कोरोना से जंग हार गए संंपादक मोहम्मद युसूफ भट

कोरोना से संक्रमित होने की पुष्टि के बाद उन्हें गत 18 मई को श्रीनगर के शेरे कश्मीर आयुर्विज्ञान संस्थान में भर्ती कराया गया था

Last Modified:
Monday, 31 May, 2021
MohammadYousufBhat484

उर्दू साप्ताहिक अखबार ‘अवामी मोजिन’ (Awami Moazin) के संपादक और मालिक मोहम्मद युसूफ भट का रविवार को श्रीनगर कोरोना संक्रमण से निधन हो गया। वह 68 वर्ष के थे।

कोरोना से संक्रमित होने की पुष्टि के बाद उन्हें गत 18 मई को श्रीनगर के शेरे कश्मीर आयुर्विज्ञान संस्थान में भर्ती कराया गया था, जहां सुबह करीब 04.30 बजे उन्होंने अंतिम सांसे ली। वे शोपियां जिले के नखासी मोहल्ले के निवासी थे।

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मार्मिक पोस्ट लिखकर रूबिका लियाकत ने ‘मां’ को यूं किया याद

किसी ने क्या खूब कहा है- ‘बिन बताए जो हर बात जान लेती है, वो ‘मां’ है जो मुस्कुराहटों में भी गम पहचान लेती है’।

Last Modified:
Wednesday, 28 July, 2021
rubika545454

किसी ने क्या खूब कहा है- ‘बिन बताए जो हर बात जान लेती है, वो ‘मां’ है जो मुस्कुराहटों में भी गम पहचान लेती है’। दरअसल यहां मां की जिक्र इसलिए हो रहा है क्योंकि जानी मानी टीवी पत्रकार व सीनियर न्यूज एंकर रूबिका लियाकत ने अपनी को याद करते हुए मार्मिक पोस्ट लिखा है। दिल छू लेने वाले इस मार्मिक पोस्ट को कई लोग पसंद कर रहे हैं।

यहां देखिए, उनका ये ट्वीट-

बता दें कि रूबिका लियाकत की मां का दो माह पूर्व निधन हो गया था। आज ही के दिन उन्होंने राजस्थान के उदयपुर में अंतिम सांस ली थी। दरअसल, तब कई तरह के झूठे वीडियो शेयर किए जा रहे थे, जिसमें कहा जा रहा था कि डॉ. फातमा का निधन कोरोना की वजह से हुआ था, लेकिन रूबिका ने इस तरह की खबरों का खंडन करते हुए बताया था कि उनकी मां का निधन एक्यूट पैंक्रियाटिटीज (Acute Pancreatitis) की वजह से हुआ था।

रूबिका की मां के निधन के बाद उनके पिता अमर लियाकत ने भी एक ट्वीट किया था, जिसमें उन्होंने कहा था, ‘फातमा ने इतना प्यार अर्जित किया कि हर धर्म का पालन करने वालों ने भक्ति के साथ प्रार्थना की।’

बता दें कि रूबिका लियाकत की मां डॉ. फातमा लियाकत ने जीव विज्ञान में पीएचडी की थी। इसके बाद वे पानी में रहने वाले जीव-जंतुओं पर हानिकारक धातुओं के असर पर लंबे समय से शोध करती रही थीं।

नेटवर्क18 समूह में मैनेजिंग एडिटर के तौर पर कार्यरत ब्रजेश कुमार सिंह ने रूबिका लियाकत की मां के निधन के बाद एक पोस्ट लिखा था, जिसमें उन्होंने बताया था कि कैसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूबिका लियाकत से फोन पर उनकी मां की तबीयत के बारे में पूछा बल्कि उनसे बात भी की और हर संभव मदद का आश्वासन दिया था।  ब्रजेश कुमार सिंह ने 13 जून 2021 को लिखा था-

‘हाल ही में टीवी एंकर और पत्रकार रूबिका लियाकत के एक ट्वीट पर नजर पड़ी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक पत्र को उद्धृत करते हुए ट्वीट किया था और आभार जताया था दुख की घड़ी में उनका साथ देने के लिए, हौसला बढ़ाने के लिए। दरअसल रूबिका की मां डॉक्टर फातमा लियाकत का इसी 28 मई को देहांत हो गया और पीएम मोदी ने इस सिलसिले में जो शोक संदेश भेजा था, वो महज खानापूर्ति नहीं, संवेदनशीलता से भरा हुआ था, दिवंगत फातमा लियाकत के व्यक्तित्व की चर्चा करते हुए था। रूबिका और मेरी जान-पहचान बहुत पुरानी नहीं रही है। चार साल पहले हम लोग एक ही मीडिया संस्थान के अलग-अलग चैनलों के लिए काम कर रहे थे, आते-जाते लिफ्ट में मुलाकात हो जाया करती थी। सोचा कि रूबिका को फोन कर लूं, किसी के लिए भी अपनी मां को खोना एक ऐसी क्षति है, जिसकी भरपाई नहीं हो सकती।

