मोबाइल की दुनिया में क्यों जरूरी है सीधा संवाद, जानें एक्सपर्ट्स की राय

दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में समाज के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े दिग्गजों ने रखे अपने विचार

Last Modified:
Saturday, 15 June, 2019
Dr. Anurag Batra

आजकल स्मार्टफोन का जमाना है। ऐसे में लोगों का एक-दूसरे से संवाद करने का तरीका भी बदल गया है। लोग अब फेस टू फेस बातचीत करने के बजाय वॉट्सऐप और ईमेल पर ज्यादा संवाद करते हैं। ज्यादा से ज्यादा वे फोन कॉल कर लेते हैं। व्यवहार में इस तरह का व्यवहार कार्यस्थल के साथ ही निजी जिंदगी में भी असर डाल रहा है। इन्हीं तमाम मुद्दों पर चर्चा करने के लिए शुक्रवार को दिल्ली के ‘द ललित’ (The Lalit) होटल में शुक्रवार को ‘WIYLD’ की ओर से 'Real Conversations in Digital Age' पर एक कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। इस कॉन्फ्रेंस में इस बात पर भी चर्चा की गई कि फेस टू फेस संवाद न करने का कितना विपरीत प्रभाव पड़ रहा है।

इस मौके पर कॉरपोरेट जगत के साथ ही वरिष्ठ पत्रकार, मनोवैज्ञानिक, ब्रैंड्स और मार्केटिंग से जुड़े दिग्गजों ने इस बारे में अपने-अपने विचार रखे। सभी का कहना था कि आज के समय में सोशल मीडिया एक मजबूत प्लेटफॉर्म बनकर उभरा है, लेकिन किसी व्यक्ति से मिलकर बातचीत करने का अपना महत्व है। इससे उन व्यक्तियों के बीच मजबूत भावनात्मक रिश्ता बनता है जो वॉट्सऐप, फेसबुक, इंस्टाग्राम पर मुश्किल है।

इस मौके पर ‘बिजनेस वर्ल्ड’ और ‘एक्सचेंज4मीडिया’ के चेयरमैन व एडिटर-इन-चीफ डॉ. अनुराग बत्रा का कहना था कि लगातार संवाद की वजह से ही उन्हें मजबूत निजी और बिजनेस रिलेशनशिप बनाने में मदद मिली है। उनका कहना था कि वह आगे बढ़कर लोगों से संवाद शुरू करने में किसी तरह की झिझक महसूस नहीं करते हैं, फिर चाहे वह मॉल हो, रेस्तरां हो अथवा फ्लाइट हो। युवाओं को सलाह देते हुए डॉ. अनुराग बत्रा का कहना था, ‘किसी भी तरह की झिझक छोड़ दें और अजनबियों के साथ बातचीत करने की अपनी स्टाइल डेवलप करें। आपको तब काफी आश्चर्य होगा और अच्छा लगेगा, जब सामने वाले से भी आपको काफी सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलेगी।’

जानी-मानी मनोवैज्ञानिक डॉ. रोमा कुमार का कहना था, ‘रिसर्च से पता चलता है कि दुनियाभर में अच्छी इनकम वाली 75 प्रतिशत नौकरियां सोशल कनेक्ट्स के द्वारा मिलती हैं। मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि सोशल कनेक्शन होना बहुत जरूरी है। इससे आप तमाम तरह की बीमारियों से भी बचे रह सकते हैं।’ डॉ. रोमा कुमार ने समाज में डिप्रेशन के बढ़ते मामलों पर भी चिंता जताई। उन्होंन कहा कि लोगों में संवाद की कमी बढ़ने से अकेलेपन के मामले भी बढ़ रहे हैं।

कार्यक्रम के दौरान ‘WIYLD’ के सीईओ और को-फाउंडर रितु कुमार ओझा का कहना था, ‘स्मार्ट फोन से विभिन्न उम्र के लोगों का व्यवहार बदल रहा है। सोशल मीडिया हमें बनावटी चेहरे दिखाता है, जिसमें व्यक्ति को अपने आसपास की सभी चीजें अच्छी लगती है। ऐसे में लोग वास्तविक दुनिया में संवाद करने से दूर होने लगते हैं, क्योंकि आपको नहीं पता होता है कि सोशल मीडिया के बाहर क्या हो रहा है और कैसे वहां पर आपको तमाम तरह की चुनौतियों का सामना करना है।’

संवाद के दौरान स्टोरीटैलिंग के इस्तेमाल पर जोर देते हुए बीजेपी प्रवक्ता और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री की सलाहकार श्वेता शालिनी का कहना था, ‘हमें स्टोरीटैलिंग पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। जब मैं छोटी थी तो मेरे पिताजी विभिन्न कहानियों के माध्यम से मुझे ईमानदारी और देशसेवा की बात बताया करते थे और अपने बच्चों को भी मैं इसी तरीके से समझाती हूं।’

