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सरकार ने DTH लाइसेंस से जुड़े नियमों में किए ये बड़े बदलाव
छह साल के लंबे इंतजार के बाद आखिरकार केंद्र सरकार ने नए डीटीएच (DTH) के लिए लाइसेंस प्राप्त करने से जुड़े दिशा-निर्देशों में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है
समाचार4मीडिया ब्यूरो 5 years ago
छह साल के लंबे इंतजार के बाद आखिरकार केंद्र सरकार ने नए डायरेक्ट टू होम (डीटीएच) के लिए लाइसेंस प्राप्त करने से जुड़े दिशा-निर्देशों में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। नए दिशा-निर्देश टेलीकॉम रेगुलेटर ट्राई (TRAI) द्वारा 23 जुलाई 2014 को जारी की गई नए डीटीएच लाइसेंस को लेकर जारी की गईं सिफारिशों पर आधारित है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केन्द्रीय मंत्रिमंडल की बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में केन्द्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने यह जानकारी दी है।
नए दिशा-निर्देशों के तहत अब भारत में डीटीएच सेवाएं प्रदान करने के लिए लाइसेंस वर्तमान के 10 वर्ष के बजाय अब 20 वर्ष की अवधि के लिए जारी किया जाएगा। इसके अलावा लाइसेंस की अवधि को एक बार में 10 साल तक नवीनीकृत किया जा सकता है।
लाइसेंस शुल्क वर्तमान में वार्षिक आधार के स्थान पर अब तिमाही आधार पर कलेक्ट किया जाएगा। यानी लाइसेंस फीस का कलेक्शन तिमाही आधार पर होगा। इससे सरकार की लगातार कमाई भी होती रहेगी और डीटीएच सेवा देने वाली कंपनियों पर भी बोझ नहीं बढ़ेगा।
बदलावों के तहत लाइसेंस शुल्क को जीआर के 10 फीसदी से घटाकर एजीआर के 8 फीसदी तक लाया गया है। जीआर से जीएसटी को घटाकर एजीआर की गणना की जाएगी।
डीटीएच संचालकों को उनके द्वारा दिखाए जाने वाले कुल अनुमति प्राप्त प्लेटफॉर्म चैनल्स की क्षमता से अधिकतम 5% के संचालन को अनुमति दी जाएगी। एक डीटीएच संचालक से प्रति पीएस चैनल के लिए 10,000 रुपए की नॉन-रिफंडेबल रजिस्ट्रेशन फीस ली जाए।
सूचना-प्रसारण मंत्री ने संवाददाताओं को बताया कि दिशा-निर्देशों में संशोधन करने से डीटीएच क्षेत्र में 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) का रास्ता साफ हो जाएगा। उन्होंने बताया कि वाणिज्य मंत्रालय ने डीटीएच क्षेत्र में 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की बात कही थी, लेकिन सूचना-प्रसारण मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के कारण ऐसा नहीं हो पा रहा था, अत: इन दिशा-निर्देशों में सुधार की जरूरत थी। जावड़ेकर ने बताया कि दिशा-निर्देशों में संशोधन से अब इस क्षेत्र में 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेश निवेश हो सकेगा। अब तक इस क्षेत्र में 49 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेश निवेश हो सकता था। मंत्रालय के अनुसार, इस संबंध में भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकार (ट्राई) से विचार विमर्श किया गया है।
इसके अलावा यह भी मंजूरी दी गई है कि स्वैच्छिक आधार पर डीटीएच संचालकों के बीच इंफ्रास्ट्रक्चर को साझा करने की इच्छा रखने वाले डीटीएच संचालकों को डीटीएच प्लेटफॉर्म और टीवी चैनल्स की ट्रांसपोर्ट स्ट्रीम को साझा करने की अनुमति दी जाएगी। टीवी चैनल्स के डिस्ट्रीब्यूटर्स को अपनी ग्राहक प्रबंधन प्रणाली (एसएमएस) और कंडीशनल एक्सेस सिस्टम (सीएएस) आवेदनों के लिए समान हार्डवेयर को साझा करने की अनुमति दी जाएगी।
डीटीएच क्षेत्र में रोजगार की अपार संभावनाएं हैं। यह सीधे तौर पर डीटीएच संचालकों को रोजगार देने के साथ-साथ कॉल सेंटर्स में कार्यरत कर्मियों के अलावा जमीनी स्तर पर अप्रत्यक्ष रूप से काफी बड़ी संख्या में इन्सटॉलर्स को रोजगार प्रदान करता है। दीर्घकालीन लाइसेंस अवधि और रिन्युअल पर स्पष्टता के साथ-साथ सरल एफडीआई सीमा जैसे संशोधित डीटीएच दिशा-निर्देशों से डीटीएच क्षेत्र में नए निवेशों के अलावा रोजगार अवसरों को सुनिश्चित किया जा सकेगा।
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