नेशनल हेराल्ड मामले में सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में इन आरोपों को बताया गलत, उठाई ये मांग

अंग्रेजी अखबार ‘नेशनल हेराल्ड’ के स्वामित्व वाली कंपनी ‘एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड ने दायर की थी याचिका

पंकज शर्मा by
Published - Tuesday, 02 July, 2019
Last Modified:
Tuesday, 02 July, 2019
National Herald

अंग्रेजी अखबार ‘नेशनल हेराल्ड’ के स्वामित्व वाली कंपनी ‘एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड’ (एजेएल) के मामले में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपना जवाब दाखिल कर दिया है। इस जवाब में सरकार का कहना है कि एजेएल की याचिका सुनवाई योग्य नहीं है। ऐसे में अदालत को हस्तक्षेप न करते हुए याचिका को खारिज कर देना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने इस हलफनामे में केंद्रीय शहरी एवं आवास मामलों के मंत्रालय ने दिल्ली के आईटीओ स्थित हेराल्ड हाउस को खाली करने के अपने आदेश को सही बताया है। इसके साथ ही मंत्रालय ने एजेएल की याचिका में दिए गए आधारों को गलत बताया है। मंत्रालय का कहना है कि पिछले दस साल से हेराल्ड हाउस में कोई प्रेस नहीं चल रही है। ऐसे में यह सार्वजनिक परिसर अधिनियम के उल्लंघन के साथ ही लीज पर मुहैया करायी गई संपत्ति का दुरुपयोग है।

अपने इस जवाब में सरकार ने कहा है कि सोनिया गांधी,राहुल गांधी, मोतीलाल वोहरा और ऑस्कर फर्नांडिस द्वारा सौ फीसद शेयर को स्थानांतरित किया जाना भी एजेएल द्वारा किया गया उल्लंघन है। सरकार ने अपने जवाब में राजनीतिक पार्टी का बैकग्राउंड होने की वजह से भवन को खाली कराने का आदेश जारी किए जाने के आरोप को भी गलत बताया है।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने पांच अप्रैल को नेशनल हेराल्ड केस में सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी थी, जिसमें उसे हेराल्ड हाउस खाली करने का आदेश दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने हेराल्ड हाउस खाली करने के आदेश को चुनौती देने वाली एजेएल की याचिका पर केन्द्र को नोटिस भी जारी किया था। इसके बाद सरकार ने यह जवाब दाखिल किया है।

इससे पहले, एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी, जिसमें दिल्ली हाईकोर्ट ने केन्द्र की तरफ से राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में हेराल्ड हाउस को खाली करने के आदेश को बरकरार रखा था। दिल्ली हाई कोर्ट ने 28 फरवरी को लीज की शर्तें तोड़ने का दोषी पाते हुए एजेएल को दिल्ली के आईटीओ स्थित हेराल्ड हाउस खाली करने का आदेश दिया था। एजेएल ने यह आरोप लगाया था कि यह फैसला राजनीतिक विद्वेष का एक हिस्सा है, जिसके चलते ये निर्देश दिए गए। देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने वर्ष 1938 में ‘नेशनल हेराल्ड’ अखबार की स्थापना की थी।

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भोपाल में पत्रकार के कोरोना संक्रमित होने का आया दूसरा मामला

केके सक्सेना के बाद भोपाल के एक और पत्रकार के कोरोना संक्रमित होने की जानकारी सामने आई है। संबंधित पत्रकार एक स्थानीय न्यूज चैनल से जुड़ा हुआ है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 08 April, 2020
Last Modified:
Wednesday, 08 April, 2020
covid19

केके सक्सेना के बाद भोपाल के एक और पत्रकार के कोरोना संक्रमित होने की जानकारी सामने आई है। संबंधित पत्रकार एक स्थानीय न्यूज चैनल से जुड़ा हुआ है। इसी के साथ राजधानी में कोरोना पीड़ितों की संख्या बढ़कर 91 हो गई है। फिर एक पत्रकार के कोरोना की चपेट में आने से अन्य पत्रकारों में चिंता का माहौल है। खासतौर पर वे पत्रकार घबराए हुए हैं, जिनकी हाल-फिलहाल ही सम्बंधित पत्रकार से मुलाकात हुई थी। इसके साथ ही पत्रकारों की सुरक्षा का मुद्दा भी खड़ा हो गया है। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के पत्रकारों को बाइट, विज़ुअल आदि के लिए जगह -जगह घूमना पड़ रहा है। इसके चलते उनके कोरोना प्रभावित होने का खतरा ज्यादा है। जिस पत्रकार की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है, वह भी शहर के प्रभावित क्षेत्रों में रिपोर्टिंग के लिए गए थे।

