भारतीय टीवी न्यूज मीडिया और ऐडवर्टाइजर्स आज मीडिया योजनाओं और बजट की रणनीति बनाने के लिए ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (BARC) इंडिया द्वारा जारी किए गए आंकड़ों पर पूरी तरह भरोसा करते हैं
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समाचार4मीडिया ब्यूरो
भारतीय टीवी न्यूज मीडिया और ऐडवर्टाइजर्स आज मीडिया योजनाओं और बजट की रणनीति बनाने के लिए ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (BARC) इंडिया द्वारा जारी किए गए आंकड़ों पर पूरी तरह भरोसा करते हैं।
इसलिए, कई लोग एकाधिक रेटिंग सिस्टम रखने का सुझाव देते हैं, जो विभिन्न डेमोग्राफिक्स में व्युअरशिप पैटर्न्स की अधिक सूक्ष्म समझ की अनुमति देता है।
पीटीसी नेटवर्क के एमडी व प्रेजिडेंट रबिन्द्र नारायण, जी मीडिया की चीफ रेवेन्यू ऑफिसर मोना जैन और ओमनिकॉम मीडिया ग्रुप के ग्रुप सीईओ कार्तिक शर्मा का मानना है कि मल्टी-रेटिंग सिस्टम प्रतिस्पर्धा के बीच उत्कृष्टता को बढ़ावा देगी।
दूसरी ओर, एकाधिक रेटिंग सिस्टम्स ब्रॉडकास्टर्स के साथ-साथ ऐडवर्टाइजर्स के लिए बढ़ी हुई जटिलताएं, रेटिंग में संभावित विसंगतियां और उच्च लागत जैसी चुनौतियां भी पेश कर सकती हैं।
रेटिंग की वर्तमान प्रणाली "त्रुटिपूर्ण" और "पक्षपाती है, क्योंकि इसे मुट्ठी भर लोगों द्वारा नियंत्रित किया जाता है", यह इंडस्ट्री के दिग्गजों का विचार था, जिन्होंने केवल एक के बजाय कई रेटिंग एजेंसियों की जरूरत पर जोर दिया, क्योंकि वर्तमान में एकमात्र रेटिंग एजेंसी BARC है और इसकी वकालत करने वाले दिग्गजों का यह कहना है कि 'एकाधिकार लोगों को आत्मसंतुष्ट बना देता है।'
डिबेट के दौरान, चीजें तब और प्रबल हो गईं जब कुछ पैनलिस्ट्स, जो एकाधिक रेटिंग सिस्टम के प्रस्ताव के लिए बोल रहे थे, ने BARC रेटिंग पर सवाल उठाया, खासकर न्यूज चैनल्स के लिए, यह कहते हुए कि पॉलीटिशियन न्यूज चैनल्स पर विज्ञापन देने के लिए पैसा खर्च तो करते हैं, लेकिन जनरल एंटरटेनमेंट चैनल्स पर नहीं, यह इस बात का पर्याप्त प्रमाण है कि यह जॉनर BARC द्वारा दी गई रेटिंग से कहीं बेहतर प्रदर्शन कर रही है।
एकाधिक रेटिंग सिस्टम के प्रस्ताव के खिलाफ अपने-अपने विचार प्रस्तुत करने के लिए स्ट्रैटजिक मार्केटिंग व मीडिया कंसल्टेंट चिंतामणि राव, डाबर इंडिया के मीडिया हेड राजीव दुबे और भारत एक्सप्रेस न्यूज नेटवर्क के डायरेक्टर व सीईओ वरुण कोहली नई दिल्ली में e4m की मीडिया डिबेट में शामिल हुए। BW बिजनेसवर्ल्ड मीडिया ग्रुप के चेयरमैन व एडिटर-इन-चीफ और e4m ग्रुप के फाउंडर डॉ. अनुराग बत्रा ने डिबेट की अध्यक्षता की।
जी मीडिया की चीफ रेवेन्यू ऑफिसर मोना जैन ने डिबेट की शुरुआत करते हुए कहा, “एक ऐडवर्टाइजर्स की निर्भरता एजेंसी के माध्यम से एक विशेष मीडिया प्लान लेने पर होती है। दूसरी ओर, ब्रॉडकास्टर पूरी तरह से मीजरमेंट सिस्टम की दया पर निर्भर है, जो यह तय करता है कि आपकी क्या रैंक हैं। मुद्दा यह है कि कोई यह नहीं देखता कि जमीनी हकीकत क्या है। इसलिए, मैंने एजेंसियों और ऐडवर्टाइजर्स से यह कहना शुरू कर दिया है कि वे मेरे डिजिटल प्लेटफॉर्म की रैंकिंग को भी देखें, लेकिन BARC की रेटिंग अभी भी उनके लिए महत्वपूर्ण वैल्यू रखती है।
उन्होंने आगे सुझाव दिया कि हमारे पास एक प्रमाणित, मान्य, स्वीकृत करेंसी होनी चाहिए जिसे ऐडवर्टाइजर्स और एजेंसियों द्वारा भी मान्यता प्राप्त और मूल्यवान माना जाए।
विरोधी रुख पेश करते हुए स्ट्रैटजिक मार्केटिंग व मीडिया कंसल्टेंट चिंतामणि राव ने समझाया, "BARC और इसकी कार्यप्रणाली के बारे में कई संदेह हैं लेकिन मैं इस बात पर कायम हूं कि ऑडियंस मीजरमेंट सरकार का काम नहीं है।"
अंत में, यह चर्चा वेंडर्स की संख्या को लेकर नहीं होनी चाहिए बल्कि यह इस बात पर होनी चाहिए कि इसे कैसे मैनेज किया जाता है। उन्होंने कहा कि मुख्य मुद्दा यह है कि BARC पर उसके एक घटक का प्रभुत्व है और उसी को मापा जा रहा है।
इस दौरान चिंतामणि राव से सवाल किया गया कि यदि ऐडवर्जाइजर्स का पैसा पूरे मीडिया इकोसिस्टम को ईंधन देता है, तो उन्होंने 60 प्रतिशत पर इंडियन ब्रॉडकास्टिंग एंड डिजिटल फाउंडेशन (IBDF) के साथ एक स्ट्रक्चर क्यों स्वीकार किया?"
