वरिष्ठ पत्रकार निशांत चतुर्वेदी के पिता का निधन

वरिष्ठ पत्रकार एवं ‘टीवी9 भारतवर्ष’ के सीनियर एग्जिक्यूटिव एडिटर निशांत चतुर्वेदी के पिता कमला कांत चतुर्वेदी का शनिवार को निधन हो गया है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 19 December, 2020
Last Modified:
Saturday, 19 December, 2020
Kamla Kant

वरिष्ठ पत्रकार एवं ‘टीवी9 भारतवर्ष’ के सीनियर एग्जिक्यूटिव एडिटर निशांत चतुर्वेदी के पिता कमला कांत चतुर्वेदी का शनिवार को निधन हो गया है। करीब 73 वर्षीय कमलाकांत चतुर्वदी लंबे समय से लिवर सिरोसिस की समस्या से पीड़ित थे और कुछ दिनों से नोएडा के विनायक अस्पताल में भर्ती थे, जहां पर शनिवार की सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली।

शनिवार की दोपहर परिजनों व शुभचिंतकों की उपस्थिति में उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। निशांत चतुर्वेदी के पिता के निधन पर मीडिया जगत से जुड़ी तमाम हस्तियों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है, साथ ही दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की है।

'बिजनेस वर्ल्ड' और 'एक्सचेंज4मीडिया' ग्रुप के चेयरमैन व एडिटर-इन-चीफ डॉ.अनुराग बत्रा ने अपनी फेसबुक पोस्ट में कमला कांत चतुर्वेदी को अपनी श्रद्धांजलि दी है और भगवान से पीड़ित परिवार को यह दुख सहन करने की शक्ति देने की प्रार्थना की है।

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लोकेश कटारिया ने Mattel Toys में इस बड़े पद से दिया इस्तीफा

कटारिया इस कंपनी के साथ अगस्त 2016 से जुड़े हुए थे।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 05 August, 2021
Last Modified:
Thursday, 05 August, 2021
Lokesh Kataria

‘मैटल टॉयज’ (Mattel Toys) कंपनी के मार्केटिंग एवं फ्रेंचाइजी प्रमुख लोकेश कटारिया के बारे में एक खबर सामने आई है। सूत्रों के हवाले से मिली खबर के अनुसार, उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।

कटारिया इस कंपनी के साथ अगस्त 2016 से जुड़े हुए थे। वहीं, इस कंपनी से पहले कटारिया ‘जियो’ (Jio) में बतौर जनरल मैनेजर (ब्रैंड कम्युनिकेशंस) अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे। 

इसके अलावा कटारिया पूर्व में ‘कोका-कोला’ (Coca-Cola), ‘एलजी’ (LG), ‘आईसीआईसीआई लोम्बार्ड’ (ICICI Lombard) और ‘सैमसंग’ (Samsung) में भी अपनी भूमिका संभाल चुके हैं।

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IIMC के नाम जुड़ी एक और बड़ी उपलब्धि

देश का सर्वश्रेष्ठ सरकारी मीडिया शिक्षण संस्थान बना, ‘आउटलुक-आइकेयर रैकिंग 2021’ में मिला पहला स्थान

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 05 August, 2021
Last Modified:
Thursday, 05 August, 2021
IIMC

देश की प्रतिष्ठित पत्रिका आउटलुक की ‘आउटलुक-आइकेयर रैकिंग 2021’ में भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी), नई दिल्ली को पत्रकारिता एवं जनसंचार के क्षेत्र में देश का सर्वश्रेष्ठ सरकारी मीडिया शिक्षण संस्थान घोषित किया गया है।

इस बारे में संस्थान के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी का कहना है, ‘आईआईएमसी परिवार के लिए यह बड़े ही गर्व का विषय है। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर और संस्थान के चेयरमैन अमित खरे के मार्गदर्शन और सहयोग से संस्थान अकादमिक गुणवत्ता के मानकों को स्थापित करने में सफल रहा है।‘ उन्होंने कहा कि ‘आईआईएमसी‘ के सभी श्रेष्ठ प्राध्यापकों, अधिकारियों और कर्मचारियों के अथक प्रयास से ही हम मीडिया शिक्षा के क्षेत्र में पहले स्थान पर हैं। इससे पहले इंडिया टुडे के 'बेस्ट कॉलेज सर्वे' में भी आईआईएमसी को देश का सर्वश्रेष्ठ मीडिया शिक्षण संस्थान घोषित किया गया था।