एक वरिष्ठ पत्रकार का कहना है कि कोरोना के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए न्यूज़ चैनलों के संपादकों को अपने व्यावसायिक रवैये को कुछ समय के लिए किनारे रखना चाहिए। बाइट और विज़ुअल के नाम पर पत्रकारों एवं फोटो जर्नलिस्ट को शहर भर में दौड़ाया जाता है। उन्हें ऐसे इलाकों में भी जाना होता है, जहां कोरोना पॉजिटिव मामले अधिक हैं। यदि इस बारे में गंभीरता से नहीं सोचा गया, तो आने वाले दिनों में स्थिति और भी खराब हो सकती है।

गौरतलब है कि कोरोना से बचाव के लिए बड़े मीडिया संस्थान तमाम उपाय कर रहे हैं। कुछ चैनलों ने अपने माइक के डंडे की लम्बाई को बढ़ा दिया है, ताकि बाइट लेने के दौरान संक्रमण के जोखिम को कम से कम किया जा सके। वहीं, न्यूज़ एजेंसी एएनआई ने अपने माइक को मास्क पहनाया है। लेकिन छोटे संस्थान इसे लेकर ज्यादा गंभीर नहीं हैं। भोपाल में पत्रकार के कोरोना संक्रमित होने का यह दूसरा मामला है। इससे पहले वरिष्ठ पत्रकार केके सक्सेना कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे। इसके बाद उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती किया गया, जहां से पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद उन्हें छुट्टी मिल गई है।     

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‘TV9 भारतवर्ष’ से जुड़े आशुतोष त्रिपाठी, संभालेंगे यह जिम्मेदारी

देश के अग्रणी न्यूज नेटवर्क में से एक TV9 ग्रुप से खबर है कि यहां आशुतोष त्रिपाठी को नियुक्त किया गया है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 08 April, 2020
Last Modified:
Wednesday, 08 April, 2020
ashutosh754

देश के अग्रणी न्यूज नेटवर्क में से एक TV9 ग्रुप से खबर है कि यहां आशुतोष त्रिपाठी को नियुक्त किया गया है। ‘TV9 भारतवर्ष’ में उन्हें उत्तर और पश्चिम बंगाल के लिए सेल्स का वाइस प्रेजिडेंट बनाया गया है। अपनी इस भूमिका में, त्रिपाठी रेवन्यू बढ़ाने पर जोर देंगे, साथ ही रेवन्यू के अन्य नॉन-ट्रेडिशनल स्ट्रीम्स के लिए भी काम करेंगे।

अपनी नियुक्ति पर, आशुतोष त्रिपाठी ने कहा कि वह इस मौके को एक चुनौती के रूप में लेने के लिए बहुत ही उत्साहित हैं। जहां न्यूज जॉनर पहले से ही बेहतर स्थिति में है, वहीं TV9 अलग और अनूठे तरीके से नई कहानियों/शो को प्रजेंट करने के लिए तैयार है। चैनल टैग लाइन ‘फिक्र आपकी, परवाह देश की’ के साथ एक नए रूप में दिखाई देगा। ऐसे समय पर जब देश में लॉकडाउन है, COVID-19 महामारी के दौरान TV9 सोशल मैसेजेस और प्रोमोज के जरिए बचाव और सुरक्षा कैसे करें, इसे लेकर अपने दर्शकों को जागरुक कर रहा है।

उन्होंने कहा कि मुझे खुशी है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने TV9 के प्रोमो के प्रसारण की सराहना की, जिसमें दिखाया गया था कि 5 अप्रैल को अपने घर/बालकनी को 9 बजे 9 मिनट के लिए रोशन करें।  

त्रिपाठी ने जामिया हमदर्द यूनिवर्सिटी से एमबीए किया है। उन्हें मीडिया में सेल्स का 15 से भी ज्यादा वर्षों का अनुभव है। वे इससे पहले ‘एबीपी न्यूज नेटवर्क’ के साथ जुड़े हुए थे, जहां उन्होंने साढ़े छह साल ऐड सेल्स में काम किया। इसके अलावा उन्होंने ‘इंडिया टीवी’, ‘रेडियो मिर्ची’ में भी काम किया है।

 

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कोरोना संकट के बीच ‘राहत’ पहुंचाने के लिए SONY ने उठाया ये बीड़ा

कोरोनावायरस (कोविड-19) के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए सरकार द्वारा देशभर में किए गए लॉकडाउन को देखते हुए ‘सोनी पिक्चर्स नेटवर्क इंडिया’ (SPNI) ने बड़ा निर्णय लिया है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 08 April, 2020
Last Modified:
Wednesday, 08 April, 2020
SONY PICTURES

कोरोनावायरस (कोविड-19) के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए सरकार द्वारा देशभर में किए गए लॉकडाउन को देखते हुए ‘सोनी पिक्चर्स नेटवर्क इंडिया’ (SPNI) ने मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में कार्यरत दैनिक वेतनभोगी श्रमिकों (daily wage workers) को सपोर्ट करने के लिए 100 मिलियन रुपए के योगदान का निर्णय लिया है।   

