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जानें, क्यों मीडिया पर भड़के कपिल सिब्बल, फिर दी चेतावनी
‘नागरिकता संशोधन कानून’ (सीएए) के खिलाफ हिंसक विरोध प्रदर्शनों के मामले में प्रवर्तन निदेशालय की रिपोर्ट को लेकर विवाद गहराता चला जा रहा है
समाचार4मीडिया ब्यूरो 6 years ago
‘नागरिकता संशोधन कानून’ (सीएए) के खिलाफ हिंसक विरोध प्रदर्शनों के मामले में प्रवर्तन निदेशालय की रिपोर्ट को लेकर विवाद गहराता चला जा रहा है। प्रवर्तन निदेशालय ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि हिंसा फैलाने के लिए पीपुल फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) द्वारा फंडिंग की गई थी। इतना ही नहीं, कांग्रेस नेता व वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और वकील इंदिरा जयसिंह को भी बड़ा भुगतान किया गया। हालांकि, दोनों ही इसे अपने खिलाफ साजिश करार दे रहे हैं।
पैसे लेने के आरोपों का खंडन करते हुए कपिल सिब्बल ने कहा कि आरोपों में सच्चाई नहीं है और यह उन्हें बदनाम करने की साजिश है। इस मामले में कपिल सिब्बल ने मीडिया को भी आड़े हाथ लिया है। उन्होंने मीडिया को अच्छे से होमवर्क करने की नसीहत दी है। सिब्बल ने चेतावनी देते हुए कहा है कि जिन समाचार माध्यमों ने इस बारे में उनका नाम लेते हुए स्टोरी की है, अगर उन समाचार माध्यमों ने स्टोरी को नहीं हटाया गया तो वह कानूनी कार्रवाई करेंगे।
बता दें कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) की इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 73 बैंक खातों में 120 करोड़ रुपए से ज्यादा की रकम जमा की गई थी, जिनका इस्तेमाल सीएए के खिलाफ हिंसक विरोध-प्रदर्शन में हुआ था। अपनी सफाई में कपिल सिब्बल का कहना है कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में हदिया केस लड़ा था, लेकिन उसके लिए उन्हें मार्च 2018 में ही भुगतान किया जा चुका था। सिब्बल के अनुसार, उन्हें पीएफआई से मार्च 2018 में पैसे मिले थे, तब सीएए आया ही नहीं था।
इसके अलावा इंदिरा जयसिंह ने भी इनकार किया है कि उन्हें एंटी-सीएए विरोध या किसी अन्य कारण से पीएफआई से पैसा मिला था। वहीं पीएफआई का कहना है कि जम्मू और कश्मीर में उसका एक भी विंग नहीं है। पीएफआई के महासचिव मोहम्मद अली जिन्ना ने ईडी की जांच को पूरी तरह से आधारहीन बताया है।
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