यह भी पढ़ें: IIMC बना देश का सर्वश्रेष्ठ मीडिया शिक्षण संस्थान

इसके साथ ही शैक्षणिक सत्र 2021-22 के लिए प्रवेश प्रक्रिया की जानकारी देते हुए प्रो. द्विवेदी ने कहा कि ‘आईआईएमसी‘ हिंदी पत्रकारिता, अंग्रेजी पत्रकारिता, विज्ञापन एवं जनसंपर्क, रेडियो एवं टेलीविजन पत्रकारिता, ओड़िया, मराठी, मलयालम और उर्दू पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा पाठ्यक्रम संचालित करता है। इन आठ पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 20 जुलाई, 2021 से शुरू हो गई है। आवेदन पत्र जमा करने की अंतिम तिथि 9 अगस्त, 2021 है। प्रवेश परीक्षा 29 अगस्त को आयोजित की जाएगी। परीक्षा परिणाम 10 सितंबर को घोषित किया जाएगा। ऑनलाइन आवेदन पत्र वेबसाइट iimc.nta.ac.in पर उपलब्ध है।

प्रो. द्विवेदी ने कहा कि किसी भी प्रकार की समस्या होने पर विद्यार्थी अकादमिक विभाग, भारतीय जन संचार संस्थान, अरुणा आसफ अली मार्ग, नई दिल्ली-110067 पर संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा दूरभाष नंबर 011-26742920, 26742940, 26742960 (एक्सटेंशन 233) पर भी संपर्क किया जा सकता है। मोबाइल नंबर 9818005590 के माध्यम से भी आवेदनकर्ता जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। अगर विद्यार्थी वॉट्सऐप के द्वारा जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं, तो मोबाइल नंबर 9871182276 पर संदेश भेज सकते हैं। इसके अलावा iimc@nta.ac.in पर ईमेल के द्वारा भी संपर्क किया जा सकता है।

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विदेशी पत्रकारों को लेकर पाकिस्तान के अनुरोध को भारत ने ठुकराया, यह है वजह

भारत में रहने वाले पांच विदेशी पत्रकारों के एक समूह को वाघा के जरिए इस्लामाबाद की यात्रा करने की अनुमति देने की पाकिस्तान की बात को भारत ने अस्वीकार कर दिया है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 05 August, 2021
Last Modified:
Thursday, 05 August, 2021
WAGHA544

भारत ने पाकिस्तान के उस अनुरोध को अस्वीकार कर दिया है, जिसमें यह मांग की गई थी कि भारत में रहने वाले पांच विदेशी पत्रकारों के एक समूह को वाघा के जरिए इस्लामाबाद की यात्रा करने की अनुमति दी जाए। दरअसल, भारतीय अधिकारियों ने ऐसा इसलिए किया क्योंकि कोरोना वायरस महामारी के कारण सीमा से जाना लगभग बंद है। हालांकि भारत के इस कदम की पाकिस्तान ने आलोचना की।

पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी, सूचना मंत्री फवाद चौधरी और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मोईद यूसुफ ने अलग-अलग ट्वीट में आरोप लगाया कि भारत में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और स्वतंत्र पत्रकारिता का ह्रास हो रहा है।

पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने कहा कि भारत द्वारा पांच अंतरराष्ट्रीय पत्रकारों को पाकिस्तान की यात्रा करने की अनुमति से इनकार करना ‘एक तानाशाही शासन के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और स्वतंत्र पत्रकारिता के ह्रास का एक और घातक संकेत है।’

पाकिस्तान के सूचना मंत्री फवाद चौधरी ने अपने ट्वीट में कहा कि पत्रकारों को 5 अगस्त को पीओके विधानसभा के एक सत्र में शामिल होना था।

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मोईद यूसुफ ने कहा, ‘ये एक आशंकित सरकार के कदम हैं, जिसके पास छिपाने के लिए बहुत कुछ है और वह नहीं चाहती कि दुनिया कश्मीर की वास्तविकता को देखे।’

