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ऐसे होते हैं इंटरव्यू,क्या आपने देखा दिबांग संग राहुल गांंधी का ये इंटरव्यू

पश्चिम बंगाल के पुरुलिया में एक रैली के दौरान राहुल ने पत्रकारों के सवालों के लिए समय निकाला

समाचार4मीडिया ब्यूरो 6 years ago

कोई भी इंटरव्यू सार्थक या कहें कि रोचक तभी बनता है, जब उसमें तीखे सवालों और बेवाक जवाबों का मिश्रण हो। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अब तक कई इंटरव्यू सामने आ चुके हैं, लेकिन उनमें से केवल कुछ में ही यह मिश्रण देखने को मिला। इसके अलावा एनडीटीवी पर प्रसारित राहुल गांधी के पहले एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में भी इसकी महज झलक ही नज़र आई, लेकिन एबीपी न्यूज़ ने इस कमी को काफी हद तक भरने की कोशिश की है।

चैनल के वरिष्ठ पत्रकार दिबांग और सुमन डे ने राहुल गांधी से कई तीखे सवाल पूछे और राहुल ने उतनी ही बेवाकी से उनका जवाब दिया। पश्चिम बंगाल के पुरुलिया में एक रैली के दौरान राहुल ने पत्रकारों के सवालों के लिए समय निकाला और तपती धूप में शुरू हुआ सवाल-जवाब का सिलसिला हर पल रोचक होता चला गया। दिबांग के सवालों में जहां उनका अनुभव झलक रहा था, वहीं राहुल के जवाब में उनकी परिपक्वता। कांग्रेस अध्यक्ष के बारे में अक्सर कहा जाता है कि वह प्रश्न को समझे बिना ही उत्तर दे जाते हैं, लेकिन इस इंटरव्यू में ऐसा कुछ भी देखने को नहीं मिला। राहुल ने हर सवाल और उसकी गंभीरता को समझा और उसी के अनुरूप ऐसा जवाब तैयार किया, जिसकी अपेक्षा केवल मंझे हुए राजनीतिज्ञ से ही की जा सकती है।

दिबांग ने इंटरव्यू की शुरुआत गठबंधन से करने के बजाय एक ऐसे सवाल से की, जिसे नरेंद्र मोदी ने हवा दी है। उन्होंने पूछा, ‘चुनाव के पांच चरण हो चुके हैं। अब प्रधानमंत्री कह रहे हैं कि अगले दो चरण हम राजीव गांधी के मान-सम्मान पर क्यों न चुनाव लड़ लें। एक चुनौती दे रहे हैं, क्या आप इस चुनौती के लिए तैयार हैं?’ इस सवाल का जवाब राहुल के लिए आसान नहीं था, क्योंकि यदि वह अपने पिता के बचाव में कोई दलील देते, तो भाजपा को उन्हें निशाना बनाने का एक और मौका मिल जाता और यदि ठोस जवाब नहीं देते तो जनता के बीच गलत संदेश जाता। इसलिए उन्होंने ऐसा रास्ता चुना, जो उतना ही मारक है, लेकिन बिना किसी शाब्दिक हिंसा के।

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, ‘चुनौती का जवाब दे दिया है। मैंने कहा है कि नरेंद्र मोदी मेरी ओर जो भी नफरत फेकेंगे, मैं वापस प्यार फेकूंगा। मेरा रिस्पॉन्स प्यार है, उनका रिस्पॉन्स नफरत है। जो उनके दिल में है वो देंगे  और जो मेरे दिल में है, मैं दूंगा। मोदी घबराए हुए हैं, डरे हुए हैं। चुनाव हारने जा रहे हैं, उनका डर मैं समझता हूं और डर से नफरत पैदा हो रही है।’ दिबांग के बाद सुमन डे ने ऐसा सवाल पूछा, जिसकी चर्चा हर ओर है। उन्होंने कहा, ‘क्या आपको लगता है इस चुनाव में कभी जवाहर लाल नेहरू आपके साथ लड़ रहे हैं,कभी राजीव गांधी आपके साथ लड़ रहे हैं, क्योंकि बहुत सारे मुद्दों पर उन्हें घसीटा जा रहा है। नेहरू की कश्मीर नीति की भी आलोचना हो रही है, बोफोर्स एक बार फिर से उभरकर सामने आ रहा है। क्या आपको लगता है कि सारे पुराने मुद्दे एक बार फिर सामने आ रहे हैं?’ इसका भी राहुल ने बेहद चतुराई से जवाब दिया। वह बोले, ‘देखिए मेरी लड़ाई गरीबी के खिलाफ, किसानों की हालत के खिलाफ, बेरोजगारी के खिलाफ है। मेरी लड़ाई नरेंद्र मोदी जी की विचारधारा से है। उनकी विचारधारा डर की विचारधारा है, नफरत की विचारधारा है। उससे हिंदुस्तान का नुकसान होगा। अब नरेंद्र मोदी जिस प्रकार से लड़ना चाहते हैं वो लड़ें, मैं जिस प्रकार से लड़ना चाहता हूं मैं लड़ूंगा।’

