सामने आया पुलिसकर्मियों का अमानवीय चेहरा, रिपोर्टिंग के दौरान ET Now के पत्रकार को पीटा

देश में 21 दिन के लॉकडाउन के दौरान मीडियाकर्मी को बहाल रखा गया है। बावजूद इसके रिपोर्टिंग के दौरान पुलिसकर्मियों द्वारा पत्रकारों से बदसलूकी के मामले सामने आ रहे हैं।

Last Modified:
Thursday, 26 March, 2020
uttkarsh

कोरोना वायरस के चलते पूरे देश में 21 दिन का लॉकडाउन है। लेकिन इस दौरान कुछ जरूरी सेवाओं और लोगों को बहाल रखा गया है, जिनमें मीडियाकर्मी भी शामिल हैं। बावजूद इसके लॉकडाउन पर रिपोर्टिंग के दौरान पुलिसकर्मियों द्वारा पत्रकारों से बदसलूकी के मामले सामने आ रहे हैं। ऐसा ही ताजा मामला महाराष्ट्र के ठाणे से सामने आया है।

बता दें कि अंग्रेजी न्यूज चैनल ‘ईटी नाउ’ (ET Now) के डिप्टी न्यूज एडिटर उत्कर्ष चतुर्वेदी ने बुधवार को आरोप लगाया कि ठाणे जिले में लॉकडाउन पर रिपोर्टिंग के दौरान पुलिसकर्मियों ने उनके साथ मारपीट की।

अपने आरोप में उत्कर्ष चतुर्वेदी ने कहा कि पुलिसकर्मिंयों को अपना प्रेस कार्ड भी दिखाया लेकिन पुलिस वालों ने फिर भी उनके साथ मारपीट की। उन्होंने बताया कि यह घटना ठाणे ग्रामीण पुलिस क्षेत्र के तहत पश्चिम उपनगर में दहिसर पुलिस चौकी के पास हुई।

उत्कर्ष चतुर्वेदी ने ट्विटर के जरिए मुंबई पुलिस और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को टैग करते हुए इस बात की जानकारी दी। उन्होंने घटना के बारे में ठाणे ग्रामीण के एसपी शिवाजी राठौड़ को भी सूचित किया है, लेकिन इस संबंध में की गयी कॉल और भेजे गए मैसेज का उन्होंने जवाब नहीं दिया।

 

 

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RSTV के पूर्व एडिटर-इन-चीफ राहुल महाजन को दूरदर्शन में मिली बड़ी जिम्मेदारी

नेशनल पब्लिक ब्रॉडकास्टर ‘प्रसार भारती’ (Prasar Bharti) ने ‘राज्यसभा टीवी’ (RSTV) के पूर्व एडिटर-इन-चीफ राहुल महाजन को दूरदर्शन में बतौर हेड (कंटेंट ऑपरेशंस) के पद पर नियुक्त किया है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 21 September, 2020
Last Modified:
Monday, 21 September, 2020
Impact

नेशनल पब्लिक ब्रॉडकास्टर ‘प्रसार भारती’ (Prasar Bharti) ने ‘राज्यसभा टीवी’ (RSTV) के पूर्व एडिटर-इन-चीफ राहुल महाजन को दूरदर्शन में बतौर हेड (कंटेंट ऑपरेशंस) के पद पर नियुक्त किया है। बता दें कि राहुल महाजन ने करीब एक माह पूर्व राज्यसभा टीवी (RSTV) के एडिटर-इन-चीफ पद से इस्तीफा दे दिया था।    

राहुल महाजन को मीडिया के क्षेत्र में काम करने का करीब 28 साल का अनुभव है। इनमें से 25 साल उन्होंने अलग-अलग मीडिया संस्थानों में काम किया है। वह प्रसार भारती में कंसल्टिंग एडिटर भी रह चुके हैं। करीब 48 वर्षीय राहुल महाजन लगभग12 साल तक संसद को कवर कर चुके हैं।     

शिमला के रहने वाले राहुल महाजन ने हिमाचल यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की है। उन्होंने ‘इंडियन एक्सप्रेस’ से अपने करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद ‘जी न्यूज’, ‘आजतक’, ‘स्टार न्यूज’, व ‘न्यूज24’ जैसे बड़े चैनलों में रहे। 

