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छंटनी की खबरों के बीच पत्रकारों के लिए 'संजीवनी' का काम कर सकते हैं ये ऑप्शंस
देश की अर्थव्यवस्था की सुस्त रफ्तार के कारण पिछले कुछ समय के दौरान एक हजार से ज्यादा पत्रकारों को धोना पड़ा है अपनी नौकरी से हाथ
समाचार4मीडिया ब्यूरो 6 years ago
अर्थव्यवस्था की सुस्त रफ्तार के कारण मीडिया इंडस्ट्री के ऐड रेवेन्यू में गिरावट आती जा रही है। इसके कारण पत्रकारों की नौकरी पर संकट के बादल और गहरे होते जा रहे हैं। पिछले दिनों ही देश भर में एक हजार से ज्यादा पत्रकारों को टर्मिनेशन लेटर दिया जा चुका है। हाल में एक प्रमुख बिजनेस चैनल पर ताला लगने से इस लिस्ट में करीब 50 पत्रकार और शामिल हो गए हैं। ऐसे में अब सवाल उठने लगा है कि आखिर अब इन पत्रकारों के सामने क्या ऑप्शंस हैं और इनके परिवार का खर्चा कैसे चलेगा?
एक इंटरनेशनल न्यूज रिपोर्ट में बताया गया है कि कैसे अमेरिकी मीडिया संस्थान अपने यहां छंटनी कर रहे हैं और रिपोर्टर्स को बार टेंडर्स जैसा काम तलाशना पड़ रहा है। हालांकि भारत में हालत वहां से बेहतर हैं। हालांकि, एचआर प्रोफेशनल्स के पास ऐसे पत्रकारों के रिज्युमे की बाढ़ सी आती जा रही है, जो नौकरी तलाश रहे हैं। ऐसे भी कई पत्रकार हैं जो अपनी प्रतिभा को किसी नए मीडियम में लगाना चाहते हैं।
ऐसे में देश में बढ़ते ‘ओवर द टॉप’ (OTT) बिजनेस में काफी संभावनाएं नजर आ रही हैं। दरअसल, विडियो ऑन डिमांड मार्केट की देश में बढ़ती हुई डिमांड को पूरा करने के लिए ऑनलाइन स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स को फ्रेश कंटेंट के साथ ही फ्रेश टैलेंट की तलाश है। ऑनलाइन स्ट्रीमिंग्स प्लेटफॉर्म्स का ये कारोबार पिछले साल 500 मिलियन डॉलर थो, जो वर्ष 2023 तक बढ़कर पांच बिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। भले ही लोगों का न्यूज में इंटरेस्ट कम दिखाई दे रहा है, लेकिन मार्केट में एंटरटेनमेंट की मजबूत स्थिति अभी भी कायम है। ऐसे में क्रिएटिव माइंड्स के लिए काम के अवसरों के द्वार खुले हुए हैं।
इस बारे में ‘Simply HR Solutions’ नाम से अपनी एचआर फर्म चलाने वाले रजनीश सिंह का कहना है, ‘देश की अर्थवस्था इन दिनों काफी सुस्त चल रही है। ऐसे में हो सकता है कि पत्रकारों की नौकरी पर संकट आए, लेकिन ऐसे तमाम पत्रकारों के लिए फ्रीलॉन्सिंग एक अच्छा ऑप्शन हो सकता है।’
पूर्व में टीवी18 इंडिया लिमिटेड में ग्रुप हेड (एचआर) के तौर पर काम कर चुके रजनीश सिंह का कहना है, ‘पत्रकार काफी क्रिएटिव होते हैं और न्यूजरूम से बाहर रहकर भी वे दूसरे मीडियम के लिए यह काम कर सकते हैं। राइटर्स से लेकर विडियोग्राफर्स और एडिटर्स तक के लिए एंटरटेनेंट इंडस्ट्री में एक या दो प्रोजेक्ट जरूर हैं। इनके द्वारा भी ट्रैक पर वापसी की जा सकती है।’
बता दें कि ज्यादातर प्रॉडक्शन हाउस अपनी इनहाउस टीम की जगह फ्रीलॉन्सर्स से काम कराते हैं। ये फ्रीलॉन्सर्स या तो अपने स्तर पर अथवा एजेंसियों के माध्यम से इन प्रोजेक्ट्स के लिए काम कर सकते हैं। ये एजेंसियां कमीशन मॉडल के आधार पर काम करती हैं। इस तरह के काम की मार्केट में कमी नहीं है, लेकिन उन्हें होने वाला भुगतान काम पर निर्भर करता है।
‘ग्लोबलहंट’ (GlobalHunt) फर्म के मैनेजिंग डायरेक्टर सुनील गोयल के अनुसार, हालांकि इसकी शुरुआत इतनी आसान नहीं होती है, लेकिन एक बार जब आपका सर्किल बन जाता है और आपको सही लोग मिल जाते हैं तो फिर काम की कोई कमी नहीं होती है। ऐसा भी हो सकता है कि किसी महीने आपके पास काम करने के लिए कोई प्रोजेक्ट न हो, लेकिन ऐसा भी होता है, जब किसी महीने आपको अपनी सैलरी से तीन गुना तक कमाई हो जाती है।
