पुलिस मुख्यालय के पास महिला पत्रकार के साथ हुई ये वारदात

घटना के दौरान सड़क पार कर पैदल ही अपने ऑफिस जा रही थी यह महिला पत्रकार

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 08 November, 2019
Last Modified:
Friday, 08 November, 2019
Crime

दिल्ली में पुलिस मुख्यालय से महज 50 मीटर दूर एक महिला पत्रकार से बाइक सवार दो बदमाशों ने मोबाइल झपट लिया। वारदात के दौरान ‘नवभारत टाइम्स’ की यह पत्रकार अपने ऑफिस जा रही थी। महिला पत्रकार के अनुसार, बाइक सवार दोनों बदमाशों ने जैकेट और हेलमेट पहना हुआ था। शहीदी पार्क के पास पुलिस पिकेट होने के बावजूद वारदात को अंजाम देने के बाद दोनों बदमाश फरार होने में कामयाब हो गए।

पुलिस को दिए बयान में महिला पत्रकार ने बताया कि सड़क पार करने के बाद वह बहादुर शाह जफर मार्ग पर इंडियन एक्सप्रेस बिल्डिंग स्थित अपने ऑफिस जा रही थी। उसने अपना मोबाइल हाथ में पकड़ा हुआ था, तभी दो बदमाश तेजी से आए और उसका फोन झपटकर ले गए। महिला पत्रकार का कहना था कि उसने यह मोबाइल कुछ दिन पूर्व ही खरीदा था।

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तूफान पीडितों की मदद के लिए टाइम्स नेटवर्क ने बढ़ाए कदम, की ये पहल

चक्रवाती तूफान अम्फान से पश्चिम बंगाल के कुछ इलाकों में तबाह हुई बुनियादी सुविधाओं की बहाली के लिए राज्य सरकार जोर-शोर से जुटी हुई है।

Last Modified:
Monday, 25 May, 2020
Times Network

चक्रवाती तूफान अम्फान से पश्चिम बंगाल के कई इलाकों में तबाह हुई बुनियादी सुविधाओं की बहाली के लिए राज्य सरकार जोर-शोर से जुटी हुई है। ऐसे में सरकार की मदद के लिए फंड जुटाने व लोगों को जागरूक करने के लिए देश के जाने-माने ब्रॉडकास्ट नेटवर्क ‘टाइम्स नेटवर्क’ (Times Network) ने एक विशेष पहल ‘इंडिया फॉर बंगाल’ (India For Bengal) शुरू की है।

बता दें कि इस तूफान से काफी नुकसान हुअ है। करीब 1.36 करोड़ लोग प्रभावित हुए हैं और 10.5 लाख घरों को नुकसान पहुंचा है, वहीं कई लोगों की जान भी चली गई है। राज्य में कई स्थानों पर बिजली और टेलिफोन की लाइनें टूट गई हैं, कई घर तबाह हो गए हैं और तमाम पेड़ उखड़ गए हैं।   

ऐसे में टाइम्स नेटवर्क ने ‘India For Bengal’ पहल के तहत राज्य के प्राकृतिक आपदा पीड़ितों के लिए देश के लोगों से आगे बढ़कर आर्थिक मदद करने की अपील की है। इस पहल के तहत जो लोग आर्थिक मदद करना चाहें वह पश्चिम बंगाल राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को फंड दे सकते हैं। इसके लिए ICICI Bank, A/c no 628001041066, IFSC Code - ICI0006280 और MICR code 700229010 जारी किया गया है।

इस पहल के बारे में ‘टाइम्स नेटवर्क’ के एमडी और सीईओ एमके आनंद का कहना है, ‘पश्चिम बंगाल देश की सांस्कृतिक विरासत का एक केंद्र है। पिछले दिनों में आई प्राकृतिक आपदाओं के कारण यह राज्य और यहां के लोग काफी प्रभावित हुए हैं। ऐसे में बंगाल को पुन: पटरी पर वापस लाने के लिए पूरे देश को एकजुट होकर आगे आने और सपोर्ट करने की जरूरत है। इस पहल के द्वारा हमने लोगों से राहत और पुनर्वास की दिशा में कदम उठाने और योगदान की अपील की है। मुझे पूरा विश्वास है कि सामूहिक प्रयासों से हम तेजी से प्रभावित इलाकों की मदद कर पाएंगे।’  