रूबिका को फोन किया तो पीएम मोदी के पत्र के पीछे की कहानी समझ में आई। पिछले महीने की दो तारीख (2 मई 2021) को रूबिका की मां फातमा लियाकत अचानक बीमार हो गई थीं। रूबिका को मां की बीमारी के बारे में पता चला तो वो नोएडा से भागकर उदयपुर पहुंचीं, जहां उनका परिवार रहता है। मां फातमा लियाकत जीव विज्ञान में पीएचडी करने के बाद पानी में रहने वाले जीव-जंतुओं पर हानिकारक धातुओं के असर पर लंबे समय से शोध करती रही थीं। मां की बीमारी के शुरुआती दिनों में रूबिका को ऐसा लगा मानो रमजान के उपवास के कारण गैस्ट्रोइंटेटाइटिस हो गई है, जिसमें सामान्य तौर पर लोग उल्टियां कर देते हैं। लेकिन तबीयत तेजी से खराब होती चली गई, किडनी, लीवर और हृदय पर भी गंभीर असर दिखने लगा, हालात मल्टी ऑर्गन फेल्योर जैसे बनने लगे। कोरोना के दौर में ऐसा लगा मानो ये सब कहीं कोरोना की वजह से तो नहीं हो रहा है। अस्पताल में दाखिल कराने की नौबत आई, जहां बाद में ये पता चला कि रूबिका की मां को पैंक्रेटाइटिस हो गया है यानी पैंक्रियाज को गंभीर नुकसान हो जाने वाली बीमारी। ये बीमारी काफी खतरनाक होती है, रूबिका और उनकी छोटी बहन अंजुम को भी इसका अहसास हो चला था, अहसास तो मां फातमा को भी था, खुद विज्ञान की स्कॉलर रही थीं वो। ऐसे ही माहौल के बीच ईद का त्योहार आ गया। जाहिर है ईद क्या मनती, पिता लियाकत अमर को दोनों बहनों ने घर पर रहने के लिए कहा हुआ था, खुद उदयपुर के पारस जेके अस्पताल के आईसीयू में अपनी मां के बिस्तर के पास खड़ी थीं दोनों। शुक्रवार, 14 मई 2021 को ईद के उस दिन, जब खुशियों की बजाय मां की बीमारी की वजह से दोनों बहनों के चेहरों पर मनहूसियत छाई हुई थी, रूबिका के फोन की घंटी बजी। कोई नंबर नहीं, स्क्रीन पर लिखा हुआ था नो कॉलर आईडी। समझ में नहीं आया कि फोन उठाएं या नहीं, फिर उठाया तो सामने से कहा गया प्रधानमंत्री जी बात करना चाहते हैं।

रूबिका ने कल्पना नहीं की थी कि पीएम मोदी सीधे फोन पर बात करेंगे। रूबिका सन्न रह गईं। ईद के उस दिन, कोरोना के खौफनाक माहौल और मां की बीमारी के बीच जब किसी नाते-रिश्तेदार का भी फोन नहीं आया था, तब देश के प्रधानमंत्री का फोन आना। कुछ समझतीं, उससे पहले आवाज आई- रूबिका जी, आपको ईद की ढेर सारी शुभकामनाएं। रूबिका ने मां की बीमारी की बात बताई, तो पीएम नरेंद्र मोदी ने उनके बारे में विस्तार से पूछताछ की और पूरा केस जानने के बाद आईसीयू की बेड पर पड़ी फातमा लियाकत से बात करने की इच्छा जताई। रूबिका ने अपनी मां को फोन दिया, मां खुद बोल पाने की हालत में नहीं थीं, ऊपर से पीएम मोदी के लाइन पर होने के बारे में सुना तो आंखें फटी की फटी रह गईं। दूसरी तरफ से पीएम मोदी कह रहे थे कि मुझे पूरा यकीन है कि आप पूरी हिम्मत से लड़ेंगी और इस बीमारी को मात देंगी।

फातमा लियाकत कुछ बोल तो नहीं पाईं, लेकिन हाथ उठाकर बेटी की तरफ ये इशारा जरूर किया कि वो पूरी हिम्मत से ये लड़ाई लड़ेंगी। पीएम मोदी के फोन का ये सिलसिला ईद के उस दिन करीब पांच-सात मिनट तक चला। पीएम ने फोन रखने के पहले रूबिका को आश्वस्त किया कि किसी किस्म की चिंता न करें, हर संभव मदद की जाएगी।

उस दिन के बाद पीएम मोदी का फोन तो नहीं आया, लेकिन प्रधानमंत्री कार्यालय से रोजाना रूबिका के पास फोन आते रहे, मां के स्वास्थ्य की जानकारी ली जाती रही। यही नहीं, बीमारी से लड़ाई के लिए जितना भी श्रेष्ठ परामर्श और दवाईयां संभव हो सकती थीं, सब कुछ मुहैया कराया गया। यहां तक कि एम्स दिल्ली के डायरेक्टर डॉक्टर रणदीप गुलेरिया और इंस्टीट्यूट ऑफ लीवर एंड बिलियरी साइंसेज के डायरेक्टर डॉक्टर एस.के. सरीन भी उदयपुर के अस्पताल में भर्ती फातमा लियाकत की चिकित्सा करने वाले डॉक्टरों का लगातार मार्गदर्शन करते रहे। उदयपुर के डॉक्टरों के आश्चर्य की सीमा नहीं थी कि आखिर ये हो क्या रहा है, एक तरफ इतने नामी-गिरामी डॉक्टर मार्गदर्शन कर रहे थे तो दूसरी तरफ ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया का कार्यालय किसी भी जरूरी दवा की सप्लाई करने के लिए तैयार बैठा था। जितना भी बेहतर इलाज संभव था, उसके सहारे फातमा लियाकत ने 26 दिन तक अपनी बीमारी के साथ संघर्ष किया। लेकिन होनी को टालना किसी के लिए भी संभव नहीं। आखिरकार 28 मई को उन्होंने दम तोड़ दिया, जब उन्हें एयर एंबुलेंस के जरिये उदयपुर से दिल्ली लाने की तैयारी की जा रही थी। फातमा लियाकत की मौत स्वाभाविक तौर पर पूरे परिवार के लिए गहरे सदमे और दुख का कारण रही। लेकिन रूबिका ही नहीं, उनके पिता को भी इस बात से काफी संतोष मिला कि दुख की इस घड़ी में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनके साथ खड़े रहे। हर तरीके से मदद की, लगातार हिम्मत बंधाते रहे।

