घर चाहने वाले पत्रकारों के लिए अच्छी खबर

राजस्थान आवासन मंडल के आयुक्त ने जारी किए आदेश, पिंक सिटी प्रेस क्लब को उपलब्ध करानी होगी ऐसे पत्रकार और आवासों की लिस्ट

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Thursday, 07 November, 2019
Last Modified:
Thursday, 07 November, 2019
House

राजस्थान में ई-नीलामी की प्रक्रिया में शामिल हाउसिंग बोर्ड के मकानों को अब पत्रकार सीधे ही प्राप्त कर सकेंगे। इसके लिए पिंक सिटी प्रेस क्लब को हाउसिंग बोर्ड को प्रस्ताव बनाकर देना होगा। पिंक सिटी प्रेस क्लब के अध्यक्ष अभय जोशी की मांग पर राजस्थान आवासन मंडल के आयुक्त पवन अरोड़ा ने इस बारे में आदेश जारी किए हैं। इस बारे में अभय जोशी ने बुधवार को पवन अरोड़ा के समक्ष हाउसिंग बोर्ड की तरफ से नीलाम किए जा रहे आवास पत्रकारों को सीधे आवंटित करने की मांग रखी थी।

अब पवन अरोड़ा की ओर से जारी आदेशों में कहा गया है कि पत्रकारों को इच्छित आवास इस नीलामी प्रक्रिया से हटाकर सीधे आवंटित कर दिए जाएंगे। अपने पत्र में पवन अरोड़ा का कहना है कि इसके लिए पिंक सिटी प्रेस क्लब को ऐसे पत्रकारों के नाम और उनके द्वारा चाहे गए इस तरह के आवासों की सूची हाउसिंग बोर्ड को मुहैया करानी होगी। इसके बाद सूची में शामिल पत्रकारों को नीलामी की बजाय सीधे ही ये आवास उपलब्ध करा दिए जाएंगे।

राजस्थान आवासन मंडल के आयुक्त पवन अरोड़ा की ओर से जारी पत्र की कॉपी आप यहां देख सकते हैं।

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बिक सकता है नेटवर्क18 का बड़ा हिस्सा!

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस बारे में बातचीत अभी शुरुआती दौर में है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Friday, 22 November, 2019
Last Modified:
Friday, 22 November, 2019
Network18

जापान की कंपनी ‘सोनी’ (SONY) जल्द ही ‘रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड’ (RIL) के चेयरमैन मुंकेश अंबानी की मीडिया फर्म ‘नेटवर्क18 मीडिया एंड इंवेस्टमेंट लिमिटेड’ में बड़ी हिस्सेदारी खरीद सकती है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दोनों के बीच बातचीत चल रही है, लेकिन अभी यह शुरुआती दौर में ही है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, देश में बढ़ती कंटेंट की मांग को देखते हुए सोनी इस भारतीय टेलीविजन नेटवर्क में 30 प्रतिशत तक हिस्सेदारी खरीदने को लेकर बातचीत कर रही है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि ‘सोनी’ कई विकल्पों पर विचार कर रही है। इनमें हिस्‍सेदारी खरीदने के लिए बोली लगाने के अलावा भारत में अपने कारोबार को ‘नेटवर्क18’ के एंटरटेनमेंट चैनल्स में विलय करने के प्रस्ताव भी शामिल हो सकते हैं। हालांकि इस बारे में ‘सोनी’ और ‘नेटवर्क18’ ने किसी तरह की पुष्टि नहीं की है।

बता दें कि ‘सोनी’ दक्षिण एशियाई देशों में ‘सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया’ के जरिये अपनी सेवाएं देती है। इसके पास ‘सोनी एंटरटेनमेंट टेलिविजन’ जैसे चैनल हैं। वहीं. ‘टीवी18 ब्रॉडकास्ट’ के पास न्यूज और एंटरटेनमेंट के 56 चैनल हैं। ये अन्य देशों में रह रहे भारतीयों के लिए 16 अंतरराष्ट्रीय चैनल्स के जरिये अपनी सेवाएं उपलब्ध कराती है।

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PIB-RNI का नाम बदलेगा, प्रत्येक मंत्रालय में बनेगी नई डिवीजन!