बता दें कि कोरोनावायरस के कारण टीवी, सिनेमा शो और फिल्म प्रॉडक्शन का काम 20 मार्च से ठहर गया है। ऐसे में मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री बड़े पैमाने पर बेरोजगारी से जूझ रही है। इसका सबसे ज्यादा असर दैनिक वेतनभोगी वर्कर्स और उनके परिवार पर पड़ा है। ऐसे लोगों की मदद के लिए नेटवर्क संबंधित श्रमिक संगठनों की मदद से इन वर्कर्स से संपर्क कर उन्हें मुफ्त में कूपन उपलब्ध करा रहा है। इन कूपन की मदद से ये वर्कर्स और उनका परिवार चुने गए रिटेल स्टोर्स से खाना और रोजमर्रा की अन्य जरूरी चीजें ले सकते हैं।

नेटवर्क अपने विभिन्न प्रॉडक्शन हाउस के साथ मिलकर वहां कार्यरत दैनिक वेतनभोगी श्रमिकों को एक महीने की सैलरी देने के लिए भी काम कर रहा है। इसके अलावा नेटवर्क ने ‘स्वदेश फाउंडेशन’ की ओर से शुरू किए गए ‘स्वदेश कोविड फंड’ (Swades COVID Fund) में भी अपना योगदान दे रहा है।     

इस बारे में ‘सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया’ के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ एनपी सिंह का कहना है, ‘इस वैश्विक महामारी को देखते हुए दुनियाभर के लोग एक साथ मिलकर आगे आ रहे हैं, ताकि इस संकट से छुटकारा पाया जा सके। इस महामारी का मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री पर भी व्यापक प्रभाव पड़ा है, जिसमें बड़ी संख्या दैनिक वेतनभोगी वर्कर्स की है। ऐसे में एक ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ संस्थान होने के नाते हमारी जिम्मेदारी है कि हम उन लोगों को मदद पहुंचाएं, जिन्होंने नेटवर्क की सफलता में अपना अमूल्य योगदान दिया है।’

इसके अलावा नेटवर्क की ओर से सभी ‘डायरेक्ट टू होम’ (DTH) और केबल ऑपरेटर्स पर ‘सोनी पल’ (Sony PAL) चैनल व्युअर्स के लिए दो महीने तक मुफ्त उपलब्ध कराया गया है। यह निर्णय इसलिए लिया गया है कि लॉकडाउन के कारण घरों में बैठे व्युअर्स को एंटरटेनमेंट में किसी तरह की कमी नहीं आए। इसके अलावा नेटवर्क के विभिन्न चैनल्स पर लोगों को जागरूकता संदेश देने वाले कार्यक्रम भी तैयार किए गए हैं।

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विडियो कांफ्रेंसिंग मीडिया से मुखातिब हुए CM योगी, कही ये बात

यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कोरोना वायरस के कारण चल रहे देशव्यापी लॉकडाउन के बीच मंगलवार शाम मीडिया से विडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए बात की।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 08 April, 2020
Last Modified:
Wednesday, 08 April, 2020
yogi

कोरोना के बढ़ते संक्रमण को रोकने के लिए पूरा देश मिलकर जंग लड़ रहा है। इस जंग में मीडिया की भूमिका भी अहम है और वह भी अपना पूरा सहयोग दे रहा है। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कोरोना वायरस के कारण चल रहे देशव्यापी लॉकडाउन के बीच मंगलवार शाम मीडिया से विडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए बात की। इस दौरान सीएम योगी ने मीडिया के काम की सराहना की।

उन्होंने कहा कि कोरोना से लड़ाई में शासन, प्रशासन और आमजन की सहभागिता के साथ ही मीडिया की भूमिका भी बहुत अहम है। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन को सफल बनाने और कोरोना से बचने व रोकथाम में मीडिया जनता को भली-भांति जागरूक कर सकता है। उन्होंने कहा कि अभी तक मीडिया ने अपना पूरा सहयोग दिया है और उम्मीद है कि भविष्य में भी मीडिया अपनी सकारात्मक भूमिका का निर्वहन करता रहेगा।

योगी ने कहा कि मीडियाकर्मियों को फेक न्यूज, अफवाह और अलगाववाद जैसी खबरों से सजग रहना चाहिए। उन्होंने स्वअनुशासन और सोशल डिस्टेंसिंग पर जोर देते हुए कहा कि इसका कड़ाई से पालन कराया जा रहा है। मीडिया को भी इसके प्रति जागरुकता में सरकार का सहयोग करना चाहिए।

इस दौरान योगी ने मीडियाकर्मियों के साथ कोरोना से निपटने के लिए सरकार की तैयारियों व सरकार द्वारा किए जा रहे कार्यों को भी साझा किया।

विडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान सीएम योगी ने पत्रकारों से सुझाव भी मांगे। पत्रकारों ने लॉकडाउन खुलने की समय सीमा, कम्युनिटी किचन, सर्विलांस बढ़ाने, जनसहभागिता आदि से संबंधित सुझाव दिए। मुख्यमंत्री ने महत्वपूर्ण सुझावों पर गंभीरता से अमल करने का आश्वासन भी दिया है। योगी ने कहा कि लॉकडाउन कब खुलेगा इस पर 11-12 अप्रैल को केंद्र से बातचीत करने के बाद ही फैसला किया जाएगा।

वहीं मुख्यमंत्री ने कोरोना को लेकर कोई खबर प्रकाशित करने से पहले उसकी सत्यता जांचने की अपील भी की।

बता दें कि शाम पांच बजे मुख्ययमंत्री विडियो कांफ्रेंसिंग पर लाइव आए थे। उनसे बात करने के लिए मीडियाकर्मियों को एनआईसी के विडियो कांफ्रेंस हाल में बुलाया गया था। मुख्यमंत्री ने करीब 40 मिनट तक बात की। समय के अभाव का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि वह क्षमा चाहते हैं कि सभी लोगों से बात नहीं कर सकते। इस मौके पर डीएम कुमार प्रशांत, एसएसपी अशोक कुमार त्रिपाठी और मीडिया कर्मी मौजूद रहे।

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सोनिया गांधी के इस सुझाव पर NBA ने जताई नाराजगी, रखी ये बात

‘न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन’ (NBA) ने मीडिया पर सरकारी विज्ञापनों के बारे में दिए गए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के सुझाव का विरोध किया है

Last Modified:
Tuesday, 07 April, 2020
NBA

निजी टेलिविजन न्यूज चैनल्स का प्रतिनिधित्व करने वाले समूह ‘न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन’ (NBA) ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के उस सुझाव को पुरजोर तरीके से खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने सरकार और सरकारी उपक्रमों की तरफ से मीडिया में दिए जा रहे विज्ञापनों (टेलीविजन, प्रिंट और ऑनलाइन) पर दो साल के लिए रोक लगाने की बात कही है।

इस बारे में ‘एनबीए’ के वाइस प्रेजिडेंट और ‘इंडिया टीवी’ के चेयरमैन व एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा का कहना है, ’ऐसे समय में जब मीडियाकर्मी अपनी जान की परवाह न करते हुए महामारी के बीच न्यूज कवर कर अपनी राष्ट्रीय ड्यूटी निभा रहे हैं, कांग्रेस अध्यक्ष की ओर से इस तरह का बयान काफी हतोत्साहित करने वाला है।’  

रजत शर्मा की ओर से कहा गया है, ‘एक तरफ तो आर्थिक मंदी की वजह से पहले ही इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के एडवर्टाइजिंग रेवेन्यू में काफी गिरावट आई है, दूसरी तरफ लॉकडाउन में सभी इंडस्ट्री और बिजनेस बंद होने के कारण भी यह आर्थिक संकट का सामना कर रहा है। इसके अलावा न्यूज चैनल्स अपने रिपोर्टर्स और प्रॉडक्शन स्टाफ की सुरक्षा पर काफी ज्यादा खर्च कर रहे हैं। ऐसे में सरकार एवं सरकारी उपक्रमों द्वारा मीडिया विज्ञापनों पर दो साल के लिए प्रतिबंध लगाने का सुझाव न केवल मीडिया को बीमार करने वाला है, बल्कि यह पूरी तरह से मनमाना है ’

रजत शर्मा की ओर से यह भी कहा गया है, ‘स्वस्थ और फ्री मीडिया के हित में ‘एनबीए’ कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से प्रधानमंत्री को सरकार द्वारा मीडिया को दिए जाने वाले एडवर्टाइजमेंट पर दो साल के लिए रोक लगाने के सुझाव को वापस लेने की मांग करता है।’

गौरतलब है कि पीएम मोदी को दिए अपने पत्र में सोनिया गांधी ने सरकार और सरकारी उपक्रमों की तरफ से मीडिया में दिए जा रहे विज्ञापनों (टेलीविजन, प्रिंट और ऑनलाइन) पर दो साल के लिए रोक लगाकर यह पैसा कोरोनावायरस से पैदा हुए संकट से निपटने में लगाने को कहा है।

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इस ग्रुप से जुड़े वरिष्ठ पत्रकार मिलिंद खांडेकर, मिली बड़ी जिम्मेदारी

वरिष्ठ पत्रकार मिलिंद खांडेकर को लेकर हाल ही में समाचार4मीडिया ने अपने उच्च स्तरीय स्रोतों से खबर दी थी कि वह जल्द ही इंडिया टुडे ग्रुप में वरिष्ठ पद पर जॉइन कर सकते हैं।