इस पर डिबेट में शामिल हुए ओमनिकॉम मीडिया ग्रुप के ग्रुप सीईओ कार्तिक शर्मा ने कहा कि यदि हम कुछ समय के लिए इंडस्ट्री को भूल जाएं, तो हमें NSE और BSE की जरूरत क्यों है? हमें CIBIL और Experian की आवश्यकता क्यों है? इसका संक्षिप्त उत्तर इनोवेशन और कम्पटीशन है। यदि कोई कम्पटीशन ही नहीं होगा, तो हम जिस भी कैटेगरी में काम करेंगे, उस हर एक कैटेगरी में एक ब्रैंड होगा।
उन्होंने कहा कि यहां तक कि संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे मार्केट में भी, जहां सबसे बड़ा AdEx मार्केट है, दो सिस्टम्स हैं। यहां तक कि यूके, ऑस्ट्रेलिया, मलेशिया, फिलीपींस और कई अन्य देशों में भी दो ऑडियंस मीटरमेंट सिस्टम्स हैं। भारत जैसे बड़ी आबादी वाले देश में दो सिस्टम्स बेहतर सैम्पलिंग और सेगमेंटेशन में मदद करेंगी।
इसके बाद डाबर इंडिया के मीडिया हेड राजीव दुबे ने मंच संभाला और बताया कि कैसे एक, दो या एकाधिक रेटिंग सिस्टम एक ऐडवर्टाइजर्स के लिए मायने नहीं रखते। आखिरकार, इससे ब्रैंड को बेचने में मदद मिलनी चाहिए। उनका उद्देश्य कंज्युमर्स तक सबसे सस्ते तरीके से पहुंचना है।
उन्होंने कहा कि BARC का विचार एक मजबूत सिस्टम बनाना था, जो सभी को अच्छी तरह से माप सके। क्या हम ऐसा करने में सक्षम हैं? शायद हां भी या शायद नहीं भी।
बदलते समय के साथ, दर्शकों की जरूरतें बदल गई हैं और NCCS एक ऐसी प्रणाली थी जो कंज्युमर्स ड्यूरेबल्स के स्वामित्व के आधार पर लोगों के वर्ग को मापती थी। लेकिन अब, नया प्रस्तावित ISEC उन कमियों को पूरा करता है।
कंज्युमर्स ने भी डिजिटल और ओटीटी की ओर अधिक ध्यान देते हुए विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर कंटेंट को कंज्यूम करना शुरू कर दिया है। राजीव दुबे का मानना है, “हम अभी तक उस दर्शक वर्ग का सही आकलन नहीं कर पाए हैं। इसलिए, भारतीय टीवी इंडस्ट्री को एक सिस्टम की जरूरत है और उस सिस्टम को इस तरह से मजबूत करने की जरूरत है कि वह टीवी और डिजिटल दर्शकों को समान रूप से माप सके।
मल्टीपल ऑडियंस मेजरमेंट सिस्टम होने पर डाबर के प्रवक्ता ने कहा, "समस्या को हल करने के लिए, आपको दूसरी समस्या नहीं बनानी चाहिए, बल्कि समस्या को ठीक करना चाहिए।" पीटीसी के रबिन्द्र नारायण, जो प्रस्ताव के पक्ष में खड़े थे, ने कहा, “तथ्य यह है कि हम यहां खड़े हैं और इस मुद्दे पर चर्चा कर रहे हैं, तो इसका मतलब है कि मौजूदा प्रणाली में विश्वास और विश्वसनीयता की कमी है। हम यह भी आधार बना रहे हैं कि टीवी रेटिंग्स से हमारा तात्पर्य केवल लीनियर टीवी रेटिंग्स से है क्योंकि BARC यही करता है।
उन्होंने आगे बताया कि BARC इमेज मैपिंग के जरिए मीटरमेंट करता है और इसलिए, जब कोई चैनल किसी भी प्लेटफॉर्म पर अपना वॉटरमार्क डालता है, तो यह BARC के लिए मापने योग्य हो जाना चाहिए क्योंकि उनके पास पहले से ही इसकी तकनीक है।
उन्होंने कहा कि तो फिर वे ऐसा क्यों नहीं करते? क्योंकि उन्हें अधिक निवेश की नहीं बल्कि एनालिसिस पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है। समस्या यह है कि इकोसिस्टम उन रेटिंग्स के विस्तार की अनुमति नहीं दे रहा है।
आज, BARC का कहना है कि 100 में से 9 लोग PTC देखते हैं, जो असंभव है और ऐडवर्टाइजर्स तदनुसार ऐड रेट्स के लिए मोलभाव करते हैं। चैनल आज भी अच्छे शो में निवेश कर रहे हैं, लेकिन BARC के डेटा के कारण ऐडवर्टाइजर्स की दिलचस्पी कम है। यदि इसमें कोई सच्चाई है, तो PTC जैसे खिलाड़ी एकाधिक रेटिंग सिस्टम के लिए क्यों नहीं लड़ेंगे?
इस दौरान मोना जैन ने कहा, “जब चंद्रयान लॉन्च किया गया था, तो दुनिया और भारत में हर कोई इसे देख रहा था, लेकिन यदि आप BARC डेटा देखें, तो उस विशेष सप्ताह में न्यूज जॉनर की रेटिंग कम हुई थी। क्या यह संभव है? न्यूज जॉनर को लेकर BARC जो रेटिंग्स का अनुमान लगा रही है, तो रेटिंग्स उससे कहीं अधिक है।
चंद्रयान के लॉन्च वाले दिन भी, BARC डेटा में कोई उछाल नहीं आया। मोना जैन और रबिन्द्र नारायण दोनों का मानना है कि मौजूदा सिस्टम त्रुटिपूर्ण और पक्षपाती है क्योंकि इसे मुट्ठी भर लोगों द्वारा नियंत्रित किया जाता है।
रबिन्द्र नारायण ने कहा, “तथ्य यह है कि हम यह चर्चा कर रहे हैं, इसका तात्पर्य यह है कि मौजूदा सिस्टम में विश्वास की कमी है। इसमें विश्वसनीयता का अभाव है। BARC केवल लीनियर टीवी का विश्लेषण करता है, जो सैटेलाइट और केबल के माध्यम से प्रसारित किया जाता है। आज टीवी देखना सिर्फ लीनियर टीवी नहीं है, इसके कई रूप हैं जैसे कनेक्टेड टीवी और फास्ट टीवी एक ही स्क्रीन पर आते हैं, लेकिन BARC इसे माप नहीं रहा है।''
नारायण ने आगे कहा कि अब समय आ गया है कि कुछ नया किया जाए और केवल टेलीविजन रेटिंग पॉइंट्स के बजाय कंटेंट रेटिंग पर ध्यान दिया जाए।
उन्होंने का कि BARC के अनुसार, पूरे देश में न्यूज जॉनर की पहुंच 6-7% है, यदि यह सच है तो राजनेता न्यूज चैनलों पर विज्ञापन पर खर्च करने के लिए ही क्यों उत्सुक हैं? जनरल एंटरटेनमेंट चैनलों पर क्यों नहीं? इस बाइबिल (BARC) जो कि कबाड़ है, के आधार पर ऐडवर्टाइजर्स द्वारा अधिकतम कंज्युमर्स तक पहुंचने के लिए सारा पैसा क्यों खर्च किया जाता है? जब तकनीक और सिस्टम बदल रहे हैं तो हम टीवी रेटिंग पॉइंट्स के लिए क्यों लड़ रहे हैं, कंटेंट रेटिंग पॉइंट्स के लिए क्यों नहीं?