बता दें कि वाघा सीमा पारगमन पॉइंट को शुरू में पिछले साल मार्च में कुछ हफ्तों के लिए बंद किया गया था और बाद में इसे बढ़ा दिया गया था। फिलहाल अभी यह राजनयिकों और कुछ अन्य को छोड़कर सभी श्रेणियों के यात्रियों के लिए बंद है। वर्तमान में भारत और पाकिस्तान के बीच उड़ान सेवाएं भी महामारी के कारण स्थगित हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस तरह की भी जानकारी सामने आयी है कि पाकिस्तान ने पत्रकारों को अफगानिस्तान में समग्र स्थिति पर शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बातचीत के लिए ले जाने की योजना बनाई थी। तालिबान को कथित रूप से अपना समर्थन जारी रखने के लिए अफगानिस्तान सरकार द्वारा इस्लामाबाद की बढ़ती आलोचना के बीच पाकिस्तान अफगानिस्तान में अपनी भूमिका को लेकर अंतरराष्ट्रीय विमर्श को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है।

घटनाक्रम से जुड़े लोगों में से एक ने कहा कि यह दौरा तीन से सात अगस्त के बीच तय किया गया था। अफगान पत्रकारों के एक समूह ने पिछले महीने पाकिस्तान का दौरा किया था और उन्होंने इस्लामाबाद में प्रधानमंत्री इमरान खान के साथ बातचीत की थी।

वहीं अन्य रिपोर्ट्स की मानें तो, कश्मीर का विशेष दर्जा निरस्त किए जाने के पांच अगस्त को दो साल पूरे होने पर कश्मीर और पाकिस्तान में विरोध प्रदर्शन की योजना बनाई गई है। भारत ने 2019 में कश्मीर का विशेष दर्जा रद्द कर दिया था।

भारत का कहना है कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 से संबंधित मुद्दा पूरी तरह से देश का आंतरिक मामला है।

नवनिर्वाचित विधानसभा ने भी इस अवसर पर एक सत्र की योजना बनाई है और पत्रकारों को कार्यवाही का गवाह बनना था।

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पेगासस मामले में एडिटर्स गिल्ड ने भी SC का किया रुख, SIT जांच की मांग

पेगासस जासूसी मामले (pegasus spyware case) को लेकर अब एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने भी सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 04 August, 2021
Last Modified:
Wednesday, 04 August, 2021
EGI

पेगासस जासूसी मामले (pegasus spyware case) को लेकर अब एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने भी सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। अपनी याचिका में एडिटर्स गिल्ड ने पेगासस जासूसी सॉफ्टवेयर के जरिये सरकार द्वारा पत्रकारों और अन्य पर कथित तौर पर नजर रखने की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआइटी) के गठन का अनुरोध किया है। साथ ही यह जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में कराए जाने की मांग की है।

एडिटर्स गिल्ड की ओर से अदालत से यह भी मांग की गई है कि वह स्पाइवेयर कॉन्ट्रैक्ट पर सरकार से डिटेल और टारगेटेड लोगों की लिस्ट भी मांगे। बता दें कि कोर्ट इस मामले में 5 अगस्त को सुनवाई करेगा।

एडिटर्स गिल्ड की याचिका में कहा गया कि पत्रकारों का काम जनता को सूचना देने और सरकार को जवाबदेह बनाने का काम सुनिश्चित करने का है। गिल्ड के सदस्यों और सभी पत्रकारों का कर्तव्य है कि वे राज्य की कार्रवाई और निष्क्रियता के लिए सूचना, स्पष्टीकरण और संवैधानिक रूप से वैध औचित्य की मांग करके सरकार की सभी शाखाओं को जवाबदेह ठहराएं।

गिल्ड ने कहा कि इस भूमिका को पूरा करने के लिए प्रेस की स्वतंत्रता को सुरक्षित रखा जाना चाहिए। याचिका में कहा गया, प्रेस की स्वतंत्रता पत्रकारों की रिपोर्टिंग में सरकार और उसकी एजेंसियों द्वारा हस्तक्षेप नहीं किए जाने पर निर्भर होती है। इसमें सूत्रों के साथ सुरक्षा एवं गोपनीयता के साथ बात करने की उनकी क्षमता, सत्ता के दुरुपयोग एवं भ्रष्टाचार की जांच, सरकारी अक्षमता को उजागर करना और सरकार के विरोध में या विपक्ष से बात करना शामिल है।

गिल्ड ने तर्क दिया कि भारत के नागरिकों को यह जानने का अधिकार है कि क्या सरकार संविधान के तहत अपने अधिकार की सीमाओं का अतिक्रमण कर रही है और उनके मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।