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NBA ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया एफिडेविट, उठाई ये मांग

‘न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन’ ने सुप्रीम कोर्ट से गुजारिश की है कि उनके संगठन को आधिकारिक तौर पर कुछ खास अधिकार दिए जाएं

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 21 September, 2020
Last Modified:
Monday, 21 September, 2020
NBA

टेलिविजन प्रसारण कंपनियों के संगठन ‘न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन’ (एनबीए) ने सुप्रीम कोर्ट से गुजारिश की है कि उनके संगठन को आधिकारिक तौर पर एक अलग मान्यता दी जाए, ताकि सभी न्यूज चैनल्स (चाहे वह इसके सदस्य हों अथवा नहीं) इसके दिशा-निर्देशों का पालन करने और न मानने पर पेनाल्टी का सामना करने के लिए बाध्य हों।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एनबीए की ओर से यह भी कहा गया है कि सरकार द्वारा किसी भी न्यूज चैनल को ब्रॉडकास्टिंग की अनुमति देते समय उसके स्व-नियामक तंत्र (self-regulatory mechanism) के लिए उत्तरदायी होने की शर्त भी होनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट में अपना एफिडेविट जमा करते हुए एनबीए ने उन तरीकों की सिफारिश की है, जिससे ‘न्यूज ब्रॉडकास्टिंग स्टैंडर्ड एसोसिएशन (एनबीएसए)’ के स्व-नियामक तंत्र को मजबूत किया जा सकता है।

बता दें कि एनबीएसए स्वत्रंत निकाय है, जिसका गठन ‘न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन’ ने प्रसारण के खिलाफ आई शिकायत पर विचार करने और फैसला लेने के लिए किया है। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस एके सीकरी के पास फिलहाल इसकी कमान है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, एनबीए ने सुप्रीम कोर्ट में यह हलफनामा ‘सुदर्शन न्यूज’ द्वारा सिविल सेवाओं में अल्पसंख्यक समुदाय के प्रवेश से जुड़े एक शो को लेकर हुए विवाद बाद दिया है। न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस निकाय को ‘टूथलेस’ कहते हुए शुक्रवार को एनबीए को कुछ अधिकार देने के लिए सुझाव मांगे थे, ताकि यह कार्यक्रम कोड का उल्लंघन करने अथवा कुछ गलत प्रसारित करने पर टीवी चैनल्स के खिलाफ कार्रवाई कर सके।

एनबीए ने अपने हलफनामे में मांग की है कि उसकी आचार संहिता को केबल टीवी रूल्स के तहत प्रोग्राम कोड का हिस्सा बनाकर वैधानिक मान्यता प्रदान की जाए, ताकि ये नियम सभी न्यूज चैनल्स पर लागू हो सकें।

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Paytm की गूगल प्ले स्टोर पर हुई वापसी, 4 घंटे बाद लिया गया फैसला

पेमेंट ऐप ‘पेटीएम’ (Paytm) की गूगल प्ले स्टोर पर वापसी हो गई है और यूजर्स इसे अब डाउनलोड कर सकते हैं

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 19 September, 2020
Last Modified:
Saturday, 19 September, 2020
Paytm-Google

पेमेंट ऐप ‘पेटीएम’ (Paytm) की गूगल प्ले स्टोर पर वापसी हो गई है और यूजर्स इसे अब डाउनलोड कर सकते हैं। इसकी जानकारी पेटीएम ने अपने ट्विटर अकाउंट के जरिए दी। बीते शुक्रवार को गूगल ने यह ऐप प्ले स्टोर से हटा दिया था, हालांकि इसकी वजह तब सामने नहीं आई थी। कंपनी ने गूगल पर कॉम्पिटिशन रूल तोड़ने का आरोप लगाया।

शुक्रवार दोपहर गूगल ने प्ले स्टोर से पेटीएम ऐप को हटाने की जानकारी दी थी। इसके बाद पेटीएम ने ट्वीट किया था कि उसका एंड्रॉयड ऐप नए डाउनलोड या अपडेट के लिए गूगल प्ले स्टोर पर अस्थायी तौर पर उपलब्ध नहीं है। हम जल्द ही वापसी करेंगे। कंपनी ने यूजर्स से कहा था कि आपकी राशि पूरी तरह से सुरक्षित है। आप पेटीएम ऐप को सामान्य तरह से इस्तेमाल कर सकते हैं। हालांकि, गूगल प्ले स्टोर से बैन होने के महज चार घंटे बाद ही पेटीएम की प्ले स्टोर पर दोबारा वापसी हो गई।

