भारतीय टीवी न्यूज मीडिया और ऐडवर्टाइजर्स आज मीडिया योजनाओं और बजट की रणनीति बनाने के लिए ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (BARC) इंडिया द्वारा जारी किए गए आंकड़ों पर पूरी तरह भरोसा करते हैं
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समाचार4मीडिया ब्यूरो
भारतीय टीवी न्यूज मीडिया और ऐडवर्टाइजर्स आज मीडिया योजनाओं और बजट की रणनीति बनाने के लिए ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (BARC) इंडिया द्वारा जारी किए गए आंकड़ों पर पूरी तरह भरोसा करते हैं।
इसलिए, कई लोग एकाधिक रेटिंग सिस्टम रखने का सुझाव देते हैं, जो विभिन्न डेमोग्राफिक्स में व्युअरशिप पैटर्न्स की अधिक सूक्ष्म समझ की अनुमति देता है।
पीटीसी नेटवर्क के एमडी व प्रेजिडेंट रबिन्द्र नारायण, जी मीडिया की चीफ रेवेन्यू ऑफिसर मोना जैन और ओमनिकॉम मीडिया ग्रुप के ग्रुप सीईओ कार्तिक शर्मा का मानना है कि मल्टी-रेटिंग सिस्टम प्रतिस्पर्धा के बीच उत्कृष्टता को बढ़ावा देगी।
दूसरी ओर, एकाधिक रेटिंग सिस्टम्स ब्रॉडकास्टर्स के साथ-साथ ऐडवर्टाइजर्स के लिए बढ़ी हुई जटिलताएं, रेटिंग में संभावित विसंगतियां और उच्च लागत जैसी चुनौतियां भी पेश कर सकती हैं।
रेटिंग की वर्तमान प्रणाली "त्रुटिपूर्ण" और "पक्षपाती है, क्योंकि इसे मुट्ठी भर लोगों द्वारा नियंत्रित किया जाता है", यह इंडस्ट्री के दिग्गजों का विचार था, जिन्होंने केवल एक के बजाय कई रेटिंग एजेंसियों की जरूरत पर जोर दिया, क्योंकि वर्तमान में एकमात्र रेटिंग एजेंसी BARC है और इसकी वकालत करने वाले दिग्गजों का यह कहना है कि 'एकाधिकार लोगों को आत्मसंतुष्ट बना देता है।'
डिबेट के दौरान, चीजें तब और प्रबल हो गईं जब कुछ पैनलिस्ट्स, जो एकाधिक रेटिंग सिस्टम के प्रस्ताव के लिए बोल रहे थे, ने BARC रेटिंग पर सवाल उठाया, खासकर न्यूज चैनल्स के लिए, यह कहते हुए कि पॉलीटिशियन न्यूज चैनल्स पर विज्ञापन देने के लिए पैसा खर्च तो करते हैं, लेकिन जनरल एंटरटेनमेंट चैनल्स पर नहीं, यह इस बात का पर्याप्त प्रमाण है कि यह जॉनर BARC द्वारा दी गई रेटिंग से कहीं बेहतर प्रदर्शन कर रही है।
एकाधिक रेटिंग सिस्टम के प्रस्ताव के खिलाफ अपने-अपने विचार प्रस्तुत करने के लिए स्ट्रैटजिक मार्केटिंग व मीडिया कंसल्टेंट चिंतामणि राव, डाबर इंडिया के मीडिया हेड राजीव दुबे और भारत एक्सप्रेस न्यूज नेटवर्क के डायरेक्टर व सीईओ वरुण कोहली नई दिल्ली में e4m की मीडिया डिबेट में शामिल हुए। BW बिजनेसवर्ल्ड मीडिया ग्रुप के चेयरमैन व एडिटर-इन-चीफ और e4m ग्रुप के फाउंडर डॉ. अनुराग बत्रा ने डिबेट की अध्यक्षता की।
जी मीडिया की चीफ रेवेन्यू ऑफिसर मोना जैन ने डिबेट की शुरुआत करते हुए कहा, “एक ऐडवर्टाइजर्स की निर्भरता एजेंसी के माध्यम से एक विशेष मीडिया प्लान लेने पर होती है। दूसरी ओर, ब्रॉडकास्टर पूरी तरह से मीजरमेंट सिस्टम की दया पर निर्भर है, जो यह तय करता है कि आपकी क्या रैंक हैं। मुद्दा यह है कि कोई यह नहीं देखता कि जमीनी हकीकत क्या है। इसलिए, मैंने एजेंसियों और ऐडवर्टाइजर्स से यह कहना शुरू कर दिया है कि वे मेरे डिजिटल प्लेटफॉर्म की रैंकिंग को भी देखें, लेकिन BARC की रेटिंग अभी भी उनके लिए महत्वपूर्ण वैल्यू रखती है।
उन्होंने आगे सुझाव दिया कि हमारे पास एक प्रमाणित, मान्य, स्वीकृत करेंसी होनी चाहिए जिसे ऐडवर्टाइजर्स और एजेंसियों द्वारा भी मान्यता प्राप्त और मूल्यवान माना जाए।
विरोधी रुख पेश करते हुए स्ट्रैटजिक मार्केटिंग व मीडिया कंसल्टेंट चिंतामणि राव ने समझाया, "BARC और इसकी कार्यप्रणाली के बारे में कई संदेह हैं लेकिन मैं इस बात पर कायम हूं कि ऑडियंस मीजरमेंट सरकार का काम नहीं है।"
अंत में, यह चर्चा वेंडर्स की संख्या को लेकर नहीं होनी चाहिए बल्कि यह इस बात पर होनी चाहिए कि इसे कैसे मैनेज किया जाता है। उन्होंने कहा कि मुख्य मुद्दा यह है कि BARC पर उसके एक घटक का प्रभुत्व है और उसी को मापा जा रहा है।
इस दौरान चिंतामणि राव से सवाल किया गया कि यदि ऐडवर्जाइजर्स का पैसा पूरे मीडिया इकोसिस्टम को ईंधन देता है, तो उन्होंने 60 प्रतिशत पर इंडियन ब्रॉडकास्टिंग एंड डिजिटल फाउंडेशन (IBDF) के साथ एक स्ट्रक्चर क्यों स्वीकार किया?"