बताया जाता है कि नेशनल लेवल की पहल www.timesnownews.com, TIMES Now और मिरर नाउ के माध्यम से चलेगी, ताकि चक्रवात द्वारा विस्थापित हुए लाखों लोगों के लिए ज्यादा से ज्यादा सहायता प्राप्त की जा सके।

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महज 1 डॉलर में बिक गया ये बड़ा मीडिया हाउस

कोरोना संक्रमण के प्रसार को कम करने के लिए लागू किए लॉकडाउन की वजह से देश-दुनिया की अर्थव्यवस्था चरमरा गई है।

Last Modified:
Monday, 25 May, 2020
deal

कोरोना संक्रमण के प्रसार को कम करने के लिए लागू किए लॉकडाउन की वजह से देश-दुनिया की अर्थव्यवस्था चरमरा गई है। इसका प्रभाव मीडिया संगठन पर भी पड़ा है। कई मीडिया कंपनियों की आर्थिक स्थिति इस कदर बिगड़ गई कि उन्हें वित्तीय बोझ को कम करने के लिए अपने स्टाफ में कटौती करनी पड़ रही है। वहीं कुछ मीडिया संगठनों ने मासिक वेतन में कटौती का ऐलान किया है।

न्यूजीलैंड से खबर है कि यहां के सबसे बड़े मीडिया घरानों में से एक को उसके मालिकों ने सिर्फ 1 डॉलर (61 cents) में बेच दिया है। दरअसल, यह सौदा नाइन एंटरटेनमेंट  (Nine Entertainment Holdings Ltd) ने मीडिया हाउस 'स्टफ' को अपने मुख्य कार्यकारी (CEO) को महज एक डॉलर में बेचने का फैसला किया है।

'स्टफ' देश के कई दैनिक अखबारों का प्रकाशन करता है और इसी नाम से एक लोकप्रिय न्यूज वेबसाइट चलाता है। इसमें 400 पत्रकारों सहित लगभग 900 कर्मचारी कार्यरत हैं।               

ऑस्ट्रेलिया के नाइन एंटरटेनमेंट के स्वामित्व वाला 'स्टफ' महामारी के पहले से ही वित्तीय कठिनाइयों से जूझ रहा है। लिहाजा इस बीच कंपनी ने विज्ञापन राजस्व में बड़ी गिरावट दर्ज की है।

ऑस्ट्रेलियाई शेयर बाजार को दिए एक बयान में कंपनी ने कहा कि 'स्टफ' को सीईओ सिनैड बाउचर को बेचा जाएगा और यह पूरी कार्रवाई महीने के अंत तक पूरी कर ली जाएगी।

नाइन एंटरटेनमेंट के सीईओ ह्यूग मार्क्स ने कहा 'हम मानते हैं कि 'स्टफ' के लिए स्थानीय स्वामित्व होना महत्वपूर्ण है और यह हमारा मानना है कि न्यूजीलैंड में प्रतिस्पर्धा और उपभोक्ताओं के हिसाब से यह सबसे सही होगा।

वहीं 'स्टफ' की सीईओ बाउचर ने कहा कि उनकी योजना कर्मचारियों को कंपनी में शेयरधारक के रूप में प्रत्यक्ष हिस्सेदारी देने की है। इससे पहले प्रतिद्वंद्वी मीडिया कंपनी NZME भी स्टफ को खरीदना चाहती थी। न्यूजीलैंड की अधिकांश मीडिया कंपनियां महामारी के बाद से संघर्ष कर रही हैं।

'स्टफ' ने अस्थायी रूप से कर्मचरियो के वेतन में कटौती की है जबकि NZME ने 200 पत्रकारों को नौकरियों से हटाने की घोषणा की है।

 

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फिर होगी DD के फ्रीडिश स्लॉट की नीलामी, इस तारीख तक कर सकते हैं अप्लाई

ई-नीलामी की प्रक्रिया स्थगित होने से पहले जो ब्रॉडकास्टर्स अपने आवेदन जमा कर चुके थे, उन्हें दोबारा से अप्लाई करने की आवश्यकता नहीं है।