गौरलतलब है कि पेगासस जासूसी मामले में कई अन्य लोगों ने भी शीर्ष अदालत में याचिकाएं दायर की हैं, जिनमें वरिष्ठ पत्रकार एन. राम और शशि कुमार भी शामिल हैं। इसके अलावा भी कुछ पत्रकारों, वकील और राज्यसभा सांसद ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी लगाकर इस मामले की जांच कोर्ट की निगरानी वाली SIT या किसी स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच एजेंसी से करवाने की गुहार लगाई है। इनमें वकील एमएल शर्मा, CPI(M) से राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास, एक्टिविस्ट परंजॉय ठाकुरता सहित कुछ अन्य नाम शामिल हैं।

क्या है पेगासस केस

पिछले महीने के आखिर में कुछ मीडिया संगठनों के अंतरराष्ट्रीय समूह ने कहा था कि भारत में इजरायल की कंपनी के पेगासस स्पाइवेयर के जरिए सैंकड़ों मोबाइल नंबर्स की संभवत: निगरानी की गई, जिनमें दो मंत्री, 40 से अधिक पत्रकारों, तीन विपक्षी नेताओं के अलावा कार्यकर्ताओं के नंबर भी थे। वहीं सरकार ने इस मामले में विपक्ष के सभी आरोपों को खारिज कर दिया है।

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इस कार्यक्रम में डॉ. अनुराग बत्रा करेंगे वीर सांघवी के साथ चर्चा, आप भी हो सकते हैं शामिल

जाने-माने वरिष्ठ पत्रकार, स्तंभकार और लेखक वीर सांघवी अपनी नई किताब ‘A Rude Life‘ को लेकर चर्चा में हैं।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 04 August, 2021
Last Modified:
Wednesday, 04 August, 2021
Dr Annurag Batra Vir Sanghvi

जाने-माने वरिष्ठ पत्रकार, स्तंभकार और लेखक वीर सांघवी अपनी नई किताब ‘A Rude Life‘ को लेकर चर्चा में हैं। वीर सांघवी कॉलमिस्ट, टीवी होस्ट और फ़ूड क्रिटिक के तौर पर भी अपनी पहचान बना चुके हैं। उनकी नई किताब ‘A Rude Life‘  को लेकर प्रतिष्ठित संस्थान ‘एक्सचेंज4 मीडिया’ द्वारा एक वेबिनार का आयोजन किया जा रहा है।

इसके तहत ‘बिजनेस वर्ल्ड’ और ‘एक्सचेंज4मीडिया’ ग्रुप के चेयरमैन व एडिटर-इन-चीफ डॉ. अनुराग बत्रा वीर सांघवी से उनकी नई किताब और उनके अनुभवों के बारे में संवाद करेंगे। वीर सांघवी और डॉ.अनुराग बत्रा के बीच वर्चुअल तौर पर होने वाली इस चर्चा का समय शनिवार 14 अगस्त, 2021 की शाम पांच बजे रखा गया है।

आप भी यहां क्लिक कर रजिस्टर कर सकते हैं और इस संवाद का हिस्सा बन सकते हैं।

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मीडिया मुगल डॉ. सुभाष चंद्रा ने लिखा ओपन लेटर, नए वेंचर को लेकर कही ये बात

‘एस्सेल’ (Essel) ग्रुप के चेयरमैन डॉ. सुभाष चंद्रा ने मंगलवार को दूसरा ओपन लेटर जारी किया है।

Last Modified:
Tuesday, 03 August, 2021
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‘एस्सेल’ (Essel) ग्रुप के चेयरमैन डॉ. सुभाष चंद्रा ने मंगलवार को दूसरा ओपन लेटर जारी किया है। इस ओपन लेटर में उन्होंने ऋण समाधान प्रक्रिया (debt resolution process) और ऋणदाताओं को भुगतान करने के लिए उठाए गए कदमों का विवरण दिया है। डॉ. सुभाष चंद्रा ने इस ओपन लेटर के जरिये बताया है कि 43 ऋणदाताओं की 91 प्रतिशत से ज्यादा देनदारियों का भुगतान कर दिया गया है और बाकी के भुगतान की प्रक्रिया भी जारी है।

