मोबाइल की दुनिया में क्यों जरूरी है सीधा संवाद, जानें एक्सपर्ट्स की राय

दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में समाज के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े दिग्गजों ने रखे अपने विचार

Last Modified:
Saturday, 15 June, 2019
Dr. Anurag Batra

आजकल स्मार्टफोन का जमाना है। ऐसे में लोगों का एक-दूसरे से संवाद करने का तरीका भी बदल गया है। लोग अब फेस टू फेस बातचीत करने के बजाय वॉट्सऐप और ईमेल पर ज्यादा संवाद करते हैं। ज्यादा से ज्यादा वे फोन कॉल कर लेते हैं। व्यवहार में इस तरह का व्यवहार कार्यस्थल के साथ ही निजी जिंदगी में भी असर डाल रहा है। इन्हीं तमाम मुद्दों पर चर्चा करने के लिए शुक्रवार को दिल्ली के ‘द ललित’ (The Lalit) होटल में शुक्रवार को ‘WIYLD’ की ओर से 'Real Conversations in Digital Age' पर एक कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। इस कॉन्फ्रेंस में इस बात पर भी चर्चा की गई कि फेस टू फेस संवाद न करने का कितना विपरीत प्रभाव पड़ रहा है।

इस मौके पर कॉरपोरेट जगत के साथ ही वरिष्ठ पत्रकार, मनोवैज्ञानिक, ब्रैंड्स और मार्केटिंग से जुड़े दिग्गजों ने इस बारे में अपने-अपने विचार रखे। सभी का कहना था कि आज के समय में सोशल मीडिया एक मजबूत प्लेटफॉर्म बनकर उभरा है, लेकिन किसी व्यक्ति से मिलकर बातचीत करने का अपना महत्व है। इससे उन व्यक्तियों के बीच मजबूत भावनात्मक रिश्ता बनता है जो वॉट्सऐप, फेसबुक, इंस्टाग्राम पर मुश्किल है।

इस मौके पर ‘बिजनेस वर्ल्ड’ और ‘एक्सचेंज4मीडिया’ के चेयरमैन व एडिटर-इन-चीफ डॉ. अनुराग बत्रा का कहना था कि लगातार संवाद की वजह से ही उन्हें मजबूत निजी और बिजनेस रिलेशनशिप बनाने में मदद मिली है। उनका कहना था कि वह आगे बढ़कर लोगों से संवाद शुरू करने में किसी तरह की झिझक महसूस नहीं करते हैं, फिर चाहे वह मॉल हो, रेस्तरां हो अथवा फ्लाइट हो। युवाओं को सलाह देते हुए डॉ. अनुराग बत्रा का कहना था, ‘किसी भी तरह की झिझक छोड़ दें और अजनबियों के साथ बातचीत करने की अपनी स्टाइल डेवलप करें। आपको तब काफी आश्चर्य होगा और अच्छा लगेगा, जब सामने वाले से भी आपको काफी सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलेगी।’

जानी-मानी मनोवैज्ञानिक डॉ. रोमा कुमार का कहना था, ‘रिसर्च से पता चलता है कि दुनियाभर में अच्छी इनकम वाली 75 प्रतिशत नौकरियां सोशल कनेक्ट्स के द्वारा मिलती हैं। मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि सोशल कनेक्शन होना बहुत जरूरी है। इससे आप तमाम तरह की बीमारियों से भी बचे रह सकते हैं।’ डॉ. रोमा कुमार ने समाज में डिप्रेशन के बढ़ते मामलों पर भी चिंता जताई। उन्होंन कहा कि लोगों में संवाद की कमी बढ़ने से अकेलेपन के मामले भी बढ़ रहे हैं।

कार्यक्रम के दौरान ‘WIYLD’ के सीईओ और को-फाउंडर रितु कुमार ओझा का कहना था, ‘स्मार्ट फोन से विभिन्न उम्र के लोगों का व्यवहार बदल रहा है। सोशल मीडिया हमें बनावटी चेहरे दिखाता है, जिसमें व्यक्ति को अपने आसपास की सभी चीजें अच्छी लगती है। ऐसे में लोग वास्तविक दुनिया में संवाद करने से दूर होने लगते हैं, क्योंकि आपको नहीं पता होता है कि सोशल मीडिया के बाहर क्या हो रहा है और कैसे वहां पर आपको तमाम तरह की चुनौतियों का सामना करना है।’

संवाद के दौरान स्टोरीटैलिंग के इस्तेमाल पर जोर देते हुए बीजेपी प्रवक्ता और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री की सलाहकार श्वेता शालिनी का कहना था, ‘हमें स्टोरीटैलिंग पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। जब मैं छोटी थी तो मेरे पिताजी विभिन्न कहानियों के माध्यम से मुझे ईमानदारी और देशसेवा की बात बताया करते थे और अपने बच्चों को भी मैं इसी तरीके से समझाती हूं।’

यह पूछे जाने पर कि लोग लगातार स्क्रीन पर कैसे दिखते हैं, उन्होंने कहा, ‘किसी भी कंवर्शेसन के दौरान लगातार उस पर ध्यान देना लग्जरी होती जा रही है। सोशल मीडिया पर अगले अपडेट के लिए लगातार अपने फोन को चेक करते रहना हमारे कंवर्शेसन को हमारी आत्मा से काफी दूर ले जाता है।’ कार्यक्रम में मौजूद सभी पैनलिस्ट इस बात से सहमत थे कि सार्थक बातचीत की कमी का बिजनेस पर काफी प्रभाव पड़ रहा है और इस दिशा में बदलाव लाने की जरूरत है।