सवालों की कमान एक बार दिबांग के हाथों में आई और उन्होंने एक ऐसा प्रश्न राहुल ने सामने रख दिया, जो उन्हें शाब्दिक हिंसा के लिए प्रेरित कर सकता था, मगर ऐसा हुआ नहीं। दिबांग ने पूछा, ‘आप विपश्यना करते हैं। अकेले आप ही पर हमला नहीं हो रहा है, हमला हो रहा है आपके पिता पर, उन्हें भ्रष्टाचारी नंबर 1 कहा जा रहा है, आपकी मां को कांग्रेस की विधवा कहा जा रहा है। इसका क्या असर होता है?’ जिस पर कांग्रेस अध्यक्ष ने जवाब दिया, ‘देखिए मैं जो बोल रहा हूं वो मैं नहीं बोल रहा, मैं जनता की आवाज सुन रहा हूं और जो जनता बोल रही है मैं उसको दोहरा रहा हूं। वही काम मेरे पिताजी करते थे, वही काम मेरी दादी करती थीं, वही काम हमारी ये सेना करती है, वही काम हिंदुस्तान के किसान करते हैं तो आपको जो भी बोलना है बोलिए, मजे लीजिए। जो भी आपके दिल में आए, जितनी भी आपको मुझे गाली देनी है, दीजिए, मैं सब सह लूंगा।’

सवाल-जवाब का सिलसिला यूं ही आगे बढ़ता गया। दिबांग और सुमन ने राहुल गांधी पर कई तीखे सवाल दागे, लेकिन वह बिना झिझके या अटके बेवाकी से हर सवाल का जवाब देते गए। सुमन ने जब केरल में वामपंथियों के खिलाफ कुछ न बोलने को लेकर सवाल उठाया, तो राहुल ने बड़ी ही सफाई से बात को नरेंद्र मोदी की तरफ मोड़ दिया। इसके बाद दिबांग ने उनके चौकीदार है वाले नारे को राजीव गांधी से जोड़ते हुए कहा, ‘अगर आप ये देखें कि आप नारा लगवाते हैं, आपके पिताजी के बारे में भी यही कहा जाता था, यही शब्द इस्तेमाल होता था। कोर्ट ने उनको बाइज्जत बरी किया। अब अगर आप ऐसे नारे लगवाएंगे…’ सवाल बीच में ही काटते हुए राहुल बोले, ‘मेरे पिता का जो इतिहास है वो पूरा देश जानता है। मेरे पिता शहीद हुए, मेरी दादी शहीद हुईं। इस बारे में मैं बोलता नहीं हूं, मगर नरेंद्र मोदी के दिल में जो नफरत है, वह मेरे लिए नहीं है। नरेंद्र मोदी जी कांग्रेस से नफरत नहीं करते हैं, जवाहर लाल नेहरू, राजीव गांधी से नफरत नहीं करते। नरेंद्र मोदी जी स्वयं नरेंद्र मोदी से नफरत करते हैं। मेरा काम कांग्रेस के नेता होने के नाते उनके दिल से वो नफरत निकालने का है। मैं नरेंद्र मोदी जी के दिल में प्यार डालूंगा।’