दस सदस्यीय कमेटी की अध्यक्षता ब्यूरो ऑफ आउटरीच कम्युनिकेशन के डायरेक्टर जनरल सत्येंद्र प्रकाश कर रहे हैं। जल्द ही सरकार को सौंपी जाएगी ये रिपोर्ट

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Friday, 22 November, 2019
Last Modified:
Friday, 22 November, 2019
MIB

’भारतीय सूचना सेवा‘ (Indian Information Service) में पुनर्गठन की कवायद चल रही है। इसके लिए एक कमेटी का गठन भी किया गया है। न्यूज पोर्टल ‘द प्रिंट’ (The Print) में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, इस बारे में कमेटी ने अपनी कुछ सिफारिशें तैयार की हैं। इसमें ‘भारतीय सूचना सेवा’ का दायरा और बढ़ाकर दोगुने से ज्यादा करने, टॉप लेवल पर नई पोस्ट तैयार करने, विभिन्न मंत्रालयों में भारतीय सूचना सेवा के अधिकारियों की पोस्टिंग करने और न्यू मीडिया विंग्स स्थापित करने जैसी सिफारिशें शामिल हैं।

‘ब्यूरो ऑफ आउटरीच कम्युनिकेशन’ (BOC) के डायरेक्टर जनरल सत्येंद्र प्रकाश की अध्यक्षता में गठित ‘Cadre Review and Restructuring Committee’ (CRRC) में 10 सदस्य शामिल हैं। बताया जाता है कि कमेटी की ओर से जल्दी ही इन सिफारिशों को लेकर सरकार के समक्ष विस्तृत रिपोर्ट पेश की जाएगी। बता दें कि ब्‍यूरो ऑफ आउटरीच एंड कम्‍युनिकेशन, सूचना-प्रसारण मंत्रालय (MIB)  के तहत काम करने वाली मीडिया यूनिट है, जबकि भारतीय सूचना सेवा के अधिकारियों का चयन केंद्रीय लोक सेवा आयोग (UPSC) की ओर से आयोजित सिविल सर्विसेज परीक्षा के तहत किया जाता है। भारतीय सूचना सेवा सरकारी कम्युनिकेशन का प्रमुख आधार है और यह सरकार व मीडिया के बीच महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

नई मीडिया विंग्स (New Media Wings): कमेटी ने भारतीय सूचना सेवा में वर्तमान में 971 पदों के विपरीत इनकी संख्या बढ़ाकर 2244 करने का सुझाव रखा है, ताकि कम्युनिकेशन नेटवर्क को और बढ़ाया जा सके। इसके साथ ही आईआईएस अधिकारियों के शीर्ष पदों में बढ़ोतरी की भी सिफारिश की गई है। इनमें प्रिंसिपल डायरेक्टर जनरल लेवल की दो अतिरिक्त पोस्ट के अलावा डायरेक्टर जनरल लेवल की 4 पोस्ट और एडिशनल डायरेक्टर जनरल लेवल की 56 पोस्ट क्रिएट करने की सिफारिश भी शामिल है।      

इन सिफारिशों में कहा गया है कि 150 पोस्ट रिजर्व रखी जानी चाहिए, जो वर्तमान में नहीं है जबकि, ‘कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग’ की गाइडलाइंस के अनुसार ऐसा करना आवश्यक है। इन सिफारिशों में ग्रुप ए कैडर की लगभग आठ प्रतिशत पोस्ट को ट्रेनिंग, प्रोबेशन, डेपुटेशन और छुट्टी आदि के लिए रिजर्व रखा गया है, जबकि बी कैडर में यह संख्या पांच प्रतिशत रखी गई है।

कमेटी ने ‘Directorate General of Media Research and Training’ (DGMRT) के नाम से एक विंग गठित करने की सिफारिश भी की है। यह भी कहा गया है कि इस समय काम कर रही मीडिया यूनिट ‘Electronic Media Monitoring Centre’ (EMMC) और ‘New Media Wing’ (NMW) को आपस में मिला देना चाहिए और इसे ‘DGMRT’ के तहत ले आना चाहिए। नई विंग मीडिया, सोशल मीडिया, फीडबैक और रिसर्च की मॉनीटरिंग के साथ ही उसका विश्लेषण भी करेगी। इस समय ’ EMMC’ टीवी चैनल्स की मॉनीटरिंग करती है कि वे प्रोग्राम और एडवर्टाइजिंग के लिए तय नियमों का पालन कर रहे हैं अथवा नहीं, वहीं ‘NMW’ सोशल मीडिया के विश्लेषण का काम देखती है।    

इस रिपोर्ट में ‘डायरेक्टरेट जनरल ऑफ न्यूज’ (Directorate General of News) के नाम से एक और विंग प्रस्तावित की गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इसे पब्लिक ब्रॉडकास्टर ‘प्रसार भारती’ के तहत लाना चाहिए जो ‘ऑल इंडिया रेडियो’ (AIR) और ‘दूरदर्शन’ (DD) की न्यूज डिवीजन की देखरेख करेगी। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों विंग- ‘DGMRT’ और ‘Directorate General of News’ की कमान प्रिंसिपल डायरेक्टर जनरल लेवल के ऑफिसर के हाथ में दी जानी चाहिए। कमेटी की सिफारिशों में फिल्म संबंधी कार्यों के साथ समन्वय स्थापित करने के लिए डीजी रैंक के अफसर के नेतृत्व में ‘डायरेक्टरेट जनरल ऑफ फिल्म्स’ (Directorate General of Films) के नाम से एक और विंग बनाने की बात कही गई है।