यह पूछे जाने पर कि लोग लगातार स्क्रीन पर कैसे दिखते हैं, उन्होंने कहा, ‘किसी भी कंवर्शेसन के दौरान लगातार उस पर ध्यान देना लग्जरी होती जा रही है। सोशल मीडिया पर अगले अपडेट के लिए लगातार अपने फोन को चेक करते रहना हमारे कंवर्शेसन को हमारी आत्मा से काफी दूर ले जाता है।’ कार्यक्रम में मौजूद सभी पैनलिस्ट इस बात से सहमत थे कि सार्थक बातचीत की कमी का बिजनेस पर काफी प्रभाव पड़ रहा है और इस दिशा में बदलाव लाने की जरूरत है।

‘Growthsqapes’ के फाउंडर सात्यकी भट्टाचार्जी का कहना था कि लीडरशिप के लिए सबसे महत्वपूर्ण बातों में से एक किसी भी लीडर का लगातार संवाद में शामिल होना होता है। यदि लीडर्स लोगों को प्रेरित करने में और सार्थक बातचीत करने में विफल रहते हैं तो वे अच्छे नेतृत्वकर्ता नहीं बन सकते हैं। वहीं, ‘Ishwa Consulting’ के फाउंडर और मैनेजिंग पार्टनर अरविंद पंडित का कहना था कि किसी भी लीडर के लिए यह बहुत जरूरी है कि वह अपनी टीम से ज्यादा से ज्यादा संवाद करता रहे और उनसे जुड़ा रहे, इससे बिजनेस में बेहतर रिजल्ट्स मिलते हैं।

संवाद के तरीके के महत्व के बारे में सीनियर बिजनेस लीडर शुभ्रांशु नियोगी (Subhrangshu Neogi) ने कहा, ‘लगातार संवाद होते रहना किसी भी संस्थान की आत्मा और उसका दिल है। हमेशा अपने स्टैकहोल्डर्स और कंज्यूमर्स से संवाद बनाए रखें। सकारात्मक संवाद के परिणाम भी अच्छे आते हैं। ऐसे में संवाद को हमेशा प्रोत्साहित करते रहना चाहिए।’ हार्वर्ड द्वारा लगातार 80 साल तक की गई स्टडी में पाया गया कि पैसे और प्रसिद्धि से ज्यादा रिश्ते लोगों को जीवनभर खुश रखते हैं। पैनल में शामिल विशेषज्ञों का सुझाव था कि सकारात्मक बातचीत से ही रिश्तों को और मजबूत व सार्थक बनाया जा सकता है।

‘माइक्रोसॉफ्ट इंडिया’ (Microsoft India) के पूर्व डायरेक्टर (मार्केटिंग) पुनीत मोदगिल (Punit Modhgil) का कहना है, ‘टेक्नोलॉजी ने हमारी जिंदगी बदल दी है लेकिन इसका इस्तेमाल संवेदनशील रूप से करने की जरूरत है। मोबाइल ने हमारे संवाद करने के तरीके पर काफी प्रतिकूल प्रभाव डाला है और इसका रिश्तों पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है। आने वाले समय में यह ब्रैंड्स को भी प्रभावित करेगा।’ ‘Deloitte’ कंपनी द्वारा हाल ही में जारी रिपोर्ट के अनुसार, भावनात्मक लगाव रिश्ते को और आगे बढ़ाता है, जबकि तर्कसंगत विचार इन्हें कम महत्वपूर्ण बनाते हैं। किसी भी ब्रैंड के लिए अपने ऑडियंस से भावनात्मक रूप से जुड़ना काफी महत्वपूर्ण होता है। इससे लोगों का उस ब्रैंड में भरोसा बढ़ता है और ब्रैंड को आगे बढ़ने व लोकप्रिय बनने में मदद मिलती है।    

इस मौके पर कॉलेज के एक छात्र के सवाल का जवाब देते हुए ‘सिटी बुक लीडर्स’ (City Book Leaders) के चीफ क्यूरेटर और फाउंडर मोहित गुप्ता ने कहा, ‘मनुष्यों के लिए किताबें हमेशा से सार्थक स्टोरीज और संवाद का एक माध्यम रही हैं। अच्छी-अच्छी किताबें पढ़ें और उन लोगों को सुनें जो किताबें पढ़ते हैं।

