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सरकार को नहीं भायी पत्रकार की ये ‘गुस्ताखी’, लिया हिरासत में
पाकिस्तान में सरकार और सेना के खिलाफ आवाज उठाने की पत्रकारों को भारी कीमत चुकानी पड़ रही है
समाचार4मीडिया ब्यूरो 6 years ago
पाकिस्तान में सरकार और सेना के खिलाफ आवाज उठाने की पत्रकारों को भारी कीमत चुकानी पड़ रही है। अजहर उल वाहिद अपनी फेसबुक पोस्ट के लिए पिछले छह दिनों से पुलिस की हिरासत में हैं। इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया का अनुभव रखने वाले वाहिद ने सत्ता प्रतिष्ठान के खिलाफ एक के बाद एक कई पोस्ट किए थे। उन्होंने अपने हालिया पोस्ट में पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ की फांसी पर रोक लगाने के अदालत के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा था कि यह लोकतंत्र का मजाक है।
पुलिस ने वाहिद के फेसबुक अकाउंट पर सरकार के खिलाफ अपमानजनक सामग्री का हवाला देते हुए उन्हें पिछले गुरुवार को पूर्वी लाहौर से हिरासत में लिया था, तब से वह अब तक बाहर नहीं आ सके हैं। वहीं, वाहिद के वकील ने पुलिस की इस कार्रवाई को प्रेस की आजादी पर हमला करार दिया है। साथ ही उनका कहना है कि अदालत को वाहिद की जमानत पर जल्द से जल्द फैसला करना चाहिए।
रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स के एशिया-पैसिफिक प्रमुख डैनियल बास्टर्ड ने भी वाहिद के खिलाफ की गई कार्रवाई को गलत बताते हुए उन्हें तुरंत रिहा करने की मांग की है। बास्टर्ड ने कहा, ‘यह निश्चित तौर पर पत्रकारों को डराने का प्रयास है। पाकिस्तानी अदालत को वाहिद पर लगाये गए आरोपों को खारिज करके उन्हें आजाद करना चाहिए।’
गौरतलब है कि पाकिस्तान लंबे समय से पत्रकारों के लिए दुनिया के सबसे खतरनाक स्थानों में से एक रहा है। इमरान सरकार भले ही मीडिया की आजादी की बात करती है, लेकिन हकीकत इससे काफी अलग है। पत्रकार द्वारा सैन्य प्रतिष्ठान की तरफ से बढ़ते दबाव की शिकायतें अब आम हो गई हैं। 2018 में कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट ने पाया था कि पाक सेना ने ‘चुपचाप लेकिन प्रभावी रूप से’ सामान्य समाचार रिपोर्टिंग के दायरे में सख्त सीमाएं लागू की हैं।
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