‘Growthsqapes’ के फाउंडर सात्यकी भट्टाचार्जी का कहना था कि लीडरशिप के लिए सबसे महत्वपूर्ण बातों में से एक किसी भी लीडर का लगातार संवाद में शामिल होना होता है। यदि लीडर्स लोगों को प्रेरित करने में और सार्थक बातचीत करने में विफल रहते हैं तो वे अच्छे नेतृत्वकर्ता नहीं बन सकते हैं। वहीं, ‘Ishwa Consulting’ के फाउंडर और मैनेजिंग पार्टनर अरविंद पंडित का कहना था कि किसी भी लीडर के लिए यह बहुत जरूरी है कि वह अपनी टीम से ज्यादा से ज्यादा संवाद करता रहे और उनसे जुड़ा रहे, इससे बिजनेस में बेहतर रिजल्ट्स मिलते हैं।

संवाद के तरीके के महत्व के बारे में सीनियर बिजनेस लीडर शुभ्रांशु नियोगी (Subhrangshu Neogi) ने कहा, ‘लगातार संवाद होते रहना किसी भी संस्थान की आत्मा और उसका दिल है। हमेशा अपने स्टैकहोल्डर्स और कंज्यूमर्स से संवाद बनाए रखें। सकारात्मक संवाद के परिणाम भी अच्छे आते हैं। ऐसे में संवाद को हमेशा प्रोत्साहित करते रहना चाहिए।’ हार्वर्ड द्वारा लगातार 80 साल तक की गई स्टडी में पाया गया कि पैसे और प्रसिद्धि से ज्यादा रिश्ते लोगों को जीवनभर खुश रखते हैं। पैनल में शामिल विशेषज्ञों का सुझाव था कि सकारात्मक बातचीत से ही रिश्तों को और मजबूत व सार्थक बनाया जा सकता है।

‘माइक्रोसॉफ्ट इंडिया’ (Microsoft India) के पूर्व डायरेक्टर (मार्केटिंग) पुनीत मोदगिल (Punit Modhgil) का कहना है, ‘टेक्नोलॉजी ने हमारी जिंदगी बदल दी है लेकिन इसका इस्तेमाल संवेदनशील रूप से करने की जरूरत है। मोबाइल ने हमारे संवाद करने के तरीके पर काफी प्रतिकूल प्रभाव डाला है और इसका रिश्तों पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है। आने वाले समय में यह ब्रैंड्स को भी प्रभावित करेगा।’ ‘Deloitte’ कंपनी द्वारा हाल ही में जारी रिपोर्ट के अनुसार, भावनात्मक लगाव रिश्ते को और आगे बढ़ाता है, जबकि तर्कसंगत विचार इन्हें कम महत्वपूर्ण बनाते हैं। किसी भी ब्रैंड के लिए अपने ऑडियंस से भावनात्मक रूप से जुड़ना काफी महत्वपूर्ण होता है। इससे लोगों का उस ब्रैंड में भरोसा बढ़ता है और ब्रैंड को आगे बढ़ने व लोकप्रिय बनने में मदद मिलती है।    

इस मौके पर कॉलेज के एक छात्र के सवाल का जवाब देते हुए ‘सिटी बुक लीडर्स’ (City Book Leaders) के चीफ क्यूरेटर और फाउंडर मोहित गुप्ता ने कहा, ‘मनुष्यों के लिए किताबें हमेशा से सार्थक स्टोरीज और संवाद का एक माध्यम रही हैं। अच्छी-अच्छी किताबें पढ़ें और उन लोगों को सुनें जो किताबें पढ़ते हैं।

हम लोगों के साथ जो बातचीत करते हैं, उसकी क्वालिटी का हमारे एनर्जी लेवल पर सीधा प्रभाव पड़ता है। ‘परिवर्तन प्रबंधन और व्यापार स्थिरता’ (change management and business sustainability) के बारे में आईआईएम लखनऊ के प्रोफेसर डॉ. सुशील कुमार का कहना है, ‘जब आप क्लास में पढ़ाने के दौरान छात्र-छात्राओं से सीधा संवाद करते हैं तो पूरे दिन पॉजीटिव एनर्जी से भरे रहते हैं। हम ऑनलाइन एजुकेशन प्रोग्राम में इस चीज को काफी मिस करते हैं।’ विद्यार्थियों के व्यवहार में आ रहे बदलावों के बारे में डॉ. सुशील कुमार ने कहा, ‘वर्तमान में विद्यार्थी ज्ञान अर्जित करने के बजाय अच्छे ग्रेड लाने पर ज्यादा फोकस करते हैं।’

अमेरिका में पांच हजार लोगों पर हुए एक सर्वे में पाया गया है कि 1985 के बाद से करीबी दोस्त न होने के मामले में अमेरिकियों की संख्या तीन गुना बढ़ चुकी है। जिन लोगों को सर्वे में शामिल किया गया, उनमें से लगभग एक चौथाई ने किसी पर भी अपना भरोसा न होने की बात कही।

 

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कश्मीर में महिला पत्रकार कर बैठी कुछ ऐसा, अब बढ़ सकती हैं मुश्किलें

अमेरिकी पत्रकार ने मैगजीन में लेख लिखकर पूरे मामले से उठाया पर्दा, महिला पत्रकार की जमकर की तारीफ