उन्होंने तर्क दिया, “रेटिंग की वर्तमान प्रणाली (BARC द्वारा) त्रुटिपूर्ण और पक्षपाती है, क्योंकि इसे मुट्ठी भर लोगों द्वारा नियंत्रित किया जाता है। ब्रॉडकास्टर लॉबी को चार व्यावसायिक घरानों द्वारा नियंत्रित किया जाता है, इसलिए यह हमेशा उनके पक्ष में रहेगा। डेटा भी यही दिखाता है।''
भारत एक्सप्रेस के वरुण कोहली ने कहा, “BARC अस्तित्व में आया क्योंकि पब्लिशर्स एक अलग रेटिंग प्रणाली चाहते थे और फिर एक तंत्र की कल्पना की गई। अब, उस प्रणाली पर सिर्फ इसलिए सवाल उठाना क्योंकि रेटिंग सही अनुपात में नहीं है या यह डिजिटल दर्शकों को मैप नहीं करती है और इसके अलावा एक अलग निकाय की ही मांग करना, मुझे नहीं लगता कि यह सही तरीका है।
समाधान के तौर पर उन्होंने सुझाव दिया कि इंडस्ट्री को एक साथ आने और BARC के साथ अधिकार क्षेत्र का उपयोग करने की जरूर है ताकि उन्हें बताया जा सके कि और क्या चाहिए और वे कहां बेहतर हो सकते हैं।
चिंतामणि राव ने यह भी सुझाव दिया कि एकाधिक खिलाड़ियों के बजाय एक एग्रीगेटर रखना बेहतर है। उस स्थिति में, एग्रीगेटर डेटा प्रदाता भी बन सकता है। BARC हमेशा विभिन्न स्रोतों से कई डेटा एकत्र कर सकता है और उसे प्रस्तुत कर सकता है।
दर्शकों की सही ढंग से मैपिंग करने से भी एक तरह से समस्या का समाधान हो जाएगा, जो प्रमुख रूप से ISEC के साथ किया जाएगा। राजीव दुबे ने कहा, यूनिफाइड मीजरमेंट होना भी एक अन्य समाधान है।
वहीं, कार्तिक शर्मा के अनुसार, “एक से अधिक खिलाड़ी होने से निश्चित रूप सेमे नवीनता को बढ़ावा मिलेगा और थोड़ी प्रतिस्पर्धा होगी, जो अच्छी है। अलग-अलग रेटिंग सिस्टम अलग-अलग लक्ष्य खंडों, समूहों और अन्य पर भी ध्यान केंद्रित कर सकते हैं।
“हमें स्क्रीन पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है, न कि लीनियर टीवी या डिजिटल पर। यह एक स्क्रीन-आधारित दुनिया है और लोग केवल वही कंटेंट देख रहे हैं, जो उनके लिए सार्थक है। इसलिए विभिन्न प्रकार के उपभोगों के लिए विभिन्न प्रकार के मीजरमेंट की आवश्यकता है। मेरा तर्क है कि इनोवेशन महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सही समय है।
उन्होंने कहा कि कंज्युमर मोबाइल या टीवी सेट के माध्यम से स्क्रीन को देख रहा है। हम इसे कैसे माप रहे हैं? कुछ प्रतिस्पर्धा होना बेहतर है। यह मानसिकता रखना महत्वपूर्ण है कि एक प्रणाली दूसरे की कैसे मदद कर सकती है। मौजूदा प्रणाली गलत नहीं है, लेकिन नई प्रणाली हमारे पास जो कुछ है उसे बढ़ा सकती है।
रबिन्द्र नारायण ने निष्कर्ष निकाला कि टेलीविजन देखने और इसके इस्तेमाल के तरीकों में बदलाव आया है। या तो BARC बदलते समय के अनुरूप आगे बढ़े या दूसरों को आगे आकर इस अंतर को भरना चाहिए। मार्केट की ताकतें ही तय करेंगी कि कौन रहेगा और कौन जाएगा, किसका डेटा प्रामाणिक है और किसका नहीं। लिहाजा यहां चर्चा की कोई जरूरत ही नहीं है।”
श्रीनिवासन के. स्वामी, जो AAAI के पूर्व अध्यक्ष हैं, 2026-27 के लिए AAAI बोर्ड में पदेन सदस्य के रूप में शामिल रहेंगे।
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Samachar4media Bureau
रेडिफ्यूजन ब्रैंड सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड के चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. संदीप गोयल को विज्ञापन एजेंसियों की संस्था एडवरटाइजिंग एजेंसीज एसोसिएशन ऑफ इंडिया (AAAI) का अध्यक्ष चुना गया है। मुंबई में आयोजित वार्षिक आम बैठक में उन्हें इस पद पर चुना गया, वहीं जयदीप आर गांधी को एसोसिएशन का उपाध्यक्ष चुना गया है।
2026-27 के लिए AAAI बोर्ड में चुने गए अन्य सदस्यों में सैम बालसारा, चेयरमैन एवं एमडी, मैडिसन कम्युनिकेशंस प्राइवेट लिमिटेड; प्रियंका चटर्जी, डायरेक्टर, स्टैंडर्ड पब्लिसिटी प्राइवेट लिमिटेड; तान्या गोयल, डायरेक्टर, एवरेस्ट ब्रैंड सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड; संतोष कुमार, सीओओ, इनोशियन वर्ल्डवाइड कम्युनिकेशंस प्राइवेट लिमिटेड; कुणाल ललानी, एमडी, क्रेयॉन्स एडवरटाइजिंग प्राइवेट लिमिटेड; चंद्रमौली मुथु, एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर, मैत्री एडवरटाइजिंग वर्क्स प्राइवेट लिमिटेड, कोच्चि; के. श्रीनिवास, मैनेजिंग डायरेक्टर, स्लोका एडवरटाइजिंग प्राइवेट लिमिटेड, हैदराबाद और अजीत वर्गीज, ग्रुप सीईओ, मीडिया एवं ओओएच, प्लेटिनम एडवरटाइजिंग प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं। श्रीनिवासन के. स्वामी, जो AAAI के पूर्व अध्यक्ष हैं, 2026-27 के लिए AAAI बोर्ड में पदेन सदस्य के रूप में शामिल रहेंगे।
अध्यक्ष चुने जाने के बाद डॉ. संदीप गोयल ने कहा कि AAAI के सदस्यों ने उन पर जो भरोसा जताया है, वह उनके लिए सम्मान की बात है। उन्होंने विज्ञापन में इनोवेशन को बढ़ावा देने, रचनात्मकता के उच्च मानकों को बनाए रखने और पिछले अध्यक्षों द्वारा किए गए कार्यों को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने कहा कि इस वर्ष संस्था का लक्ष्य पूरे विज्ञापन और मीडिया इकोसिस्टम को लगातार सहयोग देना होगा, ताकि इंडस्ट्री नई तकनीकों से पैदा होने वाली चुनौतियों से निपट सके और नए कारोबारी अवसरों का लाभ उठा सके।
