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मीडिया प्रफेशनल्स ने बताया, क्या है न्यूज चैनल्स के लिए सबसे अच्छा बिजनेस मॉडल
‘एक्सचेंज4मीडिया’ समूह की न्यूजनेक्स्ट कॉन्फ्रेंस 2021 के दौरान दिग्गजों ने टीवी पर होने वाले शोरशराबे को लेकर अपनी राय रखी।
समाचार4मीडिया ब्यूरो 4 years ago
इन दिनों तमाम टीवी चैनल्स पर होने वाले शोरशराबे का मुद्दा चर्चा में रहता है। ऐसे में ‘एक्सचेंज4मीडिया’ (exchange4media) समूह की न्यूजनेक्सट कॉन्फ्रेंस 2021 के दौरान यह मामला उठा कि टीवी पर जो शोरशराबा हम देखते हैं, क्या वह उनके बिजनेस मॉडल का हिस्सा है। इस मौके पर वर्चुअल रूप से आयोजित पैनल डिस्कशन का टॉपिक 'Reducing The Noise in TV News?' रखा गया था। इस पैनल को सीएनएन न्यूज18 की डिप्टी एडिटर अरुणिमा ने मॉडरेट किया। न्यूजएक्स की प्रिया सहगल, आईटीवी के सीईओ वरुण कोहली और इंडिया टुडे की प्रीति चौधरी बतौर पैनलिस्ट इसमें शामिल हुए।
सहगल का मानना था कि आजकल टीवी पर न्यूज से ज्यादा शोरशराबा दिखाई देता है। उनका कहना था, ‘पिछले साल लॉकडाउन के दौरान टीवी ने सबसे ज्यादा जिम्मेदारी से काम किया। उस समय हम ही न्यूज का एकमात्र स्रोत थे। उस समय कोई ड्रामा नहीं था, सिर्फ इंफॉर्मेशन थी। मुझे उम्मीद है कि यह समय वास्तविक मुद्दों को न्यूज एजेंडा में फिर वापस लाने का है।’ चर्चा को आगे बढ़ाते हुए प्रीति चौधरी ने कहा कि व्युअर्स इंफॉर्मेशन चाहते हैं, सनसनी नहीं, लेकिन मुझे नहीं लगता कि पूरी तरह से सिर्फ हम इसके लिए जिम्मेदार हैं। इसके लिए जितना चैनल्स पर दोषारोपण किया जाता है, उतना ही चैनल्स देखने वाले लोगों पर दोषारोपण करना चाहिए। परिवर्तन सामूहिक रूप से होना है और समाज की ओर से भी इस दिशा में पहल होनी चाहिए। टीआरपी से छेड़छाड़ के मामले मे बार्क ने न्यूज चैनल्स की रेटिंग्स पर फिलहाल रोक लगा रखी है। अक्टूबर से इस पर रोक लगाई गई थी, जो अभी भी जारी है।
इस मौके पर वरुण कोहली का कहना था, ‘व्युअर्स ऐसे लोगों को नकार रहे हैं जो स्क्रीन पर आते हैं, चिल्लाते हैं और चले जाते हैं। तमाम न्यूज चैनल्स ऐसे लोगों का माइक ऑफ कर दे रहे हैं, जो स्क्रीन पर आकर चिल्लाते हैं। यह एक अच्छा कदम है, क्योंकि महामारी ने वास्तव में हम सभी को बहुत तनाव दिया है इसलिए हम इस तरह के शोरशराबे के लिए टेलिविजन का रुख नहीं करना चाहते हैं। दूसरी बात यह है कि स्क्रीन में अब बदलाव आ रहा है, अब ओटीटी और डिजिटल आगे आ रहे हैं, जो आपको अच्छा फीडबैक देते हैं। नए जमाने के व्युअर्स अब शोरशराबा नहीं चाहते हैं। वे चाहते हैं कि उन्हें नई चीजें दी जाएं और यही कारण है कि वीडियो खासकर वेब पर वीडियो ज्यादा अच्छा काम कर रहे हैं। न्यूज चैनल्स की टीआरपी पिछले कुछ समय से बंद है, ऐसे में पूरा फोकस कंटेंट पर आ गया है, क्योंकि कंटेंट ही सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है। बार्क द्वारा रेटिंग बंद किए जाने से हमें रेवेन्यू का ज्यादा नुकसान नहीं हुआ है, इससे पता चलता है कि लोग हमारे द्वारा दिए जा रहे कंटेंट को पसंद करते हैं। हम ऐसे जॉनर में हैं, जहां पर एडवर्टाइजर भी हमारा व्युअर है। समस्या रेटिंग, विज्ञापनदाताओं और दबाव की थी लेकिन पिछले साल जब महामारी हुई थी, तब से बहुत सारी चीजें बदल गई हैं क्योंकि प्रबंधन और संपादकीय एक साथ इस बात पर साथ आ गए हैं कि वे एक विश्व स्तरीय उत्पाद बनाना चाहते हैं। अगले दस वर्षों में स्क्रीन कई गुना हो जाएंगे, इसलिए यदि हमें विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर जाना है तो हमें कंटेंट पर ध्यान देना होगा, जो सभी के लिए अच्छा है।’
इस मौके पर अरुणिमा ने न्यूज चैनल्स के बीच एकता के बारे में बात की। उन्होंने कहा कि न्यूज इंडस्ट्री में नेशनल ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन (NBA) है, लेकिन कुछ चैनल्स पर पेनाल्टी लगाने अथवा उन्हें जवाबदेह बनाए जाने का प्रयास करने पर उन्होंने एनबीए को छोड़ने का विकल्प चुना। क्या यह सही है? अरुणिमा ने सवाल उठाया कि टीवी पर होने वाला शोरशराबा क्या इसके बिजनेस मॉडल का परिणाम है। वहीं, वरुण कोहली का कहना था कि ऐसे तमाम शो हैं, जिनमें शोरशराबा नहीं होता, फिर भी उनकी रेटिंग्स बहुत आती है। उन्होंने कहा, ‘मैंने ऐसे कई चैनल्स देखे हैं, जिनमें शोरशराबा नहीं है। ये चैनल्स स्क्रीन पर चिल्ला रहे व्यक्ति का माइक ऑफ कर देते हैं, यह काफी अच्छा कदम है। हमें एक इंडस्ट्री बॉडी के रूप में एक साथ आना है, हमें एक विशेष लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ने की आवश्यकता है।’
चर्चा के अंत में सहगल ने कहा कि क्रेडिबिलिटी सबसे अच्छा मॉडल है, यदि इंडस्ट्रियलिस्ट जिम्मेदार चैनल्स को खुद रेवेन्यू देना शुरू कर दें तो इससे विश्वसनीय मीडिया बनाने में मदद मिलेगी।
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