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ऋद्धिमान साहा विवाद में पत्रकार बोरिया मजूमदार दोषी करार, लग सकता है 2 साल का बैन
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) क्रिकेट इतिहासकार, पत्रकार और बायोग्राफी राइटर बोरिया मजूमदार के खिलाफ 2 साल का बैन लगा सकता है।
समाचार4मीडिया ब्यूरो 3 years ago
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) क्रिकेट इतिहासकार, पत्रकार और बायोग्राफी राइटर बोरिया मजूमदार के खिलाफ 2 साल का बैन लगा सकता है। मजूमदार पर विकेटकीपर बल्लेबाज ऋद्धिमान साहा को इंटरव्यू के नाम पर धमकाने का आरोप है लेकिन अब जांच के बाद बीसीसीआई की तीन सदस्यीय समिति ने भारतीय विकेटकीपर बल्लेबाज रिद्धिमान साहा को धमकाने के मामले में मजूमदार को दोषी पाया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मजूमदार को अब भारत के स्टेडियम्स में ना तो प्रवेश करने दिया जाएगा और ना ही उसे खिलाड़ियों से मिलने दिया जाएगा। साहा ने इस साल फरवरी में सोशल मीडिया पर एक पोस्ट किया था, जिसमें उन्होंने इंटरव्यू नहीं देने के लिए पत्रकार से धमकी मिलने का आरोप लगाया था।
बीसीसीआई के एक सीनियर अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर इंडियन एक्सप्रेस से कहा, ' हम भारतीय क्रिकेट बोर्ड की सभी राज्य इकाइयों को उन्हें स्टेडियम के अंदर नहीं जाने देने की सूचना देंगे। उन्हें घरेलू मैचों के लिए मीडिया एक्रेडिशन नहीं दी जाएगी और हम उन्हें ब्लैकलिस्ट करने के लिए आईसीसी को भी पत्र लिखेंगे। खिलाड़ियों को उनके साथ काम नहीं करने के लिए कहा जाएगा।'
मीडिया में यह मामला तब प्रकाश में आया था, जब गुजरात टाइटंस के विकेटकीपर बल्लेबाज ऋद्धिमान साहा ने इस साल 19 फरवरी को एक स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए लिखा था कि भारतीय क्रिकेट में इतना योगदान देने के बाद मुझे एक तथाकथित रिस्पेक्टेड पत्रकार से ये सब झेलना पड़ रहा है। हमारे देश में पत्रकारिता कितने न्यूनतम स्तर पर पहुंच गई है। साहा ने इस दौरान मजूमदार के स्क्रीन शॉट्स शेयर किए थे।
इस स्क्रीन शॉट्स में लिखा था, 'तुमने मुझे कॉल नहीं किया। मैं दोबारा कभी तुम्हारा इंटरव्यू नहीं करूंगा। मैं अपमान का घूंट आसानी से नहीं पीता। मैं इस चीज को हमेशा याद रखूंगा।' टीम इंडिया के पूर्व कोच रवि शास्त्री समेत कई पूर्व खिलाड़ियों ने बीसीसीआई से मामले का संज्ञान लेने की अपील की थी।
सोशल मीडिया के जरिए मामला सामने आने के बाद बीसीसीआई ने उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला, ट्रेजरर अरुण धूमल और एपेक्स काउंसिल मेंबर प्रभतेज भाटिया के रूप में 3 सदस्यीय जांच समिति का गठन किया था।
कमेटी के सामने आकर साहा ने मजूमदार को पहचाना और धमकाने के आरोप लगाए। हालांकि अपने बचाव में मजूमदार ने कहा था कि स्क्रीन शॉट्स के साथ छेड़छाड़ की गई है।
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