डॉ. गोयल ने यह भी कहा कि AAAI का नया बोर्ड अनुभवी और प्रतिभाशाली है और उन्हें विश्वास है कि यह इंडस्ट्री को आगे ले जाएगा। उन्होंने बताया कि इस वर्ष युवा पीढ़ी के कौशल विकास पर भी ध्यान दिया जाएगा और सामाजिक मुद्दों से जुड़े कार्य किए जाएंगे, ताकि वास्तविक संचार समाज के बेहतर भविष्य में योगदान दे सके। बता दें कि डॉ. संदीप गोयल एमबीए, पीएचडी और डी.लिट. हैं। वह रेडिफ्यूजन और एवरेस्ट, दोनों स्वतंत्र विज्ञापन एजेंसियों के चेयरमैन हैं। उन्होंने पिछले 40 वर्षों में HTA (अब VML), त्रिकाया ग्रे (अब WPP का हिस्सा), DDB मुद्रा, रेडिफ्यूजन डेंट्सु और यंग एंड रूबिकैम जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं के साथ काम किया है।
वह जी टेलीफिल्म्स के पूर्व ग्रुप सीईओ और Dentsu India & Middle East के पूर्व इंडिया JV पार्टनर एवं चेयरमैन भी रहे हैं। डॉ. गोयल Snapchat के इंडिया एडवाइजरी बोर्ड के चेयरमैन रह चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने पंजाब सरकार में तीन वर्ष तक प्रिंसिपल सेक्रेटरी के रूप में भी काम किया है। वह कई किताबें लिख चुके हैं और नियमित रूप से द इकोनॉमिक टाइम्स, बिजनेस स्टैंडर्ड समेत अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों में कॉलम और लेख लिखते हैं।
वहीं, जयदीप आर गांधी ने कहा कि AAAI के उपाध्यक्ष के रूप में दोबारा चुना जाना उनके लिए सम्मान की बात है और यह इंडस्ट्री के भरोसे को दर्शाता है। उन्होंने विज्ञापन में इनोवेशन और उत्कृष्टता को बढ़ावा देने तथा इंडस्ट्री के विकास में योगदान देने की बात कही।
जयदीप गांधी Another Idea के संस्थापक हैं और 2008 से AAAI से जुड़े हैं। वह 2014 से AAAI के बोर्ड में हैं। उन्होंने Goafest में को-चेयर के रूप में काम किया और 2019 से इसके चेयरमैन हैं। AAAI के अलावा वह IAA India Chapter के बोर्ड सदस्य और Advertising Council of India के STACA Trust के ट्रस्टी हैं। AAAI के अनुसार, मानद सचिव, मानद कोषाध्यक्ष और अन्य को-ऑप्टेड निदेशकों के नाम बाद में घोषित किए जाएंगे। इसके लिए 2026-27 के निर्वाचित बोर्ड सदस्यों की बैठक में एसोसिएशन के नियमों के अनुसार रिक्त पदों को भरा जाएगा।
गौरतलब है कि AAAI इंडस्ट्री द्वारा संचालित और इंडस्ट्री प्रबंधित एक गैर-लाभकारी ट्रेड एसोसिएशन है। इसकी स्थापना 1945 में विज्ञापन एजेंसियों के इंडस्ट्री के हितों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई थी। AAAI के अनुसार, आज इसके सदस्य छोटे, मध्यम और बड़े आकार की बड़ी संख्या में एजेंसियों का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो मिलकर देश में किए जाने वाले विज्ञापन कारोबार का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा रखते हैं।
याप डिजिटल को नारायणा हेल्थ के देशभर के अस्पतालों के सोशल मीडिया मैंडेट की जिम्मेदारी मिली है। इसमें रणनीति, कंटेंट, क्रिएटिव, स्थानीय स्टोरीटेलिंग, प्लेटफॉर्म मैनेजमेंट और ऑडियंस एंगेजमेंट शामिल हैं।
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याप डिजिटल लिमिटेड (YAAP Digital Limited) को नारायणा हेल्थ (Narayana Health) के उत्तर, पूर्व, पश्चिम, दक्षिण और मध्य भारत स्थित अस्पतालों के सोशल मीडिया मैंडेट की जिम्मेदारी मिली है।
इस मैंडेट में सोशल मीडिया स्ट्रैटेजी (Social Media Strategy), कंटेंट डेवलपमेंट (Content Development), क्रिएटिव एग्जीक्यूशन (Creative Execution), स्थानीय स्टोरीटेलिंग (Local Storytelling), प्लेटफॉर्म मैनेजमेंट (Platform Management) और लगातार ऑडियंस एंगेजमेंट (Audience Engagement) शामिल हैं। इसके तहत नारायणा हेल्थ की कई अस्पताल इकाइयों और क्षेत्रीय सोशल मीडिया हैंडल्स का मैनेजमेंट किया जाएगा।
यह नई जिम्मेदारी हेल्थकेयर क्षेत्र में याप डिजिटल की मौजूदगी को और मजबूत करती है। कंपनी के अनुसार, उसे अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों में फैले सोशल मीडिया अकाउंट्स संभालने का अनुभव है। देशभर में मरीजों के समुदाय और सांस्कृतिक संदर्भ अलग-अलग होने को देखते हुए, हर अस्पताल इकाई की पहचान और स्थानीय संदर्भ से जुड़ी स्टोरीटेलिंग पर फोकस किया जाएगा।
इस साझेदारी पर नारायणा हेल्थ के कंट्री हेड- ब्रांड एंड मार्केटिंग अभिषेक मिश्रा (Abhishek Mishra) ने कहा कि उनके अस्पताल जिन समुदायों की सेवा करते हैं, वहां उनकी गहरी मौजूदगी है और सोशल मीडिया पर भी स्थानीय संदर्भ और प्रासंगिकता दिखाई देनी चाहिए। नेटवर्क में एक समान ब्रांड अनुभव बनाए रखते हुए भी हर अस्पताल इकाई अपने दर्शकों से अलग तरीके से जुड़ती है। उन्होंने कहा कि याप की स्थानीय स्टोरीटेलिंग क्षमता और बड़े स्तर पर अलग-अलग यूनिट पेज संभालने की क्षमता इस साझेदारी में अहम होगी।
याप डिजिटल के सीनियर पार्टनर मनन कपूर (Manan Kapoor) ने कहा कि नारायणा हेल्थ गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ बनाने की मजबूत विरासत रखने वाला संस्थान है। उन्होंने कहा कि कंपनी के साथ साझेदारी के जरिए क्रिएटिविटी, तकनीक और क्षेत्रीय समझ को जोड़कर समुदाय के स्तर पर सार्थक जुड़ाव बनाने की कोशिश की जाएगी।
मैंडेट के तहत याप डिजिटल नारायणा हेल्थ की विभिन्न अस्पताल इकाइयों के साथ मिलकर हर क्षेत्र के लिए उपयुक्त सोशल मीडिया रणनीति तैयार करेगा। इसका उद्देश्य अलग-अलग क्षेत्रों में अस्पतालों को स्थानीय समुदायों से अधिक प्रभावी और सार्थक तरीके से जोड़ना है।
संजय कुमार इससे पहले करीब दो साल से Zee Media के हाइपरलोकल न्यूज प्लेटफॉर्म PINEWZ में एडिटर की जिम्मेदारी संभाल रहे थे