इस पर डिबेट में शामिल हुए ओमनिकॉम मीडिया ग्रुप के ग्रुप सीईओ कार्तिक शर्मा ने कहा कि यदि हम कुछ समय के लिए इंडस्ट्री को भूल जाएं, तो हमें NSE और BSE की जरूरत क्यों है? हमें CIBIL और Experian की आवश्यकता क्यों है? इसका संक्षिप्त उत्तर इनोवेशन और कम्पटीशन है। यदि कोई कम्पटीशन ही नहीं होगा, तो हम जिस भी कैटेगरी में काम करेंगे, उस हर एक कैटेगरी में एक ब्रैंड होगा।
उन्होंने कहा कि यहां तक कि संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे मार्केट में भी, जहां सबसे बड़ा AdEx मार्केट है, दो सिस्टम्स हैं। यहां तक कि यूके, ऑस्ट्रेलिया, मलेशिया, फिलीपींस और कई अन्य देशों में भी दो ऑडियंस मीटरमेंट सिस्टम्स हैं। भारत जैसे बड़ी आबादी वाले देश में दो सिस्टम्स बेहतर सैम्पलिंग और सेगमेंटेशन में मदद करेंगी।
इसके बाद डाबर इंडिया के मीडिया हेड राजीव दुबे ने मंच संभाला और बताया कि कैसे एक, दो या एकाधिक रेटिंग सिस्टम एक ऐडवर्टाइजर्स के लिए मायने नहीं रखते। आखिरकार, इससे ब्रैंड को बेचने में मदद मिलनी चाहिए। उनका उद्देश्य कंज्युमर्स तक सबसे सस्ते तरीके से पहुंचना है।
उन्होंने कहा कि BARC का विचार एक मजबूत सिस्टम बनाना था, जो सभी को अच्छी तरह से माप सके। क्या हम ऐसा करने में सक्षम हैं? शायद हां भी या शायद नहीं भी।
बदलते समय के साथ, दर्शकों की जरूरतें बदल गई हैं और NCCS एक ऐसी प्रणाली थी जो कंज्युमर्स ड्यूरेबल्स के स्वामित्व के आधार पर लोगों के वर्ग को मापती थी। लेकिन अब, नया प्रस्तावित ISEC उन कमियों को पूरा करता है।
कंज्युमर्स ने भी डिजिटल और ओटीटी की ओर अधिक ध्यान देते हुए विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर कंटेंट को कंज्यूम करना शुरू कर दिया है। राजीव दुबे का मानना है, “हम अभी तक उस दर्शक वर्ग का सही आकलन नहीं कर पाए हैं। इसलिए, भारतीय टीवी इंडस्ट्री को एक सिस्टम की जरूरत है और उस सिस्टम को इस तरह से मजबूत करने की जरूरत है कि वह टीवी और डिजिटल दर्शकों को समान रूप से माप सके।
मल्टीपल ऑडियंस मेजरमेंट सिस्टम होने पर डाबर के प्रवक्ता ने कहा, "समस्या को हल करने के लिए, आपको दूसरी समस्या नहीं बनानी चाहिए, बल्कि समस्या को ठीक करना चाहिए।" पीटीसी के रबिन्द्र नारायण, जो प्रस्ताव के पक्ष में खड़े थे, ने कहा, “तथ्य यह है कि हम यहां खड़े हैं और इस मुद्दे पर चर्चा कर रहे हैं, तो इसका मतलब है कि मौजूदा प्रणाली में विश्वास और विश्वसनीयता की कमी है। हम यह भी आधार बना रहे हैं कि टीवी रेटिंग्स से हमारा तात्पर्य केवल लीनियर टीवी रेटिंग्स से है क्योंकि BARC यही करता है।
उन्होंने आगे बताया कि BARC इमेज मैपिंग के जरिए मीटरमेंट करता है और इसलिए, जब कोई चैनल किसी भी प्लेटफॉर्म पर अपना वॉटरमार्क डालता है, तो यह BARC के लिए मापने योग्य हो जाना चाहिए क्योंकि उनके पास पहले से ही इसकी तकनीक है।
उन्होंने कहा कि तो फिर वे ऐसा क्यों नहीं करते? क्योंकि उन्हें अधिक निवेश की नहीं बल्कि एनालिसिस पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है। समस्या यह है कि इकोसिस्टम उन रेटिंग्स के विस्तार की अनुमति नहीं दे रहा है।
आज, BARC का कहना है कि 100 में से 9 लोग PTC देखते हैं, जो असंभव है और ऐडवर्टाइजर्स तदनुसार ऐड रेट्स के लिए मोलभाव करते हैं। चैनल आज भी अच्छे शो में निवेश कर रहे हैं, लेकिन BARC के डेटा के कारण ऐडवर्टाइजर्स की दिलचस्पी कम है। यदि इसमें कोई सच्चाई है, तो PTC जैसे खिलाड़ी एकाधिक रेटिंग सिस्टम के लिए क्यों नहीं लड़ेंगे?