Last Modified:
Tuesday, 07 April, 2020
milind

वरिष्ठ पत्रकार मिलिंद खांडेकर को लेकर हाल ही में समाचार4मीडिया ने अपने उच्च स्तरीय स्रोतों से खबर दी थी कि वह जल्द ही इंडिया टुडे ग्रुप में वरिष्ठ पद पर जॉइन कर सकते हैं। बता दें कि अब इस खबर पर मुहर लग गई है। वरिष्ठ पत्रकार मिलिंद खांडेकर ने तक चैनल्स (Tak Channels) के मैनेजिंग एडिटर के रूप में ‘इंडिया टुडे’ ग्रुप जॉइन कर लिया है। वे वाइस चेयरपर्सन और मैनेजिंग डायरेक्टर कली पुरी को रिपोर्ट करेंगे।

ये भी पढ़ें- मिलिंद खांडेकर अब इस ग्रुप से कर सकते हैं नई पारी की शुरुआत

खांडेकर के कंधों पर न्यूज और रीजनल के सभी तक चैनल्स की जिम्मेदारी होगी। वे नोएडा के फिल्म सिटी स्थित आईटीजी मीडियाप्लेक्स से ही अपना योगदान देंगे।

खांडेकर इसके पहले  ‘बीबीसी (इंडिया)’ में बतौर डिजिटल एडिटर कार्यरत थे। 13 मार्च को उन्होंने अपने ट्विटर अकाउंट से बीबीसी से अलग होने की जानकारी साझा की थी। इस ट्वीट में खांडेकर ने कहा था, ‘बीबीसी इंडिया के साथ मेरा सफर काफी बेहतर रहा। इस दौरान कई नई चीजें सीखने का मौका भी मिला। भारत में बीबीसी ने काफी विस्तार किया है और मैं काफी सौभाग्यशाली हूं जो इसका हिस्सा रहा। मैं अपने सभी साथियों को धन्यवाद देता हूं और उनके उज्जवल भविष्य की कामना करता हूं। अपने अगले कदम के बारे में मैं जरूर जानकारी दूंगा।’

ये भी पढ़ें- BBC India के डिजिटल एडिटर मिलिंद खांडेकर ने लिया ये बड़ा फैसला

गौरतलब है कि मिलिंद खांडेकर बीबीसी से पहले एबीपी न्यूज के साथ जुड़े हुए थे। अगस्त, 2018 की शुरुआत में एबीपी न्यूज में अपनी 14 साल की लंबी पारी को विराम दिया था। वे यहां मैनेजिंग एडिटर पद पर कार्यरत थे।  2016 में उनका कद बढ़ाकर उन्हें नई जिम्मेदारियां सौंपी गई थी। एबीपी न्यूज नेटवर्क में उनका योगदान हिंदी चैनल के साथ शुरू हुआ और धीरे-धीरे एबीपी न्यूज नेटवर्क के डिजिटल और क्षेत्रीय (बंगाली, मराठी और गुजराती) चैनलों की ओर भी बढ़ा।

2016 में ही मिलिंद खांडेकर को टीवी न्यूज इंडस्ट्री के प्रतिष्ठित अवॉर्ड एक्सचेंज4मीडिया न्यूज ब्रॉडकास्टिंग अवॉर्ड (enba) के तहत बेस्ट एडिटर कैटेगरी के लिए भी चुना गया था।

हिंदी और अंग्रेजी दोनो ही भाषाओं में बराबर की पकड़ होने के बावजूद भी मिलिंद खांडेकर ने शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता की ओर अपना रुख किया। मिलिंद ने पत्रकारिता में अपनी शुरुआत 1992 से ‘नवभारत टाइम्स’ के साथ की। नवभारत में उन्होंने सब-एडिटर और रिपोर्टर के रूप में काम किया। 1995 तक वे यहां रहे। तीन साल काम करने के बाद वे ‘आजतक’ के साथ जुड़ गए। आजतक में उन्होंने कुछ समय तक रिपोर्टर की भूमिका निभाई, जिसके बाद कई विभिन्न पदों पर काम करते हुए वे यहां एग्जिक्यूटिव प्रड्यूसर बन गए और बाद में उन्होंने वेस्टर्न ब्यूरो ऑपरेशन की भी कमान संभाली। 2004 में मिलिंद ने 'आजतक' को अलविदा कह दिया और तब स्टार न्यूज यानी आज के 'एबीपी न्यूज' के साथ जुड़ गए थे। तब से वे एमसीसीएस (एबीपी चैनल का संचालन करने वाली कंपनी) में बतौर मैनेजिंग एडिटर की भूमिका निभा रहे थे।

मिलिंद ने किताब 'दलित करोड़पति-15 प्रेरणादायक कहानियां' भी लिखी । इसमें 15 कहानियां है, जिनमें 15 दलित उद्योगपतियों के संघर्ष को शॉर्ट स्टोरीज की शक्ल में प्रस्तुत किया गया है। ये कहानियां दलित करोड़पतियों की है,जिन्होंने शून्य से शुरू कर कामयाबी के नए आयाम रचे, जिनके पास पेन की निब बदलने के लिए पैसे नहीं थे आज उनकी कंपनी का टर्नओवर करोड़ों में है, लेकिन उन्होंने ये कामयाबी कैसे हासिल की, क्या मुश्किलें आई और उन्होंने इन मुश्किलों पर कैसे फतह हासिल की।  