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Samachar4media Bureau
वरिष्ठ पत्रकार संजय कुमार ने देश के प्रमुख न्यूज नेटवर्क्स में शुमार ‘टाइम्स नेटवर्क’ (Times Network) के साथ नई पारी का आगाज किया है। उन्होंने टाइम्स नाउ डिजिटल में बतौर सीनियर एडिटर (स्पेशल प्रोजेक्ट्स) जॉइन किया है।
संजय कुमार इससे पहले करीब दो साल से Zee Media के हाइपरलोकल न्यूज प्लेटफॉर्म PINEWZ में एडिटर की जिम्मेदारी संभाल रहे थे
मूल रूप से बिहार के रहने वाले संजय कुमार को मीडिया में काम करने का करीब 30 साल का अनुभव है। पत्रकारिता में अपने करियर की शुरुआत उन्होंने ऑल इंडिया रेडियो से की। वह न्यूज एजेंसी एएनआई में बिहार-नेपाल के हेड भी रह चुके हैं। वह लंबे समय तक सहारा में भी कार्यरत रहे हैं, जहां उन्होंने ब्यूरो चीफ से लेकर आउटपुट हेड जैसी प्रमुख भूमिकाओं में अपनी जिम्मेदारी निभाई।
कुछ प्रॉडक्शन हाउसेज में काम करने के अलावा संजय कुमार ने आर्यन नामक टीवी चैनल की लॉन्चिंग में भी अहम जिम्मेदारी निभाई। इसके साथ ही वह महुआ टीवी, पी7, न्यूज नेशन और इंडिया डेली लाइव जैसे प्रतिष्ठित न्यूज संस्थानों में भी महत्वपूर्ण पदों पर अपनी भूमिकाएं निभा चुके हैं।
दिल्ली यूनिवर्सिटी के विद्यार्थी रहे संजय कुमार ने भारतीय विद्या भवन से पत्रकारिता की पढ़ाई की है। समाचार4मीडिया की ओर से संजय कुमार को उनके नए सफर के लिए ढेरों बधाई और शुभकामनाएं।
रुबिका ने जून में नेटवर्क18 को बाय बोलकर 'टाइम्स नाउ नवभारत' में सीनियर एग्जिक्यूटिव एडिटर के तौर पर नई पारी शुरू की थी। वह यहां वाइस प्रेजिडेंट (स्पेशल प्रोजेक्ट्स) की जिम्मेदारी भी संभाल रही थीं।
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जानी-मानी पत्रकार और लोकप्रिय न्यूज एंकर रुबिका लियाकत को लेकर मीडिया जगत में नई चर्चा जोर पकड़ रही है। इन चर्चाओं के अनुसार हाल ही में 'टाइम्स नाउ नवभारत' से अलग होने के बाद रुबिका लियाकत एक बार फिर 'न्यूज18 इंडिया' का रुख कर सकती हैं। विश्वसनीय सूत्रों की मानें तो वह यहां शाम सात बजे का शो कर सकती हैं और स्पेशल प्रोजेक्ट्स की जिम्मेदारी भी संभाल सकती हैं। हालांकि, इस बारे में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।
इस संबंध में पुष्टि के लिए समाचार4मीडिया की टीम ने नेटवर्क18 प्रबंधन और रुबिका लियाकत से संपर्क किया, लेकिन खबर लिखे जाने तक वहां से किसी तरह की प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी थी।
बता दें कि रुबिका लियाकत ने इसी वर्ष जून में 'टाइम्स नाउ नवभारत' में सीनियर एग्जिक्यूटिव एडिटर के तौर पर नई पारी शुरू की थी। इसके साथ ही वह नेटवर्क में वाइस प्रेजिडेंट (स्पेशल प्रोजेक्ट्स) की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी संभाल रही थीं। वह नोएडा स्थित नेटवर्क कार्यालय से अपनी भूमिका का निर्वहन कर रही थीं, जहां से उन्होंने पिछले दिनों ही अपनी पारी को विराम दे दिया है।
'टाइम्स नाउ नवभारत' से अलग होने के साथ ही रुबिका लियाकत के अगले कदम को लेकर मीडिया इंडस्ट्री में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। इसी बीच यह चर्चा भी है कि वह अपने पुराने संस्थान 'न्यूज18 इंडिया' में वापसी कर सकती हैं।
गौरतलब है कि 'टाइम्स नाउ नवभारत' से पहले रुबिका लियाकत 'न्यूज18 इंडिया' में कंसल्टिंग एडिटर और प्राइम-टाइम एंकर के रूप में कार्यरत थीं। वहां उन्होंने कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों और विशेष कवरेज का नेतृत्व किया था और चैनल की प्रमुख चेहरों में शामिल थीं।
रुबिका लियाकत को ब्रॉडकास्ट जर्नलिज्म, राजनीतिक रिपोर्टिंग, प्राइम-टाइम एंकरिंग और न्यूजरूम नेतृत्व का 19 वर्षों से अधिक का अनुभव है। अपने पत्रकारिता करियर में उन्होंने एबीपी न्यूज, ज़ी न्यूज, न्यूज24, भारत24, लाइव इंडिया, नेटवर्क18 इंडिया और 'टाइम्स नाउ नवभारत' जैसे प्रमुख मीडिया संस्थानों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं।
फिलहाल उनकी अगली पारी को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन मीडिया गलियारों में उनकी संभावित वापसी को लेकर चर्चाएं लगातार जारी हैं।
याप डिजिटल लिमिटेड की 11वीं वार्षिक आम बैठक (एजीएम) मंगलवार, 29 सितंबर 2026 को दोपहर 2 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (वीसी) और अन्य ऑडियो-विजुअल माध्यम (ओएवीएम) के जरिए आयोजित हुई।
by
Vikas Saxena
English Headline: Yaap Digital Holds 11th AGM, Takes Up Five Resolutions
याप डिजिटल लिमिटेड की 11वीं वार्षिक आम बैठक (एजीएम) मंगलवार, 29 सितंबर 2026 को दोपहर 2 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (वीसी) और अन्य ऑडियो-विजुअल माध्यम (ओएवीएम) के जरिए आयोजित हुई। कंपनी ने यह बैठक कंपनी कानून, 2013 और संबंधित नियमों के साथ-साथ कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय और सेबी की लागू गाइडलाइंस के अनुसार आयोजित की।
बैठक की शुरुआत दोपहर 2 बजे हुई। कंपनी का रजिस्टर्ड ऑफिस ही बैठक का स्थान माना गया। कंपनी की कंपनी सेक्रेटरी और कंप्लायंस ऑफिसर शिवानी तिवारी ने सदस्यों का स्वागत किया और बताया कि बैठक वीसी/ओएवीएम के जरिए हो रही है। उन्होंने यह भी बताया कि बैठक में शामिल सदस्यों को किसी तरह की परेशानी से बचाने के लिए होस्ट की ओर से म्यूट रखा गया था और बैठक की रिकॉर्डिंग अनुपालन के लिए की जा रही थी।