Last Modified:
Monday, 25 May, 2020
DD Freedish

प्रसार भारती ने अपने ‘डायरेक्ट टू होम’ (DTH) प्लेटफॉर्म ‘डीडी फ्रीडिश’ (DD Free Dish) के खाली पड़े MPEG-2 स्लॉट्स के आवंटन के लिए सैटेलाइट टीवी चैनल्स से फिर आवेदन मांगे हैं। यह आवेदन 10 जून 2020 से 31 मार्च 2021 की अवधि के लिए मांगे गए हैं। इससे पहले 18 मार्च 2020 को अधिसूचित ई-नीलामी की प्रक्रिया को स्थगित कर दिया गया था। लेकिन अब ई-नीलामी की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और ऑनलाइन बोली दो जून 2020 को आयोजित किए जाने की उम्मीद है।

अलग-अलग बुके (buckets) में टीवी चैनल्स का वर्गीकरण चैनल के जॉनर (genre) या भाषा के अनुसार किया गया है और उनका शुरुआती रिजर्व प्राइज 18 मार्च 2020 के समान ही रहेगा। सफल बोलीदाताओं को डीडी फ्री डिश स्लॉट के आवंटन के लिए पॉलिसी गाइडलाइंस में निर्धारित भुगतान शिड्यूल के अनुसार सात मासिक किस्तों में भुगतान करना होगा।

प्रोसेसिंग फीस जहां 25000 रुपए फिक्स की गई है, वहीं बोली में भाग लेने के लिए 1.5 करोड़ शुल्क तय किया गया है। ई-नीलामी की प्रक्रिया स्थगित होने से पहले जो ब्रॉडकास्टर्स अपने आवेदन जमा कर चुके थे, उन्हें दोबारा से अप्लाई करने की आवश्यकता नहीं है। आवेदन जमा करने अथवा ऑनलाइन आवेदन की स्थिति में भागीदारी शुल्क (participation fee) के लिए ऑरिजनल डिमांड ड्राफ्ट जमा करने की आखिरी तारीख एक जून 2020 रखी गई है।

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वरिष्ठ पत्रकार फे डिसूजा ने आज के दौर की पत्रकारिता को लेकर कही ये बड़ी बात

‘वायकॉम18’ के पूर्व सीओओ राज नायक के साथ बातचीत में 'मिरर नाउ' की पूर्व एग्जिक्यूटिव एडिटर ने अपने नए वेंचर को लेकर भी चर्चा की

Last Modified:
Saturday, 23 May, 2020
Friday Live

‘वायकॉम18’ (Viacom 18) के पूर्व सीओओ और ‘हाउस ऑफ चीयर’ (House Of Cheer) कंपनी के एमडी व फाउंडर राज नायक द्वारा पिछले दिनों लॉन्च गए टॉक शो ‘Friday’s Live’ में इस बार अंग्रेजी न्यूज चैनल ‘मिरर नाउ’ (Mirror Now) की पूर्व एग्जिक्यूटिव एडिटर फे डिसूजा ने बतौर गेस्ट शिरकत की। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर हुई इस बातचीत (वेबिनार) के दौरान फे डिसूजा ने राज नायक के साथ आज के दौर की पत्रकारिता को प्रभावित करने वाले तमाम मुद्दों पर चर्चा की।

कार्यक्रम में फे डिसूजा का कहना था कि यदि हम वास्तव में ‘असली पत्रकारिता’ जिसका काम लोगों को इंफॉर्म करना है, करना चाहते हैं तो हमें न्यूज चैनल के बिजनेस मॉडल को बदलने की जरूरत है। दर्शक अब उस न्यूज के लिए भुगतान नहीं कर रहे हैं, जो वह देख रहे हैं। यह तो विज्ञापनदाता है जो न्यूज के लिए भुगतान कर रहा है। यही कारण है कि वास्तविक ग्राहक विज्ञापनदाता है और दर्शक एक वस्तु बनकर रह गया है।  

डिसूजा का यह भी कहना था कि एडवर्टाइजर्स को पत्रकारिता से कोई मतलब नहीं रहता है और यही कारण है कि वह पत्रकारिता की गुणवत्ता की चिंता नहीं करते हैं, जिसे वह स्पांसर करते हैं। वे ज्यादा टीआरपी के पैसे देते हैं। डिसूजा के अनुसार, ‘न्यूज मीडिया में सबसे बड़ी विज्ञापनदाता सरकार है और सरकार ही वास्तविक कस्टमर है, जिसे सेवा दी जा रही है। ऐसी स्थिति में अब आपका अस्तित्व इस बात पर निर्भर करता है कि आप सरकार को खुश करने में सक्षम हैं अथवा नहीं।’  