पत्रकारिता जगत में उन्हें दो दशक से भी ज्यादा का अनुभव है। उन्होंने पत्रकारिता की पढ़ाई प्रतिष्ठित टाइम्स सेंटर फॉर मीडिया स्टडीज से की है। 1991 में हिंदी में बेस्ट ट्रेनी के लिए उन्हें ‘राजेन्द्र माथुर अवॉर्ड’ से भी नवाजा गया था।

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मीडिया के खिलाफ जमीयत ने उठाया ये कदम, लगाया नफरत फैलाने का आरोप

तब्लीगी जमात के करीबी माने जाने वाले उलेमाओं के संगठन जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने मीडिया के एक वर्ग पर मार्च में हुए निजामुद्दीन मरकज के कार्यक्रम को लेकर नफरत फैलाने का आरोप लगाया है।

Last Modified:
Tuesday, 07 April, 2020
sc

मीडिया जिस तरह से तब्लीगी जमात मामले को लेकर रिपोर्टिंग कर रहा है, उसे लेकर अब जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने नाराजगी व्यक्त करते हुए सुप्रीम का दरवाजा खटखटाया है। उसने देश में बढ़ते कोरोना संक्रमण के लिए तब्लीगी जमात के लोगों को जिम्मेदार ठहराने पर मीडिया के खिलाफ यह याचिका दायर की है।

तब्लीगी जमात के करीबी माने जाने वाले उलेमाओं के इस संगठन ने मीडिया के एक वर्ग पर मार्च में हुए निजामुद्दीन मरकज के कार्यक्रम को लेकर नफरत फैलाने का आरोप लगाया है। इस संगठन ने कहा कि इस मुद्दे को ऐसा दिखाया जा रहा है जैसे मुसलमान कोरोना फैलाने की मुहिम चला रहे हैं। संगठन ने सुप्रीम कोर्ट से इस तरह की मीडिया कवरेज पर रोक लगाने की मांग की है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट से मीडिया और सोशल मीडिया में झूठी खबर फैलाने वालों पर कार्रवाई का आदेश देने का अनुरोध किया गया है।

अपनी याचिका में जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने कोर्ट से केंद्र सरकार को दुष्प्रचार रोकने और इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का निर्देश देने की अपील भी की है।

जमीयत के वकील एजाज मकबूल ने दायर की गई याचिका में कहा कि तब्लीगी के कार्यक्रम में हुई एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना के लिए पूरे मुस्लिम समुदाय को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। इन दिनों सोशल मीडिया में कई तरह के विडियो और फेक न्यूज शेयर की जा रही हैं, जिनसे मुस्लिमों की छवि खराब हो रही है। इनसे तनाव बढ़ सकता है, जो साम्प्रदायिक सौहार्द्र और मुस्लिमों की जान पर खतरा है। साथ ही यह संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन भी है।

संगठन ने याचिका में यह भी कहा है कि एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना की आड़ में देश के एक बड़े समुदाय को समाज से अलग-थलग करने की कोशिश की जा रही है। उसके आर्थिक बहिष्कार की बातें कही जा रही हैं। इससे न सिर्फ समाज में नफरत फैलेगी बल्कि कोरोना के खिलाफ साझा लड़ाई भी कमजोर पड़ेगी, इसलिए सुप्रीम कोर्ट इस मामले में दखल देते हुए तुरंत सुनवाई करे।

गौरतलब है कि कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, उसमें तब्लीगी जमात में शामिल लोगों और मौलाना साद को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। इस मामले में मौलाना साद के समर्थन में मौलाना अली कादरी सामने आए और उन्होंने न्यूज चैनल्स और उससे जुड़े पत्रकारों को धमकी भी दी। उन्होंने कहा कि कुछ टीवी पत्रकार जमात के खिलाफ साजिश कर रहे हैं, वे ऐसा करना बंद कर दे नहीं तो उनके रिपोर्टर्स का बाहर निकलना मुश्किल हो जाएगा। इसके बाद न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन' (NBA) ने इस धमकी को संजीदगी से लिया और उनकी ओर से एक पत्र जारी किया है जिसमें कहा गया कि  न्यूज चैनल्स के एंकर्स और रिपोर्टर्स को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे- वॉट्सऐप, टिकटॉक और ट्विटर पर विशेष रूप से निशाना बनाया जा रहा है। सोशल मीडिया पर कुछ ऐसे विडियो भी प्रसारित किए जा रहे हैं, जिनमें धर्म विशेष के कुछ लोग टीवी न्यूज एंकर्स का नाम ले रहे हैं और उन चैनल्स के रिपोर्टर्स पर हमले की धमकी दे रहे हैं।