इसके बाद कंपनी के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर लक्ष्मीराज सीताराम नायक ने बैठक की अध्यक्षता की। उन्होंने सदस्यों का स्वागत किया और बताया कि बैठक शुरू करने के लिए जरूरी संख्या में सदस्य मौजूद थे। इसके बाद उन्होंने बैठक शुरू करने की घोषणा की।
बैठक में कंपनी की इंडिपेंडेंट डायरेक्टर व नॉमिनेशन एंड रिम्यूनरेशन कमेटी की चेयरपर्सन वंदना मैथानी सिंह ने बताया कि वह दिल्ली से बैठक में शामिल हुईं। इंडिपेंडेंट डायरेक्टर और ऑडिट व स्टेकहोल्डर रिलेशनशिप कमेटी के चेयरमैन जगदेश बाबू बोट्टा और नॉन-एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर विजयकुमार मालपानी ने मलाड, मुंबई से बैठक में हिस्सा लिया।
कंपनी के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर जिगेश शाह, एजीएम के स्क्रूटिनाइजर मन्निश घिया, वैधानिक ऑडिटर्स के प्रतिनिधि प्रियंका जाजू और दिनेश जैन, सेक्रेटेरियल ऑडिटर्स की प्रतिनिधि दीप्ति शर्मा और कंपनी से जुड़े अन्य अधिकारी भी बैठक में मौजूद रहे।
बैठक में कुल 8 शेयरधारक/सदस्य वीसी/ओएवीएम के जरिए शामिल हुए।
वार्षिक रिपोर्ट और नोटिस
कंपनी सेक्रेटरी ने बताया कि 31 मार्च 2026 को समाप्त वित्त वर्ष की वार्षिक रिपोर्ट और 11वीं एजीएम का नोटिस सदस्यों के रजिस्टर्ड ईमेल पते पर पहले ही भेजा जा चुका था। इसमें ऑडिट किए गए स्टैंडअलोन और कंसोलिडेटेड वित्तीय नतीजे, बोर्ड की रिपोर्ट, ऑडिटर्स की रिपोर्ट और अन्य जरूरी दस्तावेज शामिल थे।
सदस्यों की सहमति से एजीएम का नोटिस पढ़ा हुआ मान लिया गया। कंपनी ने यह भी बताया कि वैधानिक ऑडिटर्स की रिपोर्ट में कोई क्वालिफिकेशन, रिजर्वेशन, प्रतिकूल टिप्पणी या डिस्क्लेमर नहीं था, इसलिए उसे बैठक में पढ़ने की जरूरत नहीं थी।
कंपनी सेक्रेटरी ने यह भी बताया कि सदस्यों को डायरेक्टर्स और प्रमुख मैनेजेरियल कर्मचारियों का रजिस्टर तथा कॉन्ट्रैक्ट या अरेंजमेंट से जुड़े रजिस्टर बैठक के दौरान देखने के लिए उपलब्ध थे। सदस्यों की ओर से पहले से कोई सवाल या पूछताछ नहीं मिली थी, इसलिए अलग से सवाल-जवाब सत्र की जरूरत नहीं पड़ी।
चेयरमैन ने कंपनी के प्रदर्शन की जानकारी दी
चेयरमैन लक्ष्मीराज सीताराम नायक ने सदस्यों को कंपनी के 31 मार्च 2026 को समाप्त वित्त वर्ष के प्रदर्शन और गतिविधियों की संक्षिप्त जानकारी दी। उन्होंने कंपनी के कारोबार और भविष्य की संभावनाओं को लेकर भी अपने विचार साझा किए।
उन्होंने सदस्यों को उनके लगातार समर्थन और एजीएम में शामिल होने के लिए धन्यवाद दिया।
ई-वोटिंग की सुविधा
कंपनी ने एजीएम में रखे गए प्रस्तावों पर मतदान के लिए नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (एनएसडीएल) के जरिए रिमोट ई-वोटिंग की सुविधा दी थी।
कंपनी ने बताया कि जिन सदस्यों ने पहले ही रिमोट ई-वोटिंग के जरिए वोट कर दिया था, वे एजीएम में शामिल तो हो सकते थे, लेकिन बैठक के दौरान दोबारा वोट नहीं कर सकते थे। जिन सदस्यों ने रिमोट ई-वोटिंग के जरिए वोट नहीं किया था, उन्हें एजीएम के दौरान इलेक्ट्रॉनिक तरीके से वोट करने का मौका दिया गया।
क्योंकि प्रस्तावों पर रिमोट ई-वोटिंग के जरिए पहले ही मतदान कराया जा चुका था, इसलिए बैठक में प्रस्तावों को रखने और उनका समर्थन करने की अलग प्रक्रिया की जरूरत नहीं थी।
एजीएम में 5 प्रस्ताव रखे गए
बैठक में कंपनी सेक्रेटरी ने नोटिस में दिए गए कारोबार के पांच प्रस्तावों को सामने रखा:
कंपनी ने बताया कि इन प्रस्तावों की पूरी जानकारी और उनसे जुड़ा एक्सप्लेनेटरी स्टेटमेंट एजीएम के नोटिस में पहले ही सदस्यों को उपलब्ध कराया गया था।
एजीएम के दौरान 15 मिनट चली ई-वोटिंग
कंपनी सेक्रेटरी ने बताया कि जिन सदस्यों ने रिमोट ई-वोटिंग के जरिए अपना वोट नहीं डाला था, उनके लिए एजीएम के दौरान 15 मिनट तक ई-वोटिंग की सुविधा खुली रही।
सदस्यों से एनएसडीएल के ई-वोटिंग प्लेटफॉर्म के जरिए वोट डालने को कहा गया। एजीएम के स्क्रूटिनाइजर मन्निश घिया रिमोट ई-वोटिंग और एजीएम के दौरान हुए ई-वोटिंग, दोनों के वोटों की जांच करेंगे और उनकी संयुक्त रिपोर्ट तैयार करेंगे।
2:33 बजे खत्म हुई एजीएम
कोई अन्य कारोबार नहीं होने के कारण चेयरमैन ने सदस्यों को उनकी भागीदारी के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने सदस्यों, डायरेक्टर्स, कर्मचारियों, ऑडिटर्स और अन्य स्टेकहोल्डर्स के सहयोग की भी सराहना की।
याप डिजिटल की 11वीं एजीएम दोपहर 2:33 बजे ई-वोटिंग की प्रक्रिया पूरी होने के बाद समाप्त हुई। रिमोट ई-वोटिंग और एजीएम के दौरान हुई ई-वोटिंग के संयुक्त नतीजे और स्क्रूटिनाइजर की रिपोर्ट तय समय के भीतर स्टॉक एक्सचेंज को भेजी जाएगी। इन्हें कंपनी और एनएसडीएल की वेबसाइट पर भी उपलब्ध कराया जाएगा।
वर्टोज लिमिटेड की 15वीं सालाना आम बैठक (एजीएम) 29 सितंबर 2026 को शाम 4 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (वीसी) और अन्य ऑडियो-विजुअल माध्यम (ओएवीएम) के जरिए हुई।
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Vikas Saxena
वर्टोज लिमिटेड (Vertoz Limited) की 15वीं सालाना आम बैठक (एजीएम) 29 सितंबर 2026 को शाम 4 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (वीसी) और अन्य ऑडियो-विजुअल माध्यम (ओएवीएम) के जरिए हुई। बैठक का आयोजन केफिन टेक्नोलॉजीज लिमिटेड की सुविधा के जरिए किया गया।