एनडीटीवी के पत्रकार श्रीनिवासन की तरह इस इंटरव्यू में भी राफेल पर राहुल सवाल पूछे गए, लेकिन अलग अंदाज़ में। दिबांग ने बस ‘चौकीदार चोर हैं’ का जिक्र किया और राहुल ने राफेल की पूरी कहानी बयां कर डाली। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को खुली बहस की चुनौती देते हुए कहा, ‘प्रोसेस चल रही है, इन्क्वायरी करवाइये साबित हो जाएगा। आप इन्क्वायरी क्यों नहीं करवा रहे हैं। इन्क्वायरी की बात छोड़िये आप मेरे सामने खड़े हो जाइये, आइये। जहां भी आप चाहें। मैंने 15-20 बार चैलेंज दिया है, जहां भी आप चाहें, मैं आ जाऊंगा। रेसकोर्स रोड आ जाऊंगा। आप बुलाएंगे तो आपके ऑफिस आ जाऊंगा। ओपन डिबेट कर लेते हैं। मैं राफेल का मामला उठाता हूं, मैं आपसे 4-5 सवाल पूछूंगा उन सवालों के जवाब आप देश के सामने दे दीजिए।’

इसके बाद दोनों पत्रकारों ने कांग्रेस अध्यक्ष को प्रधानमंत्री के सवाल पर घेरने का प्रयास किया, लेकिन सफल नहीं हुए। यदि भाजपा सत्ता में नहीं आती है तो अगला प्रधानमंत्री कौन होगा, यह सवाल इस वक़्त सबसे बड़ा है और कोई इसका सीधा जवाब नहीं देना चाहता, क्योंकि ऐसा करने पर चुनाव बाद गठबंधन की संभावनाएं प्रभावित हो सकती हैं। इसीलिए राहुल ने भी बड़ी समझदारी से इस सवाल, ‘आपने कहा कि नरेंद्र मोदी चुनाव हार चुके हैं तो क्या आप कह रहे हैं कि अब नया प्रधानमंत्री बनेगा, तो क्या आप प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार हैं?’ के जवाब में कहा, ‘ये तो देश के ऊपर है। मैं कैसे आपसे कह सकता हूं, मेरा काम देश की इंस्टीट्यूशन्स की रक्षा करने का है। मेरा काम देश की आवाज, दर्द को सुनने का है। मैं अपना काम करता हूं। जो निर्णय हिंदुस्तान के लोग लेंगे, वो उनके ऊपर है। मैं कैसे कह सकता हूं, जो हिंदुस्तान की जनता कहेगी उसका मैं पालन करूंगा। वो मालिक है।’ हालांकि, दिबांग ने उन्हें इसी मुद्दे पर फंसाने का दूसरा प्रयास किया, और राहुल को भी यह समझ आ गया। दिबांग ने पूछा कि जो नाम प्रधानमंत्री पद के लिए आ रहे हैं, उसमें ममता बनर्जी, मायावती, शरद पवार, चंद्रबाबू नायडू, इनमें से आपको कौन ज्यादा पसंद है? इस पर कांग्रेस अध्यक्ष ने मुस्कुराते हुए कहा, ‘जैसे मैंने पहले बोला, मेरा लक्ष्य 23 मई तक फुल एनर्जी के साथ भाजपा, संघ, नरेंद्र मोदी को हराने का है। मैं इस बात में आऊगा ही नहीं, क्योंकि मैं जानता हूं कि आप ये डिस्ट्रैक्ट करने के लिए कर रहे हैं। मैं उसमें फसूंगा ही नहीं, जैसे अर्जुन ने आंख देख ली थी, मैंने आंख देख ली है, मैं वहां तीर मारूंगा, और वो तीर निशाने पर जाकर लगेगा।’

बात लौट-घूमकर राहुल की नागरिकता पर भी आई, मगर वहां भी उन्होंने अपनी बेवाकी से सबको प्रभावित कर दिया। जब दिबांग ने पूछा कि 2-3 आरोप जो आप पर लगते हैं, उनमें से नागरिकता वाला एक आरोप है, राहुल जी बार-बार ये सवाल क्यों आ जाता है? इस पर वह बोले, ‘मेरे पिता के बारे में आता है, मेरे बारे में आता है, करिए, आप 5 साल से सरकार में हैं लेकिन नहीं किया आपने, मैं कहता हूं करो। मैं नहीं डरता हूं। मैं सच्चाई पर काम करता हूं, मैं सच्चा आदमी हूं क्या डरना है मुझे।’ इसके अलावा, राहुल के दो सीटों से चुनाव लड़ने, कांग्रेस की ‘न्याय’ योजना और रॉबर्ट वाड्रा पर लगे आरोपों के साथ-साथ कई तीखे सवाल इस इंटरव्यू में राहुल गांधी से पूछे गए।

पूरा इंटरव्यू आप यहां देख सकते हैं-


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