हम लोगों के साथ जो बातचीत करते हैं, उसकी क्वालिटी का हमारे एनर्जी लेवल पर सीधा प्रभाव पड़ता है। ‘परिवर्तन प्रबंधन और व्यापार स्थिरता’ (change management and business sustainability) के बारे में आईआईएम लखनऊ के प्रोफेसर डॉ. सुशील कुमार का कहना है, ‘जब आप क्लास में पढ़ाने के दौरान छात्र-छात्राओं से सीधा संवाद करते हैं तो पूरे दिन पॉजीटिव एनर्जी से भरे रहते हैं। हम ऑनलाइन एजुकेशन प्रोग्राम में इस चीज को काफी मिस करते हैं।’ विद्यार्थियों के व्यवहार में आ रहे बदलावों के बारे में डॉ. सुशील कुमार ने कहा, ‘वर्तमान में विद्यार्थी ज्ञान अर्जित करने के बजाय अच्छे ग्रेड लाने पर ज्यादा फोकस करते हैं।’

अमेरिका में पांच हजार लोगों पर हुए एक सर्वे में पाया गया है कि 1985 के बाद से करीबी दोस्त न होने के मामले में अमेरिकियों की संख्या तीन गुना बढ़ चुकी है। जिन लोगों को सर्वे में शामिल किया गया, उनमें से लगभग एक चौथाई ने किसी पर भी अपना भरोसा न होने की बात कही।

 

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इस खुलासे के बाद न्यूज एंकर्स व रिपोर्टर्स को मिल रहीं धमकियां, NBA ने जताया विरोध

‘एनबीए’ के वाइस प्रेजिडेंट और इंडिया टीवी के चेयरमैन व एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा की ओर से इस बारे में एक पत्र भी जारी किया गया है

Last Modified:
Monday, 06 April, 2020
NBA

निजी टेलिविजन न्यूज चैनल्स का प्रतिनिधित्व करने वाले समूह ‘न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन’ (NBA) ने विभिन्न न्यूज चैनल्स में काम कर रहे एंकर्स और पत्रकारों के खिलाफ समाज के एक खास वर्ग के लोगों द्वारा दुर्व्यवहार और धमकियों का सहारा लेने की प्रवृत्ति पर गंभीर चिंता जताई है।

‘एनबीए’ के वाइस प्रेजिडेंट और इंडिया टीवी के चेयरमैन व एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा की ओर से जारी एक पत्र में कहा गया है कि हाल के दिनों में इलेक्ट्रॉनिक मीडिया द्वारा कोरोनावायरस (कोविड-19) के प्रसार में तबलीगी जमात की भूमिका को उजागर किया गया है, तब से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के खिलाफ इस तरह के मामले ज्यादा देखने को मिल रहे हैं।

रजत शर्मा द्वारा जारी इस पत्र में यह भी कहा गया है कि न्यूज चैनल्स के एंकर्स और रिपोर्टर्स को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे- वॉट्सऐप, टिकटॉक और ट्विटर पर विशेष रूप से निशाना बनाया जा रहा है। सोशल मीडिया पर कुछ ऐसे विडियो भी प्रसारित किए जा रहे हैं, जिनमें धर्म विशेष के कुछ लोग टीवी न्यूज एंकर्स का नाम ले रहे हैं और उन चैनल्स के रिपोर्टर्स पर हमले की धमकी दे रहे हैं।

रजत शर्मा की ओर से जारी इस पत्र में कहा गया है, ‘समाज के एक वर्ग में फैल रही इस घृणित प्रवृत्ति की एनबीए घोर निंदा करता है और सरकार व कानून का पालन कराने वाली एजेंसियों से इन असामाजिक तत्वों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई किए जाने की अपील करता है। इस महामारी के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए देश में लागू किए गए लॉकडाउन के बीच इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ने काफी उल्लेखनीय काम किया है और हमेशा सही, निष्पक्ष और संतुलित रिपोर्टिंग की है। कोरोनावायरस जैसी महामारी को लेकर टीवी पर होने वाली डिबेट्स में भी समाज को सभी वर्गों को उचित व बराबर का प्रतिनिधित्व दिया गया है।’   

पत्र में एनबीए की ओर से ऐसे धार्मिक तत्वों से इस तरह की धमकियां से दूर रहने और न्यूज चैनल्स के खिलाफ इस तरह की बयानबाजी न करने के लिए भी कहा गया है। पत्र में एनबीए की ओर से यह भी कहा गया है कि ऐसे नेता सामने आएं और कोरोनावायरस को फैलाने में तबलीगी जमात की भूमिका को लेकर अपना रुख साफ करें।

 

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कोरोना पीड़ित महिला पत्रकार से अंजाने में हो गई बड़ी 'गलती', खामियाजा भुगत रहे कई लोग