बता दें कि पेमेंट ऐप पेटीए की ओर से ऑफर किए जा रहे ‘पेटीएम गेमिंग’ (Paytm Gaming) ऐप को भी प्ले स्टोर से हटा दिया गया था, जिसके बाद कंपनी ने ट्वीट कर यूजर्स को भरोसा दिलाया कि उनके पैसे पूरी तरह सेफ हैं और जल्द ही ऐप प्ले स्टोर पर लौट आएगा।

भारत में लोकप्रिय क्रिकेट टूर्नामेंट इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) शुरू होने जा रहा है और इसके साथ ही ढेरों ऐसे ऐप्स खूब डाउनलोड होने लगते हैं, जिनपर गेसवर्क करके और तुक्का लगाकर यूजर्स पैसे जीत सकते हैं।

वैसे तो गूगल ने पेटीएम ऐप के बारे में कुछ नहीं कहा लेकिन कंपनी की ओर से हाल ही में सट्टेबाजी (गैंबलिंग) से जुड़े नियमों का उल्लंघन करने से पर एक अपडेटेड ब्लॉग पोस्ट शेयर किया गया है। एंड्रॉयड सिक्योरिटी और प्राइवेसी, प्रॉडक्ट के वाइस प्रेजिडेंट सुजेन फ्रे ने इस बारे में लिखा  कि हम ऑनलाइन कसीनो की अनुमति नहीं देते या किसी भी ऐसे ऐप को सपोर्ट नहीं करते जो सट्टेबाजी से जुड़ा हो और स्पोर्ट्स पर तुक्का लगाने पर गेम्स ऑफर करता हो। इसमें वे ऐप्स भी शामिल हैं, जो पैसे या प्राइज जितवाने का लालच देकर यूजर्स को किसी सट्टेबाजी की वेबसाइट पर भेजते हैं। यानी गूगल ऐसे कोई भी ऐप्स प्ले स्टोर पर नहीं चाहता, जिनकी मदद से सट्टेबाजी की जा सके या जुआ खेला जा सके।

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गंभीर आरोपों में पत्रकार गिरफ्तार, मजिस्ट्रेट ने छह दिन की रिमांड पर भेजा

पीतमपुरा निवासी इस फ्रीलॉन्स पत्रकार को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने गिरफ्तार किया है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 19 September, 2020
Last Modified:
Saturday, 19 September, 2020
Arrest

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने फ्रीलान्स पत्रकार राजीव शर्मा को गिरफ्तार किया है। उन्हें ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट के तहत गिरफ्तार किया गया है। उन्हें छह दिनों के लिए रिमांड पर भेज दिया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दिल्ली में पीतमपुरा निवासी राजीव शर्मा के पास से डिफेंस से जुड़े क्लासीफाइड डॉक्यूमेंट मिले हैं। राजीव शर्मा की गिरफ्तारी के बारे में न्यूज एजेंसी ‘एएनआई’(ANI) ने एक ट्वीट भी किया है, जिसे आप यहां देख सकते हैं।  

बताया जाता है कि संदिग्ध गतिविधि की सूचना पर पुलिस लंबे समय से राजीव शर्मा के फोन की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) जुटा रही थी। इसके बाद पुलिस ने 14 सितंबर को राजीव शर्मा को गिरफ्तार कर लिया। 15 सितंबर को राजीव शर्मा को मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया, जहां उन्हें छह दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है। राजीव की जमानत याचिका पर 22 सितंबर को पटियाला हाउस कोर्ट में सुनवाई हो सकती है।

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, राजीव शर्मा कथित रूप से अपने देश से जुड़ी कुछ संवेदनशील सूचनाएं चीन की खुफिया एजेंसी को सौंप रहे थे। पुलिस ने अब चीन की एक महिला व उसके नेपाली सहयोगी को भी गिरफ्तार कर लिया है, जिन्होंने शैल कंपनियों द्वारा उन्हें काफी पैसा दिया था। 