रूबिका लियाकत ने पीएम मोदी को पत्र लिखकर धन्यवाद दिया। रूबिका और उनके पिता या फिर छोटी बहन के लिए पीएम मोदी का ये रूप सर्वथा नया था। खुद रूबिका का भी परिचय मोदी से कोई ज्यादा पुराना नहीं था। पहली बार 20 फरवरी 2019 को ही पीएम मोदी से रूबिका का आमने-सामने मिलना हुआ था, जब सउदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सुलेमान के सम्मान में आयोजित लंच पर रूबिका को आमंत्रित किया गया था। रूबिका और उनके परिवार को समझ में नहीं आया कि जिस नरेंद्र मोदी की छवि उनके अपने मुस्लिम समाज में पिछले दो दशक से खलनायक की बनाई गई है, जहां ये बात की जाती है कि मुसलमानों को मोदी से डर लगता है, वैसी छवि के उलट मुसीबत की घड़ी में, जब परिवार के लिए सबसे मुश्किल दौर था, पीएम मोदी उनके साथ चट्टान की तरह खड़े रहे, हर तकलीफ को दूर करने की कोशिश की। जिस मोदी के नाम को सामने कर मुस्लिम वोटों की ठेकेदारी करने वाले नेता देश के करोड़ों मुस्लिमों को डराते हैं, उस मोदी ने फातमा लियाकत की बीमारी से डरे परिवार को हिम्मत देने की हर कोशिश की।

रूबिका की मां का इंतकाल होने पर मोदी ने खत लिखा था। रूबिका और उनके परिवार के लिए मोदी का ये वो रूप था, जिसे कभी उन्होंने देखा नहीं था और न ही किसी से सुना था। इसी बीच फातमा लियाकत की मौत की खबर मिलने के बाद पीएम मोदी ने शोक संदेश भेजा, जिसमें न सिर्फ रूबिका की मां के बारे में विस्तार से लिखा था, बल्कि परिवार को ढांढस भी बंधाया गया था। पीएम मोदी का ये पत्र पाते ही रूबिका के पिता भावनाओं के आवेग में बह गये, उन्होंने बेटियों को कहा कि दुख के इस दौर में पहले फोन और फिर पत्र का आना, लियाकत परिवार कभी भूल नहीं पाएगा। भला परिवार का कोई सदस्य सोच भी कैसे सकता था कि पिछले सात साल से देश की बागडोर संभालने वाले पीएम मोदी अपनी तमाम व्यस्तताओं के बीच उदयपुर के इस साधारण परिवार के दुख की घड़ी में इस तरह से संबल बनकर उभरेंगे।

भावनाओं के इसी ज्वार में रूबिका ने पीएम मोदी को धन्यवाद देते हुए पत्र लिखा– ‘मेरी मां घर की प्रधान थीं, जब देश के प्रधान ने उनका हाल लिया तो वो पल पूरे परिवार के लिए बड़ा आत्मीय था। इतने व्यस्त समय में आपने मेरी मां के लिए वक्त निकाला, ये कोई घर का बड़ा ही कर सकता है।’

ब्रजेश जी आगे लिखते हैं, ‘ऐसा नहीं है कि मुसीबत की घड़ी में देश के प्रधानमंत्री के साथ ही घर के बड़े की तरह व्यवहार करने का मोदी का ये कोई अकेला किस्सा है। ऐसे सैकड़ों किस्से हैं, लेकिन ज्यादातर लोग इसलिए सामने नहीं आते, क्योंकि उन्हें लगता है कि अगर पीएम मोदी के मानवीय और करुणामय स्वरूप को बताने वाले किस्से उन्होंने सार्वजनिक किए, तो ऐसा लगेगा मानों वो लोग पीएम मोदी से अपनी निकटता को साबित करने में लगे हैं।’

उनका ये पूरा लेख आप यहां पढ़ सकते हैं-

जब मुसीबत के समय मोदी होते हैं संकटमोचक, दुख की घड़ी में देते हैं साथ

  

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पिछले 3 वर्षों में मीडिया में विज्ञापनों पर सरकार ने कितना किया खर्च, जानें यहां

पिछले तीन साल के दौरान प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में विज्ञापनों पर सरकार की ओर से किया जाने वाला खर्च लगातार कम हुआ है।

Last Modified:
Wednesday, 28 July, 2021
Media

पिछले तीन साल के दौरान प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में विज्ञापनों पर सरकार की ओर से किया जाने वाला खर्च लगातार कम हुआ है। प्रिंट मीडिया में लगभग 54 प्रतिशत की गिरावट आई है। सूचना-प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने राज्यसभा को एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।

सूचना-प्रसारण मंत्री द्वारा संसद में प्रस्तुत किए गए नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक, सरकार ने लोक संपर्क और संचार ब्यूरो (बीओसी) के जरिए 2018-19 में प्रिंट विज्ञापनों में 429.55 करोड़ रुपए खर्च किए थे, जो 2019-20 में घटकर 295.05 करोड़ रुपए हो गया और 2020-21 में महामारी के दौरान घटकर 197.49 करोड़ रुपए रह गया है।  

बीजद सांसद सस्मित पात्रा द्वारा उठाए गए एक प्रश्न के लिखित उत्तर में ठाकुर ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया पर विज्ञापन खर्च में भी पिछले तीन वर्षों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। ठाकुर ने बताया कि वर्ष 2018-2019 में इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में विज्ञापनों पर सरकार ने 514.29 करोड़ रुपए खर्च किए थे। वर्ष 2019-2020 में सरकार की ओर से इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में विज्ञापनों पर 316.99 करोड़ रुपए और 2020-2021 में 167.98 करोड़ रुपए खर्च किए गए।

सरकार द्वारा विज्ञापनों पर खर्च में कमी तब देखने को मिल रही है, जब प्रिंट मीडिया इंडस्ट्री महामारी के गंभीर परिणामों से बचने के लिए संघर्ष कर रही है।

 

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Times Network में राहुल शिवशंकर का हुआ प्रमोशन, अब मिली ये जिम्मेदारी

नए पद के साथ-साथ राहुल शिवशंकर ‘टाइम्स नाउ’ के एडिटर-इन-चीफ की भूमिका भी निभाते रहेंगे।

Last Modified:
Tuesday, 27 July, 2021
Rahul Shivshankar

देश के बड़े मीडिया ग्रुप्स में शुमार ‘टाइम्स नेटवर्क’ (Times Network) ने अपनी लीडरशिप टीम में कुछ नियुक्तियां और प्रमोशन किए हैं। नेटवर्क ने मंगलवार को इसकी घोषणा की है। इसके तहत नेटवर्क ने राहुल शिवशंकर को एडिटोरियल डायरेक्टर के पद पर प्रमोट किया है।