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Thursday, 05 December, 2019
Last Modified:
Thursday, 05 December, 2019
Female Journalist

कश्मीर के हालातों पर मीडिया में खबरें अक्सर आती रहती हैं, लेकिन अनुच्छेद 370 की समाप्ति के बाद से मीडिया के लिए यह कुछ समय तक हॉट टॉपिक रहा। अब अमेरिकी पत्रिका ‘न्यू यॉर्कर’ में प्रकाशित एक लेख से यह मुद्दा फिर गर्मा गया है। हालांकि इस बार फोकस कश्मीर से ज्यादा अपने बयानों के लिए सुर्खियों में रहने वालीं पत्रकार राणा अयूब पर है। इस लेख को अमेरिकी पत्रकार डेक्स्टर फिकिंस (Dexter Filkins) ने लिखा है, जो इराक और अफगानिस्तान युद्ध कवर कर चुके हैं। अपने लेख में फिकिंस ने मोदी राज में भारत की स्थिति और कश्मीर सहित कई मुद्दों को रेखांकित किया है। लेकिन उन्होंने अयूब के साथ अपनी कश्मीर यात्रा को लेकर जो बातें बताई हैं, उन पर बवाल होना लाजमी है।

‘BLOOD AND SOIL IN NARENDRA MODI’S INDIA’ शीर्षक वाले इस लेख की शुरुआत कश्मीर में मोदी सरकार द्वारा अतिरिक्त जवानों की तैनाती और उसे लेकर कुछ भारतीय न्यूज चैनलों की कवरेज से होती है। जो आगे चलकर राणा अयूब के बुलावे पर डेक्स्टर फिकिंस के भारत आने और छिपते-छिपाते कश्मीर में दाखिल होने पर पहुंचती है।

फिकिंस ने लिखा है, ‘कश्मीर पर भारतीय मीडिया की ऑल इज वैल वाली रिपोर्टिंग के बीच अयूब ने मुझे फोन किया और कहा कि घाटी में स्थिति वैसी नहीं है, जैसी दिखाई जा रही है। अयूब को नहीं पता था कि उन्हें कश्मीर में क्या मिलेगा, लेकिन वह जनता से बात करना चाहती थीं और उन्होंने मुझे भी इसके लिए आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि वो मुझसे मुंबई में मिलेंगी और वहां से हम कश्मीर जाएंगे। हालांकि उस दौरान कश्मीर में विदेशी पत्रकारों के जाने पर प्रतिबंध था।’

अमेरिकी पत्रकार ने आगे लिखा है, ‘जब मैं मुंबई पहुंचा तो अयूब ने मुझे स्कार्फ देते हुए कुर्ता खरीदने के लिए कहा। उन्होंने हंसते हुए यह भी कहा कि मुझे पूरा विश्वास है कि तुम पकड़े जाओगे, लेकिन फिर भी तुम्हें मेरे साथ आना चाहिए। बस अपना मुंह बंद रखियेगा।’

डेक्स्टर फिकिंस ने अपने लेख में अयूब राणा की जमकर तारीफ लिखी है। अपनी कश्मीर यात्रा को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने उल्लेख किया है, ‘मोदी सरकार के फैसले के दो हफ्ते बाद जब हम श्रीनगर हवाई अड्डे पहुंचे तो वहां सिर्फ सेना और पुलिस के जवान नजर आ रहे थे। एयरपोर्ट पर ‘विदेशियों के लिए पंजीकरण’ डेस्क थी, लेकिन अयूब ने मुझे धकेलते हुए खमोशी से आगे बढ़ने को कहा। आखिरकार हम किसी तरह बाहर निकले और टैक्सी में बैठकर शहर का हाल जानने के लिए रवाना हो गए। कार में होने के बावजूद यह साफ नजर आ रहा था कि कश्मीर की जैसी तस्वीर भारत का मुख्यधारा का मीडिया प्रस्तुत कर रहा था, हालात वैसे नहीं थे। सड़कें वीरान थीं, केवल हथियारों से लैस जवान दिखाई दे रहे थे।’

अमेरिकी पत्रकार ने कश्मीर में क्या देखा और क्या नहीं, बात अब केवल यहीं तक सीमित नहीं रही है, बल्कि मुद्दा यह बन गया है कि राणा अयूब आखिरकार एक विदेशी पत्रकार को बिना अनुमति कश्मीर क्यों ले गईं? भारतीय कानून के अनुसार,  विदेशी नागरिकों, पर्यटकों के साथ-साथ विदेशी पत्रकारों को भी ‘प्रतिबंधित क्षेत्रों’ या ‘संरक्षित क्षेत्रों’ में प्रवेश के पूर्व सरकार की अनुमति लेना जरूरी है। इन क्षेत्रों में मणिपुर, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, सिक्किम, हिमाचल प्रदेश, के साथ-साथ जम्मू- और कश्मीर, राजस्थान और उत्तराखंड के कुछ हिस्से शामिल हैं।

अनुच्छेद 370 की समाप्ति के वक्त तो सरकार कश्मीर से जुड़ी रिपोर्टिंग को लेकर बेहद गंभीर थी। लिहाजा, अयूब का इस तरह विदेशी पत्रकार को वहां ले जाना कई सवाल खड़े करता है। वैसे, राणा अयूब मोदी सरकार की नीतियों की धुर विरोधी मानी जाती हैं। इसके लिए उन्हें समय-समय पर निशाना भी बनाया जाता है। अब यह मामला सामने आने के बाद उनकी परेशानियां बढ़ सकती हैं। 