गोयल के अनुसार, ‘पत्रकार के रूप में जब आप किसी संस्थान में काम करते हैं, तो आप वहां कॉस्ट सेंटर के रूप में काम कर रहे होते हैं और कॉस्ट कटिंग की बात आती है तो सबसे पहली गाज पत्रकारों पर भी गिरती है, लेकिन यदि आप किसी एजेंसी के लिए काम करते हैं तो ऐसा नहीं होता है। इसका कारण ये है कि एजेंसी को हर प्रोजेक्ट के लिए अपने क्लाइंट से पैसा मिलता है, आप एजेंसी के लिए रेवेन्यू सेंटर का काम करते हैं, ऐसे में यहां पर जोखिम कम होता है। ’
अब सवाल उठता है कि न्यूजरूम से हटने के बाद क्या पत्रकारों के लिए सिर्फ एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री ही एकमात्र ऑप्शन है? एक्सपर्ट इसका जवाब न में देते हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि पत्रकार हमेशा कम्युनिकेशन के बिजनेस में होते हैं और उन्हें अपनी क्षमता का पूरा लाभ लेना चाहिए। वे कॉरपेरेट सेक्टर में भी हाथ आजमा सकते हैं। खासकर ऐसे मुश्किल समय में जब अर्थव्यवस्था की रफ्तार सुस्त हो, इस सेक्टर को ऐसे लोगों की जरूरत है जो अपने एंप्लाईज के साथ ही बाहर की दुनिया से बेहतर तरीके से कम्युनिकेशन कर सकते हों। गोयल के अनुसार, पूर्व पत्रकारों के लिए कम्युनिकेशन हमेशा से पसंदीदा रहा है, आज के समय में इस फील्ड में काफी स्कोप है।
गोयल का कहना है, ‘इंटरनल और एक्सटरनल कम्युनिकेशन के अलावा इस समय ऑनलाइन रेप्युटेशन मैनेजमेंट भी काफी चल रहा है। पहले मार्केटिंग का काम पैकेजिंग और ज्यादा से ज्यादा लोगों तक अपनी पहुंच बनाना था, अब इसमें कंटेंट को तैयार करना और ब्लॉगिंग भी शामिल हो गया है और इसे पत्रकार आसानी से कर सकते हैं। कॉरपोरेट फर्मों की कंटेंट तैयार करने वाली अधिकांश टीमें पत्रकारों को प्राथमिकता देती हैं। इसका कारण यह होता है कि पत्रकार न सिर्फ अच्छा लिख सकते हैं, बल्कि उन्हें यूजर्स के लेकर इसके इकनॉमी मॉडल की जानकारी भी होती है। आखिर, न्यूज का कंज्युमर भी एक आम कंज्युमर की तरह होता है जो ऑनलाइन खरीदारी करता है और सुपर मार्केट भी जाता है।’
नयूजरूम से पत्रकारों के नौकरी जाने की निराशाजनक खबरों के बीच सफलता की ऐसी स्टोरी भी हैं, जहां पर पत्रकारों ने अपनी बेहतरी के लिए खुद नौकरी छोड़ दी। ऐसा ही एक उदाहरण 45 वर्षीय कोटेश्वर राव का है, जिन्होंने अपना कुछ नया शुरू करने के लिए वर्ष 2015 में ‘सीएनएन न्यूज18’ में क्रिएटिव डायरेक्टर की पोस्ट से इस्तीफा दे दिया था।
राव के अनुसार, ‘मुझे लंबे फॉर्मेट में स्टोरी को बताना काफी अच्छे से आता था, इसलिए मैंने अपनी इस खूबी को न्यूजरूम से बाहर निकलकर इस्तेमाल करने का निर्णय लिया। शुरुआत के महीनों में काफी समस्या थी, लेकिन इसके बाद मैंने उन लोगों से मिलना शुरू किया, जिनसे मैं पत्रकार होने के दौरान संपर्क करता था। इस संपर्क का फायदा ये हुआ कि मुझे विदेश मंत्रालय के लिए एक विडियो बनाने का प्रोजेक्ट मिला। जब मैंने यह प्रोजेक्ट पूरा करके दिया तो उन्हें मेरा काम काफी पसंद आया और इसके बाद दूसरे प्रोजेक्ट भी आने लगे। मैंने बिल और मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन के लिए भी एक विडियो तैयार किया। उनका कहना था कि यदि मुझे बड़े प्रोजक्ट्स चाहिए तो मेरे पास खुद की कंपनी होनी चाहिए।’
सितंबर 2016 में राव ने ‘Silver Line Productions LLP’ के नाम से कंपनी को रजिस्टर्ड कराया था। पहले साल में उन्हें पांच से सात लाख रुपए का रेवेन्यू मिला, लेकिन समय के साथ उनका काम बढ़ता गया और वित्तीय वर्ष 2018 में उनकी कंपनी का सालाना रेवेन्यू 40 लाख और फिर अगले वित्तीय वर्ष में 90 लाख रुपए तक हो गया। राव अब कैमरापर्संन, ग्राफिक डिजायनर्स और वॉइसओवर आर्टिस्ट की एक छोटी टीम के साथ काम करते हैं। राव ने जब पत्रकारिता की जमी-जमाई नौकरी छोड़ दी थी, उस दौरान वह 2.2 लाख रुपए महीना कमा रहे थे।
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