नए पद के साथ-साथ राहुल शिवशंकर नेटवर्क के अंग्रेजी न्यूज चैनल ‘टाइम्‍स नाउ’ (Times Now) के एडिटर-इन-चीफ की भूमिका भी निभाना जारी रखेंगे। बता दें कि राहुल शिवशंकर को पत्रकारिता के क्षेत्र में काम करने का दो दशक से ज्यादा का अनुभव है।

पूर्व में वह ‘न्यूजएक्स’ (NewsX) के एडिटर-इन-चीफ, ‘हेडलाइंस टुडे’ (टीवी टुडे नेटवर्क) के एग्जिक्यूटिव एडिटर और ‘टाइम्स नाउ’ के सीनियर एडिटर रह चुके हैं। इसके अलावा वह टाइम्स ऑफ इंडिया (Times of India) में भी अपनी जिम्मेदारी निभा चुके हैं।

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टाइम्स नेटवर्क ने अपनी टीम में शीर्ष पदों पर किए कई बदलाव

देश के बड़े मीडिया ग्रुप्स में शुमार ‘टाइम्स नेटवर्क’ (Times Network) ने अपनी लीडरशिप टीम में कुछ नियुक्तियां और प्रमोशन किए हैं।

Last Modified:
Tuesday, 27 July, 2021
Times Network

देश के बड़े मीडिया ग्रुप्स में शुमार ‘टाइम्स नेटवर्क’ (Times Network) ने अपनी लीडरशिप टीम में कुछ नियुक्तियां और प्रमोशन किए हैं। नेटवर्क ने मंगलवार को इसकी घोषणा की है। इसके तहत नेटवर्क ने राहुल शिवशंकर को एडिटोरियल डायरेक्टर और विवेक श्रीवास्तव को प्रेजिडेंट (Strategy & Operations – Broadcast & Digital) के पद पर प्रमोट किया है। वहीं सैवी दिलीप (Savvy Dilip) की एग्जिक्यूटिव वाइस प्रेजिडेंट और हेड (Digital Growth) के पद पर नियुक्ति की गई है।

इस बारे में ‘टाइम्स नेटवर्क‘ के एमडी और सीईओ एमके आनंद का कहना है, ‘महामारी के कारण ब्रॉडकास्टर्स के लिए वर्ष 2020 काफी उथल-पुथल भरा रहा। इस दौरान टाइम्स नेटवर्क ने अपनी राह में आने वाली न सिर्फ हर मुश्किल का सामना किया, बल्कि इंडस्ट्री में नए बेंचमार्क स्थापित कर आगे बढ़ना जारी रखा। हमारी लीडरशिप टीम ने इन अभूतपूर्व समय के दौरान नेटवर्क के महत्वपूर्ण विकास को गति दी और हमारे समग्र डिजिटल परिवर्तन के प्रयासों को आगे बढ़ाने में काफी योगदान दिया। कंपनी की ग्रोथ में उनके उल्लेखनीय योगदान को देखते हुए ये प्रमोशन किए गए हैं।‘

बताया जाता है कि राहुल शिवशंकर एडिटोरियल डायरेक्टर के अपने नए पद के साथ-साथ नेटवर्क के अंग्रेजी न्यूज चैनल ‘टाइम्सi नाउ’ (Times Now) के एडिटर-इन-चीफ की भूमिका भी निभाना जारी रखेंगे। वहीं, नेटवर्क ने जल्द लॉन्च होने वाले अपने नए हिंदी न्यूज चैनल ‘टाइम्स नाउ नवभारत’ (Times Now Navbharat)  के एडिटर-इन-चीफ के पद पर नाविका कुमार को पहले ही एडिटर-इन-चीफ के पद पर नामित कर दिया है।

इन दिनों ‘टाइम्स नेटवर्क’ में ग्रुप एडिटर (Politics) की जिम्मेदारी निभा रहीं नाविका कुमार वर्तमान भूमिका के अलावा नए चैनल में संपादकीय टीम का नेतृत्व करेंगी और चैनल के समग्र प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। इसके साथ ही वह रात नौ बजे ‘द न्यूजऑवर’ (The Newshour) और लोकप्रिय इंटरव्यू शो ‘Frankly Speaking’ को भी पहले की तरह होस्ट करती रहेंगी। 

अपने डिजिटल पोर्टफोलियो को और मजबूती देने के उद्देश्य से नेटवर्क ने विवेक श्रीवास्तव को प्रेजिडेंट (Strategy & Operations – Broadcast & Digital) के पद पर प्रमोट किया है। वह नेटवर्क के डिजिटल ऑपरेशंस की कमान संभालेंगे। इसके साथ ही वह डिजिटल और ब्रॉडकास्ट बिजनेस की प्रॉडक्ट स्ट्रैटेजी, ऑडियंस डेवलपमेंट और ऑपरेशंस प्लानिंग का काम भी देखेंगे। वहीं एग्जिक्यूटिव वाइस प्रेजिडेंट और हेड (Digital Growth) के पद पर नियुक्त सैवी दिलीप नेटवर्क के सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए प्रॉडक्ट डेवलपमंट, ऑडियंस ग्रोथ, डिजिटल कंज्यूमर एक्सपीरिएंस, सोशल मीडिया और ऑनलाइन मार्केटिंग की जिम्मेदारी संभालेंगी। वह विवेक श्रीवास्तव को रिपोर्ट करेंगी।

अन्य शीर्ष पदों पर होने वाले प्रमोशन की लिस्ट में मनीष वाडकर (Manish Wadkar) सीनियर वाइस प्रेजिडेंट और हेड (Legal), प्रणव बख्शी, सीनियर वाइस प्रेजिडेंट– डिजिटल, हिना जाफरी, वाइस प्रेजिडेंट और हेड– कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस, पूनम बावडनकेर (Poonam Bavdanker) वाइस प्रेजिडेंट– एचआर, सौरभ भोवाल (Saurabh Bhowal) वाइस प्रेजिडेंट और हेड-(Content and Programming, Zoom & The Zoom Studios) और मिहिर भट्ट, वाइस प्रजिडेंट और एग्जिक्यूटिव एडिटर (Times Influence) का नाम शामिल है।