इसके साथ ही उन्होंने पत्रकारों से अपनी भूमिका और ज्यादा जिम्मेदारी से निभाने की अपील भी की। डिसूजा का कहना था, ‘जब कोई भी पत्रकार ऐसी सामग्री पोस्ट करता है जो समाज को विभाजित करती है तो यह मौलिक रूप से गलत सूचनाओं पर आधारित होती है। इससे लड़ाई, झगड़े और वैमनस्यता उत्पन्न होती है और इसका वास्तविक जीवन पर प्रभाव पड़ता है। एक पत्रकार के रूप में अभी हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी युवाओं को इंफॉर्म करना है। देश में युवाओं की बड़ी संख्या है, जो भविष्य में देश के वोटर्स और संरक्षक हैं। उन्हें जिम्मेदारी से तमाम विषयों पर इंफॉर्म करना हमारी जिम्मेदारी है।’

इसके साथ ही डिसूजा ने अपने नए वेंचर के बारे में भी बात की, जिसकी घोषणा वह जल्द करेंगी। डिसूजा के अनुसार, यह इंफॉर्मेशन पर आधारित होगा न कि ओपिनियन पर। डिसूजा के अनुसार, ‘यह सबस्क्रिप्शन पर आधारित ऑनलाइन प्लेटफॉर्म होगा, जिस पर लोगों को इंफॉर्मेशन पर आधारित न्यूज  मिलेंगी। इसके कंटेंट को बहुत ही सामान्य रखने का विचार है, ताकि लोग इस इंफॉर्मेशन का उपभोग (consume) कर सकें और महसूस कर सकें।’

कार्यक्रम का पूरा विडियो आप यहां देख सकते हैं।

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सामुदायिक रेडियो पर विज्ञापनों के मामले में MIB कर रही ये विचार

जनता से कोरोना वायरस के खिलाफ अपनी जंग जारी रखने का आह्वान करते हुए जावड़ेकर ने कहा कि हम इसे भी उसी तरह दूर भगाएंगे, जैसे हमने दूसरी बीमारियों को दूर भगाया है।

Last Modified:
Saturday, 23 May, 2020
prakash

केंद्रीय सूचना-प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने शुक्रवार को कहा कि वह सामुदायिक रेडियो को टीवी चैनलों के बराबर लाने के लिए विज्ञापनों के लिए एयर टाइम मौजूदा 7 मिनट प्रति घंटा से बढ़ाकर 12 मिनट प्रति घंटा करने पर विचार कर रहा हैं।  जावड़ेकर एक विशिष्ट पहल के तहत एक ही समय प्रसारण करते हुए समस्त सामुदायिक रेडियो स्टेशंस के श्रोताओं को संबोधित कर रहे थे।  उनका संबोधन शाम सात बजे और सात बजकर 30 मिनट पर प्रसारित हुआ।

जावड़ेकर ने कहा कि जहां एक ओर सामुदायिक रेडियो की स्थापना के दौरान होने वाले खर्च का 75 प्रतिशत मंत्रालय द्वारा वहन किया जाता है और उसमें प्रमुख खर्च शामिल होते हैं, वहीं दैनिक परिचालन के खर्च स्टेशन द्वारा वहन किए जाते हैं। सूचना-प्रसारण मंत्री ने बताया कि वर्तमान में सामुदायिक रेडियो स्टेशंस को विज्ञापन के लिए 7 मिनट प्रति घंटा एयर टाइम की अनुमति होती है, जबकि टीवी चैनलों को 12 मिनट के एयर टाइम की इजाजत मिलती है। उन्होंने कहा कि वह समस्त रेडियो स्टेशंस को समान समय प्रदान करने के लिए उत्सुक हैं, ताकि उन्हें फंड्स की मांग करने की जरूरत न पड़े और स्थानीय विज्ञापनों का प्रसारण सामुदायिक रेडियो स्टेशंस पर किया जा सके।