एनबीए’ के वाइस प्रेजिडेंट और इंडिया टीवी के चेयरमैन व एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा  की ओर से जारी इस पत्र में कहा गया, ‘समाज के एक वर्ग में फैल रही इस घृणित प्रवृत्ति की एनबीए घोर निंदा करता है और सरकार व कानून का पालन कराने वाली एजेंसियों से इन असामाजिक तत्वों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई किए जाने की अपील करता है।’  

पत्र में एनबीए की ओर से ऐसे धार्मिक तत्वों से इस तरह की धमकियां से दूर रहने और न्यूज चैनल्स के खिलाफ इस तरह की बयानबाजी न करने के लिए भी कहा गया है।  

बता दें कोरोना वायरस के संक्रमण को तेजी से फैलने से रोकने के लिए तब्लीगी जमात और उनके संपर्क में आए 25 हजार लोगों को पूरे देश में क्वारंटाइन किया गया है।  इसके साथ ही तब्लीगी जमात के लोग हरियाणा के जिन 5 गांवों में गए थे, उन गांवों को भी सील कर दिया गया है। गृह मंत्रालय की संयुक्त सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने सोमवार को यह जानकारी दी।

उन्होंने यह भी बताया कि तब्लीगी जमात के कुल 2,083 विदेशी सदस्यों में से 1,750 सदस्यों को अभी तक ब्लैक लिस्ट में डाला जा चुका है। मालूम हो कि देशभर में अभी तक 4067 लोग कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए हैं। इस महामारी से अब तक 109 लोगों की मौत हो चुकी है।

   

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इस खुलासे के बाद न्यूज एंकर्स व रिपोर्टर्स को मिल रहीं धमकियां, NBA ने जताया विरोध

‘एनबीए’ के वाइस प्रेजिडेंट और इंडिया टीवी के चेयरमैन व एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा की ओर से इस बारे में एक पत्र भी जारी किया गया है

Last Modified:
Monday, 06 April, 2020
NBA

निजी टेलिविजन न्यूज चैनल्स का प्रतिनिधित्व करने वाले समूह ‘न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन’ (NBA) ने विभिन्न न्यूज चैनल्स में काम कर रहे एंकर्स और पत्रकारों के खिलाफ समाज के एक खास वर्ग के लोगों द्वारा दुर्व्यवहार और धमकियों का सहारा लेने की प्रवृत्ति पर गंभीर चिंता जताई है।

‘एनबीए’ के वाइस प्रेजिडेंट और इंडिया टीवी के चेयरमैन व एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा की ओर से जारी एक पत्र में कहा गया है कि हाल के दिनों में इलेक्ट्रॉनिक मीडिया द्वारा कोरोनावायरस (कोविड-19) के प्रसार में तबलीगी जमात की भूमिका को उजागर किया गया है, तब से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के खिलाफ इस तरह के मामले ज्यादा देखने को मिल रहे हैं।

रजत शर्मा द्वारा जारी इस पत्र में यह भी कहा गया है कि न्यूज चैनल्स के एंकर्स और रिपोर्टर्स को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे- वॉट्सऐप, टिकटॉक और ट्विटर पर विशेष रूप से निशाना बनाया जा रहा है। सोशल मीडिया पर कुछ ऐसे विडियो भी प्रसारित किए जा रहे हैं, जिनमें धर्म विशेष के कुछ लोग टीवी न्यूज एंकर्स का नाम ले रहे हैं और उन चैनल्स के रिपोर्टर्स पर हमले की धमकी दे रहे हैं।

रजत शर्मा की ओर से जारी इस पत्र में कहा गया है, ‘समाज के एक वर्ग में फैल रही इस घृणित प्रवृत्ति की एनबीए घोर निंदा करता है और सरकार व कानून का पालन कराने वाली एजेंसियों से इन असामाजिक तत्वों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई किए जाने की अपील करता है। इस महामारी के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए देश में लागू किए गए लॉकडाउन के बीच इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ने काफी उल्लेखनीय काम किया है और हमेशा सही, निष्पक्ष और संतुलित रिपोर्टिंग की है। कोरोनावायरस जैसी महामारी को लेकर टीवी पर होने वाली डिबेट्स में भी समाज को सभी वर्गों को उचित व बराबर का प्रतिनिधित्व दिया गया है।’   

पत्र में एनबीए की ओर से ऐसे धार्मिक तत्वों से इस तरह की धमकियां से दूर रहने और न्यूज चैनल्स के खिलाफ इस तरह की बयानबाजी न करने के लिए भी कहा गया है। पत्र में एनबीए की ओर से यह भी कहा गया है कि ऐसे नेता सामने आएं और कोरोनावायरस को फैलाने में तबलीगी जमात की भूमिका को लेकर अपना रुख साफ करें।

 

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कोरोना पीड़ित महिला पत्रकार से अंजाने में हो गई बड़ी 'गलती', खामियाजा भुगत रहे कई लोग