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SONY ने अपनी लीडरशिप टीम में किए ये बड़े बदलाव

‘सोनी पिक्चर्स नेटवर्क इंडिया’ (SPNI) ने अपनी लीडरशिप टीम में कुछ बड़े बदलाव किए हैं। ये बदलाव तुरंत प्रभाव से प्रभावी हो गए हैं।

Last Modified:
Monday, 26 July, 2021
SONY

‘सोनी पिक्चर्स नेटवर्क इंडिया’ (SPNI) ने अपनी लीडरशिप टीम में कुछ बड़े बदलाव किए हैं। ये बदलाव तुरंत प्रभाव से प्रभावी हो गए हैं। इन बदलावों के तहत चीफ रेवेन्यू ऑफिसर (ऐड सेल्स और इंटरनेट बिजनेस) के पद पर कार्यरत रोहित गुप्ता को इस जिम्मेदारी से मुक्त कर सोनी पिक्चर्स नेटवर्क के मैनेजमेंट और बोर्ड के सलाहकार की जिम्मेदारी सौंपी गई है। नेटवर्क को आगे बढ़ाने में पिछले दो दशकों में रोहित ने काफी योगदान दिया है। अपनी नई भूमिका में रोहित सीनियर मैनेजमेंट को सलाह देने का काम करेंगे और विभिन्न मुद्दों पर सीईओ के साथ मिलकर काम करेंगे।

वहीं, चीफ रेवेन्यू ऑफिसर (डिस्ट्रीब्यूशन) और बिजनेस हेड (स्पोर्ट्स) राजेश कौल को वर्तमान जिम्मेदारी के साथ इंटरनेशनल सेल्स की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई है। वह दुनियाभर में ब्रैंड की मजबूती के लिए डिजिटल टीम के साथ मिलकर काम करेंगे। फिलहाल इंटरनेशनल सेल्स की कमान संभाल रहे नीरज अरोड़ा सीधे राजेश कौल को रिपोर्ट करेंगे।

इसके साथ ही संदीप मेहरोत्रा को हेड (Ad Sales, Network Channels) के पद पर नियुक्त किया गया है। ढाई दशक से अधिक के शानदार करियर के साथ संदीप को रेवेन्यू बढ़ाने और क्लाइंट्स व व्यवसायों को दक्षता प्रदान करने का अनुभव है। अपनी नई भूमिका में संदीप सीधे सीईओ को रिपोर्ट करेंगे।

सोनी एंटरटेनमेंट, डिजिटल बिजनेस और स्टूडियोनेक्स्ट के बिजनेस हेड दानिश खान को नेटवर्क चैनल्स लाइसेंसिंग का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया है। वहीं, बिजनेस हेड (English, Factual Entertainment & Sony AATH) तुषार शाह को सोनी पिक्चर्स नेटवर्क में नवसृजित चीफ मार्केटिंग ऑफिसर (CMO) का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।  

कॉरपोरेट स्ट्रैटेजी और बिजनेस डेवलपमेंट के पद पर कार्यरत आदित्य मेहता वर्तमान भूमिका के साथ-साथ नेटवर्क के लिए डाटा एनालिटिक्स सीओई (CoE) को मजबूती देने का काम करेंगे। वह व्यवसाय मुद्रीकरण (Business Monetization) के लिए भी जिम्मेदार होंगे।

वहीं, चीफ फाइनेंस ऑफिसर के पद पर कार्यरत नितिन नादकर्णी (Nitin Nadkarni) को ब्रॉडकास्ट ऑपरेशंस एंड नेटवर्क इंजीनियरिंग (B.O.N.E) डिपार्टमेंट की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई है। ब्रॉडकास्ट ऑपरेशंस एंड नेटवर्क इंजीनियरिंग के हेड किंगशुक भट्टाचार्य (Kingshuk Bhattacharya) अब नितिन को रिपोर्ट करेंगे।   

इन बदलावों के बारे में सोनी पिक्चर्स नेटवर्क के एमडी और सीईओ एनपी सिंह का कहना है, ‘नेटवर्क ने भविष्य के लिए तैयार संगठन बनाने के लिए विजन 3.0 की शुरुआत की है। आज घोषित किए गए सभी नेतृत्व परिवर्तन उस विकासवादी इरादे को दर्शाते हैं।‘

वहीं, नेटवर्क की चीफ एचआर ऑफिसर (CHRO) मनु वाधवा का कहना है,  ‘नेटवर्क में किए गए ये बदलाव प्रतिभा और नेतृत्व क्षमताओं को मजबूत करने के लिए हमारे निरंतर फोकस का परिणाम है और यह यह कदम सुनिश्चित करेगा कि हम गतिशील मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में आगे रहें।‘

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CNBC-TV18 की लता वेंकटेश डेली एंकरिंग से जल्द लेंगी 'ब्रेक'

सीएनबीसी-टीवी18 की एग्जिक्यूटिव एडिटर व सीनियर एंकर लता वेंकटेश चैनल की डेली एंकरिंग से ब्रेक लेने जा रही हैं, अब सोनल सचदेव के पास यह जिम्मेदारी होगी।

Last Modified:
Tuesday, 27 July, 2021
Latha45454

सीएनबीसी-टीवी18 (CNBC-TV18) की एग्जिक्यूटिव एडिटर व सीनियर एंकर लता वेंकटेश(Latha Venkatesh) अब चैनल की डेली एंकरिंग से ब्रेक लेने जा रही हैं। लेकिन इस बीच वे एक सुपरवाइजर की भूमिका निभाएंगी। बता दें कि यह बदलाव एक अगस्त से लागू होंगे।