दुनियाभर में कोरोनावायरस (कोविड-19) का संक्रमण फैलता ही जा रहा है। इसकी वजह से जहां कई लोगों की मौत हो चुकी है, वहीं संक्रमित मरीजों की संख्या भी रोजाना बढ़ती जा रही है।

Last Modified:
Monday, 06 April, 2020
Cororna Virus

दुनियाभर में कोरोनावायरस (कोविड-19) का संक्रमण फैलता ही जा रहा है। इसकी वजह से जहां कई लोगों की मौत हो चुकी है, वहीं संक्रमित मरीजों की संख्या भी रोजाना बढ़ती जा रही है। ऐसा ही एक मामला अमेरिका के न्यूजर्सी का सामने आया है, जहां कोरोना संक्रमित महिला पत्रकार की वजह से कम से कम सात लोग इस बीमारी से संक्रमित हो गए, जिनमें से तीन लोगों की मौत भी चुकी है। दरअसल, ये सभी लोग पत्रकार की मां की बर्थडे पार्टी में शामिल हुए थे और वहीं से पत्रकार द्वारा यह संक्रमण उनमें फैल गया।

‘डेली मेल’ की रिपोर्ट के अनुसार, पत्रकार ने इस बात को खुद स्वीकार किया है। हालांकि, पत्रकार का यह भी कहना है कि यह सब ‘अनजाने’ में हुआ। इस बारे में महिला पत्रकार का कहना है कि घटना के वक्त उन्हें बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि न्यूयॉर्क में कोरोना के मामलों की रिपोर्टिंग करने के दौरान वह खुद इस महामारी से संक्रमित हो चुकी हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, न्यूयॉर्क में बतौर रेडियो रिपोर्टर काम करने वाली इस पत्रकार ने अपनी 90 साल की मां का बर्थडे मनाने के लिए आठ मार्च को पार्टी आयोजित की थी। चर्च में हुई इस पार्टी में कुल 25 लोग शामिल हुए थे। पार्टी के अगले दिन पत्रकार की मां बीमार हो गई थीं, हालांकि, उन्हें कुछ दिन बाद अस्पताल में भर्ती किया गया। इसके बाद जब पत्रकार का कोरोना वायरस टेस्ट किया गया तो वह पॉजिटिव निकला। बाद में पता चला कि उस पार्टी में शामिल तीन लोगों की मौत हो गई है और कम से कम 4 अन्य लोग पॉजिटिव निकले हैं।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पत्रकार के माता-पिता और 56 वर्षीय एक अन्य रिश्तेदार भी कोरोनावायरस से संक्रमित हो चुका है। हालांकि, यह रिश्तेदार बर्थडे पार्टी में शामिल नहीं हुआ था।

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मोरारी बापू ने पीएम की मुहिम के लिए मांगा जनसहयोग, NewsX ने शेयर किया विडियो

महामारी कोरोनावायरस (कोविड-19) को हराने के लिए प्रधानमंत्री द्वारा की जा रही कोशिशों का प्रसिद्ध राम कथाकार और धार्मिक गुरु मोरारी बापू ने समर्थन किया है।

Last Modified:
Saturday, 04 April, 2020
MORARI BAPU PM MODI

महामारी कोरोनावायरस (कोविड-19) को हराने के लिए प्रधानमंत्री द्वारा की जा रही कोशिशों का प्रसिद्ध राम कथाकार और धार्मिक गुरु मोरारी बापू ने समर्थन किया है। उन्होंने लोगों से भी प्रधानमंत्री की इस मुहिम में शामिल होने और रविवार पांच अप्रैल को रात नौ बजे नौ मिनट तक अपने घर की सभी लाइटें बंद कर बॉलकनी में खड़े होकर दीया, मोमबत्ती अथवा मोबाइल की फ्लैशलाइट से रोशनी करने की अपील की है।

इस बारे में अंग्रेजी न्यूज चैनल न्यूजएक्स (NewsX) ने अपने ट्विटर हैंडल पर मोरारी बापू का विडियो शेयर किया है। इस विडियो में मोरारी बापू का कहना है, ‘मैं आपसे एक विनय करना चाहता हूं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि रविवार पांच अप्रैल की रात ठीक नौ बजे नौ मिनट के लिए अपने आंगन में, अपनी बालकनी में यानी जहां और जैसी स्थिति उपयुक्त हो, घर की सभी लाइटें बंद करके दीप जलाएं, मोमबत्ती जलाएं। मैं आपसे कहना चाहता हूं कि इस राष्ट्रीय बात को सभी लोग स्वीकार करके बिना चूके करें। यह एक साधु की भी विनती है, श्रद्धा है। सब ऐसा करेंगे।’

वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस ट्वीट पर रिट्वीट कर कहा है कि पूज्य मोरारी बापू के इस संदेश में देशवासियों के लिए एक बड़ी प्रेरणा है।  

 

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कमलनाथ की प्रेस कांफ्रेंस में शामिल होने वाले पत्रकार ने दी कोरोना को मात

मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ की 20 मार्च को हुई प्रेस कांफ्रेंस में शामिल होने वाले पत्रकार व उनकी बेटी को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।

Last Modified:
Saturday, 04 April, 2020
kk-saxena

मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ की 20 मार्च को हुई प्रेस कांफ्रेंस में शामिल होने वाले पत्रकार व उनकी बेटी को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। दूसरी बार किए गए कोरोना वायरस के टेस्ट में दोनों की रिपोर्ट निगेटिव आई है। दोनों ही भोपाल के एम्स अस्पताल में भर्ती थे, जहां शुक्रवार रात उन्हें घर भेज दिया गया है।

बता दें कि पत्रकार की बेटी जब ब्रिटेन से लौटी थीं, तो वे संक्रमित थीं। 21 मार्च को किए गए टेस्ट में उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी और उन्हीं से यह वायरस उनके पत्रकार पिता में भी आया था। चार दिन बाद उनके 62 वर्षीय पिता भी कोरोना पॉजिटिव निकले थे।

पत्रकार की बेटी पोस्ट-ग्रेजुएट कानून की छात्रा हैं जो 18 मार्च को लंदन से भोपाल लौटी थीं। उन्हें होम-क्‍वारंटाइन रहने का आदेश दिया गया था, लेकिन उनके घर आने के दो दिन बाद ही पत्रकार कमलनाथ की अंतिम प्रेस कांफ्रेंस में शामिल होने के लिए चले गए। इसी के चलते प्रेस कॉन्‍फ्रेंस के शामिल सभी पत्रकारों में दहशत फैल गई और सभी को क्‍वारंटाइन किया गया।

पत्रकार पर कोरोना वायरस महामारी से संबंधित सरकार के प्रतिबंधात्मक आदेशों का उल्लंघन करने के लिए मामला भी दर्ज किया गया है। श्यामला हिल्स पुलिस स्टेशन में पत्रकार के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 188 (सरकारी सेवक के कानूनी आदेश की अवहेलना), धारा 269 (उपेक्षापूर्ण कार्य जिससे जीवन के लिए संकटपूर्ण रोग का संक्रमण फैलना संभाव्य हो), धारा 270 (परिद्वेषपूर्ण कार्य, जिससे जीवन के लिए संकटपूर्ण रोग का संक्रमण फैलना संभाव्य हो) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

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इस मामले में NDTV को सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत

एक महत्वपूर्ण मामले में सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को मीडिया कंपनी ‘एनडीटीवी’ (NDTV) के हक में फैसला सुनाया है

Last Modified:
Saturday, 04 April, 2020
NDTV

टैक्स से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को मीडिया कंपनी ‘एनडीटीवी’ (NDTV) के हक में फैसला सुनाया है। इस मामले में एनडीटीवी पर वर्ष 2007में  अपने नॉन न्यूज बिजनेस के लिए विदेशी निवेश जुटाने के दौरान मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगाया गया था।

इस मामले में रेवेन्यू डिपार्टमेंट ने असेसमेंट को फिर से खोलने की इजाजत मांगी थी। सुप्रीम कोर्ट ने यह इजाजात देने से इनकार कर दिया है। वर्ष 2015 में  टैक्स अधिकारियों ने एनडीटीवी पर तथ्य छिपाने और मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगाया था।

इसे लेकर एनडीटीवी सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था, जिसके बाद इस केस को लेकर सुनवाई चल रही थी। केस को सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने एनडीटीवी के पक्ष में फैसला सुनाया और रेवेन्यू डिपार्टमेंट को केस दोबारा से खोलने की इजाजत देने से इनकार कर दिया। 

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प्रसार भारती ने जारी की डीडी फ्रीडिश पर मौजूद चैनल्स की लिस्ट, लिया ये फैसला

नेशनल पब्लिक ब्रॉडकास्टर ‘प्रसार भारती’ ने ‘दूरदर्शन’ के डायरेक्ट टू होम (DTH) प्ले‘टफॉर्म ‘फ्रीडिश’ पर अपने ‘MPEG-2’ टीवी चैनल्स के बारे में जानकारी दी है।

