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जांच एजेंसियों को खबर का सोर्स न बताने की पत्रकारों को कोई वैधानिक छूट नहीं: दिल्ली कोर्ट
मुख्य मेट्रोपॉलिटन मैजिस्ट्रेट अंजनी महाजन ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की ओर से दायर एक ‘क्लोजर रिपोर्ट’ को खारिज कर दिया।
समाचार4मीडिया ब्यूरो 3 years ago
दिल्ली की एक अदालत की मानें तो भारत में पत्रकारों को जांच एजेंसियों को अपने स्रोत का खुलासा करने से कोई वैधानिक छूट नहीं है, विशेष रूप से तब, जब आपराधिक मामले की जांच में सहायता के लिए इस तरह का खुलासा जरूरी हो। यह कहते हुए मुख्य मेट्रोपॉलिटन मैजिस्ट्रेट अंजनी महाजन ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की ओर से दायर एक ‘क्लोजर रिपोर्ट’ को खारिज कर दिया।
दरअसल, रिपोर्ट में सीबीआई ने दावा किया था कि वह कथित जालसाजी के मामले में जांच पूरी नहीं कर सकी, क्योंकि कथित जाली दस्तावेजों को प्रकाशित और प्रसारित करने वाले पत्रकारों ने उन स्रोतों का खुलासा करने से इनकार कर दिया था, जहां से उन्होंने इसे इसे हासिल किया था।
एफआईआर के मुताबिक, कुछ न्यूज चैनलों और समाचार पत्रों ने 9 फरवरी, 2009 को यानी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई की तय तारीख से एक दिन पहले दिवंगत नेता मुलायम सिंह यादव और उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले से संबंधित रिपोर्ट प्रसारित और प्रकाशित की थी। समाचार प्रकाशित होने के बाद, सीबीआई ने एजेंसी की प्रतिष्ठा को धूमिल करने के लिए कथित तौर पर फर्जी और मनगढ़ंत रिपोर्ट तैयार करने के आरोप में अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। हालांकि बाद में सीबीआई ने इस मामले में ‘क्लोजर रिपोर्ट’ दाखिल कर दी थी।
मेट्रोपॉलिटन मैजिस्ट्रेट ने मंगलवार को रिपोर्ट को खारिज कर दिया और सीबीआई को पत्रकारों से पूछताछ करने का निर्देश दिया। न्यायाधीश ने कहा, ‘भारत में पत्रकारों को जांच एजेंसियों को अपने स्रोत का खुलासा करने से कोई वैधानिक छूट नहीं है, विशेष रूप से जहां एक आपराधिक मामले की जांच में सहायता के उद्देश्य से इस तरह का खुलासा आवश्यक है।’
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