बता दें कि इससे पहले डॉ. चंद्रा ने 25 जनवरी को पहला ओपन लेटर लिखा था। उस लेटर में उन्होंने ‘आईएल एंड एफएस’ (IL&FS) मामले से उत्पन्न तरलता संकट के कारण उधारदाताओं के सामने आने वाली कठिनाइयों के लिए माफी मांगी थी और अपनी क्षमताओं के अनुसार पैसे चुकाने के लिए प्रतिबद्धता जताई थी। ऋणदाताओं के समर्थन और विश्वास की बदौलत डॉ. चंद्रा अपना वादा पूरा करने में कामयाब रहे हैं। हालांकि, महामारी के दौरान परिसंपत्ति विनिवेश प्रक्रिया (asset divestment process) को झटका लगा, जिसके कारण समग्र ऋण समाधान प्रक्रिया धीमी हो गई। डॉ. चंद्रा ने ऋणदाताओं का 100 प्रतिशत बकाया भुगतान करने के बाद दूसरा ओपन लेटर जारी करने की इच्छा व्यक्त की, हालांकि इस अभूतपूर्व समय के कारण इसमें देरी हुई।

ऋण समाधान से संबंधित प्रमुख बिंदुओं के बारे में जानकारी देते हुए डॉ. चंद्रा ने कहा, 'मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि हम वित्तीय तनाव की स्थिति से बाहर आ गए हैं और 43 ऋणदाताओं के 91 प्रतिशत बकाया का भुगतान कर दिया है। 88.3 प्रतिशत राशि का भुगतान किया जा चुका है, जबकि शेष 2.9 प्रतिशत भुगतान किए जाने की प्रक्रिया में है।  हम अपने कुल कर्ज के शेष 8.8% के निपटान के लिए सभी आवश्यक प्रयास कर रहे हैं।'

इस ओपन लेटर में डॉ. चंद्रा ने इस वित्तीय वर्ष के अंत तक या उससे पहले शेष बकाया राशि का निपटान करने की अपनी इच्छा जाहिर की है। इसके बाद डॉ. चंद्रा ने कहा कि उन्होंने जो भी निर्णय लिए हैं, वह परिवार के हित को देखते हुए हैं और इसका उन्हें कोई मलाल नहीं है। उन्होंने इंफ्रास्ट्रक्चर, वित्तीय सेवाओं और प्रिंट मीडिया व्यवसायों से बाहर निकलने की बात दोहराई है।

डॉ. चंद्रा ने डिजिटल ईकोसिस्टम में वीडियो के क्षेत्र में एक वेंचर शुरू करने के अपने अगले कदम के बारे में भी बताया है। 53 वर्षों के विशाल अनुभव के साथ, डॉ. चंद्रा अत्याधुनिक तकनीक के इस्तेमाल के द्वारा एक बार फिर डिजिटल वीडियो स्पेस में छा जाने के लिए तैयार हैं।

अपने नए वेंचर के बारे में डॉ. चंद्रा ने कहा है, ‘वीडियो बिजनेस में मुझे काफी अनुभव है। इसलिए अब मैं जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (ZEEL) के साथ किसी टकराव में पड़े बिना वीडियो इन डिजिटल स्पेस के साथ-साथ वीडियो स्पेस में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस एंड मशीन लर्निंग (AI/ML) में नए रास्ते और बिजनेस अवसर तलाश रहा हूं। मैं बहुत जल्द ही इसके बारे में विस्तार से जानकारी दूंगा और जल्द ही आप सभी एक और वेंचर की शुरुआत के साक्षी बनेंगे।’

 

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iTV नेटवर्क से जुड़े वरिष्ठ पत्रकार आलोक मेहता, मिली यह बड़ी जिम्मेदारी

जाने-माने संपादक और ‘एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया’ के पूर्व अध्यक्ष आलोक मेहता (पदमश्री) ने अपनी नई पारी की शुरुआत की है।

Last Modified:
Tuesday, 03 August, 2021
Alok Mehta

जाने-माने संपादक और ‘एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया’ के पूर्व अध्यक्ष आलोक मेहता (पदमश्री) ने देश के बड़े न्यूज ब्रॉडकास्टर्स में शुमार ‘आईटीवी नेटवर्क’ (iTV Network) के साथ अपनी नई पारी की शुरुआत की है। यहां उन्हें बड़ी जिम्मेदारी दी गई है। उन्हें नेटवर्क के हिंदी न्यूज चैनल ‘इंडिया न्यूज’ (india news) और दैनिक अखबार ‘आज समाज’ (Aaj Samaj) का एडिटोरियल डायरेक्टर नियुक्त किया गया है।