इस दौरान मोना जैन ने कहा, “जब चंद्रयान लॉन्च किया गया था, तो दुनिया और भारत में हर कोई इसे देख रहा था, लेकिन यदि आप BARC डेटा देखें, तो उस विशेष सप्ताह में न्यूज जॉनर की रेटिंग कम हुई थी। क्या यह संभव है? न्यूज जॉनर को लेकर BARC जो रेटिंग्स का अनुमान लगा रही है, तो रेटिंग्स उससे कहीं अधिक है।
चंद्रयान के लॉन्च वाले दिन भी, BARC डेटा में कोई उछाल नहीं आया। मोना जैन और रबिन्द्र नारायण दोनों का मानना है कि मौजूदा सिस्टम त्रुटिपूर्ण और पक्षपाती है क्योंकि इसे मुट्ठी भर लोगों द्वारा नियंत्रित किया जाता है।
रबिन्द्र नारायण ने कहा, “तथ्य यह है कि हम यह चर्चा कर रहे हैं, इसका तात्पर्य यह है कि मौजूदा सिस्टम में विश्वास की कमी है। इसमें विश्वसनीयता का अभाव है। BARC केवल लीनियर टीवी का विश्लेषण करता है, जो सैटेलाइट और केबल के माध्यम से प्रसारित किया जाता है। आज टीवी देखना सिर्फ लीनियर टीवी नहीं है, इसके कई रूप हैं जैसे कनेक्टेड टीवी और फास्ट टीवी एक ही स्क्रीन पर आते हैं, लेकिन BARC इसे माप नहीं रहा है।''
नारायण ने आगे कहा कि अब समय आ गया है कि कुछ नया किया जाए और केवल टेलीविजन रेटिंग पॉइंट्स के बजाय कंटेंट रेटिंग पर ध्यान दिया जाए।
उन्होंने का कि BARC के अनुसार, पूरे देश में न्यूज जॉनर की पहुंच 6-7% है, यदि यह सच है तो राजनेता न्यूज चैनलों पर विज्ञापन पर खर्च करने के लिए ही क्यों उत्सुक हैं? जनरल एंटरटेनमेंट चैनलों पर क्यों नहीं? इस बाइबिल (BARC) जो कि कबाड़ है, के आधार पर ऐडवर्टाइजर्स द्वारा अधिकतम कंज्युमर्स तक पहुंचने के लिए सारा पैसा क्यों खर्च किया जाता है? जब तकनीक और सिस्टम बदल रहे हैं तो हम टीवी रेटिंग पॉइंट्स के लिए क्यों लड़ रहे हैं, कंटेंट रेटिंग पॉइंट्स के लिए क्यों नहीं?
उन्होंने तर्क दिया, “रेटिंग की वर्तमान प्रणाली (BARC द्वारा) त्रुटिपूर्ण और पक्षपाती है, क्योंकि इसे मुट्ठी भर लोगों द्वारा नियंत्रित किया जाता है। ब्रॉडकास्टर लॉबी को चार व्यावसायिक घरानों द्वारा नियंत्रित किया जाता है, इसलिए यह हमेशा उनके पक्ष में रहेगा। डेटा भी यही दिखाता है।''
भारत एक्सप्रेस के वरुण कोहली ने कहा, “BARC अस्तित्व में आया क्योंकि पब्लिशर्स एक अलग रेटिंग प्रणाली चाहते थे और फिर एक तंत्र की कल्पना की गई। अब, उस प्रणाली पर सिर्फ इसलिए सवाल उठाना क्योंकि रेटिंग सही अनुपात में नहीं है या यह डिजिटल दर्शकों को मैप नहीं करती है और इसके अलावा एक अलग निकाय की ही मांग करना, मुझे नहीं लगता कि यह सही तरीका है।
समाधान के तौर पर उन्होंने सुझाव दिया कि इंडस्ट्री को एक साथ आने और BARC के साथ अधिकार क्षेत्र का उपयोग करने की जरूर है ताकि उन्हें बताया जा सके कि और क्या चाहिए और वे कहां बेहतर हो सकते हैं।
चिंतामणि राव ने यह भी सुझाव दिया कि एकाधिक खिलाड़ियों के बजाय एक एग्रीगेटर रखना बेहतर है। उस स्थिति में, एग्रीगेटर डेटा प्रदाता भी बन सकता है। BARC हमेशा विभिन्न स्रोतों से कई डेटा एकत्र कर सकता है और उसे प्रस्तुत कर सकता है।
दर्शकों की सही ढंग से मैपिंग करने से भी एक तरह से समस्या का समाधान हो जाएगा, जो प्रमुख रूप से ISEC के साथ किया जाएगा। राजीव दुबे ने कहा, यूनिफाइड मीजरमेंट होना भी एक अन्य समाधान है।
वहीं, कार्तिक शर्मा के अनुसार, “एक से अधिक खिलाड़ी होने से निश्चित रूप सेमे नवीनता को बढ़ावा मिलेगा और थोड़ी प्रतिस्पर्धा होगी, जो अच्छी है। अलग-अलग रेटिंग सिस्टम अलग-अलग लक्ष्य खंडों, समूहों और अन्य पर भी ध्यान केंद्रित कर सकते हैं।
“हमें स्क्रीन पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है, न कि लीनियर टीवी या डिजिटल पर। यह एक स्क्रीन-आधारित दुनिया है और लोग केवल वही कंटेंट देख रहे हैं, जो उनके लिए सार्थक है। इसलिए विभिन्न प्रकार के उपभोगों के लिए विभिन्न प्रकार के मीजरमेंट की आवश्यकता है। मेरा तर्क है कि इनोवेशन महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सही समय है।
उन्होंने कहा कि कंज्युमर मोबाइल या टीवी सेट के माध्यम से स्क्रीन को देख रहा है। हम इसे कैसे माप रहे हैं? कुछ प्रतिस्पर्धा होना बेहतर है। यह मानसिकता रखना महत्वपूर्ण है कि एक प्रणाली दूसरे की कैसे मदद कर सकती है। मौजूदा प्रणाली गलत नहीं है, लेकिन नई प्रणाली हमारे पास जो कुछ है उसे बढ़ा सकती है।
रबिन्द्र नारायण ने निष्कर्ष निकाला कि टेलीविजन देखने और इसके इस्तेमाल के तरीकों में बदलाव आया है। या तो BARC बदलते समय के अनुरूप आगे बढ़े या दूसरों को आगे आकर इस अंतर को भरना चाहिए। मार्केट की ताकतें ही तय करेंगी कि कौन रहेगा और कौन जाएगा, किसका डेटा प्रामाणिक है और किसका नहीं। लिहाजा यहां चर्चा की कोई जरूरत ही नहीं है।”
