मामले में कोर्ट ने सूचना-प्रसारण मंत्रालय (MIB) से इस बात की जानकारी मांगी है कि वह बॉलीवुड अभिनेता सुशांत की मौत के मामले में मीडिया ट्रायल से संबंधित शिकायतों पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं शुरू कर पायी है? साथ ही यह भी पूछा कि न्यूज चैनल्स द्वारा प्रसारित विषयवस्तु को नियंत्रित करने के लिए न्यूज ब्रॉडकास्टर्स स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी (एनबीएसए) जैसी निजी संस्थाओं के दिशानिर्देशों पर अपनी मुहर लगाकर उन्हें लागू क्यों नहीं कर पाई है?

मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति जी एस कुलकर्णी की पीठ ने कहा कि एनबीएसए की विस्तृत आचार संहिता और दिशानिर्देश है। पीठ ने कहा कि इनका सभी सदस्य चैनलों से पालन करने की अपेक्षा की जाती है और उसे कुछ अधिकार दिये जा सकते हैं और सरकार द्वारा लागू करने योग्य बनाया जा सकता है। पीठ ने कहा, ‘क्या हम सरकार से यह अनुरोध नहीं कर सकते कि दिशानिर्देश बने हुए हैं तो उन दिशानिर्देशों पर मुहर लगाई जाए और उन्हें लागू किया जा सके?’

वहीं सुनवाई के दौरान, एनबीए और एनबीएसए का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ वकील अरविंद दातार और नीला गोखले ने बताया कि चैनल्स के लिए स्व-नियामक तंत्र लगन से काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि निजी संस्था ने न्यूज चैनल्स के खिलाफ प्राप्त अनेक शिकायतों पर कार्रवाई की है।

वकीलों ने कहा कि एनबीएसए ने पहले कुछ न्यूज चैनल्स पर दिशानिर्देशों का उल्लंघन करने वाली सामग्री के प्रसारण पर अधिकतम एक लाख रुपए का जुर्माना लगाया था। दातार ने कहा कि अन्य सभी चैनल्स ने माफी मांगी है और जुर्माना अदा किया है, वहीं एक एनबीए से अलग हो गया।

दातार ने कहा कि एनबीएसए ने उच्चतम न्यायालय के पिछले फैसलों के आधार पर समाचार प्रसारणकर्ताओं के लिए स्व-नियमन की प्रणाली का समर्थन किया है। एनबीएसए एक स्वतंत्र इकाई है जिसका गठन एनबीए ने प्रसारणकर्ताओं के बारे में शिकायतों पर विचार करने और निर्णय लेने के लिए किया था।

इसके बाद दातार की दलीलों पर पीठ ने पूछा कि अगर स्व-नियामक प्रणाली विफल हो गई और कोई एक चैनल दिशानिर्देशों का पालन करने से इनकार कर दे, तो क्या होगा? एक उदाहरण के जरिए पीठ ने कहा, ‘जब डॉक्टरों को रियायती दरों पर पीजी कोर्स में प्रवेश दिया जाता है, तो उन्हें ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा करनी होती है। यदि वे उस शर्त को पूरा नहीं करते हैं, तो डॉक्टरों को उनका प्रमाण पत्र नहीं दिया जाता है। यदि वे शर्त से इनकार करते हैं, तो उन पर जुर्माना लगाया जाता है।’

अदालत ने कहा, ‘आपके पास इस तरह के दिशानिर्देश क्यों नहीं हो सकते? इन दिशानिर्देशों में इस तरह की शक्ति होनी चाहिये।’

इस पर दातार ने कहा कि अगर किसी चैनल ने एनबीएसए के दिशानिर्देशों का पालन करने से इनकार कर दिया या अगर उसने जुर्माना देने से इनकार कर दिया, तो सूचना-प्रसारण मंत्रालय दखल दे सकता है और कार्रवाई कर सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि स्व-नियमन विफल हो गया, तो अदालत को भी कदम उठाने की पर्याप्त शक्ति है।

हालांकि, उन्होंने कहा कि एनबीएसए मीडिया को विनियमित करने के लिए किसी नए वैधानिक निकाय के पक्ष में नहीं है।