बता दें कि पत्रकारिता की लक्ष्मण रेखा की बारिकीयों को समझने वाले आलोक मेहता ने हिंदी पत्रकारिता को एक नई पहचान दी है। सात सितंबर 1952 को मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर में जन्मे आलोक मेहता पिछले लंबे समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। आलोक मेहता ने प्रिंट पत्रकारिता के साथ-साथ टेलीविजन और रेडियो के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय कार्य कर अपनी अलग पहचान बनाई है। दूरदर्शन, आकाशवाणी और अन्य टीवी चैनलों पर समसामयिक विषयों पर प्रसारित होने वाले कार्यक्रमों में उन्हें अकसर देखा और सुना जाता है। आलोक मेहता राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री के साथ व कई अन्य प्रतिनिधिमंडलों में शामिल होकर विदेश जाने का अवसर भी कई बार मिला है। वे 35 से ज्यादा देशों की यात्राएं कर चुके हैं।

आलोक का नाम उन पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने पत्रकारिता के साथ-साथ साहित्यिक विषयों पर भी अपनी रुचि दिखाई है। पत्रकारिता, पर्यटन, कविता, कहानियों और समसामयिक विषयों पर आलोक मेहता की करीब एक दर्जन पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। इनमें ‘नामी चेहरे-यादगार मुलाकातें’, ‘पत्रकारिता की लक्ष्मण रेखा’, ‘भारतीय पत्रकारिता’, ‘इंडियन जर्नलिज्म-कीपिंग इट क्लीन’, ‘सफर सुहाना दुनिया का’, ‘तब और अब’, ‘चिडिय़ा फिर नहीं चहकी’ (कहानी संग्रह), ‘भारत में पत्रकारिता', ‘राइन के किनारे’, ‘स्मृतियाँ ही स्मृतियाँ’, ‘राव के बाद कौन’, ‘आस्था का आँगन’, ‘सिंहासन का न्याय’, ‘अफगानिस्तान-बदलते चेहरे’ आदि प्रमुख हैं।

पत्रकारिता और साहित्य के क्षेत्र में आलोक मेहता के योगदान के लिए उन्हें भारत सरकार द्वारा भारतेंदु हरिश्चंद्र पुरस्कार, हिंदी अकादमी दिल्ली द्वारा साहित्यकार सम्मान, राष्ट्रीय सद्भावना पुरस्कार-1983, इंदिरा प्रियदर्शिनी सम्मान-1995, पत्रकारिता में उत्कृष्ट सम्मान-1995, राष्ट्रीय तुलसी सम्मान-1996, उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान द्वारा पत्रकारिता भूषण सम्मान-2006 और हल्दी घाटी सम्मान-2007 से सम्मानित किया जा चुका है। इसके अलावा वे नेशनल बुक ट्रस्ट, राजा राममोहन राय फाउंडेशन पुस्तकालय कोलकता के न्यासी और भारतीय प्रेस परिषद, प्रेस क्लब ऑफ इंडिया, इंडिया इंटरनेशनल सेंटर, वर्ल्ड मीडिया एसोसिएशन वाशिंगटन, भारत सरकार की शिक्षा नीति समिति, इंडिया नेशनल कमीशन फॉर को-ऑपरेशन विध युनेस्को आदि संस्थाओं से भी जुड़े रहे हैं।

हाल ही में आलोक मेहता ने ‘Power, Press & Politics’ नाम से नई किताब लिखी है। इस किताब में उन्होंने भारतीय मीडिया के सफर और इसकी चुनौतियों के बारे में विस्तार से बताया है।

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पेगासस जासूसी मामले में 5 अन्य पत्रकार पहुंचे सुप्रीम कोर्ट, किया ये अनुरोध

पेगासस जासूसी मामले में अब एक नया मोड़ आया है। दरअसल, कथित तौर पर जासूसी के लिए संभावित सूची में शामिल पांच पत्रकारों ने अब सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

Last Modified:
Tuesday, 03 August, 2021
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पेगासस जासूसी मामले (Pegasus scandal) में अब एक नया मोड़ आया है। दरअसल, कथित तौर पर जासूसी के लिए संभावित सूची में शामिल पांच पत्रकारों ने अब सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। इन्होंने कोर्ट से इसराइली जासूसी सॉफ्टवेयर पेगासस का उनके मोबाइल में उपयोग करने संबंधी मंजूरी और जांच से जुड़ी सामग्री का खुलासा करने के लिए केंद्र को निर्देश दिए जाने का अनुरोध किया है।