खबर है कि कुछ समय पहले ही टीवी9 छोड़कर जी मीडिया में शामिल हुए प्रसन्ना राघव अब उनकी जगह यह जिम्मेदारी संभालेंगे। हालांकि, आधिकारिक रूप से अभी इसकी घोषणा नहीं हुई है।
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Samachar4media Bureau
देश के प्रमुख मीडिया नेटवर्क्स में शामिल ‘जी मीडिया’ (Zee Media) से जुड़ी एक अहम खबर सामने आई है। विश्वसनीय सूत्रों के हवाले से मिली खबर के मुताबिक कंपनी में वाइस प्रेजिडेंट (IPs, Events और Special Projects) के पद पर कार्यरत पंकज श्रीवास्तव ने अपना इस्तीफा सौंप दिया है।
सूत्रों की मानें तो पंकज श्रीवास्तव ने पिछले महीने ही संस्थान को अपना इस्तीफा सौंप दिया था और फिलहाल नोटिस पीरियड सर्व कर रहे थे। एक जुलाई 2026 इस संस्थान में उनका आखिरी कार्यदिवस होगा।
विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, जुलाई के पहले सप्ताह में वह अपनी नई पारी शुरू कर सकते हैं। हालांकि, उनका अगला पड़ाव क्या होगा, फिलहाल इस बारे में कुछ पता नहीं चल सका है। खबर है कि कुछ समय पहले ही टीवी9 छोड़कर जी मीडिया में शामिल हुए प्रसन्ना राघव अब उनकी जगह यह जिम्मेदारी संभालेंगे। हालांकि, आधिकारिक रूप से अभी इसकी घोषणा नहीं हुई है।
गौरतलब है कि पंकज श्रीवास्तव ने नवंबर 2024 में ‘जी मीडिया’ जॉइन किया था। उस समय उन्हें वाइस प्रेजिडेंट (IPs, Events & Special Projects) की अहम जिम्मेदारी सौंपी गई थी। अपनी भूमिका में वह ब्रैंडेड कंटेंट इनिशिएटिव्स, नए IPs और स्पेशल प्रोजेक्ट्स के निर्माण और क्रियान्वयन का नेतृत्व कर रहे थे।
इससे पहले वह ‘नेटवर्क18’ से जुड़े रहे, जहां उन्होंने करीब दो दशकों से अधिक समय तक काम किया और टेलीविजन व डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर कई बड़े इवेंट्स, कॉन्क्लेव और ब्रैंडेड सॉल्यूशंस विकसित किए। फिलहाल इस पूरे मामले पर ‘जी मीडिया’ की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। समाचार4मीडिया की ओर से पंकज श्रीवास्तव को उनकी नई पारी के लिए अग्रिम रूप से ढेरों शुभकामनाएं।
त्रिपुरा सरकार ने राज्य के पत्रकारों के कल्याण के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कई अहम फैसले लिए हैं।
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Vikas Saxena
त्रिपुरा सरकार ने राज्य के पत्रकारों के कल्याण के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कई अहम फैसले लिए हैं। सरकार ने पत्रकारों की पेंशन बढ़ाने के साथ-साथ उनके परिवारों के लिए भी सुरक्षा योजनाओं का विस्तार किया है।
राज्य में लागू त्रिपुरा जर्नलिस्ट ऑनर पेंशन स्कीम के तहत अब पात्र पत्रकारों को मिलने वाली मासिक पेंशन को 1,000 रुपये से बढ़ाकर 10,000 रुपये कर दिया गया है। यह फैसला 2018 में मौजूदा सरकार बनने के बाद शुरू की गई योजनाओं को और मजबूत करने के लिए लिया गया है।
इसके अलावा सरकार ने त्रिपुरा जर्नलिस्ट फैमिली सिक्योरिटी पेंशन स्कीम भी शुरू की है, जिसके तहत किसी पत्रकार के निधन के बाद उनके पात्र परिवार को हर महीने 5,000 रुपये की पेंशन दी जाती है।
सरकार ने बताया कि इन योजनाओं को और आसान और प्रभावी बनाने के लिए 2025 में दिशा-निर्देशों में बदलाव (amendments) भी किए गए हैं।
हाल ही में सरकार ने 5 और सेवानिवृत्त पत्रकारों को पेंशन मंजूर की है, जिसके बाद सम्मान पेंशन पाने वाले पत्रकारों की कुल संख्या बढ़कर 13 हो गई है। वहीं परिवार सुरक्षा पेंशन योजना के तहत 2 और परिवारों को जोड़ा गया है, जिससे लाभ पाने वाले परिवारों की संख्या बढ़कर 7 हो गई है।
इसके साथ ही पत्रकार कल्याण कोष (Journalist Welfare Fund) के तहत 4 पत्रकारों को इलाज के लिए आर्थिक मदद भी दी गई है।
राज्य सरकार के अनुसार ये सभी कदम पत्रकारों और उनके परिवारों की आर्थिक सुरक्षा, कल्याण और सामाजिक संरक्षण को मजबूत करने की दिशा में लगातार उठाए जा रहे प्रयासों का हिस्सा हैं।
'डिश टीवी' (Dish TV) के चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर (CTO) वीरेंद्र गुप्ता ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।
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Vikas Saxena
जी मीडिया कॉरपोरेशन (Zee Media Corporation Limited) ने प्रेफरेंशियल आधार पर जारी किए गए वारंट्स के बदले 3 करोड़ (3,00,00,000) नए इक्विटी शेयर आवंटित कर दिए हैं।
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Vikas Saxena
जी मीडिया कॉरपोरेशन (Z Media Corporation Limited) ने प्रेफरेंशियल आधार पर जारी किए गए पूरी तरह परिवर्तनीय (Fully Convertible) वारंट्स में से 3 करोड़ वारंट्स को इक्विटी शेयरों में बदलकर 3 करोड़ नए शेयर आवंटित किए हैं। कंपनी ने इसकी जानकारी शेयर बाजार को दी है।