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मीडिया को लेकर पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी ने कही ये बात

‘गवर्नेंस नाउ’ (Governance Now) के एमडी कैलाशनाथ अधिकारी के साथ विशेष बातचीत में पूर्व सूचना प्रसारण मंत्री ने तमाम पहलुओं पर अपने विचार रखे

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 18 September, 2020
Last Modified:
Friday, 18 September, 2020
Manish Tewari

पूर्व सूचना प्रसारण मंत्री और लोकसभा सदस्य मनीष तिवारी ने मीडिया पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि मीडिया सरकार के इशारे पर काम कर रही है। ‘गवर्नेंस नाउ’ (Governance Now) के एमडी कैलाशनाथ अधिकारी के साथ एक बातचीत में न्यूज चैनल्स पर बरसते हुए मनीष तिवारी ने कहा कि मीडिया अब लोक हितैषी नहीं रह गई है।

पब्लिक पॉलिसी प्लेटफॉर्म पर ‘विजिनरी टॉक सीरीज’ (Visionary Talk series) के तहत होने वाले इस वेबिनार के दौरान मनीष तिवारी का यह भी कहना था, ‘समय के साथ मीडिया सरकार के इशारे पर काम करने वाली बनती जा रही है और भारत में प्रेस की स्वतंत्रता एक मिथक है।’

कुछ आंकड़ों का हवाला देते हुए मनीष तिवारी ने कहा कि देश में लगभग 950 मिलियन लोगों के यहां घरों पर टीवी है। इनमें से लगभग 93 प्रतिशत न्यूज चैनल्स नहीं देखते हैं, केवल सात प्रतिशत ही न्यूज और करेंट अफेयर्स चैनल्स देखते हैं और मौजूदा करीब 391 न्यूज व करेंट अफेयर्स चैनल्स उसी सात प्रतिशत से पैसा कमाने की कोशिश कर रहे हैं।

इसके साथ ही मनीष तिवारी का यह भी कहना था कि मीडिया को अपने रेवेन्यू मॉडल्स को दोबारा से देखने की जरूरत है और यह पूरी तरह से विज्ञापन संचालित मॉडल नहीं हो सकता है। यह पूछे जाने पर कि क्या रेवेन्यू मॉडल को पॉलिसी से रेगुलेट किया जा सकता है, तिवारी ने कहा कि जब वे सूचना-प्रसारण मंत्री थे तो उन्होंने टीआरपी को लेकर पॉलिसी फ्रेमवर्क के जरिये साफ किया था कि टीआरपी बनाने वाली कंपनियों को किस तरह रेगुलेट किए जाने की जरूरत है।

उन्होंने कहा, ‘यदि आप अपना रेवेन्यू मॉडल सही करना चाहते हैं और चाहते हैं कि लोग अखबार व टीवी चैनल के सबस्क्रिप्शन के लिए ज्यादा पैसा दें तो आपको उन्हें बेहतर कंटेंट पेश करना होगा। आपको अपने प्रॉडक्ट का उचित मूल्य निर्धारण शुरू करना होगा और लोगों को भुगतान करने की आदत डालनी होगी, लेकिन जब आप विज्ञापन पर निर्भर रहते हैं, तब यह फेक करेंसी से मापा जाएगा, जिसे टीआरपी कहते हैं।’

पूर्व मंत्री का कहना था कि प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की तरह सोशल मीडिया भी समान रूप से खराब है। उन्होंने कहा कि प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की तरह सोशल मीडिया भी पूरी तरह से विज्ञापन पर आधारित मॉडल है। विज्ञापन पर आधारित मॉडल की वजह से आमतौर पर क्वालिटी कंटेंट तैयार नहीं हो पाता है।

पेज न्यूज के मुद्दे पर पूर्व मंत्री ने कहा कि जब वह प्रेस एंड रजिस्ट्रेशन ऑफ बुक्स एक्ट, 1867 में संशोधन करने की कोशिश कर रहे थे और विशेष रूप से पेड न्यूज और दंड प्रावधानों को धाराओं के तहत लाने की कोशिश कर रहे थे, तब मीडिया इंडस्ट्री ने इसे इतना पीछे धकेल दिया कि यह बिल आज तक अस्तित्व में नहीं आ सका है। उनका कहना था, ‘न्यूज और करेंट अफेयर्स मीडिया का काम लोगों को शिक्षित व जागरूक करना है। इसका काम तथ्यों को सही रूप मं पेश करना व जनहित को देखते हुए गंभीरता लाना है।’