युवा वर्ग में डिजिटल को बढ़ावा देना (Digital push to reach out to population under 35): देश की दो तिहाई जनसंख्या 35 साल से कम उम्र वालों की है। ऐसे में इस आयुवर्ग के लोगों के बीच ज्यादा से ज्यादा पहुंच बढ़ाने के लिए कमेटी ने डिजिटल को ज्यादा बढ़ावा देने की बात अपनी सिफारिशों में शामिल की है। कमेटी का कहना है कि सरकार को कम्युनिकेशन के लिए पुराने तरीकों से अलग हटकर काम करना चाहिए। ‘भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण’ (TRAI) के डाटा का उल्लेख करते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में इंटरनेट सबस्क्राइबर्स की संख्या वर्ष 2007 में 40 मिलियन से बढ़कर वर्ष 2019 में 665 मिलियन हो गई है और यह दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा इंटरनेट यूजर बेस बन चुका है।

मीडिया कंटेंट की शिकायत की जांच आईआईएस को करनी चाहिए (Media content complaint redressal to be handled by IIS):  रिपोर्ट में सिफारिश की गई है कि मीडिया कंटेंट संबंधी शिकायतों की जांच करने वाली ‘स्क्रूटनी कमेटी’ (Scrutiny Committee) और ‘इंटर मिनिस्ट्रियल कमेटी’ (Inter-Ministerial Committee) को नई विंग ‘DG Content Complaint Redressal’ में शामिल करना चाहिए। इसे ‘DGMRT’ के तहत लाया जाना चाहिए। यह भी कहा गया है कि ‘DGMRT’ के तहत इस नई विंग को ‘Secretariat of the Committee’ की भूमिका निभानी चाहिए। इसका काम एडवर्टाइजिंग कंटेंट पर नजर रखने के लिए ‘बीओसी’ में गठित ‘Committee for Content Regulation in Government Advertising’ (CCRGA) के लिए होना चाहिए।     

‘पीआईबी और आरएनआई के नाम में बदलाव’ (Renaming PIB, RNI): रिपोर्ट में यह भी सिफारिश की गई है कि ‘प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो’ (PIB) का नाम बदलकर ‘डायरेक्टर जनरल ऑफ मीडिया एंड कम्युनिकेशन’ (Directorate General of Media and Communication) और ‘बीओसी’ का नाम बदलकर ‘डायरेक्टरेट जनरल ऑफ आउटरीच एंड कम्युनिकेशन’(Directorate General of Outreach and Communication) कर देना चाहिए। इसके साथ ही ‘रजिस्ट्रार ऑफ न्यूजपेपर्स फॉर इंडिया’ (RNI) का नाम बदलकर ‘डायरेक्टरेट जनरल ऑफ रजिस्ट्रेशन एंड लाइसेंसिग’ (DGRL) करने की सिफारिश की गई है। ‘RNI’ की भूमिका को बढ़ाकर मल्टीपल सिस्टम ऑपरेटर्स की लाइसेंसिंग तक करने के लिए कहा गया है।       

प्रत्येक मंत्रालय में कम्युनिकेशन डिवीजन (Communication division in every ministry): इस कमेटी की रिपोर्ट में यह सिफारिश भी की गई है कि भारतीय सूचना सेवा के अधिकारियों को निश्चित समय सीमा के लिए ‘प्रसार भारती’ में तैनात करना चाहिए, जहां उन्हें संस्थान का हिस्सा माना जाना चाहिए। अभी तक भारतीय सूचना सेवा के अधिकारी सिर्फ ‘AIR’ और ‘DD’ में तैनात किए जाते हैं। कमेटी की सिफारिशों के अनुसार, भारतीय सूचना सेवा के अधिकारियों को चरणबद्ध तरीके से मंत्रालयों में तैनात किया जाना चाहिए और प्रत्येक मंत्रालय में एक कम्युनिकेशन डिवीजन बनाई जानी चाहिए। रिपोर्ट में भारतीय सूचना सेवा के अधिकारियों की ‘सूचना प्रसारण मंत्रालय’ (MIB) की कैडर कंट्रोल विंग में तैनाती की सिफारिश भी की गई है।   

कमेटी ने रेवेन्यू, कस्टम, रेलवे और पोस्टल की तर्ज पर इंडियन इंफॉर्मेशन सर्विस बोर्ड अथवा इंफॉर्मेशन एंड कम्युनिकेशन बोर्ड गठित करने की सिफारिश भी की है। रिपोर्ट के अनुसार, इस बोर्ड को ही ग्रुप ए और बी के आईआईएस अधिकारियों की पोस्टिंग और ट्रांसफर की जिम्मेदारी भी दी जानी चाहिए। इसके अलावा सूचन-प्रसारण मंत्रालय में पॉलिसी तय करने वाले पदों पर भी आईआईएस अधिकारियों को शामिल करने की सिफारिश इस रिपोर्ट में की गई है।