कंपनी के मुताबिक, Sun India Opportunities Investing Fund Incorporated VCC Sub-Fund, जो Sun Alpha Global VCC का एक सब-फंड है और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) की पब्लिक कैटेगरी में आता है, ने अपने पास मौजूद 5 करोड़ वारंट्स में से 3 करोड़ वारंट्स को इक्विटी शेयरों में बदलने का विकल्प इस्तेमाल किया।
इसके लिए निवेशक ने वारंट की कीमत का बचा हुआ 75% यानी 19.125 करोड़ रुपये कंपनी को जमा कराया। इसके बाद 30 जून 2026 को हुई बोर्ड बैठक में कंपनी ने 3 करोड़ पूरी तरह चुकता (Fully Paid-up) इक्विटी शेयर, प्रत्येक 1 रुपये फेस वैल्यू वाले, निवेशक के नाम आवंटित करने को मंजूरी दे दी।
कंपनी ने बताया कि ये शेयर 8.50 रुपये प्रति शेयर के इश्यू प्राइस (जिसमें 7.50 रुपये प्रीमियम शामिल है) पर आवंटित किए गए हैं। इससे पहले वारंट जारी करते समय निवेशक ने कुल कीमत का 25% भुगतान किया था, जबकि शेष 75% राशि अब वारंट को शेयरों में बदलने के समय जमा कराई गई है।
शेयर आवंटन के बाद भी इस निवेशक के पास 2 करोड़ वारंट्स बचे हुए हैं। कंपनी के अनुसार, इन्हें 25 जून 2026 को वारंट आवंटित होने की तारीख से 18 महीने के भीतर कभी भी इक्विटी शेयरों में बदला जा सकता है।
कंपनी ने यह भी बताया कि नए आवंटित शेयर मौजूदा इक्विटी शेयरों के समान अधिकार (pari passu) रखेंगे और आवश्यक मंजूरियां मिलने के बाद इनकी लिस्टिंग और ट्रेडिंग BSE Limited और National Stock Exchange of India Limited पर शुरू होगी।
इस आवंटन के बाद कंपनी की जारी, सब्सक्राइब्ड और चुकता शेयर पूंजी 62.54 करोड़ शेयरों से बढ़कर 65.54 करोड़ शेयर हो गई है।
कंपनी के अनुसार, शेयरों के इस आवंटन के बाद Sun India Opportunities Investing Fund Incorporated VCC Sub-Fund की हिस्सेदारी पूरी तरह डायल्यूटेड आधार (Fully Diluted Basis) पर 3.33% होगी। यह गणना इस आधार पर की गई है कि कंपनी द्वारा जारी सभी लंबित वारंट भविष्य में शेयरों में परिवर्तित हो जाएंगे।
जी मीडिया ने कहा कि इस आवंटन से जुड़ी अन्य आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद आगे की जानकारी भी शेयर बाजार को समय-समय पर उपलब्ध कराई जाएगी।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब Zee Entertainment ने अपनी दीर्घकालिक विकास रणनीति को गति देने के लिए कम से कम 2,300 करोड़ रुपये जुटाने की योजना की घोषणा की है।
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'जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड' (Zee Entertainment Enterprises Limited) में करीब तीन साल बाद वैश्विक निवेश प्रबंधन कंपनी Invesco की वापसी हुई है। कंपनी में OFI Global China Fund LLC की ओर से किए गए 418 करोड़ रुपये के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) को भारत सरकार ने मंजूरी दे दी है।
उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, यह निवेश वित्त वर्ष 2025-26 की जनवरी-मार्च तिमाही के दौरान शेयर खरीद के माध्यम से किया गया था। यह प्रस्ताव उस अवधि में सरकार द्वारा मंजूर किए गए 1,141 विदेशी निवेश प्रस्तावों में शामिल है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब Zee Entertainment ने अपनी दीर्घकालिक विकास रणनीति को गति देने के लिए कम से कम 2,300 करोड़ रुपये जुटाने की योजना की घोषणा की है। कंपनी यह राशि इक्विटी से जुड़े वित्तीय साधनों (Equity-linked Instruments) के जरिए जुटाएगी। इस पूंजी का उपयोग डिजिटल प्लेटफॉर्म, खेल कारोबार समेत प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्रों में निवेश और कंपनी की वित्तीय स्थिति को और मजबूत करने के लिए किया जाएगा।
गौरतलब है कि Invesco ने अप्रैल 2023 में Zee Entertainment में अपनी पूरी हिस्सेदारी बेच दी थी। उस समय OFI Global China Fund LLC ने लगभग 5.11 प्रतिशत हिस्सेदारी ब्लॉक डील के जरिए बेची थी। इस सौदे का मूल्य करीब 1,004 करोड़ रुपये था, जिसमें 4.91 करोड़ (49.1 मिलियन) शेयर 204.50 रुपये प्रति शेयर के भाव पर बेचे गए थे। इसके साथ ही कंपनी और निवेशक के बीच कॉरपोरेट गवर्नेंस को लेकर लंबे समय तक चले विवाद का एक अध्याय भी समाप्त हो गया था।
अब सरकार से 418 करोड़ रुपये के इस प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) को मंजूरी मिलने के साथ ही OFI Global China Fund LLC के जरिए Invesco की करीब तीन साल बाद Zee Entertainment में वापसी हो गई है।
मीडिया सेल्स इकोसिस्टम में अपने योगदान के लिए श्रेष्ठ कपूर को e4m Revenue Leaders 30 Under 30 Award से भी सम्मानित किया जा चुका है।