चैनल के मुताबिक लता वेंकटेश एग्जिक्यूटिव एडिटर बनी रहेंगी  और केवल दैनिक गतिविधियों से ब्रेक लेंगी। दरअसल उन्होंने अपने बेटे की शादी की तैयारियों के लिए यह स्टेप लिया है।

सीएनबीसी में एक आंतरिक संवाद में कहा गया है कि लता मैम पिछले दो दशक से अपना योगदान देती रही हैं। वे अपने काम को दिल से करती हैं। कभी भी उन्होंने इस बात को लेकर कोई शिकायत नहीं की है कि वे ज्यादा समय तक काम करती हैं, दबाव या तनाव में काम करती हैं ऐसा इसलिए क्योंकि वे अपने काम को जुनून से करती हैं और उससे प्यार करती हैं। उनका किसी से भी कोई विरोध नहीं है। वह आधे-अधूरे मन से कोई काम नहीं करती हैं। वे अपने बेटे  की बड़े स्तर पर शादी करने की तैयारी कर रही हैं लिहाजा इस अद्भुत क्षणों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए पूरा ध्यान और समय इस ओर लगाना चाहती हैं।

आंतरिक संवाद में यह भी बताया गया है कि तब तक के लिए वह अपने विशेष शो को करती रहेंगी और आवश्यक और उपयुक्त दैनिक शो के लिंक/साक्षात्कार आदि को साझा करती रहेंगी। लेकिन 1 अगस्त के बाद से वह नियमित तौर पर एंकरिंग नहीं करेंगी।

वेंकटेश की जगह अब सोनल सचदेव (Sonal Sachdev) के पास यह जिम्मेदारी होगी। 

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पेगासस मामले की जांच को लेकर मीडिया निकायों ने एक सुर में उठाई ये आवाज

प्रेस क्लब ऑफ इंडिया, एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया सहित पत्रकारों के कई अन्य मीडिया निकायों ने स्पाईवेयर के जरिए पत्रकारों और अन्य की कथित जासूसी की निंदा की

Last Modified:
Friday, 23 July, 2021
pegasus545

प्रेस क्लब ऑफ इंडिया, एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया सहित पत्रकारों के कई अन्य मीडिया निकायों ने स्पाईवेयर के जरिए पत्रकारों और अन्य की कथित जासूसी की निंदा की और मामले में ‘उच्चतम न्यायालय की निगरानी में जांच’ की मांग की।

इन मीडिया निकायों के प्रतिनिधियों ने कहा कि उन्हें लगता है कि नागरिकों की जासूसी करने से लोकतंत्र कमजोर होता है। उन्होंने कहा कि यह सरकार की जिम्मेदारी है कि वह पेगासस स्पाईवेयर पर उठ रहे संदेहों को दूर करे और इस मामले में वह खुद को साफ-सुथरा साबित करे।

यह बयान प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के साथ-साथ एडिटर्स गिल्ड, दिल्ली पत्रकार संघ, इंडियन वीमेंस प्रेस कोर, वर्किंग न्यूज कैमरामैन एसोसिएशन, आईजेयू और विभिन्न मीडिया संगठनों की ओर से जारी किया गया।

पत्रकारों के संगठनों का यह बयान तब आया है जब इजराइली कंपनी एनएसओ के पेगासस स्पाइवेयर पर हंगामा मचा है। आरोप लगाए जा रहे हैं कि इसके माध्यम से दुनिया भर में लोगों पर कथित तौर पर जासूसी कराई गई, जिसमें भारत के दो केंद्रीय मंत्रियों, 40 से अधिक पत्रकारों, विपक्ष के तीन नेताओं और एक न्यायाधीश सहित बड़ी संख्या में कारोबारियों, सरकारी अफसरों, वैज्ञानिकों, एक्टिविस्ट समेत करीब 300 लोग शामिल हैं।

दुनिया भर के 17 मीडिया संस्थानों ने पेगासस स्पाइवेयर के बारे में खुलासा किया है। एक लीक हुए डेटाबेस के अनुसार इजरायली निगरानी प्रौद्योगिकी फर्म एनएसओ के कई सरकारी ग्राहकों द्वारा हजारों टेलीफोन नंबरों को सूचीबद्ध किया गया था। इसमें 300 से अधिक सत्यापित भारतीय मोबाइल टेलीफोन नंबर शामिल हैं।  

इतने बड़े पैमाने पर ऐसे लोगों के नाम आने को लेकर ही मीडिया निकाय ने इस मामले में जांच की मांग की है। प्रेस क्लब की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि ऐसी निगरानी के लिए लोगों के प्रति सरकार जवाबदेह है और उसकी जिम्मेदारी है कि वह यह सुनिश्चित करे कि भारतीय नागरिकों की अवैध जासूसी नहीं हो पाए।

बयान में कहा गया है कि पत्रकारों के संगठन मानते हैं कि पत्रकारों, नागरिक समाज, मंत्रियों, सांसदों और न्यायपालिका पर ऐसी निगरानी सत्ता का पूरी तरह दुरुपयोग है और इसे तुरत रोका जाना चाहिए। इसने कहा है कि राष्ट्रीय सुरक्षा की आड़ में ऐसी नियंत्रित निगरानी नहीं की जा सकती है।

पत्रकारों के संगठनों ने चेताया है कि भारतीय नागरिकों की पेगासस स्पाईवेयर से जासूसी कराना भारतीय संप्रभुता को खतरे में डालेगा और इसलिए यह जरूरी है कि भारत सरकार इसमें दखल दे और साफ करे कि यह कैसे और क्यों हुआ। बयान में कहा कहा गया है, 'हम सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जासूसी की जांच किए जाने की मांग करते हैं। मीडिया संस्थान लोकतंत्र और प्रेस की स्वतंत्रता के लिए संवैधानिक विकल्प का उपाए भी तलाशेंगे।'

इन मीडिया निकायों के प्रतिनिधियों ने ‘दैनिक भास्कर’ और ‘भारत समाचार’ चैनल सहित मीडिया प्रतिष्ठानों पर छापेमारी की निंदा भी की और कहा कि यह ‘असहमति को दबाने’ का प्रयास है।