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सहारा में बदला वरिष्ठ पत्रकार उपेंद्र राय का रोल

करीब एक माह पूर्व ही मेनस्ट्रीम मीडिया में की है वापसी, पूर्व में कई मीडिया संस्थानों में निभा चुके हैं अहम जिम्मेदारी

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Thursday, 21 November, 2019
Last Modified:
Thursday, 21 November, 2019
Upendra-Rai

वरिष्ठ पत्रकार उपेंद्र राय को एक बार फिर ‘सहारा इंडिया मीडिया’ (Sahara India Media) का सीईओ और एडिटर-इन-चीफ बनाया गया है। बता दें कि करीब एक माह पूर्व ही उपेंद्र राय ने सहारा समूह की मास मीडिया कंपनी से मेनस्ट्रीम मीडिया में वापसी की है। उस दौरान उन्हें कंपनी में बतौर सीनियर एडवाइजर नियुक्त किया गया था। कंपनी के चेयरमैन की ओर से जारी एक पत्र में उपेंद्र राय को एक बार फिर ‘सहारा इंडिया मीडिया’ के सीईओ और एडिटर-इन-चीफ की जिम्मेदारी सौंपी गई है।   

गौरतलब है कि उपेन्द्र राय पूर्व में 'तहलका' (Tehelka) समूह और सहारा समूह में सीईओ और एडिटर-इन-चीफ की जिम्मेदारी निभा चुके हैं। वह 'बिजनेस वर्ल्ड' मैगजीन (Businessworld Magazine) के साथ भी एडिटोरियल एडवाइजर के तौर पर जुड़े रह चुके हैं। राय ने अपने करियर की शुरुआत 1 जून, 2000 को लखनऊ में ‘राष्ट्रीय सहारा’ से की थी। उन्होंने यहां विभिन्न पदों पर काम किया और वे यहां सबसे कम उम्र के ब्यूरो चीफ बनकर मुंबई पहुंचे।

इसके बाद वे साल 2002 में ‘स्टार न्यूज’ की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। वहां उन्हें दो साल से भी कम समय में वरिष्ठ संवाददाता बनने का मौका मिला। वहीं से 'सीएनबीसी टीवी18' (CNBC TV18) में 10 अक्टूबर, 2004 को प्रमुख संवाददाता के रूप में जॉइन किया।

बतौर विशेष संवाददाता अक्टूबर 2005 में 'स्टार न्यूज' (अब 'एबीपी न्यूज') में वापसी की और दो वर्षो के अंदर एक और पदोन्नति मिली और चैनल में सबसे युवा असोसिएट एडिटर बन गए। फिर जनवरी 2010 से दिसंबर 2014 तक 'सहारा न्यूज नेटवर्क' में एडिटर और न्यूज डायरेक्टर की जिम्मेदारी संभाली। साथ ही वे इस दौरान प्रिंटर और पब्लिशर की भूमिका में भी रहे।

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इन 7 कैटेगिरीज के जरिए होगी फेक न्यूज की पहचान

सिर्फ भारत में ही यह समस्या नहीं है, बल्कि दुनिया के अन्य देश भी इससे जूझ रहे हैं

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Thursday, 21 November, 2019
Last Modified:
Thursday, 21 November, 2019
Fake News

फेक न्यूज के मामले आए दिन सामने आ रहे हैं। सिर्फ भारत में ही यह समस्या नहीं है, बल्कि दुनिया के अन्य देश भी इससे जूझ रहे हैं। फेक न्यूज से निपटने के लिए तमाम स्तर पर कवायद भी हो रही है, लेकिन यह समस्या काबू में नहीं आ रही है।

फेक न्यूज पर रिसर्च कर रहे अमेरिका की पेन्सिलेवेनिया स्टेट यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने अब सात तरह की फेक न्यूज की पहचान की है। इस रिसर्च का उद्देश्य फेक न्यूज को बेहतर तरीके से पहचानना और इस तरह की तकनीक बनाना है, जो अपने आप इस तरह के कंटेंट को पहचान ले। शोधकर्ताओं ने फेक न्यूज को सात श्रेणियों- गलत समाचार (false news), ध्रुवीकृत कंटेंट (polarized content), गलत रिपोर्टिंग (misreporting), व्यंग्य (satire), टिप्पणी (commentary), दबाव देनी वाली सूचना (persuasive information) और नागरिक पत्रकारिता (citizen journalism) में बांटा है।

‘अमेरिकन बिहेवेरियल साइंटिस्ट’ (American Behavioral Scientist) मैगजीन में छपे एक रिसर्च में इन फेक न्यूज की असली न्यूज के साथ तुलना की गई है। इस बारे में शोधकर्ताओं का कहना है कि असली समाचार में कई विशेषताएं होती है, जो इसे फेक न्यूज की इन श्रेणियों से अलग बनाती हैं। जैसे-असली समाचार में पत्रकारिता की शैली का पालन किया जाता है। इसमें व्याकरण और तथ्यों का ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है, जबकि फेक न्यूज में ऐसा नहीं होता है। वहीं, फेक न्यूज की हेडलाइन भ्रामक होती है और इसमें भावनात्मक रूप से प्रेरित बातों पर ज्यादा जोर रहता है। फेक न्यूज का सोर्स और इनके इस्तेमाल के तरीके भी अलग होते हैं।