डेक्स्टर फिकिंस का पूरा लेख आप यहां क्लिक कर पढ़ सकते हैं।

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केटीयू: कुलपति की रेस में सबसे आगे हैं ये वरिष्ठ पत्रकार

10 मार्च को कुलपति के इस्तीफा देने के बाद से इस पद पर की जानी है नई नियुक्ति

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Thursday, 05 December, 2019
Last Modified:
Thursday, 05 December, 2019
KTU

छत्तीसगढ़ स्थित कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय (केटीयू) के कुलपति की रेस में वरिष्ठ पत्रकार और राज्यसभा टीवी के पूर्व कार्यकारी निदेशक उर्मिलेश उर्मिल समेत पांच नामों पर मंथन चल रहा है। बताया जाता है कि जनवरी तक विश्वविद्यालय को नया कुलपति मिल जाएगा। फिलहाल इस दौड़ में  उर्मिलेश उर्मिल सबसे आगे नजर आ रहे हैं। हालांकि, नगरीय निकाय चुनावों के कारण आचार संहिता की वजह से नए कुलपति की तलाश अटक गई हे। नए कुलपति की तलाश के लिए गठित कमेटी ने नवंबर में हुई बैठक के बाद सभी दावेदारों का नाम राज्यपाल को भेज दिया है, जहां से इस बारे में निर्णय होना है।

बताया जाता है कि इस बैठक में ‘नेशनल बुक ट्रस्ट’ (एनबीटी) के अध्यक्ष बलदेव भाई शर्मा के नाम पर भी चर्चा हुई थी, लेकिन सभी सदस्यों में सहमति नहीं बन पाई। कुलपति के लिए जिन नामों पर चर्चा हो रही है, उनमें उर्मिलेश उर्मिल और बलदेव भाई शर्मा के साथ ही  चंडीगढ़ की चितकारा यूनिवर्सिटी में मॉस कॉम के डीन डॉ. आशुतोष मिश्रा, दूरदर्शन के पूर्व एंकर डॉ. मुकेश कुमार और पत्रकार निशिद त्यागी का नाम शामिल है।

बता दें कि 10 मार्च को मानसिंह परमार ने विश्वविद्यालय के कुलपति पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद से नए कुलपति की तलाश शुरू हुई है। रायपुर संभाग के कमिश्नर जीआर चुरेंद्र फिलहाल कुलपति का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे हैं।

कुलपति की तलाश के लिए राज्यपाल द्वारा 12 सितंबर को तीन सदस्यीय कमेटी गठित की गई है। कमेटी के सदस्यों को कुलपति पद के दावेदारों के आवेदन पत्रों की जांच कर नामों का पैनल तैयार करना है। तय समय में नामों का पैनल तैयार नहीं होने के कारण 23 अक्टूबर को कमेटी को चार सप्ताह का अतिरिक्त समय दिया गया था।

केंद्रीय विश्वविद्यालय हिमाचल प्रदेश के कुलपति प्रो. कुलदीप चंद अग्निहोत्री की अध्यक्षता में गठित इस कमेटी में कार्यपरिषद की ओर से हरिदेव जोशी पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय जयपुर के कुलपति ओम थानवी और राज्य सरकार की ओर से पूर्व प्रधान मुख्य वन संरक्षक डॉ. के सुब्रमण्यम को शामिल किया गया है।

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संसद में उठा पत्रकारों से जुड़ा ये बड़ा मुद्दा

एमपी सुप्रिया सुले ने पिछले महीने सोशल मीडिया पर एक फोटो शेयर किया था, जिसमें दो पत्रकार स्कूटर पर नेताओं की कार का पीछा कर रहे थे

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Thursday, 05 December, 2019
Last Modified:
Thursday, 05 December, 2019
Parliament

पत्रकारों को खबरों के लिए आए दिन तमाम तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इसके बावजूद कभी उन पर पक्षपाती होने के आरोप लगाये जाते हैं तो कभी अपने काम के लिए उन्हें निशाना बनाया जाता है। हालांकि, महाराष्ट्र के बारामती से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की सांसद और शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले ने पत्रकारों की तकलीफों को समझने का प्रयास किया है। उन्होंने पत्रकारों के लिए सामाजिक सुरक्षा की मांग करते हुए संसद में इस मुद्दे को उठाया है।

शून्यकाल के दौरान सुप्रिया सुले ने संसद में कहा, आज के ब्रेकिंग न्यूज के जमाने में पत्रकारों को विषम परिस्थितियों में लंबे समय तक काम करना होता है। महाराष्ट्र में राजनीतिक संकट के समय मैंने स्कूटर पर सवार दो पत्रकारों को नेताओं की कार का पीछा करते हुए देखा था, ये काफी खतरनाक है।‘

महिला पत्रकारों की समस्याओं को रेखांकित करते हुए सुले ने कहा कि कई महिला पत्रकारों को भी नेताओं के घरों के बाहर भूखे-प्यासे घंटों खड़े रहना पड़ा, उनके लिए टॉयलेट की भी सुविधा नहीं थी। सुप्रिया सुले ने पत्रकारों के लिए सामाजिक सुरक्षा पर लोकसभा सदस्यों से अपने विचार प्रकट करने को कहा, ताकि इस दिशा में आगे कुछ किया जा सके।