अपनी शुरुआती टिप्प‍णियों में जावड़ेकर ने कहा कि सामुदायिक रेडियो अपने आप में समुदाय है। उन्हें ‘बदलाव का दूत’ (agents of change) करार देते हुए सूचना-प्रसारण मंत्री ने कहा कि ये स्टेशन रोजाना लाखों लोगों तक पहुंच बनाते हैं और मंत्रालय जल्द ही ऐसे रेडियो स्टेशंस की संख्या में वृद्धि करने की योजना लाएगा। बता दें कि फिलहाल अभी देश भर में 290 सामुदायिक रेडियो चल रहे हैं।

जनता से कोरोना वायरस के खिलाफ अपनी जंग जारी रखने का आह्वान करते हुए जावड़ेकर ने कहा कि हम इसे भी उसी तरह दूर भगाएंगे, जैसे हमने दूसरी बीमारियों को दूर भगाया है। हालांकि उन्होंने कहा कि अब नए तरह के हालात हैं, जिसमें 4 कदम शामिल हैं अर्थात जितना ज्यादा से ज्या‍दा संभव हो सके घर में रहना, बार-बार हाथ धोना, सार्वजनिक स्थानों पर मास्क लगाना और सोशल डिस्टेसिंग बरकरार रखना।

सोशल डिस्टेसिंग और इकनॉमिक एक्टिविटी की चुनौतियों के बीच असमंजस के बारे में बोलते हुए जावड़ेकर ने ‘जान भी जहान भी’ (Jaan Bhi Jahaan Bhi) का मंत्र दोहराया और कहा कि कंटेनमेंट जोन्स में प्रतिबंध जारी हैं, जबकि ग्रीन जोन्स में आर्थिक गतिविधियां शुरू हो रही हैं।

सूचना-प्रसारण मंत्री ने सामुदायिक रेडियो स्टेशंस के अपने चैनलों पर समाचारों के प्रसारण से संबंधित प्रमुख मांग का भी जिक्र किया। उन्होंने भरोसा दिलाया कि वह सामुदायिक रेडियो स्टेशंस पर उसी तरह समाचारों के प्रसारण की अनुमति देने पर विचार करेंगे, जिस प्रकार एफएम चैनलों के साथ किया गया है। उन्होंने इन स्टेशंस को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि ये स्टेशन फेक न्यूज की बुराई से निपटने में प्रमुख भूमिका निभा सकेंगे। उन्होंने कहा कि ये स्टेशन ऐसी खबर का संज्ञान लेकर और स्थानीय स्रोतों से उसकी पुष्टि करवाकर कार्रवाई कर सकते हैं। उन्होंने इन स्टेशंस को ऐसी खबरों को ऑल इंडियो के साथ भी साझा करने को कहा, ताकि सत्य की पहुंच को व्यापक बनाया जा सके। उन्होंने बताया कि मंत्रालय ने पीआईबी के अंतर्गत फैक्ट चेक सेल बनाया है और सामुदायिक रेडियो फैक्ट चेक सेल की भूमिका को भी पूर्णत: प्रदान कर सकते हैं।

केंद्रीय वित्त और कॉरपोरेट कार्य मंत्री द्वारा हाल ही में प्रस्तुत किए गए आत्मनिर्भर भारत पैकेज के बारे में जावडेकर ने कहा कि यह एक समग्र पैकेज है, जिसमें कृषि और उद्योग सहित विविध क्षेत्रों के सुधारों को शामिल किया गया है तथा इस पैकेज का लक्ष्य आयात घटाना और निर्यात बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि पैकेज को लेकर अच्छी प्रतिक्रिया प्राप्त हुई है और जनता इस प्रोत्साहन से प्रसन्न है।

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चीन ने मीडिया में किया बड़ा धमाल, लॉन्च की ये अनोखी एंकर

तकनीकी के मामले में दुनिया तेजी से आगे बढ़ रही है। लगभग हर क्षेत्र में तकनीकी का बोलबाला है और पत्रकारिता भी इससे अछूती नहीं है

Last Modified:
Saturday, 23 May, 2020
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तकनीकी के मामले में दुनिया तेजी से आगे बढ़ रही है। लगभग हर क्षेत्र में तकनीकी का बोलबाला है और पत्रकारिता भी इससे अछूती नहीं है। रोबोट पत्रकार के आविष्कार के बाद अब इस दिशा में तमाम नए प्रयोग हो रहे हैं। इस कड़ी में चीन में दुनिया की पहली 3D न्यूज एंकर को लॉन्च कर दिया गया है।