इस रिसर्च में यह भी पाया गया कि फेक न्यूज में जिस वेब एड्रेस का इस्तेमाल किया जाता है, वह मानक के अनुरूप नहीं होता है। इसके साथ ही इसमें कॉंटेक्ट करने के लिए निजी ईमेल आईडी दिए जाते हैं। सोशल मीडिया पर इस तरह की फेक न्यूज ज्यादा देखने को मिलती हैं। मैगजीन में छपे इस रिसर्च पेपर में यह भी कहा गया है कि ऑनलाइन न्यूज के मैसेज को देखकर, उसका स्रोत किया है और उसके लिए किस नेटवर्क का इस्तेमाल किया गया है, इसकी पहचान कर फेक न्यूज को पहचाना जा सकता है।

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नेटवर्क18 में अब बड़ी जिम्मेदारी निभाएंगे ये दो प्रफेशनल्स

समूह ने ऑडियंस में तेजी से हो रही बढ़ोतरी और डिजिटल के बढ़ते रेवेन्यू के कारण मार्केट से तालमेल बिठाने के लिए यह निर्णय लिया है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Thursday, 21 November, 2019
Last Modified:
Thursday, 21 November, 2019
Network18

देश के प्रतिष्ठित मीडिया समूह ‘नेटवर्क18’ (Network 18) ने ‘News18.com’ की लीडरशिप टीम की जिम्मेदारियों में कुछ बढ़ोतरी की है। इसके तहत अजीम ललानी (Azim Lalani) को सीओओ (ब्रैंड सॉल्यूशंस और कंवर्जेंस) बनाया गया है, वहीं मितुल संगानी (Mitul Sangani) को सीओओ (जनरल न्यूज) की जिम्मेदारी सौंपी गई है। ऑडियंस में तेजी से हो रही बढ़ोतरी और डिजिटल के बढ़ते रेवेन्यू के कारण मार्केट से तालमेल बिठाने के लिए समूह द्वारा यह निर्णय लिया गया है  

ललानी इससे पूर्व बिजनेस हेड (इंग्लिश न्यूज क्लस्टर) के पद पर काम कर रहे थे। वहीं, मितुल संगानी इससे पूर्व न्यूज18 के बिजनेस हेड (भारतीय भाषाएं) की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। अब नई भूमिका में वह पीएंडएल (P&L), मुद्रीकरण (monetization), ऑडियंस ग्रोथ (संपादकीय टीम के साथ), News18 English, News18 Languages और उनमें शामिल सभी वर्टिकल्स के प्रॉडक्ट और मार्केटिंग की जिम्मेदारी संभालेंगे। अपनी नई भूमिका में अजीम ललानी और मितुल संगानी पहले की तरह नेटवर्क18 (डिजिटल) के प्रेजिडेंट पुनीत सिंघवी को रिपोर्ट करना जारी रखेंगे।

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ZEE समूह की हिस्सेदारी बेचने के मामले में अब हो रही ये तैयारी

इस बारे में डील लगभग हो चुकी है और यह रकम कर्जदाताओं को चुकाई जाएगी

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Thursday, 21 November, 2019
Last Modified:
Thursday, 21 November, 2019
Zee Group

‘एस्सेल ग्रुप’ (Essel Group) अपनी मीडिया और एंटरटेनमेंट कंपनी 'जी ऐंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज’ (ZEE) की 16.5 प्रतिशत हिस्सेदारी वित्तीय निवेशकों को बेचने की योजना बना रहा है। इनमें से 2.3 प्रतिशत हिस्सेदारी ‘OFI Global China Fund’ और 'LLC’ अथवा इसकी सहयोगी कंपनियों को बेचने की योजना है।

माना जा रहा है कि यह बिक्री अगले कुछ दिनों में हो सकती है और इससे कंपनी के प्रमोटर्स को 4500-5000 करोड़ रुपए की वसूली में मदद मिलेगी। बताया जाता है कि इस बारे में डील लगभग हो चुकी है और 16.5 हिस्सेदारी बेचने के बाद कर्जदाताओं को यह रकम चुकाई जाएगी। इस डील के बाद प्रमोटर्स की इस कंपनी में पांच प्रतिशत हिस्सेदारी बनी रहेगी और पुनीत गोयनका एमडी व सीईओ के तौर पर काम करते रहेंगे।  

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सरकार के इस फैसले से सूचना सलाहकारों की हुई बल्ले-बल्ले

शलभमणि त्रिपाठी और रहीस सिंह को हाल ही में उत्तर प्रदेश सरकार ने बनाया है सूचना सलाहकार