गौरतलब है कि महाराष्ट्र के सियासी संग्राम के दौरान पत्रकारों को भी काफी मशक्कत करनी पड़ी थी। सुले ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक फोटो शेयर किया था, जिसमें दो पत्रकार स्कूटर पर नेताओं की कार का पीछा कर रहे हैं, जिसमें से पीछे बैठे पत्रकार के हाथों में कैमरा है और वो खतरनाक तरीके से रिकॉर्डिंग कर रहा है। साथ ही उन्होंने पत्रकारों को अपना ध्यान रखने की सलाह देते हुए लिखा था, ‘मैं समझती हूं यह ब्रेकिंग न्यूज है, लेकिन कृपया अपना ख्याल रखें। मीडिया सुरक्षा सबसे पहले, मुझे ड्राइवर और कैमरापर्सन की चिंता है।’

पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर पिछले महीने सुप्रिया सुले द्वारा किए गए ट्वीट का स्क्रीन शॉट आप यहां देख सकते हैं।

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प्रसार भारती ने DD और AIR कर्मियों पर लगाई कड़ी 'पाबंदी'

‘प्रसार भारती’ के सीईओ शशि शेखर वेम्पती ने इन आदेशों को सामान्य कदम बताया

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Thursday, 05 December, 2019
Last Modified:
Thursday, 05 December, 2019
Prasar bharati

पब्लिक ब्रॉडकास्ट कंपनी ‘प्रसार भारती’ (Prasar Bharati) ने ‘दूरदर्शन’ (DD) और ‘ऑल इंडिया रेडियो’ (AIR) के कर्मचारियों व अधिकारियों को बिना अनुमति के मीडिया से बातचीत न करने के आदेश दिए हैं। ‘प्रसार भारती’ के सीईओ शशि शेखर वेम्पती का कहना है कि यह कदम व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के लिए उठाया जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वेम्पती का कहना है कि किसी भी कॉरपोरेट सेक्टर में मीडिया से बातचीत के लिए एक तय पॉलिसी होती है, यह सब उसी के तहत किया जा रहा है और इसमें कुछ भी असामान्य बात नहीं है।  

रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रसार भारती द्वारा पिछले महीने कई आदेश जारी किए गए थे. ये आदेश भी उन्हीं का हिस्सा हैं। इन आदेशों के अनुसार, ‘दूरदर्शन’ अथवा ‘आकाशवाणी’ के अधिकारियों को मीडिया से बातचीत अथवा प्रेस ब्रीफिंग के लिए ‘प्रसार भारती’ के अतिरिक्त महानिदेशक (मार्केटिंग) से अनुमति लेनी होगी। इसके अलावा मीडिया से जुड़ी अन्य गतिविधियों जैसे- ऑनलोकेशन शूट, प्रेस रिलीज जारी करना, एवर्टाइजिंग अथवा होर्डिंग्स के लिए भी अनुमति जरूरी होगी।

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मानवाधिकार आयोग पहुंचा दैनिक जागरण के ब्यूरो चीफ से जुड़ा ये मामला

सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ के एनजीओ ‘सिटीजंस फॉर जस्टिस एंड पीस’ (CJP) की ओर से आयोग को लिखा गया है पत्र

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Thursday, 05 December, 2019
Last Modified:
Thursday, 05 December, 2019
Dainik Jagran

उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले में 'दैनिक जागरण' के ब्यूरो चीफ धर्मेंद्र मिश्र के खिलाफ नगर कोतवाली पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज करने का मामला शांत होने का नाम नहीं ले रहा है। अब यह मामला राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में पहुंच गया है। सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ के एनजीओ ‘सिटीजंस फॉर जस्टिस एंड पीस’ (CJP) की ओर से एक पत्र लिखकर मानवाधिकार आयोग को पूरे मामले से अवगत कराया है।

पत्र में कहा गया है कि धर्मेंद्र मिश्र सुल्तानपुर में बढ़ते अपराधों और इनकी तफ्तीश में पुलिस की नाकामियों को अपने अखबार के माध्यम से लगातार उजागर कर रहे थे। पत्र के अनुसार, इसी बात का बदला लेने के लिए पुलिस ने धर्मेंद्र मित्र के खिलाफ यह एफआईआर दर्ज की है। पत्र में आयोग से इस मामले में दखल देने की मांग की गई है।

बता दें कि सितंबर 2018 में 'दैनिक जागरण' ने अमेठी जिले के निवासी धर्मेंद्र मिश्र को सुल्तानपुर में ब्यूरो चीफ के पद पर तैनात किया था। धर्मेंद्र मिश्र के खिलाफ इस साल 16 नवंबर को जो एफआईआर दर्ज की गई है, उसमें लूट का आरोप लगाते हुए घटना की तारीख दिसंबर 2018 बताई गई है। एक साल बाद इस मामले में दर्ज एफआईआर को लेकर पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जा रहे हैं। वहीं, अपने खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद धर्मेंद्र मिश्र ने सोशल मीडिया पर इस मामले को उठाते हुए पुलिस पर कई आरोप लगाए हैं।

धर्मेंद्र मिश्र का आरोप है कि सुल्तानपुर एसपी हिमांशु कुमार उनके द्वारा पुलिस की नाकामियों को उजागर करने वाले खबरों से नाराज हैं। धर्मेंद्र मिश्र के अनुसार, एसपी हिमांशु कुमार ने सच्चाई की आवाज दबाने के लिए उनके ऊपर लूट का फर्जी मुकदमा दर्ज किया है। धर्मेंद्र मिश्र ने मीडिया की आवाज को दबाने की कोशिश करने का भी आरोप लगाया है। धर्मेंद्र मिश्र के अनुसार, करीब दो महीने पहले ही इस बारे में उन्होंने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को शिकायत भेजकर हिमांशु कुमार पर उन्हें जेल भेजने की धमकी देने का आरोप लगाया था।