ये कारनामा अंजाम देने वाली चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ है, जिसने आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया है। 3D तकनीक से चलने वाली यह दुनिया की पहली  न्यूज एंकर बन गई है।

उल्लेखनीय है कि चीन की सरकारी एजेंसी शिन्हुआ ने एक अन्य एजेंसी के साथ मिलकर इस आर्टिफिशियल इंटलीजेंस 3डी एंकर को लॉन्च किया है, इसका एक वीडियो भी इसी एजेंसी के ट्विटर हैंडल से ट्वीट किया गया है।

शिन्हुआ की ओर से बताया गया है कि ये 3डी न्यूज एंकर आसानी से घूम सकती है, इसी के साथ जैसी खबर होती है ये अपने चेहरे के हावभाव को भी वैसे ही बदल सकती है। ये अपने सिर के बालों और ड्रेस में भी परिवर्तन कर सकती है। अभी एक वीडियो के ट्रायल के तौर पर इसे न्यूज पढ़ते और अन्य कई मुद्राओं में दिखाया गया है। आने वाले समय में ये 3 डी न्यूज एंकर ऐसे ही चैनलों पर खबर पढ़ते हुए नजर आ सकती है।

3D न्यूज एंकर को तैयार करने वाली कंपनी का कहना है कि ये इंसानी आवाज की नकल कर सकती है। चेहरे, होंठ के हाव-भाव को पहचान सकती है। अपनी शैली में परिवर्तन भी ला सकती है। इससे पहले 2018 में शिन्हुआ क्यू हाउ नाम से डिजिटल एंकर को न्यूज की दुनिया में उतार चुकी है। मशीन लर्निंग तकनीक का इस्तेमाल कर उसे आवाज की नकल करने, चेहरे की गति और वास्तविक प्रस्तोता के हाव भाव की नकल करता था। आने वाले दिनों में हो सकता है 3D न्यूज एंकर स्टूडियो से बाहर कई मौकों पर ताजा समाचार पढ़ते हुए नजर आए।

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मद्रास HC ने मीडिया संस्थानों के खिलाफ दायर इन मामलों को किया खारिज, की सख्त टिप्पणी

तमिलनाडु की तत्कालीन मुख्यमंत्री जयललिता की सरकार में मीडिया संस्थानों के खिलाफ दायर किए गए थे ये मामले

Last Modified:
Friday, 22 May, 2020
High Court

मद्रास हाई कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार द्वारा विभिन्न मीडिया संगठनों के खिलाफ करीब आठ साल पूर्व वर्ष 2012 और 2013 के दौरान दायर किए गए 28 मानहानि मामलों को खारिज कर दिया है। ये मामले राज्य की तत्कालीन मुख्यमंत्री जयललिता की सरकार में दाखिल किए गए थे। इन मामलों को खारिज करते हुए हाई कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी भी की और कहा कि आपराधिक मानहानि के मामलों का इस्तेमाल राज्य लोकतंत्र का गला घोंटने के लिए नहीं कर सकते हैं।.

जस्टिस अब्दुल कुद्दोज (Abdul Quddhose) ने मीडिया संगठनों के एक समूह द्वारा उनके खिलाफ दायर मानहानि के मुकदमों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कहा कि लोक सेवकों और संवैधानिक पदाधिकारियों को आलोचनाओं का सामना करने में सक्षम होना चाहिए, क्योंकि वे लोगों के लिए उत्तरदायी होते हैं।

अपने 152 पन्नों के फैसले में हाई कोर्ट ने प्रेस की स्वतंत्रता का जिक्र करते हुए कहा कि आपराधिक मानहानि कानून आवश्यक वास्तविक मामलों के लिए इस्तेमाल में लाए जाने के लिए है। यह कानून राज्य या राज्य के लोक सेवकों को इसके दुरुपयोग का अधिकार नहीं देता है।

कोर्ट ने कहा कि एन राम, सिद्धार्थ वरदराजन, नकेरन गोपाल  आदि के खिलाफ दायर इन आपराधिक मामलों में राज्य की ‘मानहानि’ नहीं हुई है। इसके साथ ही हाई कोर्ट का यह भी कहना था कि राज्य को एक अभिभावक की तरह व्यवहार करना चाहिए।

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पत्रकारों से जुड़े इन मामलों पर PCI ने जताई चिंता, सरकार से मांगी रिपोर्ट

उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में ‘मीडिया ब्रेक’ (Media Break) के एडिटर आशीष अवस्थी के खिलाफ एफआईआर दर्ज किए जाने के मामले में ‘प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया’ (PCI) ने स्वत: संज्ञान लिया है

Last Modified:
Thursday, 21 May, 2020
PCI

उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में ‘मीडिया ब्रेक’ (Media Break) के एडिटर आशीष अवस्थी के खिलाफ एफआईआर दर्ज किए जाने के मामले में ‘प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया’  (PCI) ने स्वत: संज्ञान लिया है। काउंसिल के चेयरमैन जस्टिस सीके प्रसाद ने इस मामले में चिंता जताते हुए बुधवार को उत्तर प्रदेश सरकार से इस मामले में रिपोर्ट मांगी है।

गौरतलब है कि आशीष अवस्थी ने 8 मई 2020 को कोरोना महामारी से जूझ रहे होमगार्ड्स की ‘दुर्दशा’ को अपनी खबर के माध्यम से उजागर किया था। इस रिपोर्ट में उन्होंने बताया था कि किस तरह से बिना किसी बीमा कवच के कोरोना से जूझते हुए होमगार्ड्स ड्यूटी कर रहे हैं जबकि पुलिस कर्मियों को कोरोना महामारी के दृष्टिगत उत्तर प्रदेश शासन से बीमा सुरक्षा कवच प्रदान किया गया है।

इसके बाद कानपुर पुलिस ने आशीष अवस्थी के खिलाफ कानपुर दक्षिण क्षेत्र के बाबूपुरवा कोतवाली के इंस्पेक्टर राजीव सिंह की तहरीर पर सोशल मीडिया में खबर प्रसारित करने और कानपुर पुलिस की छवि धूमिल करने सहित अन्य गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज की है।

यहां यह भी बता दें कि इससे पहले मंगलवार को प्रेस काउंसिल ने ‘अरुणाचल टाइम्स’ (Arunachal Times) की एसोसिएट एडिटर तोंगम रीना को अपनी खबर के चलते कई ऑनलाइन पोस्ट में शारीरिक हिंसा की धमकी दिये जाने पर चिंता जतायी थी और स्वत: मामले में संज्ञान लेते हुए अरुणाचल प्रदेश के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक से रिपोर्ट मांगी थी।

दरअसल, 23 अप्रैल को रीना ने ‘अरुणाचल टाइम्स’ में एक लेख प्रकाशित किया था, जिसका शीर्षक था, ‘वाइल्डलाइफ हंटिंग आन स्पाइक, सेज एक फारेस्ट आफिशियल’। इस पर रीना को तमाम ऑनलाइन पोस्ट में धमकी दी गई थीं।

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इन क्षेत्रों में फिर अपना काम शुरू करेगी बार्क इंडिया, बनाई ये स्ट्रैटेजी

इस अभूतपूर्व संकट और अनिश्चितता भरे दौर में एजेंसियों, ब्रैंड्स और ब्रॉडकास्टर्स को योजना बनाने में मदद करने के लिए साप्ताहिक आधार पर अपने डाटा प्रस्तुत करना जारी रखेगी

Last Modified:
Wednesday, 20 May, 2020
BARC India

देशभर में टेलिविजन दर्शकों की संख्या मापने वाली संस्था 'ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल' (BARC) इंडिया और ‘मेट्रोलॉजी डाटा प्राइवेट लिमिटेड’ (MDL) ग्रीन जोन (Green Zones) के रूप में वर्गीकृत किए जाने वाले क्षेत्रों में पैनल होम्स की सर्विसिंग का काम फिर शुरू करेंगी।

बार्क इंडिया इस अभूतपूर्व संकट और अनिश्चितता भरे दौर में एजेंसियों, ब्रैंड्स और ब्रॉडकास्टर्स को योजना बनाने में मदद करने के लिए साप्ताहिक आधार पर अपने डाटा प्रस्तुत करना जारी रखेगी। अपने कार्य को सुचारु रुप से चलाने और कम से कम व्यवधान को सुनिश्चित करने के लिए जरूरत पड़ने पर घरों में लगे मीटर की सर्विसिंग या रखरखाव की दिशा में घरों के सदस्यों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