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Wednesday, 20 November, 2019
Last Modified:
Wednesday, 20 November, 2019
Rahees Singh Shalabhmani Tripathi

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने सूचना सलाहकारों के वेतन और भत्ते में बढ़ोतरी पर अपनी मुहर लगा दी है। सूचना सलाहकारों के वेतन-भत्तों में दोगुनी से ज्यादा बढ़ोतरी की गई है। बता दें कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रिमंडल की बैठक हुई थी। इस बैठक में अन्य फैसलों के साथ सूचना सलाहकारों के वेतन और भत्ते में बढ़ोतरी किए जाने पर भी मुहर लगा दी गई। पहले सूचना सलाहकार का वेतन जहां 40 हजार रुपए और आवास भत्ता दस हजार रुपए था, वहीं अब इसे बढ़ाकर एक लाख रुपए वेतन और 25 हजार रुपए आवास भत्ता कर दिया गया है।

भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता शलभमणि त्रिपाठी और लखनऊ के पत्रकार रहीस सिंह को उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने पिछले महीने ही सूचना विभाग में सलाहकार के पद पर नियुक्त किया था। शलभमणि त्रिपाठी के पास इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का जिम्मा है, वहीं रहीस सिंह को प्रिंट मीडिया की जिम्मेदारी दी गई है।

शलभमणि त्रिपाठी ने वर्ष 2016 में पत्रकारिता छोड़कर बीजेपी जॉइन कर ली थी। इससे पहले वे देश के बड़े न्यूज चैनल आईबीएन7 के लखनऊ ब्यूरो चीफ रह चुके हैं। बीजेपी जॉइन करने के बाद उन्हें पार्टी में प्रदेश प्रवक्ता की जिम्मेदारी दी थी। वहीं रहीस सिंह लखनऊ की पत्रकारिता का जाना-माना नाम हैं। वह लेखन के क्षेत्र में भी काफी सक्रिय हैं। हाल ही में वे कर्मयोगी संन्यासी योगी आदित्यनाथ के नाम से एक किताब लिखकर भी चर्चा में आए थे।

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भारतीय मार्केट में पैठ बढ़ाने का BBC ने बनाया ये 'मेगा प्लान'

दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में बताई रूपरेखा, अगला आयोजन मुंबई में किया जाएगा

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Wednesday, 20 November, 2019
Last Modified:
Wednesday, 20 November, 2019
BBC EVENT

‘बीबीसी ग्लोबल न्यूज’ (BBC Global News) अगले साल ‘बीबीसी डॉट कॉम’ (BBC.com) पर दो नए प्रीमियम कलेक्शंस लॉन्च करने जा रही है। ‘बीबीसी ग्लोबल न्यूज’ की ओर से दिल्ली में मंगलवार को पहली बार ‘Upfront’ इवेंट आयोजित किया गया, वहीं मुंबई इवेंट गुरुवार को किया जाएगा। बता दें कि ‘बीबीसी वर्ल्ड न्यूज’ (BBC World News) और ‘बीबीसी डॉट कॉम’ का स्वामित्व ‘बीबीसी ग्लोबल न्यूज’ के पास है और यही इनका संचालन करती है।   

इस इवेंट की थीम ‘The Power of an Authentic Voice’ रखी गई और इसका उद्देश्य भारतीय मीडिया और एडवर्टाइजिंग इंडस्ट्रीज को एक मंच पर लाना है। इसमें ‘बीबीसी ग्लोबल न्यूज’ की ओर से अपने आगामी कंटेंट के साथ ही पार्टनरशिप और आगामी योजनाओं के बारे में चर्चा की जा रही है।

‘बीबीसी ग्लोबल न्यूज’ द्वारा जिन दो नए प्रीमियम कलेक्शंस की लॉन्चिंग की बात हो रही है, उनके नाम ‘बीबीसी फ्यूचर यू’ (BBC Future You) और ‘बीबीसी फ्यूचर प्लैनेट’ (BBC Future Planet) हैं। ‘बीबीसी फ्यूचर यू’ जहां लोगों के स्वास्थ्य (wellness) पर केंद्रित होगी, वहीं ‘बीबीसी फ्यूचर प्लैनेट’ में स्थायित्व (sustainability) पर फोकस किया जाएगा। दोनों का उद्देश्य अपने ऑडियंस तक ब्रैंड्स की पहुंच को सुगम बनाना है।

 ‘Upfronts’ के द्वारा कार्यक्रम में मौजूद लोगों को ‘Audio: Activated’ - BBC Global News’ के बारे में जानने-समझने का मौका मिला। यह एक नई रिसर्च है कि लोग किस तरह से ब्रैंडेंड ‘पोडकास्ट’ (ऑन डिमांड टॉक रेडियो) से जुडते हैं और भारतीय मार्केट में यह कैसे लागू होती है। इस रिसर्च से पता चला है कि ब्रैंडेड पोडकास्ट विज्ञापन का एक प्रभावी माध्यम है।