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देश के प्रमुख मीडिया संस्थानों में शामिल ‘एनडीटीवी’ (NDTV) ने श्रेष्ठ कपूर को ब्रैंड स्टूडियो में रीजनल हेड (नॉर्थ) नियुक्त किया है। इस नियुक्ति के साथ कंपनी ने उत्तर भारत में अपने ब्रैंडेड कंटेंट और इंटीग्रेटेड मार्केटिंग क्षमताओं को और मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाया है।
नई भूमिका में श्रेष्ठ कपूर उत्तर भारत में एनडीटीवी ब्रैंड स्टूडियो के विस्तार की जिम्मेदारी संभालेंगे। वह स्ट्रैटेजिक ब्रैंड पार्टनरशिप विकसित करने के साथ-साथ एनडीटीवी के मल्टी-प्लेटफॉर्म इकोसिस्टम के लिए कंटेंट आधारित इंटीग्रेटेड मार्केटिंग सॉल्यूशंस तैयार करने पर काम करेंगे।
श्रेष्ठ कपूर इससे पहले ‘टीवी9 नेटवर्क’ (TV9 Network) में टेरिटरी हेड-नॉर्थ, कंटेंट रेवेन्यू के पद पर कार्यरत थे। वहां उन्होंने उत्तर भारत में नेटवर्क के ब्रैंडेड कंटेंट बिजनेस को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। साथ ही विभिन्न क्षेत्रों के प्रमुख ब्रैंड्स के लिए इंटीग्रेटेड मार्केटिंग सॉल्यूशंस और दीर्घकालिक पार्टनरशिप्स विकसित करने में भी योगदान दिया।
ब्रैंडेड कंटेंट और सॉल्यूशंस सेल्स के क्षेत्र में श्रेष्ठ कपूर को रणनीतिक नेतृत्व के लिए जाना जाता है। उन्हें कंसल्टेटिव सेलिंग, इंटीग्रेटेड ब्रैंड पार्टनरशिप, कंटेंट मोनेटाइजेशन और बिजनेस डेवलपमेंट का काफी अनुभव है। उन्होंने लगातार ऐसे मार्केटिंग कैंपेन का नेतृत्व किया है, जिनमें प्रभावी स्टोरीटेलिंग के साथ कारोबारी परिणामों पर भी विशेष ध्यान दिया गया।
अपने करियर के दौरान उन्होंने Sensodyne, Samsung, Realme, All Out, Probo, DS Group, JK Tyre और Sleepwell जैसे प्रमुख ब्रैंड्स के लिए इंटीग्रेटेड ब्रैंडेड कंटेंट पार्टनरशिप्स पर काम किया है।
मीडिया सेल्स इकोसिस्टम में अपने योगदान के लिए श्रेष्ठ कपूर को e4m Revenue Leaders 30 Under 30 Award से भी सम्मानित किया जा चुका है।
समाचार4मीडिया को विश्वसनीय सूत्रों के हवाले से मिली खबर के मुताबिक, गौरव देवानी ने करीब दो हफ्ते पहले कंपनी को अपना इस्तीफा सौंप दिया था। इस संस्थान में 14 जुलाई उनका आखिरी कार्यदिवस होगा।
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देश के प्रमुख मीडिया नेटवर्क्स में शुमार ‘टाइम्स नेटवर्क’ (Times Network) में एग्जिक्यूटिव वाइस प्रेजिडेंट गौरव देवानी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।
समाचार4मीडिया को विश्वसनीय सूत्रों के हवाले से मिली खबर के मुताबिक, गौरव देवानी ने करीब दो हफ्ते पहले कंपनी को अपना इस्तीफा सौंप दिया था। इस संस्थान में 14 जुलाई उनका आखिरी कार्यदिवस होगा। खबर यह भी है कि गौरव देवानी अब एंटरप्रिन्योरिशप की दिशा में कदम बढ़ाने की तैयारी में हैं।
बता दें कि गौरव देवानी ने इसी साल मार्च में ‘टाइम्स नेटवर्क’ जॉइन किया था। इस नेटवर्क के साथ उनकी यह दूसरी पारी थी। इससे पहले गौरव देवानी करीब ढाई साल तक ‘एनडीटीवी’ (NDTV) में बतौर रेवेन्यू हेड कार्यरत थे। उन्होंने दिसंबर 2023 में ‘एनडीटीवी’ जॉइन किया था।
दो दशक से अधिक अनुभव रखने वाले गौरव देवानी बिजनेस डेवलपमेंट, मार्केटिंग, स्ट्रैटेजी और ऑपरेशंस के क्षेत्र में काम कर चुके हैं। एनडीटीवी से पहले वह टाइम्स नेटवर्क में सीनियर वाइस प्रेजिडेंट और नेशनल हेड (ब्रैंडेड कंटेंट) के पद पर थे, जहां उन्होंने टीवी और डिजिटल प्रॉपर्टीज के मोनेटाइजेशन की रणनीतियों का नेतृत्व किया।
इससे पहले वे ज़ी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज में भी वरिष्ठ पदों पर रह चुके हैं। उन्होंने सीए-मीडिया (पीटर चेर्निन ग्रुप के तहत) में भी काम किया, जहां उन्होंने लाइव एंटरटेनमेंट और फेस्टिवल प्रॉपर्टीज से जुड़े रेवेन्यू मॉडल्स पर काम किया।
उनका पेशेवर सफर द वॉल्ट डिज़्नी कंपनी, टाइम्स नेटवर्क, नेटवर्क18 और हिंदुस्तान टाइम्स जैसे बड़े मीडिया संस्थानों से भी जुड़ा रहा है, जहां उन्होंने विज्ञापन बिक्री, ब्रैंडेड कंटेंट और इंटीग्रेटेड मीडिया मोनेटाइजेशन में काम किया।
गौरव देवानी ने जिम्स, रोहिणी से मैनेजमेंट की पढ़ाई की है और आईआईएम कोलकाता से एग्जिक्यूटिव एमबीए की डिग्री ली है।
राहुल मिश्रा करीब नौ वर्षों से शेमारू एंटरटेनमेंट से जुड़े हुए थे। इस दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण नेतृत्वकारी जिम्मेदारियां निभाईं।
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‘शेमारू एंटरटेनमेंट लिमिटेड’ (Shemaroo Entertainment Limited) के हेड ऑफ डिजिटल इनोवेशन राहुल मिश्रा कंपनी से अलग हो गए हैं। राहुल मिश्रा करीब नौ वर्षों से शेमारू एंटरटेनमेंट से जुड़े हुए थे। इस दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण नेतृत्वकारी जिम्मेदारियां निभाईं।