साथ ही कहा गया है कि कोर्ट इसके इस्तेमाल को अवैध घोषित करे। याचिका में कहा गया है कि सरकारी एजेंसियों द्वारा निगरानी के अनधिकृत उपयोग ने उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन किया है और वे पेगासस स्पाइवेयर के उपयोग से सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं। दरअसल, मोबाइल फोन की कथित हैकिंग से सीधे प्रभावित और व्यक्तिगत रूप से पीड़ित होने का दावा करने वाले व्यक्तियों की ओर से ये पहली याचिका है।

याचिकाकर्ताओं में परंजॉय गुहा ठाकुरता, SNM आब्दी, प्रेम शंकर झा, रूपेश कुमार सिंह और इप्सा शताक्शी शामिल हैं। इनका कहना है कि एमनेस्टी इंटरनेशनल द्वारा की गई उनके मोबाइल फोन की फोरेंसिक जांच से पता चला है कि इनको (मोबाइल फोन को) पेगासस का इस्तेमाल करके निशाना बनाया गया था। याचिकाकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि उनके पास यह विश्वास करने का ठोस कारण है कि भारत सरकार या किसी अन्य तीसरे पक्ष ने उनकी गहन जासूसी की और हैकिंग के लिए निशाना बनाया।

शीर्ष अदालत पहुंचने वाले वरिष्ठ पत्रकार परंजॉय गुहा ठाकुरता ने उच्चतम न्यायालय से जासूसी सॉफ्टवेयर के उपयोग को गैर-कानूनी और असंवैधानिक घोषित करने का अनुरोध किया और कहा कि पेगासस की मौजूदगी का भारत में वाक् एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार पर 'गंभीर प्रतिकूल प्रभाव' पड़ेगा।

वरिष्ठ पत्रकार ने अदालत से यह भी अनुरोध किया कि वह केंद्र सरकार को पेगासस जैसे जासूसी सॉफ्टवेयर या साइबर हथियारों से भारतीय नागरिकों को सुरक्षित करने के लिए उपयुक्त कदम उठाने का भी निर्देश दे।

इससे पहले तीन याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हो चुकी हैं, जिन पर प्रधान न्यायाधीश एनवी रमणा की अध्यक्षता वाली पीठ पेगासस मामले संबंधी तीन अलग-अलग याचिकाओं पर पांच अगस्त को सुनवाई करेगी। इनमें वरिष्ठ पत्रकार एन.राम और शशि कुमार की याचिका भी शामिल है, जिसमें पेगासस मामले की मौजूदा या सेवानिवृत्त न्यायाधीश से स्वतंत्र जांच कराने का अनुरोध किया गया है।

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कोविड से जान गंवाने वाले पत्रकारों के परिजनों को CM ने दिए 10 लाख रुपये के चेक

चेक वितरण कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के साथ ‘इंडिया टीवी’ (India TV) के चेयरमैन और एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा भी मौजूद थे।

Last Modified:
Saturday, 31 July, 2021
CM YOGI

कोरोनावायरस (कोविड-19) की वजह से जान गंवाने वाले प्रदेश के पत्रकारों के परिवारों को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी है। लखनऊ के लोक भवन ऑडिटोरियम में शनिवार की दोपहर 12:00 बजे आयोजित एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने दिवंगत पत्रकारों के आश्रितों को आर्थिक सहायता के चेक प्रदान किए।

चेक वितरण कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के साथ ‘इंडिया टीवी’ (India TV) के चेयरमैन और एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा भी मौजूद थे। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा, ‘पत्रकारों को हर संभव सहायता प्रदान करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है और उन्हें प्रोत्साहित करना जारी रखेगी।’

गौरतलब है कि योगी आदित्यनाथ ने हिंदी पत्रकारिता दिवस (30) पर कोरोनावायरस (कोविड-19) की वजह से जान गंवाने वाले प्रदेश के पत्रकारों के परिवारों को 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया था। मुख्यमंत्री का निर्देश मिलने के बाद प्रदेश का सूचना विभाग कोविड-19 की वजह से जान गंवाने वाले पत्रकारों का ब्यौरा जुटाने में लग गया था, ताकि उनके परिवारों को जल्द से जल्द आर्थिक सहायता प्रदान की जा सके। इसके लिए पीड़ित परिवारों से प्रार्थना पत्र मांगे गए थे।

बता दें कि कोरोना काल में कवरेज के दौरान कई पत्रकार कोरोना से संक्रमित हो गए थे, जिनमें कई का निधन हो गया है। ऐसे में उनके परिजनों के सामने भरण-पोषण की मुश्किल आ गई है। इसे देखते हुए ही योगी सरकार ने यह फैसला किया है। वहीं, अपर मुख्य सचिव (सूचना) नवनीत सहगल का कहना है कि कुछ प्रार्थना पत्र देरी से मिले हैं, लेकिन उन पीड़ित परिवारों को भी सहायता राशि दी जाएगी।

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प्रसार भारती के पूर्व सीईओ जवाहर सरकार के राज्यसभा पहुंचने का रास्ता हुआ साफ!