इस पहल के तहत ‘बीबीसी वर्ल्ड न्यूज’ और ‘बीबीसी डॉट कॉम’ के आगामी कंटेंट पर भी प्रकाश डाला जाएगा। इसमें अभिनेता शाहरुख खान के साथ टॉकिंग मूवी ‘बॉलिवुड स्पेशल’ से लेकर ‘इंडियन स्पोर्ट्स वुमैन ऑफ द ईयर’ के साथ ही तीन पार्ट्स में भारतीय संगीत के सांस्कृतिक इतिहास से जुड़ी श्रंखला भी शामिल होगी।

इस बारे में ‘बीबीसी ग्लोबल न्यूज’ के सेल्स डायरेक्टर (दक्षिण एशिया) विशाल भटनागर का कहना है, ‘इन पहल के साथ बीबीसी का नाम जुड़ा हुआ है, जो दुनियाभर का जाना-माना नाम है, ऐसे में आप प्रामाणिक आवाज के मामले में इन पर भरोसा कर सकते हैं। ऑडियो के क्षेत्र में हम करीब सौ सालों से सबसे आगे हैं और ये प्रोजेक्ट भारत के प्रति हमारी लगातार प्रतिबद्धता के साथ ही ऑडियंस और बिजनेस पार्टनर्स के मामले में दुनिया का सर्वश्रेष्ठ न्यूज संस्थान बनने की हमारी महत्वाकांक्षा को दर्शाते हैं।

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देश में मीडिया की आजादी को किस तरह लग रहा पलीता, सामने आई ये रिपोर्ट

‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स-इंडिया’ और ‘द विजन फाउंडेशन’ द्वारा तीन नवंबर से 14 नवंबर के बीच कराया गया सर्वे

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Monday, 18 November, 2019
Last Modified:
Monday, 18 November, 2019
Press

पत्रकारों को अपना काम करने के दौरान तमाम तरह की मुसीबतों का सामना करना पड़ता है। पिछले दिनों गैर लाभकारी संगठन ‘द विजन फाउंडेशन’ और देश में पत्रकारों के प्रमुख संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स-इंडिया (एनयूजे-आई)’  द्वारा कराए गए सर्वे में भी इसी तरह की बातें सामने आई हैं।

पत्रकारों की सुरक्षा और मीडिया समूहों के लिए सुरक्षा प्रावधानों पर देशभर के पत्रकारों के बीच तीन नवंबर से 14 नवंबर के बीच यह सर्वे किया गया। इस सर्वे का उद्देश्य पत्रकारों पर हमलों अथवा प्रताड़ना के मामलों को समझना और इस बारे में समय रहते प्रभावी कार्ययोजना बनाना है।

सर्वे के दौरान यह बात सामने आई कि देश में करीब 61 प्रतिशत पत्रकारों को अपनी खबरों के कारण कभी-न-कभी धमकी अथवा अन्य प्रकार के दबाव का सामना करना पड़ता है। सर्वे के अनुसार, पत्रकारों पर हमले की बढ़ती घटनाओं के कारण अभिव्यक्ति की आजादी का खतरा भी बढ़ रहा है। इस सर्वे में देशभर के करीब 823 पत्रकारों ने भाग लिया, जिनमें 21 प्रतिशत महिला पत्रकार शामिल रहीं। सर्वे में 266 पत्रकार प्रिंट मीडिया के, 263 पत्रकार ऑनलाइन मीडिया के और 98 पत्रकार टेलिविजन से संबद्ध रहे।

सर्वे में यह भी सामने आया है कि इस साल अपने काम के कारण अब तक चार पत्रकारों की हत्या हो चुकी है, जबकि पिछले साल देश में पांच पत्रकारों की हत्या हुई थी। सर्वे में शामिल 46 प्रतिशत पत्रकारों ने माना कि उन्हें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे- ट्विटर और फेसबुक पर धमकी मिली, जबकि 17 प्रतिशत का मानना था कि उन्हें वॉट्सऐप अथवा प्राइवेट मैसेज के माध्यम से धमकी दी गई।

सर्वे में शामिल करीब 74 प्रतिशत पत्रकारों का मानना था कि उनके संस्थान में तथ्यों की सटीकता पर सबसे ज्यादा ध्यान दिया जाता था जबकि 13 प्रतिशत का मानना था कि उनका संस्थान हमेशा विशेष प्रकार के समाचारों को प्राथमिकता देता है। करीब 33 प्रतिशत पत्रकारों ने 21वीं सदी में पत्रकारिता के सामने सबसे बड़ी चुनौती अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर बढ़ते हमले को माना, जबकि करीब 21 प्रतिशत पत्रकारों का मानना था कि आने वाले समय में फर्जी और पेड समाचार सबसे बड़ी चुनौती बनेंगे।

