होम / इंडस्ट्री ब्रीफिंग / CCI की बड़ी कार्रवाई, इंडस्ट्री बॉडीज पर कार्टेलाइजेशन के आरोपों की जांच शुरू: रिपोर्ट
CCI की बड़ी कार्रवाई, इंडस्ट्री बॉडीज पर कार्टेलाइजेशन के आरोपों की जांच शुरू: रिपोर्ट
CCI ने इंडियन सोसाइटी ऑफ ऐडवर्टाइजर्स, ऐडवरटाइजिंग एजेंसीज एसोसिएशन ऑफ इंडिया व इंडियन ब्रॉडकास्टिंग एंड डिजिटल फाउंडेशन जैसे प्रमुख उद्योग निकायों की एडवाइजरी और दिशानिर्देशों की जांच शुरू की है।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 10 months ago
विज्ञापन उद्योग में सांठगांठ की जांच, CCI ने कसा शिकंजा
भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ने इंडियन सोसाइटी ऑफ ऐडवर्टाइजर्स (ISA), ऐडवरटाइजिंग एजेंसीज एसोसिएशन ऑफ इंडिया (AAAI) और इंडियन ब्रॉडकास्टिंग एंड डिजिटल फाउंडेशन (IBDF) जैसे प्रमुख उद्योग निकायों (इंडस्ट्री बॉडीज) की एडवाइजरी और दिशानिर्देशों की जांच शुरू की है। आयोग यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि क्या कहीं इन संगठनों ने मार्केट में सांठगांठ (कार्टेलाइजेशन) कर प्रतिस्पर्धा को प्रभावित तो नहीं किया। यानी, क्या उन्होंने मिलकर ऐसे नियम तो नहीं बनाए, जिससे कुछ कंपनियों को फायदा हुआ और बाकी को नुकसान पहुंचा।
बता दें कि CCI ने अगस्त 2024 में एक आदेश जारी किया था, जिसमें उसके महानिदेशक को इस मामले की जांच करने का अधिकार दिया गया था। यह आदेश तब आया जब नियामक को विज्ञापन क्षेत्र में संभावित सांठगांठ (कार्टेलाइजेशन) को लेकर कई शिकायतें मिलीं।
जांच को आगे बढ़ाते हुए, CCI ने 18 और 19 मार्च को कई मीडिया कंपनियों और उद्योग निकायों के दफ्तरों पर छापे मारे और महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए। रिपोर्ट के अनुसार, CCI ने फरवरी में दिल्ली की एक अदालत से छापेमारी की मंजूरी लेने के लिए आवेदन किया था। इस दौरान आयोग ने बताया कि आरोप इन निकायों की नीतियों, दिशानिर्देशों और सलाहकारों से जुड़े हैं, जिनका प्रभाव पूरी आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) पर पड़ सकता है।
CCI का मानना है कि ये उद्योग निकाय अपने सदस्यों के व्यावसायिक हितों को सुरक्षित करने के लिए मॉडल समझौतों (Model Agreements) के रूप में दिशानिर्देश और सलाहकार तैयार कर सकते हैं।
जांच के तहत, ISA के मॉडल एजेंसी एग्रीमेंट की विशेष रूप से समीक्षा की जा रही है। आरोप है कि ISA ने 3 अगस्त 2023 को यह मॉडल समझौता लॉन्च किया था, जिसने विज्ञापनदाताओं और एजेंसीज के बीच स्वतंत्र बातचीत की संभावनाओं को सीमित कर दिया। इससे एजेंसीज की आय प्रभावित हुई।
इसका जवाब देते हुए, AAAI ने 30 अगस्त 2023 को मीडिया एजेंसी रेम्यूनरेशन गाइडलाइंस जारी कीं, जिसमें पारंपरिक और डिजिटल विज्ञापन के लिए न्यूनतम कमीशन और प्रोत्साहनों की सीमा तय कर दी गई। साथ ही, फीस आधारित सेवाओं के लिए एक फॉर्मूला भी तैयार किया गया।
सितंबर 2023 में, IBDF ने मीडिया अकाउंट ट्रांजिशन को लेकर एक एडवाइजरी जारी की। इसमें कहा गया कि कोई भी एजेंसी विज्ञापनदाताओं को मौजूदा चैनल दरों पर स्वतंत्र रूप से छूट नहीं दे सकती। इसके अलावा, नया एजेंसी पार्टनर यह सुनिश्चित करेगा कि IBDF के सदस्यों को किसी भी नुकसान, हानि या लागत की भरपाई की जाएगी, जो चैनल दरों पर एकतरफा छूट देने के कारण हो सकती है।
CCI ने यह भी आरोप लगाया है कि AAAI और IBDF ने एक संयुक्त उप-समिति (Sub-Committee) बनाई, जो कुछ खास क्लाइंट्स से भुगतान वसूलने और IBDF की प्रक्रियाओं को हर महीने लागू करने के लिए बनाई गई थी।
कुछ मीडिया एजेंसीज ने CCI की सहयोग नीति (Leniency Scheme) के तहत सामने आकर सबूत दिए हैं, जिससे उन्हें संभावित दंड से छूट मिल सकती है।
रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि CCI की जांच कुछ बड़ी एजेंसीज की वजह से शुरू हुई, जिन्होंने बड़े विज्ञापनदाताओं के खाते अपने नियंत्रण में ले लिए। इन एजेंसीज ने अपने क्लाइंट्स को टीवी विज्ञापनों के स्लॉट अपने प्रतिस्पर्धियों से सस्ती दरों पर देने का वादा किया, जिससे उन्होंने मार्केट में अपनी पकड़ मजबूत कर ली। इसके बदले में, प्रसारकों (Broadcasters) को इन एजेंसीज द्वारा मैनेज किए गए क्लाइंट्स से ज्यादा विज्ञापन निवेश मिला।
CCI की इस कार्रवाई से मीडिया और विज्ञापन इंडस्ट्री में हलचल मच गई है। अब यह देखना होगा कि आयोग की जांच क्या नतीजे लेकर आती है और इससे विज्ञापन क्षेत्र की प्रतिस्पर्धा पर क्या प्रभाव पड़ता है।
टैग्स