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राजनेताओं-पत्रकारों ने IT की कार्रवाई को बताया मीडिया की आवाज दबाने का प्रयास, कही ये बात

आयकर विभाग के अधिकारियों द्वारा‘दैनिक भास्कर’ और ‘भारत समाचार’ चैनल पर छापेमारी के मामले में कई राजनेताओं ने अपनी प्रतिक्रिया जाहिर की है।

Last Modified:
Friday, 23 July, 2021
Raid

कथित रूप से टैक्स चोरी की जानकारी मिलने के बाद आयकर विभाग के अधिकारियों द्वारा गुरुवार की सुबह ‘दैनिक भास्कर’ (Dainik Bhaskar) के तमाम कार्यालयों और ‘भारत समाचार’ (Bharat Samachar) चैनल पर छापेमारी के मामले में कई राजनेताओं व पत्रकारों ने अपनी प्रतिक्रिया जाहिर की है। उन्होंने इस कार्रवाई को मीडिया की आवाज दबाने की कोशिश बताया है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट के जरिये आयकर विभाग के इस कदम की निंदा की है।   

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एक ट्वीट में कहा कि दैनिक भास्कर समूह और भारत समाचार के यहां आयकर विभाग का छापा मीडिया की आवाज को दबाने का प्रयास है। मोदी सरकार अपनी आलोचना को जरा भी बर्दास्त नहीं कर सकती।  

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी इस कदम का विरोध करते हुए अपने ट्वीट में कहा है, ‘पत्रकारों और मीडिया घरानों पर हमला लोकतंत्र को कुचलने का एक और क्रूर प्रयास है। मैं इस प्रतिशोधी कृत्य की कड़ी निंदा करती हूं, जिसका उद्देश्य सत्य को सामने लाने वाली आवाजों को दबाना है। इस तरह की कार्रवाई लोकतंत्र के सिद्धांतों को कमजोर करती है। हम सब मिलकर निरंकुश ताकतों को कभी सफल नहीं होने देंगे।’

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अपने ट्वीट में आयकर विभाग के इस कदम को मीडिया को डराने का प्रयास करने वाला बताया है। उन्होंने छापेमारी को रोकने और मीडिया को स्वतंत्र रूप से अपना काम करने देने का अनुरोध किया है।

वरिष्ठ पत्रकार राजेश बादल ने भी इस मामले में अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा है, 'दैनिक भास्कर पर छापे की कार्रवाई जायज नहीं है ।आप अपना पक्ष अखबार में रखने के लिए स्वतंत्र हैं। सरकार अपना तर्क  समाचार पत्र को दे सकती है। यदि वह  प्रकाशित नहीं  करे तो वह प्रेस कौंसिल का दरवाजा खटखटा सकती है, लेकिन छापे की कार्रवाई उचित नहीं ठहराई जा सकती। कोई भी सभ्य समाज इसे स्वीकार नहीं करेगा।' 

वहीं, इस मामले में आयकर विभाग की ओर से कोई आधिकारिक स्टेटमेंट जारी नहीं किया गया है और न ही इस बारे में ज्यादा जानकारी दी गई है। हालांकि, आईटी विभाग की ओर से किए गए ट्वीट में कहा गया है, ‘विभाग के प्रोटोकॉल को ध्यान में रखते हुए जांच टीम ने केवल टैक्स चोरी से संबंधित समूह के वित्तीय लेनदेन को देखा।’

इसके साथ ही कुछ मीडिया रिपोर्ट्स को नकारते हुए आयकर विभाग ने ट्वीट में यह भी कहा, ’मीडिया के एक वर्ग ने इस तरह के आरोप भी लगाए हैं कि  आयकर विभाग के अधिकारी जांच के दौरान स्टोरीज में बदलाव और संपादकीय निर्णय में अपना सुझाव दे रहे थे। इस तरह के आरोप पूरी तरह झूठे हैं और आयकर विभाग इन आरोपों को पूरी तरह से नकारता है।’

 

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छापेमारी को लेकर दैनिक भास्कर व भारत समाचार ने कुछ यूं दी अपनी प्रतिक्रिया

आयकर विभाग ने कर चोरी के आरोपों में दो प्रमुख मीडिया घरानों- ‘दैनिक भास्कर’ और उत्तर प्रदेश के हिंदी न्यूज चैनल ‘भारत समाचार’ के विभिन्न शहरों में स्थित परिसरों पर गुरुवार को छापे मारे।

Last Modified:
Thursday, 22 July, 2021
DainikBhaskar545

आयकर विभाग ने कर चोरी के आरोपों में दो प्रमुख मीडिया घरानों- ‘दैनिक भास्कर’ और उत्तर प्रदेश के हिंदी न्यूज चैनल ‘भारत समाचार’ के विभिन्न शहरों में स्थित परिसरों पर गुरुवार को छापे मारे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दैनिक भास्कर के मामले में छापेमारी भोपाल, जयपुर, अहमदाबाद और कुछ अन्य स्थानों पर की गई है। वहीं, भारत समाचार समूह और उसके प्रवर्तकों व कर्मचारियों के लखनऊ स्थित परिसरों पर इसी तरह से छापेमारी की गई।

दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों ने दफ्तरों में मौजूद नाइट शिफ्ट के कर्मचारियों के मोबाइल और लैपटॉप अपने कब्जे में ले लिए। इस कारण कई घंटों तक डिजिटल न्यूज का काम प्रभावित हुआ।

रिपोर्ट में बताया गया कि इनकम टैक्स अधिकारियों ने नाइट शिफ्ट में काम कर रहे कर्मचारियों को ऑफिस में ही रोक लिया और बाहर निकलने से मना कर दिया। नाइट शिफ्ट में काम करने वाले ज्यादातर कर्मचारी संपादकीय और भास्कर के आईटी डिपार्टमेंट से जुड़े थे, जिनका फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन से कोई संबंध नहीं होता, फिर भी उन्हें जबरन रोका गया।