कंपनी ने बताया कि बैठक शुरू करने के लिए जरूरी संख्या में सदस्य मौजूद थे। 22 सितंबर 2026 की रिकॉर्ड डेट के मुताबिक कंपनी के कुल सदस्यों की संख्या 64,578 थी। एजीएम में कुल 47 सदस्य वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए शामिल हुए। इनमें 12 प्रमोटर ग्रुप और 35 पब्लिक शेयरधारक थे।
बैठक की शुरुआत कंपनी के चेयरमैन और नॉन-एग्जीक्यूटिव नॉन-इंडिपेंडेंट डायरेक्टर हर्षद उत्तमचंद शाह ने की। इसके बाद सभी डायरेक्टर्स की सहमति से हिरेंकुमार शाह को बैठक का चेयरमैन बनाया गया।
कंपनी सेक्रेटरी एवं कंप्लायंस ऑफिसर नूपुर जोशी ने शेयरधारकों को एजीएम और वोटिंग प्रक्रिया से जुड़ी सामान्य जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उमाशंकर हेगड़े, जो यू. हेगड़े एंड एसोसिएट्स के सोल प्रोपराइटर हैं, को ई-वोटिंग प्रक्रिया की निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से जांच के लिए स्क्रूटिनाइजर नियुक्त किया गया था।
कंपनी ने बताया कि ई-वोटिंग के नतीजे और स्क्रूटिनाइजर की रिपोर्ट बैठक खत्म होने के दो कार्यदिवस के भीतर एनएसई को भेजी जाएगी। इन्हें कंपनी और केफिन टेक्नोलॉजीज की वेबसाइट पर भी रखा जाएगा।
एजीएम में रखे गए 5 प्रस्ताव
एजीएम में कुल 5 प्रस्ताव रखे गए। इनमें से पहले दो सामान्य कारोबार से जुड़े थे, जबकि तीन विशेष कारोबार से जुड़े थे।
एजीएम के दौरान जिन सदस्यों ने पहले रिमोट ई-वोटिंग के जरिए वोट नहीं किया था, उनके लिए 15 मिनट के लिए इंस्टा-पोल/ई-वोटिंग की सुविधा खुली रखी गई।
एजीएम शाम 4:35 बजे समाप्त हुई। कंपनी ने साफ किया है कि ई-वोटिंग के नतीजे अलग से स्टॉक एक्सचेंज को बताए जाएंगे।
वह फिलहाल NBT में स्टेट ब्यूरो चीफ की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। उनकी यह नियुक्ति सुधीर मिश्रा के रेजिडेंट एडिटर पद से इस्तीफा देने के बाद हुई है।
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Samachar4media Bureau
जाने-माने पत्रकार मनीष श्रीवास्तव को हिंदी दैनिक नवभारत टाइम्स (NBT) के लखनऊ संस्करण का रेजिडेंट एडिटर नियुक्त किया गया है। वह फिलहाल NBT में स्टेट ब्यूरो चीफ की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। उनकी यह नियुक्ति सुधीर मिश्रा के रेजिडेंट एडिटर पद से इस्तीफा देने के बाद हुई है। सुधीर मिश्रा ने मंगलवार को करीब 14 वर्षों तक टाइम्स ग्रुप के साथ रहने के बाद अपने पद से इस्तीफा दिया।
मनीष श्रीवास्तव वर्ष 2013 से NBT के साथ जुड़े हुए हैं। इससे पहले उन्होंने अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिंदुस्तान जैसे प्रमुख हिंदी अखबारों में काम किया है। उत्तर प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक मामलों पर उनकी रिपोर्टिंग के लिए उन्हें जाना जाता है।
मनीष श्रीवास्तव के करियर में 2012 में उत्तर प्रदेश के नेशनल रूरल हेल्थ मिशन (NRHM) घोटाले की रिपोर्टिंग एक महत्वपूर्ण पड़ाव रही। उस समय वह अमर उजाला के साथ काम कर रहे थे। उनकी खोजी पत्रकारिता के जरिए उत्तर प्रदेश में सामने आए इस बड़े भ्रष्टाचार मामले की जानकारी सामने आई थी।
NRHM घोटाले में ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए केंद्र सरकार की योजना से जुड़े करीब 10,000 करोड़ रुपये की कथित हेराफेरी का मामला सामने आया था। इस मामले में कई मुख्य चिकित्सा अधिकारियों की हत्या, जांच, कई नौकरशाहों और अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी तथा बाद में एक मंत्री के इस्तीफे जैसी घटनाएं सामने आईं। यह मामला उत्तर प्रदेश से सामने आए बड़े घोटालों में शामिल रहा।
NBT के साथ 13 वर्षों से अधिक समय के दौरान मनीष श्रीवास्तव ने उत्तर प्रदेश के बाजार में रिपोर्टिंग और संपादकीय जिम्मेदारियों से जुड़ी कई महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। अब उन्हें लखनऊ संस्करण के रेजिडेंट एडिटर की जिम्मेदारी दी गई है।
समाचार4मीडिया की ओर से मनीष श्रीवास्तव को ढेरों बधाई और शुभकामनाएं।
सुधीर मिश्रा के अनुसार, उन्होंने करीब एक महीने पहले इस्तीफा दिया था। वह फिलहाल नवंबर के पहले हफ्ते तक नोटिस पीरियड पर काम करते रहेंगे।
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वरिष्ठ पत्रकार सुधीर मिश्र ने ‘नवभारत टाइम्स’ (NBT) के लखनऊ संस्करण के स्थानीय संपादक पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर एक विस्तृत पोस्ट के जरिए अपने इस्तीफे की जानकारी साझा की है। सुधीर मिश्रा के अनुसार, उन्होंने करीब एक महीने पहले इस्तीफा दिया था। वह फिलहाल नवंबर के पहले हफ्ते तक नोटिस पीरियड पर काम करते रहेंगे।
सुधीर मिश्र का ‘नवभारत टाइम्स’ के साथ करीब 14 साल का सफर रहा है। 1 अप्रैल 2013 को लखनऊ-कानपुर संस्करण के दोबारा शुरू होने के दौरान स्थानीय संपादक के तौर पर उन्होंने NBT जॉइन किया था। जून 2017 तक उन्होंने लखनऊ संस्करण की जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद 2017 से 2022 तक लखनऊ और एनसीआर संस्करण तथा 2022 से मार्च 2024 तक दिल्ली संस्करण के संपादक रहे। मार्च 2024 में उनकी लखनऊ वापसी हुई और तब से वह दोबारा लखनऊ संस्करण के स्थानीय संपादक के तौर पर काम कर रहे थे।