Last Modified:
Friday, 03 April, 2020
Prasar Bharati

नेशनल पब्लिक ब्रॉडकास्टर ‘प्रसार भारती’ (Prasar Bharati) ने ‘दूरदर्शन’ के डायरेक्ट टू होम (DTH) प्‍लेटफॉर्म ‘फ्रीडिश’ पर अपने ‘MPEG-2’ टीवी चैनल्स के बारे में जानकारी दी है। इस जानकारी के अनुसार, इस डीटीएच प्लेटफॉर्म पर कुल 88 चैनल्स हैं। इनमें पब्लिक और प्राइवेट चैनल्स शामिल हैं।  

प्रसार भारती ने 28 फरवरी को हुई 44वीं ई-नीलामी के दौरान डीडी फ्रीडिश के MPEG-2 स्लॉट की बिक्री से 53 चैनलों के लिए 594.25 करोड़ रुपए की कमाई की थी।

बता दें कि इस पब्लिक ब्रॉडकास्टर ने कोरोनावायरस (कोविड-19) के संक्रमण को फैलने से रोकने की दिशा में एहतियाती कदम उठाए हुए हाल ही में MPEG-2 की ई-नीलामी को ठंडे बस्ते में डाल दिया था। प्रसार भारती ने एक अप्रैल 2020 से 31 मार्च 2021 के लिए डीडी फ्रीडिश डीटीएच प्लेटफॉर्म पर खाली पड़े MPEG-2 स्लॉट्स को भरने के लिए निजी टीवी चैनल्स से आवेदन आमंत्रित किए थे। आवेदन जमा करने की आखिरी तारीख 30 मार्च अपराह्न तीन बजे तक रखी गई थी।

इस बारे में प्रसार भारती के डायरेक्टर (डीटीएच) इंद्रजीत ग्रेवाल का कहना है, ‘कोविड-19 का संक्रमण फैलने से रोकने की दिशा में उठाए गए कई एहतियाती कदमों को ध्यान में रखते हुए टीवी चैनल्स से आवेदन पाने और आवंटन की प्रक्रिया को फिलहाल के लिए रोक दिया गया है।’

 

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एडिटर्स गिल्ड ने सरकार की इस बात पर जताई हैरानी, यूं की मीडिया की वकालत

संपादकों की संस्था ‘एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया’ ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष केंद्र सरकार द्वारा दिए गए बयान पर काफी हैरानी जताई है

Last Modified:
Friday, 03 April, 2020
Editors Guild

संपादकों की संस्था  ‘एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया’ (Editors Guild Of India) सरकार के उस बयान पर काफी क्षुब्ध है, जिसमें सरकार ने पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट के समक्ष देशव्यापी लॉकडाउन के दौरान बड़े पैमाने पर पलायन करने वाले प्रवासी कामगारों के बीच डर का माहौल पैदा करने के लिए सोशल मीडिया के साथ-साथ मीडिया को भी दोषी ठहराया था।

इस बारे में अब गिल्ड ने एक बयान जारी कर कहा है कि केंद्र सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में कही गईं इस तरह की बातों से उसे व्याकुलता और हैरानी हुई है। इसके साथ ही गिल्ड का यह भी कहना है कि वर्तमान हालातों में अपने काम में मुस्तैदी से जुटी मीडिया को दोषी ठहराना केवल उसे कमजोर करना है। अभूतपूर्व संकट के दौरान मीडिया पर लगे इस तरह के आरोप देश के सामने खबरों के प्रसार की प्रक्रिया में भी बाधा डाल सकते हैं। दुनिया में किसी भी देश में कोई भी लोकतंत्र अपने मीडिया का मुंह बंद करके इस महामारी के खिलाफ नहीं लड़ रहा है।

गिल्ड ने वेबसाइट ‘द वायर’ (The Wire) के एडिटर-इन-चीफ के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के मामले को भी संज्ञान में लिया है। गिल्ड का मानना ​​है कि मीडिया को स्वतंत्र और निष्पक्ष होना चाहिए, लेकिन इस तरह के हस्तक्षेप मीडिया को उसके उद्देश्य को हासिल करने में बाधा पैदा करेंगे। गौरतलब है कि देशभर में जारी लॉकडाउन के दौरान लाखों लोगों के पलायन के लिए फेक न्यूज तथा भ्रम फैलाने वाले संदेशों को जिम्मेदार ठहराते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 31 मार्च को ऐसा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने के आदेश दिए थे।

इसके साथ ही चीफ जस्टिस एसए बोब्डे और जस्टिस नागेश्वर राव की खंडपीठ ने सरकार से फेक न्यूज फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई करने के लिए भी कहा था। सुप्रीम कोर्ट ने मीडिया को भी जिम्मेदारी दर्शाने के निर्दश दिए थे। कोर्ट का कहना था कि मीडिया संस्थान तथ्यपूर्ण खबरों को ही प्रकाशित/प्रकाशित करें। कोर्ट ने यह भी कहा था कि इस महामारी को लेकर मीडिया में होने वाली चर्चाओं, डिबेट और कवरेज में हस्तक्षेप करने का उसका कोई इरादा नहीं है।