दैनिक भास्कर ने रिपोर्ट में कहा कि आम तौर पर आईटी छापों में वित्तीय ट्रांजैक्शन से जुड़े विभागों की ही पड़ताल होती है, लेकिन यहां एडिटोरियल कंटेंट से जुड़े दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस खंगालकर पत्रकारों के काम में बाधा पहुंचाई गई। आयकर विभाग की टीम ने भास्कर के न्यूज प्रोसेस से जुड़े काम में कई घंटों तक बाधा पहुंचाई। पत्रकारों को दफ्तर के अंदर नहीं जाने नहीं दिया गया और न ही अंदर काम कर रहे पत्रकारों को शिफ्ट खत्म हो जाने के बाद बाहर निकलने दिया।

आयकर छापे पर दैनिक भास्कर ने कहा कि सच्ची पत्रकारिता से सरकार डर गई है। भास्कर में तो पाठकों की मर्जी ही चलेगी। कोविड महामारी की दूसरी लहर के दौरान दैनिक भास्कर ने कई तस्वीरें पाठकों के सामने पेश की थी। 

अपनी रिपोर्ट में दैनिक भास्कर ने कहा, ‘देशभर में जब कोरोना से मरने वालों का रिकॉर्ड मेंटेन नहीं किया गया, आंकड़ों को छिपाया जा रहा था, दर्जनों शवों का एक ही चिता पर अंतिम संस्कार किया जा रहा था, तब निडर पत्रकारिता दिखाते हुए दैनिक भास्कर सरकार के दावों की पोल खोल रहा था।’

भास्कर ने यह भी बताया कि आईटी अधिकारियों का निर्देश है कि छापे से जुड़ी हर खबर को दफ्तर में मौजूद अधिकारियों को दिखाकर ही पब्लिश की गई है।

वहीं भारत समाचार ने अपनी रिपोर्ट्स में कहा है कि आयकर विभाग के कई दलों ने संस्थान और उसके कर्मचारियों से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी की है।

छापेमारी को लेकर भारत समाचार ने कहा, ‘हम सच के साथ खड़े रहेंगे, जनता सब देख रही है।‘ चैनल ने ट्वीट कर कहा-

तुम चाहे जितना दबाओगे आवाज

हम उतनी ही जोर से कहते रहेंगे सच

हम न तो पहले डरे थे और न अब डरेंगे

सच के साथ पहले भी थे और अभी भी हैं

तुम कुछ भी करो लेकिन सच ही कहेंगे

वहीं, इस छापेमारी को लेकर केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा है कि एजेंसियां अपना काम कर रही हैं और सरकार इसमें कोई हस्तक्षेप नहीं करती है।

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इस चैनल पर देखने को मिलेगा ओलंपिक खेलों का सीधा प्रसारण

23 जुलाई 2021 से टोक्यो ओलंपिक गेम्स का आगाज होने जा रहा है, जो आठ अगस्त तक खेले जाएंगे। सरकार ने इस आयोजन के सीधे प्रसारण की पूरी तैयारी कर ली है।

Last Modified:
Thursday, 22 July, 2021
Tokyo Olympic

23 जुलाई 2021 से टोक्यो ओलंपिक गेम्स का आगाज होने जा रहा है, जो आठ अगस्त तक खेले जाएंगे। इन गेम्स की कवरेज के बारे में सूचना प्रसारण मंत्रालय ने बुधवार को बताया कि वैश्विक खेलों का आयोजन शुरू होने से लेकर खत्म होने तक इसकी व्यापक कवरेज की जाएगी और इसका प्रसारण पब्लिक ब्रॉडकास्टर ‘प्रसार भारती’ के टेलीविजन, रेडियो और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर होगा।

बताया जाता है कि ‘डीडी स्पोर्ट्स’ (DD Sports)  रोजाना टोक्यो ओलंपिक का सीधा प्रसारण करेगा जबकि दूरदर्शन के अन्य चैनल्स और ऑल इंडिया रेडियो (एआईआर) इस खेल आयोजन पर विशेष कार्यक्रम प्रसारित करेंगे।

इस बारे में सूचना प्रसारण मंत्रालय का कहना है, ‘ओलंपिक में विभिन्न खेल आयोजनों का डीडी स्पोर्ट्स पर रोजाना सुबह पांच बजे से शाम सात बजे तक सीधा प्रसारण किया जाएगा। इसके साथ ही इसकी डिटेल्स डीडी स्पोर्ट्स और ऑल इंडिया स्पोर्ट्स के ट्विटर हैंडल पर रोजाना उपलब्ध कराई जाएगी।‘ मंत्रालय का यह भी कहना है कि डीडी स्पोर्ट्स ओलंपिक शुरू होने से पहले खेल हस्तियों के साथ चार घंटे से अधिक का चर्चा-आधारित कार्यक्रम का निर्माण करेगा, जो ‘चीयर फॉर इंडिया’ अभियान में योगदान देगा।

मंत्रालय द्वारा साझा कार्यक्रम कार्यक्रम के अनुसार, एआईआर कैपिटल स्टेशन, एफएम रेनबो नेटवर्क, डीआरएम (एआईआर का डिजिटल रेडियो) और एआईआर के अन्य  स्टेशन 22 जुलाई को टोक्यो ओलंपिक पर एक ‘कर्टन-रेजर’ कार्यक्रम प्रसारित करेंगे। कार्यक्रम को भारत की सीमा के अंदर यूट्यूब चैनल, डीटीएच और ‘न्यूजऑनएआईआर मोबाइल ऐप पर भी प्रसारित किया जाएगा।

मंत्रालय के अनुसार, आकाशवाणी चैनलों पर 23 जुलाई से रोजाना की सुर्खियों को प्रसारित किया जाएगा, जबकि एफएम रेनबो पर 24 जुलाई से आवधिक सूचनाएं प्रसारित की जाएंगी। ‘जब भी भारत पदक जीतेगा तो एफएम चैनलों पर ब्रेकिंग न्यूज भी प्रसारित हो सकती है।

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