करीब 18 प्रतिशत पत्रकारों का कहना था कि इन दिनों न्यूज वेबसाइट की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। ऐसे में अखबार और पारंपरिक मीडिया के उपेक्षा बढ़ने के साथ ही लोगों की समाचारों के प्रति विश्वसनीयता घटी है। यह सबसे बड़ा संकट है।

इस सर्वे में यह भी सामने आया कि करीब 44 प्रतिशत पत्रकारों ने उन्हें मिली धमकी अथवा प्रताड़ना की शिकायत अपने संस्थान से की जबकि इस तरह के मामलों में महज 12 प्रतिशत पत्रकारों ने ही पुलिस अथवा अन्य कानूनी एजेंसियों को इससे अवगत कराया। जिन पत्रकारों को सर्वे में शामिल किया गया, उनमें से करीब 61 प्रतिशत पत्रकारों ने अपने काम की वजह से कभी न कभी हमले अथवा धमकी की बात स्वीकारी, जबकि 76 प्रतिशत पत्रकारों ने माना कि उनके मीडिया संस्थानों में सुरक्षा संबंधी किसी तरह का प्रावधान नहीं हैं। इन पत्रकारों का यह भी मानना था कि उन्हें किसी भी प्रकार के सुरक्षा प्रशिक्षण नहीं दिया गया है और न ही कोई सुरक्षा प्रोटोकाल है।

सर्वे में यह भी सामने आया है कि क्षेत्रीय अथवा गैर अंग्रेजी पत्रकारों पर होने वाले हमलों की खबर को भी राष्ट्रीय स्तर पर तवज्जो नहीं मिल पाती है। सर्वे में शामिल कई पत्रकारों का मानना है कि इस तरह की स्थिति दूर होनी चाहिए और सरकार को तुरंत एक प्रभावी नियामक बनाने की दिशा में कदम उठाने चाहिए।

इस रिपोर्ट को आप यहां क्लिक कर पढ़ सकते हैं। 

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अब पत्रकारों के सम्मान व सुरक्षा का यूं ध्यान रखेगी पुलिस

उप्र के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दखल के बाद आईजी ने अधीनस्थ पुलिस अधिकारियों को जारी किए दिशा निर्देश

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Monday, 18 November, 2019
Last Modified:
Monday, 18 November, 2019
Police

पत्रकारों से जुड़े मामलों को लेकर पुलिस की भूमिका पर आए दिन सवाल उठते रहते हैं। कहीं पुलिस पर पत्रकारों के उत्पीड़न के आरोप लगते हैं तो कहीं ये आरोप लगता है कि पुलिस शिकायत लेकर पहुंचने वाले पत्रकारों की सुनवाई नहीं करती है। इसके अलावा पत्रकारों व उनके परिजनों को झूठे मामलों में फंसाने के मामले भी गाहे-बगाहे सामने आते रहते हैं।  

इस तरह के मामले संज्ञान में आने के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने अधीनस्थ अधिकारियों को पत्रकारों के हितों के संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए हैं। आईजी (कानून-व्यवस्था) प्रवीण कुमार की ओर से वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों/पुलिस अधीक्षकों को जारी किए गए इन निर्देशों में कहा गया है कि पुलिस के पास यदि कोई पत्रकार पहुंचता है तो उसे समुचित सम्मान दिया जाए। पत्रकारों तथा उनके परिजनों को बेवजह झूठे केसों में न फंसाया जाए।

आईजी का कहना है कि यदि किसी पत्रकार अथवा उसके परिजनों के खिलाफ कोई मामला सामने आता है तो पहले उस मामले की किसी राजपत्रित अधिकारी से जांच करवाई जाए और इसके बाद ही कोई कार्यवाही की जाए। खबरें जुटाने में पत्रकारों को किसी तरह की परेशानी आड़े न आए, इसके लिए पुलिस अधिकारियों को पूरा सहयोग करने के निर्देश भी दिए गए हैं। पत्रकारों की समस्याओं का निस्तारण जनपद स्तर पर ही हो सके, इसके लिए आईजी ने सक्षम अधिकारी नामित करने के निर्देश भी दिए हैं।

बता दें कि आईजी ने यह दिशा-निर्देश भारतीय पत्रकार वेलफेयर एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष दिवाकर सिंह की पहल पर दिए हैं। पत्रकारों के खिलाफ उत्पीड़न के बढ़ते मामलों को लेकर दिवाकर सिंह ने पिछले दिनों एक प्रतिनिधिमंडल के साथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और डीजीपी ओपी सिंह से मुलाकात कर अपनी समस्याएं बताई थीं। उन्होंने इस तरह के मामलों को संज्ञान में लाकर आवश्यक कदम उठाए जाने की मांग की थी। मुख्यमंत्री ने दिवाकर सिंह की बात को गंभीरता से लेते हुए इस बारे में सभी पुलिस अधीक्षकों को कड़े आदेश जारी करने के निर्देश दिए थे।

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