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मुश्किल घड़ी में महिला पत्रकार को राज्य सरकार ने यूं दिया ‘सहारा’

मणिपुर सरकार ने एक महिला पत्रकार को उपचार के लिए एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 18 September, 2020
Last Modified:
Friday, 18 September, 2020
Soniya Devi

मणिपुर सरकार ने एक महिला पत्रकार को उपचार के लिए एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस बारे में सरकार की ओर से एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि ‘Poknapham’ अखबार की रिपोर्टर‘एस.सोनिया देवी’(Sorensangbam Soniya Devi)को यह वित्तीय सहायता‘मणिपुर स्टेट जर्नलिस्ट्स वेलफेयर स्कीम’(MSJWS)के तहत दी गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, सूचना और जनसंपर्क निदेशालय के उप निदेशक, एल अशोक कुमार ने गुरुवार को सोनिया देवी को एक लाख रुपये का चेक सौंप दिया है।

बता दें कि ‘मणिपुर स्टेट जर्नलिस्ट्स वेलफेयर स्कीम’ मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने 30 जून 2017 को शुरू की थी। राज्य सरकार ने इस योजना के लिए 10 करोड़ रुपये का योगदान दिया है। इस योजना के तहत किसी पत्रकार के निधन पर पीड़ित परिजनों को दो लाख रुपये तक की आर्थिक मदद उपलब्ध कराई जाती है।

स्थायी रूप से दिव्यांग होने के मामले में भी पत्रकार को दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता की जाती है। बड़ी बीमारियों के इलाज के लिए एक लाख रुपये और दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल होने की स्थिति में अस्पताल में भर्ती होने पर 50,000 रुपये प्रदान किए जाते हैं। बताया जाता है कि योजना शुरू होने के बाद से 17 पत्रकारों को इसके तहत आर्थिक मदद दी जा चुकी है।

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TRAI चेयरमैन ने ब्रॉडकास्टिंग सेक्टर के लिए जताई इस बात की जरूरत

'टेलिकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया’ के चेयरमैन आरएस शर्मा का कहना है कि पूंजी जुटाने से अपने इक्विपमेंट को अपग्रेड कर सकेगा यह सेक्टर

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 18 September, 2020
Last Modified:
Friday, 18 September, 2020
TRAI CHAIRMAN

‘टेलिकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया’ (TRAI) के चेयरमैन आरएस शर्मा का कहना है ब्रॉडकास्टिंग सेक्टर को बुनियादी ढांचा (infrastructure status) दिए जाने की जरूरत है, ताकि वह पूंजी जुटाने (capital borrowing) जैसी सुविधाओं का लाभ उठाने में सक्षम हो सके।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्राई चेयरमैन ने यह भी कहा है कि सरकार को टीवी बिजनेस में इंफ्रॉस्ट्रक्चर को शेयर करने की अनुमति दिए जाने के बारे में भी विचार करने की जरूरत है। रिपोर्ट्स के अनुसार, पूंजी जुटाने से टीवी प्लेयर्स अपने उपकरणों (equipments) और इंफ्रॉस्ट्रक्चर को अपग्रेड कर पाएंगे।

इसके साथ ही उन्होंने ब्रॉडकास्टिंग सेवाओं के लिए हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर की मैन्युफैक्चरिंग और रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए ‘व्यापक नीति दिशानिर्देश’ (comprehensive policy guideline) जारी किए जाने की भी सिफारिश की है। शर्मा के अनुसार, ‘सरकार को प्रसारण सेवाओं के लिए हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर के रिसर्च और मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए एक व्यापक नीति दिशानिर्देश जारी करने पर भी विचार करना चाहिए।’

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विधानसभा चुनाव में पत्रकारों को भी टिकट देगी यह पॉलिटिकल पार्टी

पार्टी अध्यक्ष के आवास पर हुई पदाधिकारियों की बैठक में इस आशय के प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पास कर दिया गया है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 18 September, 2020
Last Modified:
Friday, 18 September, 2020
Election