दुनियाभर में कोरोनावायरस (कोविड-19) का संक्रमण फैलता ही जा रहा है। इसकी वजह से जहां कई लोगों की मौत हो चुकी है, वहीं संक्रमित मरीजों की संख्या भी रोजाना बढ़ती जा रही है।

Last Modified:
Monday, 06 April, 2020
Cororna Virus

दुनियाभर में कोरोनावायरस (कोविड-19) का संक्रमण फैलता ही जा रहा है। इसकी वजह से जहां कई लोगों की मौत हो चुकी है, वहीं संक्रमित मरीजों की संख्या भी रोजाना बढ़ती जा रही है। ऐसा ही एक मामला अमेरिका के न्यूजर्सी का सामने आया है, जहां कोरोना संक्रमित महिला पत्रकार की वजह से कम से कम सात लोग इस बीमारी से संक्रमित हो गए, जिनमें से तीन लोगों की मौत भी चुकी है। दरअसल, ये सभी लोग पत्रकार की मां की बर्थडे पार्टी में शामिल हुए थे और वहीं से पत्रकार द्वारा यह संक्रमण उनमें फैल गया।

‘डेली मेल’ की रिपोर्ट के अनुसार, पत्रकार ने इस बात को खुद स्वीकार किया है। हालांकि, पत्रकार का यह भी कहना है कि यह सब ‘अनजाने’ में हुआ। इस बारे में महिला पत्रकार का कहना है कि घटना के वक्त उन्हें बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि न्यूयॉर्क में कोरोना के मामलों की रिपोर्टिंग करने के दौरान वह खुद इस महामारी से संक्रमित हो चुकी हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, न्यूयॉर्क में बतौर रेडियो रिपोर्टर काम करने वाली इस पत्रकार ने अपनी 90 साल की मां का बर्थडे मनाने के लिए आठ मार्च को पार्टी आयोजित की थी। चर्च में हुई इस पार्टी में कुल 25 लोग शामिल हुए थे। पार्टी के अगले दिन पत्रकार की मां बीमार हो गई थीं, हालांकि, उन्हें कुछ दिन बाद अस्पताल में भर्ती किया गया। इसके बाद जब पत्रकार का कोरोना वायरस टेस्ट किया गया तो वह पॉजिटिव निकला। बाद में पता चला कि उस पार्टी में शामिल तीन लोगों की मौत हो गई है और कम से कम 4 अन्य लोग पॉजिटिव निकले हैं।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पत्रकार के माता-पिता और 56 वर्षीय एक अन्य रिश्तेदार भी कोरोनावायरस से संक्रमित हो चुका है। हालांकि, यह रिश्तेदार बर्थडे पार्टी में शामिल नहीं हुआ था।

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मोरारी बापू ने पीएम की मुहिम के लिए मांगा जनसहयोग, NewsX ने शेयर किया विडियो

महामारी कोरोनावायरस (कोविड-19) को हराने के लिए प्रधानमंत्री द्वारा की जा रही कोशिशों का प्रसिद्ध राम कथाकार और धार्मिक गुरु मोरारी बापू ने समर्थन किया है।

Last Modified:
Saturday, 04 April, 2020
MORARI BAPU PM MODI

महामारी कोरोनावायरस (कोविड-19) को हराने के लिए प्रधानमंत्री द्वारा की जा रही कोशिशों का प्रसिद्ध राम कथाकार और धार्मिक गुरु मोरारी बापू ने समर्थन किया है। उन्होंने लोगों से भी प्रधानमंत्री की इस मुहिम में शामिल होने और रविवार पांच अप्रैल को रात नौ बजे नौ मिनट तक अपने घर की सभी लाइटें बंद कर बॉलकनी में खड़े होकर दीया, मोमबत्ती अथवा मोबाइल की फ्लैशलाइट से रोशनी करने की अपील की है।

इस बारे में अंग्रेजी न्यूज चैनल न्यूजएक्स (NewsX) ने अपने ट्विटर हैंडल पर मोरारी बापू का विडियो शेयर किया है। इस विडियो में मोरारी बापू का कहना है, ‘मैं आपसे एक विनय करना चाहता हूं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि रविवार पांच अप्रैल की रात ठीक नौ बजे नौ मिनट के लिए अपने आंगन में, अपनी बालकनी में यानी जहां और जैसी स्थिति उपयुक्त हो, घर की सभी लाइटें बंद करके दीप जलाएं, मोमबत्ती जलाएं। मैं आपसे कहना चाहता हूं कि इस राष्ट्रीय बात को सभी लोग स्वीकार करके बिना चूके करें। यह एक साधु की भी विनती है, श्रद्धा है। सब ऐसा करेंगे।’

वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस ट्वीट पर रिट्वीट कर कहा है कि पूज्य मोरारी बापू के इस संदेश में देशवासियों के लिए एक बड़ी प्रेरणा है।  

 

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