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सुप्रीम कोर्ट ने अरनब गोस्वामी को दी थोड़ी राहत, मीडिया की आजादी को लेकर की ये टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि एक पत्रकार के खिलाफ एक ही घटना के संबंध में अनेक आपराधिक मामले दायर नहीं किए जा सकते हैं।

Last Modified:
Wednesday, 20 May, 2020
Supreme Court

‘रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क’ के एडिटर-इन-चीफ अरनब गोस्वामी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान उच्चतम न्यायालय ने कहा कि पत्रकारिता की आजादी संविधान में दिए गए बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का मूल आधार है। अदालत ने यह भी कहा कि भारत की स्वतंत्रता उस समय तक ही सुरक्षित है, जब तक सत्ता के सामने पत्रकार किसी बदले की कार्रवाई का भय माने बिना अपनी बात कह सकता है।

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने अरनब गोस्वामी की दो याचिकाओं पर सुनाए गए फैसले में मीडिया की आजादी के बारे में यह टिप्पणियां कीं। पीठ ने कहा कि एक पत्रकार के खिलाफ एक ही घटना के संबंध में अनेक आपराधिक मामले दायर नहीं किए जा सकते हैं। उसे कई राज्यों में राहत के लिए चक्कर लगाने के लिए बाध्य करना पत्रकारिता की आजादी का गला घोंटना है।

अरनब गोस्वामी के खिलाफ अनेक राज्यों में दर्ज प्राथमिकियां रद्द करने की उनकी याचिका पर उच्चतम न्यायालय ने यह बात कही। अरनब गोस्वामी ने पालघर में दो साधुओं सहित तीन व्यक्तियों की पीट-पीटकर हत्या किये जाने की घटना के बारे में अपने कार्यक्रम को लेकर दर्ज प्राथमिकी और निजी शिकायतों में चल रही आपराधिक जांच निरस्त करने के लिये ये याचिकायें दायर की थीं। पीठ ने अरनब गोस्वामी को राहत प्रदान करते हुए नागपुर से मुंबई ट्रांसफर किए गए मामले को छोड़कर अन्य सभी एफआईआर रद्द कर दीं। साथ ही इस मामले में उन्हें किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई से तीन सप्ताह का संरक्षण भी प्रदान कर दिया। मुंबई स्थानांतरित एफआईआर को निरस्त कराने के लिए पीठ ने गोस्वामी को सक्षम अदालत का दरवाजा खटखटाने को कहा। वहीं, पीठ ने इन मामलों की जांच सीबीआई को सौंपने का अरनब गोस्वामी का अनुरोध ठुकरा दिया।

पीठ ने अपने 56 पेज के फैसले में कहा कि एक पत्रकार के खिलाफ एक ही घटना के संबंध में अनेक आपराधिक मामले दायर नहीं किये जा सकते हैं। पीठ ने संविधान के अनुच्छेद 19(1)(ए) में प्रदत्त अभिव्यक्ति के मौलिक अधिकार और आपराधिक मामले की जांच के संबंध में दंड प्रक्रिया संहिता के प्रावधानों का भी जिक्र किया।

पीठ का कहना था कि याचिकाकर्ता एक पत्रकार है। संविधान से मिले अभिव्यक्ति के मौलिक अधिकार का इस्तेमाल करते हुए याचिकाकर्ता ने टीवी कार्यक्रम में अपने विचार जताए थे। हालांकि, जस्टिस चंद्रचूड़ ने यह भी कहा कि अनुच्छेद 19 (1) (ए) के तहत पत्रकारों को बोलने व अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए मिले अधिकार उच्च स्तर के हैं, लेकिन ये असीमित नहीं हैं। पीठ ने कहा, मीडिया की भी उचित प्रतिबंधों के प्रावधानों के दायरे में जवाबदेही है।

पीठ ने कहा कि एक पत्रकार की बोलने और अभिव्यक्ति की आजादी सर्वोच्च पायदान पर नहीं है, लेकिन बतौर समाज हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि पहले का अस्तित्व दूसरे के बगैर नहीं रह सकता। यदि मीडिया को एक दृष्टिकोण अपनाने के लिए बाध्य किया गया तो नागरिकों की स्वतंत्रता का अस्तित्व ही नहीं बचेगा। गोस्वामी पर आरोप है कि उन्होंने पालघर में संतों की हत्या के बाद एक टीवी शो में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की चुप्पी को लेकर कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी।

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