इधर, कांग्रेस प्रवक्ता राजीव त्यागी ने भी अपने ट्विटर हैंडल पर इस मामले को उठाते हुए उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार पर मीडिया की आवाज को दबाने का आरोप लगाया है।

‘CJP’ द्वारा राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को भेजे गए पत्र की कॉपी आप यहां क्लिक कर देख सकते हैं।

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मीडिया संस्थानों ने नहीं रखा इस बात का ध्यान, अब कोर्ट में देना होगा जवाब

दिल्ली निवासी वकील की ओर से दिल्ली हाई कोर्ट में दायर की गई है याचिका, लगाए गए हैं कई आरोप

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Wednesday, 04 December, 2019
Last Modified:
Wednesday, 04 December, 2019
Media

बलात्कार जैसे गंभीर अपराधों में पीड़िता की पहचान उजागर नहीं की जाती, लेकिन हैदराबाद बलात्कार पीड़िता से जुड़ी हर जानकारी इंटरनेट पर मौजूद है। यहां तक कि मृतका का नाम और फोटो भी सार्वजनिक कर दिया गया है। इस संबंध में अब दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई है। याचिकाकर्ता ने कई मीडिया संस्थानों पर कानून का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है।

दिल्ली निवासी वकील यशदीप चहल ने अपनी याचिका में कहा है कि आईपीसी की धाराओं और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों को नजरअंदाज करते हुए पीड़िता की पहचान और अन्य विवरण को कुछ व्यक्तियों सहित कई मीडिया संस्थानों द्वारा उजागर किया जा रहा है, जिसपर तत्काल रोक लगाई जानी चाहिए। 

चहल का कहना है कि विभिन्न ऑनलाइन और ऑफलाइन पोर्टल पर हैदराबाद कांड की पीड़िता और आरोपितों की पहचान का खुलासा करने वाली विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित करके कई मीडिया संस्थानों ने भारतीय दंड संहिता की धारा 228A का घोर उल्लंघन किया है। आईपीसी की धारा 228A कुछ अपराधों के शिकार व्यक्तियों की पहचान का खुलासा करने पर रोक लगाती है, जिसमें बलात्कार भी शामिल है।

याचिकाकर्ता द्वारा वकील चिराग मदान और साई कृष्ण कुमार के माध्यम से दायर याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि पीड़ित और आरोपितों की पहचान गुप्त रखने के मामले में राज्य पुलिस और उसकी साइबर सेल नाकाम रही है।

गौरतलब है कि 27 नवंबर को हैदराबाद में एक वेटनर डॉक्टर की गैंगरेप के बाद हत्या कर दी गई थी। इस मामले में पुलिस ने चारों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। वारदात के सामने आने के बाद से ही इंटरनेट पर पीड़िता का फोटो और नाम वायरल होना शुरू हो गया था। आरोपितों की पहचान के बाद उनका विवरण भी सार्वजनिक कर दिया गया।

पहले भी कई बार इस तरह के मामलों में मीडिया संस्थान सवालों में घिरते रहे हैं। कठुआ बलात्कार और हत्या मामले में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला था। इसके बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने 12 मीडिया संस्थानों पर पीड़िता की पहचान उजागर करने के लिए 10 लाख रुपए का जुर्माना लगाया था। इन संस्थानों में न्यूज चैनल ‘एनडीटीवी’, ‘द रिपब्लिक’ सहित ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’, ‘द वीक’ और ‘द हिंदू’ जैसे अखबार शामिल थे। इन सभी ने पीड़िता की पहचान उजागर करने के लिए अदालत से माफी भी मांगी थी।

सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार, किसी भी मीडिया हाउस या व्यक्ति को इस तरह के मामलों में पीड़िता के नाम को सार्वजनिक करने की अनुमति नहीं है। यहां तक कि वह किसी भी ऐसे तथ्य का खुलासा नहीं कर सकते, जिससे पीड़िता को पहचाना जा सके। इसके अलावा, पुलिस को भी यह निर्देश दिए गए हैं कि ऐसे मामलों में एफआईआर सार्वजनिक न हो और समान दस्तावेजों का एक अलग सेट बनाया जाए, जहां पीड़ित की पहचान उजागर न की गई हो। मूल रिपोर्ट को केवल जांच एजेंसी या अदालत को सीलबंद कवर में भेजा जाना चाहिए।

हैदराबाद के इस मामले में शव मिलने के कुछ घंटों बाद तक पुलिस ने गैंगरेप की पुष्टि नहीं की थी। लिहाजा मीडिया हाउस दावा कर सकते हैं कि उन्होंने इस खुलासे से पहले नाम और तस्वीर प्रकाशित की, लेकिन कई मीडिया संस्थान गैंगरेप के खुलासे के बाद भी पीड़िता की पहचान उजागर करते रहे।

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IIMC तक पहुंची ये 'चिंगारी', धरने पर बैठे छात्र-छात्राएं

प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों ने ‘आईआईएमसी’ प्रबंधन पर लगाया आंखें मूंदे रखने का आरोप

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Wednesday, 04 December, 2019
Last Modified:
Wednesday, 04 December, 2019
IIMC