‘एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया’ की ओर से जारी बयान को आप यहां देख सकते हैं।

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कोरोना संकट के बीच कई मैगजींस हुईं बंद, वहीं अरुण पुरी ने दिलाया ये भरोसा

कोरोना के खौफ ने मीडिया इंडस्ट्री को भी हिलाकर रख दिया है। भारत सहित पूरी दुनिया में स्थिति खराब है और आने वाले दिनों में इसके ज्यादा खराब होने की आशंका जताई जा रही है

Last Modified:
Thursday, 02 April, 2020
Aroon Purie

कोरोना के खौफ ने मीडिया इंडस्ट्री को भी हिलाकर रख दिया है। भारत सहित पूरी दुनिया में स्थिति खराब है और आने वाले दिनों में इसके ज्यादा खराब होने की आशंका जताई जा रही है। कोरोना को लेकर फैली अफवाहों के चलते लोगों के दिलोदिमाग में यह बात घर कर गई है कि अखबार भी वायरस फैला सकता है। इस वजह से अखबारों के सर्कुलेशन में तो कमी आई ही है, साथ ही उन्हें मिलने वाले विज्ञापन भी घटे हैं।

अकेले मध्य प्रदेश में 300 से अधिक छोटे और मझोले अखबार मालिकों ने अस्थायी रूप से प्रकाशन बंद कर दिया है। वहीं, मैगज़ीन भी इससे अछूती नहीं हैं। न्यूज़ीलैंड के विख्यात मैगज़ीन प्रकाशन ‘बाऊर मीडिया’ ने इस संकट की घड़ी में अपने हाथ खड़े कर दिए हैं। बाऊर मीडिया ‘द लिसनर, वुमन डे, न्यूजीलैंड वुमन वीकली, नॉर्थ एंड साउथ और नेक्स्ट’ नामक पत्रिकाओं का प्रकाशन करता है। इस संबंध में कंपनी के मुख्य कार्यकारी ब्रेंडन हिल का कहना है कि COVID-19 से मुकाबले के लिए चल रहे लॉकडाउन से मैगजींस के प्रकाशन पर रोक लगी हुई है और इससे व्यवसाय अस्थिरता की स्थिति में पहुंच गया है। लिहाजा, हमें मज़बूरी में प्रकाशन बंद करने का फैसला लेना पड़ रहा है। उन्होंने आगे कहा कि पत्रिकाएं विज्ञापन पर निर्भर करती हैं और मौजूदा हालातों को देखते हुए यह कहना मुश्किल है कब तक सब कुछ ठीक हो पाएगा।

बाऊर मीडिया ने अपनी मैगजींस के खरीदारों की तलाश करने के लिए व्यावसायिक सलाहकार फर्म EY को नियुक्त किया है। कंपनी ने इस फैसले के बारे में कर्मचारियों को आज सुबह ही जानकारी दी है। हालांकि, ब्रेंडन हिल का कहना है कि कर्मचारियों को उनका वाजिब हक दिया जाएगा। बाऊर मीडिया के इस फैसले ने जहां मीडिया जगत को हिला दिया है, वहीं ‘इंडिया टुडे’ समूह के चेयरमैन अरुण पुरी की तरफ से मीडियाकर्मियों के लिए एक राहत देने वाला समाचार आया है। अरुण पुरी ने साफ किया है कि 'इंडिया टुडे' मैगजीन पहले की तरह ही प्रकाशित होती रहेगी और हम कोरोना वायरस को जीतने नहीं देंगे।

उन्होंने ट्वीट के जरिये इसकी जानकारी देते हुए लिखा है, ‘पिछले 44 सालों से 'इंडिया टुडे' का हर अंक समय पर आया है और हम COVID-19 को अपना रिकॉर्ड खराब करने नहीं देंगे। हम हर हफ्ते बेहतरीन विश्लेषण प्रदान करना जारी रखेंगे।’ उन्होंने आगे लिखा है, ‘इस हफ्ते की शुरुआत से हमने मैगजीन के ऑनलाइन और प्रिंट दोनों संस्करण प्रकाशित करने का फैसला लिया है। 21 दिनों के लॉकडाउन पर हमारी विशेष कवरेज पढ़ने के लिए तैयार रहें। साथ ही हम कोरोना वायरस संकट पर रोजाना एक न्यूजलेटर भी प्रकाशित कर रहे हैं।’ 

 