अदालत जनहित याचिकाओं पर अंतिम सुनवाई कर रही है। ये याचिकाएं कई पूर्व आईपीएस अधिकारियों समेत नामी हस्तियों की तरफ से दाखिल की गई हैं, जिसमें अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले के मीडिया ट्रॉयल पर रोक लगाने की मांग की गई है। हाई कोर्ट अब बुधवार को इस मामले की सुनवाई करेगा।

पीठ ने अतिरिक्त सॉलिसीटर जनरल अनिल सिंह को अगली सुनवाई पर अदालत को सूचित करने का निर्देश दिया कि सूचना-प्रसारण मंत्रालय मिली शिकायतों को आगे एनबीएसए के पास क्यों बढ़ा रहा है? पीठ ने पूछा, ‘क्या ऐसे उदाहरण हैं, जहां चैनल्स को मंत्रालय द्वारा प्रतिबंधित किया गया है?’

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गृहमंत्री अमित शाह बोले, मीडिया को इस तरह की गतिविधियों से रहना चाहिए दूर

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने मीडिया ट्रायल्स के खिलाफ अपनी बात रखी है।

Last Modified:
Monday, 19 October, 2020
Amit Shah

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने मीडिया ट्रायल्स के खिलाफ अपनी बात रखी है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमित शाह का कहना है कि हालांकि मीडिया को समाज में हो रही गलत चीजों को उजागर करने का अधिकार है, लेकिन मीडिया को इस तरह की गतिविधियों से दूर रहना चाहिए, जिनका उद्देश्य विशुद्ध रूप से टीआरपी को बढ़ाना होता है।  

रिपोर्ट्स के अनुसार, शाह का कहना है कि कुछ न्यूज चैनल्स अथवा रिपोर्टर्स द्वारा टीआरपी के लिए बात को बढ़ाना ठीक नहीं है। इसका उदाहरण देते हुए उन्होने कहा कि जिस तरह तमाम चैनल्स बात को बढ़ाते हैं कि कार में बैठे, पांच मिनट में पहुंचेगे, दायां पैर कार से बाहर निकाला, इस तरह की बातें सही नहीं हैं। 

पिछले दिनों ज्वेलरी ब्रैंड ’तनिष्क’ (Tanishq) के विज्ञापन को लेकर उठे विवाद के बीच गृहमंत्री ने कहा कि इस तरह की अति सक्रियता (over activism) से बचा जाना चाहिए, क्योंकि यह सामाजिक सद्भाव को प्रभावित कर सकती है।

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कंटेंट और क्रिएटिविटी को लेकर ‘वायकॉम18’ के पूर्व COO राज नायक ने कही ये बात

‘गवर्नेंस नाउ’ के एमडी कैलाशनाथ अधिकारी के साथ एक बातचीत में ‘हाउस ऑफ चीयर’ के संस्थापक और ‘वायकॉम18’ के पूर्व सीओओ राज नायक ने तमाम पहलुओं पर अपने विचार रखे

Last Modified:
Monday, 19 October, 2020
Raj Nayak

‘हाउस ऑफ चीयर’ के संस्थापक और ‘वायकॉम18’ के पूर्व सीओओ राज नायक ने ज्वेलरी ब्रैंड ‘तनिष्क’ द्वारा पिछले दिनों लॉन्च किए गए विज्ञापन को लेकर मचे हंगामे व विवाद को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। तनिष्क ने गहनों की नई सीरिज के लिए ‘एकत्वम’ नाम से इस विज्ञापन को जारी किया था, लेकिन सोशल मीडिया पर बढ़ते विरोध को देखते हुए इसे वापस ले लिया था।

राज नायक के अनुसार इस विज्ञापन का उद्देश्य सामाजिक सद्भाव और एकता को बढ़ावा देना था और उन्हें अभी तक नहीं समझ आया कि इस विज्ञापन में ऐसा क्या गलत था जो इसका विरोध हुआ। राज नायक के अनुसार, पूर्व में भी सामाजिक सद्भाव और एकता पर कई अच्छे विज्ञापन आए हैं, लेकिन तब कोई परेशान या नाराज नहीं हुआ। सिर्फ अब लोगों ने इस तरह की चीजें पर प्रतिक्रिया देना शुरू कर दिया है।