बिहार में विधानसभा चुनाव नजदीक हैं। राज्य में 243 विधानसभा सीटों पर चुनाव के लिए चुनाव आयोग जल्द ही तारीखों की घोषणा कर सकता है। ऐसे में तमाम राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारी तेज कर दी है। इसके तहत लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) सुप्रीमो और जमुई से सांसद चिराग पासवान ने घोषणा की है कि इस बार उनकी पार्टी पत्रकारों को भी विधानसभा का टिकट देगी और उन्हें चुनाव मैदान में उतारेगी।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बुधवार को चिराग पासवान ने अपने आवास पर चुनाव की तैयारियों के संबंध में पार्टी नेताओं की बैठक बुलाई थी। बैठक में तमाम मुद्दों के साथ पत्रकारों को भी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ाने का प्रस्ताव रखा गया, जिस पर बैठक में मौजूद पार्टी पदाधिकारियों की ओर से मुहर लगा दी गई।

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अभिनेत्री की इस याचिका पर दिल्ली HC ने MIB, PCI व प्रसार भारती को दिया नोटिस

सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में ड्रग्स एंगल की जांच के दौरान अपना नाम सामने आने के बाद अभिनेत्री रकुलप्रीत सिंह ने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 17 September, 2020
Last Modified:
Thursday, 17 September, 2020
Delhi High Court

सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में ड्रग्स एंगल की जांच के दौरान अपना नाम सामने आने के बाद अभिनेत्री रकुलप्रीत सिंह ने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। इस दौरान उन्होंने रिया चक्रवर्ती ड्रग मामले से उन्हें जोड़ने वाली मीडिया रिपोर्टिंग पर रोक लगाने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि मीडिया में चलाई जा रही खबरों के जरिए उनकी इमेज खराब करने की कोशिश की जा रही है।

रकुलप्रीत ने याचिका में कहा है कि रिया चक्रवर्ती मामले में उनका नाम सामने आने के बाद मीडिया ट्रायल शुरू हो गया है। रकुलप्रीत ने कोर्ट से गुहार लगाई है कि वह सूचना-प्रसारण मंत्रालय को निर्देश दें कि उनके खिलाफ मीडिया में कवरेज बंद की जाए।

अपनी याचिका में ​रकुलप्रीत ने बताया कि उन्हें शूटिंग के दौरान पता चला कि रिया चक्रवर्ती ने ड्रग्स मामले में उनका और सारा अली खान का नाम लिया है, जिसके बाद से मीडिया में उनको लेकर कई तरह की गलत खबरें चलाई जाने लगी हैं।  

हालांकि उनकी इस याचिका पर जस्टिस नवीन चावला ने केंद्रीय सूचना-प्रसारण मंत्रालय, प्रसार भारती और प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया को नोटिस जारी किया तथा जवाब मांगा है। अदालत ने अधिकारियों से कहा कि वे अभिनेत्री रकुल की याचिका को अभिवेदन मानें और सुनवाई की अगली तारीख 15 अक्टूबर से पहले इस पर फैसला लें।

हाई कोर्ट ने कहा कि उसे उम्मीद है कि रिया चक्रवर्ती से जुड़े मामले में रकुलप्रीत सिंह से संबंधित खबरों में मीडिया संयम बरतेगा। कोर्ट ने उम्मीद जताई है कि याचिकाकर्ता से संबंधित खबरें बनाते वक्त मीडिया प्रतिष्ठान अपनी खबरों में संयम बरतेंगे, केबल टीवी नियमों, प्रोग्राम कोड तथा अन्य दिशा-निर्देशों का पालन करेंगे।

अभिनेत्री ने अपनी याचिका में यह भी दावा किया है कि रिया चक्रवर्ती अपना वह बयान वापस ले चुकी है जिसमें उसने कथित तौर पर याचिकाकर्ता का नाम लिया था, उसके बावजूद मीडिया में आ रही खबरों में उन्हें इस मामले से जोड़ा जा रहा है। हाई कोर्ट में अभिनेत्री का प्रतिनिधित्व वकील अमन हिंगोरानी ने किया।