अपने हालिया पद पर राहुल मिश्रा कंपनी में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), Web3 और इमर्सिव टेक्नोलॉजी से जुड़े अगली पीढ़ी के मीडिया प्लेटफॉर्म के विकास का नेतृत्व कर रहे थे। उनकी जिम्मेदारी नए डिजिटल अनुभव तैयार करने, कंपनी की बौद्धिक संपदा (IP) के बेहतर मुद्रीकरण (Monetization) के अवसर विकसित करने और उभरते डिजिटल इकोसिस्टम में इनोवेशन आधारित कारोबारी मॉडल को आगे बढ़ाने की रही।
इससे पहले वह शेमारू एंटरटेनमेंट में हेड ऑफ मार्केटिंग एंड कम्युनिकेशन की भूमिका भी निभा चुके हैं। इस दौरान उन्होंने कंपनी की नई पहचान, विजन और ब्रैंड लोगो को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
राहुल मिश्रा को मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में काम करने का काफी अनुभव है। उन्होंने भारत, एशिया-प्रशांत (APAC), मध्य पूर्व, यूरोप और उत्तरी अमेरिका के मीडिया इकोसिस्टम में मार्केटिंग, डिजिटल ग्रोथ और बिजनेस ट्रांसफॉर्मेशन से जुड़ी कई पहलों का नेतृत्व किया है।
शेमारू से पहले राहुल मिश्रा ‘इंडियाकास्ट मीडिया’ और ‘बीबीसी’ जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में भी वरिष्ठ भूमिकाओं में काम कर चुके हैं। अपने करियर के दौरान उन्होंने टीमों के साथ मिलकर OTT प्लेटफॉर्म विकसित करने, वैश्विक दर्शक आधार का विस्तार करने, कंटेंट मोनेटाइजेशन मॉडल को मजबूत बनाने और प्रभावी मार्केटिंग स्ट्रैटेजी के जरिए कारोबार की वृद्धि में योगदान दिया।
मातृभूमि ग्रुप के एमडी एम. वी. श्रेयम्स कुमार का कहना है, ‘मीडिया परिदृश्य लगातार बदल रहा है। ऐसे समय में उत्कृष्ट प्रतिभाओं को संगठन से जोड़ना हमारी विकास यात्रा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
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Samachar4media Bureau
केरल के अग्रणी मीडिया समूह मातृभूमि (Mathrubhumi) ने अपने डिजिटल, मानव संसाधन (एचआर) और सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) विभागों में चार वरिष्ठ स्तर की नियुक्तियों की घोषणा की है। कंपनी का कहना है कि इन नियुक्तियों का उद्देश्य नेतृत्व क्षमता को और मजबूत करना व संस्थान में इनोवेशन को गति देना है।
इस कवायद के तहत एबी ठाकरन को Mathrubhumi.com (मलयालम) का डिप्टी एडिटर नियुक्त किया गया है। पत्रकारिता के क्षेत्र में दो दशक से अधिक का अनुभव रखने वाले एबी ठाकरन इससे पहले 24 News और Asianet News में डिजिटल एडिटर के रूप में कार्य कर चुके हैं। वहां उन्होंने डिजिटल न्यूज स्ट्रैटेजी और ऑडियंस ग्रोथ में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने भूटान में संपादकीय टीमों के गठन और प्रिंट पब्लिकेशंस की शुरुआत में भी योगदान दिया। इसके अलावा वह भूटान में रॉयटर्स के संवाददाता भी रहे हैं। अपने करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने बहरीन के द डेली ट्रिब्यून (The Daily Tribune) में भी कार्य किया।
इसके अलावा, विपिन विजयन को Mathrubhumi.com (इंग्लिश) का डिप्टी एडिटर बनाया गया है। डिजिटल और टेलीविजन पत्रकारिता में 22 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले विपिन ने अपने करियर की शुरुआत द इंडियन एक्सप्रेस (The Indian Express) और ऑल इंडिया रेडियो (All India Radio) में इंटर्न के रूप में की थी। इसके बाद उन्होंने यूनाइटेड न्यूज ऑफ इंडिया (UNI) में ट्रेनी एडिटर के रूप में काम किया और फिर Rediff.com के न्यूज डेस्क से जुड़े। मुंबई में रेडिफ के साथ 12 वर्षों के दौरान उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता, न्यूज रूम प्रबंधन और राष्ट्रीय समाचार कवरेज का व्यापक अनुभव हासिल किया। वर्ष 2017 में वह रिपब्लिक टीवी (Republic TV) की संस्थापक टीम में न्यूज एडिटर के रूप में शामिल हुए। इसके बाद उन्होंने एशियानेट न्यूज (Asianet News) के इंग्लिश डिजिटल वर्टिकल के एडिटर के रूप में इसकी राष्ट्रीय डिजिटल उपस्थिति को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
वहीं, गायत्री गोपाकुमार को हेड, ह्यूमन रिसोर्सेज (टीआरडी–टेलीविजन, रेडियो एवं डिजिटल) नियुक्त किया गया है। उन्हें मीडिया, ब्रॉडकास्टिंग और आईटी क्षेत्र में मानव संसाधन प्रबंधन का व्यापक अनुभव है। वह इससे पहले मातृभूमि, एशियानेट न्यूज (Asianet News) और मलयाला मनोरमा (Malayala Manorama) जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं के साथ काम कर चुकी हैं। उनकी विशेषज्ञता टैलेंट एक्विजिशन, कर्मचारी सहभागिता, लर्निंग एंड डेवलपमेंट, ऑर्गनाइजेशनल डेवलपमेंट, विविधता, समानता एवं समावेशन (DEI) और समग्र एचआर रणनीति में रही है। मातृभूमि में वह टेलीविजन, रेडियो और डिजिटल कारोबार के लिए मानव संसाधन रणनीति का नेतृत्व करेंगी। उनका फोकस विभिन्न मीडिया वर्टिकल्स में प्रतिभा प्रबंधन, उच्च प्रदर्शन वाली कार्य संस्कृति विकसित करने और तकनीक आधारित एचआर रणनीति के जरिए कारोबार की वृद्धि को समर्थन देने पर रहेगा।