‘जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी’ (जेएनयू) में फीस वृद्धि को लेकर चल रहा विरोध प्रदर्शन अब देश के प्रतिष्ठित मीडिया शिक्षण संस्थान ‘इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन’ (IIMC) तक पहुंच गया है। शिक्षण शुल्क, हॉस्टल और मेस चार्ज में बढ़ोतरी के खिलाफ ‘आईआईएमसी’ के विद्यार्थियों ने मंगलवार को संस्थान परिसर में हड़ताल शुरू कर दी। इन विद्यार्थियों का आरोप है कि उनके मामलों पर ‘आईआईएमसी’ प्रबंधन ने आंखें मूंद रखी हैं।   

‘आईआईएमसी’ में विरोध प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों का कहना था कि पिछले तीन सालों में यहां करीब 30 प्रतिशत तक फीस बढ़ चुकी है। संस्थान में फीस बढ़ोतरी के कारण गरीब और मध्यवर्गीय परिवारों के बच्चों के सामने काफी मुश्किल आती है। इन विद्यार्थियों के अनुसार, महंगी फीस के कारण कई छात्र-छात्राओं को पहले सेमेस्टर के बाद ही पढ़ाई छोड़नी पड़ जाती है।

बताया जाता है कि रेडियो और टीवी जर्नलिज्म कोर्स के लिए 168500 रुपए फीस ली जा रही है। एडवर्टाइजिंग और पीआर कोर्स की फीस 131500 रुपए है। हिंदी और अंग्रेजी पत्रकारिता की फीस 95000 रुपए है। वहीं, उर्दू पत्रकारिता की फीस 55000 रुपए है। इसके अलावा हॉस्टल और मेस का खर्च अलग है। हॉस्टल और मेस के नाम पर हर महीने लड़कियों से 6,500 रुपए और लड़कों से 5,250 रुपए लिए जाते हैं। प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों का यह भी कहना था कि हॉस्टल की सुविधा भी प्रत्येक विद्यार्थी को नहीं मिल पाती है।  

इन विद्यार्थियों का कहना था, ‘पिछले एक हफ्ते से हम बातचीत के द्वारा अपने इन मुद्दों के निस्तारण का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन संस्थान प्रबंधन ध्यान नहीं दे रहा है। संस्थान प्रबंधन का कहना है कि फीस में कटौती करना उनके हाथ में नहीं है। ऐसे में अब हमारे पास प्रदर्शन के अलावा कोई विकल्प नहीं रह गया है।’  

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पत्रकारों के लिए 1 लाख व 51000 का राष्ट्रीय पत्रकारिता पुरस्कार

कार्यक्रम में देश भर से बड़ी संख्या में मीडियाकर्मी जुटेंगे, दो राष्ट्रीय पत्रकारिता पुरस्कारों के तहत एक लाख 11 हजार और 51 हजार रुपए भी दिए जाएंगे

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Wednesday, 04 December, 2019
Last Modified:
Wednesday, 04 December, 2019
Awards

‘भारतीय पत्रकार संघ’ (AIJ) की ओर से मध्यप्रदेश में धार जिले के मनावर में आठ दिसंबर को 'नेशनल मेगा मीडिया अवार्ड सेरेमनी' का आयोजन किया जाएगा। इस कार्यक्रम के तहत ‘राष्ट्रीय महासंवाद’ तथा ‘राष्ट्रीय अलंकरण महासमारोह’ का आयोजन होगा। इस मौके पर दो राष्ट्रीय पत्रकारिता पुरस्कार भी शुरू किए जाएंगे। इसके तहत हिंदी पत्रकारिता के शिखर पुरुषों में से एक स्व. राजेंद्र माथुर की स्मृति में 'राष्ट्रीय पत्रकारिता पुरस्कार' शुरू किया जाएगा। इस पुरस्कार से देश के अति प्रतिभावान पत्रकार को सम्मानित किया जाएगा। इस पुरस्कार के साथ एक लाख ग्यारह हजार रुपए भी सम्मानस्वरूप भेंट किए जाएंगे।

वहीं, वरिष्ठ पत्रकार स्व.अरविंद जी काशिव की स्मृति में 'कबीर भाव पत्रकारिता सम्मान' शुरू किया जाएगा। इस पुरस्कार से प्रदेश के अति सक्रिय पत्रकार को सम्मानित किया जाएगा। इस पुरस्कार के साथ सम्मान स्वरूप 51 हजार रुपए भी दिए जाएंगे।

संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष विक्रम सेन के अनुसार, समारोह में मध्यप्रदेश समेत लगभग 15 राज्यों के 2000 पत्रकार साथियों को 'एक्सीलेंट जर्नलिस्ट अवॉर्ड’ से सम्मानित किया जाएगा। इसके तहत शील्ड, स्पेशल गोल्ड मेडल तथा प्रशस्ति पत्र दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस समारोह में सक्रिय व विशिष्ट शैली की ईमानदार और साहसिक पत्रकारिता के लिए समर्पित 40 पत्रकारों को भी विशेष रूप से सम्मानित किया जाएगा।

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‘ब्लूमबर्ग-Quint’ मीडिया वेंचर पर लग सकता है ‘ग्रहण’!