पूर्व नौकरशाह और ‘प्रसार भारती’ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) रहे जवाहर सरकार को राज्यसभा के लिए नॉमिनेट किया गया है।

Last Modified:
Friday, 30 July, 2021
jawahar Sircar

पूर्व नौकरशाह और ‘प्रसार भारती’ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) रहे जवाहर सरकार को राज्यसभा के लिए नॉमिनेट किया गया है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने उन्हें पार्टी की ओर से नॉमिनेट किया है। इस बारे में तृणमूल कांग्रेस की ओर से एक ट्वीट भी किया गया है।

इस ट्वीट में कहा गया है, ‘हमें संसद के उच्च सदन में जवाहर सरकार को मनोनीत करते हुए प्रसन्नता हो रही है। सरकार ने लगभग 42 साल सार्वजनिक सेवा में बिताए और प्रसार भारती के सीईओ भी रह चुके हैं। सार्वजनिक सेवा में उनका अमूल्य योगदान हमें अपने देश की और भी बेहतर सेवा करने में मदद करेगा।’

यह सीट तृणमूल कांग्रेस के पूर्व सांसद दिनेश त्रिवेदी द्वारा खाली की गई है। बता दें कि फरवरी में राज्यसभा से इस्तीफा देने वाले त्रिवेदी बीजेपी में शामिल हो गए हैं। जवाहर सरकार ने कोलकाता में विधानसभा में नामांकन-पत्र दाखिल कर दिया है।

इधर, भारतीय जनता पार्टी ने  गुरुवार को घोषणा की कि वह पश्चिम बंगाल से राज्यसभा की एक सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए कोई उम्मीदवार खड़ा नहीं करेगी। बीजेपी इस फैसले के बाद जवाहर सरकार के निर्विरोध निर्वाचित होने का रास्ता साफ हो गया है। सोमवार को इसकी घोषणा की जाएगी। 

पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि बीजेपी राज्यसभा के लिए किसी भी उम्मीदवार को नामित नहीं करेगी। नंदीग्राम से बीजेपी विधायक अधिकारी ने ट्विटर पर कहा, ‘आज पश्चिम बंगाल में राज्यसभा उपचुनाव के नामांकन के लिए आखिरी तारीख है। बीजेपी इस सीट के लिए कोई उम्मीदवार खड़ा नहीं कर रही है। चुनाव का नतीजा हम सभी को पता है...इस अविवेकशील सरकार के खिलाफ हमारी लड़ाई जारी रहेगी।’

दरअसल, शुक्रवार को विधानसभा सचिवालय में नामांकन पत्र की जांच की गई। राज्य सभा उपचुनाव के अधिकारियों ने नामांकन पत्र को वैध पाया। चूंकि किसी अन्य उम्मीदवार ने नामांकन पत्र दाखिल नहीं किया है, लिहाजा इस वजह से जवाहर सरकार का निर्विरोध चुना जाना तय है। सोमवार को तीन बजे नामांकन पत्र वापस लेने की अंतिम तिथि है। उसके बाद उन्हें निर्विरोध विजयी घोषित कर दिया जाएगा।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस बारे में जवाहर सरकार का कहना है,’ मैं एक नौकरशाह था। मैं राजनीतिक व्यक्ति नहीं हूं, लेकिन, मैं लोगों के विकास के लिए काम करूंगा और जनता से जुड़े मुद्दों को संसद में उठाउंगा।’

69 वर्षीय जवाहर सरकार कोलकाता के रहने वाले हैं। जवाहर सरकार ने राजनीति शास्त्र में ऑनर्स के साथ स्नातक, समाज शास्त्र में एक एम.ए और इतिहास में और एक एम.ए किया है। वह यूनाइटेड किंगडम के कैंब्रिज तथा ससेक्स विश्वविद्यालयों से प्रशिक्षित होने के अलावा न्यूयार्क विश्वविद्यालय में शिक्षा ग्रहण कर चुके हैं।

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