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पेगासस मामले में एडिटर्स गिल्ड ने भी SC का किया रुख, SIT जांच की मांग
पेगासस जासूसी मामले (pegasus spyware case) को लेकर अब एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने भी सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।
समाचार4मीडिया ब्यूरो 4 years ago
पेगासस जासूसी मामले (pegasus spyware case) को लेकर अब एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने भी सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। अपनी याचिका में एडिटर्स गिल्ड ने पेगासस जासूसी सॉफ्टवेयर के जरिये सरकार द्वारा पत्रकारों और अन्य पर कथित तौर पर नजर रखने की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआइटी) के गठन का अनुरोध किया है। साथ ही यह जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में कराए जाने की मांग की है।
एडिटर्स गिल्ड की ओर से अदालत से यह भी मांग की गई है कि वह स्पाइवेयर कॉन्ट्रैक्ट पर सरकार से डिटेल और टारगेटेड लोगों की लिस्ट भी मांगे। बता दें कि कोर्ट इस मामले में 5 अगस्त को सुनवाई करेगा।
एडिटर्स गिल्ड की याचिका में कहा गया कि पत्रकारों का काम जनता को सूचना देने और सरकार को जवाबदेह बनाने का काम सुनिश्चित करने का है। गिल्ड के सदस्यों और सभी पत्रकारों का कर्तव्य है कि वे राज्य की कार्रवाई और निष्क्रियता के लिए सूचना, स्पष्टीकरण और संवैधानिक रूप से वैध औचित्य की मांग करके सरकार की सभी शाखाओं को जवाबदेह ठहराएं।
गिल्ड ने कहा कि इस भूमिका को पूरा करने के लिए प्रेस की स्वतंत्रता को सुरक्षित रखा जाना चाहिए। याचिका में कहा गया, प्रेस की स्वतंत्रता पत्रकारों की रिपोर्टिंग में सरकार और उसकी एजेंसियों द्वारा हस्तक्षेप नहीं किए जाने पर निर्भर होती है। इसमें सूत्रों के साथ सुरक्षा एवं गोपनीयता के साथ बात करने की उनकी क्षमता, सत्ता के दुरुपयोग एवं भ्रष्टाचार की जांच, सरकारी अक्षमता को उजागर करना और सरकार के विरोध में या विपक्ष से बात करना शामिल है।
गिल्ड ने तर्क दिया कि भारत के नागरिकों को यह जानने का अधिकार है कि क्या सरकार संविधान के तहत अपने अधिकार की सीमाओं का अतिक्रमण कर रही है और उनके मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।
गौरलतलब है कि पेगासस जासूसी मामले में कई अन्य लोगों ने भी शीर्ष अदालत में याचिकाएं दायर की हैं, जिनमें वरिष्ठ पत्रकार एन. राम और शशि कुमार भी शामिल हैं। इसके अलावा भी कुछ पत्रकारों, वकील और राज्यसभा सांसद ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी लगाकर इस मामले की जांच कोर्ट की निगरानी वाली SIT या किसी स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच एजेंसी से करवाने की गुहार लगाई है। इनमें वकील एमएल शर्मा, CPI(M) से राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास, एक्टिविस्ट परंजॉय ठाकुरता सहित कुछ अन्य नाम शामिल हैं।
क्या है पेगासस केस
पिछले महीने के आखिर में कुछ मीडिया संगठनों के अंतरराष्ट्रीय समूह ने कहा था कि भारत में इजरायल की कंपनी के पेगासस स्पाइवेयर के जरिए सैंकड़ों मोबाइल नंबर्स की संभवत: निगरानी की गई, जिनमें दो मंत्री, 40 से अधिक पत्रकारों, तीन विपक्षी नेताओं के अलावा कार्यकर्ताओं के नंबर भी थे। वहीं सरकार ने इस मामले में विपक्ष के सभी आरोपों को खारिज कर दिया है।
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