लखनऊ से ही अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत करने वाले सुधीर मिश्र करीब 15 साल तक वहां रिपोर्टर भी रहे हैं। उन्होंने ‘दैनिक जागरण’ में करीब पांच साल और ‘हिन्दुस्तान’ में करीब दस साल बतौर रिपोर्टर काम किया। इसके अलावा वह ‘दैनिक भास्कर’ राजस्थान में करीब तीन साल तक संपादक रहे हैं। वह दो किताबें ‘मुसाफिर हूं यारो’ और ‘हाइब्रिड नेता’ लिख चुके हैं। उन्होंने एक शॉर्ट फिल्म ‘गूलर का फूल’ भी बनाई है, जिसे बार्सिलोना में बेस्ट शॉर्ट फिल्म का अवॉर्ड मिल चुका है।
अपने इस्तीफे की वजह बताते हुए सुधीर मिश्र ने अपनी पोस्ट में कहा कि वह रिटायरमेंट मोड में नहीं जाना चाहते और आगे भी काम करना चाहते हैं। उनके मुताबिक, NBT लखनऊ में उनके रिटायरमेंट तक के करीब दो साल बाकी थे और उन्हें लगा कि इन वर्षों को किसी नए प्रोजेक्ट में लगाकर अधिक प्रोडक्टिव बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि फैसला कठिन था, लेकिन आगे की मंजिल साफ दिख रही हो तो फिर मुश्किल नहीं होती।
सुधीर मिश्र ने NBT में अपने 14 साल के सफर को याद करते हुए टीम और संस्थान से मिले अनुभवों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस दौरान नई तकनीक, कोविड, डिजिटल का बढ़ता दबाव, पाठकों की बदलती आदतों और काम की बढ़ती चुनौतियों के बीच टीम ने मिलकर काम किया। उन्होंने अपनी लखनऊ टीम के गठन और उसके साथ लंबे जुड़ाव को भी विस्तार से याद किया।
उन्होंने संकेत दिया कि आगे वह किसी नए प्रोजेक्ट पर काम कर सकते हैं और कहा कि वह पत्रकारिता से जुड़े रहेंगे। उनके शब्दों में, ‘पत्रकारिता मेरा पैशन है और उसी को आगे भी जीना है।’
सचिन भटनागर को लक्सर ग्रुप में प्रेसिडेंट- इंटरनेशनल बिजनेस नियुक्त किया गया है। नोएडा स्थित हेड ऑफिस से वह बिजनेस ग्रोथ, मार्केट विस्तार और नए इंटरनेशनल अवसरों पर काम करेंगे।
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सचिन भटनागर (Sachin Bhatnagar) को लक्सर ग्रुप (Luxor Group) में प्रेसिडेंट- इंटरनेशनल बिजनेस (President - International Business) नियुक्त किया गया है। कंपनी ने लिंक्डइन (LinkedIn) पोस्ट के जरिए उनकी नई जिम्मेदारी की जानकारी साझा की है। वह नोएडा स्थित कंपनी के हेड ऑफिस (Head Office) से काम करेंगे।
नई भूमिका में सचिन भटनागर बिजनेस ग्रोथ (Business Growth) बढ़ाने, मार्केट प्रेजेंस (Market Presence) मजबूत करने और नए इंटरनेशनल अवसर (International Opportunities) तैयार करने में अहम भूमिका निभाएंगे। लक्सर ग्रुप अपने इंटरनेशनल विस्तार को आगे बढ़ा रहा है।
कंपनी ने अपनी लिंक्डइन पोस्ट में कहा, “हमें सचिन भटनागर का लक्सर ग्रुप के प्रेसिडेंट के तौर पर स्वागत करते हुए खुशी हो रही है। हम उनके नेतृत्व, विशेषज्ञता और लक्सर की निरंतर ग्रोथ और सफलता में योगदान की उम्मीद करते हैं।”
सचिन भटनागर के पास 30 वर्षों से ज्यादा का अनुभव है। उन्हें मल्टीनेशनल कॉरपोरेशंस (Multinational Corporations), यूरोपियन मार्केट लीडर्स (European Market Leaders) और भारतीय लिस्टेड कंपनियों में इंटरनेशनल बिजनेस (International Business) तैयार करने और उसे बड़े स्तर पर विस्तार देने का अनुभव है।
उनका अनुभव कंज्यूमर प्रोडक्ट्स (Consumer Products), एफएमसीजी (FMCG), स्टेशनरी (Stationery), पैकेजिंग और प्रिंटिंग (Packaging & Printing), स्पेशलिटी केमिकल्स (Specialty Chemicals), प्रिसीजन इंजीनियरिंग (Precision Engineering) और फार्मा (Pharma) जैसे क्षेत्रों में रहा है।
ग्लोबल इवेंट मार्केटिंग एजेंसी ओपस एजेंसी (Opus Agency) ने एशिया पैसिफिक क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बढ़ाने के लिए ASEAN और ANZ के लिए अलग-अलग वरिष्ठ अधिकारियों की नियुक्ति की है।
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Samachar4media Bureau
ग्लोबल इवेंट मार्केटिंग एजेंसी ओपस एजेंसी (Opus Agency) ने एशिया पैसिफिक क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बढ़ाने के लिए ASEAN और ANZ के लिए अलग-अलग वरिष्ठ अधिकारियों की नियुक्ति की है।
एरिका सियो (Erica Seo) को सीनियर वाइस प्रेसिडेंट, ASEAN और चार्ल्स टर्नर (Charles Turner) को सीनियर वाइस प्रेसिडेंट, ANZ नियुक्त किया गया है। दोनों सीधे ओपस एजेंसी की प्रेसिडेंट डेना लोवरी (Dena Lowery) को रिपोर्ट करेंगे।
एरिका सियो इससे पहले स्पाल्बा (Spalba) में एपीएसी की बिजनेस हेड थीं। इससे पहले उन्होंने जॉर्ज पी. जॉनसन एक्सपीरियंस मार्केटिंग (George P Johnson Experience Marketing) में कई वरिष्ठ पदों पर काम किया है। वह जीपीजे कोरिया (GPJ Korea) की मैनेजिंग डायरेक्टर भी रह चुकी हैं।
वहीं, चार्ल्स टर्नर ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में ओपस एजेंसी के कारोबार की जिम्मेदारी संभालेंगे। उनके काम में कारोबारी प्रदर्शन, क्लाइंट ग्रोथ, रोजमर्रा के कामकाज और क्षेत्रीय क्षमताओं को बढ़ाना शामिल होगा।
टर्नर के पास जॉर्ज पी. जॉनसन ऑस्ट्रेलिया एंड न्यूजीलैंड में 12 साल काम करने का अनुभव है। इसके बाद उन्होंने द कंपनी वी कीप (The Company We Keep) में दो साल काम किया। ओपस एजेंसी ने 2025 में इस कंपनी का अधिग्रहण किया था।
इन नियुक्तियों के साथ ओपस एजेंसी APAC क्षेत्र में अपने कारोबार का विस्तार कर रही है। एजेंसी सेल्सफोर्स, एमेज़ॉन वेब सर्विसेज (AWS), यूबीएस और रेड हैट जैसे क्लाइंट्स के साथ काम करती है। हाल की परियोजनाओं में एडब्ल्यूएस समिट एएनसीईएएन (AWS Summit ASEAN) भी शामिल है, जिसका आयोजन सिंगापुर, बैंकॉक और जकार्ता में किया गया था। इस कार्यक्रम में 16,000 से ज्यादा लोगों ने हिस्सा लिया था।