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ABP न्यूज नेटवर्क ने जुल्फिया वारिस को अपनी इस नई इकाई का बनाया बिजनेस हेड

एबीपी न्यूज नेटवर्क (ABP News Network) ने जुल्फिया वारिस को नियुक्त किया है

Last Modified:
Thursday, 02 April, 2020
zulfia

'एबीपी न्यूज नेटवर्क' (ABP News Network) ने जुल्फिया वारिस को ‘एबीपी न्यूज नेटवर्क कंटेंट स्टूडियो’ (ABP News Network Content Studio) का बिजनेस हेड नियुक्त किया है। जुल्फिया की जिम्मेदारी कंपनी की नई सहायक इकाई  ‘एएनएन कंटेंट स्टूडियो’ (ANN Content Studio) के साथ-साथ सभी प्लेटफार्म्स के लिए कंटेंट प्रड्यूस करने की होगी।

जुल्फिया को मीडिया इंडस्ट्री में 20 सालों से भी ज्यादा का अनुभव है। इससे पहले वे डिस्कवरी इंडिया (Discovery India) में प्रीमियम हेड और डिजिटल नेटवर्क की वीपी-प्रॉडक्ट हेड थीं। अपनी इस भूमिका में जुल्फिया डिस्कवरी इंडिया चैनल्स के लिए फैक्चुअल और लाइफ स्टाइल कैटेगरी में अपना योगदान देती थीं। उन्होंने इसके अलावा ‘टीवी18 इंडिया’ (TV18 India Ltd), ‘एमटीवी इंडिया’ (M.T.V India), ‘चैनल वी इंडिया’ (Channel V India), ‘स्टार टीवी नेटवर्क’ (Star TV Network) और जी एंटरटेनमेंट (Star TV Network) जैसी कंपनियों के साथ काम किया है।

जुल्फिया ने 1998 में सोफिया कॉलेज मुंबई से इंग्लिश लिट्रेचर में ग्रेजुएशन किया और इसके बाद 1999 में सोफिया पॉलिटेक्निक मुंबई से सोशल कम्युनिकेशंस एंड मीडिया में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है।

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लॉकडाउन की कवरेज कर रहे पत्रकार के साथ पुलिस ने ये किया सलूक

पूरा देश 21 दिनों के लॉकडाउन का पालन कर रहा है। कोरोना से बचने व लोगों में जागरूकता फैलाने को लेकर देश की मीडिया भी अपना बड़ा योगदान दे रही है।

Last Modified:
Thursday, 02 April, 2020
journalist

पूरा देश 21 दिनों के लॉकडाउन का पालन कर रहा है। कोरोना से बचने व लोगों में जागरूकता फैलाने को लेकर देश की मीडिया भी अपना बड़ा योगदान दे रही है। लिहाजा मीडिया को काम करने में परेशानी न हो इसके लिए पीएम मोदी ने मीडिया को इमरजेंसी जरूरत में शामिल किया है। लेकिन फिर अलग-अलग जगहों से पुलिस के द्वारा पत्रकारों के साथ बर्बरता के मामले सामने आ रहे हैं। ताजा मामला ग्वालियर से सामने आया है।

बता दें कि घटना ग्वालियर के चेतकपुरी गेट की है। यहां शहर में लगे लॉकडाउन की रिपोर्टिंग कर रहे इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के युवा पत्रकार चेतन सेठ के साथ पुलिसकर्मियों ने दुर्व्यवहार करते हुए न सिर्फ उन्हें गालियां दीं, बल्कि विरोध करने पर पत्रकार के साथ मारपीट भी की, जिसमें चोटिल हो गया है। पत्रकार का जेएएच अस्पताल में इलाज कराया गया।

दरअसल, पुलिसकर्मियों ने पत्रकार को रिर्पोटिंग करने से मना किया, जिसका विरोध करने पर रिर्पोटर को पुलिसकर्मियों ने यह कहते हुए गालियां दी कि तुम मीडिया वाले ज्यादा परेशान कर रह हो। इसके बाद, पुलिसकर्मियों ने बर्बरता दिखाते हुए पत्रकार पर लाठियों से हमला कर दिया, जिससे पत्रकार के बायां हाथ फ्रेक्चर हो गया।

इसके बाद शहर के प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के तमाम पत्रकारों ने फूलबाग चौराहे पर अपने कैमरा बैग सड़क पर रख लग पुलिसकर्मियों के गलत व्यवहार का विरोध किया है। घटना की जानकारी मिलने के बाद एसपी नवनीत भसीन ने तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है, जिनमें एएसआई के.के शाक्य, आकक्षक गौरव शर्मा और आरक्षक बालेंद्र शर्मा के नाम शामिल है।

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