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वरिष्ठ पत्रकार विनोद दुआ को राहत, SC ने अगले आदेश तक गिरफ्तारी पर लगाई रोक

सुप्रीम कोर्ट ने राजद्रोह के मामले घिरे वरिष्ठ पत्रकार विनोद दुआ को एक बार फिर राहत दी है। कोर्ट ने उनके खिलाफ गिरफ्तारी से मिले अंतरिम सुरक्षा की अवधि को अगली सुनवाई तक बढ़ा दिया है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 17 September, 2020
Last Modified:
Thursday, 17 September, 2020
vinod-dua

सुप्रीम कोर्ट ने राजद्रोह के मामले घिरे वरिष्ठ पत्रकार विनोद दुआ को एक बार फिर राहत दी है। कोर्ट ने उनके खिलाफ गिरफ्तारी से मिले अंतरिम सुरक्षा की अवधि को अगली सुनवाई तक बढ़ा दिया है। कोर्ट ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में उनके खिलाफ दर्ज राजद्रोह के मामले में 18 सितंबर को अगली सुनवाई तक कोई कार्रवाई नहीं होनी चाहिए।

न्यायमूर्ति उदय उमेश ललित की अध्यक्षता वाली शीर्ष अदालत की तीन न्यायाधीशों की पीठ ने बुधवार को एक अंतरिम आदेश देते हुए कहा कि मामले में अगली सुनवाई तक उन्हें गिरफ्तार नहीं किया जा सकता है। दुआ के खिलाफ उनके यूट्यूब कार्यक्रम को लेकर भाजपा के एक स्थानीय नेता ने राजद्रोह का मामला दर्ज कराया है।

अभियोजन पक्ष ने कोर्ट में कहा, 'विनोद दुआ पर अपने यू-ट्यूब कार्यक्रम, 'द विनोद दुआ शो' में कुछ बयान देने का आरोप हैं, जो कथित तौर पर सांप्रदायिक घृणा को उकसाने की प्रकृति के थे और शांति भंग करने और सांप्रदायिक विद्वेष के कारण हो सकते हैं।'

पत्रकार पर राजद्रोह के आरोप की जांच के संबंध में शीर्ष अदालत के समक्ष हिमाचल प्रदेश पुलिस ने पहले अपनी रिपोर्ट सीलबंद कवर में पेश की थी।

वरिष्ठ वकील और पूर्व अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) विकास सिंह ने दुआ के लिए अपील करते हुए, शीर्ष अदालत से कहा था कि एक पत्रकार होने के नाते अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के सभी अधिकार हैं और सरकार की आलोचना करने का वैध अधिकार भी है।

आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट विनोद दुआ द्वारा राजद्रोह के आरोपों के खिलाफ दायर याचिका और शिमला में उनके यूट्यूब वीडियो को लेकर दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने और केंद्र के खिलाफ सुनवाई कर रही थी।

भाजपा के स्थानीय नेता श्याम की शिकायत पर 6 मई, 2020 को शिमला के कुमारसेन थाने में विनोद दुआ के खिलाफ राजद्रोह, मानहानिकारक सामग्री प्रकाशित करने और सार्वजनिक शरारत करने जैसे आरोपों में भारतीय दंड संहिता के प्रावधानों के तहत प्राथमिकी दर्ज की गयी थी।

स्थानीय नेता का आरोप है कि विनोद दुआ ने अपने कार्यक्रम में प्रधानमंत्री पर वोट हासिल करने के लिये मौत और आतंकी हमलों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया था।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को लेकर विनोद दुआ की याचिका पर 14 जून को सुनवाई करते हुये अगले आदेश तक उन्हें गिरफ्तार करने से हिमाचल प्रदेश पुलिस को रोक दिया था। न्यायालय ने सात जुलाई को विनोद दुआ को प्राप्त संरक्षण की अवधि पहले 15 जुलाई तक और फिर 20 जुलाई और फिर 27 जुलाई तक के लिये बढ़ा दी थी। इसके बाद अब कोर्ट ने 18 सितंबर तक यह अवधि बढ़ा दी है।

दुआ ने अपनी याचिका में उनके खिलाफ प्राथमिकी निरस्त करने और उन्हें परेशान करने के कारण तगड़ा जुर्माना लगाने का अनुरोध न्यायालय से किया है।

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