इसी क्रम में कार्तिकेयन के. को लीड, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन नियुक्त किया गया है। उनके पास टेक्नोलॉजी और प्रोडक्ट लीडरशिप का 18 वर्षों से अधिक का अनुभव है, जिसमें एक दशक से ज्यादा समय वरिष्ठ नेतृत्व पदों पर रहा है। उन्होंने एडटेक, मीडिया, ई-कॉमर्स, कंटेंट मैनेजमेंट सिस्टम (CMS) और प्लेटफॉर्म इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में बड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म और इंजीनियरिंग टीमों का नेतृत्व किया है। मातृभूमि से पहले वह THG Publishing Pvt. Ltd. (The Hindu Group) में हेड ऑफ टेक्नोलॉजी थे। इससे पहले उन्होंने Grade Results Technologies Pvt. Ltd. और Magzter Digital Pvt. Ltd. में भी नेतृत्वकारी भूमिकाएं निभाईं, जहां उन्होंने कई डिजिटल और उपभोक्ता-केंद्रित प्लेटफॉर्म के विकास और विस्तार का नेतृत्व किया।
इन नियुक्तियों पर मातृभूमि ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर एम. वी. श्रेयम्स कुमार का कहना है, ‘मीडिया परिदृश्य लगातार बदल रहा है। ऐसे समय में उत्कृष्ट प्रतिभाओं को संगठन से जोड़ना हमारी विकास यात्रा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। ये नियुक्तियां हमारी नेतृत्व टीम को और मजबूत करेंगी तथा इनोवेशन, डिजिटल उत्कृष्टता, प्रतिभा विकास और अपने पाठकों एवं अन्य हितधारकों (स्टेकहोल्डर्स) के लिए बेहतर मूल्य प्रदान करने की हमारी प्रतिबद्धता को और सशक्त बनाएंगी।’
इस कार्यक्रम के तहत उन कम्युनिकेशंस पहलों और कैंपेन को सम्मानित किया जाएगा, जिन्होंने प्रभावशाली स्टोरीटैलिंग व स्ट्रैटेजिक कम्युनिकेशन के माध्यम से कारोबारी प्रभाव तैयार करने में अहम भूमिका निभाई है।
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India PR & Corporate Communications Awards (IPRCCA) के 16वें एडिशन में Lotte India (Havmor Ice Cream Division) के मैनेजिंग डायरेक्टर देबब्रत मुखर्जी जूरी चेयर की भूमिका निभाएंगे। अपनी इस भूमिका में वह कम्युनिकेशन, मार्केटिंग और कॉरपोरेट अफेयर्स से जुड़े वरिष्ठ विशेषज्ञों के एक प्रतिष्ठित पैनल का नेतृत्व करेंगे।
यह पैनल विभिन्न प्रविष्टियों का मूल्यांकन रचनात्मकता, रणनीतिक सोच, क्रियान्वयन, नवाचार और मापनीय कारोबारी परिणामों के आधार पर करेगा। जूरी प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और कठोर मूल्यांकन प्रणाली पर आधारित होगी। अनुभवी उद्योग विशेषज्ञ तय मानकों के अनुसार सभी प्रविष्टियों की समीक्षा करेंगे और विजेताओं का चयन करेंगे।
बता दें कि यह पुरस्कार जनसंपर्क (PR), कॉरपोरेट कम्युनिकेशन और प्रतिष्ठा प्रबंधन (Reputation Management) के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्यों को सम्मानित करने वाले देश के प्रमुख मंचों में शामिल है।
इस कार्यक्रम के तहत उन कैंपेन, स्ट्रैटेजी और कम्युनिकेशंस पहलों को सम्मानित किया जाएगा, जिन्होंने प्रभावशाली स्टोरीटैलिंग, स्टेकहोल्डर्स के साथ भरोसा कायम करने और स्ट्रैटेजिक कम्युनिकेशन के माध्यम से कारोबारी प्रभाव तैयार करने में उल्लेखनीय भूमिका निभाई है।
देबब्रत मुखर्जी के पास एफएमसीजी (FMCG) क्षेत्र में दो दशक से अधिक का लीडरशिप अनुभव है। उन्होंने देश की कई प्रमुख उपभोक्ता कंपनियों में ब्रैंड निर्माण, कारोबारी बदलाव और ग्रोथ स्ट्रैटेजी का नेतृत्व किया है। Lotte India (Havmor Ice Cream Division) के मैनेजिंग डायरेक्टर के रूप में उन्होंने कंपनी के विस्तार, उत्पाद पोर्टफोलियो को मजबूत बनाने और प्रतिस्पर्धी बाजार में कंज्यूमर्स के साथ कंपनी की भागीदारी बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
गौरतलब है कि India PR & Corporate Communications Awards समय के साथ कॉरपोरेट स्टोरीटेलिंग, स्टेकहोल्डर एंगेजमेंट, संकट संचार (Crisis Communication), पब्लिक अफेयर्स, ESG कम्युनिकेशन, डिजिटल पीआर और एकीकृत प्रतिष्ठा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्यों को सम्मानित करने का एक महत्वपूर्ण मंच बन चुका है। यह पुरस्कार एजेंसियों, ब्रैंड्स, सार्वजनिक क्षेत्र के संगठनों, स्टार्टअप्स और संचार प्रोफेशनल्स को सम्मानित करता है, जिन्होंने पिछले एक वर्ष के दौरान प्रभावशाली अभियान चलाए हैं।