राज नायक ने यह भी कहा, ‘कोई व्यक्ति चाहे तो वह हर चीज में गलती ढूंढ सकता है। मुझे इस तरह की घटना पर दुख होता है। दुनिया में कहीं पर भी लोगों को एकजुट करने वाली चीज काफी अच्छी बात है। मुझे विज्ञापन अच्छा लगा।’

‘गवर्नेंस नाउ’ (Governance Now) के एमडी कैलाशनाथ अधिकारी के साथ एक बातचीत में राज नायक ने कहा, ’केवल ट्रोलिंग की वजह से कंपनी को यह विज्ञापन वापस नहीं लेना चाहिए था। मुझे लगता है कि ऐसे मामलों में सुरक्षा प्रदान करना राज्य का काम है।’

पब्लिक पॉलिसी प्लेटफॉर्म पर ‘मास्टरमाइंड्स’ (Masterminds) कार्यक्रम के लाइव वेबकास्ट के दौरान राज नायक ने कहा, ‘आपको इसके कंटेंट को देखना होगा और सभी चीजों को धर्म के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। यदि आप विज्ञापन के उद्देश्य को देखें तो यह लोगों को एकजुट करने व सामाजिक सद्भाव के बारे में था। अगर इसी तरह की प्रतिक्रियाएं मिलेंगी तो अमर अकबर एन्थॉनी जैसी फिल्में हिट नहीं होंगी। क्रिएटिविटी को दबाया नहीं जाना चाहिए। क्रिएटिविटी को तब तक फ्री करना होगा, जब तक यह किसी को नुकसान नहीं पहुंचा रही है।’

तनिष्क के बारे में सोशल मीडिया पर लोगों ने जिस तरह से प्रतिक्रिया दी है, उस बारे में पूछे गए सवाल के जवाब में राज नायक ने कहा कि संभवत: ऐसा इसलिए हुआ, क्योंकि यह प्लेटफॉर्म सभी के लिए फ्री है। उन्होंने नेटफ्लिक्स की डॉक्यूमेंट्री-ड्रामा 'सोशल डिल्मा' (Social Dilemma) का उदाहरण दिया और कहा कि लोगों के बीच दुश्मनी पैदा करने की कोशिश के पीछे कई निहित स्वार्थ हो सकते हैं।

राज नायक ने कहा कि ‘मैं काफी दुखी महसूस करता हूं, खासकर आज के समय में जब महामारी का प्रकोप फैला हुआ है और लोग तमाम तरह की परेशानियों का सामना कर रहे हैं। ऐसे समय में लोगों को मिलकर आगे आना चाहिए। मानवता से बड़ा कुछ नहीं है।’

टेलिविजन और ‘जनरल एंटरटेनमेंट चैनल्स’ (GEC) पर कंटेंट के बारे में राज नायक ने कहा कि करीब 190 मिलियन घरों में टेलिविजन देखा जा रहा है और इसकी स्थिति काफी मजबूत हो, इसे अन्य घरों में भी अपनी जगह बनानी है। चैनल्स की बढ़ती संख्या और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स से प्रतिस्पर्धा के कारण इसे अपने कंटेंट के बारे में दोबारा से सोचना होगा।

राज नायक के अनुसार, ‘टीवी और सिनेमा वही दिखाते हैं, जो समाज में हो रहा है। पहले सिर्फ कुछ चैनल्स थे, लेकिन अब बेहतरीन कंटेंट के साथ तमाम ओटीटी प्लेटफॉर्म्स मौजूद हैं, जिसके परिणामस्वरूप लोग तमाम तरह की सामग्री देख रहे हैं और उनकी पसंद भी बदल रही है। टीवी बहुत मजबूत हो रहा है और इंटरनेट का बढ़ना भी जारी है, हालांकि कुछ तकनीकी समस्याएं और पहुंच की दिक्कत के बावजूद ओटीटी प्लेयर्स काफी देखे जा रहे हैं। यदि टीवी ने एक समय अंतराल के अंदर अपने कंटेंट में कुछ बदलाव नहीं किए तो स्थिति बदल सकती है और लोग दूसरी जगह शिफ्ट हो सकते हैं।’