भारत में बिजनेस टीवी चैनल के लिए ब्लूमबर्ग द्वारा पूर्व में रोनी स्क्रूवाला के यूटीवी और अनिल अंबानी ग्रुप के साथ करार किए जा चुके हैं

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Tuesday, 03 December, 2019
Last Modified:
Tuesday, 03 December, 2019
Bloomberg Quint

मीडिया दिग्गज राघव बहल की ‘क्विंटिलियन मीडिया’ (Quintillion Media) और अमेरिकी कंपनी ‘ब्लूमबर्ग एलपी’ (Bloomberg LP) का जॉइंट वेंचर ‘ब्लूमबर्गक्विंट’ (BQ) बंद होने के कगार पर है। न्यूज वेबसाइट ‘मनीकंट्रोल’ (MoneyControl) में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक दोनों के बीच चल रहा करार टूट सकता है। बताया जाता है कि अमेरिकी अरबपति और अगले साल होने वाले अमेरिका के राष्ट्रपति पद के चुनाव में दावेदार माइकल ब्लूमबर्ग ‘ब्लूमबर्ग एलपी’ का करार भारत में किसी अन्य मीडिया ग्रुप के साथ करना चाहते हैं।

इस रिपोर्ट में बताया गया है कि बिजनेस टीवी चैनल शुरू करने के लिए लाइसेंस हासिल करने में राघव बहल को वर्ष 2016 से अब तक सफलता नहीं मिली है, इसलिए चैनल को शुरू करने के लिए ब्लूमबर्ग नए पार्टनर की तलाश में हैं। इस रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में बिजनेस टीवी चैनल के लिए ब्लूमबर्ग द्वारा पूर्व में रोनी स्क्रूवाला के ‘यूटीवी’ (UTV) और अनिल अंबानी ग्रुप के साथ करार किए जा चुके हैं, जो अब खत्म हो चुके हैं।

इस बीच राघव बहल ने ब्लूमबर्ग के साथ पार्टनरशिप टूटने की खबरों को बेबुनियाद बताया है। वहीं, Bloomberg का भी कहना है कि भारतीय टीवी मार्केट और राघव बहल में उनका भरोसा कायम है। इस बारे में राघव बहल ने अपनी टीम को एक मैसेज भी किया है।

इस मैसेज में उन्होंने कहा है, ‘जल्द ही लॉन्च होने जा रहे हमारे टीवी चैनल की खबरों से प्रतिद्वंद्वियों में बेचैनी है और वे ही हमारे बारे में इस तरह की बेहूदा और झूठी खबरें फैला रहे हैं। चैनल की लॉन्चिंग को लेकर हमारे एप्लीकेशन पर नौ दिसंबर को अंतिम आदेश आना है और संभावित निवेशक हमारे साथ निवेश करने के लिए कतार में हैं। हमारे प्रतिद्वंद्वी जो डिजिटल में हमारी सफलता को देख चुके हैं, वे हमारे आने वाले चैनल को लेकर काफी नर्वस हैं। ऐसे में आप लोग भरोसा बनाए रखें। ‘ब्लूमबर्गक्विंट’ इस दौड़ में न सिर्फ बना रहेगा, बल्कि जीतेगा भी। पिछले दिनों ब्लूमबर्ग ने नेटवर्क18 के न्यूज बिजनेस को टाइम्स ऑफ इंडिया समूह को बेचने के बारे में खबर दी थी। इसी वजह से हमारे बारे में इस तरह की खबरें फैलाई जा रही हैं।'

राघव बहल द्वारा जारी किए गए मैसेज को आप हूबहू यहां पढ़ सकते हैं।

Dear Team BQ,

Some nonsense has just been published by our competitor who is getting very nervous about our imminent TV launch. Our application is coming up for a final order on Dec 9; and prospective investors are queuing up to invest with us. They have seen the enormous/pioneering success of our digital franchise, and are rather nervous about how we could disrupt their flagship operation!

Also, this is a ham-handed “get back” at Bloomberg’s article on N18’s sale to TOI.

Keep the faith. BQ shall remain in the race, and WIN.

Cheers,

Raghav

वहीं, ‘मनीकंट्रोल’ में छपी पूरी रिपोर्ट आप यहां क्लिक कर पढ़ सकते हैं।

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नेटवर्क18 में खाली हुआ यह बड़ा पद, रणदीप चक्रवर्ती ने दिया इस्तीफा

चक्रवर्ती को डिजिटल के साथ ही एडवर्टाइजिंग और मार्केटिंग में काम करने का 15 साल से ज्यादा का अनुभव है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Tuesday, 03 December, 2019
Last Modified:
Tuesday, 03 December, 2019
Ranadeep Chakravarty

‘नेटवर्क18’ (Network 18) से रणदीप चक्रवर्ती ने इस्तीफा दे दिया है। वह यहां पर बतौर सीनियर जनरल मैनेजर अपनी जिम्मेदारी संभाल रहे थे। पिछले साल नवंबर में ‘नेटवर्क18’ की डिजिटल शाखा ‘नेटवर्क18 डिजिटल’ ने चक्रवर्ती को प्रमोट कर ‘फर्स्टपोस्ट’, ‘न्यूज18’ का मार्केटिंग हेड बनाया था।

चक्रवर्ती को डिजिटल के साथ ही ऐडवर्टाइजिंग और मार्केटिंग में काम करने का 15 साल से ज्यादा का अनुभव है। ‘नेटवर्क18’ से पहले वह ‘Bates Worldwide’, ‘Rediffusion’, ‘Madison’, ‘Rediff.com’ और ‘LK Saatchi & Saatchi’ जैसी कंपनियों में प्रमुख जिम्मेदारियां निभा चुके हैं।

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