राज नायक ने कहा कि दूसरी बात यह है कि ब्रॉडकास्ट और ओटीटी (OTT) के बीच की रेखा काफी धुंधली हो रही है। नेटफ्लिक्स, अमेजॉन, हॉटस्टार आदि ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर देखने के लिए काफी अच्छे कंटेंट के साथ सब कुछ टीवी पर उपलब्ध है। अब कंज्यूमर्स के ऊपर है कि वह क्या देखना पसंद करते हैं, फिर चाहे वह छोटे पर्दे पर हो अथवा बड़ी स्क्रीन पर।

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एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया की नई टीम गठित, ये वरिष्ठ पत्रकार बनीं प्रेजिडेंट

आम तौर पर सर्वसम्मति से पदाधिकारियों की नियुक्ति की सामान्य व्यवस्था को दरकिनार कर इस बार पदों के लिए चुनाव हुए

Last Modified:
Monday, 19 October, 2020
Editors Guild

‘द सिटीजन' की संपादक सीमा मुस्तफा एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया की अध्यक्ष (प्रेजिडेंट) निर्वाचित हुई हैं। संस्था की तरफ से जारी एक बयान में यह जानकारी दी गई है। सीमा मुस्तफा ‘द सिटीजन’ (The Citizen) वेबसाइट की फाउंडर व एडिटर हैं। वे अब ‘द प्रिंट’ (ThePint) के फाउंडर व एडिटर-इन-चीफ शेखर गुप्ता की जगह लेंगी। यह घोषणा 16 अक्टूबर को डिजिटल तरीके से संपन्न हुए चुनावों के नतीजे आने के बाद की गई।

बयान में कहा गया कि ‘हार्डन्यूज' (Hardnews) के एडिटर संजय कपूर महासचिव (जनरल सेक्रेट्री) निर्वाचित हुए हैं। कपूर बिजनेस स्टैंडर्ड के एडिटोरियल डायरेक्टर ए.के. भट्टाचार्य की जगह लेंगे।

‘कारवां’ पत्रिका के एडिटर अनंत नाथ को निर्विरोध कोषाध्यक्ष (Treasurer) चुना गया है। नाथ रेडिफ.कॉम (Rediff.com) की कंट्रिब्यूटिंग एडिटर शीला भट्ट की जिम्मेदारी संभालेंगे। आम तौर पर सर्वसम्मति से पदाधिकारियों की नियुक्ति की सामान्य व्यवस्था को दरकिनार कर इस बार पदों के लिए चुनाव हुए।

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रिपब्लिक मीडिया के इस बयान पर BARC ने जताई नाराजगी, दिया स्पष्टीकरण

ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (बार्क) ने रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के हाल ही में दिए बयान के बाद स्पष्टीकरण जारी किया है

Last Modified:
Sunday, 18 October, 2020
BARC INDIA

ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (बार्क) ने रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के हाल ही में दिए बयान के बाद स्पष्टीकरण जारी किया है। रिपब्लिक मीडिया ने अपने बयान में कहा था कि बार्क से उसे ऑफिशियल मेल प्राप्त हुआ है। इस मेल में रिपब्लिक टीवी, रिपब्लिक भारत या न्यूज नेटवर्क के किसी अन्य सहयोगी के खिलाफ कोई अनुचित कार्य नहीं पाया गया है।

बार्क इंडिया ने रिपब्लिक नेटवर्क पर उसके गोपनीय संचार का गलत तरीके से खुलासा करने पर नाराजगी जताई है। बार्क इंडिया ने अपने स्टेटमेंट में कहा, ‘उसने इस मामले में जारी जांच पर कोई टिप्पणी नहीं की है और वह जांच एजेंसियों को जरूरी मदद मुहैया कर रहा है। बार्क इंडिया निजी और गोपनीय संचार का खुलासा करके और उसी को गलत बताते हुए रिपब्लिक नेटवर्क की कार्रवाइयों से काफी निराश है। बार्क इंडिया फिर दोहराता है कि उसने इस मामले में जारी जांच पर टिप्पणी नहीं की है। वह रिपब्लिक नेटवर्क की कार्रवाई पर निराशा व्यक्त करता है।’

  

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